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अवैध माइनिंग की शिकायत पड़ी भारी! पानीपत में तीन दोस्तों को स्कॉर्पियो से कुचलकर मार डाला

पानीपत. गांव डिकाडला में बुधवार देर रात तीन दोस्तों को स्कॉर्पियो से कुचलकर मार डाला। मृतकों की पहचान डिकाडला के नरेंद्र गाहल्याण (46), विनोद (48) व अनिप गाहल्याण (36) के रूप में हुई। स्वजन का आरोप है कि सड़क हादसा नहीं, सुनियोजित हत्या थी, जिसे दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई। नरेंद्र खेतीबाड़ी के साथ प्रॉपर्टी का काम करता था, अनिप बी-टेक पासआउट था। तीनों बुधवार रात सड़क किनारे बात कर रहे थे, तभी तेज रफ्तार स्कार्पियो ने उन्हें टक्कर मार दी। स्वजन के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि नरेंद्र और अनिप की मौके पर ही मौत हो गई। विनोद ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। पुलिस को दी थी अवैध माइनिंग की शिकायत नरेंद्र के भाई विरेंद्र गाहल्याण ने पुलिस को बताया कि गांव के कुछ लोगों की ट्रॉली और डंपर कुछ माह पहले अवैध माइनिंग मामले में पकड़े गए थे। आरोपितों को शक था कि नरेंद्र की शिकायत पर यह कार्रवाई हुई थी, इसके चलते वे रंजिश रखते थे। पुलिस ने मनीष, संदीप, रविंद्र, नवीन, तुषार, सचिन, नीरज, राजबीर और सूरज समेत नौ लोगों पर हत्या का केस दर्ज किया है। वारदात में प्रयोग स्कार्पियो बरामद की है। भागते समय स्कार्पियो में आग लग गई थी, जिसके बाद आरोपित उसे छोड़कर फरार हो गए थे। एफएसएल ने साक्ष्य जुटाए हैं। गिरफ्तारी के लिए तीन पुलिस टीमें गठित आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन टीमें गठित की हैं। मामले की सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। स्वजन ने आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की है। -भूपेंद्र सिंह, एसपी, पानीपत

महिला की मौत पर बड़ी कार्रवाई कायम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की बर्खास्तगी को मिली कोर्ट की मंजूरी

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने दायित्वों में लापरवाही को इस आधार पर नहीं छिपा सकती कि संबंधित महिला का हाव-भाव देखकर उसे गर्भवती होने का आभास नहीं हुआ था। अदालत ने गर्भवती महिला की मौत के मामले में सेवा से हटाई गई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए उसकी अपील खारिज कर दी। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने हरियाणा सरकार व अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि अपीलकर्ता द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण उसकी सेवाओं में गंभीर कमी को उजागर करता है। ऐसे में उसकी संविदात्मक नियुक्ति समाप्त करने के प्रशासनिक निर्णय में खामी नहीं पाई जा सकती। क्या है मामला? मामले के अनुसार, पंचकूला निवासी कौशल्या देवी अपने निर्धारित क्षेत्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत थी। उसकी जिम्मेदारी क्षेत्र के घरों में जाकर गर्भवती महिलाओं की पहचान करना, उनकी निगरानी करना तथा आवश्यक स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाओं से जोड़ना था। इसी दौरान उसके कार्यक्षेत्र में रहने वाली एक गर्भवती महिला की मृत्यु हो गई। हैरानी की बात यह रही कि महिला की गर्भावस्था के संबंध में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की ओर से कोई रिपोर्ट या सूचना विभाग को नहीं दी गई थी। खंडपीठ ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि इससे पहले एकल पीठ भी सेवा समाप्ति आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर चुकी थी। एकल पीठ का मानना था कि कार्यकर्ता अपनी सेवा में कमी के लिए कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। मृतक परिवार ने नहीं दी जानकारी: अपीलकर्ता सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने दलील दी कि मृतक के परिवार ने उसे गर्भावस्था के बारे में कुछ जानकारी नहीं दी थी। उसने कारण बताओ नोटिस के जवाब में कहा था कि घर के दौरे के दौरान उसने महिला को छत पर तेजी से जाते और गीला भारी कंबल उठाकर घरेलू काम करते देखा था। उसके अनुसार महिला के हाव-भाव से ऐसा प्रतीत नहीं होता था कि वह गर्भवती है। इस दलील पर कड़ी टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्टीकरण पूरी तरह अविश्वसनीय और वास्तविकता से परे है। अदालत ने कहा कि यह जवाब स्वयं दर्शाता है कि अपीलकर्ता अपने कर्तव्यों का निर्वहन अपेक्षित स्तर पर नहीं कर रही थी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का दायित्व केवल परिवार से सूचना मिलने का इंतजार करना नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं की पहचान और निगरानी करना है। खंडपीठ ने कहा कि जब सेवाओं में इतनी गंभीर कमी सामने आई और कारण बताओ नोटिस देने के बाद ही संविदात्मक नियुक्ति समाप्त की गई, तो इस कार्रवाई में कोई कानूनी त्रुटि नहीं मानी जा सकती। इसी आधार पर अदालत ने अपील को खारिज करते हुए सेवा समाप्ति के आदेश को बरकरार रखा।

