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साध्वी प्रेम बाईसा की रहस्यमयी मौत: जांच तेज, आश्रम में SIT-FSL की बड़ी कार्रवाई

जोधपुर साध्वी प्रेम बाईसा की मौत से जुड़े मामले में जांच तेज हो गई है। इस मामले की तह तक जाने के लिए गठित SIT की टीम पूरी सक्रियता के साथ जांच में जुटी हुई है। इसी कड़ी में एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम भी आज एक बार फिर साध्वी के आश्रम पहुंची, जहां घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, आश्रम परिसर से अहम साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, ताकि मौत की असल वजह का पता लगाया जा सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कारण का नहीं हुआ खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साध्वी की मौत का साफ कारण नहीं निकल पाया है। मगर मेडिकल सूत्रों के मुताबिक उनकी छोटी और बड़ी आंत में लाल निशान मिले हैं, जो अक्सर जहर के असर से होते हैं। अगर सच में जहर का शक सही है, तो आगे की जांच में यह साफ होगा। अब उनके आंतरिक अंगों (जैसे फेफड़े, यकृत, गुर्दा, आंत) की रासायनिक जांच हो रही है। FSL की रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि शरीर में कोई जहरीला पदार्थ था या नहीं और अगर था, तो वह कैसे पहुंचा। पुलिस ने आश्रम के बाहर दो अस्थालाइन की बोतलें भी बरामद की हैं। इसके चलते सवाल उठ रहे हैं कि क्या साध्वी को अस्थमा की दिक्कत थी। अस्थमा के मरीजों को अक्सर डेक्सोना इंजेक्शन दिया जाता है, जो स्टेरॉयड है और फेफड़ों की सूजन कम करता है। लेकिन ज्यादा मात्रा में यह खतरनाक भी हो सकता है।

शिवराज का बीकानेर से संदेश: पत्नी की तारीफ के लिए चाहिए साहस, किताब लिखने का मन भी है

भोपाल/बीकानेर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने बेबाक और मजाकिया अंदाज के लिए जाने जाते हैं। राजस्थान के बीकानेर में आयोजित एक सामूहिक विवाह सम्मेलन के दौरान उन्होंने एक ऐसी घोषणा की, जिसने महफिल लूट ली। शिवराज ने कहा कि वे जल्द ही अपनी 'पत्नी पर एक किताब' लिखेंगे। दरअसल राजस्थान में शिवराज सिंह चौहान मंच से मेघवाल की किताब से मिली प्रेरणा पर यह बात कर रहे थे। यह दिलचस्प वाकया तब हुआ जब शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। मेघवाल ने अपनी पत्नी को समर्पित एक किताब ‘एक सफर हमसफर के साथ’ लिखी है। इसी का जिक्र करते हुए शिवराज ने उनकी जमकर तारीफ की। किसी में इतनी हिम्मत नहीं होती, पत्नी की खुलकर तारीफ कर दे शिवराज ने मजाकिया लहजे में कहा, 'भाभी जी पर आपने जो किताब लिखी है, उसे मैं एक अद्भुत घटना मानता हूं। किसी में इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह पत्नी की खुलकर तारीफ कर दे, वरना लोग कहने लगते हैं कि ये तो जोरू का गुलाम है।' अब तो मैं भी एक किताब लिख ही दूंगा उन्होंने आगे कहा कि मेघवाल के साहस को देख अब वे भी प्रेरित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने मंच से मुस्कुराते हुए कहा, 'अब तो मैं भी एक किताब लिख ही दूंगा। सच में, जीवन में धर्मपत्नी का बहुत बड़ा योगदान होता है।' कैलाश खेर ने मंच से लोगों को सुनाई खरी-खोटी गायक कैलाश खेर जब भी मध्य प्रदेश आते हैं, तो अपने गानों के साथ-साथ लोगों को खरी-खोटी सुनाने से भी नहीं चूकते। हाल ही में उन्होंने सतना में एक कॉन्सर्ट किया था, जिसका एक वीडियो अब सामने आया है। वीडियो में कैलाश खेर यह कहते नजर आ रहे हैं कि, ‘बहुत कम ऐसे कॉन्सर्ट होते हैं, जहां खाना भी चल रहा हो और गाना भी चल रहा हो। म्यूजिक को इज्जत तब मिलती है, जब खाना-वाना पहले डकार लिया जाए या फिर बाद में ठूंस लिया जाए।’ उन्होंने आगे मजाकिया लहजे में कहा- वैसे भी अपनों से ये कहने का बड़ा मन करता है कि बहुत खाते हो भाई। यह पहला मौका नहीं है जब कैलाश खेर के बयान चर्चा में आए हों। इससे पहले मंदसौर में वे एक भाजपा विधायक के नाम को लेकर मजाक कर चुके हैं और वहां की जनता को गरीब भी कह दिया था।

