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एक करोड़ 25 लाख से अधिक लाड़ली बहनों के खातों में आएंगे 1836 करोड़ रूपये

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार, 16 जनवरी को माखन नगर (बाबई), जिला नर्मदापुरम में आयोजित लाड़ली बहनों के राज्य स्तरीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना अंतर्गत प्रदेश की बहनों के खातों में राशि का अंतरण करेंगे। प्रदेश की लगभग 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार से अधिक पात्र बहनों के खातों में 1836 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जायेगी। साथ ही 29 लाख बहनों को गैस सिलेंडर रीफिलिंग के लिए 90 करोड़ से अधिक राशि का अंतरण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण किया जायेगा। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की शुरुआत जून 2023 से की गई थी। योजना के अंतर्गत माह नवंबर 2025 से राशि में 250 रुपये की वृद्धि की गई है। अब पात्र हितग्राही महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना में जून 2023 से दिसंबर 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता की 31 किश्तों का नियमित रूप से अंतरण किया जा चुका है। जनवरी 2026 में योजना की 32वीं किश्त का लाड़ली बहनों के खातों में अंतरण किया जायेगा। योजना अंतर्गत अब तक जून 2023 से दिसंबर 2025 की अवधि में कुल 48 हजार 632 करोड़ 70 लाख रुपये की राशि हितग्राही महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी है। जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के दौरान 38 हजार 635 करोड़ 89 लाख रुपये का अंतरण किया गया है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मान सुनिश्चित किया गया है। आगामी समय में योजना की हितग्राही महिलाओं को विभिन्न रोजगार, स्वरोजगार एवं कौशल उन्नयन कार्यक्रमों से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे, जिससे वे आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बन सकें।  

3 अधीक्षण यंत्री और 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी

 प्रमुख सचिव श्री नरहरि ने जल जीवन मिशन की समीक्षा की भोपाल प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने जल जीवन मिशन के कार्यों की विस्तृत समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। श्री नरहरि ने कार्यों में शिथिलता और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने 3 अधीक्षण यंत्रियों एवं 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने के निर्देश दिये। साथ ही स्पष्ट किया कि कार्यों की धीमी प्रगति के लिए संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रदेश के समस्त जिलों के अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री एवं सहायक यंत्री स्तर तक के अधिकारी से जल जीवन मिशन के अंतर्गत चल रही योजनाओं की अद्यतन स्थिति की विस्तार से जानकारी ली। समीक्षा बैठक में एकल नलजल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने की प्रगति की जिलेवार समीक्षा की गई। प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट के आधार पर यह पाया गया कि कई जिलों में घरों तक नल कनेक्शन प्रदान किए जाने की गति निर्धारित लक्ष्यों और तय समय-सीमा के अनुरूप नहीं है, जिससे मिशन के उद्देश्यों की पूर्ति प्रभावित हो रही है। प्रमुख सचिव ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि एकल नलजल प्रदाय योजनाओं के अंतर्गत शेष बचे कार्यों को निर्धारित समयावधि में अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से प्रगति की निगरानी की जाएगी। प्रमुख सचिव श्री नरहरि ने कहा कि जल जीवन मिशन राज्य शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल भौतिक संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण जनजीवन की गुणवत्ता में सुधार से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि भविष्य में यदि कार्यों की प्रगति में किसी प्रकार की शिथिलता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख सचिव ने कहा कि फील्ड स्तर पर समन्वय बढ़ाते हुए गुणवत्ता, समय-सीमा और पारदर्शिता के साथ कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।  

