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मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले: अधोसंरचना विस्तार से मप्र में स्वास्थ्य संकेतकों में तेज सुधार

अधोसंरचना विस्तार के साथ बेहतर स्वास्थ्य संकेतकों की ओर तेज गति से अग्रसर हो रहा है म.प्र. : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सुदृढ़ हो रही हैं मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएँ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आम नागरिकों के बेहतर स्वास्थ्य के लिये मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सशक्त किया जा रहा है। समन्वित प्रयासों से स्वास्थ्य अधोसंरचना का व्यापक विस्तार हुआ है और आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। मेडिकल शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं, मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों में उल्लेखनीय प्रगति के साथ मध्यप्रदेश स्वास्थ्य संकेतकों में निरंतर सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मातृ-शिशु स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) 173 से घटकर 142 तथा शिशु मृत्यु दर (IMR) 41 से घटकर 37 हुई है। जननी सुरक्षा योजना एवं मुख्यमंत्री प्रसूति सहायता योजना के अंतर्गत लाखों लाभार्थियों को हजारों करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। नवजात एवं कुपोषण प्रबंधन में एसएनसीयू एवं एनआरसी की सफल डिस्चार्ज दरों में भी वृद्धि हुई है। जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष 5 प्रदर्शनकारी राज्यों में शामिल हुआ है। सिकल सेल मिशन के अंतर्गत व्यापक स्क्रीनिंग एवं उपचार सुविधाएँ विकसित की गई हैं। आयुष्मान भारत योजना में 4.43 करोड़ कार्ड तैयार कर प्रदेश के नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की गई है। योजनांतर्गत पात्र परिवारों को 5 लाख रूपये तक नि:शुल्क उपचार दिया जा रहा है। साथ ही गंभीर रोगियों को आपात स्थिति में त्वरित रूप से उच्च स्तरीय उपचार पीएम  एयर एम्बुलेंस सेवा से मुहैया कराया जा रहा है। अब तक 120 से अधिक नागरिकों को आपात स्थिति में सेवा का लाभ मिला है। मानवीय संवेदनाओं के दृष्टिगत निःशुल्क एवं सम्मानजनक शव-परिवहन सेवा भी प्रारंभ की गई है। राह-वीर योजना में आपात काल में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाकर जान बचाने वाले नागरिक को 25 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। साथ ही, मोबाइल मेडिकल यूनिटों के माध्यम से दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं। मेडिकल हब बनने की ओर अग्रसर है मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2003 तक प्रदेश में सिर्फ 6 मेडिकल कॉलेज थे। वर्तमान में प्रदेश में 33 मेडिकल कॉलेज है। विगत 2 वर्षों में शासकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या 14 से बढ़कर 19 तथा निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 12 से बढ़कर 14 हो गई है। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, इंदौर में 50 एमबीबीएस सीटों के साथ संचालन प्रारंभ किया गया है। आगामी 2 वर्षों में 6 शासकीय एवं पीपीपी मोड पर 13 मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किया जाना योजना में शामिल है। विगत 2 वर्षों में सरकारी एमबीबीएस सीटें 2275 से बढ़कर 2850 हुई हैं, जबकि सरकारी एवं निजी मिलाकर कुल एमबीबीएस सीटें 5550 हो गई हैं। पीजी (एमडी/एमएस) सीटों में भी वृद्धि करते हुए सरकारी पीजी सीटें 1262 से बढ़कर 1468 तथा कुल पीजी सीटें 2862 हो गई हैं। इसके अतिरिक्त 93 सुपर स्पेशियलिटी सीटें उपलब्ध कराई गई हैं। सशक्त स्वास्थ्य सेवाओं से मध्यप्रदेश मेडिकल हब बनने की ओर अग्रसर है। पीपीपी मॉडल पर कटनी, धार, पन्ना और बैतूल में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना प्रगति पर है। एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज, इंदौर में अस्पताल भवन, मिनी ऑडिटोरियम एवं नर्सिंग हॉस्टल जैसे अधोसंरचनात्मक कार्यों हेतु 773.07 करोड़ रूपये के कार्य प्रारंभ किए गए हैं। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज, रीवा के लिए 321.94 करोड़ रूपये तथा सतना मेडिकल कॉलेज से जुड़े नए अस्पताल हेतु 383.22 करोड़ रूपये के कार्य प्रारंभ किए गए हैं। इसके साथ ही 13 नए नर्सिंग कॉलेजों के लिए 192.40 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए हैं। आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के अंतर्गत इंदौर, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में लिनियर एक्स-रेटर मशीनों की स्वीकृति दी गई है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और सागर में सीटी स्कैन एवं एमआरआई मशीनें स्थापित की गई हैं। भोपाल एवं रीवा में कार्डियक कैथ लैब की स्थापना की गई है। इंदौर और जबलपुर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाएँ प्रारंभ हुई हैं, वहीं इंदौर में कार-टी सेल थेरेपी एवं ब्लड कैंसर उपचार हेतु अत्याधुनिक मशीन स्थापित की गई है। मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के तहत मेडिकल कॉलेजों में 354 नए सीनियर रेजिडेंट पद सृजित किए गए हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की व्यापक भर्ती की गई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।  