नागौर कलक्टर की अनोखे अंदाज में हुई रिटायरमेंट पार्टी

नागौर. जिला कलक्टर अरुण कुमार पुरोहित की विदाई एक अनोखे और उत्साहपूर्ण तरीके से हुई, जिसमें बैंड-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ उनका सम्मान किया गया। इस खास मौके पर कलक्ट्रेट शाखा के सभी अधिकारी, कार्मिक और आम नागरिक भावुक नजर आए। विभागीय नियमों के तहत पुरोहित अब सेवानिवृत्त हो गए हैं और उनके इस विदाई समारोह को एक विवाह समारोह जैसा रूप दिया गया था। बैंड बाजों की धुन के साथ उनकी विदाई का दृश्य किसी बारात से कम नहीं था। भावुक हुए अधिकारी और कर्मचारी सेवानिवृत्त जिला कलक्टर के विदाई समारोह में कलक्ट्रेट और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ कर्मचारियों का भी बेहद भावुक माहौल था। अरुण कुमार पुरोहित ने अपने दो साल के कार्यकाल में सरल, सहज और शालीन व्यवहार से सबको प्रेरित किया। उनकी नवाचारों और कामकाजी शैली के कारण ये विदाई समारोह सभी के लिए यादगार और भावुक क्षण बन गया। कलक्टर की गाड़ी को दूल्हे की तरह सजाया गया और विदाई गीतों की धुन कलक्ट्रेट परिसर में गूंज रही थी। सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले एक भोज का आयोजन भी किया गया, जिसमें सभी स्टाफ ने अपनी भावनाएं शेयर की। इसके बाद कलक्टर को सभागार में माल्यार्पण कर विदाई दी गई। इस अवसर पर उपस्थित सभी ने बताया कि 'जिला कलक्टर अरुण कुमार पुरोहित हमेशा समय के पक्के थे और उन्होंने हर कार्य में सटीकता से योगदान दिया। वे न केवल विभागीय कार्यों में सक्रिय रहे, बल्कि आमजन की भावनाओं को समझते हुए उनके साथ विचार-विमर्श करते थे। उनका व्यक्तित्व और कार्यशैली हमेशा प्रेरणादायक रही, और जब तक वे पद पर रहे, वे सभी को एक परिवार की तरह मानते रहे।'

राजस्थान में कल से ओलावृष्टि के साथ बारिश का अलर्ट

जयपुर. राजस्थान समेत शेखावाटी में उत्तरी हवाएं चलने का असर लगातार दूसरे दिन भी नजर आया। सुबह कडाके की सर्दी के बाद दिनभर तल्ख धूप खिली। केन्द्रों पर दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार चौबीस घंटे में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से शेखावाटी के तीनों जिलों सहित अजमेर, भरतपुर जयपुर संभाग में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। 1-2-3-4 फरवरी को इन जिलों में अलर्ट मौसम विभाग ने राजस्थान के कई हिस्सों जैसे भीलवाड़ा, राजसमंद, पाली में आज ओलावृष्टि और गरज चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। जिसमें अजमेर, कोटा, जयपुर, भरतपुर संभाग सहित शेखावाटी क्षेत्र के जिले शामिल है। वहीं 1 और 2 फरवरी को भी अजमेर, कोटा, जयपुर और भरतपुर संभाग में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश (मावठ) का दौर जारी रहेगा। वहीं 1 अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, धौलपुर, जयपुर, झुंझुनूं, करौली, खैरथल-तिजारा, टोंक, कोटा, बूंदी, बारां कोटपूतली-बहरोड़, सीकर, हनुमानगढ़ और चूरू में मेघगर्जन-वज्रपात का येलो अलर्ट भी जारी किया है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अंपायर प्रोफेसर रघुवीर सिंह राठौड़ की मौत

