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सालभर बाद शुरू हुए MPPSC सहायक प्राध्यापक इंटरव्यू, समाजशास्त्र व अर्थशास्त्र के लिए दो पैनल गठित

इंदौर सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा 2022 के तहत समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र विषय की परीक्षा पिछले साल करवाई गई। लगभग एक वर्ष के इंतजार के बाद अब चयनित उम्मीदवारों के लिए मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू की है। उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने के कारण आयोग ने साक्षात्कार के लिए दो पैनल गठित किए हैं। 11 सितंबर से समाजशास्त्र और 22 सितंबर से अर्थशास्त्र विषय के साक्षात्कार प्रारंभ होंगे। उम्मीदवारों को इसके लिए आनलाइन एडमिट कार्ड जारी किए जा रहे हैं। आयोग ने सितंबर का विस्तृत शेड्यूल जारी किया है, जिसमें चार साक्षात्कार और दो परीक्षाएं शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक कुछ परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की संख्या कम होने से परीक्षा केंद्र इंदौर में रखने पर विचार किया जा रहा है।   समाजशास्त्र के 80 पदों पर चयनित हैं 305 उम्मीदवार सरकारी महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए आयोग ने अगस्त 2024 में परीक्षा का दूसरा चरण आयोजित किया था। चार अगस्त को 16 विषयों की परीक्षा हुई, जिनमें समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र भी शामिल थे। समाजशास्त्र विषय के लिए 80 पदों पर 305 उम्मीदवार चयनित हुए हैं। इनमें 43 सामान्य, छह अनुसूचित जाति (एससी), सात अनुसूचित जनजाति (एसटी), 18 अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और छह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के पद शामिल हैं। समाजशास्त्र विषय के साक्षात्कार 11 सितंबर से शुरू होंगे और इन्हें आठ दिनों में पूरा किया जाएगा। प्रतिदिन 30 से 35 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। अर्थशास्त्र के 104 पदों पर 372 उम्मीदवारों का चयन आयोग 22 सितंबर से अर्थशास्त्र विषय की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। इस विषय के लिए 104 पदों पर 372 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। इनमें 44 अनारक्षित, 26 एसटी, सात एससी, 20 ओबीसी और सात ईडब्ल्यूएस के पद शामिल हैं। अभ्यर्थियों को 15 सितंबर के बाद प्रवेश पत्र दिए जाएंगे। आयोग ने उम्मीदवारों को साक्षात्कार से एक घंटे पहले कार्यालय में रिपोर्टिंग करने के निर्देश दिए हैं। सहायक निदेशक पदों के साक्षात्कार दो-तीन दिनों में होंगे पूर्ण सहायक निदेशक उद्यान-2023 की परीक्षा 23 मार्च को हुई थी। इसके परिणाम 21 मई को जारी किए गए, जिनमें 10 पदों के लिए 28 मुख्य और सात प्रावधिक उम्मीदवार शामिल हुए। आयोग ने इसके साक्षात्कार आठ सितंबर को निर्धारित किए हैं। अधिकारियों के अनुसार अभ्यर्थियों की संख्या कम होने से साक्षात्कार दो-तीन दिन में पूरे कर लिए जाएंगे। सरकारी अस्पतालों में भर्ती साक्षात्कार नौ को प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में ईएनटी विशेषज्ञों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। इनकी भर्ती के लिए स्वास्थ्य विभाग ने दिसंबर 2024 में अधिसूचना जारी की थी। कुल 16 पदों में चार अनारक्षित, तीन एससी, पांच एसटी और दो-दो ओबीसी व ईडब्ल्यूएस पद शामिल हैं। आयोग ने इन पदों के लिए साक्षात्कार नौ सितंबर को निर्धारित किए हैं। 100 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, इसलिए साक्षात्कार प्रक्रिया दो पैनलों द्वारा करवाई जाएगी। खनिज अधिकारी की परीक्षा 28 को खनिज साधन विभाग ने लगभग दो वर्ष बाद खनिज अधिकारी के रिक्त पदों पर भर्ती निकाली है। 30 दिसंबर 2024 को आयोग ने 10 पदों के लिए अधिसूचना जारी की थी। आवेदन 28 दिसंबर 2024 से 31 जनवरी 2025 तक स्वीकार किए गए। अब आठ महीने के इंतजार के बाद अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा 28 सितंबर को होगी। यह परीक्षा आफलाइन ओएमआर शीट पर होगी। उम्मीदवार 15 सितंबर के बाद अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे।

