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मीरी पीरी विवाद पर SGPC अध्यक्ष हरजिंद्र सिंह धामी का अहम दौरा, शाहाबाद में लिया जा सकता है बड़ा निर्णय

कुरुक्षेत्र  शाहाबाद के मीरी पीरी मेडिकल संस्थान में 20 मार्च को हुए विवाद के चलते आज एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंद्र सिंह धामी पहुंचे हैं, जहां वे सैंकड़ों की संख्या में पहुंची संगत के साथ बैठक की जा रही है। बैठक में बड़ा फैसला भी लिया जा सकता है, जिस पर संगत के साथ प्रशासन की भी नजरें टिकी हुई है।  20 मार्च को संस्थान में उस समय बड़ा विवाद हो गया था जब अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे कर्मचारियों से मिलने हरियाणा कमेटी के नामित सदस्य बलजीत सिंह दादूवाल समर्थकों व अन्य पदाधिकारियों के साथ पहुंच गए थे। यहां संस्थान को संभाले जाने को लेकर दादूवाल पक्ष व एसजीपीसी पक्ष आमने-सामने आ गया था तो जमकर हंगामा भी हुआ था, जिसके चलते पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा था। हरियाणा कमेटी उपाध्यक्ष ने इस विवाद के बीच अपने साथ मारपीट किए जाने, पकड़ी उछालने के आरोप भी लगाए थे तो वहीं उन्होंने दादूवाल के साथ मिलकर एसपी को शिकायत भी दी थी। वहीं दूसरे पक्ष ने भी शिकायत दी थी, जिसमें दादूवाल व उनके समर्थकों पर संस्थान पर कब्जे के प्रयास तक के भी आरोप लगाए थे। दादूवाल पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने एसजपीसी पक्ष के सीनियर मीत प्रधान सरदार रघुजीत सिंह विर्क, बलदेव सिंह कैमपुरिया सहित 20 लोगों पर केस दर्ज कर लिया था, जिसके बाद विवाद और भी गहरा गया। जहां अब एसजीपीसी दादूवाल पक्ष पर कार्रवाई की मांग कर रही है वहीं इसी के चलते ही एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंद्र सिंह धामी भी पहुंचे हैं। उनका कहना है कि वे प्रशासन को अपना मांग पत्र सौंपेंगे और प्रशासन मौके पर नहीं पहुंचा तो एसपी कार्यालय का भी घेराव किया जा सकता है। उधर तीन दिन पहले दादूवाल भी हरियाणा कमेटी मुख्यालय पर अपने समर्थकों के साथ बैठक कर धामी से भी बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने का ऐलान कर चुके हैं।  

संशोधन अधिनियम के खिलाफ आवाज: अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

चंडीगढ़. फरीदाबाद स्थित अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और अल-फलाह यूनिवर्सिटी की याचिका पर जवाब देने केंद्र और हरियाणा सरकार ने कोर्ट से कुछ समय मांगा है। सरकार के अनुरोध पर हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट ने हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने संशोधन के माध्यम से असीमित और मनमाने अधिकार अपने हाथ में ले लिए हैं, जो निजी और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकते हैं। याचिका में जोड़ी गई नई धाराएं 44 बी और 46 शामिल हैं, जो छह जनवरी 2025 से लागू होंगी। इन धाराओं के तहत राज्य सरकार को गंभीर चूक या राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित चिंताओं के आधार पर किसी भी निजी विश्वविद्यालय के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने का अधिकार दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन धाराओं में प्रयुक्त शब्दावली अस्पष्ट है, जिससे सरकार को अत्यधिक विवेकाधीन शक्ति मिलती है। उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली के लाल किले पर हुए बम ब्लास्ट मामले में यूनिवर्सिटी का कनेक्शन मिलने के बाद सरकार ने अल-फलाह ट्रस्ट में सीनियर आइएएस अधिकारी डॉ. अमित अग्रवाल को प्रशासक नियुक्त किया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि संशोधन के तहत सरकार सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद भी विश्वविद्यालय पर नियंत्रण बनाए रख सकती है, जिससे निजी विश्वविद्यालय सरकारी संस्थानों में बदल सकते हैं। इसे संविधान के अनुच्छेद 30 का उल्लंघन बताया गया है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी, जिसे वर्ष 2015 में यूजीसी से मान्यता मिली थी, ने अदालत को बताया कि वह मेवात क्षेत्र की वंचित आबादी को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही है। याचिका में आशंका जताई गई है कि यदि सरकार प्रशासक नियुक्त करती है, तो संस्थान का अल्पसंख्यक स्वरूप समाप्त हो जाएगा और क्षेत्र में चल रही सेवाएं प्रभावित होंगी। हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को जवाब दायर करने का आदेश दिया है।

महाकुंभ वाले IIT बाबा अभय सिंह अब गृहस्थ बने, विज्ञान और सनातन के मेल से छाए थे

झज्जर. हरियाणा के जिला झज्जर के सासरौली गांव के रहने वाले और प्रयागराज महाकुंभ मेले में प्रसिद्ध हुए आईआईटी बाबा अभय ने शादी की। शादी के बंधन में बंधने के बाद आज (सोमवार) वे अपने झज्जर वाले घर पहुंचे। उन्होंने 15 फरवरी को शिवरात्रि शुभ अवसर पर शादी की। इसके बाद उन्होंने 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज भी की। आखिर महाकुंभ में क्यों चर्चा में आए अभय सिंह? देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने वैराग्य का मार्ग चुना। अपनी वेशभूषा, बल्कि अपनी तार्किक क्षमता और जीवन के प्रति नजरिये के कारण फेमस हुए। उन्होंने आईआईटी जैसे संस्थान से स्नातक करने के बाद विदेश में मिलने वाले करोड़ों के वेतन और ऐशो-आराम की जिंदगी को ठुकरा दिया।उनका यह निर्णय आज के उस युवा वर्ग को हैरान कर रहा है जो सफलता का पैमाना केवल आर्थिक समृद्धि को मानता है। प्रवचनों में केवल पौराणिक कथाएं नहीं होतीं, बल्कि वे धर्म को विज्ञान की कसौटी पर कसकर समझाते हैं। वे क्वांटम फिजिक्स से लेकर न्यूरोसाइंस तक के उदाहरणों के माध्यम से सनातन धर्म की वैज्ञानिकता को सिद्ध करते हैं, जो शिक्षित युवाओं को खासा प्रभावित कर रहा है। उनके पास न तो कोई बड़ा तामझाम था और न ही वीआईपी संस्कृति का दिखावा। उनकी सरलता ही उनकी सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरी। उन्होंने मानसिक शांति और अवसाद से मुक्ति के लिए आध्यात्मिक मार्ग को वैज्ञानिक तरीके से सुझाया

हरियाणा में 6 ट्रेनी IAS की पोस्टिंग, विवेक यादव होंगे हिसार सहायक आयुक्त, विशाल को मिला रोहतक, शिवानी को कैथल

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने तुरंत प्रभाव से 6 प्रशिक्षणाधीन आईएएस अधिकारियों के नियुक्ति आदेश जारी किए हैं। अमितेज पांगटे को नूंह तथा मुस्कान श्रीवास्तव को फरीदाबाद में सहायक आयुक्त लगाया गया है। इसी तरह शिवानी पांचाल को कैथल, सोहम शैलेन्द्र को करनाल, विशाल सिंह को रोहतक तथा विवेक यादव को हिसार में सहायक आयुक्त लगाया गया है।

