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जयपुर का राजमंदिर सिनेमा मनाएगा 50वीं वर्षगांठ, DDLJ से ‘हम आपके हैं कौन’ तक का होगा मुफ्त शो

जयपुर जयपुर के राजमंदिर सिनेमा का पूरे देश में नाम है. यह का प्रतिष्ठित सिनेमा 1 जून को अपनी 50वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है. थिएटर की गोल्डन जुबली के मौके पर राजमंदिर सिनेमा के प्रबंधकों ने एक खास इंतजाम किया है. इस विशेष दिन के लिए थिएटर में सिने प्रेमियों के लिए चार सुपरहिट बॉलीवुड फिल्मों का नि:शुल्क प्रदर्शन किया जाएगा. इन 5 सुपरहिट फिल्मों के नाम हैं – ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', ‘राम तेरी गंगा मैली', ‘हम आपके हैं कौन' और ‘ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा' और 'चुपके-चुपके'. इन शो के लिए दर्शकों को फ्री टिकट पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर दिए जाएंगे. लेकिन, बिना पैसे दिए फिल्म देखने के लिए भी फ्री टिकट लेना होगा. कैसे मिलेंगी टिकटें? राजमंदिर प्रबंधन के अनुसार 1 जून को 5 अलग-अलग शो में चार क्लासिक फिल्मों की स्क्रीनिंग होगी. टिकट बुक माय शो और थिएटर काउंटर से प्राप्त किए जा सकेंगे. आयोजन का उद्देश्य पुराने दौर की सिनेमाई यादों को फिर से जीवंत करना है. 50 साल पहले शुरू हुआ था राजमंदिर का सफर राजमंदिर का उद्घाटन 1 जून 1976 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी ने किया था. उसी साल यहां पहली फिल्म ‘चरस' प्रदर्शित हुई थी, जिसमें धर्मेंद्र और हेमा मालिनी मुख्य भूमिका में थे. पिछले पांच दशकों में यह थिएटर जयपुर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है. अपनी भव्य वास्तुकला, शानदार इंटीरियर और अनोखे फिल्मी माहौल के कारण राजमंदिर देश-दुनिया के पर्यटकों के बीच भी आकर्षण का केंद्र रहा है. 400 से ज्यादा फिल्में, कई रिकॉर्ड भी बने राजमंदिर में अब तक 400 से अधिक फिल्में प्रदर्शित हो चुकी हैं. शुरुआत में थिएटर में 1168 सीटें थीं, लेकिन बाद में दर्शकों की सुविधा को देखते हुए सीटों की संख्या घटाकर 862 कर दी गई. यहां सबसे ज्यादा अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान की फिल्में लगी हैं. ‘राम तेरी गंगा मैली' और ‘हम आपके हैं कौन' यहां लगातार 75-75 सप्ताह तक चली थीं. उस दौर में टिकट लेने के लिए लंबी कतारें लगती थीं और लोग पहले से परिवार के साथ फिल्म देखने की योजना बनाते थे. कर्मचारियों की यादों से भी जुड़ा है राजमंदिर पुराने कर्मचारियों का कहना है कि राजमंदिर सिर्फ एक थिएटर नहीं, बल्कि लोगों की खुशियों, जश्न और भावनाओं का हिस्सा रहा है. टिकट काउंटर से लेकर प्रोजेक्शन रूम और कैंटीन तक, यहां काम करने वाले लोगों ने पीढ़ियों को फिल्मों के जरिए जुड़ते देखा है. यही वजह है कि 50 साल बाद भी राजमंदिर जयपुर की सांस्कृतिक धड़कन बना हुआ है.