नशा करने वालों को न दें सामाजिक सम्मान : ऊर्जा मंत्री तोमर

स्वच्छ, हरे-भरे, प्रदूषण मुक्त और नशामुक्त शहर के लिए हुआ सुंदरकांड पाठ भोपाल नशा संपूर्ण समाज के लिए एक बड़ी समस्या है। नशे के नाश के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आकर प्रयास करना चाहिए। यह बात ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने गुरुवार को जनकल्याण समिति के नवीन भवन निर्माण के भूमिपूजन समारोह में कही। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने कहा नशा मुक्त ग्वालियर बनाने के लिए युवाओं को आगे आकर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने आहवान किया कि आज यह शपथ लें कि मैं भविष्य में किसी भी प्रकार का नशा नहीं करुंगा। साथ ही अपने वार्ड ,गली, मोहल्ले के लोगों, साथियों, परिवार के सदस्यों एवं समाज के स्वजनों को भी इससे दूर रखूंगा जिससे नशा मुक्त समाज के निर्माण का सच्चा सेवक बन सकूं। नशा करने वाले व्यक्तियों को सम्मान देना बन्द करें। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि नशा एक गंभीर समस्या है। नशा न केवल व्यक्ति का जीवन बर्बाद करता है बल्कि परिवार के लिए भी संकट पैदा करता है। उन्होंने कहा कि हमें अच्छी संगत में रहना चाहिए, हम जैसे लोगों के साथ रहेंगे, हम वैसे संस्कार सीखेंगे। नशा मुक्ति से न केवल नागरिकों का अच्छा स्वास्थ्य होगा, बल्कि हमारे शहर का भी विकास होगा। नशा एक बुरी आदत है, जो व्यक्ति को तन, मन और धन से खोखला कर देती है। इसलिए इस प्रवृत्ति का सामाजिक बहिष्कार करें। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने सुन्दरकाण्ड पाठ में शामिल श्रद्धालुओं को अपने शहर को स्वच्छ और भरा बनाने के लिए डस्टबिन प्रदान करते हुए शपथ दिलाई कि ग्वालियर को स्वच्छ, हरा-भरा, प्रदूषण मुक्त और नशा मुक्त बनाने के अभियान के लिए खुद समय दें। साथ ही अपने आसपास रहने वाले लोगों को भी इस अभियान से जुड़ने और साफ-सफाई रखने के लिए प्रेरित करें। उल्लेखनीय है कि ऊर्जा मंत्री श्री तोमर की पहल पर ग्वालियर शहर को स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त, नशा मुक्त बनाने के लिए आरंभ हुई संगीतमय रामधुन की श्रृंखला में जन कल्याण समिति ग्वालियर द्वारा गुरुवार को गणेश कॉलोनी, गोवर्धन बिहार, खरगेश्वर मंदिर चार शहर का नाका में संगीतमय सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन किया गया। इस दौरान जनकल्याण समिति के सभी सदस्य और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लांच की मध्यप्रदेश स्पेसटेक नीति-2026

एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति एआई पर मिशन मोड पर होगा कार्य प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन को दृष्तिगत रखकर आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश जन-कल्याणकारी योजनाओं में एआई का प्रभावी उपयोग करेगा मध्यप्रदेश प्रदेश में जल्द लाई जाएगी राज्य एआई नीति मुख्यमंत्री ने ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026’ का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार एआई को नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। एआई आधारित प्रशासनिक व्यवस्था और प्रबंधन, तकनीक-प्रौद्योगिकी और अकादमिक क्षेत्र में एआई आधारित नवाचार विकसित भारत@ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रभावी रूप से सहायक होंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी हर क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण का अध्ययन केंद्र और शंकराचार्य जी की साधना का केंद्र भी है। राज्य सरकार मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार सभी विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए एआई का उपयोग कर रही है। एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति है। हमारा राज्य जल्द ही एआई नीति भी लाएगा और एआई के लिए मिशन मोड पर व्यापक रूप से कार्य किया जाएगा। प्रदेश के माइनिंग और हेल्थ सेक्टर में एआई के उपयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं वाला राज्य है, जिसमें आगे बढ़ने की पर्याप्त क्षमता है। विकसित भारत के लक्ष्य प्राप्ति में हमारी सरकार हर कदम पर प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन के अनुरूप कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को भोपाल के ताज लेक फ्रंट में ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026’ का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एआई लिटरेसी मिशन के तहत फ्यूचर स्किल्स फॉर एआई पावर्ड भारत के लिए कौशल रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश स्पेस टेक नीति-2026 लांच की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विभिन्न समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के संचालन के लिए आयोजित उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन और मध्यप्रदेश इनोटेक प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे ने “एआई फॉर पीपल, प्लेनेट एंड प्रोग्रेस-मध्यप्रदेश रोडमैप टू इंपैक्ट” पर राज्य का प्रमुख एआई विजन प्रस्तुत किया। एआई को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने के उद्देश्य से एआई लिटरेसी मिशन के अंतर्गत आरंभ युवा एआई फॉर ऑॅल पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। एम.पी. राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक श्री आशीष वशिष्ठ ने कॉन्फ्रेंस के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एमपीएसईडीसी प्रदेश में एआई इंफ्रॉस्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए नोडल एजेंसी है।  स्पेस टेक नीति – अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीजनल एआई इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस में प्रदेश की स्पेस टेक नीति लांच की। उन्होंने कहा कि नीति राज्य को भारत के उभरते अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अग्रणी और भविष्य-उन्मुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। नीति के तहत स्पेस टेक स्टार्ट-अप्स, एमएसएमई और उद्योगों को वित्तीय, अवसंरचनात्मक और अनुसंधान सहयोग प्रदान कर कृषि, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन एवं शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा दिया जाएगा। यह नीति निवेश, नवाचार और राष्ट्रीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में मध्यप्रदेश की भूमिका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। नवाचार और कौशल विकास के लिए हुए 7 एमओयू पर हस्ताक्षर मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 6 समझौता ज्ञापन-यंगोवेटर (आंसर फाउंडेशन), सीईईडब्ल्यू (कॉउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर), गूगल, नैसकॉम, एआईएसईसीटी और भाषिणी के साथ किए गए। ये समझौते शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार एवं रोबोटिक्स को बढ़ावा देने, जलवायु परिवर्तन व सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में एआई आधारित शोध एवं निर्णय सहयोग विकसित करने, शासकीय विभागों में एआई और क्लाउड तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करने, राज्य में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना एवं कौशल विकास को गति देने, राष्ट्रीय एआई मिशन से जुड़कर कंप्यूटर एवं डेटा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और एआई जागरूकता बढ़ाने और एआई आधारित शासन को सक्षम करने के उद्देश्य से किए गए हैं। इसके अलावा इंडिया एआई और तकनीकी शिक्षा,कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के मध्य एक समझौता ज्ञापन हुआ। उच्च गुणवत्ता वाली एआई शिक्षा तक पहुंच को व्यापक बनाने के लिए इंडिया एआई मिशन देश के टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में 570 डेटा एवं एआई लैब्स की स्थापना कर रहा है। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग, मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश में 30 डेटा एवं एआई लैब्स स्थापित की जाएंगी।   आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीक नहीं, नीति, समाज और अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक सशक्त माध्यम बना : मुख्य सचिव श्री जैन मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा है कि एआई के उपयोग से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक व नागरिक-केंद्रित होगी। मुख्य सचिव श्री जैन ने बताया कि यह कांफ्रेंस आगामी इंडिया एआई इंपैक्ट समिट-2026 से पूर्व देश में एआई इको सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निर्धारित सतत आर्थिक विकास लक्ष्य को प्राप्त करने में गवर्नेंस में एआई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्योग और अकादमिक संस्थानों के सहयोग, स्किलिंग व री-स्किलिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य रिसर्च, इनोवेशन और नॉलेज आधारित होगा। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यूपीआई को भारत की वैश्विक पहचान बताया। मध्यप्रदेश में समग्र आईडी जैसी पहलों के माध्यम से डेटा-आधारित और परिवार-केंद्रित शासन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्य सचिव श्री जैन  ने कहा कि ऐसे मंच नवाचार और सहयोग को नई दिशा देते हैं। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय प्रयास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। एआई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये राज्य ने बनाये 4 प्रमुख स्तंभ : एसीएस श्री दुबे अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे ने कहा कि प्रदेश सरकार ने “AI for People, Planet, and Progress” के … Read more

इको पर्यटन क्षेत्र गिदली घुघरा में अनुभूति कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने प्रकृति से सीखा जीवन का पाठ

