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नेपानगर में 33वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष का आह्वान

नेपानगर (बुरहानपुर) मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने कहा है कि इस देश में आदिवासियों का भी अलग धर्म कोड होना चाहिए और इसके लिए अब एकजुट होकर निर्णायक आंदोलन की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ही डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी रहते हैं, यदि यह समाज संगठित होकर अपनी आवाज़ बुलंद करे तो सरकार को अधिकार देना ही पड़ेगा। नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार बुरहानपुर जिले के नेपानगर में आयोजित 33वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस महासम्मेलन में सहभागी बनना उनके लिए गौरव और आत्मीय अनुभव है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात से आए हजारों आदिवासी प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस महासम्मेलन को एकता, चेतना और संस्कृति का जीवंत उत्सव बना दिया है। सम्मेलन में आदिवासी समाज के भाई-बहनों और बुजुर्गों से मिला स्नेह और आशीर्वाद उनकी ऊर्जा और संकल्प को और मजबूत करता है। श्री सिंघार ने कहा कि आदिवासियों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी विभिन्न समाजों के साथ मिलकर जातिगत जनगणना की मांग उठाई है और आज आदिवासी समाज के पास यह अवसर है कि वह इसे पूरे देश का जन आंदोलन बनाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यहां राजनीति से दूर रहकर समाज के अधिकार की बात कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिस तरह झारखंड के आदिवासियों ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया, उसी तरह मध्यप्रदेश के आदिवासी समाज को भी आगे आना होगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अलग कोड के लिए राष्ट्रपति को आदिवासी समाज की ओर से ज्ञापन भेजा जाना चाहिए, जिसमें यह स्पष्ट मांग हो कि आदिवासियों को भी अलग धर्म कोड दिया जाए, यह उनका संवैधानिक और सामाजिक अधिकार है। अपने संबोधन के अंत में श्री उमंग सिंघार ने कहा, मैं उमंग सिंघार जल, जंगल, जमीन, हमारी संस्कृति और आदिवासी अस्मिता के संरक्षण की लड़ाई में हमेशा अपने आदिवासी समाज के साथ खड़ा रहूंगा।

नीतीश सरकार युवाओं तक नौकरी की पहुँच बनाने लॉन्च करेगी नया पोर्टल

पटना. बिहार सरकार ने अगले पांच वर्षों में राज्य के एक करोड़ युवाओं को रोजगार और नौकरी देने का लक्ष्य रखा है। इस काम को तय सीमा में पूरा करने के उद्देश्य से युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का गठन भी किया है। आने वाले दिनों में इस नवगठित विभाग की जवाबदेही और बढ़ेगी। इस विभाग को अब ई-पोर्टल का संचालन, विभिन्न जिलों में रोजगार मेला आयोजित करना और नौकरी से जुड़ी युवाओं की समस्याओं के समाधान का निराकरण भी करना होगा। हाल ही में सरकार ने इस नए विभाग को ठीक से चलाने के लिए 147 नए पद स्वीकृत किए हैं। इन पदों के जरिए विभाग के सभी काम तेजी से पूरे किए जाएंगे। विभाग रोजगार से जुड़े नियम बनाएगा, योजनाओं को लागू करेगा और युवाओं की मदद के लिए नई सुविधाएं शुरू करेगा। मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को स्वीकृत भी कर दिया है। जानकारी के अनुसार, नवगठित विभाग का सबसे अहम कार्य एक ई-पोर्टल का प्रबंधन होगा। इस पोर्टल पर युवा अपनी पढ़ाई और योग्यता के अनुसार नौकरी की जानकारी देख सकेंगे और ऑनलाइन आवेदन भी कर सकेंगे। इस सुविधा के प्रारंभ होने से युवाओं को विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। विभाग राज्य के अलग-अलग जिलों में रोजगार मेलों आयोजित करेगा। मेलों में निजी और सरकारी कंपनियां सीधे युवाओं से मिलेंगी और मौके पर ही नौकरी के अवसर उपलब्ध कराएंगी। नया विभाग निजी कंपनियों, उद्योगों और एमएसएमई इकाइयों से भी लगातार संपर्क में रहेगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा किए जा सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से बिहार के युवाओं को नौकरी मिलने में आसानी होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

पंजाब में कड़ाके की ठंड के बीच स्कूलों का बदलेगा समय?

