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राजस्थानी खोबा रोटी: देसी घी से भरपूर कुरकुरी और हेल्दी पारंपरिक रेसिपी

रोटी भारतीय खाने का अहम हिस्सा है जो हर घर में लगभग रोज बनाई जाती है. आमतौर पर लोग गेहूं की नॉर्मल रोटी खाते है. लेकिन भारत में रोटियों की कई ऐसी अनगिनत वैराइटी हैं जो अपने स्वाद के लिए जानी जाती हैं. इन्हीं में से एक है राजस्थान की मशहूर खोबा रोटी जो खाने में टेस्टी होने के साथ-साथ काफी हेल्दी भी होती है. यह रोटी नॉर्मल रोटी से थोड़ी मोटी होती है और इसके ऊपर बने खूबसूरत डिजाइन इसे खास बनाते हैं. खास बात यह है कि इसे घर पर भी बहुत आसानी से बनाया जा सकता है. आइए जानते हैं कि घर पर आसानी से राजस्थानी खोबा रोटी कैसे बना सकते हैं और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. इंग्रेडिएंट्स (ingredients) 4 कप गेहूं का आटा ½ छोटा चम्मच सौंफ पाउडर ½ छोटा चम्मच अजवाइन ¼ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर ¼ कप घी (मोयन के लिए) नमक स्वादानुसार शुद्ध देसी घी (रोटी में भरने और सेकने के लिए) पानी जरूरत के मुताबिक खोबा रोटी बनाते कैसे हैं? खोबा रोटी बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में 4 कप गेहूं का आटा लें. इसमें सौंफ पाउडर, अजवाइन, नमक और हल्दी पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें. अब इसमें 1/4 कप घी का मोयन डालें और हाथों से अच्छे से मिक्स करें, ताकि घी आटे में अच्छी तरह मिल जाए.  इसके बाद थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए नरम और लचीला आटा गूंथ लें. ध्यान रखें कि आटा न ज्यादा सख्त हो और न ही ज्यादा नरम. आटा तैयार होने के बाद इसे 10-15 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि मसाले और घी अच्छी तरह सेट हो जाएं. अब आटे की एक बड़ी लोई लें और इसे मोटा बेलें. इसकी मोटाई लगभग आधा इंच रखें. बेलने के बाद चाकू या कांटे की मदद से रोटी पर हल्के-हल्के छेद कर दें. इससे रोटी अंदर तक अच्छी तरह पकती है और कुरकुरी बनती है.  अब तवे पर थोड़ा सा घी लगाकर रोटी डालें. जब रोटी एक तरफ से हल्की पक जाए तो इसे पलट दें. इसके बाद गैस कम कर दें और उंगलियों या चिमटा की मदद से रोटी की ऊपरी सतह पर छोटे-छोटे पिंच बनाते हुए पारंपरिक खोबा डिजाइन तैयार करें. ये डिजाइन रोटी को खास लुक देने के साथ घी को अंदर तक सोखने में भी मदद करती है. अब रोटी को दोनों तरफ से धीमी आंच पर सुनहरा और खस्ता होने तक सेंकें. चाहें तो पारंपरिक स्वाद के लिए इसे तवे से उतारकर सीधे गैस पर भी हल्का सा सेंक सकते हैं. रोटी तैयार होने के बाद इसके खोबों में ऊपर से देसी घी डालें, ताकि घी पूरी तरह अंदर तक चला जाए. अब गरमागरम खोबा रोटी तैयार है. इसे पंचमेल दाल, गट्टे की सब्जी, लहसुन की चटनी या फिर गुड़ और घी के साथ परोसें. इसका कुरकुरा स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बेहद पसंद आएगा.  

