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छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक बदलाव, 67 पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर, नई पोस्टिंग के आदेश जारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ के गोरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) जिले में पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। पुलिस अधीक्षक मनोज खेलारी के निर्देश पर एक साथ 67 पुलिसकर्मियों के तबादले कर दिए गए हैं। इस फैसले के बाद जिले के कई थानों और चौकियों में नई तैनाती हुई है, जिससे पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। इस तबादला सूची में आरक्षक से लेकर उप निरीक्षक स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं। खास बात यह है कि सुरेश ध्रुव को मरवाही थाना प्रभारी बनाया गया है, जबकि रामनिवास राठौर को कोटमी चौकी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए शनिप रात्रे को साइबर सेल का प्रभारी नियुक्त किया गया है। पुलिस विभाग के अनुसार यह बदलाव सिर्फ रूटीन ट्रांसफर नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था को और बेहतर बनाने की रणनीति का हिस्सा है। नए पदस्थापन से पुलिसकर्मियों में नई ऊर्जा आएगी और वे ज्यादा जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे। प्रशासन का मानना है कि इस फेरबदल से न सिर्फ थानों की कार्यप्रणाली सुधरेगी, बल्कि आम जनता को भी तेज और बेहतर पुलिस सेवाएं मिलेंगी। कुल मिलाकर: GPM जिले में यह ट्रांसफर एक बड़े प्रशासनिक सुधार के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर कानून-व्यवस्था और साइबर क्राइम कंट्रोल पर पड़ सकता है।

बिहार राजनीति में बड़ा बदलाव: नीतीश कुमार का MLC से इस्तीफा, अब राज्यसभा की तैयारी

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) ने गुरुवार को अपनी 'समृद्धि यात्रा' को विराम दे दिया। अब वह अगले सोमवार से अपनी दिल्ली की तैयारी को आगे बढ़ाएंगे। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद अगले माह की 10 तारीख तक उन्हें राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेनी है। वहीं, अगले पांच दिनों के अंदर नीतीश विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देंगे यह भी तय है। यह कानूनी बाध्यता है। त्यागपत्र देने के बाद अगली व्यवस्था तक वह मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा गुरुवार को नालंदा तथा पटना में हुई। मुख्यमंत्री के आगे के कार्यक्रमों की रूप रेखा लगभग तय है। शुक्रवार को वह रामनवमी के आयोजन में शामिल होंगे। शनिवार से मुख्यमंत्री की मौजूदगी में जदयू की कई बैठकों का सिलसिला आरंभ होगा। नई सरकार पर होगी चर्चा सबसे पहले मुख्यमंत्री जदयू की प्रदेश इकाई की बैठक में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में शामिल होंगे। बैठक मुख्यमंत्री आवास या फिर जदयू प्रदेश कार्यालय में होगी। इसके बाद जदयू के कोर कमेटी की बैठक नई सरकार के गठन पर होगी। सरकार के स्वरूप पर भी चर्चा होगी। इस बार यह चर्चा है कि जदयू की दावेदारी विधानसभा अध्यक्ष पद पर भी है, इसलिए जदयू की कोर कमेटी की बैठक में इस विषय पर भी सहमति बननी है। क्या निशांत बनेगे उपमुख्यमंत्री? निशांत कुमार को उप मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिलेगी या नहीं यह भी चार से पांच दिनाें के अंदर तय हो जाएगा। इसके बाद एनडीए की बैठक होगी। एनडीए की बैठक में तय होना है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। 14 अप्रैल के बाद बिहार को मिलेगा नया सीएम इस बात की संभावना पर भी राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि नई सरकार 14 अप्रैल के पहले अस्तित्व में नहीं आएगी। यह कहा जा रहा कि खरमास के बाद ही मुख्यमंत्री पद पर बिहार में कोई नया व्यक्ति शपथ ग्रहण करेगा। नई व्यवस्था होने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का कामकाज देखते रहेंगे।