लुधियाना. पंजाब में कड़ाके की ठंड और घनी धुंध के प्रकोप ने जनजीवन के साथ शिक्षा विभाग की गतिविधियों की रफ्तार पर रोक लगानी शुरू कर दी है। मौसम के बिगड़ते मिजाज और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए जहां एक ओर राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं और अधिकारियों के महत्वपूर्ण ओरिएंटेशन प्रोग्राम को टाल दिया गया है, वहीं दूसरी ओर अध्यापक संगठनों ने सुबह की जानलेवा धुंध से बचाव के लिए स्कूलों के समय में तुरंत बदलाव की आवाज उठाई है। पंजाब के कई हिस्सों में विजीबिलिटी शून्य होने के कारण सड़कों पर बढ़ते खतरों ने अभिभावकों और अध्यापकों की चिंता को बढ़ा दिया है। प्रचंड ठंड का सीधा असर खेल के मैदानों पर भी दिखाई दिया है। डायरैक्टर स्कूल एजुकेशन पंजाब के स्पोर्ट्स विभाग ने लुधियाना जिले में आयोजित होने वाली 69वीं इंटर-डिस्ट्रिक्ट प्राइमरी स्कूल खेलों के कार्यक्रम में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। विभाग द्वारा जारी ताजा निर्देशों के अनुसार 16 से 22 जनवरी तक होने वाली इन राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। विभाग के उच्च अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में जारी कड़ाके की ठंड और छोटे बच्चों की सेहत व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन खेलों को हाल की घड़ी के लिए मुल्तवी करना ही उचित समझा गया है। डायरेक्टर ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर सभी जिलों को सूचित कर दिया है। स्कूलों का समय 10 से 3 बजे तक करने की मांग मास्टर कैडर यूनियन ने प्रदेश में बढ़ रही शीत लहर और शून्य दृश्यता को देखते हुए शिक्षा विभाग से स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक करने की पुरजोर मांग की है। यूनियन के प्रांतीय उपाध्यक्ष जगजीत सिंह साहनेवाल और जिला जनरल सचिव गुरप्रीत सिंह दोराहा ने कहा कि धुंध के कारण दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों और अध्यापकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी लगातार गिर रही है। वे बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर छुट्टियों में वृद्धि न करने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं लेकिन गिरते तापमान के बीच समय परिवर्तन में देरी करना किसी बड़े हादसे को न्यौता देने के समान है। छुट्टियों के बाद पहले दिन कम रही हाजिरी सर्दियों की छुट्टियों के बाद आज जब स्कूल खुले तो पहले ही दिन कड़ाके की ठंड का असर विद्यार्थियों की उपस्थिति पर साफ देखने को मिला। घनी धुंध और ठिठुरन के कारण अधिकांश स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति बहुत कम दर्ज की गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई निजी स्कूलों ने अपने स्तर पर ही स्कूल के समय में बदलाव कर दिया है ताकि बच्चों को सुबह की भीषण ठंड से बचाया जा सके। इस बीच, सोशल मीडिया पर भी अध्यापकों और अभिभावकों का गुस्सा देखने को मिल रहा है। वेदान्त प्रकाश मारवाह और हरविंदर लहरा जैसे लोगों ने सोशल मीडिया कमैंट्स के जरिए बताया कि आज इस सर्दी का सबसे ठंडा दिन था और भीषण ठंड के कारण बच्चों का बुरा हाल रहा। यहां तक कि ठंड की वजह से हाथ भी सही से काम नहीं कर रहे थे। कुलदीप सिंह अरोड़ा और लखविंदर लकी ने भी पुष्टि की कि स्कूलों में बच्चे बहुत कम आए। वहीं, किरन पुनिया बराड़ जैसे अभिभावकों ने पुरजोर मांग की है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए स्कूल का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 2 या 3 बजे तक होना चाहिए। प्रशासनिक कारणों से 'मिशन समर्थ' की ओरिएंटेशन भी मुल्तवी स्टेट कौंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एस.सी.ई.आर.टी.), पंजाब ने भी अपने प्रशासनिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। 'मिशन समर्थ 4.0' के तहत 15 जनवरी को होने वाली एक दिवसीय ओरिएंटेशन को आगामी आदेशों तक स्थगित कर दिया गया है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में पंजाब के समूह जिला शिक्षा अधिकारियों (सैकेंडरी और एलीमैंट्री), समूह प्रिंसीपल डाइट और समूह उप जिला शिक्षा अधिकारियों ने हिस्सा लेना था। डायरैक्टर एस.सी.ई.आर.टी. पंजाब के अनुसार, इस ओरिएंटेशन की नई तारीखों का एलान भविष्य में उचित समय पर किया जाएगा। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षा विभाग का पूरा ध्यान फिलहाल मौसम के कारण उत्पन्न चुनौतियों से निपटने पर केंद्रित है।