उदयपुर. लेक सिटी उदयपुर और क्रिकेट जगत के लिए एक दुखद खबर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले दिग्गज अंपायर और प्रख्यात शिक्षाविद् प्रोफेसर रघुवीर सिंह राठौड़ (88) का निधन हो गया। वे पिछले 15 दिनों से अस्वस्थ थे और उदयपुर के एक अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था, जहां शाम करीब चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। बता दें कि प्रोफेसर राठौड़ का व्यक्तित्व बहुआयामी था। जहां एक ओर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की पिच पर सख्त अंपायरिंग की, वहीं दूसरी ओर मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (MLSU) में भूगोल के प्रोफेसर के रूप में हजारों छात्रों का भविष्य संवारा। उनके शिष्यों की सूची में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, पूर्व सांसद नमोनारायण मीणा और पूर्व आईएएस धर्मसिंह सागर जैसी दिग्गज हस्तियां शामिल हैं। अंपायरिंग करियर की प्रमुख उपलब्धियां प्रो. राठौड़ सेंट्रल जोन (राजस्थान, यूपी, एमपी, विदर्भ और रेलवे) से निकलने वाले अग्रणी अंतरराष्ट्रीय अंपायरों में से एक थे। करियर के मुख्य पड़ाव में अपना पहला टेस्ट मैच 1992 में चंडीगढ़ में भारत बनाम श्रीलंका के बीच कराया। साल 1993 में चेन्नई में भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट मैच में भी उन्होंने अंपायर की कमान संभाली। उन्होंने कुल सात अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मैचों में अंपायरिंग की, जिसमें पहला मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच था। तीन दशक तक संभाली उदयपुर क्रिकेट की कमान उनके घनिष्ठ मित्र और पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर बलवंत शर्मा ने बताया कि प्रो. राठौड़ का क्रिकेट प्रशासन में भी अतुलनीय योगदान रहा। वे 1966 से 1996 तक लगातार 30 वर्षों तक उदयपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव रहे। इसके बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी बलवंत शर्मा को सौंपी थी। खेल जगत में शोक की लहर उनके निधन की खबर मिलते ही वंडर क्रिकेट एकेडमी परिसर में एक शोक सभा आयोजित की गई। जिला क्रिकेट संघ के सचिव मनोज चौधरी, कोच और खिलाड़ियों ने मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उदयपुर के खेल प्रेमियों का कहना है कि प्रो. राठौड़ के निधन से एक युग का अंत हो गया है, जिन्होंने शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों को समान रूप से समृद्ध किया।

दौसा से कोटा के बीच 5 घंटे का सफर घटकर 2 घंटे में होगा पूरा

दौसा. जिलेवासियों के लिए खुश खबर है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दौसा से कोटा बीच होली तक वाहनों का आवागमन शुरू हो जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने लक्ष्य तय किया है कि फरवरी तक शेष बचे कार्यों को पूरा कर लिया जाएगा। कोशिश रहेगी कि फरवरी या होली से पहले शेष कार्य को पूरा कर लिया जाए। दौसा जिले के छात्र-छात्रा बड़ी संख्या में कोटा पढाई करते हैं। दौसा से कोटा के लिए सीधी ट्रेन नहीं है। ऐसे अधितकतर युवा सड़क मार्ग से ही सफर करते हैं। अभी पांच घंटे से ज्यादा लग रहे अभी दौसा से कोटा के लिए सड़क सही नहीं है। बीच में कई जगह काम चल रहा है। ऐसे में करीब पांच घंटे का समय लग रहा है। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यह सफर कार से करीब दो घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे समय व धन दोनों की बचत होगी। एक्सप्रेस-वे पर आवागमन शुरू होने से कोटा संभाग के लोगों को भी फायदा होगा। वर्तमान में कोटा से दिल्ली पहुंचने में करीब 9 घंटे का समय लगता है। लेकिन, एक्सप्रेस-वे के चालू होने के बाद यह सफर करीब 5 में पूरा होगा। यहां चल रहा कार्य वर्तमान में लाखेरी (बूंदी) और सवाई माधोपुर के बीच चल रहा निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। दावा किया गया है कि जल्द ही इस हिस्से का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। वर्तमान में इस छोटे से टुकड़े के अधूरे होने के कारण ट्रैफिक को डाइवर्ट करना पड़ता है, लेकिन फरवरी से वाहन चालक बिना किसी बाधा के सीधे दिल्ली की ओर बढ़ सकेंगे। विकास की नई राह खुलेगी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का यह हिस्सा दौसा व कोटा संभाग के लिए विकास की नई राह खोलेगा। इससे व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा और पर्यटन के क्षेत्र में भी नए अवसर खुलने की उम्मीद है। सुगम परिवहन व्यवस्था से न केवल लोगों को फायदा होगा, बल्कि औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी। दौसा वालों के लिए रणथम्भौर जाना आसान होगा। दरा टनल का काम मार्च तक होगा पूरा एक्सप्रेस-वे के दूसरे छोर यानी झालावाड़ की तरफ भी काम तेजी से चल रहा है। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से गुजरने वाली दरा टनल का कार्य भी मार्च तक पूरा होने की संभावना है। यह टनल परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है, क्योंकि इसके पूरा होने से झालावाड़ और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और बेहतर हो जाएगी। इनका कहना है दौसा से कोटा के बीच अभी काम चल रहा है। हमारा प्रयास रहेगा कि फरवरी तक यातायात शुरू कर देंगे। इससे सफर सुगम हो जाएगा। दौसा से कोटा कार से करीब दो से सवा दो घंटे में पहुंच सकेंगे। -भरत सिंह जोइया, पीडी, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण दौसा