आरोपों के बीच बड़ा फैसला: SDM बबनदीप वालिया का तबादला फाजिल्का में

चंडीगढ़. पंजाब सरकार की ओर से आज जिन 9 आईएएस और पीसीएस अफसरों का तबादला किया गया है, उनमें से एक नाम बाघापुराना के एसडीएम बबनदीप सिंह वालिया का भी है, जिन्होंने पिछले दिनों मुख्य सचिव से अपने एडीसी पर पंचायत समिति के चुनाव में खास उम्मीदवारों को जितवाने के लिए दबाव बनाने की शिकायत की थी। बबनदीप सिंह का यह शिकायती पत्र सोशल मीडिया पर वायरल खूब वायरल हुआ, जिस पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। अब बबनदीप को नए आदेशों में एसडीएम बाघापुराना के पद से हटाकर मुख्यमंत्री फील्ड अधिकारी फाजिल्का में लगा दिया गया है। इस मामले ने उस समय तूल पकड़ा, जब पंचायत समिति के 15 सदस्यों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 17 मार्च को जब वे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में हिस्सा लेने के लिए अन्य निर्दलीय सदस्यों के साथ पहुंचे, तो उन्हें बीडीपीओ कार्यालय में अवैध रूप से बंधक बना लिया गया। वापस लिया फैसला याचिकाकर्ताओं ने स्वयं को शिरोमणि अकाली दल से संबंधित बताया। इस केस की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने डीसी और एसडीएम को भी पेश करने के आदेश दिए और मंगलवार को हुई। सुनवाई के दौरान एसडीएम के पेश होने पर अदालत ने सबसे पहले उस पत्र पर सवाल उठाया, जो मुख्य सचिव को लिखा गया था और बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हाई कोर्ट ने एसडीएम से पूछा कि एक संवेदनशील पत्र सार्वजनिक कैसे हुआ। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अगर उन पर किसी प्रकार का दबाव था तो उन्हें नियमानुसार अपने वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष मामला रखना चाहिए था। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी से इस तरह की कार्यप्रणाली की अपेक्षा नहीं की जा सकती। साथ ही अदालत ने यह भी पूछा कि यदि पत्र में लगाए गए आरोप सही साबित नहीं होते तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इस पर एसडीएम ने अदालत को बताया कि उन्होंने यह पत्र दबाव में आकर लिखा था। हालांकि, कोर्ट ने इस जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में अधिकारी के पास अवकाश लेने या सीधे मुख्य सचिव से मिलकर अपनी बात रखने का विकल्प भी था। अदालत ने दोहराया कि संस्थागत व्यवस्था के भीतर ही समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। हाई कोर्ट की बेहद तीखी टिप्पणी के बाद राज्य सरकार ने आज जिन नौ अधिकारियों का तबादला किया है, जिनमें बबनदीप सिंह भी शामिल हैं।  

छत्तीसगढ़ PSC में बड़ा अपडेट: प्री परीक्षा का रिजल्ट घोषित, 3921 अभ्यर्थी चयनित

रायपुर. छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने CGPSC प्री परीक्षा 2025 का रिजल्ट जारी कर दिया है। इसमें मेंस परीक्षा के लिए 3921 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक, मेंस की परीक्षा 16 से 19 मई तक होगी। CGPSC प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन 22 फरवरी 2026 को किया गया था। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत विभिन्न 20 सेवाओं के लिए कुल 265 पदों पर नियुक्ति की जानी है। विज्ञापित पदों के 15 गुना के अनुसार 3975 अभ्यर्थियों को चयनित किया जाना था, लेकिन वर्गवार/उपवर्गवार पात्र अभ्यर्थियों की उपलब्धता के आधार पर कुल 3921 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए चिन्हांकित किया गया है। मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए चयनित अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा। आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी आयोग द्वारा अलग से जारी की जाएगी। इसके अलावा प्रारंभिक परीक्षा 2025 का परिणाम भी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.psc.cg.gov.in पर जारी कर दिया गया है, जिसमें अभ्यर्थियों के अंक, कट-ऑफ और अन्य विवरण उपलब्ध हैं।

योगी सरकार में बदली यूपी टूरिज्म की पहचान, वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा उत्तर प्रदेश