CM यादव का ऐलान: एआई को कुशल शासन और पारदर्शिता के लिए अहम बनाती है राज्य सरकार

राज्य सरकार एआई को नागरिक केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में कर रही है स्थापित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति एआई पर मिशन मोड पर होगा कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लांच की मध्यप्रदेश स्पेसटेक नीति-2026 प्रधानमंत्री मोदी के विजन को दृष्तिगत रखकर आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश जन-कल्याणकारी योजनाओं में एआई का प्रभावी उपयोग करेगा मध्यप्रदेश प्रदेश में जल्द लाई जाएगी राज्य एआई नीति मुख्यमंत्री ने एआई लिटरेसी मिशन के तहत कौशल रथ को दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री ने ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026’ का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार एआई को नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। एआई आधारित प्रशासनिक व्यवस्था और प्रबंधन, तकनीक-प्रौद्योगिकी और अकादमिक क्षेत्र में एआई आधारित नवाचार विकसित भारत@ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रभावी रूप से सहायक होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हर क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण का अध्ययन केंद्र और शंकराचार्य जी की साधना का केंद्र भी है। राज्य सरकार मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार सभी विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए एआई का उपयोग कर रही है। एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति है। हमारा राज्य जल्द ही एआई नीति भी लाएगा और एआई के लिए मिशन मोड पर व्यापक रूप से कार्य किया जाएगा। प्रदेश के माइनिंग और हेल्थ सेक्टर में एआई के उपयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं वाला राज्य है, जिसमें आगे बढ़ने की पर्याप्त क्षमता है। विकसित भारत के लक्ष्य प्राप्ति में हमारी सरकार हर कदम पर प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को भोपाल के ताज लेक फ्रंट में ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026’ का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एआई लिटरेसी मिशन के तहत फ्यूचर स्किल्स फॉर एआई पावर्ड भारत के लिए कौशल रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश स्पेस टेक नीति-2026 लांच की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विभिन्न समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के संचालन के लिए आयोजित उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन और मध्यप्रदेश इनोटेक प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संजय दुबे ने “एआई फॉर पीपल, प्लेनेट एंड प्रोग्रेस-मध्यप्रदेश रोडमैप टू इंपैक्ट” पर राज्य का प्रमुख एआई विजन प्रस्तुत किया। एआई को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने के उद्देश्य से एआई लिटरेसी मिशन के अंतर्गत आरंभ युवा एआई फॉर ऑॅल पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। एम.पी. राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक आशीष वशिष्ठ ने कॉन्फ्रेंस के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एमपीएसईडीसी प्रदेश में एआई इंफ्रॉस्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए नोडल एजेंसी है। स्पेस टेक नीति – अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीजनल एआई इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस में प्रदेश की स्पेस टेक नीति लांच की। उन्होंने कहा कि नीति राज्य को भारत के उभरते अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अग्रणी और भविष्य-उन्मुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। नीति के तहत स्पेस टेक स्टार्ट-अप्स, एमएसएमई और उद्योगों को वित्तीय, अवसंरचनात्मक और अनुसंधान सहयोग प्रदान कर कृषि, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन एवं शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा दिया जाएगा। यह नीति निवेश, नवाचार और राष्ट्रीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में मध्यप्रदेश की भूमिका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। नवाचार और कौशल विकास के लिए हुए 7 एमओयू पर हस्ताक्षर मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 6 समझौता ज्ञापन-यंगोवेटर (आंसर फाउंडेशन), सीईईडब्ल्यू (कॉउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर), गूगल, नैसकॉम, एआईएसईसीटी और भाषिणी के साथ किए गए। ये समझौते शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार एवं रोबोटिक्स को बढ़ावा देने, जलवायु परिवर्तन व सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में एआई आधारित शोध एवं निर्णय सहयोग विकसित करने, शासकीय विभागों में एआई और क्लाउड तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करने, राज्य में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना एवं कौशल विकास को गति देने, राष्ट्रीय एआई मिशन से जुड़कर कंप्यूटर एवं डेटा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और एआई जागरूकता बढ़ाने और एआई आधारित शासन को सक्षम करने के उद्देश्य से किए गए हैं। इसके अलावा इंडिया एआई और तकनीकी शिक्षा,कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के मध्य एक समझौता ज्ञापन हुआ। उच्च गुणवत्ता वाली एआई शिक्षा तक पहुंच को व्यापक बनाने के लिए इंडिया एआई मिशन देश के टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में 570 डेटा एवं एआई लैब्स की स्थापना कर रहा है। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग, मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश में 30 डेटा एवं एआई लैब्स स्थापित की जाएंगी।   आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीक नहीं, नीति, समाज और अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक सशक्त माध्यम बना : मुख्य सचिव जैन मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि एआई के उपयोग से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक व नागरिक-केंद्रित होगी। मुख्य सचिव जैन ने बताया कि यह कांफ्रेंस आगामी इंडिया एआई इंपैक्ट समिट-2026 से पूर्व देश में एआई इको सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निर्धारित सतत आर्थिक विकास लक्ष्य को प्राप्त करने में गवर्नेंस में एआई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्योग और अकादमिक संस्थानों के सहयोग, स्किलिंग व री-स्किलिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य रिसर्च, इनोवेशन और नॉलेज आधारित होगा। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यूपीआई को भारत की वैश्विक पहचान बताया। मध्यप्रदेश में समग्र आईडी जैसी पहलों के माध्यम से डेटा-आधारित और परिवार-केंद्रित शासन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्य सचिव जैन  ने कहा कि ऐसे मंच नवाचार और सहयोग को नई दिशा देते हैं। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय प्रयास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। एआई के प्रभावी … Read more