अर्जुनराम मेघवाल का संदेश: भीतर की ऊर्जा को पहचानें और सही दिशा में लगाएं

भीतर की ऊर्जा को पहचानें और सही दिशा में लगाएं- अर्जुनराम मेघवाल   लाडनूं के जैविभा विश्वविद्यालय में भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल व अन्य विभिन्न उद्घाटन व लोकार्पण करते हुए। लाडनूं  भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्री तथा जैविभा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं। हर एक के अंदर ऊर्जा होती है, बस उस ऊर्जा के सही उपयोग की जरूरत है। वे यहां जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय में आयोजित उद्घाटन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों से सीखने पर जोर देते हुए विभिन्न आयुवर्ग में सीखने की स्थिति की जानकारी दी। मेघवाल ने बताया कि अपने घर से शुरू करके विश्वविद्यालय तक सीखते हुए ही पहुंचता है। उन्होंने मल्टी डिसीप्लेन विकसित करने और किसी भी खेल को अपना कर शरीर को स्वस्थ रखने, संगीत को अपना कर तनाव को कम करने तथा गणित को अपना कर दिमाग की एक्सराईज किए जाने की आवश्यकताएं बताईं। साथ ही केन्द्रीय मंत्री ने संस्कारों की जरूरत पर भी बल दिया और कहा कि किशोरावस्था की 12 से 17 साल की आयु में जो भी सीखा जाता है, वे सारे अच्छे या बुरे संस्कार उस पर जीवन भर हावी रहेते हैं। अगर अच्छे संस्कार ग्रहण किए गए तो जीवन भी वह अच्छा बना रहेगा और बुराई सीखने पर वह जीवन में बुराई की तरफ ही आकर्षित होता रहेगा। विश्वविद्यालय परिसर में आचार्य तुलसी की ऊर्जा का अनुभव केन्द्रीय मंत्री मेघवाल ने जैन विश्वभारती संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि यहां नैतिकता का पाठ पढाया जाता है। उन्होंने यहां पढने वाले हर विद्यार्थी को भाग्यशाली बताया ओर कहा कि आचार्य तुलसी की कल्पना शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण थी। इस परिसर में आज भी उनकी ऊर्जा महसूस की जा सकती है। इस अवसर पर उन्होंने विकसित भारत बनाने में युवाओं के योगदान को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इस दिशा में आप सभी का श्रम ही काम आएगा। उन्होंने 21वीं शताब्दी को एशिया की और विशेष रूप से भारत के नेतृत्व की शताब्दी बताया ओर देश की विशेषताओं को उल्लेखित किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विकसित भारत पर लिखी गई अपनी एक कविता ‘हम हैं भारत के लोग’ का गान भी करके सुनाया। विभिन्न उद्घाटन व लोकार्पण किए जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में कुलाधिपति केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री मेघवाल एवं कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने विभिन्न नवनिर्मित भवनों, नवीन अवसंरचनाओं एवं डिजीटल एप्लीकेशंस का उद्घाटन किया। विश्वविद्यालय के अन्तर्गत आचार्य महाप्रज्ञ प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र मेंनवनिर्मित डीलक्स ब्लाॅक के प्रथम तल, आवासीय क्वार्टर व व्यायामशाला, आचार्य महाश्रमण काॅलोनी में नवनिर्मित आवासीय क्वार्टर तथा सत्कार अतिथि गृह एवं केंटीन की नवीन अवसंरचना एवं लिफ्ट स्थापना का उद्घाटन किया। साथ ही डिजीटल प्लेटफार्म में मोबाईल कनेक्ट एप्लिकेशन, एल्यूम्नी नेटवर्क  पोर्टल एवं लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर उप कुलसचिव अभिनव सक्सेना ने केन्द्रीय मंत्री को सभी डिजीटल एप्लीकेशंस की विशेषताएं बताई। इस अवसर पर जैन विश्व भारती के उपखंड अधिकारी मीनू वर्मा, अध्यक्ष अमरचंद लूंकड़, आचार्यश्री महाश्रमण योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष प्रमोद बैद, प्रकाश बैद, टीकमचंद सेठिया, विश्वविद्यालय का समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव देबाशीष गोस्वामी ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. युवराज सिंह खंगारोत ने किया।