योगी सरकार के 9 वर्षों में यूपी टूरिज्म ने तय किया ‘ग्रेवयार्ड इकोनॉमी’ से ‘टेंपल इकोनॉमी’ का सफर योगी सरकार में बदली यूपी टूरिज्म की पहचान, वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा उत्तर प्रदेश तीर्थ स्थलों का विकास और धार्मिक उत्सवों का भव्य आयोजन, यूपी बना देश में पर्यटन का सिरमौर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में पिछले 9 वर्षों के दौरान योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पर्यटन क्षेत्र ‘ग्रेवयार्ड इकोनॉमी’ से निकलकर ‘टेंपल इकोनॉमी’ में बदल चुका है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने लोकभवन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान योगी सरकार की 9 वर्षों की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए कहा कि यह परिवर्तन केवल सोच का नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं का भी प्रतीक बनकर उभरा है। जहां वर्ष 2017 के पहले राज्य सरकार के बजट का बड़ा हिस्सा कब्रिस्तानों की दीवारें बनाने में खर्च होता था, वहीं अब योगी सरकार में प्रदेश के तीर्थ स्थलों, धार्मिक गलियारों, सांस्कृतिक मार्गों और पर्यटन अवसंरचना के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इस बदलाव ने उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्द्धन को पर्यटन के विकास से जोड़ा है। यूपी के आस्था के केंद्र,  तीर्थस्थल बने पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर्यटन मंत्री ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप पिछले 9 वर्षों में राज्य में आस्था, संस्कृति और पर्यटन का संगम अब आर्थिक विकास का मजबूत आधार बन चुका है। योगी सरकार में तीर्थ विकास परिषदों का निर्माण कर प्रदेश के तीर्थों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विकास किया गया है। अयोध्या, काशी, प्रयागराज, मथुरा के साथ ही मीरजापुर, चित्रकूट, नैमिषारण्य और सहारनपुर स्थित मां शाकुंभरी देवी शक्तिपीठ जैसे प्रमुख तीर्थ स्थल आज प्रदेश के पर्यटन की नई पहचान बन चुके हैं। इस क्रम में विशेष रूप से काशी विश्वनाथ धाम के कॉरिडोर निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में 4-5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं राम मंदिर अयोध्या में वर्ष 2025 के दौरान लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। सांस्कृतिक उत्सव और आयोजन से बढ़ा यूपी में धार्मिक पर्यटन उत्तर प्रदेश में आयोजित सांस्कृतिक आयोजनों ने भी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। दीपोत्सव अयोध्या ने 2025 में 26 लाख से अधिक दीप जलाकर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। वहीं देव दीपावली वाराणसी को प्रांतीय मेले का दर्जा दिया गया है। 2017 में दीपोत्सव की शुरुआत, प्रयागराज में आयोजित होने वाला माघ, कुंभ और महाकुंभ मेला, ब्रज का रंगोत्सव जैसे आयोजनों ने पर्यटन को तेज गति से बढ़ावा दिया है। महाकुंभ-2025 का आयोजन इस यात्रा का ऐतिहासिक शिखर माना जा रहा है, जिसमें रिकॉर्ड 66 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ। उत्तर प्रदेश की ये सांस्कृतिक परंपराएं और उत्सव अब आर्थिक गतिविधियों का बड़ा स्रोत बन रहीं हैं। इन आयोजनों से स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन, प्रसाद, फूल, हस्तशिल्प और लघु उद्यमों को व्यापक लाभ मिला है। पर्यटन नीति-2022 का सफल क्रियान्वयन, हुआ 5 लाख रोजगार का सृजन उत्तर प्रदेश में पर्यटन का नीतिगत विस्तार करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पर्यटन नीति-2022 को लागू किया गया। इसका परिणाम है कि अब तक उत्तर प्रदेश में ₹36,681 करोड़ से अधिक निवेश धरातल पर उतर चुका है, जिससे करीब 5 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। 1,757 पर्यटन इकाइयों का पंजीकरण भी किया गया है। युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के लिए शोध, प्रचार और मॉनिटरिंग कार्यों में ₹40,000 मासिक स्टाइपेंड देने की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पर्यटक सुरक्षा और सुविधाएं हुईं सुदृढ़, मिला पर्यटन को बढ़ावा मंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रमुख शहरों—आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा, झांसी और लखनऊ में पर्यटन पुलिस तैनात की गई है। साथ ही 850 प्रशिक्षित गाइडों की नियुक्ति की गई है, जिससे पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके। इसके साथ ही ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 234 गांवों का चयन किया गया है और 2026-27 तक 50,000 होम-स्टे कमरे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 16 वन्यजीव क्षेत्रों में इको-टूरिज्म को विकसित किया जा रहा है। साथ ही तीर्थ यात्रियों के लिए सुविधाओं का विस्तार करते हुए कैलाश मानसरोवर यात्रा हेतु ₹1 लाख तथा सिंधु दर्शन यात्रियों को ₹20 हजार का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। पर्यटक आगमन में रिकॉर्ड वृद्धि, घरेलू पर्यटन में यूपी बना प्रथम पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि एक पर्यटक कम से कम 6 लोगों की आय का माध्यम बनता है। प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन पर विशेष ध्यान का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश देश में घरेलू पर्यटक आगमन के मामले में प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है। वर्ष 2025 में प्रदेश में कुल 1 अरब 56 करोड़ से अधिक पर्यटक आए, जिनमें लगभग 36 लाख विदेशी पर्यटक शामिल रहे। केवल अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज में ही वर्ष 2025 के दौरान लगभग 116 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आगमन हुआ, जो राज्य के कुल पर्यटन का करीब 90 प्रतिशत है।  पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि योगी सरकार के 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने यह सिद्ध कर दिया है कि सांस्कृतिक विरासत और आस्था को आर्थिक शक्ति में बदला जा सकता है। उत्तर प्रदेश अब तीर्थ, पर्यटन और परंपरा के समन्वय से विकास का एक नया मॉडल बनकर देश और दुनिया के सामने आध्यात्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनकर उभरा है।

खिवनी अभयारण्य में बाघ परिवार का दुर्लभ दृश्य, सड़क पर निकले, टूरिस्ट की सांसें 20 मिनट तक थमी रहीं

खिवनी खिवनी अभयारण्य में ऐसा नजारा सामने आया, जिसने जंगल सफारी के रोमांच को चरम पर पहुंचा दिया। घनी घास के बीच से अचानक निकला बाघ युवराज सड़क पर आकर ठहर गया और कुछ ही क्षणों में उसके पीछे बाघिन मीरा अपने तीनों शावकों के साथ नजर आई। देखते ही देखते पूरा बाघ परिवार एक साथ सडक़ पार करता दिखा, एक ऐसा दुर्लभ दृश्य, जिसे देख पर्यटक रोमांच और उत्साह से भर उठे। 20 मिनट तक थमा रहा रोमांच शाम करीब 5.30 बजे का समय था, जब यह अद्भुत दृश्य सामने आया। पर्यटकों के वाहन सुरक्षित दूरी पर रुक गए और सभी ने करीब 20 मिनट तक इस शाही परिवार के दीदार किए। इस दौरान एक पर्यटक ने पूरे परिवार को एक ही फ्रेम में कैद कर लिया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। दिन में विश्राम, शाम को शिकार की तैयारी देवास के खिवनी अभयारण्य के अधीक्षक विकास माहोरे के अनुसार, बाघ युवराज दिन में नाले के पास वाले क्षेत्र में अपने परिवार के साथ आराम करता है और शाम होते ही सक्रिय हो जाता है। बुधवार को भी वह अचानक सडक़ पर आकर रुका, मानो अपने साम्राज्य का निरीक्षण कर रहा हो, और फिर अपने परिवार के साथ आगे बढ़ गया। जंगल का ‘रॉयल मोमेंट’ बना यादगार बाघ परिवार का इस तरह एक साथ नजर आना बेहद दुर्लभ होता है। खिवनी अभयारण्य में यह दृश्य पर्यटकों के लिए किसी ‘रॉयल मोमेंट’ से कम नहीं रहा, जिसने उनके सफारी अनुभव को यादगार बना दिया। यह नजारा दुर्लभ और खास क्यों? वन विशेषज्ञों का कहना है, कि आमतौर पर बाघों को जंगलों में अकेले घूमते देखना आसान है, लेकिन परिवार के साथ खुले में रास्ता पार करते देखना एक बेहद दुर्लभ नजारा है। उनका कहना है कि सड़क पार कराते समय खास तौर पर बाघिन अपने बच्चों को लेकर सतर्क रहती है। नर बाघ अपने परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए आगे चलकर जहां तक नजर जाती है, वहां तक के पूरे एरिया को स्कैन कर लेता है। वन विभाग ने टूरिस्ट से की अपील शांत रहें इस दौरान वन विभाग के कर्मचारियों ने टूरिस्ट को अलर्ट कर दिया कि वे शांत रहें, उनकी जरा सी लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है या फिर ये दुर्लभ दृश्य देखने का मजा किरकिरा हो सकता है। ये भी जानें -विकास माहोरे बताते हैं कि खिवनी अभयारण्य मध्य प्रदेश के देवास और सीहोर जिले में फैला हुआ है। वहीं सतपुड़ा लैंडस्कैप का हिस्सा माना जाता है। इसका क्षेत्रफल करीब 130-140 वर्ग किमी है। -यहां ड्राय डेसिड्डुअस यानी पर्णपाती जंगल है। यहां स्थायी टाइगर रिजर्व जैसा आधिकारिक आंकड़ा नहीं होता है। लेकिन सतपुड़ा और आसपास के जंगलों से बाघों का मूवमेंट यहां तक हो जाता है। -मोहरे का कहना है कि यहां पिछले कुछ वर्षों में बाघों का मूवमेंट बढ़ा है। इसे बेहतर संरक्षण और सुरक्षित आवास का संकेत माना जाता है। वन्य जीव प्रेमियों के लिए खिवनी भी अब एक उभरता हुआ या कहें कि हिडन टाइगर स्पॉट बनता जा रहा है। जहां अचानक दुर्लभ नजारे वाइल्डलाइफ लवर्स को रोमांच से भर देते हैं।   

इंदौर में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं, प्रशासन का भरोसा, पंपों पर होगा अनाउंसमेंट

इंदौर पेट्रोल-डीजल को लेकर बीते दिन भी अफरा-तफरी जारी रही। सुबह लगभग 5 बजे से ही पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगने लगी, जो शाम तक वैसी ही बनी रही। दिन में पेट्रोल के दाम बढऩे की अफवाह को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हुआ। सामान्य पेट्रोल नहीं होने को लेकर प्रशासन ने पुष्टि की तो दाम बढऩे जैसी बातों को अफवाह बताया। सुबह से शाम तक प्रशासन के कई अधिकारी लोगों से स्थिति सामान्य होने व घबराहट में भीड़ नहीं लगाने को लेकर अपील करते रहे। यह भी कहा गया कि जिले में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक है। प्रशासन ने कई पंपों को देर रात तक खुले रखने के निर्देश दिए। बुधवार सुबह 6 बजे से डिपो पर टैंकर पहुंचे व 8 बजे से सप्लाई शुरू कराई गई। मांगलिया डिपो से लगातार आपूर्ति जारी मांगलिया डिपो से ईंधन आपूर्ति जारी है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल के डिपो पर ईंधन भरने का कार्य तेज गति से कराया। सुबह 8 बजे तक हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 25, भारत पेट्रोलियम के 17 और इंडियन ऑयल के 19 टैंकर पेट्रोल पंपों के लिए रवाना कराए गए थे। रोज 10 लाख लीटर पेट्रोल खपत, पर्याप्त स्टॉक जिला आपूर्ति नियंत्रक एमएल मारू ने बताया, इंदौर जिले में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक है। वर्तमान में जिले में प्रतिदिन लगभग 10 लाख लीटर पेट्रोल और 15 लाख लीटर डीजल की खपत हो रही है। पंपों पर करीब 42 लाख लीटर पेट्रोल और 65 लाख लीटर डीजल का भंडारण है। 3-4 घंटे में कई पंप पर हुआ खत्म पेट्रोल जिले में 270 पेट्रोल पंप हैं। सुबह से प्रशासन की तरफ से लगातार टैंकरों से सप्लाई जारी रखी गई, लेकिन लोगों की भीड़ इतनी अधिक रही कि दो से तीन घंटे में ही पंप पर पेट्रोल खत्म होने लगा। तीन दिन की खपत एक दिन में हुई जितनी खपत तीन दिन में होती है उतनी एक दिन में हुईै। कई पंप में पेट्रोल-डीजल की लिमिट तक तय कर दी। किसी ने 300 तो किसी ने 500 से अधिक का पेट्रोल नहीं दिया। भीड़ कम होने पर भी लिमिट हटा ली। पुलिस ने संभाली व्यवस्था अलग-अलग थाना क्षेत्रों में स्थित पंपों पर पुलिस ने व्यवस्था संभाली। एयरपोर्ट रोड स्थित पंप पर रात को विवाद की स्थिति बनी जिसे पुलिस ने नियंत्रण में लिया। बुधवार को भी अधिकतर पंप पर भीड़ को नियंत्रित करते हुए व्यवस्था बनाई। पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं, अफवाहों से दूर रहें इंदौर संभाग में पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि कहीं भी ईंधन की कमी नहीं है। संभागायुक्त सुदामा खाड़े ने सभी जिलों के कलेक्टर और तेल कंपनियों के वितरकों के साथ बैठक कर आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की। प्रतिनिधियों ने बताया, वर्तमान में उनके पास पर्याप्त स्टॉक है और आगे की जरूरतों के लिए भी भंडार सुरक्षित है। संभागायुक्त ने निर्देश दिए कि जिलों में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहे। बढ़ती मांग को देखते हुए सप्लाई चेन को और मजबूत करने पर जोर दिया है। कंपनियां साझा करेंगी स्टॉक की जानकारी बैठक में तय किया गया कि तेल कंपनियां जिलों में उपलब्ध स्टॉक की जानकारी नियमित रूप से जिला प्रशासन से साझा करेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों के पंपों पर भी पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाए। सभी पंपों पर अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने का कहा है। प्रशासन ने साफ किया है कि यदि किसी भी डीलर ने ब्लैक मार्केटिंग की तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

रोजगार में डिजिटल क्रांति: हरियाणा में ITI युवाओं को ऑनलाइन पोर्टल से मिलेगा जॉब

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। आईटीआई से पास होने वाले युवाओं का पूरा डाटा डिजिटल पोर्टल लांच होगा। इस पोर्टल के माध्यम से उद्योगों को प्रशिक्षित युवाओं की जानकारी मिलेगी, जिससे उन्हें सीधे रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए है। सीएम ने कहा कि हर जिले में बड़े स्तर पर रोजगार मेले आयोजित किए जाएंगे और इसके लिए विभाग कैलेंडर भी जारी करेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए कि आईटीआई पास युवाओं और इंटर्नशिप करने वाले छात्रों की ट्रैकिंग की जाए, ताकि यह पता चल सके कि उन्हें रोजगार मिला या नहीं। बैठक में विभाग के मंत्री गौरव गौतम भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान आईटीआई संस्थानों के उन्नयन, भवन मरम्मत, नई लैब, प्रशिक्षकों की ट्रेनिंग और उद्योगों के साथ समझौते जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं में पढ़ाई के साथ-साथ हुनर होना जरूरी है, ताकि वे रोजगार के योग्य बन सकें। स्किल पर जोर, ट्रेनिंग लेने वालों को मिलेगा प्राथमिकता से काम : सीएम सैनी ने कहा कि आने वाले समय में स्किल्ड युवाओं की मांग बढ़ेगी, इसलिए आईटीआई में नई तकनीक और एआई से जुड़े कोर्स शुरू किए जाएं। पुरानी मशीनरी को बदलने और इंस्ट्रक्टरों को नई तकनीक की ट्रेनिंग देने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि सक्षम योजना के तहत ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर काम और कॉन्ट्रैक्ट दिए जाएंगे।

ड्रग्स माफिया के खिलाफ मोगा पुलिस का अभियान, गांव-गांव में छापेमारी

मोगा. मोगा जिले के निहाल सिंह वाला क्षेत्र में नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए विशेष अभियान चलाया। यह अभियान पंजाब पुलिस के उच्च अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार वीरवार को चलाया गया, जिसमें क्षेत्र के कई गांवों में व्यापक स्तर पर तलाशी अभियान चलाया गया। थाना निहाल सिंह वाला पुलिस की अगुआई उप पुलिस अधीक्षक अनवर अली द्वारा की गई। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार तथा मोगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आदेशों के तहत पूरे इलाके में नशा तस्करों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। इस दौरान पुलिस की अलग-अलग टीमें बनाकर विभिन्न गांवों और संदिग्ध स्थानों पर तलाशी ली गई। उप पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस दौरान किसी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री या नशे से संबंधित वस्तु बरामद होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कई थानों की पुलिस ने किया जॉइंट सर्च इस विशेष अभियान में थाना निहाल सिंह वाला के अलावा मोगा, बधनी कलां और अजीतवाल थानों की पुलिस टीमों ने भी भाग लिया। सभी टीमों ने मिलकर समन्वय के साथ अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की, जिससे अभियान को प्रभावी बनाया जा सके। अधिकारियों ने नशा तस्करों और अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वे तुरंत ऐसे कार्य बंद कर दें। यदि कोई व्यक्ति इन गतिविधियों में संलिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले समय में जारी रहेंगे सर्च ऑपरेशन इस मौके पर थाना निहाल सिंह वाला के प्रभारी निरीक्षक राज सिंह, बधनी कलां के प्रभारी निरीक्षक गुरमेल सिंह सहित अन्य पुलिस अधिकारी और जवान मौजूद रहे। पुलिस प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में भी इस तरह के अभियान जारी रहेंगे, ताकि क्षेत्र में कानून व्यवस्था को मजबूत किया जा सके और नशे के नेटवर्क पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।