भोपाल मध्यप्रदेश इको टूरिज्म विकास बोर्ड एवं मध्यप्रदेश वन विभाग के संयुक्त तत्वाधान में पश्चिम (सामा.) वनमंडल मंडला अंतर्गत वन परिक्षेत्र बम्हनी के इको-पर्यटन क्षेत्र गिदली घुघरा में अनुभूति कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया, जिसकी थीम "मैं भी बाघ", "हम हैं बदलाव" और "हम हैं धरती के दूत" रही। वन एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिये शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रकृति, वन एवं जैव विविधता के प्रति जागरूक करना तथा पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना रहा। कार्यक्रम में शासकीय सांदीपनि विद्यालय चिरईडोंगरी के कुल 135 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। मास्टर ट्रेनर श्री सी.एम. शर्मा, प्रशिक्षु आईएफएस श्री आकाश साहू तथा वन परिक्षेत्र बम्हनी का समस्त स्टॉफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम के दौरान प्रकृति पथ भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों को वन क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न वृक्षों, वनस्पतियों एवं औषधीय महत्व की जड़ी-बूटियों की पहचान कराई गई तथा उनके उपयोग और महत्व की जानकारी भी दी गई। इसके साथ वनक्षेत्र में विचरण करने वाले वन्य-जीवों जैसे बाघ, तेंदुआ, सांभर और चीतल के अप्रत्यक्ष साक्ष्यों के माध्यम से वन्य-प्राणियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। विद्यार्थियों को मृदा अपरदन एवं मृदा संरक्षण, वन्य-जीवों और उनके प्राकृतिक पर्यावास के पारस्परिक सह-सम्बन्ध, वनों की पारिस्थितिकीय भूमिका एवं वनों में पाए जाने वाले लघु वनोपज जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरल एवं रोचक तरीके से जानकारी दी गई। बच्चों ने प्रत्यक्ष रूप से प्रकृति को देखकर सीखने का अनूठा अनुभव प्राप्त किया। कार्यक्रम को और अधिक रोचक बनाने के लिये पर्यावरण आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री आशुतोष महादेव ठाकुर और प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टर श्री संस्कार बावरिया उपस्थित रहे, जिन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिये प्रोत्साहित किया। इसके अलावा ग्राम पंचायत डुंगरिया सरपंच श्री धूपसिंह मरकाम और अध्यक्ष वन सुरक्षा समिति झाँगुल श्री श्याम उइके भी उपस्थित रहे।  

एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी: दिल्ली से जा रही फ्लाइट के APU में आग, दूसरी विमान का इंजन भी क्षतिग्रस्त

नई दिल्ली दिल्ली में 24 घंटे के भीतर एयर इंडिया के दो विमानों में सवार यात्री बाल-बाल बच गए। एक विमान के एपीयू में आग लगने के बाद उसे आनन-फानन में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर वापस उतारा गया तो दूसरे के इंजन ने एक कंटेनर को खींच लिया। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।   सिंगापुर जा रहा एयर इंडिया का एक विमान तकनीकी खराबी के कारण बुधवार देर रात राष्ट्रीय राजधानी लौट आया। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि विमान में करीब 190 लोग सवार थे। सूत्रों के अनुसार, ड्रीमलाइनर विमान में एपीयू (ऑक्सिलियरी पावर यूनिट) में आग की चेतावनी मिली, जिसके बाद विमान करीब एक घंटे तक हवा में रहने के बाद दिल्ली लौट आया। यात्रियों को वैकल्पिक विमान से सिंगापुर भेजा गया। इस संबंध में संपर्क करने पर एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने बताया कि 14 जनवरी को दिल्ली से सिंगापुर जा रही उड़ान एआई 2380 के परिचालन दल ने संभावित तकनीकी समस्या के चलते उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद एहतियातन दिल्ली लौटने का फैसला किया। रात करीब एक बजे IGI पर दोबारा उतरा प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, 'विमान दिल्ली में सुरक्षित उतरा। दिल्ली में हमारी टीमों ने यात्रियों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान की और उन्हें वैकल्पिक विमान से सिंगापुर के लिए रवाना किया गया।' प्रवक्ता ने इस अप्रत्याशित स्थिति के कारण यात्रियों को हुई असुविधा को लेकर खेद भी जताया। उड़ानों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘फ्लाइटरडार24 डॉट कॉम’ पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बोइंग 787-9 विमान से संचालित यह उड़ान करीब एक घंटे तक हवा में रही और बुधवार देर रात करीब एक बजे दिल्ली में वापस उतरी। विमान के इंजन में घुसा कंटेनर एक अन्य घटना में एयर इंडिया के एक विमान ने एयरपोर्ट पर एक कंटेनर को अपनी ओर खींच लिया। इससे इंजन क्षतिग्रस्त हो गया। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक एयर इंडिया के A350 विमान के इंजन में गुरुवार को कंटेनर घुस गया। इससे इंजन क्षतिग्रस्त हो गया। विमान में सवार एक यात्री ने घटना को अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया। घटना पर एयर इंडिया का बयान सामने नहीं आया है।  