लू का ऑरेंज अलर्ट, राजस्थान के कई जिलों में तापमान 45 से 46 डिग्री के बीच

राजयपुर जस्थान भीषण गर्मी की चपेट में है. पिलानी और चित्तौड़गढ़ में तापमान 46 डिग्री पार हो गया है. इन दोनों जिलों में पारा 46.2 डिग्री दर्ज किया गया. राज्य के लगभग सभी शहरों में सोमवार (18 मई) को अधिकतम तापमान 41 डिग्री से ऊपर रहा. राजधानी जयपुर में भी 43.6 डिग्री दर्ज किया गया. हीटवेव के अलर्ट को देखते हुए अगले 4-5 दिन लोगों की परेशानी बढ़ सकती है. मंगलवार (19 मई) के लिए 7 जिलों में लू का येलो अलर्ट जारी किया गया है. जबकि 5 जिलों में हीटवेव का ऑरेंज अलर्ट है. इन जिलों में भी तापमान 45 के पार मौसम विभाग के अनुसार, श्रीगंगानगर में तापमान 46.1 डिग्री  बना हुआ है. बीकानेर में पारा 46, वनस्थली में 45.6, फतेहपुर में 45.5, कोटा में 45.3, बाड़मेर और चूरू में 45.1 डिग्री दर्ज किया गया. बारां, झालावाड़, कोटा, प्रतापगढ़, बालोतरा, जोधपुर और श्रीगंगानगर में येलो अलर्ट है. वहीं, चित्तौड़गढ़, बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर और फलोदी में लू का ऑरेंज अलर्ट है.    हीट वेव को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी! तेज़ गर्मी और लू सिर्फ थकान ही नहीं, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती है। इस भीषण गर्मी में खुद का और अपने परिवार का विशेष ध्यान रखें। धूलभरी आंधी भी बढ़ाएगी परेशानी इस सप्ताह राज्यभर में मौसम शुष्क रहने की संभावना है. पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में लू जैसी स्थिति रहने का अनुमान है. अगले चार से 5 दिनों तक पश्चिमी, उत्तरी और पूर्वी राजस्थान में 20–30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूलभरी आंधी चलने का पूर्वानुमान जताया है. लोगों को गर्मी से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि आने वाले दिनों में तापमान के अधिक रहने की संभावना है.

जयपुर में ‘अमृत महोत्सव उद्घोष’ के दौरान विधानसभा का नया प्रतीक चिह्न हुआ जारी

जयपुर राजस्थान विधानसभा ने अपने 75वें स्थापना वर्ष के ऐतिहासिक मौके पर अपनी एक नई और अनूठी पहचान दुनिया के सामने पेश की है। जयपुर में आयोजित 'अमृत महोत्सव उद्घोष' कार्यक्रम के दौरान विधानसभा के नवनिर्मित आधिकारिक प्रतीक चिह्न का विमोचन किया गया और साथ ही विधानसभा परिसर के विभिन्न ऐतिहासिक द्वारों का नामकरण भी किया गया। इस समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। नए लोगो में खेजड़ी और ऊंट को मिला स्थान राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की कल्पना से तैयार इस नए प्रतीक चिह्न में राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। नए लोगो में दो सबसे खास तत्वों को शामिल किया गया है, जो पूरे मरुस्थल का सम्मान हैं। राजस्थान के कल्पवृक्ष खेजड़ी को लोगो में किया शामिल राज्य वृक्ष 'खेजड़ी' कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी हरा-भरा रहने और जीवन को बनाए रखने की क्षमता का प्रतीक है। ग्रामीण जीवन और पर्यावरण संतुलन की रीढ़ माने जाने वाले इस वृक्ष को लोगो में शामिल कर राज्य की पर्यावरणीय विरासत को सलाम किया गया है। रेगिस्तान का जहाज ऊंट भी लोगो में शामिल राज्य पशु ऊंट मरुधरा की जीवटता, अटूट धैर्य और मजबूती से आगे बढ़ने के स्वभाव को दर्शाता है। यह राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का सबसे मजबूत स्तंभ है। ऊंट सदियों से राजस्थान के शूरवीरों और राजा-महाराजाओं का न केवल युद्ध के मैदान में विश्वसनीय साथी रहा है, बल्कि मरुधरा के व्यापारिक कारवानों की मुख्य जीवनरेखा भी रहा है। बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह ने विश्व प्रसिद्ध 'गंगा रिसाला' का गठन किया था, जिसने प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वैश्विक स्तर पर अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया। 1913 का इतिहास और नेहरू की 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' का जिक्र समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने राजस्थान की प्राचीन लोकतांत्रिक जड़ों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत में लोकतंत्र नया नहीं है। पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रसिद्ध किताब 'The Discovery of India' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में प्राचीन काल से ही लोकतांत्रिक परंपराएं मौजूद रही हैं। राज्यपाल ने एक बेहद दिलचस्प ऐतिहासिक तथ्य साझा करते हुए बताया कि आजादी से बहुत पहले, साल 1913 में ही बीकानेर रियासत में 'प्रतिनिधि सभा' हुआ करती थी, जहां बाकायदा बैलेट पेपर के जरिए मतदान कराया जाता था।

