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MP में भारी बारिश का अलर्ट, सतना में स्कूलों की छुट्टी बढ़ी

भोपाल मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले बारिश का एक और मजबूत दौर शुरू हो गया है। शुक्रवार को प्रदेश के 13 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है, जबकि 16 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिन बारिश का असर ज्यादा रहेगा। कुछ इलाकों में चार इंच से अधिक पानी गिर सकता है। बंगाल की खाड़ी में बना अवदाब अब मजबूत मौसमी सिस्टम में बदल गया है। इसके असर से 25 और 26 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का जोर रहेगा। 27 सितंबर को भी कुछ इलाकों में तेज बारिश हो सकती है। इसके बाद तंत्र आगे बढ़ जाएगा। शुक्रवार को टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, दमोह, उमरिया, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। वहीं भिंड, दतिया, निवाड़ी, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल और पांढुर्णा में भारी बारिश हो सकती है। मानसून विदाई से ठीक पहले बारिश का जोर मध्य प्रदेश में मानसून का आधिकारिक सीजन 30 सितंबर तक रहता है। यानी अब इसकी विदाई में करीब छह दिन बाकी हैं। इससे पहले प्रदेश में लगातार बारिश के दो दौर आ चुके हैं और अब आखिरी सप्ताह में तीसरे मजबूत दौर ने दस्तक दी है।मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार 25 और 26 सितंबर को सिस्टम का प्रभाव ज्यादा रहेगा। 27 सितंबर को भी बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद मौसम में बदलाव आने की संभावना है। अब भी सामान्य से 2.4 इंच कम बारिश बारिश के नए दौर के बावजूद प्रदेश में सीजन की कुल बारिश अभी सामान्य से पीछे है। अब तक 873.4 मिमी यानी 34.4 इंच बारिश दर्ज हुई है, जबकि सामान्य आंकड़ा करीब 935.1 मिमी यानी 36.8 इंच है। इस तरह प्रदेश में अब तक करीब 2.4 इंच यानी 7 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में कमी करीब 2 प्रतिशत है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 11 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी प्रदेश के अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इसके उलट कई जिलों में बारिश का आंकड़ा अब भी सामान्य से काफी नीचे है। हालांकि सितंबर के अंतिम दौर की बारिश से कमी तेजी से घट रही है। जून की कमी अब भी पूरी नहीं हुई इस मानसून में जून सबसे कमजोर रहा। महीने में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश ने स्थिति संभाली और दोनों महीनों का कोटा पूरा हुआ, लेकिन जून की कमी पूरी तरह नहीं भर सकी। इसी वजह से पूरे मानसून सीजन का आंकड़ा अभी भी सामान्य से नीचे है। 25-26 सितंबर की बारिश के बाद यह अंतर और कम होने की उम्मीद है।  प्रदेश में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव है। मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार को टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, दमोह, उमरिया, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। वहीं, भिंड, दतिया, निवाड़ी, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल और पांढुर्णा में भारी बारिश होगी। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और सागर संभाग के कुछ जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। अतिवृष्टि की संभावना: सतना में 2 दिन स्कूल बंद अतिवृष्टि की संभावना को देखते हुए सतना जिले में कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने 26 सितंबर को भी नर्सरी से कक्षा आठवीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया है। यह आदेश शासकीय, अशासकीय, केंद्रीय, नवोदय, आईसीएसई सहित सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा। अगले 2 दिन असर रहेगा मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ अवदाब अब महत्वपूर्ण मौसमी सिस्टम के रूप में उभर रहा यह स्ट्रॉन्ग हो गया है। इस वजह से 25 और 26 सितंबर को असर ज्यादा रहेगा। 27 को भी तेज बारिश होगी। इसके बाद सिस्टम आगे बढ़ जाएगा। मानसून की विदाई को 6 दिन बचे एमपी में दक्षिण-पश्चिम मानसून का पीरियड 1 जून से 30 सितंबर तक है। यानी, मानसून की विदाई को छह दिन बचे हैं। इस बार भी सितंबर के आखिरी सप्ताह से विदाई होने लगेगी। राजस्थान के कई जिलों से मानसून लौट चुका है। सामान्य बारिश से 2.4 इंच नीचे चल रहा प्रदेश IMD की मानें तो प्रदेश में अब तक 873.4 मिमी यानी, 34.4 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 36.8 इंच (935.1 मिमी) की तुलना में 2.4 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 7 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 2% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% बारिश कम हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 2% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 23% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। गुरुवार को भी आंकड़ा माइनस में दो प्रतिशत रहा। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 8% से 50% कम पानी गिरा है। इन 23 जिलों में ज्यादा बारिश IMD की माने तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।  

केंद्रीय गृह मंत्री ने सीएम योगी के साथ ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ (ओडीओसी) पोर्टल का भी किया शुभारंभ

 ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश के परंपरागत हुनर से लेकर आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग तक की ताकत शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा में दुनिया के सामने दिखी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के चौथे संस्करण का शुभारंभ किया। इस बार 90 देशों से 600 से अधिक विदेशी खरीदार पहुंचे हैं, जबकि 2,400 से अधिक एग्जीबिटर्स अपने उत्पादों के साथ ट्रेड शो में हिस्सा ले रहे हैं। अपने संबोधन में सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के उत्पादों की गुणवत्ता, मजबूत सप्लाई चेन और यहां के उद्यमियों की विश्वसनीयता पर आज पूरी दुनिया को भरोसा है। आज प्रदेश दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कर रहा है।   बढ़ता फुटफॉल वैश्विक भरोसे का प्रतीक मुख्यमंत्री ने कहा कि चार वर्षों में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो प्रदेश में तैयार होने वाले उत्पादों को दुनिया के सामने रखने का बड़ा मंच बन गया है। पिछले वर्ष 72 देशों के 550 बायर्स इसमें शामिल हुए थे। इस बार 90 देशों से 600 से अधिक बायर्स पहुंचे हैं और करीब डेढ़ लाख बी2बी विजिटर्स के आयोजन में शामिल होने की संभावना है। यह बढ़ती भागीदारी उत्तर प्रदेश के कारीगरों के हुनर, युवाओं के इनोवेशन, एमएसएमई सेक्टर और अन्नदाता किसानों की मेहनत के प्रति बढ़ते वैश्विक भरोसे को दिखाती है।   मुख्यमंत्री ने कहा कि जो अपनी जड़ों से जुड़कर दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है, दुनिया उसे फॉलो करती है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो इसका उदाहरण है। यह ट्रेडिशन और टेक्नोलॉजी, हेरिटेज और इनोवेशन के साथ हुनर और बाजार की ताकत को एक साथ देखने का अवसर है। यहां यूपी की लोकल स्ट्रेंथ ग्लोबल मार्केट के सामने अपनी पहचान बना रही है। यह डबल इंजन सरकार की क्षमता को संभावना और संभावना को समृद्धि में बदलने की कार्यसंस्कृति है।   अमित शाह ने पहचानी थी परंपरागत उद्यमों की ताकत मुख्यमंत्री ने अमित शाह को प्रदेश के परंपरागत उद्यमों को नई पहचान देने की सोच का प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए अमित शाह जी ने उत्तर प्रदेश के लोक कल्याण संकल्प पत्र के निर्माण के दौरान प्रदेश के परंपरागत उद्यमों की ताकत को पहचाना था। उनका मानना था कि जिस दिन उत्तर प्रदेश अपनी इस ताकत को पहचान लेगा, उसे मैन्युफैक्चरिंग के नए हब के रूप में आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक पाएगा। सरकार बनने के बाद इसी सोच को ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ के रूप में ब्रांड दिया गया।   गांव के हुनर को मिला दुनिया का बाजार मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में संभावनाओं की कभी कमी नहीं थी। जरूरत उस क्षमता को पहचानने, सही माहौल देने और उसे बड़े बाजार तक पहुंचाने की थी। आजादी के बाद दशकों तक कारीगरों को जरूरी संसाधन, सही दिशा, बाजार और मंच नहीं मिला। इसका असर यह हुआ कि नई पीढ़ी अपने पुश्तैनी हुनर से दूर होने लगी। सरकार ने जिलों, गांवों और स्थानीय क्लस्टर में मौजूद हुनर को पहचानकर आगे बढ़ने का अवसर दिया।   उन्होंने कहा कि टैलेंट और ट्रेडिशन को टेक्नोलॉजी से जोड़ा गया। गुणवत्ता, डिजाइन, पैकेजिंग, सर्टिफिकेशन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया के बाजार के अनुरूप तैयार किया गया। विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के रूप में एक्सप्रेसवे, हाईवे, एयरपोर्ट, फ्रेट कॉरिडोर और औद्योगिक ढांचे के विस्तार ने स्थानीय उत्पादों के लिए बड़े एवं वैश्विक बाजारों तक पहुंच आसान की है।   79 उत्पादों को जीआई टैग, 75 और कतार में मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र के 79 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है और 75 नए उत्पादों के लिए आवेदन किया गया है। भदोही के कालीन, मुरादाबाद के पीतल, कन्नौज के इत्र और वाराणसी की सिल्क साड़ियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत अब करोड़ों रुपये के कारोबार वाले ब्रांड में बदल चुकी है। ओडीओपी, पीएम विश्वकर्मा और विश्वकर्मा श्रम सम्मान जैसी योजनाओं से कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट, ऋण, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ा गया है। ट्रेड शो में कारीगर और उद्यमी सीधे ग्लोबल बायर्स तक पहुंच रहे हैं।   छह देशों के पवेलियन, कारोबार के नए रास्ते यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, ऑस्ट्रिया और बेलारूस पार्टनर कंट्री के रूप में जुड़े हैं। इनके विशेष पवेलियन भी लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन देशों की भागीदारी से द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई मिलेगी। रणनीतिक साझेदारी, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और ज्वाइंट वेंचर के रास्ते भी खुलेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में दुनिया के कई बड़े देशों के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को यहां उत्पादन करने और यहीं से वैश्विक बाजार तक पहुंचने का अवसर दे रहा है। कार्यक्रम में ये गणमान्य रहे मौजूद उद्घाटन समारोह में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक,  कैबिनेट मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’, भूपेंद्र चौधरी, राकेश सचान, डॉ. संजय निषाद, राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, बृजेश सिंह, सांसद डॉ. महेश शर्मा, सुरेंद्र नागर, विधायक पंकज सिंह, धीरेंद्र सिंह, तेजपाल नागर, विधानपरिषद सदस्य श्रीचंद शर्मा, नरेंद्र भाटी, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर, नोएडा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा, महानगर अध्यक्ष महेश चौहान समेत जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। जापान के राजदूत ओनो केईची, भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त सायमन वोंग और बेलारूस के राजदूत मिखाइल कास्को समेत विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, विदेशी खरीदार, एग्जीबिटर्स और उद्यमी भी इस समारोह में शामिल हुए। बॉक्स-1 ई-कार्ट से केंद्रीय गृह मंत्री व मुख्यमंत्री ने देखा ट्रेड शो कार्यक्रम की शुरुआत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की। मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री को फिरोजाबाद के ओडीओपी के तहत ओपल ग्लास से बनी राधा-कृष्ण की प्रतिमा भेंट की। इसके बाद दोनों नेता एक साथ ई-कार्ट से ट्रेड शो में लगे स्टॉल देखने पहुंचे। अलग-अलग स्टॉल पर रुककर उत्पाद देखे और उद्यमियों से उनकी जानकारी ली। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘एक जनपद एक व्यंजन’ ओडीओसी पोर्टल का शुभारंभ भी किया।   बॉक्स-2 एक करोड़ से अधिक एमएसएमई दे रहीं तीन करोड़ से अधिक को रोजगार एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो … Read more

स्वच्छ माहौल और अनुशासित जीवन, बच्चियों की दिनचर्या ने खींचा ध्यान

कांकेर  छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने गुरुवार, 24 सितंबर को कांकेर प्रवास के दौरान प्रयास कन्या छात्रावास एवं आदिवासी आवासीय विद्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने छात्राओं के साथ आत्मीय संवाद करते हुए उनके रहन-सहन, पढ़ाई और विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। छात्राओं ने भी सहजता के साथ अपनी आवश्यकताओं और समस्याओं को आयोग अध्यक्ष के समक्ष रखा। निरीक्षण के दौरान छात्राओं ने बताया कि छात्रावास में वेंडिंग मशीन उपलब्ध है, लेकिन पैड डिस्पोजल मशीन की सुविधा नहीं है। साथ ही बिजली की समस्या के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है। छात्राओं ने बिजली की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सोलर पैनल तथा आपातकालीन लाइट की व्यवस्था की आवश्यकता बताई। इसके अलावा बेहतर डिजिटल शिक्षा के लिए कंप्यूटर और स्मार्ट क्लास हेतु स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। डॉ. वर्णिका शर्मा ने छात्राओं की बातों को गंभीरता और संवेदनशीलता से सुना तथा आवश्यक सुविधाओं के लिए उचित स्तर पर पहल करने का आश्वासन दिया। छात्राओं ने सूर्यकिरण में रहने की इच्छा भी व्यक्त की, जिस पर उन्होंने उनके लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। छात्राओं ने मुख्यमंत्री से मिलने की इच्छा भी जताई। आयोग अध्यक्ष ने छात्रावास में स्वच्छता, अनुशासन और व्यवस्थित वातावरण की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों की आवश्यकताओं को समझने और उनकी बातों को सीधे सुनने से ही बाल अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। निरीक्षण के दौरान डॉ. वर्णिका शर्मा के साथ छात्राओं का आत्मीय एवं  मातृत्वपूर्ण व्यवहार रहा, जिससे छात्राएं भी सहज और उत्साहित नजर आईं। डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों को केवल शिक्षा उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ, सम्मानजनक और सुविधायुक्त वातावरण देना भी हमारी जिम्मेदारी है। बच्चों की छोटी-छोटी आवश्यकताओं को समय पर पूरा करना उनके बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और आयोग हमेशा उनके लिए तत्पर है।

बाढ़ प्रबंधन पर CM सम्राट का बड़ा प्लान, कोसी के 100 KM डेंजर जोन में डबल शीट पायलिंग

पटना बिहार में बाढ़ से तबाही को लेकर सरकार संवेदनशील है। जल्द ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए कार्ययोजना बनायी जाएगी। बाढ़ प्रबंधन के तहत गंगा नदी, कोसी नदी एवं गंडक नदी को व्यवस्थित किया जाएगा। इन नदियों के दोनों तरफ तटबंधों को मजबूत करते हुए उन पर फोरलेन सड़क का निर्माण भी किया जाना है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को उच्चस्तरीय बैठक में बाढ़ प्रबंधन, सड़क संपर्क तथा सौर ऊर्जा से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की तथा पदाधिकारियों को कई ‌आवश्यक निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने बैठक में गंगा, गंडक एवं कोसी नदी परियोजना, बक्सर-भागलपुर ग्रीन फिल्ड एक्सप्रेस-वे, 2400 मेगावाट क्षमता की पीरपैंती इकाई तथा पीएम कुसुम योजना से संबंधित प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि गंगा नदी, कोसी नदी एवं गंडक नदी क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित लोगों को स्थायी राहत प्रदान करने के साथ-साथ इस क्षेत्र को समृद्ध क्षेत्र बनाना है। कोसी क्षेत्र के शुरुआती 100 किलोमीटर जो विशेष डेंजर जोन है, उस पर डबल शीट पायलिंग करने की आवश्यकता है। गाद निकासी पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों का गाद निकालने से जल संग्रहण एवं प्रवाह क्षमता भी संयमित होगी। इस दौरान जल संसाधन सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह, ऊर्जा सचिव अजय यादव एवं पथ निर्माण सचिव पंकज कुमार पाल ने अपने विभागों से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत,सीएम के सचिव संजय कुमार सिंह आदि उपस्थित थे। सीएम ने सभी अधिकारियों से बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए प्रभावी प्लान बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने आम जनों को भी आश्वासन दिया कि बाढ़ से होने वाली तबाही को लेकर सरकार संवेदनशील है। जल्द ही इसका स्थाई समाधान निकाला जाएगा। सीएम के अहम निर्देश 1. गाद प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें, ताकि जल संग्रहण और प्रवाह क्षमता में सुधार हो 2. नए बैराज के निर्माण की दिशा में प्रक्रिया शुरू करें 3. कोसी क्षेत्र के शुरुआती 100 किमी पर डबल शीट पायलिंग कराएं 4. संबंधित विभाग आपसी समन्वय से परियोजनाओं की नियमित निगरानी करें। एक्सप्रेस-वे और सड़क परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करें मुख्यमंत्री ने बक्सर-भागलपुर 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की प्रगति की जानकारी ली। 348 किलोमीटर लंबी इस सड़क का 336 किलोमीटर हिस्सा बिहार तथा लगभग 12 किलोमीटर उत्तर प्रदेश में है। मुख्यमंत्री ने इसके अतिरिक्त गंगा-अंबिका पथ (बिदुपुर दिघवारा), नारायणी पथ (दरिहारा-डुमरिया घाट) और विश्वामित्र पथ (बक्सर आरा-मनेर) परियोजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने समय-सीमा में इसे पूरा करने का निर्देश दिया।

नटनी का बारा से मंडावर तक बनेगा एलिवेटेड रोड, 26 KM घटेगी दूरी

जयपुर सरिस्का एलिवेटेड रोड एक बार फिर फाइलों से बाहर आया है। इस बार नटनी का बारा से मंडावरा तक 22 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव बनाया गया है। करीब 2200 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इस परियोजना के लिए पीडब्ल्यूडी एनएच ने डीपीआर केंद्र सरकार को भेज दी है। प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के नीचे से वन्यजीवों के गुजरने की व्यवस्था होगी, जबकि रोड के बीच में आने वाले आठ गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी के भ्रमण के दौरान सामने आया था कि सरिस्का के मध्य से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग 248ए पर आए दिन वाहनों की चपेट में वन्यजीव आ रहे हैं। इसका रास्ता एलिवेटेड रोड निकाला गया। करीब चार साल से इस पर मंथन चल रहा है। दो बार इस एलिवेटेड का रूट तय हो चुका है। एक बार पीडब्ल्यूडी एनएच ने प्रदेश स्तर पर डीपीआर तैयार की, लेकिन उसे रिजेक्ट कर दिया गया। दूसरे प्रस्ताव में यह सामने आया कि थानागाजी के थैंक्यू बोर्ड के आगे यह रोड उतारा जाएगा, जिसका विरोध काफी दिन तक चला और उसके बाद नया प्रस्ताव बनाया गया। यह रहेगा मार्ग, किसानों को मिली राहत अब एलिवेटेड रोड नटनी का बारा से शुरू होकर धर्मपुरा, कुशालगढ़ से मंडावरा तक पहुंचेगा। यह मार्ग आगे जाकर जयपुर मार्ग पर मिलेगा। इसके बीच आठ गांव आएंगे। इन गांवों की जमीन अधिग्रहण की जाएगी। साथ ही, वन विभाग से भी जमीन ली जाएगी। इस मार्ग पर थैंक्यू बोर्ड नहीं आएगा, जिससे विरोध करने वाले किसानों को राहत मिलेगी। 26 किमी दूरी हो जाएगी कम नटनी का बारा से मंडावर की दूरी करीब 48 किमी है। आठ गांवों की जमीन व फॉरेस्ट लैंड से एलिवेटेड गुजरेगा, तो दूरी करीब 26 किमी कम हो जाएगी और जयपुर की राह आसान होगी। करीब 45 मिनट समय बच सकेगा। वन्यजीव नीचे से निकल सकेंगे एलिवेटेड रोड पिलर पर खड़ा होगा, जिसके नीचे से वन्यजीव आसान से निकल सकेंगे। पिलर की ऊंचाई इतनी होगी कि वाहनों का शोर भी अधिक दूर तक नहीं जाएगा। आठ गांवों की जमीन अधिग्रहण करेंगे भू प्रबंधन कार्यालय से रिटायर्ड नायब तहसीलदार बनवारी सिंह ने बताया कि उनकी कंसल्टेंट कंपनी ने सर्वे किया है। एलिवेटेड रोड नटनी का बारा से मंडावर तक जाएगा। इस बीच आठ गांवों की जमीन अधिग्रहित होगी और कुछ वन विभाग की जमीन भी ली जाएगी। इस पर तेजी से काम कर रहे हैं। एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को भेज दिया है। इस पर करीब 2200 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वहां से मंजूरी के बाद इस पर आगे काम होगा – वेद प्रकाश शर्मा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी एनएच जयपुर  

4030 आंबेडकर प्रतिमा स्थलों का होगा विकास, योगी सरकार ने जारी किए 403 करोड़ रुपये

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सामाजिक समरसता और महान राष्ट्रीय विभूतियों के सम्मान से जुड़े सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण और विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति स्थल विकास योजना के तहत सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में स्थापित आंबेडकर प्रतिमा स्थलों का विकास और सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। योजना के प्रथम चरण में 403 विधानसभा क्षेत्रों में 10-10, यानी कुल 4,030 प्रतिमा स्थलों को विकसित किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 403 करोड़ रुपये की धनराशि जिलाधिकारियों के निवर्तन पर आवंटित कर दी है। योजना का उद्देश्य सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित आंबेडकर और अन्य महान विभूतियों की प्रतिमाओं को सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानजनक स्वरूप प्रदान करना है। शासन के दस्तावेज के अनुसार अनेक प्रतिमाएं छत और बाउंड्री वॉल जैसी आवश्यक सुविधाओं से रहित हैं, जिसके कारण वे मौसम, अतिक्रमण और उपेक्षा के प्रति संवेदनशील रहती हैं। ऐसे प्रतिमा स्थलों का संरक्षण करते हुए आसपास के क्षेत्र का भी सौंदर्यीकरण किया जाएगा। 403 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 40300 लाख रुपये यानी 403 करोड़ रुपये की धनराशि प्राविधानित की गई थी। शासन के सितंबर 2026 के पत्र के अनुसार यह धनराशि अवमुक्त कर निदेशक, समाज कल्याण, उत्तर प्रदेश के निवर्तन पर उपलब्ध करा दी गई। इसके बाद 22 सितंबर 2026 को निदेशालय स्तर से प्रदेश की 403 विधानसभाओं में स्थापित 4,030 प्रतिमा स्थलों के विकास के लिए 403 करोड़ रुपये जिलाधिकारियों के निवर्तन पर आवंटित कर दिए गए हैं। इससे प्रत्येक प्रतिमा स्थल के विकास के लिए औसतन 10 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध होगी। हालांकि शासनादेश में स्थल विकास की अधिकतम लागत 40 लाख रुपये प्रति मूर्ति स्थल निर्धारित की गई है और वास्तविक कार्य का आकलन स्थल की आवश्यकता के अनुसार किया जाएगा। प्रतिमा स्थल बनेंगे सुरक्षित और आकर्षक योजना के तहत प्रतिमा स्थलों पर रैलिंगयुक्त स्टील की सीढ़ी, प्रतिमा की छत, बाउंड्री, फिनिशिंग, हरियाली और प्रकाश व्यवस्था जैसे कार्य कराए जाएंगे। इसके साथ ही स्वच्छ, व्यवस्थित और सम्मानजनक वातावरण तैयार किया जाएगा।   प्रतिमा के नाम और उसके इतिहास को संक्षिप्त रूप में प्रदर्शित करने वाला 3×2.5 फीट आकार का सूचना बोर्ड भी लगाया जाएगा, जिसे जिलाधिकारी द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर नई पीढ़ी में डॉ. आंबेडकर और अन्य महान राष्ट्रीय विभूतियों के प्रति सम्मान एवं गौरव की भावना को मजबूत करना भी है। शासन के अनुसार ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाली प्रतिमाओं का दीर्घकालीन संरक्षण सुनिश्चित करने के साथ प्रतिमा स्थलों को बेहतर सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। पुरानी या क्षतिग्रस्त प्रतिमाओं के स्थान पर नई प्रतिमा योजना में यह भी प्रावधान किया गया है कि सार्वजनिक स्थल पर स्थापित पुरानी अथवा क्षतिग्रस्त प्रतिमा के स्थान पर संगमरमर की नई प्रतिमा स्थापित की जा सकेगी। इस तरह योजना केवल स्थल के सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आवश्यकतानुसार प्रतिमाओं के संरक्षण और प्रतिस्थापन को भी इसमें शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी गठित की गई है। इसमें न्याय, संस्कृति, पर्यटन, वित्त, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, नगर विकास और समाज कल्याण समेत संबंधित विभागों के मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।   इसके अलावा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अंतरविभागीय समन्वय समिति भी बनाई गई है। इससे योजना के क्रियान्वयन में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और नियमित निगरानी की व्यवस्था की गई है। विधानसभा क्षेत्र स्तर से होगा विकास कार्य योजना के तहत विकास कार्य के लिए आवेदन खंड विकास अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी अथवा जिलाधिकारी को दिया जा सकता है। स्थल विकास से संबंधित आगणन जिलाधिकारी द्वारा चिन्हित कार्यदायी संस्था से तैयार कराया जाएगा। निर्माण एवं सौंदर्यीकरण के सभी कार्य निर्धारित इंजीनियरिंग और सुरक्षा मानकों के अनुरूप कराए जाएंगे। योजना का क्रियान्वयन संबंधित विभाग, नगरीय निकाय, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत अथवा ग्राम पंचायत के माध्यम से किया जा सकता है। कार्य पूरा होने के बाद प्रतिमा स्थल का लोकार्पण जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा। दिसंबर तक परियोजना पूरी करने का लक्ष्य शासन ने योजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए समय-सारिणी भी निर्धारित की है। परियोजना स्थलों के प्रस्ताव/आवेदन प्राप्त करने, स्थल निरीक्षण और आगणन तैयार करने तथा निविदा संबंधी प्रक्रिया के लिए अलग-अलग समयसीमा तय की गई है। परियोजना को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सितंबर में जिलों को धनराशि आवंटित किए जाने के बाद अब जिला स्तर पर कार्यदायी संस्था का चयन, निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों के प्रशासनिक एवं वित्तीय अनुमोदन तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है। प्रतिमा स्थलों के विकास के साथ सामाजिक स्मृति का संरक्षण योगी सरकार की इस योजना का व्यापक उद्देश्य केवल निर्माण और सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है। शासन दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि महान समाज सुधारकों और सांस्कृतिक विभूतियों की प्रतिमाएं देश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। इनके माध्यम से सार्वजनिक स्मृति, सामाजिक मूल्यों तथा राष्ट्रीय एवं स्थानीय योगदानकर्ताओं के प्रति सम्मान प्रदर्शित होता है।  

खेतों में 4 काम एक साथ करेगा ‘किसान दोस्त’, ईंधन की जरूरत नहीं

रांची बीआइटी मेसरा की विभिन्न इकाईयों में लगातार नए नए प्रयोग होते रहते हैं। कभी राकेट्री साइंस डिपार्टमेंट तो कभी फार्मेसी और मैकेनिकल में लेकिन अबकी बार यूनिवर्सिटी पालिटेक्निक बीआइटी मेसरा के छात्रों ने किसानी को आसान बनाने की दिशा में नवाचार किया है। यहां के छात्र प्रांजल ओझा और रोनित कुमार ने मार्गदर्शक डॉ. सतीश कुमार, प्रो. पीआर महतो और प्रो. राकेश के मार्गदर्शन में 'किसान दोस्त' नामक उपकरण विकसित किया है। जो कि सौर उर्जा से संचालित होता है और इसे खेतों या वाटिका में चलाने के लिए किसी अन्य ईंधन की आवश्यकता नहीं होती है। यह उपकरण खेत में एक साथ चार काम करेगा, पहला घास पतवार हटाएगा, दूसरा मेड़ या कियारी निर्माण करेगा, तीसरा बीज बुआई और चौथा खेत को समतल करने में मदद करेगा। भविष्य में इसकी मांग बढ़ेगी बता दें कि इस उपकरण को बीआइटी मेसरा के प्लैटिनम जुबली समारोह में प्रायोगिक तौर पर यूनिवर्सिटी पालिटेक्निक के परिसर में प्रदर्शित किया गया था। बेहद किफायती होने के कारण भविष्य में इसकी मांग बढ़ेगी। सौर उर्जा से संचालित इस उपकरण की मदद से घास हटाने और बीज बोने का काम बिना खर्च किया जा सकता है। 'किसान दोस्त' एक अभिनव और टिकाऊ कृषि उपकरण है, जिसे किसानों की प्रमुख समस्याओं का समाधान करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह पर्यावरण अनुकूल खेती की प्रैक्टिस को बढ़ावा देता है। यह उपकरण पूरी तरह से सौर ऊर्जा द्वारा संचालित होता है और इसमें उन्नत यांत्रिक घटकों के साथ हरित ऊर्जा समाधान जोड़े गए हैं इसलिए यह किसानों के लिए एक कुशल और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील समाधान बनता है। जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि यह सौर ऊर्जा पर काम करता है, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होती है, संचालन लागत में कमी आती है और पर्यावरण संरक्षण में योगदान होता है, इसमें घास हटाने की प्रणाली विकसित की गईं हैं, इसमें सटीक नियंत्रण वाले उपकरण लगे हैं जो फसलों को बिना नुकसान पहुंचाए घास को प्रभावी रूप से हटा सकते हैं, जिससे फसलों का स्वास्थ्य और उपज बेहतर होती है। यह उपकरण सुनिश्चित करता है कि बीजों को सही गहराई और दूरी पर समान रूप से बोया जाए ताकि पौधों की बढ़त और उपज को बढ़ावा मिले। किसानों की चुनौतियों का होगा समाधान यह उपकरण महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को स्वचालित करता है, जिससे मैन्युअल श्रम पर निर्भरता कम होती है, विशेषकर व्यस्त सीजन में रासायनिक खरपतवार नाशकों की आवश्यकता को समाप्त करके संचालन लागत में कमी करता है। यह भूमि अपक्षय और रासायनिक अफवाह को कम कर टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देता है, जिससे मृदा और जल संसाधनों की सुरक्षा होती है। यह घास हटाने और बीज बोने की प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे किसानों का कीमती समय बचता है। यह हल्का और संचालन में आसान है, जो इसे छोटे से लेकर मध्यम आकार के खेतों के लिए उपयुक्त बनाता है। यह रासायनिक खरपतवार नाशकों की आवश्यकता को समाप्त कर और पारंपरिक कृषि मशीनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करके पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देता है। किसान दोस्त उन किसानों के लिए आदर्श है जो पारंपरिक कृषि समस्याओं से निपटने के लिए आधुनिक, ईंधन कुशल, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और लागत-कुशल समाधानों की तलाश में हैं। इस उपकरण में एक साथ खरपतवार की कटाई, जमीन की खुदाई, बीज की बुआई और जमीन को समतल करने का मैकेनिज्म शामिल है। यह हरित ऊर्जा से संचालित होती है।-  डॉ. सतीश कुमार, अस्सिटेंट प्रोफेसर सह कन्वेनर ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल, यूनिवर्सिटी पालिटेक्निक।  

यूपी में अब कट्टा उद्योग की जगह डिफेंस कॉरिडोर और वाहन चोरी की जगह वाहन निर्माण: गृह मंत्री