डीलर्स की हड़ताल से राजस्थान में ईंधन संकट की आशंका

 जयपुर राजस्थान में 1 जून से आम लोगों को पेट्रोल-डीजल के संकट का सामना करना पड़ सकता है. ऐसा नहीं है कि प्रेट्रोल-डीजल की आवक रुकने वाली है, बल्कि प्रदेशभर के पेट्रोल-पंप संचालकों ने 1 जून से अनिश्चितकालीन पंप को ठप करने की चेतावनी दी है. पंप संचालकों ने सरकार और तेल कंपनियों की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का अल्टीमेटम दे दिया है. इसे लेकर पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन ने सीएम भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर समस्याओं से अवगत कराया है. इसके साथ ही चेतावनी दी है कि अगर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेश के सभी पेट्रोल पंप पर ताले लटक जाएंगे और पूरे प्रदेश में पहिया थम सकता है. WhatsApp और मौखिक आदेश से तेल देने की सीमा निर्धारित बताया जा रहा है कि इस हड़ताल का कारण पेट्रोल-डीजल को लेकर तेल कंपनियों द्वारा लगाई गई पाबंदियां है. एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भाटी का आरोप है कि प्रदेश के कई इलाकों में पेट्रोल पंप तेल खत्म होने की कगार पर पहुंच रहे हैं. जबकि इंडियन ऑयल जैसी बड़ी कंपनियों ने WhatsApp मैसेज और मौखिक आदेशों के जरिए ग्राहकों तेल देने की सीमा निर्धारित कर दी है. भाटी ने बताया कि अगर तेल कंपनी के नियमों के खिलाफ अगर कोई पंप ग्राहक को एक बार में 50 हजार रुपये से अधिक का डीजल और 5000 रुपये से अधिक का पेट्रोल नहीं दिया जा सकता है. दूसरी ओर भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने भी अपनी सप्लाई बेहद सीमित कर दी है. अगर जरूरतमंद को सीमा से ज्यादा तेल दिया जाता है तो कंपनियां एकतरफा कार्रवाई करते हुए सप्लाई रोक देती है. जो नियमों का सरासर उल्लंघन है. वहीं तेल नहीं देने पर अनावश्यक लोगों में भ्रम फैलता है और लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है. VAT कम करने की मांग एसोसिएशन की ओर से राजस्थान में ईंधन पर लगाए जा रहे भारी VAT का भी विरोध किया है. इस वजह से पूरे देश में सबसे महंगा पेट्रोल-डीजल राजस्थान में बिक रहा है. डीलरों की मांग है कि राजस्थान में भी अन्य राज्यों की तरह 5 प्रतिशत VAT कटौती की जाए. इसके अलावा अलग-अलग जिलों में कीमतों के भारी अंतर और हरियाणा-पंजाब की तुलना में राज्य में CNG की अत्यधिक कीमतों को लेकर भी उपभोक्ताओं और डीलर्स में भारी असंतोष है. किसानों के लिए स्थिति होने वाली है गंभीर डीलरों का कहना है कि संकट अभी और बढ़ने वाली है जिससे किसान परेशान होने वाले हैं. क्योंकि आगामी बुवाई के सीजन को देखते हुए खेतों में डीजल की मांग बढ़ने वाली है. जबकि तेल कंपनियां नियमों का हवाला देकर ड्रमों में डीजल देने पर सख्त पाबंदी लगा रखी है. ऐसे में किसान अपने बड़े कृषि उपकरणों को बार-बार शहरों के पंप तक नहीं ला सकते और अब हालात गंभीर हो सकते हैं. पीएम दौरे और सरकारी रैलियों के उधार लिया गया लाखों का ईंधन डीलर्स ने तेल वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए तेल डिपो और पेट्रोल पंपों पर आधुनिक 'फ्लोमीटर' लगाने की मांग भी दोहराई है, ताकि हर बूंद का सही हिसाब मिल सके और कमी के लिए केवल डीलर्स को जिम्मेदार न ठहराया जाए. एसोसिएशन ने तेल कंपनियों द्वारा महंगे 'ब्रांडेड फ्यूल' को जबरन बेचने के दबाव और राज्य में चल रहे अवैध बायोडीजल के काले कारोबार पर सरकार की चुप्पी को लेकर भी तीखी नाराजगी जताई है. आर्थिक मोर्चे पर घिरे डीलर्स ने यह मुद्दा भी उठाया है कि प्रधानमंत्री के दौरों और सरकारी रैलियों के दौरान गाड़ियों में जो लाखों रुपये का ईंधन उधार दिया गया था, उसका भुगतान सरकार ने लंबे समय से अटका रखा है, जिससे उन पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है. मामले की गंभीरता के बावजूद, एसोसिएशन का आरोप है कि शीर्ष नौकरशाही का रवैया बेहद उदासीन बना हुआ है. लगातार ईमेल और पत्र भेजने के बाद भी प्रमुख शासन सचिव स्तर पर कोई बैठक नहीं बुलाई जा रही है और न ही अधिकारी उनके फोन कॉल्स का जवाब दे रहे हैं. अब देखना यह होगा कि क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस मामले में खुद हस्तक्षेप कर 1 जून से पहले कोई बीच का रास्ता निकालते हैं, या फिर राजस्थान एक बड़े चक्काजाम और ईंधन संकट की तरफ बढ़ने को मजबूर होगा.