मध्य प्रदेश में आदिवासी छात्रों के लिए UPPSC और PSC तैयारी, 2 नए छात्रावास बनाने की योजना

जबलपुर  अपने अटपटे बयानों के लिए पहचाने जाने वाले मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री आजकल बहुत नापतौल कर बयान दे रहे हैं. जनजातीय मंत्री विजय शाह ने जबलपुर में अपने विभाग के अलावा किसी दूसरे सवाल का कोई जवाब नहीं दिया. उन्होंने बताया कि आदिवासी छात्र-छात्राओं को यूपीएससी और पीएसी की तैयारी के लिए जबलपुर में एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा. जिसमें छात्र-छात्राओं को सरकारी खर्च पर विशेष कोचिंग करवाई जाएगी. जबलपुर में बनेंगे 2 नए छात्रावास मध्य प्रदेश सरकार के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह जबलपुर पहुंचे. जहां उन्होंने दो नए छात्रावासों के निर्माण की घोषणा की है. जिन्हें 8 करोड़ 18 लख रुपए की लागत से बनाया जाएगा. एक छात्रावास जबलपुर के महाकाल में और दूसरा कुडम में बनेगा. मंत्री कुंवर विजय शाह का कहना है कि "आदिवासी जनजाति के छात्रों को लेकर जबलपुर में एक नया प्रयोग किया जा रहा है, जो अगले शिक्षा सत्र से शुरू होगा. आदिवासी छात्रों को सरकार कराएगी कोचिंग इसके तहत 100 लड़के और 100 लड़कियों को यूपीएससी और पीएससी की परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग करवाई जाएगी. इस प्रोजेक्ट के लिए विभाग की ओर से 18 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है. उन्होंने बताया इसी तरह अनुसूचित जाति जनजाति के छात्र-छात्राओं के लिए नीट, आईआईटी, जेईई और करंट अफेयर्स की तैयारी के लिए भी जबलपुर में व्यवस्था की जा रही है. इन छात्रों के लिए हॉस्टल बनाया जा रहा है. यह हॉस्टल सुरक्षा के नजरिए से अत्यधिक व्यवस्थाओं से लैस होगा. राज्यसभा सीट और इंदौर मामले पर जवाब देने से बचे विजय शाह मंत्री विजय शाह का कहना है कि मध्य प्रदेश में 5000 अनुसूचित जाति जनजाति छात्रावास हैं. इनमें स्थाइ वार्डन नहीं है और वार्डन का चार्ज किसी शिक्षक को दिया गया है. ऐसी स्थिति में शिक्षक छात्रावास को 100% समय नहीं दे पाता. इसलिए इन सभी छात्रावास में स्थाइ वार्डन की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है." इसके बाद कांग्रेस दिग्विजय सिंह के स्थान पर राज्यसभा में आदिवासी नेता को राज्यसभा सदस्य बनना चाहती है. इस सवाल पर मंत्री ने कहा कि वे इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलेंगे. इंदौर में गंदे पानी के मुद्दे पर भी कुंवर विजय शाह ने कुछ नहीं कहा.

