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पंजाब में गेहूं की फसल पर मंडराया खतरा

होशियारपुर. फरवरी 2026 के दूसरे हफ्ते में पिछले साल के मुकाबले तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। चंडीगढ़ के मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, अगले पांच दिनों तक मौसम सूखा रहेगा। इसलिए, मौसम की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए, लुधियाना की पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में एक्सटेंशन एजुकेशन के डायरेक्टर डॉ. मक्खन सिंह भुल्लर ने किसानों को गेहूं की फसल में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है। सिंचाई करते समय हवा की गति पर ध्यान दें, ताकि फसल को नुकसान न हो। पंजाब में मौजूदा रबी सीजन के दौरान, लगभग 95 परसेंट गेहूं के एरिया में 25 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच बुवाई हुई थी, जिसे बुवाई के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। गेहूं की फसल में दाने भरते समय ज्यादा तापमान का खास तौर पर असर होता है। इस दौरान बढ़े हुए तापमान से दाने के वज़न पर बुरा असर पड़ता है, जिससे पैदावार और क्वालिटी में कमी आती है। ज्यादा तापमान के कारण, हल्की से मीडियम मिट्टी में बोई गई गेहूं की शुरुआती फसलों में बालियां आ जाती हैं और वे जल्दी पक जाती हैं, जिससे दाने कमज़ोर रह जाते हैं। क्रॉप साइंस डिपार्टमेंट के डॉ. हरि राम मुखी ने बताया कि अभी फ्लैग लीफ स्टेज में गेहूं को बढ़ते तापमान से बचाने के लिए 2% पोटैशियम नाइट्रेट (13:0:45) का स्प्रे किया जा सकता है। 200 लीटर पानी में 4 किलोग्राम पोटैशियम नाइट्रेट घोलें। पहला स्प्रे तब करें जब फ्लैग लीफ निकले और दूसरा स्प्रे तब करें जब कलियां निकलें। यह घोल 200 लीटर में तैयार करें, और शाम को स्प्रे करना सबसे अच्छा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, हल्की सिंचाई और पोटैशियम नाइट्रेट (13:0:45) का स्प्रे करने से फसल को ज़्यादा तापमान के बुरे असर से काफी हद तक बचाया जा सकता है। डॉ. चरणजीत कौर, चीफ एक्सटेंशन साइंटिस्ट और फार्म एडवाइजरी सर्विस सेंटर, गंगियां ने किसानों से कहा कि वे अपनी गेहूं की फसलों को बढ़ते तापमान के बुरे असर से असरदार तरीके से बचाने के लिए यूनिवर्सिटी की इन सलाहों को अपनाएं। किसानों को इन सलाहों को मानना चाहिए ताकि उनकी फसलें सुरक्षित रहें और प्रोडक्शन कम न हो।