शीतलहर की चपेट में राजस्थान, कई इलाकों में तापमान 10 डिग्री से कम

जयपुर राजस्थान में शुक्रवार को 12 जिलों में शीतलहर को लेकर चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार 31 जनवरी से एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसका असर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों- जयपुर, भरतपुर, बीकानेर और कोटा संभाग के जिलों में देखने को मिलेगा। इस दौरान बादल छाए रह सकते हैं और कुछ इलाकों में हल्की बारिश के साथ ओलावृष्टि की भी संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव 2 फरवरी तक बना रहेगा। गुरुवार को सीकर, जयपुर, फतेहपुर, भीलवाड़ा सहित कई शहरों में तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। हल्के बादल और धुंध के कारण दिन में धूप कमजोर रही, जिससे दिन के समय भी सर्दी का असर बना रहा। शेखावाटी क्षेत्र के सीकर समेत कई जिलों में गुरुवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई। बीते 24 घंटों में सुबह तक मौसम साफ रहा, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, पश्चिमी, उत्तरी और पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में धुंध और बादल छा गए। गुरुवार को श्रीगंगानगर, चूरू, बीकानेर, बारां, डूंगरपुर, नागौर, फतेहपुर, करौली, सिरोही, उदयपुर, कोटा, सीकर, पिलानी, जयपुर, अलवर, टोंक, भीलवाड़ा और अजमेर में दिन का अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। वहीं सबसे अधिक अधिकतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस बाड़मेर में रिकॉर्ड हुआ। प्रदेश में सुबह और शाम गलनभरी सर्दी का असर बना रहा। हल्की सर्द हवाओं के चलते कोटा, बाड़मेर, जोधपुर, फलोदी और प्रतापगढ़ को छोड़कर लगभग सभी जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। सबसे ठंडा जिला पाली रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के शहरों का अधिकतम-न्यूनतम तापमान प्रदेश के प्रमुख शहरों में 29 जनवरी को दर्ज तापमान के अनुसार अजमेर में अधिकतम 21.6 और न्यूनतम 9.2 डिग्री सेल्सियस रहा। भीलवाड़ा में अधिकतम तापमान 20 और न्यूनतम 8.2 डिग्री दर्ज किया गया। अलवर में दिन का अधिकतम तापमान 19.5 और न्यूनतम 5.2 डिग्री रहा। जयपुर में अधिकतम 21.5 और न्यूनतम 8.5 डिग्री दर्ज हुआ। पिलानी में अधिकतम तापमान 21 और न्यूनतम 6 डिग्री रहा, जबकि सीकर में अधिकतम 19.5 और न्यूनतम 6 डिग्री दर्ज किया गया। कोटा में अधिकतम तापमान 20.2 और न्यूनतम 10 डिग्री रहा। चित्तौड़गढ़ में दिन का अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम 8.6 डिग्री दर्ज हुआ। उदयपुर में अधिकतम 19 और न्यूनतम 8 डिग्री रहा। बाड़मेर में प्रदेश का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 25.6 डिग्री और न्यूनतम 10.2 डिग्री दर्ज किया गया। जैसलमेर में अधिकतम 23 और न्यूनतम 8.9 डिग्री रहा, जबकि जोधपुर में अधिकतम तापमान 23.9 और न्यूनतम 10.3 डिग्री दर्ज हुआ। बीकानेर में अधिकतम 21 और न्यूनतम 9.6 डिग्री रहा। चूरू में दिन का अधिकतम तापमान 21.2 और न्यूनतम 7 डिग्री दर्ज किया गया। श्रीगंगानगर में अधिकतम 21.1 और न्यूनतम 7.3 डिग्री रहा। बारां में अधिकतम तापमान 19.5 और न्यूनतम 9.8 डिग्री दर्ज हुआ। जालोर में अधिकतम 24 और न्यूनतम 7.5 डिग्री रहा। सिरोही में अधिकतम तापमान 18.6 और न्यूनतम 4.7 डिग्री दर्ज किया गया। फतेहपुर में अधिकतम 21.1 और न्यूनतम 4.4 डिग्री रहा। करौली में अधिकतम 19 और न्यूनतम 8.6 डिग्री दर्ज हुआ। दौसा में अधिकतम तापमान 22.9 और न्यूनतम 6.3 डिग्री रहा। प्रतापगढ़ में अधिकतम 19.4 और न्यूनतम 10.3 डिग्री दर्ज किया गया। डूंगरपुर में अधिकतम 19.5 और न्यूनतम 5.7 डिग्री रहा। वहीं पाली प्रदेश का सबसे ठंडा जिला रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.1 डिग्री और अधिकतम 21.1 डिग्री दर्ज किया गया।