“हाव-भाव देखकर गर्भ का अंदाजा नहीं लगा” दलील पर HC की कड़ी टिप्पणी, अपील खारिज

 चंडीगढ़ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने दायित्वों में लापरवाही को इस आधार पर नहीं छिपा सकती कि संबंधित महिला का हाव-भाव देखकर उसे गर्भवती होने का आभास नहीं हुआ था। अदालत ने गर्भवती महिला की मौत के मामले में सेवा से हटाई गई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए उसकी अपील खारिज कर दी। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने हरियाणा सरकार व अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि अपीलकर्ता द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण उसकी सेवाओं में गंभीर कमी को उजागर करता है। ऐसे में उसकी संविदात्मक नियुक्ति समाप्त करने के प्रशासनिक निर्णय में कोई खामी नहीं पाई जा सकती। क्या है मामला? मामले के अनुसार, पंचकूला निवासी कौशल्या देवी अपने निर्धारित क्षेत्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत थी। उसकी जिम्मेदारी क्षेत्र के घरों में जाकर गर्भवती महिलाओं की पहचान करना, उनकी निगरानी करना तथा आवश्यक स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाओं से जोड़ना था। इसी दौरान उसके कार्यक्षेत्र में रहने वाली एक गर्भवती महिला की मृत्यु हो गई। हैरानी की बात यह रही कि महिला की गर्भावस्था के संबंध में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की ओर से कोई रिपोर्ट या सूचना विभाग को नहीं दी गई थी। खंडपीठ ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि इससे पहले एकल पीठ भी सेवा समाप्ति आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर चुकी थी। एकल पीठ का मानना था कि कार्यकर्ता अपनी सेवा में कमी के लिए कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। मृतक परिवार ने नहीं दी जानकारी: अपीलकर्ता सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने दलील दी कि मृतक के परिवार ने उसे गर्भावस्था के बारे में कुछ जानकारी नहीं दी थी। उसने कारण बताओ नोटिस के जवाब में कहा था कि घर के दौरे के दौरान उसने महिला को छत पर तेजी से जाते और गीला भारी कंबल उठाकर घरेलू काम करते देखा था। उसके अनुसार महिला के हाव-भाव से ऐसा प्रतीत नहीं होता था कि वह गर्भवती है। इस दलील पर कड़ी टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्टीकरण पूरी तरह अविश्वसनीय और वास्तविकता से परे है। अदालत ने कहा कि यह जवाब स्वयं दर्शाता है कि अपीलकर्ता अपने कर्तव्यों का निर्वहन अपेक्षित स्तर पर नहीं कर रही थी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का दायित्व केवल परिवार से सूचना मिलने का इंतजार करना नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं की पहचान और निगरानी करना है। खंडपीठ ने कहा कि जब सेवाओं में इतनी गंभीर कमी सामने आई और कारण बताओ नोटिस देने के बाद ही संविदात्मक नियुक्ति समाप्त की गई, तो इस कार्रवाई में कोई कानूनी त्रुटि नहीं मानी जा सकती। इसी आधार पर अदालत ने अपील को खारिज करते हुए सेवा समाप्ति के आदेश को बरकरार रखा।