मीटर पूरा, टंकी आधी! राजस्थान में पेट्रोल पंपों पर ‘साइलेंट स्कैम’ का खुलासा

जयपुर  अगर आप भी अपनी गाड़ी में ईंधन भरवाते समय केवल पेट्रोल पंप के मीटर पर '0' देखकर संतुष्ट हो जाते हैं, तो यह खबर आपकी आंखें खोलने के लिए काफी है। राजस्थान में एक ऐसे शातिर 'साइलेंट स्कैम' का भंडाफोड़ हुआ है, जहां स्क्रीन पर मीटर तो पूरा चल रहा था, लेकिन आपकी गाड़ी की टंकी में तेल कम भर रहा था। उपभोक्ता मामले विभाग की औचक छापेमारी में प्रदेश के 7 शहरों में चल रहे इस बड़े खेल का खुलासा हुआ है। विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेश भर के 25 पेट्रोल पंपों के कुल 43 नोजल को तुरंत प्रभाव से जब्त कर सील कर दिया है। जानिए कैसे कट रही थी आपकी जेब? जांच में सामने आया कि ये पेट्रोल पंप संचालक आधुनिक तकनीक और नोजल में हेरफेर कर हर 5 लीटर की खरीद पर 30 से 60 मिलीलीटर तक कम ईंधन दे रहे थे। दिखने में 50 ML की यह मात्रा बहुत छोटी लगती है और आम जनता को इसका अहसास भी नहीं होता, लेकिन जब दिनभर में हजारों वाहन इन पंपों पर तेल भरवाते हैं, तो यह बूंद-बूंद की चोरी हर महीने लाखों रुपये के 'महा-डाके' में बदल जाती है। विभागीय आकलन के अनुसार, सिर्फ इन चिन्हित 25 पंपों के जरिए ही जनता की जेब से हर महीने करीब 4 लाख रुपये अतिरिक्त ऐंठे जा रहे थे। इन 7 शहरों के पेट्रोल पंप पर गिरी गाज सिरोही: यहां के 7 पेट्रोल पंपों (रामपीर, पवन, करणी, देवनगरी, पार्वती दरिया, सुरेन्द्र जितेन्द्र और भगवती फिलिंग) पर 40 से 50 ML की शॉर्ट डिलीवरी मिली। यहां जनता को हर महीने 1.14 लाख रुपये का चूना लग रहा था। नागौर (11 नोजल जब्त): 4 पेट्रोल पंपों (नंदलाल राजेश कुमार, गुलाबदास आत्माराम, मारवाड़ और आर एल सिहाग) पर हर महीने करीब 378 लीटर तक तेल कम देकर 97 हजार की चपत लगाई जा रही थी। अलवर (5 नोजल बंद): सिंघल और चौधरी सर्विस स्टेशन पर हर महीने 648 लीटर तक कम ईंधन तौला जा रहा था, जिससे 91 हजार रुपये से अधिक की धोखाधड़ी सामने आई है  पाली (5 नोजल बंद): मा आई जी, पूजा एचपी, पार्श्व एनर्जी और कछवा बस सर्विसेज पर जनता को 55 हजार रुपये से अधिक की चपत लग रही थी।  सीकर (4 नोजल बंद): सीएसआरबी फिलिंग स्टेशन (नायरा) पर हर महीने 216 लीटर तक शॉर्ट डिलीवरी पकड़ी गई। भीलवाड़ा (4 नोजल सील): दीपक पेट्रोलियम, शिव इंडियन ऑयल एवं श्री श्याम फिलिंग स्टेशन पर भी तेल कम देने का खेल पकड़ा गया। धोखाधड़ी करने वालों को मंत्री की सीधी चेतावनी इस बंपर कार्रवाई के बाद उपभोक्ता मामले मंत्री सुमित गोदारा ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उपभोक्ताओं के अधिकारों और उनकी गाढ़ी कमाई के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि पेट्रोल पंपों पर यह औचक निरीक्षण अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा, ताकि जनता को इस धोखाधड़ी से पूरी तरह बचाया जा सके।

बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक या बड़ा दांव? राजस्थान में तीन राज्यसभा सीटों पर सियासी घमासान

जयपुर राजस्थान की सियासत में एक बार फिर बड़ा सियासी ड्रामा देखने को मिल सकता है। आगामी जून महीने में होने वाले राज्यसभा की तीन सीटों के चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने ऐसी बिसात बिछाई है, जिसने कांग्रेस खेमे में हलचल तेज कर दी है। शनिवार देर रात तक चली बीजेपी कोर कमेटी की मैराथन बैठक से छनकर जो खबर आ रही है, उसके मुताबिक बीजेपी विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल न होने के बावजूद तीनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। राज्यसभा में खाली हो रही इन नेताओं की सीटें गणित के हिसाब से बीजेपी केवल दो सीटें आसानी से जीत सकती है, लेकिन तीसरी सीट पर दांव खेलकर वह विपक्ष की घेराबंदी करने के मूड में है। हालांकि, आखिरी फैसला दिल्ली में बैठा आलाकमान ही करेगा। बता दें कि भाजपा सांसद राजेंद्र गहलोत और रवनीत सिंह बिट्टू का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। कांग्रेस सांसद नीरज डांगी की सीट पर भी चुनाव की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। 'नारी शक्ति' को आगे कर मास्टरस्ट्रोक खेलने की तैयारी बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर लंबी माथापच्ची हुई। अंदरखाने से खबर है कि पार्टी इस बार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का बड़ा संदेश देने के लिए किसी महिला चेहरे को राज्यसभा भेज सकती है। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने संकेत दिया कि राजस्थान से अब तक केवल नजमा हेप्तुल्ला ही बीजेपी की तरफ से राज्यसभा पहुंची हैं, ऐसे में इस बार किसी महिला को मौका मिलने की उम्मीद बेहद ज्यादा है। 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' पर भी मंथन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंत्रियों को आने वाले दिनों में जिला स्तर पर 'प्रवास' करने और संगठन को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, बीजेपी 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' के ढांचे के तहत आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को कराने की रणनीति पर भी विचार कर रही है। चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय पदाधिकारी नितिन नवीन का भी जल्द ही राजस्थान का अचानक दौरा हो सकता है। साफ है कि बीजेपी इस बार राज्यसभा चुनाव को केवल औपचारिकता न मानकर, इसे एक बड़े सियासी रण की तरह लड़ रही है। NEET पेपर लीक और अपराध के आंकड़ों पर भी बनी रणनीति इस हाई-प्रोफाइल बैठक में सिर्फ चुनाव ही नहीं, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और हालिया विवादों पर भी गंभीर चर्चा हुई। बैठक में हाल ही की NCRB रिपोर्ट को लेकर चिंता जताई गई, जिसमें कथित तौर पर जयपुर को रेप केसों में शीर्ष पर बताया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने नेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे इस मुद्दे पर आक्रामक रहें और जनता के बीच जाकर कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने का भरोसा दें। कांग्रेस को घेरने का प्लान देश भर में गरमाए NEET पेपर लीक मामले के राजनीतिक नफा-नुकसान पर भी मंथन हुआ। बीजेपी ने अपने सोशल मीडिया विंग और नेताओं को साफ निर्देश दिए हैं कि वे विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय हुए पेपर लीक के मामलों को आक्रामक तरीके से उठाएं।  

जोधपुर कांकाणी केस: सलमान खान समेत अन्य आरोपियों की अपील पर राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई आगे बढ़ी

