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पीएम मोदी के दौरे के बाद पंजाब से भाजपा को मिला शुभ संकेत, क्या सिद्धू परिवार लौटेगा?

चंडीगढ़  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के अगले ही दिन प्रदेश से शुभ संदेश आया है. इसके साथ ही कयासबाजी का दौर भी शुरू हो गया है कि क्‍या सिद्धू परिवार की घर वापसी मतलब भाजपा में वापसी होने जा रही है. पीएम मोदी के पंजाब विजिट से एक दिन पहले कांग्रेस से नाता तोड़ने वालीं नवजोत कौर सिद्धू ने प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए उनका दिल से स्‍वागत किया है. उन्‍होंने सोशल मीडिया पोस्‍ट में लिखा कि पंजाब की जनता भोलीभाली है, जिन्‍हें हमारी सरकार अपने हितों और स्‍वार्थ के चलते हमेशा मूर्ख बनाती रहती है. नवजोत कौर सिद्धू ने आगे लिखा – मोदीजी पंजाब में आपका दिल से स्‍वागत है. नवजोत कौर के इस सोशल मीडिया पोस्‍ट से प्रदेश की सियासत गर्मा गई है. नवजोत कौर सिद्धू ने एक्‍स पर पोस्‍ट शेयर कर कहा, ‘जब हमारे देश के प्रमुख हमारे राज्य को कुछ देने आते हैं, तो सभी राजनीतिक चोर उनके घर वापसी कार्यक्रम में बाधा डालने के लिए एक मंच पर क्यों इकट्ठा हो जाते हैं? हमें यह स्पष्ट समझना चाहिए कि उन्होंने वह पद और शक्ति अपने परिश्रम से अर्जित की है, ताकि वे हमारे राज्य को कुछ महान दे सकें. आभारी बनें. पंजाब के लोग भोले-भाले हैं और स्वार्थी सरकारें अपने हितों के चलते उन्हें हमेशा धोखा देती रही हैं. उन्होंने अपने परिवारों के लिए भारी संपत्ति बना ली है. पंजाब के लिए कुछ करना है नहीं. मोदी जी का प्यार भरे दिल से स्वागत है, यही पंजाबी लोगों की सच्ची प्रकृति है सच्‍चा स्‍वभाव है.’ बीजेपी या AAP ने संपर्क तो नहीं किया? नवजोत कौर सिद्धू ने एक अन्‍य पोस्‍ट में लिखा, ‘मैं संभवतः उन बहुत कम लोगों में से हूं, जिन्होंने किसी भी राजनीतिक कारण से न तो बीजेपी न आप और न ही किसी अन्य पार्टी के किसी नेता से मुलाकात की है और न ही किसी पार्टी ने मुझसे संपर्क किया है. मैं अपनी व्यक्तिगत दृष्टि और चेतना से बात कर रही हूं, क्योंकि मैं केवल वाहेगुरु जी के प्रति उत्तरदायी हूं और किसी और के प्रति नहीं. मैं सिर्फ पंजाब के लोगों की सेवा करना चाहती हूं, जिसे मैं एक एनजीओ बनाकर कर सकती हूं और गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाओं को समझकर तथा जीवित विकसित संतों के सान्निध्य में रहकर निस्वार्थ सेवा और आत्मा के विकास के बारे में थोड़ा सीखते हुए अपनी आत्मा के उत्कर्ष के लिए कार्य करना चाहती हूं. हाल ही में भगवद गीता के उपदेशों के साथ तीन दिन का अद्भुत और आनंदमय समय बिताया और प्रेमानंद महाराज जी जैसे प्रबुद्ध संतों का आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला, जिन्होंने अनेक आत्माओं को उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ाया है.’ सीएम भगवंत मान से सीधा सवाल नवजोत कौर सिद्धू ने एक और पोस्‍ट में लिखा, ‘पंजाब के मुख्यमंत्री जी, जब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब उन्होंने तीन बार स्पष्ट बहुमत से जीत हासिल की, क्योंकि वे गुजरात के हर नागरिक के प्रति जवाबदेह रहे और सभी विभागों के उपयोग प्रमाणपत्र (utilisation certificates) जमा करते थे, क्योंकि तभी केंद्र से जितनी राशि चाहिए उतनी मिल सकती है. आप पंजाब के लोगों के पैसे का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि आदि के लिए करने के बजाय अपने फायदे के लिए मुफ्त योजनाओं में नहीं कर सकते. मुफ्त बिजली देने के बजाय आपने चंडीगढ़ और कई अन्य राज्यों की तरह सोलर पावर को अनिवार्य क्यों नहीं किया? आपकी खनन और शराब नीति कहां है? यह तो बड़े लोगों के साथ साझेदारी में सिर्फ आपकी जेब भरने के लिए है. पहले अकाली दल और कांग्रेस के साथ यह 75:25 था और अब आप और कांग्रेस/अकाली के साथ 80:20 है. हर विभाग में भ्रष्टाचार फैला हुआ है और आपके शासन में यह सबसे अधिक है, क्योंकि आप अपने निजी हितों के लिए खरीदे हुए मीडिया चैनलों की एक छोटी टीम के साथ अकेले काम कर रहे हैं, जो आपकी महिमा गान में लगे हैं. आपने आपके खिलाफ बोलने वालों की आवाज दबा दी है. हर व्यक्ति का एक समय होता है और वाहेगुरु जी ही सभी के वास्तविक न्यायाधीश हैं. आप उनसे कुछ भी नहीं छुपा सकते.’

चिकन खाने से पहले सोचें, भागलपुर में बर्ड फ्लू के मामले सामने आए

 पटना भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल परिसर स्थित मैदान में बड़ी संख्या में मृत मिले कौओं की जांच रिपोर्ट में बर्ड फ्लू वायरस की पुष्टि होते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. जिला पशुपालन पदाधिकारी अंजली कुमारी ने आधिकारिक रूप से पुष्टि करते हुए बताया कि मृत कौओं का सैंपल जांच के लिए पटना और भोपाल लैब भेजा गया था, जहां से आई रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है. रिपोर्ट सामने आते ही जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है और प्रभावित क्षेत्र के चारों ओर 10 किलोमीटर के दायरे में सेनेटाइजेशन अभियान शुरू कर दिया गया है. वहीं इलाके के सभी पोल्ट्री फार्म से भी सैंपल इकट्ठा किया जा रहा है. 150 से अधिक कौओं की मौत से फैली दहशत बता दें कि 11 जनवरी की सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने एक ही स्थान पर पेड़ के नीचे 150 से अधिक मृत कौवे पड़े देखे थे. कई कौवे तड़पती हालत में भी मिले थे. घटना के बाद स्थानीय लोगों में बर्ड फ्लू की आशंका को लेकर दहशत फैल गई थी. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी मृत पक्षियों को सुरक्षित तरीके से हटाया गया. सैंपल जांच के बाद हुई फ्लू की पुष्टि वन विभाग और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर सैंपल कलेक्ट किए. मृत कौओं का सीरम जांच के लिए उच्च स्तरीय लैब भेजा गया था. भोपाल से आई रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि होते ही प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो गई. जिला प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं. प्रभावित इलाकों में कराया जा रहा सैनिटाइजेशन   डॉक्टर अंजली ने कहा कि 11 जनवरी को कौओं की मौत हुई थी. उस समय बहुत ठंड थी. ऐसा लगा कि ये ठंड के कारण मरे हैं. लेकिन इसका सैंपल हमने बाहर भेजा, जिसके बाद सरकार से इसकी पुष्टि हुई कि कौओं की मौत बर्ड फ्लू के कारण ही हुई है. फिलहाल हम लोग प्रभावित इलाकों में सैनिटाइजेशन करवा रहे हैं. हमने 11 तारीख को भी सैनिटाइज कराया था. इसके अलावा इस इलाके में जितने भी पोल्ट्री फार्म हैं, उनका जीरो सर्विलेंस करके दोबारा भेजा जाएगा.

उत्सवधर्मिता, टेम्पल टूरिज्म और कस्बा आधारित अर्थव्यवस्था बनेगी भारत के विकास की नई ताकत

महाकुंभ से मिली दिशा, बजट में सनातन अर्थशास्त्र को मिली नीतिगत पहचान उत्सवधर्मिता, टेम्पल टूरिज्म और कस्बा आधारित अर्थव्यवस्था बनेगी भारत के विकास की नई ताकत महाकुंभ के अनुभव से प्रेरित नीतियों के चलते टियर-2–3 शहरों और मंदिर नगरों पर बढ़ा फोकस महाकुंभ, काशी और अयोध्या सर्किट से मिली सीख, बजट में दिखा नया विकास दृष्टिकोण आस्था आधारित अर्थव्यवस्था को मुख्यधारा में लाने की केंद्र सरकार ने की पहल लखनऊ  महाकुंभ से सामने आए बड़े आर्थिक परिणामों और इसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान ने केंद्र सरकार को भारत की पारंपरिक आर्थिक संरचना की ओर नए सिरे से देखने को प्रेरित किया है। केंद्रीय बजट 2026–27 में पहली बार भारत के सनातन आर्थिक स्वरूप- उत्सवधर्मिता, टेम्पल टूरिज्म और कस्बा आधारित अर्थव्यवस्था को नीति स्तर पर पहचान मिलती दिख रही है। यह संकेत है कि भारत की विकास यात्रा अब केवल उद्योग और महानगरों तक सीमित न रहकर अपनी सांस्कृतिक और सभ्यतागत जड़ों से जुड़ते हुए आगे बढ़ेगी। आस्था के साथ अर्थव्यवस्था का बड़ा मॉडल है महाकुंभ यूपीडीएफ के अध्यक्ष पंकज जायसवाल के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सफलतापूर्वक आयोजित महाकुंभ ने यह स्पष्ट कर दिया कि आस्था आधारित आयोजन केवल धार्मिक नहीं होते, बल्कि बड़े आर्थिक उत्प्रेरक भी होते हैं। महाकुंभ के दौरान प्रयागराज, काशी और अयोध्या के सर्किट में होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, अस्थायी और स्थायी रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएं और लॉजिस्टिक्स सब मिलकर एक मजबूत आर्थिक इकोसिस्टम के रूप में सामने आए। इसी अनुभव ने नीति निर्माताओं को यह समझने में मदद की कि आस्था आधारित आयोजन अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर तक गति दे सकते हैं। सिटी इकोनॉमिक रीजन से कस्बों को नई ताकत बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों को सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) के रूप में विकसित करने की घोषणा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘विकसित टाउन’ की सोच का विस्तार माना जा रहा है। यह योजना उन कस्बों को फिर से मजबूत करेगी, जो सदियों तक भारतीय अर्थव्यवस्था की सप्लाई चेन की रीढ़ रहे हैं। कस्बों के मजबूत होने से उनके आसपास के गांवों के किसान, कारीगर और व्यापारी सीधे लाभान्वित होंगे। स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा और ये कस्बे बड़े शहरों के लिए फुलफिलमेंट सेंटर के रूप में उभरेंगे। इससे अर्थव्यवस्था की मध्य कड़ी मजबूत होगी और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। उत्तर प्रदेश देश का वह राज्य है जहां सबसे ज्यादा कस्बे और शहरी क्षेत्र हैं। ऐसे में सिटी इकोनॉमिक रीजन योजना का सबसे बड़ा लाभ भी यूपी को मिलने की संभावना है। ‘टेम्पल सिटी’ शब्द का बजट में आना ऐतिहासिक संकेत महाकुंभ से मिले आर्थिक अनुभव के बाद सरकार ने पहली बार बजट भाषण में ‘टेम्पल सिटी’ शब्द का इस्तेमाल किया है। ऐतिहासिक रूप से मंदिरों वाले नगर भारत की अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्र रहे हैं। भारत में सदियों से पर्यटन का मूल आधार धार्मिक रहा है, जहां यात्रा के साथ व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक जुड़ाव स्वाभाविक रूप से होता रहा है। प्रयागराज-काशी-अयोध्या सर्किट ने सरकार को यह स्पष्ट संकेत दिया कि यदि देशभर के मंदिर वाले नगरों को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाई जाएं, तो हजारों कस्बों और छोटे शहरों का समग्र विकास संभव है। सनातन अर्थशास्त्र से यूपी को सबसे ज्यादा फायदा बजट में सनातन अर्थशास्त्र की दिशा में उठाए गए कदमों से उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। मथुरा, काशी, अयोध्या, प्रयागराज, नैमिषारण्य, गोरखनाथ, हस्तिनापुर, सारनाथ और कुशीनगर जैसे सनातन और बौद्ध परंपरा के प्रमुख केंद्र यूपी में ही स्थित हैं। इन क्षेत्रों में पर्यटन, सेवा क्षेत्र, स्थानीय उत्पाद और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी। इनलैंड वाटरवे से नदी आधारित अर्थव्यवस्था को नई जान बजट में वाराणसी से पटना के बीच इनलैंड वाटरवे को और विकसित करने की घोषणा से यूपी में लॉजिस्टिक्स व्यवस्था सस्ती और प्रभावी होगी। यह पहल नदी आधारित अर्थव्यवस्था को फिर से जीवंत करेगी। गंगा, यमुना, घाघरा, राप्ती समेत कई नदियों का सबसे बड़ा नेटवर्क यूपी में होने के कारण राज्य सड़क, रेल और वायु मार्ग के साथ-साथ इनलैंड वाटर कनेक्टिविटी में भी अग्रणी भूमिका निभा सकता है। यह बजट इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश सनातन अर्थशास्त्र, कस्बा आधारित विकास और टेम्पल टूरिज्म के जरिए भारत के नए विकास मॉडल का केंद्र बन सकता है।

69000 शिक्षक भर्ती का मामला तूल पकड़ता, आज लखनऊ में शिक्षा हितैषी करेंगे विरोध प्रदर्शन

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले ने एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है. इसे लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी आज यानी 2 फरवरी 2026 को लखनऊ में अपनी मांगो को पूरा करवाने के लिए को धरना प्रदर्शन करेंगे. इस मामले में अभ्यर्थियों का आरोप है कि ने कोई पहल नहीं कर रही जिस कारण से मामला इतना आगे चला गया है. इस केस की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में साल 2024 में सितंबर के महीने में हुई थी. उसके बाद से लगातार के इस मामले में तारीख पर तारीख मिल रही है. इस केस को लेकर अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी. लेकिन उससे पहले आरक्षित वर्ग के लोग अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए आज प्रदर्शन करने वाले हैं.  कौन कर रहा है प्रदर्शन का नेतृत्व  ऐसे में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने इसे लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा की इस केस को सुलझाने के लिए सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है. जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट से केवल तारीखें मिल रही हैं. इस दौरान उन्होंने बताया कि वे दो फरवरी से आंदोलन करेंगे. आंदोलन के शुरुआत में बनाए गए सभी जिला कोऑर्डिनेटर से ब्लाक लेवल पर संपर्क कर आने वाले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की लिस्ट बनाने को कहा गया है.  प्रदर्शकारियों का फूटा गुस्सा  ऐसे में इस केस को लेकर प्रदर्शकारियों में गुस्सा भरा पड़ा है. उन्होंने कहा कि ओबीसी आयोग और लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में है. इस केस पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाई कोर्ट डबल बेंच का फैसला सब हमारे पक्ष में है, लेकिन हमारे साथ अन्याय इसलिए हो रहा है क्योंकि हम पिछड़े और दलित समाज से आते हैं.  इतने सालों से चल रहा है संघर्ष वहीं, दूसरे प्रदर्शनकारी ने कहा कि  वो पिछले 6 सालों  से संघर्ष कर रहे हैं.सरकार से मांग करते हैं, लेकिन हमारी बातों को नहीं सुना जाता है. सुनवाई न होने के कारण सभी अभ्यर्थी आहत हैं. 

पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विश्व स्तरीय पर्यटन स्थलों का विकास, यूपी टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

सारनाथ और हस्तिनापुर का होगा वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकास, केंद्रीय बजट में यूपी टूरिज्म को मिली बड़ी सौगात पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विश्व स्तरीय पर्यटन स्थलों का विकास, यूपी टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड और टूरिज्म ट्रेनिंग सेंटर की होगी स्थापना लखनऊ केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने  संसद में पेश किए गए 2026-27 के केंद्रीय बजट में उत्तर प्रदेश के सारनाथ और हस्तिनापुर के पुरातात्विक स्थलों को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की। साथ ही नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड, टूरिज्म ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी को अपग्रेड करने की घोषणाए भी की गई हैं। वहीं आईआईएम के सहयोग से 10,000 टूरिस्ट गाइडों को प्रशिक्षित करने की घोषणा, उत्तर प्रदेश जैसे पर्यटन समृद्ध राज्य में रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगी।   सारनाथ और हस्तिनापुर की ऐतिहासिक धरोहर को मिलेगी वैश्विक पहचान वित्तीय वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में देश के 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों को जीवंत अनुभव-आधारित वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख पुरातात्विक स्थल सारनाथ और हस्तिनापुर शामिल हैं। वाराणसी स्थित सारनाथ, बौद्ध धर्म का पवित्र स्थल होने के साथ देश का प्रमुख ऐतिहासिक स्थल भी है। यहां धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप और सिंह शीर्ष वाला अशोक स्तंभ भी स्थित है, जिससे भारत का राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न लिया गया है। साथ ही यहां से मौर्य, गुप्त और पाल युगीन मूर्तियों और बौद्ध विहारों के अवशेष भी मिले हैं। इसी क्रम में मेरठ जिले में स्थित महाभारत कालीन हस्तिनापुर को भी शामिल किया गया है। यहां से महाभारत और हड़प्पा कालीन पॉटरी और पुरातात्विक अवशेष भी मिले हैं। साथ ही यहां स्थित पांडव टीला और कर्ण मंदिर भी प्रमुख पुरातात्विक महत्व के साक्ष्य हैं। इन स्थलों को वैश्विक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकास करने से एक ओर पूर्वी यूपी में वाराणसी और दूसरी ओर मथुरा-मेरठ क्षेत्र के साथ पश्चिमी यूपी के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।   केंद्रीय बजट की घोषणाओं से खुलेंगे टूरिज्म में रोजगार के नए अवसर केंद्रीय बजट की एक अन्य प्रमुख घोषणा आईआईएम के सहयोग से 10,000 टूरिस्ट गाइडों को प्रशिक्षित करने की भी है। जिसके तहत देश के 20 आइकॉनिक पर्यटन स्थलों पर पायलट प्रोग्राम चलाकर टूरिस्ट गाइडों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें टूरिस्ट गाइड़ों के प्रोफेशनल स्किल्स, भाषा और डेस्टिनेशन नॉलेज पर फोकस होगा। यह प्रशिक्षण प्रोग्राम उत्तर प्रदेश जैसे पर्यटन-समृद्ध राज्य में इससे हजारों युवाओं को स्किल डेवलपमेंट के साथ रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा बजट में नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड की स्थापना उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत के स्थलों का डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन कर पर्यटन को बढ़ावा देगी। साथ ही टूरिज्म ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी को अपग्रेड करने की भी घोषणा भी बजट में की गई है। इससे टूरिस्ट गाइड्स, हॉस्पिटैलिटी स्टॉफ, ट्रैवल मैनेजमेंट से जुड़े युवाओं का स्किल डेवलपमेंट होगा जो न केवल पर्यटन सुविधाओं को बढ़ावा देगा साथ ही प्रदेश के युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा।

विकसित भारत की ओर केंद्रीय बजट 2026-27: क्या हैं सरकार की नई रणनीतियां?

केंद्रीय बजट 2026–27: ‘विकसित भारत’ की ओर एक रणनीतिक कदम केंद्रीय बजट 2026–27 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सीए आयुष गर्ग ने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि Ease of Doing Business और Tax Simplification की दिशा में एक संरचनात्मक सुधार को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह बजट “कर्तव्य” की भावना से प्रेरित है, जिसमें राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए मध्यम वर्ग और उद्योग जगत को संतुलित राहत देने का प्रयास किया गया है। प्रत्यक्ष कर: अनुपालन में सुगमता की दिशा में बड़ा कदम सीए आयुष गर्ग ने कहा कि बजट का सबसे बड़ा आकर्षण नया आयकर अधिनियम, 2025 है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। उनके अनुसार, इस नए कानून का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल, संक्षिप्त और करदाता-अनुकूल बनाना है। उन्होंने बताया कि नई कर व्यवस्था के तहत ₹4 लाख तक की आय को कर-मुक्त रखा गया है, जबकि स्टैंडर्ड डिडक्शन सहित ₹12.75 लाख तक की आय पर कर देयता शून्य होगी, जिससे मध्यम वर्ग की डिस्पोजेबल आय में वृद्धि होगी। सीए गर्ग ने यह भी कहा कि संशोधित रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च किया जाना करदाताओं और प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दोनों के लिए एक व्यावहारिक राहत है, हालांकि विलंब शुल्क की व्यवस्था जारी रहेगी। उन्होंने विदेश यात्रा (LRS), शिक्षा एवं चिकित्सा खर्च पर टीसीएस की दर को 5%/20% से घटाकर 2% किए जाने को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि इससे करदाताओं के नकदी प्रवाह पर दबाव कम होगा। इसके अलावा, शेयर बायबैक से प्राप्त आय को अब शेयरधारकों के हाथों कैपिटल गेन के रूप में करयोग्य बनाना कर ढांचे को अधिक तार्किक बनाता है। एमएसएमई और कॉर्पोरेट सेक्टर: विकास को नई गति एमएसएमई सेक्टर पर बोलते हुए सीए आयुष गर्ग ने कहा कि सरकार ने छोटे उद्योगों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानते हुए ₹10,000 करोड़ के एसएमई ग्रोथ फंड की घोषणा की है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘कॉर्पोरेट मित्र’ योजना के माध्यम से टियर-2 और टियर-3 शहरों में एमएसएमई को मार्गदर्शन देने हेतु पैरा-प्रोफेशनल्स तैयार किए जाएंगे, जिनके प्रशिक्षण में आईसीएआई की प्रमुख भूमिका होगी। सीए गर्ग के अनुसार, आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर सीमा को ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹2000 करोड़ करना बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए अनुपालन को सरल बनाएगा। उन्होंने बुनियादी ढांचे के लिए ₹12.2 लाख करोड़ के पूंजीगत व्यय आवंटन को स्टील, सीमेंट और कोर सेक्टर के लिए दीर्घकालिक रूप से लाभकारी बताया। राजकोषीय अनुशासन पर सरकार की प्रतिबद्धता राजकोषीय स्थिति पर टिप्पणी करते हुए सीए आयुष गर्ग ने कहा कि वित्त वर्ष 2026–27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.3% रखना सरकार की वित्तीय अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। शेयर बाजार और निवेशक शेयर बाजार पर बजट के प्रभाव को लेकर सीए गर्ग ने कहा कि फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में वृद्धि से अल्पकालिक और अत्यधिक सट्टा गतिविधियों पर कुछ नियंत्रण आएगा। उन्होंने बताया कि फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% तथा ऑप्शंस पर 0.1% से बढ़ाकर 0.15% किया गया है। निष्कर्ष अंत में सीए आयुष गर्ग ने कहा कि बजट 2026–27 Simplification और Standardization की स्पष्ट दिशा तय करता है। उन्होंने यह भी कहा कि कर कानूनों की जटिलताओं को कम कर डिजिटल और ऑटोमेटेड प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना सरकार की Trust-based Compliance नीति को दर्शाता है। उनके अनुसार, यह बजट चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए एक अवसर है, जिसमें उनकी भूमिका केवल कर अनुपालन तक सीमित न रहकर रणनीतिक सलाहकार के रूप में विकसित हो सकती है। विशेषज्ञ राय सीए आयुष गर्ग (FCA, CS, CMA, M.Com)

7 फरवरी से सड़क पर उतरेंगे लोग, SC-ST एक्ट के विरोध में अलंकार अग्निहोत्री का एलान

वाराणसी नौकरशाही से इस्तीफा देकर वैचारिक संघर्ष के रास्ते पर उतरे बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री एक बार फिर अपने बड़े ऐलान को लेकर सुर्खियों में हैं. रविवार देर शाम वह वाराणसी स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विद्यामठ आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने शंकराचार्य से विधिवत आशीर्वाद लिया. मंत्रोच्चार, श्लोक-पाठ और वैदिक परंपरा के बीच हुई इस मुलाकात को अलंकार अग्निहोत्री अपने आगामी आंदोलन की शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं. आशीर्वाद लेने के बाद आजतक से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि अगर 6 फरवरी तक केंद्र सरकार एससी-एसटी एक्ट को खत्म करने का फैसला नहीं करती है, तो 7 फरवरी से देशभर के लोग दिल्ली कूच करेंगे. उन्होंने इसे केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि देश की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की शुरुआत बताया. इस्तीफे से आंदोलन तक की यात्रा अलंकार अग्निहोत्री बीते दिनों उस वक्त चर्चा में आए थे, जब उन्होंने मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके वेदपाठी बटुकों के साथ हुई कथित घटना और नए यूजीसी के नए नियमों से आहत होकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उन्हें निलंबित भी किया गया. नौकरशाही की एक सुरक्षित और प्रतिष्ठित कुर्सी छोड़कर सड़क पर उतरने का उनका फैसला कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था, लेकिन अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि यह निर्णय भावनात्मक नहीं, बल्कि वैचारिक था. उनका कहना है कि वह 35 वर्षों से एससी-एसटी एक्ट की विभीषिका को समाज में देख रहे हैं और अब यह कानून देश को जोड़ने की बजाय तोड़ने का काम कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक विभाजनकारी कानून है, जिसे सोच-समझकर लागू किया गया था और इसका दुरुपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है.   शंकराचार्य ने लिखकर पूछा हालचाल  शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से हुई मुलाकात को लेकर अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि महाराज जी इस समय मौन व्रत पर हैं, इसलिए अधिक बातचीत नहीं हो पाई. उन्होंने लिखकर उनका हाल-चाल पूछा और आशीर्वाद दिया. अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि किसी भी बड़े और अच्छे कार्य से पहले गुरुजनों का आशीर्वाद लेना भारतीय परंपरा है, और इसी भावना के तहत वह वाराणसी पहुंचे थे. उनके मुताबिक, शंकराचार्य से मिला आशीर्वाद उनके आंदोलन को नैतिक और आध्यात्मिक बल देगा. उन्होंने यह भी कहा कि धर्म और समाज को अलग-अलग खांचों में बांटकर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि दोनों का उद्देश्य समाज का कल्याण होना चाहिए. 6 फरवरी की डेडलाइन, 7 फरवरी का ऐलान अलंकार अग्निहोत्री ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 6 फरवरी तक संसद का विशेष सत्र बुलाकर एससी-एसटी एक्ट को समाप्त नहीं किया गया, तो 7 फरवरी से देशभर से लोग दिल्ली की ओर कूच करेंगे. उनका दावा है कि यह आंदोलन अब किसी एक व्यक्ति या संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में इसके लिए माहौल बन चुका है. उन्होंने बेहद तीखे शब्दों में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में इस समय वेस्ट इंडिया कंपनी की सरकार चल रही है, जिसके सीईओ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एमडी गृह मंत्री अमित शाह हैं. उनके मुताबिक, अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो जनता सत्ता परिवर्तन के लिए सड़कों पर उतर आएगी. सत्ता परिवर्तन के दावे और बयान अलंकार अग्निहोत्री ने दावा किया कि 7 फरवरी को देश में ऐसा नजारा देखने को मिलेगा, जो पहले कभी नहीं देखा गया. उन्होंने कहा कि अगर एससी-एसटी एक्ट नहीं हटाया गया, तो देश की जनता मौजूदा सत्ता को बेदखल करने का मन बना चुकी है. उनके बयान में भावनात्मक आक्रोश के साथ-साथ व्यवस्था के प्रति गहरा असंतोष झलकता है. उन्होंने यह भी कहा कि यूजीसी द्वारा लाया गया नया रेगुलेशन सरकार के लिए आत्मघाती साबित होगा. उनका आरोप है कि इस फैसले से सरकार ने अपना कोर वोटर ही नाराज कर दिया है और अगर मौजूदा हालात में चुनाव हुए तो सत्ताधारी दल को देशभर में शून्य सीटें मिल सकती हैं. यूजीसी रेगुलेशन और सामाजिक तनाव अलंकार अग्निहोत्री का मानना है कि यूजीसी का नया रेगुलेशन देश में सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला है. उन्होंने दावा किया कि अगर यह रेगुलेशन पूरी तरह लागू हो गया होता, तो देश में सिविल वॉर जैसी स्थिति बन सकती थी. उनके अनुसार, सरकार ने बिना जमीनी हकीकत समझे ऐसे नियम बना दिए, जिनसे समाज में वर्गों के बीच टकराव की आशंका बढ़ गई. उन्होंने कहा कि मूल लड़ाई एससी-एसटी एक्ट की है.  सामान्य और ओबीसी वर्ग का अलगाव की बात    पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट का दावा है कि केंद्र सरकार से सामान्य वर्ग और ओबीसी वर्ग पूरी तरह अलग हो चुका है. उन्होंने मौजूदा सरकार को अल्पमत की सरकार बताते हुए कहा कि जनता का भरोसा अब इस व्यवस्था से उठ चुका है. उनके मुताबिक, सरकार समाज के बड़े हिस्से की भावनाओं को नजरअंदाज कर रही है. राजनीतिक आकांक्षाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर अलंकार अग्निहोत्री ने साफ कहा कि उनकी कोई व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है. उनका उद्देश्य केवल देश का कल्याण है. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें राजनीति करनी होती, तो वह अब तक कई दलों के नेताओं से संपर्क में होते और बंद कमरों में बातचीत कर रहे होते. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नौकरी में लौटने का कोई सवाल ही नहीं उठता. उनके अनुसार, अभी देश और समाज से जुड़े कई गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर काम करना जरूरी है. योगी आदित्यनाथ और केंद्र-राज्य के संबंध पर भी बोले  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि बटुकों के मान-हनन के मुद्दे पर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी थी और आज भी उसी पर खड़े हैं. हालांकि उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि दिल्ली के तंत्र के सामने इस तरह की घटनाओं पर खुलकर बात क्यों नहीं हो पा रही है. अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि देश में इस समय दो तरह की सरकारें चल रही हैं एक केंद्र की और दूसरी राज्यों की. उनके मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी भी देश की समस्याओं को बढ़ा रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि बटुकों के मान-हनन के मुद्दे पर उन्होंने खुलकर अपनी … Read more

महासंग्राम का दिन: खेल महाकुंभ में जडेजा का जलवा, शिवराज सिंह भी होंगे शामिल, मैदान में जुटेगा जनसैलाब

रायसेन मध्य प्रदेश के रायसेन में खेल बार भव्य 'सांसद खेल महोत्सव' का आयोजन किया जा रहा है। जिसकी शुरूआत 1 फरवरी से हो चुकी है। इस खेल महाकुंभ में 600 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भारतीय टीम से स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा मुख्य अतिथि होंगे। ग्राउंड में लगभग 10 हजार से दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है। प्राप्त जानकारी अनुसार, 2 फरवरी को दोपहर तीन बजे भोपाल से रवींद्र जडेजा का काफिला गोपालपुर से रायसेन पहुंचेगा। स्टेडियम में बनाए गए 8 अस्थायी स्टैंड दर्शकों के बैठने की सुविधा के लिए 8 अस्थायी स्टैंड बनाए गए हैं। हर स्टैंड में 5 कतारें हैं। एक स्टैंड में लगभग 250 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था बनाई गई है। साथ ही मैदान के अलग-अलग दिशाओं में स्टैंड बनाए गए हैं। जिसमें दर्शक आराम से बैठकर मैच देख सकेंगे। वीवीआईपी के लिए अलग व्यवस्था स्टेडियम की उत्तर दिशा में एक मुख्य डोम तैयार किया गया है। जिसके दोनों ओर दो छोटे-छोटे डोम बनाए गए हैं। जिसमें मुख्य अतिथि और वीवीआईपी लोगों के व्यवस्था रहेगी।   428 खिलाड़ी पहुंचे आज खेल महाकुंभ में बतौर मुख्य अतिथि में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चौहान ने शिरकत की और खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन करते हुए क्रिकेट खेला। इस दौरान विदिशा संसदीय क्षेत्र के आठों विधानसभा की टीमों के 428 खिलाड़ी पहुंचे। इस शिवराज के पुत्र कार्तिकेय चौहान भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि समापन समारोह में भारतीय क्रिकेट के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा बतौर मुख्य अतिथि होंगे। खेल महाकुंभ के आगाज के दौरान क्षेत्रीय विधायक प्रभु राम चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा, विदिशा विधायक मुकेश टंडन समेत कई अन्य स्थानीय नेता शामिल हुए।

भारी वाहनों की पार्किंग से सर्विस लेन जाम, आम लोगों को हो रही परेशानी

धौलपुर  शहर में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या44 पर दोनों तरफ सर्विस लेन की हालत खराब है। ग्वालियर और आगरा रोड की सर्विस लेन पर सुबह से ही भारी वाहन आकर खड़े हो जाते हैं। यह वाहन दिनभर यहां सर्विस लेन पर खड़े रहते हैं जिससे यातायात बाधित रहता है और हादसे का खतरा बना रहता है। यहां गुलाब बाग चौराहे से वाटरवक्र्स की तरफ की जा रही सर्विस लेन पर इन दिनों खासा ट्रेफिक है। वाटरवक्र्स चौराहे पर हाइवे क्रॉसिंग को बंद करने से सामने की तरफ से लांग साइड से वाहन आने से और समस्या खड़ी हो गई है। रही सही कसर यहां सर्विस लेन पर खड़े हो रहे भारी वाहनों ने कर रखी है। जिससे यहां पर जाम की स्थिति बन रही है। शुरुआत में इन वाहनों को हटाया गया लेकिन फिर से जस की तस स्थिति बनी हुई है। ग्वालियर रोड की सर्विस लेन की स्थिति अधिक खराब है। गुलाब बाग चौराहे से वाटरवक्र्स चौराहे के बीच भारी वाहन खड़े रहते हैं। यहां पर मिस्त्रियों की दुकानें हैं और वाहन यहां दिनभर खड़े रहते हैं। जिससे सर्विस लेन पर जगह कम पड़ जाती है। मिस्त्रियों की दुकानें हाइवे की सर्विस लेन किनारे बनी हुई हैं। यहां दुकानों होने से साइड से गुजर रहे नाली की भी सफाई नहीं हो पाती है। इसी तरह आगे वाटरवक्र्स चौराहे से सागरपाडा तक अनाधिकृत रूप से कब्जा बना हुआ है। आगे की तरफ तो सर्विस लेन पर गड्ढे हो रहे हैं। जिससे निकलना भी दूभर हो रहा है। शहर में कृषि उपज मंडी, चोपड़ा मंदिर कट और आगे राजाखेड़ा बाइपास की तरफ हालात खराब है। यहां पर वाहन रेंग रेंग कर आगे निकल पा रहे हैं। वहीं, केन्द्रीय बस स्टैंड की तरफ भी अव्यवस्था है। यहां आरएसी लाइन से बस स्टैंड तक दुपहिया वाहन चालक मुश्किल से २० किमी प्रति किलोमीटर से भी कम रफ्तार में चल पा रहा है। शहर के सबसे व्यस्त चौराहा गुलाब बाग का भी हाल बेहाल है। यहां जगदीश तिराहे से चौराहे की तरफ आने वाले ट्रेफिक रेंगता हुआ बढ़ता है। चौराहे के पास अनाधिकृत रूप से पार्किंग हो रही है। गत दिनों सफाई के लिए नगर परिषद ने दुकानों के सामने से अतिक्रमण हटाया और सफाई की। जिसके बाद फिर से नाले पर ही कब्जा कर लिया। दुकानों की पार्किंग भी सडक़ पर हो रही है। जिससे जाम की स्थिति बन रही है।  

6 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! HC ने दिया बड़ा फैसला, सर्विस मामले होंगे त्वरित निपटारे के लिए तैयार

इंदौर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों (Service Matters) को लेकर राज्य सरकार को एक बेहद अहम और कड़ा सुझाव दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ट्रांसफर, प्रमोशन, इंक्रीमेंट और वरिष्ठता जैसे छोटे-छोटे मामलों के लिए कर्मचारियों को अदालत आने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। जस्टिस विनय सराफ की एकल पीठ ने सरकार को 'इन-हाउस डिस्प्यूट रिसोल्यूशन सिस्टम' (विवाद समाधान प्रणाली) विकसित करने के निर्देश दिए हैं। चीफ सेक्रेटरी को आदेश: 50 हजार मामलों का बोझ होगा कम हाई कोर्ट में वर्तमान में कर्मचारियों से जुड़े 50,000 से अधिक मामले लंबित हैं। जस्टिस सराफ ने मंडला के वन रक्षकों की वरिष्ठता से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इस आदेश की प्रति मुख्य सचिव (Chief Secretary) को भेजने के निर्देश दिए हैं।     याचिकाकर्ता 30 दिन के भीतर सक्षम अधिकारी को अपना आवेदन दें।     सरकार और संबंधित विभाग इस पर 45 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से फैसला लें। 6 लाख कर्मचारियों के लिए 'राहत' का फॉर्मूला यदि सरकार इस सुझाव पर अमल करती है, तो प्रदेश के करीब 6 लाख नियमित अधिकारी-कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। कोर्ट के सुझाव के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं…     डेजिग्नेटेड ऑफिसर: हर विभाग में एक नामित अधिकारी हो जो विवादों को सुने।     निष्पक्षता: पारदर्शिता के लिए जरूरत पड़ने पर रिटायर्ड जिला जजों की सेवाएं भी ली जा सकती हैं।     बचत: इससे न केवल अदालतों का बोझ कम होगा, बल्कि सरकार और कर्मचारियों का समय व पैसा भी बचेगा। 'अदालतों में आ गई है सर्विस मामलों की बाढ़' सुनवाई के दौरान जस्टिस सराफ ने चिंता जताते हुए कहा कि हाई कोर्ट में इन दिनों सर्विस मामलों की बाढ़ आ गई है। उन्होंने कहा, "अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सीधे संवाद की कमी के कारण छोटे-छोटे विवाद भी कोर्ट तक पहुंच रहे हैं। यह सरकार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ाता है और कर्मचारियों को मानसिक पीड़ा देता है।" कोर्ट का मानना है कि आपसी संवाद और विभागीय स्तर पर सशक्त प्रणाली से अधिकांश केसों का समाधान बिना मुकदमेबाजी के संभव है।