सफाई कर्मचारियों से गैर-कार्य न कराएं: राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था पर नगर निगम को कड़ी फटकार लगाते हुए बड़ा आदेश जारी किया है. एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने साफ कहा कि सफाई कर्मचारियों से दफ्तर के अन्य काम कराने के बजाय सिर्फ सफाई का मूल काम ही लिया जाए. कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि किसी क्षेत्र में गंदगी मिली, तो सीधे संबंधित जमादार और स्वास्थ्य निरीक्षक की जिम्मेदारी तय होगी. इसके साथ ही, जयपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का हेरिटेज शहर बनाए रखने के लिए कोर्ट ने खुले में कचरा फेंकने वालों पर तुरंत जुर्माना लगाने और पर्याप्त डस्टबिन रखने के निर्देश दिए हैं. उचित स्थानों पर डस्टबिन लगाने के निर्देश अदालत ने सफाई की एक निश्चित प्रक्रिया तय करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आवासीय कॉलोनियों के निकट उचित स्थानों पर पर्याप्त डस्टबिन लगाए जाएं और उनकी नियमित सफाई की जाए. कोर्ट ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि किसी क्षेत्र में नियमित सफाई नहीं पाई जाती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित जमादार और स्वास्थ्य निरीक्षक की जिम्मेदारी तय की जाएगी. खंडपीठ ने याद दिलाया कि जयपुर एक ऐतिहासिक हेरिटेज शहर है और इसे इस तरह साफ रखा जाना चाहिए कि यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर सके. चूंकि पर्यटन उद्योग राजस्थान का सबसे बड़ा उद्योग है, इसलिए अदालत ने इस तरह के स्वच्छता प्रयासों को प्रदेश के अन्य शहरों में भी लागू करने की आवश्यकता जताई है. अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल को मिली दिशा-निर्देश की जिम्मेदारी इस संबंध में प्रदेश के सभी नगर निगमों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की जिम्मेदारी अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल को सौंपी गई है. साथ ही, अदालत ने आम शहरवासियों और स्वयंसेवी संगठनों (NGOs) से भी अपनी-अपनी कॉलोनियों को साफ रखने और नगर निगम की मदद करने की अपील की है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता विमल चौधरी ने कोर्ट को बताया था कि सालों पहले हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए 16 बिंदुओं के निर्देशों की नगर निगम ने आज तक पालना नहीं की है, जिस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अदालत ने यह नया आदेश पारित किया.

Camel Milk से तैयार हुआ खास पनीर, बीकानेर वैज्ञानिकों की रिसर्च ने बढ़ाई उम्मीदें