महिलाओं के हाथ में स्टीयरिंग: हरियाणा सरकार की ‘पिंक कैब’ योजना से बढ़ेगा रोजगार

चंडीगढ़. हरियाणा की गरीब व जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत खासकर “लखपति दीदी” बनाने के लिए राज्य सरकार खास पहल करने जा रही है। प्रदेश सरकार ने महिलाओं के लिए पिंक कैब योजना आरंभ करने का निर्णय लिया है। इस योजना के अंतर्गत न केवल महिलाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए उन्हें 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य सरकार ने युवा सशक्तीकरण एवं उद्यमिता विकास की योजनाओं को बढ़ावा देने की कड़ी में पिंक कैब योजना आरंभ करने का सैद्धांतिक निर्णय लिया है। महिलाओं के लिए विशेष “पिंक टैक्सी” या “महिला कैब” का विचार भारत और दुनिया के कई हिस्सों में अलग-अलग समय पर शुरू हुआ। देश में सबसे शुरुआती संगठित पहल चेन्नई (2014) में “पिंक टैक्सी” के रूप में देखी गई, जहां महिलाओं द्वारा महिलाओं के लिए कैब सेवा शुरू की गई थी। इसके बाद देश के कई शहरों जैसे बेंगलुरु, कोलकाता और दिल्ली में इस तरह की सेवाएं शुरू हुईं। वैश्विक स्तर पर भी 2015 के आसपास “पिंक टैक्सी” जैसे महिला केंद्रित माडल सामने आए, जिनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस बार के बजट में पिंक कैब योजना की शुरुआत करने के संकेत दिए हैं। राज्य में करीब पांच लाख लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य है, जिसमें से आधी से ज्यादा महिलाएं अब तक लखपति बन चुकी हैं। लखपति दीदी स्वयं सहायता समूह की एक ऐसी सदस्य होती है, जिसकी सालाना पारिवारिक आय एक लाख रुपये या इससे अधिक है। इस आय की गणना कम से कम चार कृषि मौसमों या चार व्यापार चक्रों के लिए की जाती है, जिनकी औसत मासिक आय 10 हजार रुपये से अधिक है, जो कि लगातार बनी रहे। पिंक कैब योजना के अंतर्गत सरकार की चाह है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें स्वाभिमान पैदा किया जा सके। प्रदेश सरकार “पिंक कैब योजना” शुरू कर महिलाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ेगी, ताकि उनमें आत्मनिर्भरता और सुरक्षा की भावना बढ़ सके। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को न सिर्फ रोजगार देना है, बल्कि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना भी है। पिंक कैब योजना के तहत महिलाएं स्वयं वाहन चलाकर आय अर्जित कर सकेंगी और परिवहन क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ा सकेंगी। पिंक कैब योजना को केंद्र सरकार की “लखपति दीदी” अवधारणा से इसलिए जोड़ा गया है, ताकि महिलाएं नियमित आय के स्रोत से जुड़ सकें। महिलाओं को मिलेंगी कई प्रकार की सुविधाएं – – वाहन चलाने का विशेष प्रशिक्षण – इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण – स्वरोजगार के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता – सुरक्षित परिवहन सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था महिलाओं को क्या-क्या लाभ होंगे? 1. आर्थिक सशक्तीकरण – महिलाएं खुद वाहन चलाकर नियमित आय कमा सकेंगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी 2. रोजगार के नए अवसर – परिवहन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और बड़े स्तर पर रोजगार सृजित होगा 3. सुरक्षित यात्रा व्यवस्था – महिला ड्राइवर होने से महिला यात्रियों को अधिक सुरक्षित महसूस होगा, जिससे इस सेवा की मांग भी बढ़ेगी 4. आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास – प्रशिक्षण और स्वरोजगार से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे सामाजिक रूप से अधिक सशक्त बनेंगी 5. हरित (ग्रीन) परिवहन को बढ़ावा 6. इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश सरकार ने युवाओं को उद्यमी बनाने का प्रशिक्षण देने के लिए 60 करोड़ रुपये की लागत से तीन राज्य उद्यमिता विकास संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया है। ऐसे प्रत्येक संस्थान में प्रति वर्ष एक हजार युवाओं को उद्यमिता का प्रशिक्षण देने की क्षमता होगी। इनमें महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी। करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक राज्य कौशल संकाय प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र भी स्थापित करने की राज्य सरकार की योजना है।

MDU शोधार्थी का कमाल: नैनोसस्पेंशन से दमा और सीओपीडी का प्रभावी इलाज, कम डोज में अधिक असर