अब जब मैं बाहर हूं, समझ आया दिग्विजय सिंह क्या चाहते थे” – सिंधिया का खुलासा

ग्वालियर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दिनों ग्वालियर दौरे पर हैं। जहां उन्होंने मध्य प्रदेश की राजनीति पर अपनी राय रखी। सिंधिया ने दिग्विजय सिंह के राज्यसभा न जाने की वजह पूछे जाने पर एक सवाल का जवाब देते हुए तीखा तंज कसा। इतना ही नहीं उन्होंने राहुल गांधी के इंदौर दौरे को लेकर भी बयान दिया। सिंधिया ने दिग्विजय सिंह के राज्यसभा न जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कांग्रेस पार्टी और उनका अंदरूनी निर्णय है। जब मैं कांग्रेस में था, तब नहीं जानता था कि दिग्विजय सिंह क्या चाहते हैं, अब तो मैं बाहर हूं तो भला कैसे जान पाऊंगा कि वे क्या चाहते हैं। उनके फैसलों पर टिप्पणी करना और भी मुश्किल है। दरअसल, दिग्विजय सिंह द्वारा राज्यसभा में न जाने के फैसले को लेकर सिंधिया से सवाल किया गया था। इस पर सिंधिया ने किसी भी तरह की सीधी टिप्पणी करने से परहेज किया और बात को वहीं विराम दे दिया। वहीं दिग्विजय सिंह की आरएसएस की तारीफ करने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा- देर आए दुरुस्त आए। वहीं, जब सिंधिया से 17 तारीख को राहुल गांधी के इंदौर आगमन को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि देश में प्रजातंत्र है और कोई भी नेता कहीं भी आ-जा सकता है। गौरतलब है कि साल 2020 में मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार गिरने के पीछे राज्यसभा चुनाव एक बड़ी वजह थी। उस समय लोकसभा चुनाव हारने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के राज्यसभा जाने की चर्चा थी, लेकिन दिग्विजय सिंह के राज्यसभा जाने पर 'राजा दिग्गी' और 'महाराजा सिंधिया' के बीच तल्खियां बढ़ गई थीं। दिग्विजय सिंह द्वारा वर्तमान कार्यकाल पूरा होने पर राज्यसभा न जाने की इच्छा जाहिर किए जाने के सवाल पर सिंधिया ने कहा कि यह उनकी और कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी बात है। उन्होंने कहा, "मैं इस पर क्या टिप्पणी करूं? मैं क्या जानूं वह क्या चाहते हैं? जब मैं कांग्रेस में था तब भी मैं नहीं जानता था कि दिग्विजय सिंह क्या चाहते थे और अब मैं बाहर हूं तो मैं कैसे जानूंगा कि वह क्या चाहते हैं?" वहीं, बीते दिनों दिग्विजय सिंह द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा की तारीफ किए जाने पर सिंधिया ने टिप्पणी की, "देर आए पर दुरुस्त आए, यह अच्छी बात है।" राहुल गांधी के 17 तारीख को इंदौर दौरे के सवाल पर सिंधिया ने कहा कि वह जरूर जाएं, इसमें कोई कठिनाई नहीं है, यह प्रजातंत्र है। आपको बता दे सिंधिया कटारे फार्म के पास स्मार्ट सिटी द्वारा निर्मित थीम पार्क का जायजा लेने पहुंचे थे।उन्होंने कहा कि आज शौर्य स्मारक का भी निरीक्षण किया है,एक बहुत अच्छा भविष्य की पीढ़ी के लिए एक नया स्थल बन रहा है और भविष्य की पीढ़ी भी अपने पूर्वजों के बलिदान याद रखें इसलिए यह स्मारक भी बनाया जा रहा है,बहुत सुंदर डिजाइन ग्वालियर के पत्थर से हम लोग बनाने की कोशिश कर रहे हैं,इसकी आकृति में भी ग्वालियर की संस्कृति और परंपरा रहे सारे शहीदों जिन्होंने पिछले हजार वर्षों से अपने जीवन का बलिदान दिया है उनके लिए यह स्मारक यहां बनेगी, ग्वालियर चंबल की धरती ने भी बहुत सारे वीर सूरमाओं को जन्म दिया है जिन्होंने सरहद पर देश की एकता और अखंडता के लिए बलिदान दिया है,उनको भी याद किया जाएगा और भविष्य यहां प्रवेश करेगा तो वह भविष्य अपने पूर्वजों को सामने माथा टेक कर फिर अपने भविष्य का भी निर्माण करेगा।

योगी सरकार का 100 दिवसीय विशेष सघन टीबी रोगी खोज अभियान, फरवरी से होगा शुरू

योगी सरकार का 100 दिवसीय विशेष सघन टीबी रोगी खोज अभियान फरवरी से जनभागीदारी के लिए सांसद से लेकर पार्षद तक को शामिल करने के दिये निर्देश   बुजर्गों, गंभीर रोगियों व मलिन बस्तियों में टीबी स्क्रीनिंग पर जोर प्राइमरी स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालय तक चलेगा जागरूकता अभियान  लखनऊ योगी सरकार एक बार फिर तपेदिक (टीबी) उन्मूलन के लिए प्रदेश में 100 दिवसीय विशेष सघन रोगी खोज अभियान शुरू करने जा रही है। फरवरी में शुरू हो रहे अभियान में जनप्रतिनिधियों व विभिन्न विभागों के सहयोग से अधिकतम मरीजों को खोजकर उनका इलाज शुरू करने की रणनीति है। स्वास्थ्य महानिदेशक ने सभी अपर निदेशकों व मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने टीबी रोगियों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार हेतु प्रशिक्षित करने के लिए कौशल विकास विभाग को लिखा है।  सघन खोज अभियान से टीबी से होने वाली मौतों में 17 फीसदी की कमी स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि सघन टीबी खोज अभियान 7 दिसंबर 2024 से चलाया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि वर्ष 2015 के सापेक्ष प्रति एक लाख व्यक्तियों में मरीजों की संख्या में 17 प्रतिशत और टीबी के कारण होने वाली मृत्यु में भी 17 फीसदी की कमी आई है। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विभाग ने एक बार फिर से फरवरी में सघन टीबी रोगी खोज अभियान चलाने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य महानिदेशक (डीजी) डॉ. आरपी सिंह सुमन ने जनभागीदारी के महत्व को ध्यान में रखते हुए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस अभियान में जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। निबंध और पोस्टर प्रतियोगिता से बच्चों काे किया जाएगा जागरूक सभी सीएमओ को निर्देश दिया गया है कि दो माह में सांसदों के साथ जनपद स्तरीय समीक्षा करवाएं और उन्हें निःक्षय शिविर व अन्य जनभागीदारी गतिविधियों में शामिल करें। ये समीक्षा बैठकें आगे भी जारी रहेंगी। इसके अलावा विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, प्रधानों व पार्षदों को भी अभियान से जोड़ें। अभियान में सामाजिक जन जागरूकता बढ़ाने के लिए 'माई भारत' वालंटियर्स व अन्य पंजीकृत निःक्षय मित्रों का भी उपयोग करें। डीजी ने सभी कारागारों व मलिन बस्तियों में टीबी स्क्रीनिंग कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्राथमिक स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक में निबंध, पोस्टर प्रतियोगिता समेत विभिन्न माध्यमों से छात्र-छात्राओं में जागरूकता फैलाने के लिए कहा है। इसके अलावा समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जागरूक करने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि वे टीबी के लक्षण वाले लोगों को स्क्रीनिंग के लिए भेज सकें। परिवहन विभाग से जुड़े समस्त चालकों व कंडक्टरों की स्क्रीनिंग कराने व कारखानों में काम करने वालों की भी शिविर लगाकर जांच करने को कहा गया है।  यह है अभियान की रणनीति  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व उससे नीचे की स्वास्थ्य इकाइयों से पांच प्रतिशत और जिला अस्पताल, मेडिकल काॅलेजों से 10 प्रतिशत लोगों को सामान्य ओपीडी से टीबी जांच के लिए रेफर करना।    आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से टीबी जांच के लिए सैम्पल ट्रांसपोर्टरों की व्यवस्था कराना।  बुजुर्गों व गंभीर मरीजों की यथासंभव जांच कराना।  स्थानीय गैर सरकारी संगठनों, कॉरपोरेट, विभागों, संस्थानों को निःक्षय मित्र के रूप में प्रेरित करना।

बिजली कर्मचारियों से मारपीट के आरोप में तीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा भोपाल शहर वृत्त के पूर्व शहर संभाग अंतर्गत बाग फरहत अफजा ऐशबाग में बिजली कर्मचारियों के साथ मारपीट करने वाले तीन आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। कंपनी के इंडस्ट्रियल गेट कार्यालय प्रबंधक संजय बारमासे ने बताया कि बाग फरहत अफजा निवासी श्रीमती शहजादी बी द्वारा विद्युत देयक बकाया 1 लाख 41 हजार 669 रुपए जमा नहीं किया जा रहा था। उन्होंने उक्त मकान सीमा बेगम को विक्रय कर दिया। सीमा बेगम को बताया गया कि आपके द्वारा क्रय किये गये मकान का विद्युत देयक बकाया है। यदि बकाया देयक जमा नहीं किया तो विद्युत विच्छेदन की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद उन्होंने शासकीय कार्य में बाधा डालते हुए कर्मचारियों को अभद्रता की और मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इस पर मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा आरोपितों सीमा बेगम, आशु एवं समीर के खिलाफ ऐशबाग थाने में भारतीय न्‍याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 296(बी), 132, 351(3) , 3(5) में एफआईआर दर्ज कराई गई है। थाना एशबाग ने भी प्रकरण पर संज्ञान लेकर विवेचना शुरू कर दी है। बिजली कंपनी के मैदानी कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ ड्यूटी के दौरान असामाजिक तत्वों द्वारा मारपीट / दुर्व्यवहार की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने तुरन्त एफ.आई. आर. कराने के निर्देश दिए हैं। कंपनी ने कहा है कि प्रायः देखने में आ रहा है कि बिजली कर्मियों पर ड्यूटी के दौरान असामाजिक तत्वों द्वारा मारपीट / दुर्व्यवहार किया जा रहा है। चूंकि ऐसी घटनाएं विद्युत अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल गिराती हैं, इसलिए कंपनी के कार्यक्षेत्र में कार्यरत सभी नियंत्रणकर्ता अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि मैदानी अधिकारी-कर्मचारियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार या मारपीट की घटनाओं को पूरी गंभीरता से लिया जाए।  

मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना से अब सीधे खाते में मिलेगी राशि

सुपौल. महिला एवं बाल विकास निगम, समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार द्वारा यूटीआई नेचुरल फंड के माध्यम से संचालित मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना के तहत वर्ष 2008 से 2012 के बीच यूटीआई बॉन्ड प्राप्त करने वाली कन्या लाभुकों के लिए अब परिवर्तन राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल कर दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी लाभार्थी कन्याओं को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त होगी। राशि प्राप्त करने से पूर्व संबंधित यूटीआई बॉन्ड धारक लाभुकों को अपने-अपने आंगनबाड़ी केंद्र से संपर्क करना अनिवार्य होगा। योजना से जुड़ी जिन कन्याओं की आयु 18 वर्ष पूर्ण हो चुकी है, उन्हें आंगनबाड़ी सेविका से संपर्क कर केंद्र पर उपलब्ध सर्वेक्षण फॉर्म भरना होगा। फॉर्म के साथ लाभार्थी को आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र एवं यूटीआई बॉन्ड की मूल प्रति संलग्न करनी होगी। इसके अलावा, 18 वर्ष पूर्ण होने पर रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड के अंतिम चार अंक, पैन कार्ड (यदि उपलब्ध हो) तथा पूरा भरा हुआ केवाईसी फॉर्म भी जमा करना आवश्यक है। साथ ही लाभार्थी का बैंक बचत खाता एवं यूपीआई से संबंधित प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। औपचारिकताएं पूर्ण होने के उपरांत राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 से 2012 के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बालिकाओं का मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना के तहत यूटीआई बैंक के माध्यम से फॉर्म भरा गया था, जिसके बाद यूटीआई बॉन्ड लाभार्थियों को भेजे गए थे। इन बांड का वितरण आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से किया गया था। अब वर्ष 2026 में इन बॉन्डों की परिपक्वता पर राशि मिलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आईसीडीएस के तहत जिले भर में इस योजना को लेकर अभियान तेज कर दिया गया है, ताकि कोई भी पात्र लाभुक वंचित न रह जाए। योजना का लाभ 18 वर्ष पूर्ण कर चुकी अविवाहित कन्याओं के साथ-साथ विवाहित लाभार्थियों को भी दिया जा रहा है। जो कन्याएं विवाह के बाद दूसरे स्थान पर चली गई हैं, उनके लिए भी आंगनबाड़ी केंद्र पर विशेष सर्वेक्षण फॉर्म भरे जा रहे हैं।विवाहित लाभार्थियों के लिए फॉर्म में विवाह की तिथि, वर्तमान निवास, वैवाहिक स्थिति एवं जीवन स्थिति (जीवित/अन्य विवरण) से संबंधित कॉलम भरे जा रहे हैं, ताकि सत्यापन के बाद उन्हें भी योजना का लाभ मिल सके। समाज कल्याण विभाग ने लाभार्थियों से अपील की है कि वे समय रहते अपने आंगनबाड़ी केंद्र से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज जमा करें, ताकि मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली राशि समय पर उनके खाते में स्थानांतरित की जा सके।

योगी मॉडल के कारण संकट से निकल समृद्धि तक पहुंची खेती-किसानी

बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू स्टेट: खेत से खुशहाली तक पहुंचे यूपी के किसान योगी मॉडल के कारण संकट से निकल समृद्धि तक पहुंची खेती-किसानी  अन्नदाताओं ने किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा पौने नौ वर्ष में अन्नदाता बना सशक्त, कृषि क्षेत्र में आई क्रांति  लखनऊ उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर यकीन किया तो 2017 से पहले के खाद्यान्न संकट, कालाबाजारी व अराजकता से मुक्ति मिली और किसान पौने नौ वर्ष में ही समृद्धि के पथ पर अग्रसर हो गए। योगी मॉडल का ही असर है कि देश की कुल कृषि भूमि का महज 10 फीसदी हिस्सा रखने वाले उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में योगदान 21 फीसदी हो चुका है। 2017 से पहले कृषि क्षेत्र में विकास दर सिंगल डिजिट पर टिकी थी, लेकिन योगी सरकार में कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों में यह विकास दर पिछले तीन सालों में 14 फीसदी से अधिक रही। यूपी के किसान ‘खेत से खुशहाली’ तक पहुंचे हैं। डबल इंजन सरकार की नीतियों से उत्तर प्रदेश की खेती उत्पादकता के नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। कृषि क्षेत्र को लेकर सरकार की सोच और नीतियों ने उस तस्वीर को बदला, जिसमें किसान खुद को हाशिये पर महसूस करता था। 2017 में सत्ता संभालते ही योगी सरकार द्वारा सबसे पहले किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये कर्ज माफ करने की बात हो या पहली बार वैज्ञानिकों द्वारा ‘लैब से निकल कर लैंड’ तक पहुंच कर विकसित कृषि संकल्प अभियान के जरिए उत्तर प्रदेश के 14170 गांवों में 23.30 लाख किसानों से संवाद साधने की, योगी युग में खेती सिर्फ जीविका का साधन नहीं, बल्कि विकास की धुरी बन गई है।  वोटबैंक नहीं, अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना किसान  खेती-किसानी को प्राथमिकता और पारदर्शी व्यवस्था के कारण पौने नौ वर्ष में यूपी की तस्वीर बदली। कृषि व्यवस्था सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि ज़मीनी बदलाव का माध्यम बनी। कभी कर्ज़, सिंचाई और भुगतान की परेशानियों से जूझने वाला किसान सरकार की प्राथमिकता के केंद्र में आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट कर दिया कि किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस सोच के साथ कृषि क्षेत्र में अनेक सुधार शुरू हुए। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पारदर्शिता से फसल खरीद होने लगी। भुगतान व्यवस्था को समयबद्ध किया गया। किसान को उपज का उचित मूल्य मिलने लगा। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाया। नहरों के पुनर्जीवन, नलकूपों की संख्या में वृद्धि और मुफ्त/रियायती सिंचाई योजनाओं ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई। सूखे और जल संकट वाले इलाकों में भी खेती सांस लेने लगी। किसानों के सम्मान पर केंद्रित नीतियां  2017 के पहले जिस उत्तर प्रदेश में किसान आत्महत्या करने पर मजबूर था, वहां 2017 के बाद किसानों का सम्मान होने लगा। पीएम मोदी के मार्गदर्शन में एक क्लिक पर किसानों को सम्मान निधि मिलने लगी, जिसमें यूपी अग्रणी भूमिका में रहा। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की जारी 21वीं किस्त तक उत्तर प्रदेश के किसानों को 94,668.58 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। दो करोड़ से अधिक किसानों को किसान पाठशाला के जरिए नवीन तकनीक व उन्नत खेती से जोड़ा गया। 16 लाख निजी ट्यूबवेल से जुड़े किसानों का ऋण माफ किया गया। सहकारिता के माध्यम से संचालित एलडीबी द्वारा किसानों को साढ़े 11 प्रतिशत ब्याज दर पर लोन मिलता था, अब यह छह फीसदी पर मिलेगा। लखनऊ के अटारी में भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की स्मृति में सीड पार्क, बाराबंकी में टिश्यू कल्चर लैब के लिए 31 एकड़ भूमि तथा पीलीभीत में बासमती उत्पादन व प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए सात एकड़ जगह चिह्नित की गई।  गन्ने ने भरी ग्रामीण अर्थतंत्र में नई ऊर्जा  योगी सरकार ने गन्ना किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में ₹30 प्रति कुन्तल की वृद्धि की। अगेती गन्ना प्रजाति का मूल्य ₹400 प्रति कुन्तल तथा सामान्य प्रजाति का मूल्य ₹390 प्रति कुन्तल निर्धारित किया। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को लगभग ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान होगा। योगी सरकार के कार्यकाल में चौथी बार गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। यह निर्णय न केवल गन्ना किसानों की आमदनी में वृद्धि करेगा, बल्कि प्रदेश के ग्रामीण अर्थतंत्र में नई ऊर्जा भी भरेगा। 2017 के पहले तक किसानों का असंतोष अब विश्वास में बदला है। 2017 से अब तक 2.96 लाख करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान किया गया।  विश्वास, स्थिरता और भविष्य की उम्मीद सरकार ने सिर्फ परंपरागत खेती पर ही नहीं, बल्कि तकनीक और नवाचार पर भी जोर दिया। मृदा स्वास्थ्य कार्ड, उन्नत बीज, कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसान को आधुनिक खेती से जोड़ा गया। बीज से लेकर बाजार तक की यात्रा को आसान बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। योगी सरकार ने अपनी नीतियों से संदेश दिया कि खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि सम्मानजनक आजीविका का सबसे बड़ा माध्यम है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन, खरीद और किसान कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में अब अग्रणी राज्यों में गिना जा रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में यूपी में खेती विश्वास, स्थिरता और भविष्य की उम्मीद की कहानी बनकर उभरी है। यहां किसान खुद को अकेला नहीं महसूस करता, क्योंकि वह जानता है कि सरकार पग-पग पर साथ खड़ी है।