बीकानेर रेगिस्तान की पहचान माने जाने वाले ऊंट अब केवल परिवहन या दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रहेंगे. बीकानेर स्थित राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी) के वैज्ञानिकों ने ऊंटनी के दूध से विशेष प्रकार का पनीर तैयार कर एक नई उपलब्धि हासिल की है. यह पनीर ऊंटनी और गाय के दूध के मिश्रण से बनाया गया है, जो प्रोटीन, खनिज तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर बताया जा रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकता है. बीकानेर के वैज्ञानिकों की यह पहल न केवल डेयरी क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है, बल्कि रेगिस्तानी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।  एनआरसीसी के वैज्ञानिक डॉ. मितुल बुंबडिया और डॉ. राजेंद्र कुमार ने प्रयोगशाला स्तर पर सिट्रिक अम्ल की सहायता से इस विशेष पनीर को तैयार किया है. वैज्ञानिकों के अनुसार, ऊंटनी के दूध में सामान्य गाय या भैंस के दूध की तुलना में प्रोटीन की संरचना अलग होती है, जिसके कारण इसे सीधे फाड़कर पनीर बनाना संभव नहीं होता. इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने ऊंटनी के दूध में 30 प्रतिशत गाय का दूध मिलाकर उसकी जमावट क्षमता बढ़ाई. तैयार पनीर में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ऊंटनी के दूध का है।  पनीर को सात दिनों तक रखा जा सकता है सुरक्षित वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पनीर का स्वाद हल्का नमकीन है और इसे पांच से सात दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है. खास बात यह है कि यह पनीर पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ स्वास्थ्यवर्धक भी माना जा रहा है. ऊंटनी के दूध में प्राकृतिक रूप से कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं. यही कारण है कि इस उत्पाद को औषधीय गुणों वाला दुग्ध उत्पाद भी माना जा रहा है।  ऊंटनी के दूध से तैयार पनीर लोगों के लिए बेहतर विकल्प डेयरी प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण इकाई के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि भारत में पनीर का उपयोग दैनिक भोजन से लेकर कई प्रकार के व्यंजनों में बड़े स्तर पर किया जाता है. ऐसे में ऊंटनी के दूध से तैयार यह पनीर लोगों के लिए एक नया और स्वास्थ्यप्रद विकल्प साबित हो सकता है. उन्होंने बताया कि यदि बाजार में इसकी मांग बढ़ती है, तो बड़े स्तर पर उत्पादन की दिशा में भी काम किया जाएगा।  ऐसे तैयार होता है ऊंटनी के दूध से पनीर पनीर तैयार करने की प्रक्रिया भी वैज्ञानिकों ने साझा की है. सबसे पहले ऊंटनी के दूध को करीब 90 डिग्री तापमान तक गर्म किया जाता है. इसके बाद इसे थोड़ा ठंडा कर विशेष अनुपात में तैयार मिश्रण के साथ फाड़ा जाता है, जिससे पनीर तैयार हो जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि लंबे शोध और प्रयोगों के बाद उन्हें अच्छे परिणाम मिले हैं और उच्च गुणवत्ता वाला पनीर तैयार करने में सफलता मिली है. एनआरसीसी अब इस तकनीक को पशुपालकों और किसानों तक पहुंचाने की तैयारी भी कर रहा है. यदि कोई किसान या पशुपालक ऊंटनी के दूध से पनीर बनाना सीखना चाहता है, तो वह केंद्र में आकर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है. इससे ऊंट पालन से जुड़े लोगों की आय बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। 

अमित शाह ने BSF को दिया नया मंत्र, बोले- सीमा से 50 किलोमीटर अंदर तक रखें कड़ी नजर

बीकानेर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बीकानेर के दौरे पर हैं. उन्होंने मंगलवार को बीकानेर के सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया. उन्होंने बीएसएफ के जवानों से बातचीत में कहा कि बीएसएफ को अपनी परंपरागत ड्यूटी से आगे बढ़कर नए सुरक्षा आयामों पर काम करना होगा।  गृहमंत्री अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ की सांचू पोस्ट पहुंचकर प्रहरी सम्मेलन को संबोधित किया. उन्होंने यहां कहा कि पचास किलोमीटर तक असामान्य गतिविधियों पर नजर रखें. बीएसएफ की जिम्मेदारी है कि सीमा से लगे 50 किलोमीटर के गांवों में होने वाले किसी भी अवैध निर्माण की जानकारी सिविल प्रशासन और पुलिस को दें।  शाह ने बीकानेर में महिला बैरकों के ई-उद्घाटन के दौरान कहा कि सीमा पर निगरानी पर्याप्त नहीं है बल्कि सीमा से पचास किलोमीटर तक की क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा कि अगर सीमावर्ती गांवों की आबादी में अस्वाभाविक बदलाव दिखे तो राज्य सरकार को तुरंत सतर्क किया जाए. गृहमंत्री ने ड्रोन के जरिए हो रही हथियार और नारकोटिक्स तस्करी को बड़ा खतरा बताया।  उन्होंने कहा कि भारत सरकार अगले छह महीने में ड्रोन रोधी सिस्टम लगाने की शुरुआत करेगी. शाह ने कहा कि ड्रोन भारत की जमीन पर उतरता है, उसे कौन रिसीव करता है और सामग्री का इस्तेमाल कौन करता है. इस पर हमारी पैनी नजर होनी चाहिए।  फोर लेयर सिक्योरिटी ग्रिड पर जोर अमित शाह ने कहा कि बीएसएफ, सेना, नागरिकों और राज्य सरकार मिलकर फोर लेयर सुरक्षा ग्रिड तैयार करेंगे. इसे सिर्फ फोर लेयर सिक्योरिटी नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी वाला सुरक्षा मॉडल माना जाना चाहिए।  शाह ने कहा कि सीमा पार से पैदा होने वाले खतरों के साथ-साथ देश के अंदर मौजूद उन तत्वों पर भी नजर रखनी होगी जिनका इस्तेमाल दुश्मन ताकतें करती हैं।  गृहमंत्री ने बताया कि हाल ही में उन्होंने बिहार के सीमांचल क्षेत्र में इसी विषय पर बैठक की थी. उन्होंने कहा कि अब कच्छ बॉर्डर, त्रिपुरा बॉर्डर और पश्चिम बंगाल में भी ऐसी संयुक्त बैठकें होंगी. जिन सीमाओं की सुरक्षा बीएसएफ करती है, वहां इस चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करना सरकार का लक्ष्य है. हमला होने के बाद जवाब देने की नौबत नहीं आनी चाहिए।  अमित शाह ने कहा कि 2014 के बाद भारत की सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव आया है और सेना व बीएसएफ का तेजी से आधुनिकीकरण किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जहां-जहां आतंकियों ने बड़े हमले करने की कोशिश की, वहां भारत ने पूरी कठोरता से जवाब दिया है. स्थिति ऐसी नहीं होनी चाहिए कि हमला होने के बाद जवाब देना पड़े. हमारी जिम्मेदारी ऐसी मजबूत सीमाएं बनाना है कि दुश्मन हमला करने की हिम्मत ही न कर सके। 

4.9 KM लंबी मुकुंदरा टनल अंतिम चरण में, जंगल के नीचे दौड़ेगी हाईस्पीड ट्रैफिक

जयपुर राजस्थान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा आकर्षण बनने जा रही मुकुंदरा टनल अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. कोटा और बूंदी के बीच मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से गुजर रही यह टनल सिर्फ इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना ही नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के संतुलन की मिसाल भी बनने जा रही है. इस टनल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जहां नीचे से हाईस्पीड ट्रैफिक गुजरेगा, वहीं ऊपर जंगल में वन्यजीव सामान्य रूप से विचरण करते नजर आएंगे. इससे मुकुंदरा टाइगर रिजर्व का प्राकृतिक आवागमन भी प्रभावित नहीं होगा, और एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी. राजस्थान की सबसे बड़ी टनल मुकुंदरा टनल राजस्थान की सबसे लंबी सड़क टनल मानी जा रही है. इसकी कुल लंबाई 4.9 किलोमीटर है, जिसमें 3.3 किलोमीटर मुख्य टनल और 1.6 किलोमीटर कट एंड कवर सेक्शन शामिल है. टनल की चौड़ाई करीब 38 मीटर है.     निर्माण कार्य शुरू: 2019     निर्धारित समय सीमा: अप्रैल 2026     अनुमानित लागत: करीब 1000 करोड़ रुपए     कुल लंबाई: 4.9 किलोमीटर हाईटेक सुरक्षा सिस्टम से लैस होगी टनल टनल में फिलहाल लाइटिंग, एआई आधारित प्रदूषण डिटेक्टर सेंसर, जेट फैन, फायर सेफ्टी सिस्टम, सीसीटीवी और कंट्रोल रूम सहित अत्याधुनिक उपकरण लगाए जा रहे हैं. सभी सुरक्षा मानकों की जांच और परीक्षण के बाद इसे आमजन के लिए खोला जाएगा. टनल की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक कंट्रोल सिस्टम लगाया जा रहा है, जो वाहनों की गति और गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगा. कंट्रोल रूम एआई आधारित सर्विलांस सिस्टम से लैस होंगे. आपात स्थिति से निपटने के लिए दोनों सुरंगों को 12 स्थानों पर आपस में जोड़ा गया है. ये कनेक्टिविटी पॉइंट्स हर 300 से 400 मीटर की दूरी पर बनाए गए हैं, ज‍िससे दुर्घटना या आग जैसी स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके. क्यों खास है यह प्रोजेक्ट मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व राजस्थान के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में शामिल है. यहां बाघों समेत कई वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है. एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान वन्यजीवों की आवाजाही और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए टनल मॉडल तैयार किया गया, जिससे जंगल का प्राकृतिक स्वरूप बना रहे. विशेषज्ञों के अनुसार, यह मॉडल भविष्य में वन क्षेत्रों से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए उदाहरण बन सकता है. हाड़ौती को बड़ा फायदा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल है. इसके शुरू होने से राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा. यह भी है खास टनल में एनएचएआई के मुताबिक, साउंड प्रूफ और वाटरप्रूफ टनल है. इसके अंदर होकर गुजरने वाले वाहनों से मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों को किसी तरह का डिस्टरबेंस नहीं होगा. ऑस्ट्रेलिया की नई तकनीक से इस टनल को बनाया जा रहा है. टनल सेंसर से लैस होगी. इसे ग्रीन कॉरिडोर के तौर पर डिजाइन किया गया है. दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे हाईवे 1350 किलोमीटर लंबा है. द‍िल्‍ली से मुंबई जाने में 12 घंटे का समय लगेगा. यह हाईवे केंद्र सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है. कोटा जिला सीधा दिल्ली-मुंबई से जुड़ जाएगा. ट्रैफिक जाम से राहत यात्रा में समय कम लगेगा. उद्योगों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मजबूती मिलेगी, कृषि आधारित उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे. पर्यटन और निवेश की संभावनाएं बढ़ेगी. कोटा-बूंदी सांसद और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि मुकुंदरा टनल का काम जल्द पूरा होने वाला है. इससे एक्सप्रेसवे पर आवागमन आसान होगा. कोटा-झालावाड़ मार्ग पर यातायात की सुगमता भी बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास के साथ किसानों और कृषि आधारित उद्योगों के लिए नए अवसर खुलेंगे. NHAI का दावा, अंतिम चरण में काम एनएचएआई के लाइजनिंग मैनेजर एस.के. सिंह ने बताया कि मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बन रही टनल का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है. दोनों टनल का काम पूरा होते ही यहां आवागमन शुरू कर दिया जाएगा.

जयपुर में XEN पति पर गंभीर आरोप, प्रताड़ना से तंग आकर अनु मीणा ने दी जान!

जयपुर जयपुर का अनु मीणा सुसाइड केस बेहद ही चौंकाने वाला है. अनु ने 7 अप्रैल को फांसी के फंदे पर लटककर जान दे दी, लेकिन 15 मई को एफआईआर दर्ज हुई. करीब 38 दिन बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस को शिकायत दी. परिजनों का कहना है कि अनु का पति गौतम मीणा उसकी बेरहमी से पिटाई करता था और लगातार प्रताड़ना से वो परेशान थी. इस बारे में महिला ने कई बार परिवार को भी बताया था. पीडब्ल्यूडी विभाग में कार्यरत एक्सईएन गौतम मीणा हर बार माफी मांगकर मामला ठीक करने की बात कहता था, लेकिन हालात नहीं सुधरे. बार-बार बेरहमी से पिटाई सहने के बाद उसने आत्महत्या कर ली. मृतका के भाई ने डीसीपी को दी शिकायत अनु मीणा का भाई नीरज डीसीपी से मिलने गया. इसके बाद पुलिस ने BNS 128 और 85 धारा के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने और घरेलू हिंसा का मामला दर्ज किया है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. मानसरोवर एसीपी आदित्य ककड़े को जांच सौंपी गई है. उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है. शादी में लिए 5 लाख रुपये और होंडा सिटी कार अनु मीणा के परिवार ने आरोप लगाया है कि शादी के समय ही पति गौतम मीणा और उसके मामा ने होंडा सिटी कार और 5 लाख रुपये की मांग की थी, जिसे परिवार ने शादी के समय ही पूरा कर दिया था. पीड़ित परिवार के मुताबिक, शादी में 60 लाख रुपये खर्च किए थे. इसके बावजूद गौतम अनु को लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित करता रहा. कई बार उसने गाली-गलौज भी की. शराब पीकर मारपीट करता था गौतम जब परिजन मामला दर्ज करवाने गए तो समाज के पंच और रिश्तेदार की ओर से दवाब बनाया गया. पति गौतम मीणा पंचों के जरिए कोशिश कर रहा था कि किसी तरह मामला दब जाए. प्रकरण में समझौते की कोशिश होती रही, लेकिन नीरज को यह मंजूर नहीं था. पंचायत के दवाब के बावजूद वह एफआईआर दर्ज करने पर अड़ गया. नीरज ने आरोप लगाया कि शादी के बाद गौतम मीणा अपनी पत्नी अनु को दहेज के लिए प्रताड़ित करता था. शादी के वक्त परिवार को नहीं पता था कि वह शराब का आदी है. अक्सर शराब पीकर वह मारपीट और गाली गलौज करता था.

जैसलमेर के डांडेवाला फील्ड में नेचुरल गैस की खोज, ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

जयपुर दुनियाभर में ऊर्जा संकट के बीच राजस्थान से खुशखबरी मिली है. सीमावर्ती जिले जैसलमेर में नेचुरल गैस का भंडार मिला है. जैसलमेर बेसिन स्थित डांडेवाला फील्ड में ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने नए प्राकृतिक गैस भंडार की सफल खोज की है. इस उपलब्धि को भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. डांडेवाला क्षेत्र के सानू फॉर्मेशन से पहली बार प्राकृतिक गैस का सफल प्रवाह शुरू हुआ है. हर दिन 25 हजार स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर उत्पादन परीक्षण के दौरान यहां से करीब 25 हजार स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन गैस उत्पादन दर्ज किया गया. ऑयल इंडिया लिमिटेड के अनुसार, कंपनी ने इस कुएं की ड्रिलिंग करीब 950 मीटर की गहराई तक की थी. प्रारंभिक तकनीकी मूल्यांकन और भूवैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर लगभग 75 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस संसाधन होने की संभावना जताई जा रही है. केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 'एक्स' पर जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है और राजस्थान में मिली यह सफलता ऊर्जा आत्मनिर्भरता के अभियान को नई गति देगी. मरुस्थल में मौजूद हो सकते हैं कई बड़े भंडार खास बात यह है कि डांडेवाला क्षेत्र में पहले पारंपरिक गैस उत्पादन होता रहा है. लेकिन सानू फॉर्मेशन में पहली बार गैस की मौजूदगी सामने आई है. इस नए गैस भंडार की खोज के बाद रेगिस्तानी इलाके के लिए उम्मीद जग गई है. संभावना है कि मरुस्थल में कई बड़े ऊर्जा संसाधन मौजूद हो सकते हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच आई यह सफलता देश के लिए राहत की खबर मानी जा रही है. वर्तमान में भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में जैसलमेर की यह खोज रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है.

अमेरिका के विदेश मंत्री जयपुर में, रामबाग पैलेस से लेकर आमेर तक हाई-प्रोफाइल विजिट का शेड्यूल तैयार