प्रदेश के 8 नगर निगमों में 972 पीएम ई-बस चलाने की हरी झंडी, शहरों में बढ़ेगा हरित परिवहन

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब पीएम ई-बस सेवा का संचालन नगरीय विकास विभाग की बजाय सुगम परिवहन सेवा के लिए गठित कंपनियां करेंगी। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए प्रदेश में एक राज्य स्तरीय कंपनी के साथ 7 सहायक कंपनियां गठित की गई हैं। केन्द्र से प्रदेश के आठ शहरों के मिली 972 ई-बसों का संचालन भी यही कंपनियां करेंगी। पहले यह काम नगरीय विकास विभाग द्वारा किया जा रहा था। लेकिन सरकार ने तय किया है कि प्रदेश में अंतरशहरी बस सेवा के साथ नगर वाहन सेवा का संचालन भी इन्हीं कंपनियों द्वारा किया जाएगा। 7 सहायक कंपनी बनाई गई प्रदेश में अगस्त 2025 में राज्य स्तरीय मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड कंपनी का पंजीयन हो गया है। मुख्यमंत्री इस राज्य स्तरीय कंपनी के अध्यक्ष हैं। परिवहन मंत्री एवं मुख्य सचिव उपाध्यक्ष हैं। राज्य स्तरीय कंपनी के अधीन 7 सहायक कंपनी बनाई गई हैं। वर्तमान में इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा और ग्वालियर में कार्य कर रही सिटी बस कंपनी के शेयर होल्डिंग में परिवर्तन करते हुए इन सातों शहरों की नवगठित कंपनियां बनाई गई हैं। कंपनियों ने ट्रैफिक सर्वे करते हुए नए सिरे से नए बस रूट निर्धारण और इन रूट्स पर बस फ्रिक्वेंसी के निर्धारण का काम शुरू कर दिया है। भोपाल में 195, इंदौर में चलेंगी 270 बसें केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के 8 नगर निगमों में 972 पीएम ई-बस चलाने की मंजूरी दी है। इसमें सबसे ज्यादा 270 ई-बसें इंदौर को मिली हैं, जबकि राजधानी भोपाल को केवल 195 बसें मिली हैं। जबलपुर में 200, ग्वालियर में 100, उज्जैन में 100, सागर में 32, देवास में 55 और सतना में 20 ई-बसें संचालित की जाएंगी।  इन शहरों में बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन से जुड़े अधोसंरचना के सभी काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में चार्जिंग पाइंट अधोसंरचना निर्माण के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत राशि दी जा रही है। गौरतलब है कि इस परियोजना के अंतर्गत ग्वालियर, इंदौर में कुछ बसें भेजी भी जा चुकी हैं। ई-बसों के संचालन यात्री सुविधाओं के साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।

MP Budget 2026 से जुड़े ईंधन दरों के फैसले, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर होगी बड़ी बात

भोपाल  सोने-चांदी की कीमतों में उतार चढ़ाव से जूझ रही मध्य प्रदेश की जनता के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें टेंशन दे सकती हैं। जी हां सीएम मोहन ने इशारों इशारों में पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ने के संकेत दिए हैं। सीएम मोहन यादव ने कहा है कि सरकार इन कीमतों को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है और धीरे-धीरे राहत देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। भोपाल में केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान सीएम मोहन यादव ने स्वीकार किया कि पेट्रोल-डीजल वाकई एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने इशारों में कहा कि सरकार इस समस्या का समाधान निकालने की तैयारी कर रही है। सीएम ने यह भी जानकारी दी कि मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होगा और 18 फरवरी को MP Budget 2026 पेश किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बजट में जनता को कई क्षेत्रों में रियायत दी जाएगी। इसका सीधा मतलब ये निकाला जा सकता है फरवरी के बाद ही पेट्रोल डीजल की कीमतें में बदलाव आएगा। मध्यप्रदेश में पेट्रोल पर करीब 29 फीसदी और डीजल पर लगभग 19 फीसदी वैट पर राहत मिलने के सवाल पर सीएम ने जवाब कहा—इस पर उन्होंने कहा कि सरकार पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी पर भी काम कर रही है। ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि ईंधन पर निर्भरता कम हो सके। सीएम मोहन यादव ने पेट्रोल-डीजल का सीधे नाम लिए बिना कहा कि बजट के माध्यम से इस चुनौती के निराकरण का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में मध्यप्रदेश शामिल है, लेकिन साथ ही यह राज्य कम बेरोजगारी दर वाले राज्यों में भी अपनी जगह बना चुका है।

याचिकाओं के आधार लिंकिंग सुझाव पर हाईकोर्ट ने लिया कदम, प्रशासनिक कमेटी करेगी विचार

जबलपुर  हाईकोर्ट में दायर होने वाली याचिकाओं को आधार कार्ड से लिंक करने की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि इससे वर्षों से लंबित अनुपयोगी याचिकाओं का जल्द निराकरण होगा और लंबित प्रकरणों की संख्या में कमी आएगी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका पर आदेश सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के सुझाव को अभ्यावेदन मानकर रजिस्ट्रार जनरल प्रशासनिक कमेटी के समक्ष रखा जाए। याचिका जबलपुर निवासी अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा की तरफ से दायर की गई थी। इसमें कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने देश के सभी हाईकोर्ट को डिजिटलीकरण के संबंध में आदेश जारी किए थे। याचिका में यह भी सुझाव दिया गया कि डिजिटलीकरण के दौरान नेशनल प्रिजन पोर्टल से हाईकोर्ट को भी जोड़ा जाए, ताकि जेल में सजा काट रहे कैदियों के रिकॉर्ड देखे जा सकें। याचिका में यह भी बताया गया कि कई मामलों में कैदियों की सजा पूरी होने के बावजूद उनके द्वारा दायर अपील हाईकोर्ट में लंबित रहती है। इसी तरह जिला न्यायालय में आपसी समझौता होने के बावजूद उच्च न्यायालय में दायर याचिका लंबित रहती है। सुझाव में यह भी कहा गया कि डिजिटलीकरण के दौरान याचिकाओं को आधार कार्ड से जोड़ा जाए। कई मामलों में याचिकाकर्ता की मृत्यु होने के बावजूद याचिका लंबित रहती है, जिससे न्यायालय का कीमती समय बर्बाद होता है। इसके अलावा फाइलिंग और आवेदन पेश करने के संबंध में भी कई सुझाव दिए गए थे। युगलपीठ ने याचिका में दिए गए सभी सुझावों को उचित मानते हुए आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान अपना पक्ष स्वयं रखा।

बच्चों के मसीहा बने सीएम योगी: शिक्षा, उपचार और सहायता—सब कुछ तुरंत

लखनऊ नर्सरी में एडमिशन कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंची मासूम बच्ची की जिद हो या चॉकलेट की मांग करने वाले बच्चों की हठ। जिन मुख्यमंत्री का नाम सुनकर अपराधी कांप उठते हैं, बच्चे उन्हीं से मिलकर सहजता से अपनी जिद मनवा लेते हैं। कहते हैं, 'बच्चे मन के सच्चे', वे अपने दिल की भावना को अत्यंत निश्छलता से प्रकट कर देते हैं, यही भाव उस समय सामने आया, जब सीएम योगी आदित्यनाथ को देखते ही एक छोटी बच्ची ने उन्हें सैल्यूट किया। सीएम ने भी मुस्कुराते हुए बच्ची को खूब मन लगाकर पढ़ने के लिए कहा। उनका यह बाल प्रेम उनके कोमल हृदय व सर्वसुलभ होने के साथ-साथ जनसेवा, संवेदना व सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करता है। मुख्यमंत्री के बच्चों से जुड़ाव और उनके साथ भावनात्मक संवाद के कई दृश्य समय-समय पर सामने आते रहते हैं। विगत सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में मां के साथ आई बच्ची अनाबी अली से सीएम का संवाद इन दिनों चर्चा में है। अपने एडमिशन के लिए जिद, फिर एबीसीडी व कविता सुनाकर अनाबी ने सीएम का दिल जीत लिया। मकर संक्रांति पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोरखनाथ मंदिर में एक बच्चे से “और क्या चाहिए” पूछना और उसका मासूम जवाब सुनकर खिलखिलाकर हंसना भी उनके बालप्रेम को प्रकट करता है। बच्चों से अत्यंत आत्मीयता से संवाद और उनके भविष्य को लेकर त्वरित निर्णय मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता को प्रदर्शित करते हैं। बीते दिनों ‘जनता दर्शन’ में दो साल की अनन्या से संवाद भी लोगों के मन को छू गया। इसी तरह 31 दिसंबर को मेजर की बेटी अंजना भट्ट ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपने मकान पर कब्जे की शिकायत की, जिस पर मुख्यमंत्री ने 24 घंटे के भीतर न सिर्फ मकान को कब्जा मुक्त कराया, बल्कि आरोपियों पर एफआईआर व तत्काल गिरफ्तारी भी कराई। यह मामला सीएम की जन समस्याओं के प्रति गंभीरता को प्रकट करते हुए स्पष्ट संदेश देता है कि वे कानून व्यवस्था, बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों का समाधान कराने में तनिक भी विलंब नहीं करते। कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता की कहानी भी इन दिनों हर किसी की जुबां पर है। मुख्यमंत्री से मिलने की उसकी जिद और अकेले पैदल चलकर लखनऊ पहुंचने की जानकारी जब सीएम योगी आदित्यनाथ को मिली तो उन्होंने उसे बुलाकर उसके बनाए चित्रों को स्वीकार किया और उसके शिक्षित-सुरक्षित भविष्य का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री के अपनत्व से भाव-विभोर खुशी की ‘अनकही भावनाओं’ ने 25 करोड़ प्रदेशवासियों के बीच मुख्यमंत्री की ‘प्रदेश ही परिवार’ धारणा की विश्वसनीय तस्वीर पेश की। ‘जनता दर्शन’ के जरिए लखनऊ की अनाबी अली, कानपुर की मायरा, गोरखपुर की पंखुड़ी और मुरादाबाद की वाची का स्कूल में एडमिशन कराना भी सीएम योगी की संवेदनशीलता का हिस्सा है। कानपुर की नन्ही मायरा ने कहा था कि मैं बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती हूं। इस पर सीएम ने तत्काल उसका प्रवेश कराने का निर्देश दिया। वाची ने कहा कि मैं पढ़ना चाहती हूं, सीएम ने उसका भी प्रवेश कराया। गोरखपुर की पंखुड़ी की फीस माफ कराने के साथ ही उसे पुनः विद्यालय भेजना भी सुनिश्चित कराया। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में आए बच्चे सीधे सीएम योगी के पास पहुंच गए। सभी ने सीएम के साथ फोटो खिंचवाई, उनसे बातचीत की। सीएम ने उन्हें दुलारा और एक नन्ही बच्ची को गोद में लेकर अपना वात्सल्य भाव प्रकट किया। बीते सितंबर में ‘जनता दर्शन’ में कानपुर की रायपुरवा निवासी एक वृद्ध मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे का दर्द लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंची थीं। उनकी तकलीफ देखकर सीएम द्रवित हो गए और कैंसर पीड़ित बेटे को एंबुलेंस से सीधे कल्याण सिंह सुपर स्पेशियिलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भिजवाकर उसका इलाज प्रारंभ कराया। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाल प्रेम, जनसेवा, संवेदना व सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

भरे सदन BJP MLA को फिर ‘अमर्यादित’ बोल गए शांति धारीवाल

जयपुर. राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र मंगलवार को उस वक्त चर्चा का केंद्र बन गया, जब कोटा उत्तर से विधायक शांति धारीवाल ने राज्यपाल के अभिभाषण पर वाद-विवाद के दौरान शिष्टाचार की सीमा लांघ दी। सदन की कार्यवाही के दौरान धारीवाल ने मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग को लेकर एक आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग किया, जिसे लेकर सत्तापक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। "आधी बात समझ आती है, आधी नहीं…" विधानसभा में जब राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस चल रही थी, तब आसन पर सभापति संदीप शर्मा मौजूद थे। इसी दौरान शांति धारीवाल और मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग के बीच तीखी नोकझोंक हुई। अपनी बात रखते हुए धारीवाल अचानक संयम खो बैठे और जोगेश्वर गर्ग को संबोधित करते हुए बोले— "आपकी बात आधी तो समझ में आती है यार और आधी नहीं… (अमर्यादित शब्द)!" जोगेश्वर गर्ग ने जताई आपत्ति धारीवाल की जुबान से अपशब्द निकलते ही सत्तापक्ष के सदस्यों ने आपत्ति जताई। मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने तुरंत खड़े होकर इस पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने तंज कसते हुए सभापति से कहा, "इनकी जुबान से तो 'फूल' झड़ रहे थे, उस अमर्यादित शब्द को सदन की कार्यवाही से तुरंत हटाया जाए।" इस घटना के बाद सदन में काफी देर तक शोर-शराबा होता रहा और विपक्षी खेमे को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा। 'मर्दों का प्रदेश' से 'अमर्यादित शब्द' तक: विवादों का पुराना नाता सदन में इस ताज़ा वाक्ये के बाद शांति धारीवाल के पुराने विवादित बयानों की चर्चा फिर से छिड़ गई है। पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान उन्होंने बलात्कार जैसे संवेदनशील विषय पर जवाब देते हुए कहा था कि "राजस्थान मर्दों का प्रदेश है", जिस पर भारी बवाल हुआ था। एक बार फिर उनकी भाषा शैली ने सदन की गरिमा पर सवालिया निशान लगा दिया है। मदन दिलावर और स्किल सेंटर पर 'चौतरफा' हमला विवादित टिप्पणी के बावजूद धारीवाल ने भाजपा सरकार और विशेषकर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर तीखे हमले जारी रखे। उन्होंने शिक्षा मंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। धारीवाल ने दिलावर के 'डीलक्स स्कूल भवनों' के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। वहीं महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का नाम बदलने पर कहा कि "उस महात्मा का नाम दुनिया के दिल से नहीं निकाल सकते।" धारीवाल ने CAG की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं को रेवड़ियों की तरह स्किल सेंटर बांट दिए और भारी घोटाला किया। कांग्रेस के 'कफन' वाली सहायता पर गरमाई बहस शांति धारीवाल ने कांग्रेस सरकार की योजनाओं का गुणगान करते हुए भाजपा सरकार की घेराबंदी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में संवेदनशीलता इस कदर थी कि अस्पताल में मरीज की मौत होने पर सरकार ढाई हजार रुपये की सहायता और कफन तक की व्यवस्था करती थी। उनके इस बयान पर सत्तापक्ष ने पलटवार करते हुए इसे केवल लोकलुभावन और धरातल से दूर बताया।

पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग की हुई समीक्षा

भोपाल. पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार ने बुधवार को वल्लभ भवन में विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति 15 दिनों में शत-प्रतिशत वितरित करना सुनिश्चित किया जाए। प्रमुख सचिव डॉ. कुमार ने बैठक में अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित प्रकरण तत्काल निराकृत कर नियुक्ति की प्रक्रिया पूर्ण करने के अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने विधानसभा के प्रश्नों और कैबिनेट संक्षेपिका को लेकर भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में अपर सचिव श्री अनुराग चौधरी, आयुक्‍त श्री सौरभ कुमार सुमन समेत वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।  

धनबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बोर्ड परीक्षा शुरू

धनबाद. झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र धनबाद में बुधवार 4 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो गई हैं. परीक्षा को शांतिपूर्ण और नकलमुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पूरी तरह सतर्क नजर आया. धनबाद के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी भी तरह का व्यवधान परीक्षा प्रक्रिया में न आए. परीक्षा केंद्रों के आसपास निषेध धारा लागू बोर्ड परीक्षा को लेकर सभी परीक्षा केंद्रों के चारों ओर 100 मीटर की परिधि में निषेध धारा लागू कर दी गई है. इस दौरान अनावश्यक भीड़, फोटो स्टेट मशीन, मोबाइल फोन और किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है. पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ मजिस्ट्रेट भी केंद्रों पर मौजूद रहे, ताकि नियमों का कड़ाई से पालन हो सके. शहीद शक्ति नाथ महतो इंटर कॉलेज में विशेष व्यवस्था धनबाद के शहीद शक्ति नाथ महतो इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर अलग ही दृश्य देखने को मिला. यहां परीक्षा देने पहुंचे छात्र-छात्राओं का गुलदस्ता देकर स्वागत किया गया. कॉलेज प्रबंधन की इस पहल से परीक्षार्थियों का मनोबल बढ़ा और वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा हॉल में प्रवेश करते नजर आए. सघन जांच के बाद ही मिला प्रवेश परीक्षा केंद्रों में प्रवेश से पहले छात्र-छात्राओं की बारी-बारी से सघन जांच की गई. इस दौरान बैग, घड़ी, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और चिट-पुर्जा की गहन तलाशी ली गई. जांच के बाद ही परीक्षार्थियों को स्कूल कैंपस में प्रवेश की अनुमति दी गई. महिला परीक्षार्थियों की जांच के लिए महिला कर्मियों की भी तैनाती की गई थी. सैकड़ों छात्र-छात्राएं परीक्षा में हुए शामिल बोर्ड परीक्षा के पहले दिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं विभिन्न केंद्रों पर परीक्षा में शामिल हुए. प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के समन्वय से परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने की पूरी कोशिश की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा अवधि के दौरान सुरक्षा और निगरानी इसी तरह सख्त बनी रहेगी.

हर खेत पर जाकर फसल नुकसान का शीघ्र सर्वे कराने के दिए निर्देश

भोपाल. उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार को मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कित्तुखेड़ी, गोपालपुरा, लोहाखेड़ा, झारड़ा एवं अड़मालिया में ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का निरीक्षण किया और किसानों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार पूरी संवेदना के साथ किसानों के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में फसल नुकसान का शीघ्र सर्वे कराकर राहत प्रदान की जाएगी। निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने किसानों से कहा कि सरकार सभी प्रभावित क्षेत्रों के हर खेत पर जाकर सर्वे किया जाएगा, इसके लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए। उन्होंने कहा कि अधिकारी खेतों तक पहुँच कर वास्तविक स्थिति का आंकलन कर रहे हैं अफीम खेती के संबंध में नारकोटिस विभाग भी मौके पर जाकर खेतों का निरीक्षण करेंगे। साथ ही केन्द्र सरकार से चर्चा कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। फसल बीमा के मामले में भी किसानों को फसल का पूरा लाभ प्रदान किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में सरकार किसानों की हर चिंता और दुख में इनके साथ है। निरीक्षण दौरान जिला योजना समिति के सदस्य श्री राजेश दीक्षित सहित अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।  

भोपाल में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान–दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के मध्य समझौता ज्ञापन

भोपाल. भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System – IKS) के संरक्षण, संवर्धन एवं शैक्षणिक अनुसंधान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल तथा दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान, भोपाल के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) संपन्न हुआ। उक्त समझौता ज्ञापन पर दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के निदेशक श्री मुकेश कुमार मिश्रा तथा उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल के संचालक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल द्वारा विधिवत हस्ताक्षर किए गए। इस एमओयू के माध्यम से दोनों संस्थानों के मध्य भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित अनुसंधान, अकादमिक गतिविधियों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, व्याख्यानों एवं अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों के संचालन हेतु परस्पर सहयोग स्थापित किया जाएगा। समझौता ज्ञापन के अंतर्गत भारतीय दर्शन, संस्कृति, साहित्य, परंपरागत विज्ञान एवं ज्ञान-विरासत से जुड़े विषयों पर अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को भारतीय ज्ञान प्रणाली के विविध आयामों से परिचित कराने हेतु संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा को उच्च शिक्षा में समाहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल से प्रोफेसर एवं प्रशासनिक अधिकारी डॉ. महेंद्र सिंघई, भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) प्रभारी एवं ग्रंथपाल डॉ. प्रज्ञा नायक, तथा सहायक प्राध्यापक अमर प्रकाश पांडेय उपस्थित रहे। वहीं दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान, भोपाल की सह सचिव डॉ. अल्पना त्रिवेदी एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रभाकर पांडेय की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान सभी गणमान्य अतिथियों ने इस सहयोग को भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं अकादमिक उन्नयन की दिशा में मील का पत्थर बताया तथा यह आशा व्यक्त की कि यह समझौता भविष्य में उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान प्रदान करेगा।