 रोहतक महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) की शोधार्थी निशा गुलाटी ने दमा (अस्थमा) और क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के इलाज में कारगर नैनोपार्टिकुलेट ड्रग डिलीवरी सिस्टम तैयार किया है। नैनोसस्पेंशन तकनीक के इस्तेमाल से दवा सीधे फेफड़ों तक पहुंचती है। इससे दवा की प्रभावशीलता बढ़ जाती है। यह तकनीक दवा के साइड इफेक्ट्स भी कम करती है।  प्रो. हरीश दुरेजा के मार्गदर्शन में शोध कर रहीं पीएचडी शोधार्थी निशा गुलाटी ने बताया कि दमा और सीओपीडी ऐसी बीमारी है जिसमें फेफड़ों की नलियां संकुचित हो जाती हैं। इससे मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है। धूल, धुआं, एलर्जी और मौसम के बदलाव से यह समस्या और बढ़ जाती है। श्वांस नलियां सिकुड़ने से दवा का असर कम हो जाता है और मरीज की हालत भी बिगड़ जाती है। इसी को ध्यान में रखकर उन्होंने रोफ्लूमिलास्ट दवा का नैनोसस्पेंशन तैयार किया। फिर इसे हाई शियर होमोजेनाइजेशन और अल्ट्रासोनिक तकनीक के जरिए विकसित किया। बताया कि नैनोसस्पेंशन तकनीक से सीधे दवा फेफड़ों तक पहुंचने में कारगर है। इससे मरीज को जल्द लाभ मिलता है।  साल 2022-24 में एनसीआर में मिले दो लाख से अधिक श्वास रोगी संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022-24 के बीच दिल्ली-एनसीआर में दो लाख से अधिक श्वास रोगी अस्पताल पहुंचे थे। द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन (2026) में प्रकाशित एक अध्ययन में पता चला है कि एशिया में करीब 43 फीसदी लोग श्वसन रोगों से पीड़ित हैं। जानें…सांस के रोगी के लक्षण लगातार खांसी आना श्वास रोग का सामान्य लक्षण है। इसके अलावा सूखी खांसी, बलगम वाली खांसी, सांस फूलना, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना, सीने में जकड़न या दर्द होना भी शामिल है। इन बीमारियों के कारण सामान्य गतिविधियां जैसे चलना, सीढ़ियां चढ़ना या यहां तक कि बात करना भी मरीज के लिए थकाने वाला हो जाता है। हम अब नैनोपार्टिकुलेट ड्रग डिलीवरी सिस्टम पर आधारित नई नैनोसस्पेंशन दवा विकसित कर रहे हैं, जो सीओपीडी और अस्थमा के मरीजों के लिए अधिक प्रभावी साबित होगी। इस तकनीक से दवा सीधे फेफड़ों तक पहुंचेगी, जिससे कम डोज में बेहतर असर मिलेगा और साइड इफेक्ट्स भी काफी कम होंगे। -प्रो. हरीश दुरेजा, डीन रिसर्च और विकास, एमडीयू रोहतक।  

सरकारी कर्मचारियों को AI से लैस करने की तैयारी, हरियाणा में स्किलिंग बढ़ाने के आदेश