भीलवाड़ा सड़क हादसा: कोहरे के कारण 6 गाड़ियां टकराईं, मावठ और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी

भीलवाड़ा/जयपुर   राजस्थान में कड़ाके की ठंड के साथ अब घना कोहरा जानलेवा साबित हो रहा है। शुक्रवार सुबह भीलवाड़ा जिले में नेशनल हाईवे-58 (भीलवाड़ा-उदयपुर हाईवे) पर कम विजिबिलिटी के कारण एक भीषण सड़क हादसा हो गया। यहाँ कोहरे के कारण एक के बाद एक 6 गाड़ियां आपस में टकरा गईं, जिसमें 3 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 6 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे के बाद लगा 4 KM लंबा जाम सुबह करीब 8 बजे हुए इस एक्सीडेंट के बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि गाड़ियां पूरी तरह चकनाचूर हो गईं और कई लोग मलबे में फंस गए। हादसे के कारण हाईवे पर करीब 4 किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिसमें घायलों को लेने पहुंची एम्बुलेंस भी काफी देर तक फंसी रही। स्थानीय लोगों और पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद गाड़ियों में फंसे लोगों को बाहर निकाला। प्रदेश में कोहरे की स्थिति 27 जनवरी को हुई मावठ (बेमौसम बारिश) के बाद से ही राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में नमी और कोहरा छाया हुआ है। आज सुबह की स्थिति कुछ इस प्रकार रही: जयपुर-दिल्ली हाईवे: यहाँ दृश्यता (Visibility) मात्र 10 मीटर तक रह गई। प्रमुख जिले: सीकर, चूरू, अलवर और कोटा में भी घना कोहरा दर्ज किया गया। मौसम विभाग की चेतावनी: बारिश और ओले गिरने के आसार मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्थान के लोगों को अभी सर्दी से राहत मिलने वाली नहीं है। नया सिस्टम : 31 जनवरी से एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने जा रहा है। प्रभावित क्षेत्र : जयपुर, भरतपुर, बीकानेर और कोटा संभाग में बादल छाए रहेंगे। चेतावनी : 2 फरवरी तक प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की बारिश के साथ ओले (Hailstorm) गिरने की भी संभावना है। सावधानी : कोहरे के दौरान हाईवे पर वाहन चलाते समय 'फॉग लाइट्स' का प्रयोग करें और गति सीमा का विशेष ध्यान रखें।

दिल्ली की ओर कदम? राज्यसभा से राजेन्द्र राठौड़ और सतीश पूनिया की एंट्री की अटकलें

जयपुर. राजस्थान की राजनीति में इस वक्त राजेंद्र राठौड़ और सतीश पूनिया के भविष्य को लेकर जो अटकलें हैं, उन्हें जून 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनाव एक तार्किक अंजाम दे सकते हैं। इस पूरी राजनीतिक बिसात को अगर एक मुकम्मल रिपोर्ट के रूप में देखें, तो तस्वीर काफी साफ नजर आती है। ​राजस्थान बीजेपी में इन दिनों जो सन्नाटा दिख रहा है, वह असल में 'तूफान से पहले की शांति' है। राजेंद्र राठौड़ और सतीश पूनिया जैसे कद्दावर नेताओं का फिलहाल पदविहीन होना कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी आलाकमान इन दोनों चेहरों को किसी जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सही समय पर सही जगह फिट करने के 'होल्डिंग पैटर्न' पर रखे हुए है। ​इस पूरी बिसात में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ जून 2026 में आने वाला है, जब राजस्थान से राज्यसभा की तीन सीटें (नीरज डांगी-कांग्रेस, राजेंद्र गहलोत-बीजेपी और रवनीत सिंह बिट्टू-बीजेपी) खाली हो रही हैं। विधानसभा में बीजेपी के पास 115 से ज्यादा विधायकों का मजबूत बहुमत है, जिसके चलते इन तीन में से दो सीटों पर बीजेपी की जीत पूरी तरह सुनिश्चित है। लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा यह भी है कि पार्टी अपनी घेराबंदी इस तरह कर सकती है कि तीसरी सीट पर भी कब्जा कर लिया जाए, जो कोई बड़ी हैरानी की बात नहीं होगी। ​यही वह मौका है जब राजेंद्र राठौड़ की 'दिल्ली रवानगी' को एक औपचारिक मुहर मिल सकती है। राठौड़ का विशाल संसदीय अनुभव और सदन की बारीकियों पर उनकी पकड़ उन्हें राज्यसभा के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार बनाती है। उन्हें राज्यसभा भेजकर पार्टी न केवल उनके कद का सम्मान करेगी, बल्कि दिल्ली में एक प्रखर वक्ता के रूप में उनका उपयोग भी कर पाएगी। इससे राज्य की आंतरिक राजनीति में भी एक संतुलन बना रहेगा। ​दूसरी ओर, सतीश पूनिया का भविष्य भी इसी बड़े बदलाव से जुड़ा है। हालांकि मदन राठौड़ अभी प्रदेशाध्यक्ष के रूप में मुख्यमंत्री के साथ बेहतर तालमेल बिठा रहे हैं, लेकिन पूनिया की संगठनात्मक क्षमता को दिल्ली नजरअंदाज नहीं कर सकती। पार्टी उन्हें राजस्थान के अध्यक्ष की कुर्सी पर दोबारा बैठाने के बजाय राष्ट्रीय महासचिव या किसी बड़े राज्य के प्रभारी जैसी 'नेशनल रोल' वाली भूमिका में देख रही है।  जून 2026 के समीकरणों में अगर पार्टी तीसरी सीट पर भी दांव खेलती है, तो पूनिया के लिए भी उच्च सदन के दरवाजे खुल सकते हैं, जिससे उन्हें एक 'राष्ट्रीय जाट चेहरे' के रूप में स्थापित किया जा सके। ​जमीन पर कार्यकर्ताओं के बीच संदेश साफ है कि बीजेपी अपने इन दोनों दिग्गजों को 'आउट' नहीं कर रही, बल्कि 2029 की बड़ी जंग के लिए तैयार कर रही है। जून 2026 का राज्यसभा चुनाव वह निर्णायक समय होगा जब इन दोनों नेताओं की 'होल्डिंग' खत्म होगी और वे एक नई और बड़ी भूमिका में नजर आएंगे। तब तक की यह खामोशी केवल उस रणनीति का हिस्सा है जिसे बिना किसी शोर-शराबे और बिना किसी 'ट्रेलर' के सीधे नामांकन के साथ दुनिया के सामने लाया जाएगा।