नौकरी में आरक्षण को लेकर HC की अहम टिप्पणी, आरक्षित कोटे का फायदा लेने वालों पर स्पष्ट आदेश

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि जो अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया के किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ ले चुके हैं, वे बाद में अनारक्षित (जनरल) श्रेणी में माइग्रेशन का दावा नहीं कर सकते। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि जिन उम्मीदवारों ने आरक्षित वर्ग में आवेदन तो किया, लेकिन किसी प्रकार की आरक्षण संबंधी रियायत नहीं ली और उनके अंक सामान्य वर्ग की कटआफ से अधिक हैं, उन्हें उपलब्ध सामान्य वर्ग की सीटों पर विचार किए जाने का अधिकार होगा। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने हरियाणा में आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर (ग्रुप-बी) के 805 पदों पर भर्ती से जुड़े पुनर्विचार आवेदनों का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया। यह भर्ती 21 जून 2024 को जारी विज्ञापन के माध्यम से की गई थी। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान आरक्षण के आधार पर कोई भी लाभ प्राप्त करने वाले उम्मीदवार अनारक्षित वर्ग में समायोजन का दावा नहीं कर सकते। वहीं, ऐसे उम्मीदवार, जिन्होंने आरक्षित श्रेणी में आवेदन किया हो लेकिन आयु सीमा में छूट, शुल्क रियायत या अन्य किसी प्रकार का लाभ न लिया हो और जिन्होंने सामान्य वर्ग की निर्धारित कटऑफ से अधिक अंक हासिल किए हों, उन्हें उपलब्ध सामान्य वर्ग की सीटों पर विचार का अवसर दिया जाएगा। मामले में पुनर्विचार याचिकाएं 3 नवंबर 2025 को दिए गए खंडपीठ के एक पूर्व निर्णय के बाद दाखिल की गई थीं। अनुमति याचिका पहले ही हो चुकी खारिज: हाई कोर्ट याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि भले ही उन्हें आरक्षण का लाभ न मिले, लेकिन उनके अंक सामान्य वर्ग के अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक हैं, इसलिए उन्हें चयन का अधिकार मिलना चाहिए। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि इस मामले में दायर विशेष अनुमति याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। दावों की सच्चाई जानने के लिए हाई कोर्ट ने हरियाणा लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वे स्पष्ट करें कि पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं में से किन उम्मीदवारों ने आरक्षित वर्ग में आवेदन करने के कारण कोई लाभ प्राप्त किया था या नहीं। इसके बाद राज्य सरकार ने शपथ पत्र दाखिल कर बताया कि कुछ उम्मीदवारों ने आयु सीमा में छूट और अन्य रियायतों का लाभ लिया था। अदालत ने इस शपथपत्र को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि ऐसे उम्मीदवारों को सामान्य वर्ग में माइग्रेशन की अनुमति नहीं दी जा सकती। साथ ही हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि जो पुनर्विचार याचिका कर्ता अंतत अपनी मेरिट के आधार पर सामान्य वर्ग में चयनित पाए जाते हैं, उन्हें उनके जूनियर उम्मीदवारों की नियुक्ति तिथि से लाभ दिया जाए। हालांकि वास्तविक वित्तीय और सेवा संबंधी लाभ केवल उनकी वास्तविक नियुक्ति की तारीख से ही मिलेंगे। अदालत ने पूरी प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं।

