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बिहार में शराबबंदी को चुनौती, फाइल और ट्रेन की छतों से हो रही शराब की अनोखी तस्करी

 सोनपुर बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपनाकर कानून को चुनौती दे रहे हैं. हाल के दिनों में तस्करी के कुछ ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, जिसने उत्पाद विभाग और पुलिस को भी हैरान कर दिया है. तस्करों की चालाकी देखकर जांच एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं. तरबूज के अंदर छिपाई शराब, जांच में हुआ खुलासा सोनपुर रेलवे स्टेशन के पास जांच के दौरान एक अनोखा मामला सामने आया. बरौनी एक्सप्रेस में तलाशी के दौरान लावारिस हालत में रखे गए तरबूज से शराब बरामद की गई. तस्करों ने बड़ी सफाई से तरबूज को काटकर उसके अंदर शराब की बोतलें छिपा दी थीं, ताकि किसी को शक न हो. लेकिन जांच के दौरान यह चालाकी पकड़ी गई और पूरा खेल सामने आ गया. एग्जीक्यूटिव फाइल में भी छिपाकर ले जा रहे थे शराब इतना ही नहीं, एक अन्य मामले में तस्करों ने एग्जीक्यूटिव फाइल के अंदर शराब छिपाकर ले जाने की कोशिश की. फाइल के भीतर खास तरीके से जगह बनाकर बोतलें रखी गई थीं. हालांकि, उत्पाद विभाग की सतर्कता के चलते इस तस्करी का भी पर्दाफाश हो गया. इन घटनाओं से साफ है कि तस्कर हर संभव तरीका अपनाकर शराब की सप्लाई करने में जुटे हैं. ट्रेन की छत से गिरने लगी शराब की बोतलें वहीं, कुछ दिन पहले सत्याग्रह एक्सप्रेस में एक अजीबोगरीब घटना सामने आई. ट्रेन संख्या 15274 रक्सौल की ओर जा रही थी, तभी अचानक कोच की छत से शराब की बोतलें गिरने लगीं. यह घटना उत्तर प्रदेश के पिपराइच और कप्तानगंज स्टेशन के बीच हुई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्लीपर कोच S4 और S5 के बीच बाथरूम के ऊपर लगे सीलिंग पैनल से करीब 20 से अधिक बोतलें एक-एक कर नीचे गिरीं. तस्करों की नई चाल से पुलिस भी हैरान पहले तो यात्रियों को समझ नहीं आया कि आखिर हो क्या रहा है, लेकिन कुछ ही देर में मामला साफ हो गया कि यह शराब तस्करी का नया तरीका है. इस घटना ने रेलवे और पुलिस प्रशासन को भी सतर्क कर दिया है. लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बाद उत्पाद विभाग और पुलिस ने जांच और निगरानी बढ़ा दी है. अधिकारियों का कहना है कि तस्करों के हर नए हथकंडे पर नजर रखी जा रही है और उन्हें पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है.

अज्ञात कार ने दिल्ली विधानसभा का गेट तोड़ा, स्पीकर के कमरे के बाहर गुलदस्ता छोड़कर भागे

 नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा में बड़ी चूक सामने आई है, जब एक अज्ञात कार गेट तोड़कर अंदर घुस गई. घटना से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. कार कैसे अंदर पहुंची, इसकी जांच की जा रही है. पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और वाहन चालक की पहचान करने की कोशिश जारी है. दोपहर 2 बजकर 5 मिनट पर यूपी नंबर की सफेद Tata Sierra कार मॉल रोड स्थित बंद रहने वाले गेट को तोड़कर VIP एंट्री से अंदर घुसी.  कार सवार स्पीकर रूम के बाहर गुलदस्ता रखकर मौके से फरार हो गया. घटना के बाद हड़कंप मच गया. जांच के लिए विधानसभा परिसर में दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी मौजूद हैं और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की तलाश जारी है।  मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि गेट नंबर 2 के पास मेट्रो के पास खड़े दो लोगों ने पूरी घटना अपनी आंखों से देखी. पीली टी-शर्ट पहने एक युवक, जिसका नाम रवित बताया जा रहा है, उसने कहा कि कार तेज़ी से गेट तोड़कर अंदर आई, कुछ देर परिसर में घूमी और फिर बाहर निकल गई. चश्मदीदों के मुताबिक, घटना के दौरान वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोगों में शोर मच गया। 

भाजपा का 47वां स्थापना दिवस उत्साह के साथ मनाया गया, जिला अध्यक्ष वैभव गुप्ता ने घर पर फहराया पार्टी का ध्वज

बिलासापुर जिले में भारतीय जनता पार्टी का 47वां स्थापना दिवस बड़े ही उत्साह, गरिमा और राष्ट्रभावना के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष वैभव गुप्ता ने अपने निज निवास में पार्टी का ध्वज फहराकर कार्यकर्ताओं को संगठन की विचारधारा और मूल्यों के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया। स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं समर्थक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण के साथ हुई, जिसके पश्चात सभी ने एकजुट होकर राष्ट्रहित और संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया। जिला अध्यक्ष वैभव गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक विचारधारा है, जो राष्ट्रवाद, सेवा और सुशासन के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा का इतिहास संघर्ष, समर्पण और सेवा से भरा हुआ है, और आज पार्टी विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। यह हम सभी कार्यकर्ताओं के लिए गर्व की बात है कि हम इस संगठन का हिस्सा हैं। कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने "भारत माता की जय" और "वंदे मातरम्" के जयघोष के साथ पूरे वातावरण को देशभक्ति से ओत-प्रोत कर दिया। साथ ही, एक-दूसरे को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी गईं और संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर कई कार्यकर्ताओं ने अपने विचार भी साझा किए और पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत के साथ किया गया।

250 एकड़ में फैलेगा आधुनिक शिक्षा का हब, नीतीश सरकार ने 547 करोड़ के प्रोजेक्ट को दी रफ्तार

पटना बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के करीब साढ़े तीन महीने बाद अब राज्य सरकार प्रस्तावित ‘एजुकेशन सिटी’ को लेकर पूरी तरह एक्टिव हो गई है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है और इसे वैश्विक स्तर के मॉडल पर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है. जापान-सिंगापुर के मॉडल पर होगा निर्माण सरकार इस एजुकेशन सिटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए जापान और सिंगापुर जैसे देशों के मॉडल का अध्ययन कर रही है. साथ ही विदेशी कंसल्टेंट्स की मदद से डीपीआर को और बेहतर बनाया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, अगले दो महीने में इसका फाइनल इंटरनेशनल मॉडल सामने आ सकता है. 250 एकड़ में बनेगा आधुनिक एजुकेशन हब यह एजुकेशन सिटी पटना के आसपास लगभग 250 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित की जाएगी. इसे ‘शेयर्ड कैंपस मॉडल’ पर बनाया जाएगा, जहां अलग-अलग विश्वविद्यालय और कॉलेज अपनी पहचान के साथ एक ही परिसर में मौजूद रहेंगे और कई सुविधाएं शेयर करेंगे. वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से लैस होगा कैंपस इस एजुकेशन सिटी में छात्रों को अत्याधुनिक सुविधाएं देने की तैयारी है. इसमें स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, हाईटेक लैब, रिसर्च सेंटर, सेमिनार हॉल, हॉस्टल, गेस्ट हाउस, स्पोर्ट्स स्टेडियम, इंडोर स्टेडियम और ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं शामिल होंगी. साथ ही फैकल्टी और स्टाफ के लिए आवासीय परिसर भी बनाए जाएंगे. 547 करोड़ से अधिक का बजट, रोजगार के नए अवसर इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए 547 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, हालांकि आगे यह राशि बढ़ भी सकती है. सरकार का मानना है कि यह एजुकेशन हब न केवल शिक्षा के स्तर को ऊंचा करेगा, बल्कि राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा. शेयर्ड कैंपस मॉडल से मिलेगा बड़ा फायदा शेयर्ड कैंपस मॉडल के तहत एक ही परिसर में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे छात्रों और शिक्षकों का समय बचेगा. साथ ही एक मजबूत रिसर्च और इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार होगा. इंडस्ट्री कनेक्शन, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और विभिन्न कोर्स की उपलब्धता से यह परिसर शिक्षा का बड़ा केंद्र बन सकता है. बिहार बनेगा शिक्षा का मजबूत केंद्र सरकार की योजना है कि इस एजुकेशन सिटी के जरिए बिहार को देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल किया जाए. यहां देशभर के छात्रों को क्वालिटी एजुकेशन मिलेगी और राज्य शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाएगा.

डांस ग्रुप के खिलाफ नस्लीय आपत्ति, पटना में महिला की अनुचित हरकत वीडियो में कैद

पटना. पटना में नॉर्थ-ईस्ट से आई महिलाओं और युवतियों के साथ कथित नस्लीय टिप्पणी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो का सटीक स्थान स्पष्ट नहीं है, लेकिन आसपास के दृश्य के आधार पर इसे पटना जंक्‍शन या राजेंद्रनगर टर्मिनल का बताया जा रहा है। वीडियो में अरुणाचल प्रदेश से आई महिलाओं को ‘चिंकी’, ‘मोमो’ जैसे शब्दों से संबोधित किया जा रहा है, जिससे वे नाराज नजर आ रही हैं। खास बात यह है कि ये आपत्तिजनक टिप्पणियां किसी पुरुष ने नहीं, बल्कि स्टेशन परिसर में मौजूद एक महिला द्वारा की जा रही थीं। बताया जा रहा है कि यह घटना वॉशरूम के पास हुई, जहां किसी बात को लेकर पहले कहासुनी हुई और फिर टिप्पणीबाजी शुरू हो गई। वीडियो बना रही एक युवती कहती सुनाई देती है कि वे लोग काफी दूर से यहां आए हैं, लेकिन उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। युवती यह भी आरोप लगाती है कि इस तरह की हरकतें देश की छवि को खराब करती हैं। विवाद के दौरान संबंधित महिला यह सफाई देती सुनी गई कि ‘मोमो’ उसका पसंदीदा भोजन है, लेकिन इसके बावजूद वह लगातार टिप्पणी करती रही। अरुणाचल की युवत‍ियों ने कहा-उन्‍हें नीचा दि‍खाने की कोश‍िश इस पर युवतियों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, शौचालय उपयोग को लेकर हुए विवाद के बाद यह मामला बढ़ा। फिलहाल, आतिथ्य सत्कार के लिए प्रसिद्ध बिहार में इस तरह की घटना की व्यापक स्तर पर निंदा हो रही है। पुलिस ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

छत्तीसगढ़ की समाधान योजना बनी शाहीन बेगम का बिजली बिल कम करने में सहायक

रायपुर. बढ़ते बिजली बिल और सरचार्ज से जूझ रहे उपभोक्ताओं के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। यह योजना महज छूट तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक बोझ से दबे परिवारों को आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर दे रही है। योजना के तहत उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि में 50 से 75 प्रतिशत तक की छूट और सरचार्ज में 100 प्रतिशत माफी मिल रही है। साथ ही, केवल 10 प्रतिशत राशि जमा कर शेष भुगतान आसान किस्तों में करने की सुविधा इसे और भी सुलभ बनाती है। “मोर बिजली ऐप” और नजदीकी वितरण केंद्रों के माध्यम से पंजीयन प्रक्रिया भी सरल रखी गई है। मनेन्द्रगढ़ की शाहीन बेगम इसकी जीवंत मिसाल हैं। करीब 48 हजार रुपये के बकाया में 23 हजार रुपये से अधिक की छूट मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। प्रदेश में लगभग 28 लाख उपभोक्ताओं को लाभान्वित करने वाली इस योजना के तहत करीब 757 करोड़ रुपये की राहत दी जा रही है। यह पहल सरकार और नागरिकों के बीच भरोसे की नई नींव भी मजबूत कर रही है।

अवैध कब्जों पर चला प्रशासन का डंडा, पश्चिमी चंपारण में 60 अतिक्रमणकारियों को अल्टीमेटम

बगहा/चंपारण. बगहा प्रखंड एक के मझौवा गांव में बेतिया राज की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए अंचल प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रशासन की ओर से चिह्नित 60 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर उनसे भूमि संबंधी कागजात प्रस्तुत करने और जवाब देने को कहा गया है। अंचल प्रशासन के अनुसार, मझौवा क्षेत्र में लंबे समय से बेतिया राज की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत मिल रही थी। नोटिस मिलने के बाद गांव के लोग अंचल कार्यालय पहुंचे। प्रभारी सीओ सह बीडीओ प्रदीप कुमार ने बताया कि यदि संबंधित लोग निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब या वैध कागजात प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो कब्जे वाली जमीन को खाली कराया जाएगा। इसके लिए आवश्यक होने पर प्रशासनिक बल का भी प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले भी नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अधिकांश लोगों ने न तो जवाब दिया और न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किया। इसी को देखते हुए इस बार प्रशासन ने सख्ती बरतने का निर्णय लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निष्पक्ष कार्रवाई से सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कर जनहित में उपयोग किया जा सकेगा। समय रहते प्रस्तुत करें कागजात वहीं, कुछ लोगों ने प्रशासन से पारदर्शिता बनाए रखने और वास्तविक पात्रों को परेशान नहीं करने की मांग की है। अंचल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय रहते अपने कागजात प्रस्तुत करें, ताकि अनावश्यक कार्रवाई से बचा जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एनएसजी भारत का अभेद्य कवच, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- हम हर हाल में सुरक्षित

एनएसजी भारत का अभेद्य कवच, इनसे हैं हम हर हाल में सुरक्षित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव हमारे भरोसे की गारंटी है एनएसजी काउंटर टेररिस्ट ग्रुप के आधुनिकीकरण के लिए 200 करोड़ रूपए की डीपीआर तैयार सरकार जल्द ही इस दिशा में आगे बढ़ेगी भोपाल के पास तूमड़ा में खुलेगा आकस्मिक आपदा प्रबंधन के लिए अत्याधुनिक प्रशिक्षण केन्द्र लाल परेड मैदान में हुआ नेशनल सिक्योरिटी गार्ड शो मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया समग्र क्षमता निर्माण प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम का शुभारंभ एक माह तक चलेगा एनएसजी एवं म.प्र. पुलिस का यह साझा प्रशिक्षण कार्यक्रम भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यद्यपि हमारी संस्कृति हमें सबके सुख की कामना करना सिखाती है, पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में दुनिया यह भी जान गई है कि यदि कोई हमें छेड़ेगा, तो हम उसे नहीं छोड़ेंगे। जो जिस भाषा में समझें, उसे उसी भाषा में समझाना जरूरी है।अतिवादी ताकतें देश के विकास में बड़ी बाधक हैं। हमें ऐसी ताकतों से पूरी मजबूती से निपटना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (नेशनल सिक्युरिटी गार्ड) भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच है। एनएसजी के कारण ही हमारी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था बेहद सुदृढ़ है। देश में बीते काल में हुई किसी भी प्रकार की अतिवादी, अप्रिय घटनाओं एवं असामान्य परिस्थितियों में एनएसजी गार्ड की पूरी मुस्तैदी से मौजूदगी ने हमें यह एहसास कराया है कि एनएसजी है तो हम हर हाल में सुरक्षित हैं। एनएसजी देश की सीमा के भीतर नागरिक सुरक्षा की पक्की गारंटी की तरह है। उन्होंने कहा कि एनएसजी के जवान अपनी जान की परवाह किए बिना राष्ट्र की रक्षा में तत्पर रहते हैं। यह बल अपनी पेशेवर क्षमता, अनुशासन और तकनीकी दक्षता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को लाल परेड मैदान में आयोजित एनएसजी-शो में सहभागिता कर एनएसजी द्वारा मध्यप्रदेश पुलिस के जवानों के लिए आयोजित समग्र क्षमता निर्माण प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन के साझा कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाल परेड मैदान में आयोजित एनएसजी शो देखा और कमांडो के प्रदर्शन की सराहना की। शो के दौरान एनएसजी जवानों ने मॉक टेररिस्ट अटैक का रीयलस्टिक सीन क्रिएट कर इस तरह के अटैक्स को काउंटर कर पूरी क्षमता से निपटने के लिए एनएसजी द्वारा अपनाई जाने वाली पूरी प्रकिया एवं कार्यवाही का सजीव प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह शो पुरुषार्थ और साहस से पराक्रम की पराकाष्ठा के प्रदर्शन का परिचायक है। इस प्रशिक्षण प्रदर्शन में जवानों ने हवा में उड़ते हुए जो करतब दिखाए हैं, वे सच में अद्भुत है। एनएसजी जवान हमारी सुरक्षा व्यवस्था की धुरी हैं। जल, थल, नभ हर तरह से देश पर किसी भी तरह की चुनौतियां और कठिनाइयां आ सकती हैं, इनसे निपटने की तैयारियों के लिए यह प्रशिक्षण और पूर्वाभ्यास बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण कार्यक्रम सह एनएसजी शो के शुभारंभ अवसर पर पुलिस बैंड द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी प्रकार के टेररिस्ट अटैक से निपटने के लिए हम अपने सुरक्षा बलों, एटीएस और सीटीजी को और अधिक मजबूत करेंगे। सीटीजी के आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की है। जल्द ही हम इस दिशा में आगे बढ़ने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि टेररिस्ट अटैक को पूरी दक्षता से काउंटर करने सभी जरूरी प्रशिक्षण के लिए हमारी सरकार भोपाल जिले की हुजुर तहसील के ग्राम तूमड़ा में अत्याधुनिक प्रशिक्षण केन्द्र खोलेगी। इस सेंटर के जरिए हम अपने सुरक्षा बलों को किसी भी प्रकार की आकस्मिक आपदा एवं अतिवादी ताकतों से निपटने के लिए पूरी क्षमता से तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में है, इसलिए यह सेंटर देश की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हमारे जवान अपने हथियार और बुद्धिमत्ता से सभी प्रकार के संकटों से निपटने में सक्षम हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागरिकों की सेवा और सुरक्षा के लिए हमारी सरकार हर समय तत्पर है। हमारी एटीएस आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत दीवार बनकर खड़ी है। इनकी मदद के लिए तैयार की गई काउंटर टेररिस्ट ग्रुप (सीटीजी) हमारी असॉल्ट यूनिट, आधुनिक हथियारों और मॉडर्न टेक्निक से लैस है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को अपने सशस्त्र बलों पर बेहद गर्व है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया में भारत की अलग पहचान बन रही है। वर्ष 1984 में एनएसजी की स्थापना हुई। एक समय था जब हमारे देश के प्रधानमंत्री भी अपने घर में सुरक्षित नहीं हुआ करते थे। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की माला पहनाते हुए हत्या कर दी गई। एनएसजी का स्लोगन 'सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा' है, जो विजय भाव की अनुभूति कराता है। एनएसजी जवानों का शौर्य और निष्ठा बेजोड़ है। जब भी देश में कोई संकट आता है। हमारे एनएसजी जवान (ब्लैक कैट कमांडोज़) देशवासियों को पूरी सुरक्षा देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अब हमारी सेना देश के दुश्मनों को उनके घर में घुसकर मारने का माद्दा रखती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों ने अपने पराक्रम से आज हमें यह भरोसा दिलाया है। यहां मध्यप्रदेश पुलिस के साथ एटीएस, सीटीजी के प्रशिक्षण की शुरुआत हुई है। आज के विकासशील दौर में आतंकवाद, नक्सलवाद बहुत घातक है। इनसे लड़ने के लिए बलों को हर तरह के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। देश ने 35 साल पुरानी एक बड़ी समस्या (नक्सलवाद) को खत्म कर दिया है। हमारा मध्यप्रदेश आज पूरी तरह नक्सलमुक्त हो चुका है। इसमें हमारे सशस्त्र बलों का बड़ा योगदान है। सुरक्षा बलों के कारण ही भारत दुनिया के सबसे सशक्त तीन देशों की कतार में शामिल हुआ है। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि एनएसजी और म.प्र. पुलिस का यह साझा प्रशिक्षण कार्यक्रम 7 अप्रैल से 4 मई 2026 तक करीब एक माह चलेगा। इस दौरान काउंटर अटैक सहित करीब 8 प्रमुख विषयों पर जवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान पुलिस जवान काउंटर/टेररिस्ट अटैक से निपटने की ट्रेनिंग लेंगे और अपने कला, कौशल और टेक्निक को बेहतर से बेहतर बनाएंगे। हम नई चुनौतियों को लेकर तैयार हो रहे हैं। हमारी एटीएस और एसटीएफ पूरी क्षमता से काम कर रही … Read more

लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश, असम सरकार और केंद्र पर बरसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

असम  असम सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सभा करने की अनुमति नहीं दी गयी. उन्हें असम के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा में सभा करना था. पीएम के कार्यक्रम की वजह से उनके हैलीकॉप्टर को उड़ने की इजाजत नहीं दी गयी. इसके ठीक एक दिन पहले कल्पना सोरेन को तीन जगहों पर सभा करने की अनुमति नहीं दी गयी. असम में जब सभा करने नहीं दिया गया तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मोबाइल फोन से ही जनता को संबोधित किया. सीएम ने सोशल मीडिया किया पोस्ट सीएम ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि असम की वीर और क्रांतिकारी धरती पर लोकतंत्र की आवाज को दबाने की फिर कोशिशें की गयी. कल कल्पना जी को सभा करने से रोका गया, आज मुझे असम के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा के अपने भाई-बहनों से मिलने नहीं दिया गया.क्या सच में विरोधियों को लगता है कि संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर ऐसे षड्यंत्र से वे तीर-धनुष की ताकत को रोक पाएंगे? असम में आदिवासी समाज को रोकने की कोशिश: हेमंत सोरेन सीएम ने कहा कि इतने वर्षों तक तो चाय बागान के मेरे लाखों शोषित, वंचित आदिवासी समाज के भाइयों बहनों को रोकने की नाकाम कोशिश की है, और कितना रोक पाओगे?इतिहास गवाह है, जब-जब आवाज दबाई गई है, वह और बुलंद होकर उभरी है. आगामी नौ अप्रैल के दिन मेरे ये लाखों भाई-बहन अपने संघर्ष का हिसाब लेकर रहेंगे. विरोधियों को चुनाव प्रचार करने से रोकते हैं: हेमंत सीएम ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि असम की क्रांतिकारी धरती ने कभी झुकना नहीं सीखा है.प्रधानमंत्री जी का कार्यक्रम बताकर आज मुझे प्रचार के लिए जाने नहीं दिया गया. हमलोगों को जहां है वहीं पर रहने का आदेश दिया गया. पीएम अपने कुर्सी व राजनीतिक ताकत के बदौलत चुनाव के अंतिम चरण में विरोधियों को प्रचार-प्रसार करने से इसी तरह रोकते हैं. ये लोग ऐन-केन प्रकारेण चुनाव जीतने का प्रयास करते हैं. कभी वोट चोरी कर जीतते हैं. झामुमो पहली बार यहां चुनाव लड़ रहा है. जय भारत पार्टी के साथ हैं. लोकतंत्र की आड़ बंद किया जायेगा: सीएम क्या लोकतंत्र अब कार्यक्रमों की आड़ में बंद किया जायेगा? और यह सब कैसे हो रहा है? संवैधानिक संस्थाओं का खुलेआम दुरुपयोग कर, एजेंसियों को हथियार बनाकर. हमारे पुरखों ने हमें झुकना नहीं, संघर्ष करना सिखाया है. हम लड़ते आए हैं और हर लड़ाई जीतकर ही आगे बढ़े हैं. अब यह समाज चुप नहीं रहेगा सीएम ने कहा कि असम का शोषित, वंचित, आदिवासी, दलित और पिछड़ा समाज अब जाग चुका है. चाय बागान में रहने वाले लोग भी अब आगे बढ़कर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं. अब यह समाज चुप नहीं रहेगा, अपने अधिकार लेकर ही रहेगा.इसलिए साथियों, हमें एकजुट होना है. हमारी एकजुटता ही विरोधियों के लिए सबसे बड़ा जवाब है, और यही एकजुटता पहले ही इनके डर का कारण बन चुकी है. 250 रुपये में जहर भी नहीं मिलता सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि चाय बगान को मजदूरों को एक दिन की मजदूरी 250 रुपये मिलती है. इतनी राशि में तो जहर भी नहीं मिलता.राज्य सरकार ने चाय बगान के मजदूरों को न जीने के लिए छोड़ा है और न ही मरने के लिए छोड़ा है. नौ अप्रैल को अत्याचार का बदला वोट से देगी जनता सीएम ने कहा कि याद रखिये, जितना हमें रोकोगे, हम उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ेंगे क्योंकि हमारे तीर-धनुष की ताकत सिर्फ प्रतीक नहीं, यह हमारे आत्मसम्मान और संघर्ष की पहचान है.आगामी नौ अप्रैल को हमारा यह संघर्षी समाज अपने ऊपर वर्षों से हुए शोषण और अत्याचार का बदला वोट की ताकत के साथ लेकर रहेगा.

पर्यावरण और सतत विकास पर महा-संवाद, झारखंड समेत चार राज्यों की चुनौतियों पर होगा मंथन

 रांची पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्था ‘सीड’ (CEED) आगामी 8 और 9 अप्रैल को रांची में ‘एकम डायलॉग्स संवाद से निर्माण’ नामक एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रही है. सोमवार को राजधानी में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान संस्था के सीईओ रमापति कुमार ने बताया कि इस गरिमामयी कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्र सरकार के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ करेंगे. इस आयोजन की विशिष्टता यह है कि इसमें देश के 11 पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए व्यक्तित्व भी अपने अनुभवों को साझा करेंगे. कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 27 ‘चेंज मेकर्स’ को ‘एकम संवाद’ सम्मान से विभूषित किया जाएगा, जिन्होंने जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव की इबारत लिखी है. 11 सत्रों में होगा मंथन: खेती से लेकर क्लाइमेट फाइनांस तक दो दिनों तक चलने वाले इस महा-संवाद में कुल 11 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे. सीड के सीईओ ने स्पष्ट किया कि चर्चा का दायरा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें इको रिस्टोरेशन (पारिस्थितिकी बहाली), ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती के सफल प्रयोगों पर गहन विमर्श होगा. इसके अतिरिक्त, स्वच्छ उद्योगों की स्थापना, वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन, क्लाइमेट फाइनांस और नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन (Policy Implementation) जैसे जटिल विषयों पर भी शोधकर्ता और नीति-निर्माता एक साझा मंच पर विचार-विमर्श करेंगे. सामुदायिक ज्ञान और नवाचार का संगम आयोजन के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए रमापति कुमार ने कहा कि ‘एकम डायलॉग्स’ महज एक औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि एक समावेशी मंच है. यहाँ नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों, शोधकर्ताओं और सिविल सोसाइटी के साथ-साथ महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है. इसका प्राथमिक लक्ष्य सामुदायिक पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक नवाचारों के बीच की खाई को पाटकर क्षेत्रीय विकास के व्यावहारिक समाधान खोजना है. यह पहल पूर्वी भारत के राज्यों के साझा सांस्कृतिक और पारिस्थितिक ताने-बाने को आधार बनाकर जलवायु-अनुकूल भविष्य के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी. चार राज्यों की साझा चुनौतियों पर नजर झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और ओडिशा जैसे राज्य जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं. सीड की डायरेक्टर (पॉलिसी) सृष्टि पल्लव ने बताया कि ‘एकम डायलॉग्स’ इन राज्यों की साझा भौगोलिक और पर्यावरणीय चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. सम्मेलन के निष्कर्षों को एक ‘श्वेत पत्र’ (White Paper) के रूप में संकलित किया जाएगा, जिसे भविष्य की नीतियों के निर्माण के लिए संबंधित सरकारों के साथ साझा किया जा सकता है. रांची में होने जा रहा यह आयोजन निश्चित रूप से पर्यावरण और सतत विकास के क्षेत्र में एक नई चेतना जागृत करेगा.