मंदिर के सामने दुकान में लगी आग से मची अफरातफरी, दमकल ने दो घंटे बाद बुझाई लपटें

छिंदवाड़ा छोटी बाजार स्थित बड़ी माता मंदिर के सामने रात के 11 बजे करीब अहिंसा टेंट सप्लायर की दुकान में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आज ने विकराल रूप ले लिया। दुकान को अपने चपेट में ले लिया। सूचना मिलते ही मौके पर एसडीएम सुधीर जैन, नगर अमला और पुलिस विभाग पहुंच गया। आग बुझाने के लिए नगर निगम अमला को कड़ी मशक्कत करना पड़ी। तकरीबन चार दमकलों से आग पर काबू पाया गया। इस दौरान इस मार्ग से निकल रही मूर्तियों को रोककर अन्य रास्ते से निकाला गया। घटना के बारे में एसडीएम ने बताया की आग से लाखों का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। आग लगने का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाया है, जांच के बाद ही आग लगने की वजह स्पष्ट होगी।   आसपास की दुकानों में भी लग सकती थी आग दुकान में लगी आग ने धीरे-धीरे विकराल रूप ले लिया था, इस दौरान आसपास के दुकान और मकान मालिकों को इस बात का डर सता रहा था कि कहीं आग उनकी दुकान को अपनी चपेट में ना ले ले। हालांकि नगर निगम के अमला ने 2 घंटे की कड़ी में मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया।

वैवाहिक विवाद से वारदात: मध्यप्रदेश में पत्नी और प्रेमी ने रची हत्या की साजिश, कुएं में मिली लाश

अनूपपुर कोतवाली अनूपपुर पुलिस द्वारा ग्राम सकरिया में भैयालाल रजक (60 वर्ष) की रविवार को अपने घर के पीछे खेत के कुएं में बोरे और कंबल से लिपटी एवं साड़ियों से बंधी मिली लाश के मामले में अंधे हत्याकांड का खुलासा शुक्रवार को किया। इस मामले में भैयालाल की पत्नी एवं दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। यह वारदात अवैध संबंध और पति की पूरी संपत्ति हड़पने के इरादे से हुई। यह था मामला जानकारी अनुसार 31 अगस्त को गुड्डी पति भैयालाल रजक उम्र करीब 42 साल निवासी जैतहरी अनूपपुर के द्वारा थाना कोतवाली पहुंचकर सूचना दी गई थी कि ग्राम सकरिया में पति भैयालाल रजक का शव घर के पीछे खेत में बने कुएं के पानी में दिखा है। सूचना के बाद एसडीओपी अनूपपुर सुमित केरकेट्टा, टीआई कोतवाली अरविन्द जैन, एफएसएल वैज्ञानिक अधिकारी डॉक्टर प्रदीप अहिरवार, फिन्गर प्रिन्ट विशेषज्ञ उपनिरीक्षक गिरजा शंकर गौतम शहडोल, एसडीआरएफ के प्लाटून कमाण्डर रामनरेश भवेदी, पुलिस डाग वीरा ट्रेकर के साथ घटनास्थल पहुंचकर कुएं से मृतक भैयालाल रजक का शव बरामद किया था।   मर्ग कायम कर मामले को जांच में लिया गया। बताया गया उक्त शव जूट के बोरे एवं कंबल में लिपटा हुआ और जूट की रस्सी एवं दो साड़ियों से बंधा हुआ था। भैयालाल रजक के सिर पर पीछे की ओर गहरी चोट से गहरा घाव होना पाया गया था। जिला चिकित्सालय अनूपपुर में पीएम कराए जाने पर रिपोर्ट में भैयालाल रजक की मृत्यु सिर पर आई गंभीर चोट से होना पाए जाने पर थाना कोतवाली में अज्ञात आरोपितों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था। अवैध संबंध और भैयालाल की संपत्ति हड़पने वारदात बनी वजह इस घटना में पुलिस उपमहानिरीक्षक शहडोल रेंज शहडोल सविता सोहाने एवं पुलिस अधीक्षक अनूपपुर मोती उर रहमान द्वारा भी घटनास्थल का निरीक्षण एवं आसपास के लोगों से पूछताछ कर जांच टीम को निर्देश दिए गए। पुलिस टीम द्वारा गहन छानबीन एवं साक्ष्य संकलन पर मृतक भैयालाल रजक की तीसरी पत्नी मुन्नी उर्फ विमला रजक 38 वर्ष निवासी ग्राम सकरिया, उसके प्रेमी लल्लू उर्फ नारायण दास पिता राममनोहर कुशवाहा उम्र करीब 48 वर्ष निवासी वार्ड 13 पुरानी बस्ती अनूपपुर एवं घर पर काम करने वाले मजदूर धीरज पिता समयलाल कोल उम्र करीब 25 वर्ष निवासी ग्राम सकरिया कोतवाली अनूपपुर को धारा 103(1),238,61(2) बीएनएस के तहत गिरफ्तार किया है। पुलिस के द्वारा अंधी हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि भैयालाल रजक की तीन शादियां हुई है। पहली पत्नी ग्राम मझगवां जिला शहडोल की शादी के कुछ दिनों बाद ही छोड़कर चली गई थी। वर्तमान में भैयालाल रजक की दो पत्नियां है, पहली पत्नी गुड्डी बाई को कोई संतान ना होने से भैयालाल रजक ने गुड्‌डी बाई की छोटी बहन मुन्नी बाई रजक से भी शादी कर ली थी, जिससे भैयालाल रजक को दो संतान है। उसकी ग्राम सकरिया एवं परसवार में कीमती पैतृक जमीन है, जिसको विक्रय कराने के लिए दलाल लल्लू उर्फ नारायण दास कुशवाहा का पिछले चार-पांच वर्ष से भैयालाल रजक के घर पर आना जाना होता था। इसी बीच मुन्नी बाई रजक का लल्लू उर्फ नारायणदास कुशवाहा से प्रेम संबंध हो गया, जिसके चलते शनिवार 30 अगस्त को मुन्नी बाई ने लल्लू उर्फ नारायणदास और घर पर काम करने वाले मजदूर धीरज कोल के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई। वह जैतहरी अपनी बड़ी बहन गुड्डी रजक के पास चली जाएगी। जब रात में घर पर अकेले भैयालाल रजक रहेगा, तो उसकी हत्या की जाएगी, जिसके बाद वह लल्लू उर्फ नारायणदास कुशवाहा से शादी कर लेगी।  