बिजली दरों में वृद्धि का विद्युत नियामक आयोग की जनसुनवाई में विरोध

रायपुर. छत्तीसगढ़ मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन ने आज विद्युत नियामक की जनसुनवाई में अपना प्रतिवेदन पेश किया। इसमें एसोसिएशन ने आगामी वर्ष 2026–27 में विद्युत दरों में किसी भी प्रकार की वृद्धि होने के खिलाफ पुरजोर विरोध किया। एसोसिएशन ने 13 बिंदुओं में अपनी मांगें रखी। एसोसिएशन ने विद्युत नियामक आयोग के सचिव को सौंपे अपने प्रतिवेदन में बताया है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के औद्योगिक विकास में लौह उद्योगों का पारस्परिक सहयोग रहा है। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक नीति के वजह से औद्योगिक विकास में अग्रणी बनने जा रहा है। जैसा कि भारत देश में छत्तीसगढ़ राज्य स्टील हब के नाम से जाना जाता है क्योंकि छोटे-छोटे लौह उद्योग जो कम पूंजी में अधिक उत्पादन करते हैं। साथ ही सबसे अधिक मात्रा में छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को रोजगार प्रदान करने में सक्षम है। उल्लेखनीय है कि विगत वर्षों में लौह उद्योगों औद्योगिक वातावरण को विद्युत नियामक आयोग द्वारा गतिशील बनाये रखा। फलस्वरूप प्रदेश में औद्योगिक विकास दर एवं प्रदेश का घरेलू सकल उत्पादन जी.डी.पी. की सर्वोच्च ऊंचाई को छू रहा है। नतीजन लौह उद्योगों का विस्तार एवं नये लौह उद्योग लगते जा रहे है। विदित है कि छत्तीसगढ़ में 100 इकाईयों की 300 मिनी स्टील प्लांट (फर्नेस) उद्योग है जो छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल के कुल उत्पादन के लगभग 30 से 35% के सबसे बड़े उपभोक्ता (power intensive industry) है, जो प्रतिवर्ष लगभग 750 करोड़ यूनिट खपत करने वाले उद्योग है इस उच्च श्रेणी के सबसे अधिक बिजली खपत करने वाले उद्योगों द्वारा छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल को प्रतिवर्ष लगभग 5 से 6 हजार करोड़ का राजस्व देने वाले है। छत्तीसगढ़ का पूरा लौह उद्योग जीएसटी टैक्स के माध्यम से राज्य शासन एवं भारत सरकार को प्रति वर्ष लगभग 9 से 10 हजार करोड़ से अधिक राजस्व प्रदान करते हैं। यह उद्योग लगभग दो लाख परिवारों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करता है एवं छत्तीसगढ़ के मिनी स्टील प्लांट उद्योग 110 स्पंज आयरन एवं 250 रोलिंग मिलों की बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। ज्ञातव्य है कि वर्तमान विद्युत दर पर मिनी स्टील प्लांट उद्योग बहुत कठिन हो गया है। अतः आपसे निवेदन है कि निम्नलिखित सुझावों एवं मांगों पर त्वरित निर्णय लेने की कृपा करें। ये हैं 13 मांगे मल्टी-ईयर टैरिफ (MYT) 5 वर्ष का होना चाहिए। जो अगले 5 वर्षों के लिए टैरिफ को लगभग स्थिर रखा जाए। कुछ अतिआश्यक पड़ने में उचित सीमा के अंदर बदलाव करे, जिससे उद्योग अपने विस्तार की योजना बना सके। जो अत्यधिक विद्युत उपभोग (Power intensive) (जिनका लोड फैक्टर 50% से ज्यादा एवं कॉन्टैक्ट डिमांड 2500kVA या उससे ज्यादा है) के लिए एक अलग विद्युत श्रेणी (category) बनाया जाये। जिससे उनकी विकास एवं समस्यओं पर आसानी से ध्यान रखा जा सके और राज्य शासन एवं नियामक आयोग कोई रक्षात्मक (protective) पॉलिसी बना सें। अत्यधिक विद्युत उपभोग करने वाले (power intensive) HV4- मिनी स्टील प्लांट उद्योगों के लिए विद्युत दर एवरेज बिलिंग दर लगभग रूपये 5.50 प्रति यूनिट होना चाहिए, जिससे उड़ीसा, झारखंड, दोमादर वेली (DVC) आदि जैसे दूसरे बड़े स्टील बनाने वाले राज्यों के समकक्ष हो। अत्यधिक विद्युत उपभोगक्ता से एवरेज बिलिंग लगभग वोल्टेज-वाइज कॉस्ट ऑफ सप्लाई (वर्ष 25-25 रूपये 5.55 प्रति यूनिट 33 केवी सप्लाई के लिए, जैसा नियामक आयोग ने टैरिफ ऑर्डर 24-25 में तय किया है (पिछले रेवेन्यू गैप को छोड़कर) नियामक आयोग ने टैरिफ ऑर्डर में वर्ष 25-26 के लिए वोल्टेज-वाइज कॉस्ट ऑफ सप्लाई तय नहीं की है) के बराबर होना चाहिए। लोड फैक्टर प्रोत्साहन पूर्व की भांति जारी रखा जाये यानी 50% लोड फैक्टर पर 1% प्रोत्साहन से शुरू करके हर 1% बढ़ोतरी पर प्रोत्साहन 1% बढ़ाया जाए जो ज्यादा से ज्यादा 74% तक हो। शटडाउन एवं साप्ताहिक अवकाश के दिनों को ध्यान में रखते हुए, पॉवर ऑफ के घंटे को बढ़ाकर हर माह औसतन 72 घंटे किए जाए, जिससे उद्योगों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी को भी मेंटेनेंस के काम के लिए काफी समय मिल सके। लोड शेडिंग के दौरान हर महीने नॉर्मल पॉवर ऑफ आवर्स के अलावा, असल लोड शेडिंग पीरियड के आधार पर एक्स्ट्रा पॉवर ऑफ आवर्स दिए जाए। फ्यूल एवं पॉवर परचेस एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) को जीरो पर रीसेट किया जाए क्योंकि वर्ष 25-26 के दौरान एनर्जी चार्ज पर यह 18% तक बढ़ गया है। FCA और FPPA सरचार्ज के कैलकुलेशन की इंडिपेंडेंट चेकिंग के लिए एक ठीक और पारदर्शी तरीका शुरू किया जाये। सोलर पॉवर बैंकिग को एड्रेस करने के लिए सोलर आवर्स के दौरान कॉन्ट्रैक्ट डिमांड को अधिकतम सीमा 20% तक पार करने पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाया जाये। बिजली बिल विलम्ब भुगतान पर सरचार्ज के बराबर एडवांस पेमेंट पर छूट (APR) (अभी DPS बिल का 1.5% हर महीने या उसके हिस्से के लिए है और APR सिर्फ 1.25% है) दिया जा सकता है ताकि बिजली बिलों का एडवांस पेमेंट बढ़ाया जा सके जिससे छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी का कैश फ्लो बेहतर होगा। उद्योगों को स्मार्ट (प्रीपेमेंट) एनर्जी मीटर लगाने का विकल्प दिया जाए। अत्यधिक विद्युत उपभोग करने वाले (power intensive) उद्योग के लिए विलम्ब भुगतान सरचार्ज को हर दिन के हिसाब से तय किया जाना चाहिए (देरी वाले दिनों की संख्या पर 0.05% हर दिन) क्योंकि उनकी बिजली बिल की राशि बहुत अधिक होती है और थोड़ी सी भी देरी से उन पर बहुत अधिक DPS का बोझ पड़ता है। सभी अत्यधिक विद्युत उपभोग करने वाले (power intensive) उद्योग अपनी डिमांड को अनुमेय सीमाएँ (permissible limits) के अंदर कंट्रोल करने के लिए आटोमेटेड डिमांड सिस्टम लगाती है, लेकिन यह देखा गया है कि कुछ मामलों में ऐसे सिस्टम के थोड़े समय के लिए खराब होने की वजह से डिमांड अनुमेय सीमाएँ से ज्यादा हो जाती है, जिससे ऐसे उपभोक्ता पर पेनल्टी चार्ज के तौर पर भारी पैसे का बोझ पड़ता है, इसलिए ऐसी किसी भी स्थिति को (जैसे साल में एक बार) उन उपभोक्ता के लिए छूट कर दिया जाना चाहिए जिन्होंने आटोमेटेड डिमांड कंट्रोल सिस्टम लगवाया है। सोलर पॉवर प्लांट को लगाने को बढ़ावा देने के लिए प्रोसेस / परमिसेंस को आसान बनाना चाहिए और राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए सोलर पॉवर पर किसी भी कॉस सब्सिडी सरचार्ज को माफ किया जाना चाहिए। मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन ने निवेदन करते … Read more

AI टेक्नोलॉजी से मरीजों का नेविगेशन आसान, भोपाल एम्स बना देश का पहला स्मार्ट अस्पताल

भोपाल AIIMS भोपाल देश का पहला ऐसा अस्पताल बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मरीजों और उनके परिजनों को खुद सही रास्ता बताएगा। रोजाना यहां 10 हजार से अधिक लोग इलाज, जांच और परामर्श के लिए आते हैं। बड़े और एक जैसे दिखने वाले भवनों के कारण लोगों को अक्सर सही विभाग ढूंढने में दिक्कत होती है। अब इस समस्या का समाधान AI आधारित नेविगेशन सिस्टम से किया जाएगा। QR कोड स्कैन करते ही मिलेगा रास्ता एम्स भोपाल के डिप्टी डायरेक्टर संदेश जैन के अनुसार, परिसर में लगाए गए QR कोड को स्कैन करते ही मरीज को यह जानकारी मिल जाएगी कि कार्डियोलॉजी, अमृत फार्मेसी, न्यूरोसर्जरी, पैथोलॉजी, एमआरआई या डॉक्टर का कक्ष किस दिशा में है। यह सुविधा गूगल मैप की तरह काम करेगी और चरणबद्ध दिशा-निर्देश देगी। एक जैसी बिल्डिंग, इसलिए AI का सहारा एम्स का कैंपस काफी विस्तृत है और भवनों की आंतरिक बनावट लगभग एक जैसी है। अलग-अलग ब्लॉक होने के बावजूद रास्ते मिलते-जुलते हैं। ऐसे में पहली बार आने वाले मरीजों को ओपीडी, वार्ड, पैथोलॉजी या एमआरआई ढूंढने में काफी समय लग जाता है। बार-बार स्टाफ से पूछने की स्थिति बनती है, जिससे समय के साथ तनाव भी बढ़ता है। इसी परेशानी को खत्म करने के लिए AI तकनीक को अपनाया जा रहा है। बिल्डिंग की डिजाइन ऐसी कि एआई का सहारा लेना पड़ा भोपाल एम्स का परिसर काफी बड़ा है। अस्पताल भवनों की अंदरूनी बनावट एक जैसी है। अलग-अलग ब्लॉक हैं, लेकिन सब एक जैसे नजर आते हैं, रास्ते भी एक जैसे हैं। ऐसे में बार-बार आने पर भी मरीजों और उनके परिजन को सही विभाग तक पहुंचने में परेशानी होती है। वहीं, पहली बार आने वाले मरीजों का पैथोलॉजी, एमआरआई, ओपीडी या वार्ड ढूंढ़ने में ही काफी समय लग जाता है। बार-बार स्टाफ या सुरक्षाकर्मियों से रास्ता पूछना पड़ता है। इससे न केवल समय बर्बाद होता है, बल्कि मरीज और परिजन तनाव भी महसूस करते हैं। इसलिए अब इस समस्या को दूर करने के लिए एआई का सहारा लिया जा रहा है। एआई आधारित नेविगेशन सिस्टम बना रहे इसी समस्या को दूर करने के लिए एम्स भोपाल ने आईआईटी इंदौर की दृष्टि टीम के साथ मिलकर स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली विकसित करने की पहल की है। भोपाल के एक स्टार्टअप की मदद से एआई आधारित नेविगेशन सिस्टम तैयार किया जा रहा है। यह सिस्टम गूगल मैप की तरह काम करेगा। एम्स के मोबाइल एप या परिसर में लगाए गए क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद व्यक्ति जिस स्थान पर जाना चाहता है, उसे सर्च करेगा। इसके बाद एआई उसे चरणबद्ध तरीके से सही रास्ता दिखाएगा। क्यूआर कोड और मोबाइल ऐप से मिलेगा रास्ता इस प्रणाली के दो स्वरूप होंगे। पहला वेब आधारित होगा। एम्स के मुख्य प्रवेश द्वार और प्रमुख स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। जैसे ही कोई व्यक्ति क्यूआर कोड स्कैन करेगा, उसके मोबाइल पर इंटरैक्टिव मैप खुल जाएगा। दूसरा स्वरूप मोबाइल ऐप आधारित होगा। यूजर ऐप डाउनलोड कर सीधे नेविगेशन का लाभ ले सकेंगे। भवनों के बीच पहुंचने के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग होगा। भवनों के अंदर, जहां जीपीएस की सटीकता कम हो जाती है, वहां हर 15 मीटर पर रिले सिस्टम लगाए जाएंगे। ये उपकरण मोबाइल को सटीक दिशा-निर्देशन देंगे, जिससे व्यक्ति बिना भटके सही जगह पहुंच सकेगा। एक माह का पायलट, फिर पूरे परिसर में लागू इस प्रोजेक्ट को शुरुआत में एक माह के पायलट की तरह लागू किया जाएगा। इस दौरान यह देखा जाएगा कि सिस्टम कितना प्रभावी है और लोगों को कितना फायदा हो रहा है। यदि रिजल्ट संतोषजनक रहे तो इसे पूरे परिसर में लागू किया जाएगा। इससे मरीजों का समय बचेगा, भीड़ का दबाव कम होगा और स्टाफ पर रास्ता बताने का अतिरिक्त बोझ भी घटेगा। IIT इंदौर के सहयोग से विकसित होगा सिस्टम इस परियोजना को विकसित करने के लिए एम्स भोपाल ने Indian Institute of Technology Indore की दृष्टि टीम और भोपाल के एक स्टार्टअप के साथ साझेदारी की है। AI आधारित यह स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली मोबाइल ऐप और वेब दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। दो तरीकों से काम करेगा नेविगेशन वेब आधारित सिस्टम: मुख्य प्रवेश द्वार और प्रमुख स्थानों पर QR कोड लगाए जाएंगे। स्कैन करते ही मोबाइल पर इंटरैक्टिव मैप खुल जाएगा। मोबाइल ऐप से मिलेगा सटीक दिशा-निर्देशन दूसरा स्वरूप मोबाइल ऐप आधारित होगा। भवनों के बीच जाने के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वहीं भवनों के अंदर, जहां जीपीएस कमजोर होता है, वहां लगभग हर 15 मीटर पर रिले उपकरण लगाए जाएंगे। इससे दिशा-निर्देशन और अधिक सटीक होगा। पहले पायलट, फिर पूरे परिसर में लागू एम्स प्रवक्ता डॉ. केतन मेहरा ने कहा कि आइआइटी इंदौर के साथ मिलकर सिस्टम को विकसित कर रहा है। इसे अप्रेल के अंत में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। सबसे अहम बात, बड़े अस्पताल को लेकर जो झिझक होती है, वह कम होगी। मोबाइल ऐप आधारित सिस्टम: यूजर ऐप डाउनलोड कर सीधे नेविगेशन सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। भवनों के बीच दिशा बताने के लिए GPS तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वहीं, भवनों के अंदर जहां GPS की सटीकता कम होती है, वहां हर 15 मीटर पर रिले सिस्टम लगाए जाएंगे, जो सटीक दिशा-निर्देशन सुनिश्चित करेंगे। AIIMS भोपाल में बेड क्षमता-     जनरल वार्ड एवं एचडीयू – 816 बेड     आईसीयू वार्ड – 128 बेड     प्राइवेट वार्ड – 34 बेड     इमरजेंसी वार्ड – 56 बेड     डे-केयर वार्ड – 268 बेड डे-केयर सर्विस वार्ड – 87 बेड यह पहल न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों के तनाव को भी कम करेगी, जिससे अस्पताल सेवाएं और अधिक सुगम बन सकेंगी।  

कोर्ट ने बढ़ाई अमिताभ बच्चन की मुश्किलें, नागदा विवाद पर CIS में केस और थाने से मांगी रिपोर्ट

नागदा  सोनी चैनल पर 23 दिसंबर 2025 को प्रसारित ‘कौन बनेगा करोड़पति’ कार्यक्रम में नागदा को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया है। शो के होस्ट और सुपरस्टार अमिताभ बच्चन द्वारा नागदा को पानी की समस्या से जूझ रहा छोटा सा गांव बताए जाने पर स्थानीय स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। इस मामले में नागदा के ज्यूडिशयल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है। न्यायालय ने परिवाद स्वीकार करते हुए प्रकरण सीआईएस (Case Information System) में दर्ज करने और संबंधित थाने को प्रतिवेदन (रिपोर्ट) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल किसी भी सिविल या क्रिमिनल केस को अदालत में दाखिल करने पर CIS में रजिस्टर किया जाता है। इसके बाद पिटीशन को कोर्ट द्वारा एक्स्पेट करना माना जाता है। मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को निर्धारित की गई है। सोनी पिक्चर्स नेटवर्क के सीईओ भी बनाए गए पक्षकार स्थानीय निवासी और अधिवक्ता लक्ष्मण सुंदरा ने अमिताभ बच्चन के साथ-साथ सोनी पिक्चर्स नेटवर्क के सीईओ गौरव बैनर्जी के खिलाफ भी अपराध पंजीबद्ध करने की मांग को लेकर न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया है। अब न्यायालय में अगली सुनवाई के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी। शहर की छवि धूमिल करने का आरोप प्रकरण की पैरवी कर रहे अधिवक्ता राजेश मंडवारिया (आलोट) और दीपमाला अवाना (नागदा) ने कहा कि इतने बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम में नागदा शहर के बारे में भ्रामक जानकारी दी गई, जिससे शहर की छवि प्रभावित हुई है। अधिवक्ता जैना श्रीमाल के अनुसार कार्यक्रम में नागदा को छोटा गांव और पानी संकटग्रस्त बताया गया, जबकि यह तथ्यात्मक रूप से गलत है। नागदा की पहचान परिवाद में उल्लेख किया गया है कि नागदा मालवा क्षेत्र का प्रमुख रेलवे जंक्शन है, जिसकी आबादी डेढ़ लाख से अधिक है। यह एक औद्योगिक नगर के रूप में विकसित है। साथ ही आवेदन में यह भी कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तीन बार नागदा को जिला बनाने की घोषणा कर चुके हैं। .

सम्राट चौधरी का पप्पू यादव पर तंज- ‘हाथी’ भी हो रहे बीमार

पटना. राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग एयरपोर्ट पर उतरते ही दावा करते हैं कि बिहार पुलिस 'चींटी भी नहीं मार पाती।' लेकिन हकीकत उनसे दो घंटे बाद मिलती है-जब वही लोग कानून के शिकंजे में आ जाते हैं। सम्राट ने तंज कसते हुए कहा कि गिरफ्तारी के बाद अचानक तबीयत बिगड़ जाती है और अस्पताल का रास्ता ज्यादा सुरक्षित लगने लगता है। उनका इशारा उन नेताओं की ओर था जो गिरफ्तारी से पहले सख्त बयान देते हैं और बाद में मेडिकल कारणों का सहारा लेते हैं। उन्होंने कहा, 'अब तो हाल यह है कि हाथी भी बीमार होकर अस्पताल जाना पसंद करने लगे हैं।' यह टिप्पणी साफ तौर पर राजनीतिक प्रतीकवाद के जरिए विपक्ष पर निशाना थी। 'एयरपोर्ट पर दावे, दो घंटे में हकीकत' सम्राट ने कहा कि बिहार की कानून-व्यवस्था को बदनाम करने की कोशिश की जाती है। कुछ नेता बाहर से आकर बड़े-बड़े दावे करते हैं और राज्य की पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं। लेकिन कानून अपना काम करता है और कार्रवाई होते देर नहीं लगती। उन्होंने दावा किया कि बिहार पुलिस पूरी तरह सतर्क और सक्षम है। अपराधियों के खिलाफ सख्ती से अभियान चल रहा है। इसलिए 'चींटी' वाला बयान सिर्फ राजनीतिक ड्रामा है, हकीकत नहीं। 'गिरफ्तारी के बाद बीमारी' पर तंज उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कार्रवाई होते ही कुछ लोगों की सेहत अचानक बिगड़ जाती है। अस्पताल में भर्ती होना उन्हें ज्यादा सुविधाजनक लगता है। उन्होंने व्यंग्य में कहा कि यह नई राजनीतिक परंपरा बन गई है। 'कानून का सामना करने से बेहतर लोग मेडिकल रिपोर्ट का सहारा लेते हैं,' उन्होंने कहा। उनकी टिप्पणी को विपक्ष पर सीधा हमला माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस बयान की खूब चर्चा हो रही है। 'बिहार की छवि खराब करने की कोशिश' सम्राट ने आरोप लगाया कि विपक्ष बिहार की छवि खराब करने में लगा है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून का राज है और सरकार अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। विपक्ष के बयान तथ्यों से परे हैं और जनता सब समझती है। उन्होंने कहा कि विकास और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार मजबूत है। राजनीतिक बयानबाजी से सच्चाई नहीं बदलती। बिहार की व्यवस्था पर सवाल उठाने वालों को पहले हकीकत देखनी चाहिए।

10वीं-12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का Offline मूल्यांकन कर 15 मई तक आएंगे रिजल्ट

भिवानी. हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12 वीं की परीक्षाएं शुरु होने वाली हैं जो कि एक अप्रैल तक चलगी। परीक्षाएं खत्म होने के बाद उत्तरपुस्तिकाओं का ऑफलाइन मूल्यांकन कराया जाएगा। 15 मई तक परीक्षा परिणाम घोषित किया जाएगा।  हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 25 और 26 फरवरी से 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं आरंभ हो रही हैं। केवल एक ही सत्र में 12: 30 से 3: 30 बजे तक परीक्षाएं होंगी। बोर्ड परीक्षाओं में करीब 1420 परीक्षा केंद्रों पर कुल 5,71,767 परीक्षार्थी शामिल होंगे। हरियाणा विद्यालय बोर्ड मुख्यालय पर शुक्रवार को हुई पत्रकार वार्ता में डॉ. पवन कुमार ने बताया कि 325 उड़नदस्तों का गठन बोर्ड ने किया है। परीक्षा केंद्र ज्यादा दूर नहीं होंगे। कुछ जगहों पर परीक्षा केंद्र दूर बनाए गए हैं, उनके परीक्षार्थियों को भी नजदीकी परीक्षा केंद्रों पर समाहित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

शिरोमणि अकाली दल ने किया बुढ़ापा पेंशन बढ़ाने का एलान

चंडीगढ. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने तमिलनाडु के एक केस में मुफ्त की योजनाओं को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। पीठ ने कहा कि अगर लोगों को राज्य मुफ्त में ही सब कुछ देने लगे तो वे काम क्यों करेंगे। पीठ ने यह भी कहा है कि यह हालात केवल किसी एक राज्य के नहीं है, बल्कि सभी राज्यों में इसी तरह हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी से पंजाब भी अछूता नहीं है। पंजाब में समय-समय की सरकारों की ओर से वोट बैंक को साधने के लिए शुरू की गई सब्सिडी की प्रथा को किसी भी सरकार ने रोकने की हिम्मत नहीं की, बल्कि हर सरकार ने इसमें बढ़ोतरी ही की है। पंजाब में चुनाव से पहले एक बार फिर मतदाताओं को रिझाने के लिए मुफ्त की रेवड़ियां देने की घोषणाएं होने लगी हैं। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने दो दिन पहले सत्ता में आने पर बुढ़ापा पेंशन 1,500 से बढ़ाकर 3,100 रुपये करने और शगुन योजना के तहत एक लाख रुपये देने की घोषणा की है। इसी तरह आम आदमी पार्टी ने अपनी सरकार के कार्यकाल के अंतिम साल में महिलाओं को 1000-1000 रुपये देने की तैयारी की हुई है, जिसका मार्च महीने में पेश होने वाले बजट में प्रावधान किया जा सकता है। कहां-कहां कितनी खर्च हो रही है सब्सिडी 22,000 करोड़ रुपये इस समय किसानों, घरेलू और इंडस्ट्री सेक्टर को निशुल्क व सस्ती बिजली देने पर खर्च हो रहे। 4,800 करोड़ रुपये बुढ़ापा पेंशन आदि के लिए दी जा रही है। 750 करोड़ रुपये महिलाओं को बसों में निशुल्क सफर के तहत दिया जा रहा है। इसी तरह जो लोग मुफ्ट राशन जिसके तहत गेहूं और चावल दिए जा रहे हैं में नहीं आते उन्हें सरकार अपनी ओर से राशन मुहैया करवा रही है। इस पर सब्सिडी दी जा रही है। पंजाब में 1997 से शुरू हुआ सब्सिडी कल्चर पंजाब में 1997 में शुरू हुआ सब्सिडी कल्चर आज तक चलता जा रहा है। हर साल इसमें कोई कमी होने के बजाय बढ़ोतरी ही हो रही है और आज हालात यह है कि पंजाब की आमदनी के प्रमुख स्रोत जीएसटी से सरकार को केवल 24 से 25 हजार करोड़ ही मिल पा रहे हैं, जबकि सब्सिडी पर खर्च की बात करें तो यह लगभग 28 हजार करोड़ रुपये है। यह भी उस समय है जब मौजूदा सरकार ने अभी महिलाओं को एक-एक हजार रुपये देना शुरू नहीं किया है। अगर यह योजना शुरू होती है तो राज्य के खजाने पर 12 हजार करोड़ रुपये का और बोझ पड़ेगा। (राज्य में एक करोड़ वोटर महिलाएं हैं)। सब्सिडी के इस बोझ के कारण जहां पंजाब में कैपिटल एक्सपेंडिचर नहीं हो रहा है, वहीं विभागों में कर्मचारियों को भर्ती करने में दिक्कत आ रही है, क्योंकि उन पर खर्च होने वाले वेतन का बोझ पहले से ही काफी ज्यादा है।

बिलासपुर एयरपोर्ट पर पहली बार नाइट लैंडिग की सफल टेस्टिंग

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बिलासा एयरपोर्ट के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. पहली बार एयरपोर्ट पर नाइट लैंडिंग का सफल परीक्षण किया गया. छत्तीसगढ़ शासन के स्टेट प्लेन से लैंडिंग की टेस्टिंग की गई, जिसमें रनवे लाइटिंग सिस्टम, एप्रोच लाइट्स और एयर ट्रैफिक कॉर्डिनेशन सहित सभी तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की गई. ट्रायल के दौरान सभी व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं, जिससे भविष्य में नियमित नाइट ऑपरेशन का रास्ता साफ हो गया है. अब किसी भी मौसम और कम विजिबिलिटी की स्थिति में बिलासा एयरपोर्ट पर फ्लाइट ऑपरेशन संभव हो सकेंगे. नाइट लैंडिंग सुविधा शुरू होने से यात्रियों को अधिक फ्लाइट विकल्प मिलेंगे और क्षेत्र की कनेक्टिविटी में भी विस्तार होगा. ट्रायल ऑपरेशन के दौरान एयरपोर्ट डायरेक्टर, क्षेत्रीय निदेशक नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो, रायपुर सहित एयरपोर्ट के अन्य अधिकारी और तकनीकी टीम मौजूद रही. अब जल्द ही फ्लाइट्स की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. हाईकोर्ट ने दस्तावाजों के साथ मांगी जानकारी बिलासा एयरपोर्ट में हवाई सेवा से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई हुई. दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि एयरपोर्ट में नाइट लैंडिंग सहित जो भी कार्य शुरू किए जा रहे हैं, उनकी जानकारी दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करें. कोर्ट ने अगली सुनवाई 25 फरवरी को रखी है. बता दें कि हाल ही में एयरपोर्ट को VFR से IFR में अपग्रेड किया गया था, जिसका आज सफल ट्रायल किया गया. नाइट लैंडिंग की सफलता से क्षेत्र में हवाई सेवाओं के विस्तार और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद और मजबूत हो गई है.

मौसम चेतावनी: मध्य प्रदेश में 4 दिन तक आंधी और बारिश, भोपाल‑जबलपुर में सुबह होगी बरसात

भोपाल   मध्यप्रदेश में मौसम इस समय 'दोहरी रंगत' दिखा रहा है। एक तरफ जहां गुलाबी ठंड की विदाई का समय है, वहीं दूसरी ओर आसमान से बरसती आफत ने प्रदेशवासियों को चिंता में डाल दिया है। नए वेदर सिस्टम के सक्रिय होने से शनिवार, 21 फरवरी 2026 को प्रदेश के 28 जिलों में बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। गुरुवार और शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश ने उज्जैन और भोपाल संभाग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, जिससे रबी की फसलों को बड़ा नुकसान होने का खतरा पैदा हो गया है। प्रदेश के आधे हिस्से में पानी-पानी मौसम विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान भोपाल और उज्जैन समेत प्रदेश के 17 जिलों में बारिश दर्ज की गई। उज्जैन में सर्वाधिक 1 इंच के आसपास बारिश हुई, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। ठंड के आखिरी दौर में हर हफ्ते बदलता यह मौसम का मिजाज विशेषज्ञों को भी हैरान कर रहा है। शुक्रवार को बारिश का दौर जारी रहा और शनिवार को भी इसके थमने के आसार नहीं हैं। 17 जिलों में जमकर बारिश बता दें कि उज्जैन सहित शाजापुर, देवास, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, झाबुआ, इंदौर, भोपाल, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, रायसेन, सागर, छतरपुर, पन्ना और सतना जिलों में अलग-अलग स्थानों पर बारिश हुई है। प्रदेश में कहीं से ओले की सूचना सामने नहीं आई है। वहीं बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, कई जिलों में ठंड बढ़ गई है। बारिश-आंधी और बिजली का अलर्ट मप्र मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के बड़े हिस्से में तेज हवाओं के साथ बारिश का 'यलो अलर्ट' जारी किया है। जिन शहरों में सावधानी बरतने को कहा गया है, उनमें राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर और नर्मदापुरम संभाग के जिले शामिल हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि बारिश के साथ-साथ कई इलाकों में 'गाज' (आकाशीय बिजली) गिरने की भी संभावना है, इसलिए लोग पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में जाने से बचें। फसलों को नुकसान की आशंका तेज हवाओं का असर खासतौर पर रतलाम, शाजापुर और उज्जैन में ज्यादा देखा गया। यहां गेहूं की खड़ी फसलें झुक गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फसलें लंबे समय तक जमीन पर पड़ी रहीं तो दानों की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। पिछले तीन दिनों में करीब 25 जिलों में आंधी के कारण फसल नुकसान की संभावना जताई जा रही है। स्थिति को देखते हुए सरकार ने प्रभावित इलाकों में सर्वे शुरू करा दिया है। राजस्व विभाग की टीमें खेतों में पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन कर रही हैं। अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम 22 फरवरी को बारिश की कोई चेतावनी नहीं है, हालांकि आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। 23 फरवरी को दक्षिणी हिस्सों में सक्रिय सिस्टम के प्रभाव से बारिश होने की संभावना जताई गई है। 24 फरवरी को दक्षिण-पूर्वी जिलों में मौसम का असर अधिक देखने को मिल सकता है। इंदौर में तापमान में खासी गिरावट इंदौर में शुक्रवार को मौसम अचानक बदल गया। दिन का अधिकतम तापमान चार डिग्री गिरकर 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रात के तापमान में भी एक डिग्री की कमी आई और पारा 15 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। देर रात शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हुई। शनिवार सुबह हल्की ठंड महसूस की गई, हालांकि दिन में धूप निकलने से मौसम सुहावना बना रहा। फरवरी में लगातार बदल रहा मौसम इस महीने की शुरुआत से ही मौसम अस्थिर बना हुआ है। फरवरी के पहले पखवाड़े में दो बार आंधी, बारिश और ओले गिर चुके हैं, जिससे फसलों को नुकसान हुआ था। इसके बाद प्रशासन ने सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार बारिश का सिलसिला शुरू हुआ, जिसका असर 19 और 20 फरवरी को भी रहा। अब 23 और 24 फरवरी को फिर से बारिश की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह फरवरी में चौथी बार मौसम परिवर्तन होगा। कल से वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर 22 फरवरी को एक पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय होगा। इसका प्रभाव अगले दिन से मध्य प्रदेश में दिखाई दे सकता है। 23 फरवरी को नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट में वर्षा की संभावना है। 24 फरवरी को सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में बारिश हो सकती है। तापमान का हाल बारिश के बावजूद रात के तापमान में बहुत बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है, लेकिन हवाओं ने सिहरन बढ़ा दी है। कल्याणपुर 10.4°C के साथ सबसे ठंडा इलाका रहा, वहीं शहडोल और उमरिया में पारा 10 से 12°C के बीच बना हुआ है। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें इस बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। कई जिलों से खबरें आ रही हैं कि खेतों में खड़ी गेंहू और चने की फसलें तेज हवा के कारण जमीन पर बिछ गई हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जलभराव और नमी के कारण दानों की गुणवत्ता खराब हो सकती है और पैदावार में गिरावट आने की पूरी आशंका है। हालांकि, राहत की बात यह है कि फिलहाल बड़े स्तर पर ओलावृष्टि की सूचना कहीं से नहीं मिली है।

भिंड सड़क हादसा: बस-वन टक्कर, 5 मृतक और 7 घायल, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

भिंड  मध्य प्रदेश के भिंड में शुक्रवार देर रात बस और वैन आमने-सामने भिड़ गए। हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। टक्कर इतनी भीषण थी कि वैन पूरी तरह से टूट गई। उसमें सवार लोग अंदर ही फंस गए। हादसा गोहद चौराहा थाना अंतर्गत छींमका गांव के पास नेशनल हाईवे-719 पर रात 2.30 बजे हुआ। गोहद चौराहा थाना प्रभारी मनीष धाकड़ के अनुसार, ईको और वैन ग्वालियर से सवारियों को लेकर भिंड की ओर आ रहा था, जबकि बस भिंड से ग्वालियर की ओर जा रही थी। चार लोगों की मौत हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।वहीं घायलों को एंबुलेंस से ग्वालियर रेफर किया गया। फिलहाल, घायलों का ग्वालियर में इलाज जारी है।टीआई ने बताया कि अभी दो मृतकों की पहचान हुई है।इनके नाम अतुल शिवहरे निवासी फूप और जगदीश भदौरिया निवासी स्योड़ा गांव अकोड़ा है। बाकी के शिनाख्ती के प्रयास किए जा रहे हैं।पुलिस परिजनों का पता लगाने के लिए दस्तावेजों और वाहन नंबर के आधार पर जांच कर रही है।जिस जगह हादसा हुआ, वहां अंधा मोड़ है।हो सकता है दोनों वाहन तेज रफ्तार में हों।हादसे की जांच जारी है।दोनों वाहनों को सड़क से हटाकर यातायात बहाल कर दिया गया है।इस दर्दनाक घटना में केतु पुत्र संतोष, संतोष पुत्र कल्याण, प्रदीप पुत्र राम प्रकाश, मेंवाराम पुत्र बाबूराम, राम लखन पुत्र भागीरथ, मीरा पुत्र सुरेश, सुखबीर सिंह पुत्र श्री गंभीर रूप से घायल हो गए है.. वही पांच मार्को के शव पोस्टमार्टम भिजवा दिए है। घायलों को रेफर किया भिंड के एसपी असित यादव ने बताया कि घायलों को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से गंभीर मामलों को ग्वालियर रेफर किया गया। हालांकि, तमाम विरोध औ प्रदर्शन के बावजूद हाईवे पर दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी है। यातायात सुरक्षा पर गंभीर सवाल है कि बीते सालों में तमाम कोशिशों के बाद भी यहां कोई सुधार नहीं हो पाया है। जांच में पता चला कि बस की स्पीड ज्यादा थी और संभवतः चालक की लापरवाही से यह हादसा हुआ। परिवारों का विलाप दिल दहला देने वाला है। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए गोहद अस्पताल भेजा।यह घटना न केवल एक हादसा है, बल्कि सड़क सुरक्षा के अभाव को उजागर करती है, जहां तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग आम समस्या है।