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने प्रदेश में तकनीक आधारित प्रशासन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सरकारी कर्मचारियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) स्किलिंग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। यह प्रशिक्षण आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा इस सम्बन्ध में राज्य के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, प्रशिक्षण संस्थानों, बोर्डों, निगमों तथा विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र भेजा गया है। यह पहल राज्य सरकार के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिनके तहत अधिकारियों-कर्मचारियों को उभरती डिजिटल क्षमताओं से लैस कर अधिक दक्ष, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जा रही है। मिशन कर्मयोगी के तहत राष्ट्रीय डिजिटल लर्निंग पोर्टल आईजीओटी कर्मयोगी पर  सार्वजनिक प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के लिए निःशुल्क, स्वयं-गति (सैल्फ पेस्ड) और प्रमाणित एआई पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इन पाठ्यक्रमों को कर्मचारी अपनी सुविधा अनुसार बिना नियमित कार्य प्रभावित किए पूरा कर सकते हैं। राज्य के प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (हिपा) द्वारा इस पहल को सक्रिय रूप से समर्थन दिया जा रहा है। प्रशासन में एआई के उपयोग से निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुधार, डेटा आधारित नीति निर्माण तथा सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में बढ़ोतरी की संभावना है। सरकारी कर्मचारियों के लिए सुझाए गए एआई पाठ्यक्रमों में बुनियादी अवधारणाओं से लेकर प्रशासन में उन्नत उपयोग तक के विषय शामिल हैं। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र में दक्षता के लिए जनरेटिव एआई, शहरी प्रशासन में एआई आधारित डिजिटल परिवर्तन, ग्रामीण विकास और शिक्षा में एआई का उपयोग तथा माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट जैसे उत्पादकता उपकरणों से संबंधित कार्यक्रम शामिल हैं। ये पाठ्यक्रम कर्मयोगी भारत, नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (एमईआईटीवाई), वाधवानी फाउंडेशन, माइक्रोसॉफ्ट और इन्वेस्ट इंडिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों को आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर लॉग-इन कर इन पाठ्यक्रमों में नामांकन करने और अपने कौशल को उन्नत बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, ताकि वे डिजिटल रूप से सशक्त प्रशासन के निर्माण में योगदान कर सकें।

हरियाणा में मौसम का अलर्ट: तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना, गुरुग्राम रहेगा सबसे गर्म

गुरुग्राम हरियाणा में आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, शनिवार के मुकाबले रविवार को प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में 0.2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बावजूद तापमान सामान्य से 2.2 डिग्री सेल्सियस कम बना हुआ है। गुरुग्राम का सबसे ज्यादा तापमान प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 33.3 डिग्री सेल्सियस नॉर्थकैप यूनिवर्सिटी (गुरुग्राम) में दर्ज किया गया, जबकि भिवानी में 32.9 और हिसार में अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की बारिश दर्ज की गई। वहीं कई इलाकों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ मौसम में बदलाव देखा गया। आज चलेंगी तेज हवाएं मौसम विभाग ने 6 अप्रैल को प्रदेश के कुछ स्थानों पर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई है। वहीं 7 और 8 अप्रैल को कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। 7-8 अप्रैल को होगी हल्की बारिश सात अप्रैल को प्रदेश के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि 8 अप्रैल को कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। वहीं, 5 और 6 अप्रैल को भी कहीं-कहीं हल्की बारिश होने के आसार हैं। इन जिलों में रहेगा ज्यादा असर मौसम विभाग के अनुसार सिरसा, फतेहाबाद और हिसार जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके अलावा, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, सिरसा, फतेहाबाद, जींद और हिसार जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।

CM सैनी ने गुरुग्राम में अटल बिहारी की प्रतिमा का अनावरण किया, ग्रीवेंस मीटिंग में की फरियादियों से मुलाकात

गुरुग्राम  गुरुग्राम में भाजपा के जिला कार्यालय गुरुकमल में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण किया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने ग्रीवेंस मीटिंग में पहुंचकर फरियादियों की शिकायतें सुनी। मीटिंग में कुल 15 शिकायतें रखी गई थी। उनके साथ कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह, विधायक मुकेश शर्मा, डीसी अजय कुमार समेत तमाम जिला के बड़े अधिकारी मौजूद हैं। ग्रीवेंस मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री भाजपा के स्थापना दिवस के अवसर पर गुरुकमल जिला कार्यालय पहुंचे और भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण किया। कार्यकर्ताओं में होगा नई ऊर्जा का संचार विधायक मुकेश शर्मा ने बताया कि यह कार्यक्रम भाजपा की स्थापना की याद में विशेष महत्व रखता है। अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा अनावरण से पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होगा, उनकी दूरदर्शी सोच, कविता प्रियता और सुशासन के प्रतीक के रूप में उनकी छवि युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगी। एजेंडे को आगे बढ़ा रही भाजपा विधायक ने बताया कि कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई है। अनावरण समारोह में स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और मौजिज लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन न केवल पूर्व प्रधानमंत्री के योगदान को याद दिलाएगा, बल्कि हरियाणा सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों को भी मजबूती प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री सैनी के नेतृत्व में भाजपा प्रदेश में सुशासन और जनकल्याण के एजेंडे को आगे बढ़ा रही है।

हरियाणा में बीएसएल से पानी की सप्लाई रुकी, सरकार ने BBMB से मांगा जवाब, गेज रीडिंग 4 मार्च से जीरो

चंडीगढ़  हरियाणा को बीस-सतलुज लिंक (BSL) से 4 मार्च 2026 से लगातार पानी की सप्लाई नहीं मिल रही है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता ने इस संबंध में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) को लेटर लिखकर कारण बताने और तुरंत पानी छोड़ने की मांग की है। विभाग के अनुसार 4 मार्च से अब तक गेज रीडिंग शून्य दर्ज की गई है, जिससे स्पष्ट है कि हरियाणा को इस अवधि में BSL के माध्यम से कोई पानी नहीं मिला। लेटर में कहा गया है कि BSL सिस्टम से पानी का प्रवाह पूरी तरह बंद रहने के कारण हरियाणा को अपने हिस्से से कम पानी मिल रहा है। राज्य की जल आपूर्ति काफी हद तक ब्यास और सतलुज नदियों पर निर्भर है, इसलिए पानी की उपलब्धता में कमी का सीधा असर राज्य की जरूरतों और दिल्ली-एनसीआर की सप्लाई पर पड़ सकता है। बन सकती है गंभीर स्थिति विभाग ने यह भी उल्लेख किया है कि SYL के योगदान न होने के कारण हरियाणा मौजूदा सिस्टम से केवल 1.62 MAF पानी ही वहन कर पा रहा है। ऐसे में पानी की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कटौती राज्य के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। अंत में BBMB से आग्रह किया गया है कि हरियाणा को उसका निर्धारित हिस्सा तत्काल जारी किया जाए और BSL सुंदर नगर के माध्यम से पानी की सप्लाई शून्य स्तर तक कम न होने दी जाए। 4 मार्च से सप्लाई बंद लेटर में लिखा है कि 4 मार्च 2026 से BSL से हरियाणा को पानी की सप्लाई बंद है। लगातार गेज रीडिंग शून्य दर्ज की जा रही है। सिंचाई विभाग ने BBMB से इसको लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। राज्य को अपने हिस्से से कम पानी मिलने की आशंका जताई गई है। दरअसल, हरियाणा ब्यास और सतलुज के पानी पर काफी निर्भर है। SYL नहीं बनने से क्षमता पहले ही सीमित है। पानी की कमी का असर दिल्ली-NCR सप्लाई पर भी पड़ सकता है बीबीएमबी की ओर से ये दिया गया तर्क वहीं, सूत्रों के अनुसार, बीएसएल के माध्यम से कम जल प्रवाह का कारण डायवर्जन प्रणाली के एक महत्वपूर्ण कंपोनेंट, देहर पावर हाउस में तकनीकी दिक्कतें हैं। देहर परियोजना में छह टरबाइनों में से केवल दो ही वर्तमान में चालू हैं, जिससे ब्यास बेसिन से सतलुज में जल का स्थानांतरण काफी हद तक सीमित हो गया है। बीबीएमबी ने इस समस्या का कारण पुरानी अवसंरचना को बताया है और कहा कि चार दशक से अधिक पुराने देहर पावर हाउस को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। CEA को लेटर लिख चुका बीबीएमबी अधिकारियों ने बताया कि बीबीएमबी ने टर्बाइनों के नवीनीकरण और आधुनिकीकरण के लिए परामर्श सेवाएं प्रदान करने हेतु केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) से पहले ही संपर्क कर लिया है। मरम्मत और जीर्णोद्धार प्रक्रिया में समय लगने की संभावना है, जिसके दौरान विद्युत प्रवाह को मोड़ने की क्षमता सीमित रह सकती है।