मध्यप्रदेश में बढ़ा धान का रकबा, लेकिन यूरिया की कमी से जूझ रहे किसान

सतना इस खरीफ सीजन की बुवाई के बाद यूरिया की मांग में भारी वृद्धि देखी जा रही है। इसका प्रमुख कारण दलहन फसलों की जगह धान की खेती के रकबे में लगातार बढ़ोतरी है। साथ ही धान को सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने से भी इसके प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। इस तरह एक तरफ धान की बढ़ती बुवाई ने यूरिया की खपत बढ़ा दी, वहीं दूसरी तरफ इस वर्ष देश में यूरिया का उत्पादन सीमित रहा और आयात की मात्रा भी हर साल घटती जा रही है। सरकार हर वर्ष दलहन व तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए अनुमानित लक्ष्य तय करती है, लेकिन किसानों की रुचि गेहूं व धान की फसलों की ओर ज्यादा है। यही वजह है कि एक बोरी यूरिया के लिए किसान रात-रात भर लंबी कतारों में लगा रहता है।   धान का रकबा 35 लाख हेक्टेयर केंद्रीय कृषि कल्याण एवं विकास विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में धान का क्षेत्रफल इस बार 1039.81 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 1002.41 लाख हेक्टेयर था। यानी लगभग 37 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं दलहन का रकबा बहुत मामूली बढ़ा है। इस बार दलहन फसलों का कुल क्षेत्रफल 109.52 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष से केवल 1.14 लाख हेक्टेयर अधिक है। मूंग और उड़द में हल्की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अरहर में 1.34 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई है। धान में यूरिया की होती है अधिक खपत कृषि विभाग सतना के उपसंचालक आशीष पांडे बताते हैं कि दलहन फसलों में यूरिया की आवश्यकता बहुत कम होती है, क्योंकि वे स्वयं नाइट्रोजन का स्रोत होती हैं। इसके विपरीत धान की बुवाई और जर्मिनेशन के दौरान यूरिया की भारी मात्रा में जरूरत होती है। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां के विज्ञानी डॉ. अखिलेश कुमार का कहना है कि किसानों को धान और गेहूं की जगह दलहन व तिलहन फसलों की ओर ध्यान देना चाहिए। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी, बल्कि खाद की समस्या से भी राहत मिलेगी। हालांकि, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान व गेहूं की सरकारी खरीद होने से किसान इन्हीं फसलों पर निर्भर हैं। यूरिया का आयात घटा, आपूर्ति में कमी     हर साल यूरिया और डीएपी की मांग बढ़ती जा रही है, जबकि उत्पादन और आयात दोनों घट रहे हैं।     आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, बीते चार वर्षों में भारत में आयातित यूरिया की मात्रा में लगातार गिरावट आई है।     इसकी वजह वैश्विक भी हो सकती है। चीन, सऊदी अरब, ओमान से यूरिया आयात होता है। तिलहन फसलों में गिरावट दलहन की तरह तिलहन फसलों का रकबा भी घटा है। इस बार तिलहनों की बुवाई 178.64 लाख हेक्टेयर दर्ज हुई, जो पिछले वर्ष से 6.74 लाख हेक्टेयर कम है। सोयाबीन और मूंगफली जैसी प्रमुख तिलहन फसलों में गिरावट देखी गई है।

खतरनाक खुलासा! मंडला में विस्फोटकों का गुप्त जखीरा मिला, बच्चों और ग्रामीणों की जान पर मंडराया खतरा

बालाघाट सर्चिंग के दौरान जवानों को अक्सर नक्सली डंप में डेटोनेटर, जिलेटिन जैसे घातक विस्फोटक मिलते आए हैं, लेकिन नक्सलियों तक ये विस्फोटक कैसे और किस माध्यम से पहुंच रहे हैं, पुलिस इसकी तफ्तीश में जुटी है। जांच की कड़ी को जोड़ते हुए बालाघाट पुलिस मंडला के बीजाडांडी अंतर्गत डूंगरिया के जंगल में खेत पर बने उस गोदाम तक पहुंची है, जिसके संचालन में सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही थी। 2023 में स्थापित इस गोदाम में भारी मात्रा में एक्सपायर हो चुका विस्फोटक भंडारित मिला है। विस्फोटक अधिनियम के जो सुरक्षा नियम होते हैं, उन नियमों का यहां पालन नहीं हो रहा था। गोदाम, लावारिस हालात में है, जहां पुलिस को न सुरक्षा गार्ड मिला, न सीसीवीटी कैमरे, न ही बाउंड्रीवाल। दो साल में ही खंडहर में बदल चुके इस गोदाम के चारों तरफ झाड़ियां हैं। डीएसपी (हाकफोर्स) आशीष पटेल ने बताया कि गोदाम से महज 300 मीटर की दूरी पर स्कूल है। डेढ़ किमी पर गांव है।   बगैर सुरक्षा के भारी मात्रा में रखा विस्फोटक कभी भी बड़ी घटना का कारण बन सकता था। नक्सली, गोदाम लूट भी सकते थे। इसलिए पुलिस ने गोदाम को सील किया है। पुलिस ने नर्मदा इंटरप्राइजेस के मालिक तथा लाइसेंस धारक हरजिंदर सिंह गुजराल, मैनेजर प्रदीप झारिया और गार्ड प्रमोद कुमार दाहिया से पूछताछ शुरू कर दी है। बता दें कि गोदाम में 3075 किलो जिलेटिन, 6995 नग डेटोनेटर, समेत अन्य घातक विस्फोटक हैं, जिसे सील कर दिया गया है। नागपुर की सोलर इंडस्ट्री से मांगी डीलरों की लिस्ट पुलिस जानकारी के अनुसार, 2023 से नर्मदा इंटरप्राइजेस डीलर के रूप में बोरवेल खनन, स्टोन क्रशर कंपनी, माइंस या अन्य ब्लास्टिंग करने वाले कंपनियों को विस्फोटक बेचता आ रहा है। नर्मदा इंटरप्राइजेस में नागपुर की सोलर इंडस्ट्री से विस्फोटकों की खरीदारी होती है। सोलर इंडस्ट्री बड़ी फर्म है, जो मप्र सहित महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे राज्यों में विस्फोटकों की वैध तरीके से सप्लाई करती है। पुलिस ने सोलर इंडस्ट्री से भी पत्राचार कर उन डीलर की सूची मांगी है, जिसे विस्फोटकों की सप्लाई की जाती है। जांच में सामने आया है कि नर्मदा इंटरप्राइजेस मंडला में तीन विक्रेताओं को विस्फोटक क्रय करता है। इसमें कुलदीप गुप्ता, दादा थनथनपाल स्टोन क्रशर और हीरक इन्फ्रा माइन है। अब मंडला प्रशासन की निगरानी में गोदाम बालाघाट पुलिस की सीलबंद कार्रवाई के बाद गोदाम की निगरानी अब मंडला जिला प्रशासन के अधीन है। अब बड़ा सवाल खड़ा एक्सपायर हो चुके इन विस्फोटकों को किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाएगा या नहीं। डीएसपी पटेल ने बताया कि इस संबंध में नागपुर की सोलर इंडस्ट्री और पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी आर्गनाइजेशन (पीईएसओ) से संपर्क कर गोदाम में भंडारित विस्फोटकों को लेकर निर्णय लिया जाएगा। दस्तावेजों की जांच से स्पष्ट हुआ है कि नर्मदा इंटरप्राइजेस द्वारा खपत से अधिक विस्फोटक भंडारित किया गया है। पुलिस इसी बिंदू पर जांच करेगी कि आखिर खपत से अधिक विस्फोटक रखने का मकसद क्या है। कल आठ सितंबर को गढ़ी पुलिस जांच से जुड़े अन्य तथ्य जुटाएगी। मंडला के बाद अब जबलपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्ना में भी जांच होगी। बालाघाट में एचसीएल, मायल व अन्य माइंस सीधे कंपनी से विस्फोटक खरीदते हैं। गोदाम में सोलर प्राइम गोल्ड, इको पावर सोलर, डेटोनेटर, जिलेटिन, सोलर कोर्ड हैं। एक्सपायर विस्फोटक हो सकता है घातक विस्फोटक अधिनियम के अनुसार विस्फोटकों के उपयोग की निश्चित वैधता होती है। वैधता समाप्त होने के बाद आमतौर पर विस्फोटक का प्रभाव कम होता है, लेकिन कई बार ये घातक भी हो सकते हैं। इनके रख-रखाव में चूक या विद्युतीकरण से संपर्क में आने से विस्फोटक में ब्लास्ट भी हो सकता है। इसलिए एक्सपायर हो चुके विस्फोटक हमेशा के लिए निष्क्रिय या प्रभावहीन हो गए हैं, ऐसा आंकलन करना, जानलेवा भूल हो सकती है।