UP TET 2026 में सख्ती: बहुविवाह करने वाले नहीं भर पाएंगे फॉर्म

लखनऊ अगर आप भी उत्तर प्रदेश में सरकारी टीचर बनने का ख्वाब देख रहे हैं और यूपी टीईटी (UP TET 2026) परीक्षा का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, तो आपके लिए एक बेहद अहम और जरूरी खबर है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) पूरे पांच साल के लंबे इंतजार के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए 27 मार्च 2026 से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। हाल ही में जारी हुए नोटिफिकेशन के मुताबिक, इस बार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर होने जा रही इस बड़ी परीक्षा में 20 लाख से भी ज्यादा उम्मीदवारों और पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों के शामिल होने की पूरी उम्मीद है। लेकिन आवेदन शुरू होने से ठीक पहले, आयोग ने कुछ ऐसे सख्त नियम और गाइडलाइन जारी की हैं, जिन्हें जानना हर उम्मीदवार के लिए बेहद जरूरी है खासकर उन लोगों के लिए जो शादीशुदा हैं। UP TET 2026: एक से ज्यादा शादी पर पाबंदी का नियम आयोग की तरफ से जारी की गई आधिकारिक गाइडलाइन में सबसे ज्यादा चर्चा उस नियम की हो रही है जो शादीशुदा उम्मीदवारों से जुड़ा है। नोटिफिकेशन में बिल्कुल साफ कर दिया गया है कि ऐसे पुरुष अभ्यर्थी जो विवाहित हैं और जिनकी एक से ज्यादा पत्नियां जीवित हैं, वे इस परीक्षा का फॉर्म भरने के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे। यह नियम सिर्फ पुरुषों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए भी उतना ही सख्त है। ऐसी महिला उम्मीदवार, जिसने किसी ऐसे पुरुष से शादी की है जिसकी पहले से ही एक पत्नी जीवित है, उन्हें भी इस परीक्षा से बाहर रखा जाएगा। सीधे शब्दों में कहें तो बहुविवाह (Polygamy) करने वाले उम्मीदवारों को यूपी टीईटी की रेस से सीधे तौर पर बाहर कर दिया गया है। पुरुष और महिला, दोनों ही वर्गों के लिए यह नियम एक समान लागू होगा। UP TET 2026: क्या इस नियम में मिल सकती है कोई छूट? हर कड़े नियम की तरह इस नियम में भी एक छोटी सी गुंजाइश छोड़ी गई है। आयोग के मुताबिक, अगर किसी विशेष मामले में राज्य के राज्यपाल महोदय खुद इस प्रतिबंध से किसी उम्मीदवार को खास छूट या मुक्ति दे देते हैं, तो केवल उसी सूरत में ऐसे उम्मीदवार यूपी टीईटी की परीक्षा में शामिल होने के हकदार बन सकेंगे। इसके अलावा किसी भी स्तर पर इस नियम में कोई ढील नहीं दी जाएगी। परीक्षा में बैठने का मतलब नौकरी की गारंटी नहीं आयोग ने उम्मीदवारों को एक और बात को लेकर आगाह किया है। गाइडलाइन में साफ लिखा है कि अगर किसी उम्मीदवार को यूपी टीईटी में बैठने की इजाजत मिल जाती है और उसका एडमिट कार्ड जारी हो जाता है, तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसकी पात्रता पूरी तरह से प्रमाणित हो गई है। टीईटी पास करने से किसी भी उम्मीदवार को नियुक्ति का कोई सीधा कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। नौकरी के समय भर्ती एजेंसी या नियोक्ता प्राधिकारी द्वारा ही उम्मीदवार की सभी योग्यताओं और दस्तावेजों को अंतिम रूप से जांचा और प्रमाणित किया जाएगा। इसलिए यह हर उम्मीदवार की अपनी जिम्मेदारी है कि वह फॉर्म भरने से पहले आयोग द्वारा तय किए गए योग्यता मानदंडों को अच्छी तरह से पढ़ ले और खुद को संतुष्ट कर ले। गलत जानकारी देने पर हो सकती है जेल अगर कोई उम्मीदवार नियमों के दायरे में नहीं आता है और फिर भी चालाकी से फॉर्म भर देता है, तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार होगा। आयोग ने सख्त हिदायत दी है कि आवेदन में किसी भी तरह की भ्रामक, गलत या झूठी जानकारी देने पर उम्मीदवार का परीक्षा परिणाम तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, उसका टीईटी प्रमाण पत्र जब्त कर लिया जाएगा और ऐसे गंभीर मामलों में उम्मीदवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई या मुकदमा भी चलाया जा सकता है। ओएमआर शीट की दोबारा नहीं होगी चेकिंग परीक्षा देने के बाद अक्सर कई उम्मीदवारों को अपनी कॉपी दोबारा चेक कराने की इच्छा होती है। इस मुद्दे पर आयोग के उपसचिव डॉ. संजय कुमार सिंह ने स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। उन्होंने बताया कि परीक्षा की ओएमआर शीट का मूल्यांकन अत्याधुनिक मशीनों (इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों) के जरिए पूरी सावधानी से किया जाता है। इसकी स्कैनिंग में इतनी सटीकता होती है कि बार बार संवीक्षा की जरूरत ही नहीं पड़ती। इसलिए, किसी भी उम्मीदवार के ओएमआर उत्तर पत्रक की दोबारा जांच, पुनर्मूल्यांकन या स्क्रूटनी के लिए किए गए किसी भी आवेदन पर बिल्कुल विचार नहीं किया जाएगा। इस संबंध में आयोग किसी भी तरह का पत्राचार स्वीकार नहीं करेगा। कब से कब तक भरे जाएंगे फॉर्म? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूपी टीईटी के लिए ऑनलाइन आवेदन 27 मार्च 2026 से शुरू होकर 26 अप्रैल 2026 तक चलेंगे। वहीं, आयोग ने इस बार की परीक्षाएं 2, 3 और 4 जुलाई 2026 को आयोजित करने का फैसला किया है। इसलिए, अगर आप सभी योग्यताओं को पूरा करते हैं, तो आखिरी तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते अपना फॉर्म सही सही जरूर भर लें।