आंधी-तूफान से थमा जनजीवन, फतेहाबाद में भारी तबाही, कई इलाकों में ब्लैकआउट

हिसार. हरियाणा में मौसम ने अचानक रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है। भीषण गर्मी और तपती लू के बीच प्रदेश के कई जिलों में 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण आंधी और तेज वर्षा से फतेहाबाद सहित राज्य के कई हिस्सों में सैकड़ों पेड़, बिजली के खंभे और दुकानों के टीन शेड व होर्डिंग्स उखड़ गए, जिससे गुरुग्राम सहित कई इलाकों में ब्लैकआउट है। हांसी में करीब एक घंटे तक चली तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि भी हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग के अनुसार पंजाब के ऊपर चक्रवाती सिस्टम सक्रिय होने से यह स्थिति बनी है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार से 13 जून तक पूरे प्रदेश में भारी वर्षा, गरज-चमक और ओलावृष्टि का ‘आरेंज अलर्ट’ जारी किया है। वीरवार सुबह से ही मौसम के मिजाज बदले-बदले नजर आए। सरकार की ओर से मोबाइल पर इमरजेंसी अलर्ट जारी मौसम के इस रूप को देख हरियाणा सरकार व आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों के मोबाइल फोन पर ‘इमरजेंसी अलर्ट’ (चेतावनी संदेश) भेजा। इस संदेश में पंचकूला, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और पानीपत जिलों के निवासियों को घरों में रहने और तेज तूफान व ओलावृष्टि के प्रति सावधान रहने की सलाह दी है। प्रारंभिक सुस्ती के बाद मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। गति में तेजी आई है, लेकिन बारिश की स्थिति अच्छी नहीं है। जून में अभी तक देश में औसतन 24 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस स्थिति को अलनीनो से जोड़कर देखा जा रहा है, जो प्रशांत महासागर में तेजी से उभर रहा है। यूपी और बिहार में कई लोगों की मौत पश्चिम विक्षोभ से उत्तर भारत में वीरवार को अचानक मौसम ने करवट ली। उत्तर प्रदेश और बिहार में तेज आंधी-पानी और वज्रपात से 16 लोगों की मौत हो गई। जिनमें बिहार में 10 लोगों की जान गई, जबकि एक ही परिवार के चार लोगों समेत 10 झुलस गए। वहीं, कई जगह वर्षा से जलभराव हुआ।

मौसम का रौद्र रूप, कई जिलों में पेड़-बिजली खंभे गिरे, ब्लैकआउट जैसे हालात

हिसार  हरियाणा में मौसम ने अचानक रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है। भीषण गर्मी और तपती लू के बीच प्रदेश के कई जिलों में 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण आंधी और तेज वर्षा से फतेहाबाद सहित राज्य के कई हिस्सों में सैकड़ों पेड़, बिजली के खंभे और दुकानों के टीन शेड व होर्डिंग्स उखड़ गए, जिससे गुरुग्राम सहित कई इलाकों में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई है। हांसी में करीब एक घंटे तक चली तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि भी हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग के अनुसार पंजाब के ऊपर चक्रवाती सिस्टम सक्रिय होने से यह स्थिति बनी है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार से 13 जून तक पूरे प्रदेश में भारी वर्षा, गरज-चमक और ओलावृष्टि का ‘आरेंज अलर्ट’ जारी किया है। वीरवार सुबह से ही मौसम के मिजाज बदले-बदले नजर आए। सरकार की ओर से मोबाइल पर इमरजेंसी अलर्ट जारी मौसम के इस रूप को देख हरियाणा सरकार व आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों के मोबाइल फोन पर ‘इमरजेंसी अलर्ट’ (चेतावनी संदेश) भेजा। इस संदेश में पंचकूला, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और पानीपत जिलों के निवासियों को घरों में रहने और तेज तूफान व ओलावृष्टि के प्रति सावधान रहने की सलाह दी है। प्रारंभिक सुस्ती के बाद मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। गति में तेजी आई है, लेकिन बारिश की स्थिति अच्छी नहीं है। जून में अभी तक देश में औसतन 24 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस स्थिति को अलनीनो से जोड़कर देखा जा रहा है, जो प्रशांत महासागर में तेजी से उभर रहा है। यूपी और बिहार में कई लोगों की मौत पश्चिम विक्षोभ से उत्तर भारत में वीरवार को अचानक मौसम ने करवट ली। उत्तर प्रदेश और बिहार में तेज आंधी-पानी और वज्रपात से 16 लोगों की मौत हो गई। जिनमें बिहार में 10 लोगों की जान गई, जबकि एक ही परिवार के चार लोगों समेत 10 झुलस गए। वहीं, कई जगह वर्षा से जलभराव हुआ।  