शिप्रा नदी त्रासदी: कार डूबने से TI और SI के शव बरामद, महिला आरक्षक की खोज जारी

उज्जैन उज्जैन में शिप्रा के बड़े पुल से शनिवार रात 9. 30 बजे एक कार नीचे नदी में गिर गई थी। कार में उन्हेल टीआई अशोक शर्मा, एसआई मदनलाल निनामा और एक महिला आरक्षक आरती पाल बैठे थे। 11 घंटे चले रेस्क्यू के बाद टीआई शर्मा का शव मंगलनाथ क्षेत्र से मिला है। वहीं भैरवगढ़ क्षेत्र में एसआई निनामा का शव मिला है। महिला आरक्षक की तलाश जारी है। एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि ग्राम गुराड़िया सांग से एक महिला लापता हुई थी। इसकी तलाश में उन्हेल टीआई अशोक शर्मा, एसआई निनामा और महिला आरक्षक चिंतामण क्षेत्र की ओर जा रहे थे। इस दौरान शिप्रा नदी का बड़ा पुल पार करते समय कार नीचे गिर गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू शुरू किया। शिप्रा के बढ़े हुए जलस्तर, तेज बहाव और मटमैले पानी के कारण रेस्क्यू में परेशानी हुई।    लगातार सर्चिंग अभियान के बीच रविवार सुबह उन्हेल टीआई और दो अन्य पुलिसकर्मियों के मोबाइल बंद मिले। इनकी आखिरी लोकेशन घटनास्थल के पास पाई गई। इस बीच मंगलनाथ के समीप शिप्रा नदी में पुलिस यूनिफार्म में एक शव मिला। शव उन्हेल टीआइ अशोक शर्मा का है। इसके बाद एसआई का शव मिला। सर्चिंग में दो ड्रोन भी लगाए गए हैं देर रात कार नदी में गिरने की सूचना मिलने पर महाकाल टीआई गगन बादल व होमगार्ड के जवान मौके पर पहुंचे गए थे। रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है। सर्चिंग के लिए दो ड्रोन भी लगाए गए हैं। टीआई बादल ने बताया कि शनिवार रात को बड़नगर रोड पर शिप्रा नदी पर बने बड़े पुल से एक कार गिरने की सूचना मिली थी। कार सवार लोग चक्रतीर्थ की ओर से कार्तिक मेला मैदान तरफ जाते समय पुल पर रैलिंग नहीं लगी होने के कारण कार सीधे नदी में गिर गई। जिले व आसपास के क्षेत्रों में कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण शिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। पुलिस का कहना है कि गोताखोरों की मदद से कार निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। एक दिन पहले ही पुल पर निरीक्षण करने पहुंचे थे एसपी     शुक्रवार रात को ही पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा बड़े पुल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने 24 घंटे पुलिस बल तैनात रहने के निर्देश दिए थे।     जिससे किसी भी आपात स्थिति में आमजन को तत्काल सहायता उपलब्ध हो सके। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के पास प्राथमिक उपचार किट एवं लाइफ जैकेट भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहे।     पुलिस टीम द्वारा नियमित पेट्रोलिंग करते हुए स्थिति पर सतत निगरानी रखने को भी कहा था। वहीं आवश्यक बैरिकेडिंग एवं सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए थे।     इसके अतिरिक्त, वर्षा एवं बाढ़ जैसी परिस्थितियों में रेस्क्यू कार्यवाही के लिए पुलिसकर्मियों को रस्सी, टार्च एवं वायरलेस सेट उपलब्ध कराने को कहा था।

बाढ़ से जूझते पंजाब के लिए MP में जुटी मदद, अशोकनगर सिख समाज ने प्रभावितों को दिया योगदान

अशोकनगर  उत्तर भारत में मानसून ने तबाही मचा रखी है। पूरा पंजाब बाढ़ और तबाही से जूझ रहा है। हजारों परिवार बर्बाद हो गए हैं। केंद्र और स्थानीय सरकार तो मदद कर ही रही है। की सिख समाज ने भी बाढ़ग्रस्त इलाके के दुखी और बेघर लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। पहल अशोकनगर सिख समाज ने की है, जिसने अभी तक 35 लाख एकत्रित कर लिए हैं। जल्द ही यहां से एक प्रतिनिधि मंडल पंजाब जाकर मदद देगा। देश के पंजाब में तेज बारिश से आई बाढ़ मे तबाह हुए लोगों के लिए अब जिले की सिख समाज आगे आई है जहां समाज के द्वारा ग्राम ग्राम जाकर सिख समाज के लोगों से धनराशि एकत्रित की जा रही है वहीं गुरुद्वारों से भी पंजाब के लोगों की मदद के लिए मदद मांगी गई तो महज चार दिन में ही 35 लाख रुपए इकट्ठे हो गए। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों पंजाब में आई बाढ़ के बाद कई जिलों में हालात बेहद खराब हैं। बाढ़ न केवल किसानों की फसलें बल्कि घर और मवेशी के साथ जान माल का भी भारी नुकसान हुआ है। कई इलाकों का पानी तो अभी उतरा भी नहीं है, जिसके बाद पंजाब की इस दुख की घड़ी में मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की सिख समाज आगे आई है। पंजाब में बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए पैसा एकत्र किया जा रहा है। सिख समाज के लोग सामूहिक रूप से गांव गांव तक पहुंच रहे हैं। सिख परिवार एवं गुरुद्वारे से भी मदद मांग रहे हैं जिसके चलते लोगों ने दिल खोल कर दान दिया है। मदद लेकर समाज के लोग पंजाब जाएंगे सिख समाज के लोगों के अनुसार पंजाब में बाढ़ पीड़ितों के लिए चार दिन पहले ही यह अभियान शुरू किया था, जिसके बाद लोगों ने खूब सहयोग मिला और चार दिन के अंदर ही 35 लाख रुपए एकत्रित कर लिए हैं। बताया जा रहा है कि यह अभियान 7 दिन और चलाया जाएगा और एक बड़ी धनराशि एकत्रित कर सिख समाज के 25 से 30 लोग पंजाब जाएंगे। वहां स्थानीय प्रशासन से मिलकर वास्तविक नुकसान वाले पीड़ित परिवारों के लिए यह धनराशि दी जाएगी, फिर चाहे वह किसी भी समाज या धर्म के लोग हो।

सरकारी जमीन पर अतिक्रमण: मंत्री का सख्त ऐलान, होगी सख्त कार्रवाई

भोपाल  शहर में शासकीय भूमि पर पक्के स्थायी निर्माण कर लाभ कमाने वाले भूमाफिया तो जेल जाएंगे ही, साथ ही जिन अधिकारियों के संरक्षण में ये पनप रहे हैं वह भी नपेंगे।पिछले दिनों कोकता ट्रांसपोर्ट नगर और हथाईखेड़ा डैम के आसपास स्थित पशुपालन विभाग की 99 एकड़ जमीन के सीमांकन में 80 से अधिक पक्के अतिक्रमण मिले थे। यदि समय रहते विभाग सीमांकन करवाता और प्रशासन, नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी खसरा, खतौनी, बंटान आदि दस्तावेजों की जांच करवाते तो करोड़ों की जमीन पर कब्जे नहीं होते।ऐसे में इन अवैध कब्जों के लिए SDM, तहसीलदार, आरआइ, पटवारी सहित अन्य अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। अब उनकी जांच होनी चाहिए और दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई की जानी चाहिए। यह बात प्रदेश के पशुपालन मंत्री लखन पटेल और भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कही है। गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा की टीम द्वारा पशुपालन विभाग की 99 एकड़ जमीन का सीमांकन किया गया तो यहां पर करीब सात एकड़ से अधिक जमीन पर अतिक्रमण निकला।इसमें नगर निगम की 50 दुकानें, एसटीपी प्लांट आदि भी विभाग की जमीन पर बनाए गए हैं। ये दुकानें तत्कालीन निगमायुक्त केवीएस चौधरी कोलसानी के समय पर बनवाई गईं थीं। तब तत्कालीन भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया थे और प्रशासन ने सीमांकन कर जमीन नगर निगम को सौंपी थीं। विभाग की जमीन पर निगम की दुकानें आने के बाद से सवाल खड़े हो रहे हैं कि रिकार्ड में जब पशुपालन का रकबा था तो आरआइ, पटवारी ने किस आधार पर यह जमीन निगम की बता दी। ऐसे में अब दोनों विभागों के बीच नोकझोंक की स्थिति बनी हुई है। यही कारण है कि पशुपालन विभाग ने जिला प्रशासन को जमीन अतिक्रमणमुक्त करवाकर सौंपने के लिए कहा है। सभी अतिक्रमणकारियों को जारी होंगे नोटिस विभाग की जमीन पर पेट्रोल पंप, स्कूल, रिसार्ट, शादी हाल, फार्म हाउस, 20 मकान, 50 दुकान, एसटीपी प्लांट, डायमंड सिटी, कोर्टयार्ड प्राइम, कोर्टयार्ड कस्तूरी, राजधानी परिसर आदि का अतिक्रमण है। इन सभी को तहसीलदार द्वारा संभवत: प्रकरण बनाकर सोमवार से नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस सीमा के दौरान यदि ठोस दस्तावेज न्यायालय में नहीं दिए गए तो पक्के निर्माणों को तोड़ने की कार्रवाई प्रशासन द्वारा की जाएगी। निगम की 100 एकड़ से ज्यादा जमीन तत्कालीन निगमायुक्त केवीएस चौधरी कोलसानी ने बताया कि मेरे समय दुकानों का निर्माण कराया गया था, यह निगम की जमीन है। इसी से लगी हुई पशुपालन विभाग की जमीन है। अब सीमांकन में दुकानें उनकी जमीन में बताई गई हैं जो समझ नहीं आ रहा है। कोकता ट्रांसपोर्ट नगर में नगर निगम भोपाल के पास 100 एकड़ से अधिक जमीन और कई दुकानें हैं। आलोक शर्मा (भाजपा सांसद) ने कहा, वर्जन राजधानी में शासकीय जमीनों पर भूमाफिया ने जमकर कब्जे किए हैं और यह एक दो नहीं बल्कि 50 से 100 एकड़ में कब्जे हैं। मछली हो या मगरमच्छ सभी के कब्जे से शासकीय भूमि मुक्त करवाई जाएगी। वहीं, जिन एसडीएम, तहसीलदार, आरआइ, पटवारी के रहते यह सब अतिक्रमण हुए हैं, उनकी जांच होनी चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लखन पटेल (राज्यमंत्री, पशुपालन एवं डेयरी विभाग) ने बताया, कोकता ट्रांसपोर्ट नगर के पास स्थित पशुपालन विभाग की जमीन का सीमांकन पूरा कर लिया गया है। मुझे जानकारी मिली है यहां पर लोगों ने अतिक्रमण किए हैं। उनके दस्तावेज तक बनाए गए हैं। सभी बिंदुओं पर जांच कराई जा रही है। भूमाफिया पर कार्रवाई होगी, साथ ही अधिकारियों पर भी सख्ती बरती जाएगी।

भोपाल का ऐतिहासिक होटल अब 7-स्टार में विकसित, टेंडर प्रक्रिया शुरू

भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम का प्रतिष्ठित होटल लेक व्यू अशोका(Lake View Ashoka Hotel Bhopal) अब शहर के पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान बनाने जा रहा है। श्यामला हिल्स स्थित यह होटल, जो फिलहाल 3-स्टार श्रेणी में आता है। इसे अब 7-स्टार होटल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस बड़े प्रोजेक्ट को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर क्रियान्वित किया जाएगा, जिसके लिए टेंडर जारी हो चुके हैं। इस पहल का उद्देश्य भोपाल में लग्जरी पर्यटन को बढ़ावा देना और निगम के लिए राजस्व का एक स्थायी स्रोत सुनिश्चित करना है। निजी पार्टनर की तलाश एक साल से जारी होटल के इस महत्वाकांक्षी कायाकल्प के लिए पर्यटन निगम ने एक साल से प्राइवेट पार्टनर की तलाश कर रहा है। योजना के अनुसार पीपीपी मॉडल के तहत पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा, जिसमें पार्टनर होटल का विकास और संचालन करेगा, जबकि इसका मालिकाना हक पर्यटन निगम के पास ही रहेगा। 150 से अधिक होंगे रूम वर्तमान में 7.16 एकड़ में फैले इस होटल में 4 सुइट्स, 39 डीलक्स रुम, एक स्वीमिंग पूल और एक रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं हैं। 7-स्टार बनने के बाद इसमें 150 से अधिक रूम होंगे और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। यहां से बड़े तालाब का खूबसूरत नजारा दिखता है, जो इसे और भी खास बनाता है। स्पेशल पर्पज व्हीकल के निगरानी में होगा डेवलपमेंट यह निर्णय सात साल पहले ही किया गया था, जब होटल अशोक के शेयर निगम को ट्रांसफर किए गए थे। लेक व्यू अशोक के संचालन के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) कंपनी बनाई गई थी। इसी कंपनी के जरिए होटल के डेवलपमेंट की पूरी याजना को अंजाम दिया जाएगा। इसे लेकर निगम ने पूरा खाका तैयार कर लिया है। निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। इस प्रोजेक्ट को लेकर गुरुवार (5 सितंबर) को मंत्रालय में बैठक भी हुई। जल्द ही इस प्रस्ताव को कैबिनेट में पेश किया जाएगा। अभी 3 स्टार कैटेगरी में शामिल है होटल श्यामला हिल्स स्थित यह होटल फिलहाल 3 स्टार की कैटेगरी में शामिल है। यह 7.16 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें 4 सुइट, 39 डीलक्स रूम, स्वीमिंग पूल और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। होटल के कैंपस में एक बड़ा बैंक्वेट हॉल है, जिसमें 180 लोग एक साथ आ सकते हैं। साथ ही, होटल में 8135 मीटर बिल्ट अप का एरिया लेक व्यू रेसिडेंसी कैम्पस में मौजूद है। इसमें 82 लोग बैठ सकते हैं। बड़े तालाब के पास मौजूद होने के कारण यहां से बहुत ही शानदार नजारा देखने को मिलता है। वहीं इस नई योजना के बाद होटल लेक व्यू का भविष्य सुनहरा नजर आ रहा है। 40 साल पुराना है होटल अशोक होटल की शुरुआत 40 साल पहले लगभग 1985-86 के आसपास हुई थी। तब इसके लिए जमीन को 30 साल की लीज पर दिया गया था। होटल की शुरुआत के समय इसमें 51 प्रतिशत साझेदारी केंद्र सरकार की और 49 प्रतिशत शेयर मध्य प्रदेश सरकार के थे। बाद में मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से होटल की सारी इक्विटी खरीद ली थी। अब इसमें केंद्र सरकार की कोई साझेदारी नहीं है। होटल का लीज 2016 में समाप्त होने के बाद इसकी लीज की फाइल पेंडिंग चल रही थी। पांच साल पहले सरकार 350 करोड़ के बाजार मूल्य के साथ अशोक होटल को निजी हाथों में सौंपना चाहती थी लेकिन किसी प्राइवेट कंपनी ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी।  पहले भी हुई थी कोशिश यह पहला मौका नहीं है जब इस होटल को निजी हाथों में में सौंपने की कोशिश की गई हो। करीब 6 साल पहले भी इसे निजी कंपनियों को देने का प्रयास किया गया था। तब इसकी कीमत लगभग 350 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन उस समय कोई भी निजी कंपनी इसे लेने के लिए तैयार नहीं हुई थी। होटल लेक ब्यू अशोका वर्तमान में पूरी तरह से निगम के नियंत्रण में है। हाल ही में इस प्रोजेक्ट पर समीक्षा बैठक भी हुई थी।– डॉ. इलैया राजा टी. एमडी एमपी टूरिज्म

AIIMS भोपाल में शुरू हुई अत्याधुनिक छाती कैंसर इलाज सुविधा, मरीजों को अब लंबा सफर नहीं

भोपाल  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल ने कैंसर के इलाज में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के सर्जिकल आंकोलाजी विभाग में अब विशेष रूप से छाती के कैंसर (फेफड़ों और भोजन नली) के इलाज के लिए एक 'समर्पित थोरासिक आंकोलाजी सुविधा' शुरू की गई। अब मध्य भारत के कैंसर रोगियों के लिए यह सुविधा मिलती रहेगी, अब इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इस नई सुविधा की शुरुआत के साथ ही एक बेहद जटिल आपरेशन को अंजाम दिया गया है। डॉक्टरों ने एक मरीज की भोजन नली (इसोफेगस) के कैंसरग्रस्त हिस्से को निकाला। इसके बाद पेट के एक हिस्से से एक नई नली बनाकर उसे गले तक जोड़ा गया। यह पूरी सर्जरी दूरबीन और कैमरे वाली अत्याधुनिक थोरोस्कोपिक और लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की गई। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें मरीज को बड़े चीरे नहीं लगाए जाते, जिससे दर्द कम होता है और वह जल्दी ठीक हो पाता है। एम्स भोपाल का सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग पहले से ही मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों के लगभग 20 हजार कैंसर मरीजों का हर साल इलाज करता है। अब तक छाती से जुड़े जटिल कैंसर के ऑपरेशन के लिए मरीजों को दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता था, जो काफी खर्चीला और मुश्किल होता था। अब यह विश्वस्तरीय सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से हजारों मरीजों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। विशेषज्ञ नेतृत्व और मजबूत टीम इस महत्वपूर्ण पहल का नेतृत्व प्रो. डॉ. माधवानंद कर रहे हैं, जो न केवल एक बेहतरीन सर्जन हैं, बल्कि एक कुशल शिक्षक भी हैं। उन्होंने देश के कई एम्स संस्थानों का मार्गदर्शन किया है और लगातार युवा डाक्टरों को प्रशिक्षित करते रहते हैं। उनके नेतृत्व में डॉ. विनय कुमार (विभागाध्यक्ष, सर्जिकल आंकोलाजी), डॉ. अंकित, डॉ. वैशाली, डॉ. जैनब और डॉ. शिखा सहित एक विशेषज्ञ टीम ने पहली जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया।