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नशे का काला कारोबार: इंदौर पुलिस ने महिला के पास से पकड़ी करोड़ों की ब्राउन शुगर

इंदौर   इंदौर शहर में सोमवार को एक महिला को एक करोड़ रुपए की ब्राउन शुगर रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने इस मामले में आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है.  अपराध निवारण शाखा के पुलिस उपायुक्त (DCP) राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस ने अहिरखेड़ी इलाके में आरोपी सीमा नाथ के घर से 516 ग्राम प्रतिबंधित पदार्थ बरामद किया. उन्होंने बताया कि महिला पिछले कई सालों से नशीले पदार्थों का कारोबार कर रही थी.पुलिस ने उसके घर से 48.5 लाख रुपए नकद और इलेक्ट्रॉनिक तराजू भी बरामद किया है.  राजेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि मौके से मिले सबूतों से साफ पता चलता है कि महिला तस्कर ने नशीले पदार्थ बेचकर मोटी रकम कमाई है. उन्होंने बताया कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज (NDPS) अधिनियम के तहत एक FIR दर्ज की गई है.  पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी महिला पर पहले से ही 12 मामले दर्ज हैं. पुलिस अब आगे की विस्तृत जांच में जुटी है. 

क्रिकेट लवर्स के लिए खुशखबरी! इंदौर में खुला पहला क्रिकेट म्यूजियम, देखें 300 अनमोल विरासतें

इंदौर   मध्यप्रदेश का पहला क्रिकेट म्यूजियम इंदौर के होलकर स्टेडियम में तैयार किया गया है. यह म्यूजियम करीब 1200 स्‍क्‍वायर फीट में बना है और इसकी डिजाइन भोपाल के आर्किटेक्ट हुजूर नंद चौधरी ने की है. इस म्‍यूजियम को बनाने में लगभग 6 साल का समय लगा है. बाहर का एरिया लॉईस के पवेलियन स्टाइल में और अंदर कोलोनियल आर्किटेक्चर स्टाइल में तैयार किया गया है. म्‍यूजियम में प्रवेश करते ही कर्नल सीके नायडू का स्टैच्यू और उनके 30 किलो वजन वाला लोहे का किट बैग नजर आता है. म्यूजियम की बालकनी में कपिल देव का स्टैच्यू रखा गया है, जिसमें वे 1983 का वर्ल्ड कप थामे दिखते हैं. क्रिकेटरों की यादगार सामग्री यहां 18वीं सदी से लेकर आज तक के क्रिकेट इतिहास से जुड़ी 300 से ज्यादा चीजें रखी गई हैं. 1983 की वर्ल्ड कप विजेता टीम का साइन किया हुआ बैट, कपिल देव का मंगूस बैट, सचिन तेंदुलकर के पैड्स, राहुल द्रविड़ के ग्लव्स, दिलीप वेंगसरकर का हेलमेट और अमय खुरासिया का बैट भी संग्रह का हिस्सा हैं. इसके अलावा विराट कोहली, धोनी, युवराज सिंह, जहीर खान और रोहित शर्मा के साइन वाली सामग्री भी मौजूद है. क्रिकेट की बाइबल कही जाने वाली विज्डन मैगजीन के 1952 से अब तक के अहम एडिशन भी यहां देखे जा सकते हैं, जिन्हें पूर्व क्रिकेटर संजय जगदाले ने अपने कलेक्शन से दिया है. क्रिकेट की बाइबल 'विजडन' के एडिशन भी रखे इंदौर के होलकर स्टेडियम में बने क्रिकेट म्यूजियम में 18वीं सदी से लेकर 2024 तक का इतिहास है। क्रिकेट की बाइबल कही जाने वाली विजडन मैगजीन के स्पेशल एडिशन भी यहां मौजूद हैं। म्यूजियम में विजडन के 1952 से लेकर अब तक के सभी महत्वपूर्ण एडिशन हैं। यह मैगजीन ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को कवर करती थी, लेकिन धीरे-धीरे इसने पूरी दुनिया के क्रिकेटरों को जगह देनी शुरू कर दी। डॉन ब्रैडमैन और सचिन का ओरिजनल बैट इंदौर के म्यूजियम में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सर डॉन ब्रैडमैन और सचिन तेंदुलकर के क्रिकेट बैट मौजूद हैं। विराट कोहली की वह शर्ट भी यहां है, जिसे पहनकर उन्होंने इंदौर में 211 रन बनाए थे। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज शेन वार्न की शर्ट भी यहां रखी है। सर डॉन ब्रैडमैन ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर थे। उनके नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हैं। ब्रैडमैन ने टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा 99.95 की औसत से रन बनाए हैं। 52 टेस्ट मैचों में उन्होंने 29 शतक लगाए हैं। उस समय वनडे क्रिकेट का चलन नहीं था इसलिए वे वनडे नहीं खेल सके। सौरव गांगुली और कुंबले द्वारा तमाम रिकॉर्ड बनाए जाने के दौरान इस्तेमाल खेल सामग्री भी यहां है। डेनिस लिली ने एल्यूमीनियम के बैट से खेला, वह भी यहां ऑस्ट्रेलिया के पूर्व खिलाड़ी डेनिस लिली ने 1979 में इंग्लैंड से मशहूर क्रिकेट सीरीज एशेज के दौरान एल्यूमीनियम का बैट इस्तेमाल किया था। इंग्लैंड के कप्तान माइक ब्रेयरली ने शिकायत करते हुए कहा कि इस बल्ले की वजह से गेंद का आकार बिगड़ रहा है। अंपायर ने डेनिस लिली को समझाया कि इससे गेंद खराब हो रही है लेकिन लिली इसी बैट से खेलने पर अड़े रहे। आईसीसी को बदलना पड़ा नियम दरअसल, उस समय आईसीसी का ऐसा कोई नियम नहीं था कि बल्ला सिर्फ लकड़ी का हो इसलिए डेनिस लिली ने एल्यूमीनियम का बैट बनवा लिया था। वे इसी से खेला करते थे। इस मैच में विवाद के बाद आईसीसी ने नया नियम बनाया। इसके तहत बल्लेबाज सिर्फ लकड़ी का बैट ही इस्तेमाल कर सकता है। दुनिया के दिग्गजों से जुड़ी चीजें म्यूजियम का आकर्षण केवल भारतीय क्रिकेट तक सीमित नहीं है. यहां सर डॉन ब्रैडमेन और सचिन तेंदुलकर के ओरिजनल बैट रखे गए हैं. विराट कोहली की वह शर्ट भी है जिसे पहनकर उन्होंने इंदौर में 211 रन बनाए थे. शेन वार्न की शर्ट, सुरेश रैना का टूटा हुआ बैट और सौरव गांगुली व अनिल कुंबले द्वारा इस्तेमाल किए गए क्रिकेट गियर भी संग्रह का हिस्सा हैं. ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी डेनिस लिली का 1979 एशेज सीरीज में इस्तेमाल एल्यूमीनियम बैट भी यहां रखा गया है, जिसकी वजह से बाद में आईसीसी को नियम बदलना पड़ा था. इसके अलावा 1986 में भारत-ऑस्ट्रेलिया के टाई टेस्ट और 2001 के री-मैच में इस्तेमाल स्टंप का टुकड़ा भी यहां रखा गया है. समय और टिकट दरें क्रिकेट म्यूजियम के खुलने का समय सुबह 11 बजे से शाम 6.30 बजे तक रखा गया है और सोमवार को अवकाश रहेगा. 4 से 12 साल के बच्चों का टिकट 50 रुपए और 12 साल से अधिक उम्र के लोगों का टिकट 100 रुपए रखा है. यहां लैंडस्केपिंग से लेकर सौवेनियर शॉप तक सब कुछ मेटल के डिजाइन से तैयार किया गया है. एमपीसीए के वाइस प्रेसिडेंट रमणीक सलूजा का कहना है कि इस म्यूजियम का मकसद ज्यादा से ज्यादा ऐतिहासिक सामग्री को संजोना और आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करना है.  

ग्रामीण अंचलों में विकास कार्यों को मिलेगी गति: मंत्री पटेल

भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में वायब्रेंट ग्राम सभा के माध्यम से ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी को और अधिक सशक्त बनाया जा रहा है। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि ग्राम सभा केवल औपचारिकता न होकर गाँव की वास्तविक सरकार है, जो जनता के बीच बैठकर उनके लिए निर्णय लेती है। इस दृष्टि से प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम सभाओं को नियमित, सुव्यवस्थित और सहभागितापूर्ण बनाने के लिये विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जनप्रतिनिधि और अधिकारियों की जवाबदेही होगी सुनिश्चित निर्देशों के अनुसारप्रत्येक ग्राम सभा में विकास कार्यों की समीक्षा और अनुमोदन अनिवार्य होगा। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति से योजनाओं की जवाबदेही सुनिश्चित होगी। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी। सभी बैठकों का ऑनलाइन पंजीकरण और मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण अंचलों में विकास कार्यों को मिलेगी गति मंत्री श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ग्रामीण विकास की दिशा में नए आयाम स्थापित कर रहा है। वायब्रेंट ग्राम सभा इस दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जो गाँव-गाँव में लोकतंत्र को सशक्त कर रही है। श्री पटेल ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल ग्रामीण अंचलों में विकास कार्यों को गति प्रदान करेगी और आत्मनिर्भर ग्राम की दिशा में ठोस कदम साबित होगी।  

1500 नहीं, 5000 रुपए तक लाभ मिलेगा लाडली बहनों को, CM मोहन का आदेश

भोपाल   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने लाडली बहना योजना को लेकर बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि अब महिलाओं को न सिर्फ़ 1500 रुपये मिलेंगे, बल्कि अगर वे उद्योगों में कार्यरत हैं तो 5000 रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे. उन्होंने गोविंदपुरा स्थित लघु उद्योग भारती के प्रदेश कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में यह घोषणा की. सीएम ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता है. बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही लाडली बहना योजना की राशि बढ़ाकर 1500 रुपये करने की तैयारी कर रही है, ऐसे में इस घोषणा से लाडली बहनें बेहद खुश हैं. लघु उद्योग भारती कार्यक्रम में किया ऐलान दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गोविंदपुरा में लघु उद्योग भारती के प्रदेश कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने उद्योग और रोजगार को लेकर बड़े ऐलान किए। सीएम ने कहा कि उद्योगों में काम करने वाली ‘लाड़ली बहनों’ को सरकार 5 हजार रुपए अतिरिक्त देगी। प्रदेश की समृद्धि केवल इंदौर-भोपाल तक सीमित नहीं रहेगी, छोटे जिलों में भी उद्योग बढ़ाए जाएंगे। सीएम ने मॉर्टगेज ड्यूटी, फायर एनओसी और मल्टी-स्टोरी इंडस्ट्रियल प्लांट जैसी समस्याओं के समाधान की भी घोषणा की।  सीएम बोले- 1500 या 3000 रुपए नहीं, बल्कि 5000 रुपए दिए जाएंगे सीएम ने कहा, ‘अभी तक लाडली बहना योजना में महिलाओं को घर बैठे 1500 रुपए दिए जा रहे हैं। लेकिन हमने तय किया है कि केवल यही पर्याप्त नहीं है। यदि लाडली बहना उद्योगों में काम करेगी तो उसे 1500 या 3000 रुपए नहीं, बल्कि 5000 रुपए प्रतिमाह सरकार की ओर से दिए जाएंगे। ताकि वे रोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बनें। उद्योगों में काम करने वाली महिलाओं को सरकार 5 हजार रुपए देगी। अगर उद्योगपति 8 हजार रुपए देंगे, तो महिला श्रमिक को कुल 12 से 13 हजार रुपए मिलेंगे। आत्मनिर्भरता की ओर कदम.. सीएम यादव ने राजधानी भोपाल के गोविंदपुरा में लघु उद्योग भारती के प्रदेश कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में कहा कि हमारी बहनें सिर्फ मदद की मोहताज न रहें, बल्कि रोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बनें। सरकार का उद्देश्य है कि महिलाएं उद्योगों से जुड़ें और बेहतर आमदनी हासिल करें।” अब हर महीने 12-13 हजार तक की आय मुख्यमंत्री ने समझाया कि यदि किसी उद्योगपति द्वारा महिला को ₹8,000 वेतन दिया जाता है, तो सरकार की ओर से मिलने वाले ₹5,000 अतिरिक्त के साथ लाड़ली बहन की कुल मासिक आय 12-13 हजार रुपए तक पहुंच जाएगी। यह महिलाओं को न सिर्फ आर्थिक सशक्तिकरण देगा बल्कि परिवार की जरूरतों को भी पूरा करेगा। रोजगार आधारित उद्योगों को बढ़ावा कार्यक्रम में सीएम यादव ने यह भी बताया कि रोजगार आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एमओयू साइन किए जा रहे हैं। जल्द ही प्रदेश में 10-20 छोटी इकाइयां लगाई जाएंगी, जिनमें 100 से लेकर 7,000 तक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। CM मोहन ने लाडली बहनों के लिए किया बड़ा ऐलान दरअसल, सीएम मोहन यादव ने रविवार को भोपाल के गोविंदपुरा इलाके में लघु उद्योग भारती के प्रदेश कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में कई बड़ी घोषणाएं की हैं. इनमें सीएम मोहन यादव ने 'लाडली बहना' योजना को लेकर अहम घोषणा करते हुए कहा कि सरकार अब केवल 1500 रुपये मासिक सहायता नहीं देगी, बल्कि उद्योगों में काम करने वाली महिलाओं को 5000 रुपये अतिरिक्त प्रदान किए जाएंगे. सीएम ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए यह कदम उठाया गया है.  1500 नहीं, हर महीने खाते में आएंगे इतने एक्स्ट्रा रुपये मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि 'अब तक लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को घर बैठे 1500 रुपए दिए जा रहे थे, लेकिन यह राशि अब पर्याप्त नहीं मानी जा रही.  यदि लाड़ली बहनें उद्योगों में काम करती हैं, तो उन्हें 1500 या 3000 रुपए नहीं  5000 रुपए दिए जाएंगे'.  सीएम ने कहा कि इसका उद्देश्य महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. यदि उद्योगपति महिला कर्मचारियों को 8 हजार रुपए वेतन देंगे, तो सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि मिलाकर उन्हें कुल 12 से 13 हजार रुपए मासिक आय प्राप्त होगी.  इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उद्योग और रोजगार को लेकर कई अहम घोषणाएं भी कीं.

मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने स्वतंत्रता सेनानी श्री हरिभाऊ उपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वतंत्रता सेनानी, साहित्यकार श्री हरिभाऊ उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के गौरव, स्वतंत्रता सेनानी श्री उपाध्याय का साहित्य के साथ मातृभूमि की सेवा के लिए समर्पण वंदनीय है। उल्लेखनीय है कि श्री उपाध्याय ने 'बापू के आश्रम में, ' सर्वोदय की बुनियाद जैसी कृतियों से साहित्य को समृद्ध किया।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शॉट पुट खिलाड़ी गिल को दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चैन्नई में चल रही 64वीं नेशनल स्टेट सीनियर एथेलेटिक्स चैम्पियनशिप में मध्यप्रदेश के प्रतिभागी शॉट पुट खिलाड़ी समरदीप सिंह गिल को गोल्ड मेडल जीतने पर बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्री गिल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री गिल की इस स्वर्णिम उपलब्धि के लिए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के बेटे की यह उपलब्धि अन्य सभी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निशानेबाज एश्वर्य प्रताप सिंह को दी बधाई

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिमकेन्ट (कजाकिस्तान) में खेली जा रही 16 वें एशियन शूटिंग चैम्पियनशिप में मध्यप्रदेश के शूटिंग अकादमी के प्रतिभागी निशानेबाज एश्वर्य प्रताप सिंह को स्वर्ण पदक और टीम स्पर्धा में रजत पदक प्राप्त होने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन सीनियर पुरुष व्यक्तिगत स्पर्धा में एश्वर्य प्रताप सिंह ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि से वैश्विक मंच पर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्री सिंह की यह उपलब्धि सम्पूर्ण प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एश्वर्य प्रताप सिंह को सदैव ऐसे ही निरंतर आगे बढ़ते रहने और प्रदेश को गौरवान्वित करते रहने की मंगलकामना की है।  

बड़वानी : लौकी का मोल नहीं, किसान को खेत से सीधे पशुओं को खिलाना पड़ रहा

बड़वानी इन दिनों लौकी की खेती करने वाले किसान परेशान हैं और हों भी क्यों न, उनकी फसल माटी मोल भी नहीं बिक रही. लौकी के दाम इतने गिर चुके हैं कि किसान भारी घाटे में आ गए हैं. बाजार में लौकी के उचित रेट न मिलने से किसान या तो मवेशियों को लौकी खिलाने पर मजबूर हैं या फिर लौकी फेंकने मजबूर हैं. आखिर क्यों नहीं बिक रही लौकी? किसान दीपक गेहलोद बताते हैं, '' ट्रांसपोर्ट महंगा हो चुका है, इसलिए लौकी मंडी से बाहर कोई खरीद नहीं रहा है. ऐसे में लौकी या तो फेंकी जा रही है या ट्रैक्टर भरकर लौकी गौशाला में गायों के लिए भेजी जा रही हैं. हमने चार एकड़ खेत में लौकी लगाई थी. उत्पादन भी अच्छा हुआ है, मगर भाव नहीं है. चार एकड़ में एक से डेढ़ लाख रुपए की लागत लगी है और मार्केट में हम किसानों से लौकी व्यापारी एक रुपए किलो में लौकी मांग रहे हैं. अच्छी क्वालिटी का माल पहले पांच रुपए किलो तक भी बिका है, मगर अब भाव नहीं मिल रहे हैं.'' लागत भी नहीं निकल रही किसान दीपक आगे कहते हैं, '' बाजार में भाव नहीं मिलने से लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है. ऐसे में किराया भाड़ा लगाना और महंगा पड़ रहा है. इसलिए लौकी तुड़वाकर खेत साफ कर रहे हैं. कुछ किसान लौकी फेंक रहे हैं तो कुछ पशुओं को खिला रहे हैं.'' किसान की माने तो 13 से 15 रुपए किलो के भाव की उम्मीद थी पर इसका आधा भी नहीं मिल पा रहा. बड़वानी में इन सब्जियों की होती है खेती स्थानीय किसान बताते हैं कि बड़वानी क्षेत्र में लौकी, खीरा, कद्दू जैसी हरी सब्जियों की बंपर पैदावार होती है. यहां से देश की राजधानी दिल्ली समेत कई प्रदेशों में सब्जी भेजी जाती है. हालांकि, बीते 20 दिन से लौकी मंडी में तो आ रही है लेकिन मंडी से बाहर नहीं जा पा रही है. व्यापारी परेश नामदेव कहते हैं, '' लौकी पहले से खरीद रखी है और इसका भुगतान किसानों को खड़ी फसल के दौरान कर दिया जाता है. ऐसे में जो अपनी फसल का मूल्य ले चुका वह लौकी को अपने व्यापारियों के पास भेज देता है. लेकिन मंडी से लौकी बाहर बाजार में नहीं जा पा रही है.'' पहले बढ़े, अब तेजी से घट रहे सब्जियों के दाम मंडी के जानकारी किसान दीपक गेहलोद ने बताया, '' किसानों को अब सब्जियों के सही दाम नहीं मिल रहे हैं. उत्पादन अधिक हो गया है और कई सब्जियों के दाम अब औंधे मुंह गिर गए हैं. खासकर लौकी का उत्पादन इस बार अच्छा है, मगर भाव नहीं मिल रहे हैं, तो पशुओं को खिलाने के लिए मजबूर हो रहे हैं. किसान सब्जियां बेचकर उसे मंडी तक पहुंचाने का खर्च भी पूरा नहीं कर पा रहा है. इस समय केवल बेमौसमी सब्जियों को अच्छे दाम मिल रहे हैं, बाकि कोई भी सब्जी मंडी में अपनी चमक नहीं दिखा पा रही है.''

हैंडबॉल की गूंज: चंबल में स्कूल स्टूडेंट्स की 50 टीमें दिखा रही दमखम

मुरैना   चंबल की फिजां बदल रही है. एक समय डकैत, मुठभेड़ के लिए कुख्यात चंबल की आबोहवा में अब प्रतिभाएं अपना लोहा मनवाने लगी हैं. शिक्षा के क्षेत्र में हो या खेल के, हर मामले में चंबल का रंग बदला हुआ दिख रहा है. इसकी की बानगी है चंबल में शुरू हुआ खिलाड़ियों का महाकुंभ. हैंडबॉल महाकुंभ में 700 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं. 50 टीमों के बीच रोमांचक मुकाबले शुरू हो चुके हैं. स्कूलों के 700 खिलाड़ी प्रतियोगिताओं में शामिल चंबल की धरती पर खिलाड़ियों का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है मुरैना के टीएसएस इंटरनेशनल स्कूल में 4 दिवसीय वेस्ट जोन हैंडबॉल प्रतियोगिता का शुभारंभ भव्य समारोह के बीच हुआ. खेल महोत्सव में गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश से आई लगभग 700 छात्र-छात्राएं प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रतियोगिता में करीब 50 से अधिक टीमें बनाई गई हैं, जिन्हें अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है. मैदान में पहले ही दिन खिलाड़ियों के जोश ने दर्शकों का दिल जीत लिया. स्कूल के 3 मैदानों में शुरू हुए मैच तीन मैदानों पर एक साथ मैच खेले गए, जहां रोमांचक नज़ारे देखने को मिले. पहले मैच में मैट्रिक्स हायर सेकेंडरी स्कूल ने शानदार खेल दिखाते हुए एआईएस स्कूल जयपुर को 16-10 से हराया. दूसरे मुकाबले में मानसरोवर द स्कूल बैतूल ने दमदार प्रदर्शन कर एलबूड़ इंटरनेशनल स्कूल जयपुर को 7-2 से मात दी. इस दौरान गोल करने की जद्दोजहद, डिफेंस की सटीक चाल और गोलकीपर की चुस्ती ने मैच को और रोमांचक बना दिया. दर्शक दीर्घा से लगातार तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही.  सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ प्रतियोगिता शुरू खिलाड़ियों, कोच व शिक्षकों के लिए ठहरने, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है. कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती पूजन के बाद आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई. इसके बाद डीआईजी चंबल रेंज सुनील जैन ने गेंद फेंककर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया. और फिर खेल मैदान में जोश की लहर दौड़ गई. उद्घाटन अवसर पर सीबीएसई ऑब्जर्वर राजकुमार सेंगर, विद्यालय के डायरेक्टर सुरेंद्र प्रताप सिंह सिकरवार, प्राचार्य शिखा श्रीवास्तव, और स्पोर्ट्स टीचर राजेंद्र सिंह राजावत सहित बड़ी संख्या में अतिथि, शिक्षक और अभिभावक मौजूद रहे. खेलों से जीवन में अनुशासन आता है इस मौक पर डीआईजी सुनील जैन ने कहा "बच्चों में खेल भावना को जगाना और उन्हें मंच देना आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है. खेल न केवल बच्चों का भविष्य संवारते हैं बल्कि जीवन में अनुशासन, टीम स्पिरिट और आत्मविश्वास भी जगाते हैं." उन्होंने इस आयोजन को चंबल क्षेत्र के लिए गौरव की बात बताते हुए विद्यालय प्रबंधन को बधाई दी. 

इंदौर में बड़े बदलाव की तैयारी, शहर को आर्थिक शक्ति बनने का लक्ष्य

इंदौर  मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर आने वाले पांच वर्षों में विकास की नई ऊंचाइयों को छूने जा रही है। शहर की जीडीपी को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। इस दिशा में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी प्रमुख विभागों, विशेषज्ञों और स्टेकहोल्डर्स ने हिस्सा लिया। फार्मा और मेडिकल टूरिज्म पर जोर सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "विकसित भारत" और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के "प्रगतिशील मध्यप्रदेश" के सपनों को पूरा करने में इंदौर अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने बताया कि फार्मा इंडस्ट्री और मेडिकल टूरिज्म को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा। इंदौर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्वास्थ्य केंद्र बनाने के लिए मेडिकल सुविधाओं और अस्पतालों का विस्तार किया जाएगा। ऑटोमोबाइल, आईटी और स्टार्टअप्स को बढ़ावा प्रस्तुति के दौरान सांसद लालवानी ने कहा कि ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर को ग्रीन एनर्जी के साथ बढ़ावा देकर इंदौर को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जाएगा। आईटी और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत कर युवाओं को इनोवेशन और रिसर्च आधारित शिक्षा से जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि फूड प्रोसेसिंग और नमकीन उद्योग को भी वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की योजना है। कलेक्टर का बयान कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि यह अभियान शहर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और सभी विभागों के आपसी तालमेल से ही सफल हो पाएगा। उन्होंने पारंपरिक व्यवसायों को ग्लोबल ब्रांड बनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर व ट्रांसपोर्टेशन को मजबूत करने पर जोर दिया। रेल, रोड और एयर कनेक्टिविटी को सशक्त कर इंदौर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जाएगा। अर्थशास्त्रियों के सुझाव डॉ. जयंतीलाल भंडारी ने कहा कि इंदौर देश का पहला ऐसा शहर बन सकता है, जो पांच वर्षों में अपनी जीडीपी को दोगुना करे। उन्होंने सुझाव दिया कि निर्यात-उन्मुख उद्योगों, उच्च मूल्यवर्धन वाले सेक्टर और विदेशी निवेश को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देने की आवश्यकता बताई। साझा संकल्प और आगे की दिशा बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि इंदौर को देश का "आर्थिक ग्रोथ इंजन" बनाने की दिशा में अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए प्राथमिक क्षेत्रों पर फोकस, नई तकनीक, शिक्षा, कनेक्टिविटी, औद्योगिक विस्तार और वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने का रोडमैप तैयार किया जाएगा। अधिकारियों और विशेषज्ञों की मौजूदगी बैठक में कलेक्टर आशीष सिंह, नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा, एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक हिमांशु प्रजापति, इंदौर विकास प्राधिकरण के सीईओ आर.पी. अहिरवार, रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, विद्युत विभाग समेत कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. जयंतीलाल भंडारी और डॉ. अनिल भंडारी भी शामिल हुए।