ग्रेटर नोएडा केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कभी अपराध की इंडस्ट्री चलती थी, शहर-शहर वाहन चोरी के कुटीर उद्योग लगते थे और अवैध कट्टे बनाए जाते थे, लेकिन आज उसी उत्तर प्रदेश में कट्टा उद्योग की जगह डिफेंस कॉरिडोर, वाहन चोरी की जगह वाहन निर्माण और चेन स्नैचिंग की जगह मेडिकल डिवाइस पार्क बन रहा है। यह परिवर्तन डबल इंजन की सरकार में आया है और उत्तर प्रदेश देश-दुनिया के निवेश का प्रमुख केंद्र बन रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री गुरुवार को ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) के चौथे संस्करण के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। देश का विकास इंजन बनने की दिशा में यूपी अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश का हाल यह था कि लखनऊ में औद्योगिक निवेश सम्मेलन कराने की स्थिति नहीं थी। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए दिल्ली में आयोजन किया था। आज वही उत्तर प्रदेश निवेश का केंद्र बनकर देश का विकास इंजन बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। निवेश के लिए कानून-व्यवस्था, अनुकूल औद्योगिक नीति, सक्रिय सरकार और उद्योगों को सुविधा देने की आवश्यक है और उत्तर प्रदेश में ये सभी स्थितियां मौजूद हैं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश ने वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य तय किया है। यूपी के डिफेंस कॉरिडोर में बढ़ रहा निवेश केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के झांसी, चित्रकूट, लखनऊ, आगरा, अलीगढ़ और कानपुर में डिफेंस कॉरिडोर के छह नोड विकसित किए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए निवेश आ रहा है। देश का रक्षा उत्पादन अब करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है और 2013-14 की तुलना में रक्षा उत्पादों के निर्यात में 56 गुना वृद्धि हुई है। आज भारत के रक्षा उत्पाद करीब 80 देशों को निर्यात किए जा रहे हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उत्तर प्रदेश सरकार ने डिफेंस कॉरिडोर के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर और अनुकूल नीतियों के जरिए निवेश को सुगम बनाने का काम किया है। अमेठी में निर्मित एके-203 राइफल और उत्तर प्रदेश में बन रहे रक्षा उत्पाद देश की नई औद्योगिक क्षमता को दर्शाते हैं। ओडीओपी ने बदली रोजगार की तस्वीर अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) की महत्वपूर्ण भूमिका है। परंपरागत उद्योगों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देकर स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया गया है। कभी रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने वाले प्रदेश के युवाओं को आज अपने ही राज्य में रोजगार और उद्यम के अवसर मिल रहे हैं। भदोही का कालीन, फिरोजाबाद का कांच, सहारनपुर की काष्ठ कला, कन्नौज का इत्र और बनारस की रेशमी साड़ी ने देश-दुनिया में पहचान बनाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि यूपी के पारंपरिक उत्पादों के साथ वाराणसी की मलाईयो, तिरंगा बर्फी, आगरा के पेठा, मथुरा के पेड़ा और मेरठ की गजक जैसे उत्पादों को भी व्यापक बाजार मिलेगा। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो बनेगा वैश्विक व्यापार का मंच केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण में देश-दुनिया से आए खरीदारों और उद्यमियों की भागीदारी प्रदेश में निवेश, उत्पादन और बिक्री की संभावनाओं को बढ़ाएगी। पहले संस्करण में राष्ट्रपति, दूसरे में उपराष्ट्रपति और तीसरे संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति रही, जबकि चौथे संस्करण के उद्घाटन में शामिल होकर उन्हें प्रसन्नता हो रही है। 2025 के ट्रेड शो में पांच लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया था और 2,400 से अधिक एमओयू हुए थे। इस वर्ष के आयोजन से पिछले सभी रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है। केंद्रीय गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार को ट्रेड शो के आयोजन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश इसी प्रकार विकास की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा।

किसानों के मवेशी लेकर पहुंचते ही घबराए अधिकारी, मौके पर समाधान

रानीतराई/दुर्ग. खुले में घूमने वाले मवेशियों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने से आक्रोशित किसानों ने आज विरोध शुरू कर दिया। किसान बड़ी संख्या में खुले में घूम रहे मवेशियों को एकत्रित कर उन्हें एसडीएम कार्यालय एवं तहसील कार्यालय पाटन में छोड़ने के लिए निकल पड़े। इस दौरान औसर, रानीतराई, असोगा, डीड़गा सहित आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। किसानों के पाटन पहुंचने की जानकारी मिलने पर पाटन के पूरे प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्राम तेलीगुंडरा के पास रोकने पहुंचे, उन्हें रोककर किसानों से चर्चा की। मौके पर एसडीएम उत्तम ध्रुव, तहसीलदार मनोज गुप्ता, नायब तहसीलदार मनोज रस्तोगी, सिंग, पाटन टीआई युवराज साहू, रानीतराई थाना प्रभारी हुबलाल चंद्राकर, जनपद पंचायत के भूपेंद्र सीईओ महेंद्र जांगड़े सहित पाटन और रानीतराई थाना पुलिस का बल मौजूद रहा। अधिकारियों से किसानों ने अपनी समस्या रखी। किसानों ने कहा कि आप इन मवेशियों की व्यवस्था करेंगे तभी यहां से हटेंगे। अधिकारियों ने किसानों की समस्या सुनी और मवेशियों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। प्रशासन द्वारा मवेशियों को गौशाला भेजने की प्रक्रिया की तैयारी की और गाड़िया बुलाकर गौ शाला भेजना शुरू किया तब जाकर किसान शांत हुए।

IDFC बैंक घोटाले में चार्जशीट दाखिल, 6 IAS पर आरोप

पंचकूला. हरियाणा के कथित बैंक घोटाले की जांच में सीबीआई की ओर से दाखिल की गई चार्जशीट में छह आईएएस अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। चार्जशीट में अधिकारियों पर निजी बैंकों में सरकारी धन निवेश कराने, बैंक चयन और एफडी से जुड़े नियमों की अनदेखी, वित्त विभाग की निर्धारित सीमाओं को दरकिनार करने, कथित तौर पर दस्तावेजों में हेर-फेर, साक्ष्य छिपाने तथा रिश्वत अथवा अन्य अनुचित लाभ लेने जैसे आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई की चार्जशीट में आरके सिंह (राम कुमार सिंह), पंकज अग्रवाल, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन समेत छह आईएएस अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट में बैंक अधिकारियों और अन्य आरोपियों के साथ कथित साजिश के माध्यम से सरकारी धन को निजी बैंकों में ट्रांसफर कराने तथा निवेश प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी के आरोपों का उल्लेख है। पंकज अग्रवाल पर लगे आरोप तत्कालीन स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त एवं सचिव तथा बाद में कृषि विभाग के प्रमुख सचिव रहे पंकज अग्रवाल को लेकर चार्जशीट में निजी बैंक अधिकारी रिभव ऋषि से कथित अनुचित लाभ मिलने का उल्लेख है।