जोधपुर जोधपुर के बहुचर्चित कांकाणी काला हिरण शिकार मामले में सोमवार को राजस्थान हाई कोर्ट में एक बार फिर हलचल देखने को मिली. बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान समेत अन्य फिल्मी सितारों से जुड़े इस चर्चित केस की सुनवाई न्यायाधीश रेखा बोराणा की अदालत में हुई.  कोर्ट से तैयारी के लिए मांगा समय सुनवाई के दौरान सलमान खान और अन्य कलाकारों सैफ अली खान, तब्बू, नीलम और सोनाली बेंद्रे की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत से अतिरिक्त समय मांगा है. बचाव पक्ष का कहना था कि मामले से जुड़े कुछ दस्तावेजों, तथ्यों का और अध्ययन किया जाना बाकी है, इसलिए उन्हें तैयारी के लिए समय दिया जाए. कोर्ट ने 13 जुलाई का दिया समय राज्य सरकार की अपील और सलमान खान की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई होनी थी. अधिवक्ता महिपाल बिश्नोई ने बताया कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की है. काला हिरण शिकार का मामला साल 1998 में फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग के दौरान जोधपुर के कांकाणी गांव में काला हिरण शिकार का मामला सामने आया था. इस मामले में सलमान खान को 5 साल की सजा हुई थी.  मामले में सह आरोपी फिल्म अभिनेता सैफ अली खान, अभिनेत्री नीलम, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और दुष्यंत सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था.   दो अपीलों पर सुनवाई हाेनी थी इनके बरी होने पर राज्य सरकार की तरफ से 'लीव टू अपील' दायर की गई थी, इसके अलावा सलमान खान की ट्रांसफर पिटीशन पर भी सुनवाई हुई.   विश्नोई समाज के अधिवक्ता महिपाल विश्नोई ने बताया कि जस्टिस रेखा बोराणा की कोर्ट में दो मुख्य अपीलों में सुनवाई होनी थी. पहली अपील सलमान खान की ओर से अधीनस्थ कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी.  पूर्व में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने सलमान खान को 5 साल के कारावास और 25,000 रुपए के जुर्माने से दंडित किया था.  दूसरी अपील राज्य सरकार की ओर से सैफ अली खान, सोनाली बेंद्रे, तब्बू, नीलम और दुष्यंत सिंह को बरी किए जाने के खिलाफ पेश 'लीव टू अपील' में शामिल थी.  सह-अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था. राज्य सरकार ने इन्हें बरी करने के आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी है. एडवोकेट महिपाल विश्नोई ने बताया कि सलमान खान एवं सैफ अली खान के वकीलों ने बहस के लिए समय देने की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई को 13 जुलाई को नियत की है.

निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार के तर्कों को नहीं मिली राहत

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट में आज पंचायत और निकाय चुनाव टालने के मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई टल गई. अवमानना याचिका पर अगली सुनवाई 26 मई को होगी. जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल, जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ ने आदेश दिए. गिर्राज सिंह देवंदा और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने अवमानना याचिका दायर की है. याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट प्रेमचंद देवंदा और पुनीत सिंघवी ने पैरवी की. कोर्ट ने जताई नाराजगी इससे पहले 11 मई को हाई कोर्ट ने सरकार और राज्य चुनाव आयोग के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने तय समय पर चुनाव नहीं कराने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार का रवैया ठीक नहीं है, और उसे पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है. कोर्ट को चुनाव में देरी की बताई वजह   कोर्ट में सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि वार्डों के आंतरिक सीमांकन को लेकर हाईकोर्ट के दो अलग-अलग फैसले आने से देरी हुई, जबकि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं आने के कारण आरक्षण तय नहीं हो पाया. बेंच ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदेश निकायों को लेकर था, तो पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए, और ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, यह हमारे सामने नहीं है. कोर्ट ने जजमेंट रिजर्व रखा कोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि राजस्थान का बड़ा हिस्सा रेगिस्तानी है, जून में हीटवेव चलती है, जुलाई में बरसात शुरू हो जाती है और ऐसे में चुनाव कराना मुश्किल होगा, लेकिन बेंच ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया. सुनवाई के बाद अदालत ने जजमेंट रिजर्व रख लिया है. 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के दिर्नेश थे हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला देते हुए 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने और 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन पूरा करने के निर्देश दिए थे. अब सरकार और चुनाव आयोग ने और समय मांगा है, जबकि इस मुद्दे पर अवमानना याचिका भी दायर है, जिस पर 18 मई को सुनवाई होगी.