जयपुर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के जयपुर दौरे की तैयारियां जोरों पर हैं. रुबियो सोमवार (25 मई) को परिवार के साथ जयपुर आ रहे हैं. इस हाई-प्रोफाइल दौरे को लेकर गुलाबी नगरी में प्रशासनिक और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं है, बल्कि भारत और अमेरिका के मजबूत होते रिश्तों के लिहाज से भी बेहद अहम है. यही वजह है कि राजस्थान की राजधानी में व्यवस्था चाक-चौबंद है. रूबियो के दौरे का शेड्यूल और उससे जुड़ी हर जरूरी बात इस खास रिपोर्ट में पढ़िए. हाथी गांव में चल रही विशेष तैयारियां मार्को रूबियो के हाथी गांव में दौरे को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं. हालांकि, इससे जुड़ा कोई आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है. हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री के आगमन को लेकर यहां विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं. उनका बेहद खास अंदाज में पारंपरिक स्वागत किया जाएगा. इसके साथ ही मरुधरा की इस धरती पर हाथियों को किस तरह रखा जाता है और उनका रखरखाव कैसे होता है, इसकी भी जानकारी दी जाएगी. इससे पहले जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जयपुर आए थे, तब भी हाथियों के विशेष स्वागत ने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थीं. राजस्थानी इतिहास को करीब से जानेंगे रुबियो सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं. एयरपोर्ट से लेकर आमेर तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री का विशेष विमान दोपहर करीब 2 बजे जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड होगा. एयरपोर्ट पर राजस्थानी परंपरा के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया जाएगा. इसके बाद उनका काफिला सीधे जयपुर के प्रतिष्ठित हेरिटेज होटल 'रामबाग पैलेस' के लिए रवाना होगा. रामबाग पैलेस में रुकने के बाद मार्को रूबियो राजस्थान के इतिहास के को करीब से देखने के लिए आमेर फोर्ट पहुंचेंगे. कल्चरल डिप्लोमेसी के लिहाज से भी अहम है दौरा जयपुर की विरासत, यहां की समृद्ध संस्कृति और राजस्थानी मेहमाननवाजी को इस पूरे दौरे का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है. यही वजह है कि जानकार इस यात्रा को केवल राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि 'सांस्कृतिक कूटनीति' यानी कल्चरल डिप्लोमेसी के एक नए अध्याय के तौर पर देख रहे हैं.

जयपुर से जैसलमेर तक तपिश का कहर, 45 डिग्री पार तापमान, हीटवेव का अलर्ट

जयपुर राजस्‍थान में शनिवार को मौसम ने करवट ली. कई जगहों पर हल्की बूंदाबांदी और तेज हवाओं ने तापमान थोड़ा कम किया. जयपुर, हनुमानगढ़, अलवर, टोंक जिलों के आस पास तेज हवाएं चलने से रात में गर्मी का असर कम रहा. हालांकि, शेखावाटी क्षेत्र के आस पास पश्चिमी विक्षोभ बनने से आज भी हल्की बरसात हो सकती है, लेकिन आज से भीषण गर्मी का दौर शुरू होने वाला है. 2 जून तक रहेगा नौतपा    कल यानी 25 मई से प्रदेश में नौतपा शुरू हो रहा है. 25 मई से 2 जून तक प्रदेश में नौतपा रहेगा. इस दौरान भीषण गर्मी का अलर्ट है. मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के कई इलाकों में तापमान 3 डिग्री तक बढ़ने का अनुमान है. पश्चिमी और पूर्वी भागों में हीटवेव का अलर्ट है.    जैसलमेर में तापमान 45 के पार पिछले 24 घंटे में जैसलमेर में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 45.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इसके अलावा बाड़मेर 45.1, फलोदी 45, बीकानेर में 44.9 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रदेश के कई शहरों में 40 से अधिक तापमान दर्ज हुआ.  राजधानी जयपुर का तापमान 42.6 डिग्री तक पहुंच गया है.     19 शहरों में येलो अलर्ट मौसम विभाग ने आज 19 शहरों के लिए हीटवेव का येलो अलर्ट और 3 शहरों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. प्रदेश के अलवर, बारां, भरतपुर, चित्तौड़गढ़, डीग, धौलपुर, झालावाड़, झुंझनू, खैरथल तिजारा, कोटपुतली बहरोड़, कोटा, प्रतापगढ़, सीकर, बालोतरा, बाड़मेर, चूरू, हनुमानगढ़, जोधपुर, श्रीगंगानर में हीटवेव का येलो अलर्ट और बीकानेर, जैसलमेर और फलोदी में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.   अभी तक 43 लोग लू की चपेट में आ चुके भीषण गर्मी से अभी तक 43 लोग लू की चपेट में आ चुके हैं. हालांकि, अच्छी बात रही सभी लोग इलाज के बाद स्वस्थ है. विभाग की अपील है कि हीटवेव के इन दिनों में लोग सावधानी से रहे. दिन के समय कम से कम घर से बाहर निकले. अगर कोई जरूरी काम से बाहर निकालना पड़े तो चेहरे और सर को सूती कपड़े से ढक कर निकले. अपने साथ पानी या अन्य पेय पदार्थ रखें. उसका सेवन करते रहे.