CM नायब सैनी और अमित शाह की मुलाकात, हरियाणा से जुड़े अहम मामलों पर हुई विस्तृत बातचीत

चंडीगढ़. नई दिल्ली में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में हिस्सा लेने के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। करीब आधे घंटे की मुलाकात के दौरान पंजाब में अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव की तैयारी तथा हरियाणा में संगठन के बदलाव को लेकर चर्चा हुई। बताया जाता है कि केंद्रीय गृह मंत्री के साथ हुई हरियाणा के सीएम की बातचीत के दौरान पंजाब ही केंद्र में रहा। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने गृहमंत्री को पंजाब के अब तक किए गए दौरों के बारे में फीड बैक दिया। साथ ही राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ हो रही मुलाकातों पर भी बातचीत की। पंजाब के किसानों व आम लोगों को आ रही परेशानियों से नायब सैनी ने केंद्रीय गृह मंत्री को अवगत कराया। नायब सैनी ने कहा कि पंजाब के लोग केंद्र की योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, क्योंकि कई योजनाएं पंजाब लागू नहीं करता है, जबकि वे हरियाणा की भाजपा सरकार की योजनाओं से बहुत अधिक प्रभावित हैं। नायब सिंह सैनी ने केंद्रीय गृह मंत्री को पंजाब की चुनावी रणनीति पर भी अपनी रिपोर्ट पेश की। यह भी बताया कि संगठन के बड़े नेता भी पंजाब का दौरा करना आरंभ करेंगे। मुख्यमंत्री पंजाब को लेकर लगातार सक्रिय हैं। वे माह में तीन से चार बार वहां पार्टी की ओर से होने वाली जनसभाओं के साथ-साथ धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं। शुक्रवार को वह एक बार फिर से पंजाब के राजपुरा जा रहे हैं। इससे पहले इसी सप्ताह उन्हों ने धुरी में जनसभा की थी। मुख्यमंत्री ने हरियाणा सरकार के साल 2047 के विजन प्रारूप पर भी विस्तार से चर्चा की। अमित शाह को बताया गया कि सिलसिलेवार चुनावी वादों को पूरा किया जा रहा है। हरियाणा सरकार द्वारा बनाए जा चुके बोर्ड एवं निगमों के चेयरमैनों की पूरी रिपोर्ट देने के साथ ही भविष्य में बनाए जाने वाले चेयरमैनों के नामों की भी मंजूरी ली गई है।