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद एक्शन, चंबल नदी में उतरी पुलिस-वन विभाग की टीम

  करौली राजस्थान में करौली जिले के नेशनल चंबल घड़ियाल सेंचुरी में अवैध बजरी खनन को लेकर करौली पुलिस ने चंबल के बीहड़ों में उतरकर बजरी माफियाओं के खिलाफ एक बड़ा और हाई-वोल्टेज ऑपरेशन चलाया. करौली के एसपी लोकेश सोनवाल के कुशल निर्देशन में पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने चंबल नदी में पांच घंटे तक मोर्चा संभाला और अवैध खनन के पूरे नेटवर्क को हिलाकर रख दिया. सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई थी सख्ती अवैध बजरी खनन पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताई थी. कोर्ट ने कहा कि यह लापरवाही पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा है. अदालत के सामने आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि राज्य के 40 संवेदनशील इलाकों में से सिर्फ एक जगह सीसीटीवी कैमरा लगा है और सुरक्षा के सारे दावे अधूरे हैं. इस सख्ती के बाद सरकार ने तुरंत धौलपुर, करौली, कोटा, बूंदी और सवाई माधोपुर में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में विशेष टास्क फोर्स का गठन कर दिया है. एसपी की अगुवाई में बड़ा एक्शन सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए करौली एसपी लोकेश सोनवाल ने खुद कमान संभाली. उनके नेतृत्व में पुलिस ने शनिवार को करणपुर क्षेत्र के गौटा घाट पर धावा बोल दिया. पुलिस को आता देख माफिया ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लेकर मध्य प्रदेश की सीमा की तरफ भागने लगे. एसपी के कड़े निर्देशों के बाद थानाधिकारी देवेश कुमार जाटव अपने पुलिस जवानों के साथ मौके पर पहुंचे. इसके बाद जांबाज जवान वर्दी और हथियारों के साथ नदी के गहरे पानी में उतर गए और दूर तक माफियाओं का पीछा किया. एसपी सोनवाल ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन होगा और माफिया चाहे सीमा पार के हों, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा. घड़ियालों के आशियाने पर मंडराता खतरा यह पूरा अवैध कारोबार घड़ियाल प्रजनन केंद्र से महज 500 मीटर की दूरी पर चल रहा है. भारी मशीनों का शोर और अवैध खनन घड़ियालों के प्राकृतिक माहौल को नष्ट कर रहा है. राजस्थान से मध्य प्रदेश के श्योपुर तक फैले इस नेटवर्क में हर दिन करीब 200 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अवैध बजरी पार कराई जा रही हैं. फिलहाल पुलिस ने जेसीबी से रास्ते काटकर माफियाओं के रूट बंद कर दिए हैं और अब हर किसी की नजर 20 मई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है.

ऐतिहासिक ढाई दिन का झोंपड़ा में धार्मिक आयोजन को लेकर प्रशासन से अनुमति मांगी गई

अजमेर अजमेर में स्थित ऐतिहासिक अढ़ाई दिन का झोंपड़ा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. यहां स्थानीय लोगों ने हनुमान चालीसा पाठ की परमिशन मांगी है. महाराणा प्रताप सेना ने जिला कलेक्टर को मेल कर अगले मंगलवार (19 मई) के लिए अनुमति की मांग की है. संगठन के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने कहा कि हम शांतिपूर्ण धार्मिक आयोजन कराना चाहते हैं. परमान का दावा है कि अढ़ाई दिन का झोपड़ा केवल एक ऐतिहासिक संरचना नहीं, बल्कि प्राचीन संस्कृत कंठाभरण विद्यालय और हिंदू मंदिर का स्वरूप रहा है. "भोजशाला के फैसले से आस्था मजबूत हुई" मेल में लिखा, "परिसर की दीवारों और स्थापत्य में मौजूद शिल्प और ऐतिहासिक साक्ष्य इसकी प्राचीन सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं. मध्यप्रदेश की भोजशाला से जुड़े न्यायालय के फैसले से सनातन धर्मावलंबियों की आस्था को मजबूती मिली है." बता दें कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है. शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिसर पहुंचे थे और हनुमान चालीसा का पाठ और पूजा संपन्न हुई. संगठन का दावा- कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी साथ ही महाराणा प्रताप सेना ने प्रशासन को आश्वस्त किया कि प्रस्तावित हनुमान चालीसा पाठ पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा. किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी. कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है. 12वीं सदी की धरोहर देश-विदेश में विख्यात गौरतलब है कि ढाई दिन का झोपड़ा अजमेर की सबसे प्राचीन और चर्चित ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाता है. इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में माना जाता है. इंडो-इस्लामिक वास्तुकला, विशाल मेहराबों, नक्काशीदार स्तंभों और प्राचीन शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है. देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं.