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एक जिला एक उत्पाद योजना से आई नई उम्मीद, अदरक की खेती से दोगुना मुनाफा

एक जिला एक उत्पाद योजना से बदली तस्वीर अदरक की खेती से दोगुना मुनाफा कमाया रायपुर  सरकार की “एक जिला एक उत्पाद” योजना अब धरातल पर किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इसी क्रम में बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम बघमरा के युवा प्रगतिशील किसान श्री आकाश चंद्राकर ने अदरक की खेती के माध्यम से सफलता की एक नई मिसाल प्रस्तुत की है। पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ते हुए आकाश चंद्राकर ने “एक जिला एक उत्पाद” योजना से प्रेरित होकर अपने लगभग ढाई एकड़ खेत में अदरक की खेती की शुरुआत की। वैज्ञानिक पद्धतियों और बेहतर प्रबंधन के साथ की गई इस खेती से उन्हें उत्कृष्ट उत्पादन प्राप्त हुआ। साथ ही बाजार में अदरक की अच्छी मांग के कारण उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिला, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। किसानों को प्रोत्साहित करने और खेती की लागत को कम करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन के उद्यानिकी विभाग द्वारा राज्य पोषित मसाला क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत आकाश चंद्राकर को लगभग 49 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। इस वित्तीय सहयोग से उन्हें आधुनिक कृषि संसाधन जुटाने, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं तकनीकों का उपयोग करने में सहायता मिली, जिसका सीधा लाभ उत्पादन और गुणवत्ता में दिखाई दिया। आकाश चंद्राकर बताते हैं कि अदरक की खेती उनके लिए समृद्धि का नया द्वार बनकर आई है। शासन से प्राप्त अनुदान ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। “एक जिला एक उत्पाद” के अंतर्गत अदरक को चयनित किए जाने के बाद जिले के अन्य किसान भी इस नगदी फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पारंपरिक फसलों की तुलना में अदरक से प्राप्त अधिक शुद्ध लाभ ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। जिला प्रशासन बालोद और उद्यानिकी विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही तकनीकी सलाह एवं अनुदान से खेती अब घाटे का सौदा नहीं, बल्कि लाभ का माध्यम बनती जा रही है। श्री चंद्राकर ने केंद्र एवं राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि शासन की इस पहल से बालोद जिला अदरक उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित करेगा।

संघर्ष और भटकाव के बाद मनकू कड़ती की एक नई यात्रा की शुरुआत

संघर्ष और भटकाव के बाद मनकू कड़ती की नई शुरुआत रायपुर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित अंचल में बदलाव की कई कहानियां उभर रही हैं। इन्हीं में से एक कहानी है बीजापुर जिले के छोटे से गांव चेरली के युवक मनकू कड़ती की, जिनका जीवन संघर्ष, भटकाव और फिर सकारात्मक परिवर्तन का उदाहरण बनकर सामने आया है। बीजापुर जिले के चेरली गांव में जन्मे मनकू कड़ती का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। गरीबी, असुरक्षा और सीमित संसाधनों के बीच उनका परिवार लगातार चुनौतियों से जूझता रहा। पारिवारिक स्थिति उस समय और भी गंभीर हो गई, जब उनके पिता को जेल जाना पड़ा। इस घटना ने मनकू के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला और उनका बचपन अभाव और अस्थिरता के माहौल में बीता। इन्हीं परिस्थितियों और नकारात्मक माहौल के प्रभाव में मनकू धीरे-धीरे भटकाव की ओर बढ़ने लगे। उन्हें लगा कि गलत रास्ता ही उन्हें पहचान और सुरक्षा दिला सकता है। हालांकि, उनके भीतर एक द्वंद्व लगातार बना रहा। क्या यही उनका भविष्य है ? यह सवाल उनके मन में बार-बार उठता रहा। समय के साथ मनकू के भीतर आत्मचिंतन की प्रक्रिया शुरू हुई। उन्होंने महसूस किया कि हिंसा और भय के रास्ते पर चलकर वे अपने जीवन को अंधकार की ओर ले जा रहे हैं। यही एहसास उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उन्होंने ठान लिया कि अब वे अपनी दिशा बदलेंगे और एक नई शुरुआत करेंगे। अप्रैल 2025 में मनकू कड़ती ने साहसिक कदम उठाते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। यह निर्णय उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन यही उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सही फैसला साबित हुआ। इस कदम ने उनके लिए मुख्यधारा में लौटने और एक सम्मानजनक जीवन जीने के रास्ते खोल दिए। आत्मसमर्पण के बाद उन्हें पुनर्वास प्रक्रिया के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने ट्रैक्टर ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षण लिया, जहां उन्होंने न केवल भारी मशीनों का संचालन सीखा, बल्कि अनुशासन, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास को भी अपने जीवन में अपनाया। निरंतर मेहनत और सीखने की इच्छा ने उनके व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव लाया।  आज मनकू कड़ती एक बदले हुए इंसान के रूप में सामने आए हैं। वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हैं और समाज के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। जहां पहले उनके जीवन में डर और अस्थिरता थी, वहीं अब आत्मविश्वास और नई उम्मीद ने जगह ले ली है। मनकू कड़ती के जीवन की यह नई शुरूआत इस बात का प्रमाण है कि विपरीत परिस्थितियों और गलत दिशा में बढ़ते कदमों के बावजूद, यदि व्यक्ति दृढ़ निश्चय कर ले तो जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है।

नई रेल लाइन का 800 मीटर ट्रैक तैयार, जुलाई से शुरू होगी सेवा, कई गांवों को मिलेगी कनेक्टिविटी

इंदौर  इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के तहत बहुप्रतीक्षित टीही टनल का काम अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर और धार विधायक नीना वर्मा ने निर्माणाधीन टनल में करीब 70 फीट नीचे उतरकर कार्यों का जायजा लिया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने सुरंग के भीतर पहुंचकर निर्माण की गुणवत्ता और प्रगति का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश देते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग है, जिसे तय समयसीमा में पूरा करना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न करने पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने दावा किया है कि आगामी जून-जुलाई तक टनल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही इंदौर से धार के बीच सीधा रेल संचालन शुरू होने की संभावना है। हाल ही में पीथमपुर से धार के बीच टॉवर वैगन इंजन के माध्यम से सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। टनल में युद्धस्तर पर चल रहा काम रेलवे अधिकारियों के अनुसार करीब 3 किमी लंबी टीही टनल में तेजी से कार्य जारी है। अब तक लगभग 800 मीटर हिस्से में ट्रैक और पटरी बिछाने का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य भी तेज गति से प्रगति पर है। फिनिशिंग और अन्य तकनीकी कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बुनियादी ढांचे को मिल रही मजबूती केंद्र सरकार की पहल पर क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। टीही टनल और इंदौर-दाहोद रेल परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है जो आने वाले समय में पूरे मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। कनेक्टिविटी से विकास को रफ्तार राज्यमंत्री ठाकुर ने कहा कि इंदौर-धार रेल लाइन शुरू होने से क्षेत्र में आवागमन आसान होगा और व्यापार-उद्योग को नई गति मिलेगी। यह परियोजना न केवल यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगी, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी खोलेगी। परियोजना की मुख्य विशेषताएं लंबाई और मार्ग: कुल लंबाई 204.76 किमी (183 किमी मप्र में, 22 किमी गुजरात में)। मार्ग: इंदौर-टीही-पीथमपुर-सागौर- गुणावद-धार-दाहोद। वर्तमान स्थिति : इंदौर-टीही (21 किमी) तक काम पूरा हो चुका है। टीही-धार के बीच 2.9 किमी लंबी सुरंग का काम पूरा हो चुका है, ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया में है। रेलवे स्टेशन (धार) निर्माण अंतिम चरण में है। तकनीकी प्रगति: सागौर-धार खंड में ट्रैक बिछाने के लिए मशीन का उपयोग किया जा रहा है। फायदे: इस लाइन के शुरू होने से इंदौर और मुंबई के बीच की दूरी लगभग 55 किमी. कम हो जाएगी।

अमृत मिशन 2.0 के तहत 20 एमएलडी क्षमता के टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट को मिली मंजूरी, प्रदूषण-मुक्त होगी नदी

रायपुर अमृत मिशन 2.0 के तहत 20 एमएलडी क्षमता के टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट ऊर्जाधानी कोरबा की जीवनरेखा मानी जाने वाली हसदेव नदी अब प्रदूषण के काले साये से मुक्त होकर फिर से कल-कल बहेगी। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी ‘अमृत मिशन 2.0’ योजना ने कोरबा में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ दी है। छत्तीसगढ़ शासन के प्रयासों से भारत सरकार ने शहर के दूषित जल के वैज्ञानिक उपचार हेतु 165 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। सालों से शहर के 11 बड़े नालों का दूषित सीवरेज जल सीधे हसदेव नदी में मिलकर उसकी शुद्धता को प्रभावित कर रहा था। इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए 20 एमएलडी क्षमता का अत्याधुनिक टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग 3 करोड़ 30 लाख लीटर दूषित जल को नदी में गिरने से पहले ही रोककर अत्याधुनिक तकनीक से उपचारित किया जाएगा। इससे नदी के प्रदूषण में भारी कमी आएगी और उसका जल पुनः स्वच्छ बनेगा। परियोजना के पूर्ण होते ही कोरबा उन चुनिंदा 12 शहरों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहाँ जल शोधन की ऐसी उन्नत और वैज्ञानिक व्यवस्था उपलब्ध है। यह परियोजना केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘वेस्ट टू वेल्थ’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी बनेगी। उपचारित किए गए करोड़ों लीटर पानी को बर्बाद करने के बजाय एनटीपीसी द्वारा निर्धारित दरों पर खरीदा जाएगा। इससे उद्योगों को स्वच्छ जल उपलब्ध होगा, नगर निगम के राजस्व में वृद्धि होगी और भू-जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। कलेक्टर  कुणाल दुदावत ने इसे कोरबा जिले के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मानकों का पालन करते हुए नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा तैयार किए गए इस वैज्ञानिक समाधान को अब वास्तविक रूप मिलने जा रहा है। वर्तमान में निविदा प्रक्रिया प्रगति पर है और जल्द ही निर्माण कार्य धरातल पर शुरू हो जाएगा। अमृत मिशन 2.0 के तहत यह प्लांट न केवल हसदेव नदी को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण की नई मिसाल भी पेश करेगा। इसके माध्यम से कोरबा औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ पर्यावरणीय स्वच्छता के क्षेत्र में भी अग्रणी बनेगा।

बारूद की गंध की जगह अपने भविष्य विकास गढने लगे हैं

रायपुर बारूद की गंध की जगह अपने भविष्य विकास गढने लगे हैं छत्तीसगढ़ शासन की नक्सली पुनर्वास नीति केवल शस्त्र छोड़ने का अभियान नहीं, बल्कि भटकते युवाओं के जीवन में नई रोशनी लाने का माध्यम बन गई है। जहां कभी बारूद की गंध थी, वहां अब विकास की सड़कें पहुंच रही हैं। भय और आतंक को छोड़कर हुनर अपना रहे ये युवा आज छत्तीसगढ़ के बदलते स्वरूप के प्रतीक बन गए हैं।           राज्य शासन की नीति का मुख्य केंद्र केवल आत्मसमर्पण तक सीमित न रहकर, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा में मजबूती से स्थापित करना है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा जिला प्रशासन द्वारा लिवलीहुड कॉलेज में आत्मसमर्पित युवक-युवतियों के लिए स्वरोजगार आधारित विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। विनाश से विकास तक का सफर इस परिवर्तन की एक जीती-जागती मिसाल हैं 27 वर्षीय विनोद कुरसम। बीजापुर जिले के सुदूर बीहड़ गांव कोकेरा के रहने वाले विनोद का बचपन अभावों और भय के साये में बीता। शिक्षा की कमी विनोद केवल पांचवीं तक पढ़ सके, क्योंकि उनके गांव के स्कूल को माओवादियों ने बारूद से उड़ा दिया था। बुनियादी सुविधाओं (सड़क, बिजली, शिक्षा) से कटे कोकेरा गांव में 15-16 साल पहले नक्सलियों ने पैर पसारे। विनोद को कम उम्र में ही बाल संगठन में झोंक दिया गया और बाद में वे चौरपल्ली आरपीसी जनताना सरकार के कमांडर बना दिए गए। परिवर्तन का संकल्प विनोद स्वीकार करते हैं कि असामाजिक गतिविधियों में उनके जीवन के कीमती 16 वर्ष व्यर्थ ही व्यतीत हो गए। लेकिन शासन की विकास योजनाओं और पुनर्वास नीति ने उनकी सोच बदल दी। 15 जनवरी 2026 को विनोद ने अपने 30 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर नई शुरुआत का फैसला किया।जब जागो तब सवेरा। विनोद कुरसम ने कहा कि मैं अपने बच्चों को वह जीवन नहीं देना चाहता जो मैंने जिया। मैं उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाना चाहता हूँ।  आत्मनिर्भरता की नई उड़ान           आज विनोद दंतेवाड़ा के लिवलीहुड कॉलेज में इलेक्ट्रीशियन का ट्रेड सीख रहे हैं। उनके चेहरे की मुस्कान उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और तीन बेटे (बबलू, कांत और निलेष) हैं। उनका बड़ा बेटा वर्तमान में बालक आश्रम बरदेली में कक्षा 7 वीं का छात्र है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद विनोद अपने गांव के पास ही बिजली के उपकरणों की मरम्मत का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। विनोद की कहानी शासन की नीतियों की एक असाधारण सफलता है।

क्या है इस जगह का राज? छत्तीसगढ़ में ‘उछलती जमीन’ का रहस्य, कदम रखते ही महसूस होगा झटका

सरगुजा   छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित मैनपाट केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी 'रहस्यमयी धरती' के लिए भी दुनिया भर में कौतूहल का विषय बना हुआ है। 'मिनी शिमला' के नाम से मशहूर यह हिल स्टेशन विज्ञान और रोमांच का एक ऐसा संगम है, जिसे देख कर पर्यटक दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। आइए जानते हैं कहां यह रहस्यमयी जगह। जहां कदम रखते ही कांपने लगती है जमीन मैनपाट का सबसे बड़ा आकर्षण 'जलजली' पॉइंट है। यहां की जमीन आम पत्थरों या मिट्टी की तरह कठोर नहीं है। जैसे ही आप इस जमीन पर कदम रखते हैं या थोड़ा सा उछलते हैं, पूरी धरती किसी स्पंज के गद्दे की तरह हिलने लगती है। ऐसा महसूस होता है जैसे आप जमीन पर नहीं, बल्कि पानी पर तैरती किसी चादर पर खड़े हों। क्या है इस रहस्य के पीछे का विज्ञान? विशेषज्ञों के अनुसार, इसे वैज्ञानिक भाषा में 'क्वेकिंग बॉग' (Quaking Bog) कहा जाता है। जमीन के नीचे पानी का एक बड़ा सोते (Internal water body) होने और ऊपर वनस्पति व दलदली मिट्टी की एक मोटी लचीली परत होने के कारण यह 'बाउंस' करती है। हालांकि, शोधकर्ता आज भी इस गुत्थी को पूरी तरह सुलझाने में जुटे हैं कि इतनी ऊंचाई पर यह संरचना स्थायी रूप से कैसे बनी हुई है। 'मिनी शिमला' की मनमोहक वादियां समुद्र तल से लगभग 3,300 फीट की ऊंचाई पर बसा मैनपाट अपनी ठंडी जलवायु और धुंध भरी पहाड़ियों के कारण पर्यटकों की पहली पसंद है। पर्यटन के अन्य प्रमुख केंद्र:     उल्टा पानी: यहां गुरुत्वाकर्षण के नियम फेल होते नजर आते हैं, क्योंकि पानी ढलान के बजाय ऊपर की ओर बहता है।     टाइगर और फिश पॉइंट: घने जंगलों के बीच गिरते दूधिया झरने मन को शांति प्रदान करते हैं।     मेहता पॉइंट: यहाँ से सूर्यास्त और घाटियों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। संस्कृति का संगम: छोटा तिब्बत मैनपाट की एक और खासियत यहां का तिब्बती समुदाय है। 1962 के आसपास यहां बड़ी संख्या में तिब्बती शरणार्थी बसे थे, जिसके बाद इसे 'मिनी तिब्बत' कहा जाने लगा। यहां के भव्य और शांत बौद्ध मठ आत्मिक शांति का अनुभव कराते हैं। स्थानीय बाजारों में तिब्बती ऊनी कपड़े और पारंपरिक व्यंजनों (जैसे मोमोज और थुपका) का स्वाद सैलानियों को खूब लुभाता है।  

800 मीटर का ट्रैक तैयार, जुलाई से नई रेल लाइन का संचालन, कई गांवों को मिलेगा कनेक्टिविटी

इंदौर  इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के तहत बहुप्रतीक्षित टीही टनल का काम अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर और धार विधायक नीना वर्मा ने निर्माणाधीन टनल में करीब 70 फीट नीचे उतरकर कार्यों का जायजा लिया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने सुरंग के भीतर पहुंचकर निर्माण की गुणवत्ता और प्रगति का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश देते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग है, जिसे तय समयसीमा में पूरा करना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न करने पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने दावा किया है कि आगामी जून-जुलाई तक टनल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही इंदौर से धार के बीच सीधा रेल संचालन शुरू होने की संभावना है। हाल ही में पीथमपुर से धार के बीच टॉवर वैगन इंजन के माध्यम से सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। टनल में युद्धस्तर पर चल रहा काम रेलवे अधिकारियों के अनुसार करीब 3 किमी लंबी टीही टनल में तेजी से कार्य जारी है। अब तक लगभग 800 मीटर हिस्से में ट्रैक और पटरी बिछाने का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य भी तेज गति से प्रगति पर है। फिनिशिंग और अन्य तकनीकी कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बुनियादी ढांचे को मिल रही मजबूती केंद्र सरकार की पहल पर क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। टीही टनल और इंदौर-दाहोद रेल परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है जो आने वाले समय में पूरे मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। कनेक्टिविटी से विकास को रफ्तार राज्यमंत्री ठाकुर ने कहा कि इंदौर-धार रेल लाइन शुरू होने से क्षेत्र में आवागमन आसान होगा और व्यापार-उद्योग को नई गति मिलेगी। यह परियोजना न केवल यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगी, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी खोलेगी। परियोजना की मुख्य विशेषताएं लंबाई और मार्ग: कुल लंबाई 204.76 किमी (183 किमी मप्र में, 22 किमी गुजरात में)। मार्ग: इंदौर-टीही-पीथमपुर-सागौर- गुणावद-धार-दाहोद। वर्तमान स्थिति : इंदौर-टीही (21 किमी) तक काम पूरा हो चुका है। टीही-धार के बीच 2.9 किमी लंबी सुरंग का काम पूरा हो चुका है, ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया में है। रेलवे स्टेशन (धार) निर्माण अंतिम चरण में है। तकनीकी प्रगति: सागौर-धार खंड में ट्रैक बिछाने के लिए मशीन का उपयोग किया जा रहा है। फायदे: इस लाइन के शुरू होने से इंदौर और मुंबई के बीच की दूरी लगभग 55 किमी. कम हो जाएगी।

नई रेल लाइन से प्रदेश में बढ़ेगी 32 एक्स्ट्रा ट्रेनों की संचालन क्षमता

उज्जैन  उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ को देखते हुए रेलवे भी तैयारी कर रहा है। रेलवे इंदौर से उज्जैन के बीच कई सुविधाएं देगा, जिससे सिंहस्थ में ज्यादा से ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। नई लाइनों के साथ रेलवे बायपास लाइन भी बनाएगा, जिससे ट्रेनें इंजन बदले बिना मुड़ सकेंगी। इंदौर-उज्जैन के बीच ऑटोमेटिक सिग्नल भी लगेंगे, जिससे ट्रेन यात्रा सुरक्षित हो सकेगी। रेलवे रतलाम मंडल के प्रमुख स्टेशनों इंदौर, डॉ. अंबेडकर नगर (महू), लक्ष्मीबाई नगर और उज्जैन पर कोचिंग एवं टर्मिनल विकास कार्य चल रहे हैं। ये स्टेशन मालवा क्षेत्र के प्रमुख यात्री, धार्मिक और पर्यटन केंद्र है। इंदौर और उज्जैन के आसपास के स्टेशनों को भी संवारा जाएगा। इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में 7 नई पिट लाइनें और 16 नई स्टेबलिंग लाइनों की सुविधाएं जुटाई जाएंगी, जिससे प्रतिदिन 21 प्राइमरी मेंटेनेंस और 11 प्लेटफॉर्म रिटर्न ट्रेनों सहित 32 अतिरिक्त ट्रेनों की संचालन क्षमता विकसित होगी। इंदौर स्टेशन: नया बन रहा स्टेशन वर्तमान में इंदौर स्टेशन से प्रतिदिन लगभग 57 जोड़ी ट्रेनें संचालित होती है, जिसमें 41 जोड़ी ओरिजिनेट/टर्मिनेट होती है। यहां 6 प्लेटफॉर्म और 5 पिट लाइनें उपलब्ध 6 है। स्टेशन का पुनर्विकास प्रगति पर है, जो यात्री सुविधा, अतिरिक्त ट्रेनों की दृष्टि से भी उपयोगी साबित होंगे। लक्ष्मीबाई नगर: 7 स्टेबलिंग लाइनें बनेंगी लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन में वर्तमान में 4 स्टेबलिंग लाइन, 3 प्लेटफॉर्म तथा 1 शंटिंग नेक उपलब्ध हैं। यहां दो अतिरिक्त प्लेटफार्म निर्माण का कार्य प्रगति पर हैं। यहां एक कोचिंग मेंटेनेंस डिपो बनाया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 259 करोड़ रुपए है। 5 नई पिट लाइनें, 7 स्टेबलिंग लाइनें और सिक कोच लाइनें निर्मित होंगी। इससे प्रतिदिन 15 प्राइमरी मेंटेनेंस ट्रेनों की देखरेख संभव होगी। यह सैटेलाइट टर्मिनल के रूप में विकसित होगा। इसके साथ ही लक्ष्मी बाई नगर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास कार्य भी किया जा रहा, जिसके अंतर्गत अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ नया स्टेशन भवन, नए प्लेटफार्म, कवर शेड, फुट ओवर ब्रिज, लिफ्ट/एस्केलेटर आदि लगाने के कार्य किया जाना है। जल्द ही नई लाइनें भी डाली जाएंगी उज्जैन सिंहस्थ का यात्री दबाव इंदौर पर भी रहेगा। स्टेशन निर्माण के साथ नई लाइनें डाली जाएंगी ताकि नई ट्रेनें भी चलाई जा सके। इस कार्य से आने वाले समय में यात्रियों और नई ट्रेनों के संचालन में काफी फायदा मिल सकेगा। – शंकर लालवानी, सांसद डॉ. अंबेडकर नगर (महू): 2 नई पिट लाइन बनेगी वर्तमान में यहां 4 प्लेटफार्म एवं 3 पिट लाइन उपलब्ध हैं, किंतु प्लेटफार्म की लंबाई, ओएचई एवं प्लेटफार्म कनेक्टिविटी का कार्य प्रगति पर है। इसके बाद यह स्टेशन अधिक गाड़ियों के संचालन के लिए सक्षम हो जाएगा। वर्तमान में इस स्टेशन से 15 जोड़ी नियमित एवं 2 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इस स्टेशन को समेकित कोचिंग डिपो के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके पहले चरण में 2 नई पिट लाइनों का कार्य जो लगभग 94 करोड़ की लागत से किया जाएगा। इससे 6 ट्रेनों की मेंटेनेंस क्षमता बढ़ेगी। उज्जैन जंक्शन: 9 स्टेबलिंग लाइन बनेगी उज्जैन धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है, वहां आगामी सिंहस्थ 2028 को देखते हुए 9 नई स्टेबलिंग/होल्डिंग लाइनों की योजना बनाई गई है। इससे लगभग 11 प्लेटफॉर्म रिटर्न ट्रेनों को खड़ा करने और टर्मिनेट करने की क्षमता विकसित होगी।

नोएडा प्राधिकरण का ₹10,290 करोड़ का बजट, नई योजनाओं को मिली मंजूरी

नोएडा नोएडा प्राधिकरण की 222वीं बोर्ड बैठक में कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए है.  इस बैठक में शहर के विकास, रियल एस्टेट, आम लोगों के सुविधाओं और वित्तीय योजनाओं से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए. इस बैठक की अध्यक्षता अवस्थापना और औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने की. बैठक में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के बड़े अधिकारी भी शामिल हुए।  आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बजट योजना तैयार कर ली गई है. इस बार करीब 10,290 करोड़ रुपये कमाने और 10,004 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है. अगर पिछले साल (2025-26) की बात करें, तो सरकार ने बहुत बड़ा लक्ष्य रखा था, लेकिन असलियत में केवल 6,589 करोड़ रुपये की ही कमाई हो पाई. पिछले साल की इस कमी को देखते हुए, इस बार के लक्ष्य ज्यादा व्यावहारिक रखे गए हैं।  नोएडा के 50 साल पूरे होने के मौके पर प्राधिकरण ने हजारों परिवारों के घर का सपना पूरा करने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं. सरकार की नीतियों के चलते अब लंबे समय से अटकी 57 में से 36 हाउसिंग परियोजनाओं के काम में तेजी आने की उम्मीद है. इसी कड़ी में, बकाया भुगतान के विवादों को सुलझाने के लिए 'वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना-2026' को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है, जिसे शासन की अंतिम अनुमति के बाद लागू कर दिया जाएगा। . स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट लेआउट पास इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सेक्टर-150 स्थित स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट के संशोधित लेआउट प्लान को भी पास कर दिया गया है. इन फैसलों से न केवल रुकी हुई स्कीमों को नई जिंदगी मिलेगी, बल्कि बरसों से पजेशन का इंतजार कर रहे लोगों को भी जल्द राहत मिल सकेगी. साथ ही पहले की बोर्ड बैठकों में लिए गए कुछ फैसलों को वापस भी लिया गया है, जिससे इस प्रोजेक्ट में नई दिशा मिलने की उम्मीद है।    पानी के बकाया बिल पर ब्याज से परेशान लोगों को राहत देने के लिए प्राधिकरण ने 3 महीने की एमनेस्टी स्कीम शुरू करने का फैसला किया है. इसमें तय समय के भीतर भुगतान करने पर 20% से 40% तक ब्याज में छूट मिलेगी. यह योजना 16 अप्रैल से 15 जुलाई 2026 तक लागू रहेगी. इसके अलावा, आवासीय और औद्योगिक प्लॉट्स में “मिश्रित उपयोग” की अनुमति देने का फैसला भी लिया गया है।  यानी अब कुछ शर्तों के साथ एक ही प्लॉट पर अलग-अलग तरह के उपयोग किए जा सकेंगे, हालांकि इसके लिए अतिरिक्त शुल्क देना होगा. उन लोगों के लिए भी राहत दी गई है, जिन्होंने वर्षों से अपने प्लॉट पर निर्माण नहीं कराया है. 12 साल से ज्यादा समय से निर्माण अधूरा छोड़ने वालों को अब 3 महीने का आखिरी मौका दिया जाएगा, जिसमें वे शुल्क देकर समय बढ़ा सकते हैं. सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए फायर डिपार्टमेंट को भी बड़ा बजट दिया गया है. नोएडा में आग और भूकंप जैसी आपदाओं से निपटने के लिए करीब 154 करोड़ रुपये से नए उपकरण और मशीनें खरीदी जाएंगी।  शहर की साफ-सफाई और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए रोज निकलने वाले करीब 100 टन ग्रीन वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण की योजना भी बनाई गई है. इसके लिए कंपनियों से प्रस्ताव मांगे जाएंगे. वहीं, सेक्टर-95 स्थित राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल और ग्रीन गार्डन के रखरखाव और मरम्मत के लिए 107.77 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी गई है। 

नए वित्तीय वर्ष में इंटरनेट सेवाओं में हो सकती है परेशानी, 100, 200, 500 रुपये के नए नोट होंगे बाजार में

नर्मदापुरम अमरीका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, लेकिन भारत में करंसी पेपर बनाने वाली नर्मदापुरम स्थित प्रतिभूति कागज कारखाना (एसपीएम) ने उत्पादन बढ़ाकर स्थिति संभालने का संकेत दिया है। एसपीएम ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक करंसी पेपर तैयार किया है, जिससे जल्द ही 100, 200 और 500 रुपए के नए नोट बाजार में उपलब्ध हो सकेंगे। इससे आमजन और व्यापारियों को लेनदेन में सुविधा मिलेगी। एसपीएम देश का प्रमुख करंसी पेपर कारखाना है, जहां नोटों के लिए कागज तैयार किया जाता है। 7 मीट्रिक टन करंसी पेपर तैयार पहले भी किल्लत के समय यहां 10 और 20 रुपए के नोटों के लिए कागज तैयार किया था। अब 100, 200 और 500 रुपए के नोटों के लिए कागज का उत्पादन किया गया है। एसपीएम ने 31 मार्च 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच 7 मीट्रिक टन करंसी पेपर तैयार किया है, जबकि लक्ष्य 6 मीट्रिक टन का था। प्रबंधन और कर्मचारियों के बेहतर तालमेल से यह संभव हुआ। नए वित्तीय वर्ष के लिए उत्पादन जारी है। इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होने की आशंका के बीच नकद लेनदेन में ये नए नोट सहायक होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, 500 रुपए के नोट के बाद सबसे अधिक उपयोग 100 रुपए के नोट का होता है। इसके बाद 200 रुपए के नोट का स्थान आता है। इसी कारण एटीएम में 500, 100 रुपए के नोट अधिक रखे जाते हैं। अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती प्रतिभूति कागज कारखाना एसपीएम देश की महत्वपूर्ण इकाई है। इसी कारखाने ने 1000 रुपए के नोट का कागज तैयार किया था। साथ ही पासपोर्ट पेपर, स्टांप पेपर निर्माण में भी आत्मनिर्भरता का आधार बना है। प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल है। कारखाना हर स्थिति में काम करने में सक्षम है। वित्तीय वर्ष में लक्ष्य से अधिक 7 मीट्रिक टन करंसी पेपर का उत्पादन किया है।- संजय भवसार, उप महाप्रबंधक (पीआरओ), एसपीएम नर्मदापुरम बाजार में 500 और 100 रुपए के नोटों का सबसे अधिक उपयोग होता है। एटीएम में भी इनकी पर्याप्त उपलब्धता जरूरी है।– रमेश बाघेला, लीड बैंक मैनेजर, सेंट्रल बैंक, नर्मदापुरम बाजार में 50 फीसदी लेनदेन डिजिटल होता है, बाजार मेंनए नोट आने से आमजन और व्यापारियों को सुविधा मिलेगी।- महेंद्र चौकेसे अध्यक्ष, किराना व्यापारी संघ, नर्मदापुरम जानिए जरूर प्वॉइंट्स वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा असर एसपीएम) ने उत्पादन बढ़ाकर स्थिति संभालने का दिया संकेत जल्द ही 100, 200 और 500 रुपए के नए नोट बाजार में होंगे 7 मीट्रिक टन करंसी पेपर तैयार