फुटपाथ, डिवाइडर और स्ट्रीट लाइट से सुसज्जित होंगी प्रदेश की प्रमुख सड़कें

 पानीपत लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने चार प्रमुख नेशनल और स्टेट हाईवे को माडल रोड के रूप में विकसित करने की योजना पर कार्य प्रारंभ कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना में पानीपत से सफीदों, जींद व भिवानी रोड, गोहाना से खानपुर कलां रोड (सोनीपत), घरौंडा से फुरलक रोड (करनाल) व ओल्ड बाईपास रोड (कैथल) को शामिल किया है। यह पहल प्रदेश की सड़कों की गुणवत्ता में सुधार लाने के साथ-साथ यातायात सुरक्षा को भी बढ़ावा देगी। पीडब्ल्यूडी ने संबंधित मार्गों परहाई टेंशन (एचटी) और लो टेंशन (एलटी) बिजली लाइनों को शिफ्ट करने के संबंध में बिजली निगम को पत्र भेजे हैं। मॉडल रोड परियोजना के तहत सभी चयनित सड़कों के दोनों ओर व्यवस्थित फुटपाथ बनाए जाएंगे। इसके अलावा सड़क के बीचों-बीच आकर्षक डिवाइडर तैयार किए जाएंगे, जिन पर फूलों और सजावटी पौधों का रोपण किया जाएगा। सुरक्षा पर विशेष ध्यान रात्रि में बेहतर रोशनी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। वहीं, यातायात नियमों के पालन और दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से प्रमुख स्थानों पर स्पष्ट और मानक के अनुरूप जेबरा क्रासिंग बनाई जाएंगी। पानीपत पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन सवित पानु ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से लैस इन मार्गों पर यात्रा अधिक आरामदायक होगी। साथ ही शहरों व कस्बों की कनेक्टिविटी मजबूत होने से स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।     बिजली लाइनों की शिफ्टिंग के लिए कई तरह की औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं। ये औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शिफ्टिंग के कार्य तेजी से पूरे किए जाएंगे। -आदित्य कुंडू, एक्सईएन, बिजली निगम, पानीपत।  

ऑनलाइन प्यार पड़ा भारी! Tinder के जरिए जज को लगाया लाखों का चूना, मामले में FIR दर्ज

चंडीगढ़  ऑनलाइन डेटिंग ऐप के जरिए ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। हरियाणा की एक महिला जज कथित तौर पर हनी ट्रैप (Honey Trap) का शिकार हो गईं। उनसे 52 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली गई। दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले के मुख्य आरोपी की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पहली नजर में ऑनलाइन रोमांस घोटाले के पैटर्न को दर्शाती है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस केस में हुए वित्तीय लेनदेन हनी ट्रैप की परिकल्पना के अनुकूल हैं। कोर्ट ने जांच के शुरुआती चरण और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के गायब होने का हवाला देते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया। सीक्रेट ऑफिसर बनकर जाल में फंसाया यह मामला नवंबर 2025 का है, जब पीड़िता मोबाइल डेटिंग ऐप टिंडर (Tinder) के माध्यम से आरोपी के संपर्क में आई थीं। आरोपी ने कथित तौर पर खुद को एक गुप्त सरकारी विभाग का अधिकारी बताते हुए अपना नाम अभिमन्यु वशिष्ठ बताया था। इसके बाद दोनों के बीच संबंध विकसित हुए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस दौरान आरोपी ने जज साहिबा को ऊंचे मुनाफे का झांसा देकर निवेश करने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद उन्होंने आरोपी से जुड़े बैंक खातों में 52 लाख रुपये से अधिक ट्रांसफर कर दिए। कोई रिटर्न नहीं मिला और अंततः यह मामला धोखाधड़ी में बदल गया। नौकरानी के नाम पर दर्ज कराई गई FIR इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि ठगी की शिकार होने के बाद भी जज साहिबा ने खुद एफआईआर दर्ज नहीं कराई। शिकायत उनकी घरेलू सहायिका यानी कि नौकरानी के नाम पर दर्ज कराई गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसके साथ एक ऑनलाइन डेटिंग ऐप के जरिए धोखाधड़ी हुई है। सत्र अदालत ने जब आरोपी की जमानत याचिका और बैंक खातों की जांच की तो पाया कि लगभग सभी संदिग्ध लेनदेन न्यायिक अधिकारी के खातों से हुए थे न कि घरेलू सहायिका के खाते से। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, "दर्ज की गई शिकायत असली शिकायतकर्ता को प्रतिबिंबित नहीं करती है। एक न्यायिक अधिकारी, जिसे खुद न्याय देने और कानून के सामने सच्चाई को बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसने खुद आगे आने के बजाय अपनी नौकरानी के नाम का सहारा लेकर अदालत का रुख किया है।" अदालत ने माना कि रोमांस स्कैम का शिकार होने पर व्यक्तिगत शर्मिंदगी हो सकती है, लेकिन यह जांचकर्ताओं से महत्वपूर्ण तथ्यों या सबूतों को छिपाने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा, "किसी अधिकारी की व्यक्तिगत असुविधा को आपराधिक जांच की अखंडता से समझौता करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।" जांच और दोनों पक्षों के रवैये पर कोर्ट नाराज अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि केस से जुड़े कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूत जांच से गायब हैं। डेटिंग ऐप से शुरू हुई इस बातचीत के न तो टिंडर चैट्स और न ही जज साहिबा के पूरे व्हाट्सऐप संदेश रिकॉर्ड पर रखे गए हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) भी एकत्र नहीं किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता एक न्यायिक अधिकारी होने के नाते कानून को बेहतर समझती हैं, इसलिए उन्हें जल्द से जल्द जांच अधिकारी या मजिस्ट्रेट के सामने आकर अपनी पूरी व्हाट्सऐप चैट हिस्ट्री, टिंडर चैट और लेनदेन की पूरी सच्चाई पेश करनी चाहिए। वहीं, अदालत ने आरोपी की भी खिंचाई की और कहा कि वह आंख-मिचौली खेल रहा है। आरोपी ने केवल जज द्वारा भेजे गए संदेशों को पेश किया और अपने जवाब छिपा लिए, साथ ही उसने अपने मोबाइल फोन का एक्सेस देने से भी इनकार कर दिया।

नई पहचान पाएंगी हरियाणा की सड़कें, 4 हाईवे को मॉडल रोड के रूप में किया जाएगा विकसित

पानीपत. लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने चार प्रमुख नेशनल और स्टेट हाईवे को माडल रोड के रूप में विकसित करने की योजना पर कार्य प्रारंभ कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना में पानीपत से सफीदों, जींद व भिवानी रोड, गोहाना से खानपुर कलां रोड (सोनीपत), घरौंडा से फुरलक रोड (करनाल) व ओल्ड बाईपास रोड (कैथल) को शामिल किया है। यह पहल प्रदेश की सड़कों की गुणवत्ता में सुधार लाने के साथ-साथ यातायात सुरक्षा को भी बढ़ावा देगी। पीडब्ल्यूडी ने संबंधित मार्गों परहाई टेंशन (एचटी) और लो टेंशन (एलटी) बिजली लाइनों को शिफ्ट करने के संबंध में बिजली निगम को पत्र भेजे हैं। मॉडल रोड परियोजना के तहत सभी चयनित सड़कों के दोनों ओर व्यवस्थित फुटपाथ बनाए जाएंगे। इसके अलावा सड़क के बीचों-बीच आकर्षक डिवाइडर तैयार किए जाएंगे, जिन पर फूलों और सजावटी पौधों का रोपण किया जाएगा। सुरक्षा पर विशेष ध्यान रात्रि में बेहतर रोशनी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। वहीं, यातायात नियमों के पालन और दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से प्रमुख स्थानों पर स्पष्ट और मानक के अनुरूप जेबरा क्रासिंग बनाई जाएंगी। पानीपत पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन सवित पानु ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से लैस इन मार्गों पर यात्रा अधिक आरामदायक होगी। साथ ही शहरों व कस्बों की कनेक्टिविटी मजबूत होने से स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। बिजली लाइनों की शिफ्टिंग बिजली लाइनों की शिफ्टिंग के लिए कई तरह की औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं। ये औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शिफ्टिंग के कार्य तेजी से पूरे किए जाएंगे। -आदित्य कुंडू, एक्सईएन, बिजली निगम, पानीपत।