अभी तक 49 लाख 87 हजार मीट्रिक टन से अधिक हुई धान की खरीदी

20 जनवरी तक होगी धान खरीदी भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 7 लाख 40 हजार 914 किसानों से 49 लाख 87 हजार 147 मीट्रिक टन धान की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा चुकी है। उन्होंने बताया है कि गत वर्ष 43 लाख 52 हजार 905 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रूपये प्रति क्विंटल है। धान की खरीदी 20 जनवरी 2026 तक की जायेगी। किसानों को 8291 करोड़ रूपये से अधिक राशि का भुगतान भी किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि धान विक्रय के लिये 8 लाख 59 हजार 822 किसानों ने पंजीयन कराया है। एक दिसम्बर से शुरू हुई धान खरीदी के लिये विभिन्न जिलों में 1436 केन्द्र बनाये गये हैं। क्रय की गयी धान की 79 प्रतिशत मात्रा 39 लाख 19 हजार 277 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है।  

जालंधर की अदालत का बड़ा फैसला: आतिशी से जुड़ा वीडियो फर्जी, हटाने के निर्देश

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी के वीडियो मामले जालंधर की एक अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद कोर्ट ने पाया है कि जांच में पता चला है कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई थी। इस रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने इस वीडियो को सभी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म से हटाने के निर्देश दिए हैं।साथ ही, जिन भी अकाउंट्स से यह वीडियो पोस्ट किया गया है, उनसे संबंधित सभी लिंक भी डिलीट करने के निर्देश दिए गए हैं।

आबकारी विभाग तैयार कर रहा नई आबकारी नीति, प्रदेश में डिस्टिलरी प्लांट को मिलेगा बढ़ावा

प्रदेश सरकार ने आबकारी विभाग को राजस्व बढ़ाने के लिए दिए थे निर्देश, विभाग नई आबकारी नीति पर कर रहा मंथन लाइसेंस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध करने, शुल्क संरचना को युक्तिसंगत बनाने और आवश्यक अनुमतियों में सहूलियत देने पर विचार किया जा रहा   नई आबकारी नीति में निर्यात पर विभिन्न सहूलियतें देने के लिए किया जा रहा मंथन निर्यात को आसान बनाने को नियमों में ढील देने, लॉजिस्टिक्स को सुगम बनाने और अतिरिक्त प्रोत्साहन देने पर हो रहा विचार   लखनऊ, प्रदेश में औद्योगिक निवेश को गति देने और राजस्व संसाधनों को सशक्त बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। ऐसे में आबकारी विभाग द्वारा नई आबकारी नीति 2026-27 पर मंथन किया जा रहा है। नई नीति के तहत प्रदेश में डिस्टिलरी प्लांट की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा, साथ ही निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सहूलियतों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। नई आबकारी नीति से निवेशकों में बढ़ेगा भरोसा प्रदेश सरकार का मानना है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजस्व बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना आवश्यक है। इसी के तहत आबकारी विभाग को राजस्व वृद्धि के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। इन निर्देशों के अनुपालन में विभाग ने डिस्टिलरी प्लांट्स को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है, जिससे न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इसके लिए प्रदेश में नई डिस्टिलरी इकाइयों की स्थापना को सरल और आकर्षक बनाया जाएगा। लाइसेंस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध करने, शुल्क संरचना को युक्तिसंगत बनाने और आवश्यक अनुमतियों में सहूलियत देने पर विचार किया जा रहा है। इससे प्रदेश में निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और उत्तर प्रदेश डिस्टिलरी उद्योग के क्षेत्र में एक बड़े हब के रूप में उभरेगा। बता दें कि निवेश मित्र, सिंगल विंडो सिस्टम और उद्योग अनुकूल नीतियों के जरिए प्रदेश ने रिकॉर्ड निवेश प्रस्ताव हासिल किए हैं। नई आबकारी नीति उसी श्रृंखला का हिस्सा है। निर्यात को बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही विभाग की ओर से नई आबकारी नीति में निर्यात पर विशेष फोकस किया जा रहा है। प्रदेश में उत्पादित स्परिट, अल्कोहल और इससे जुड़े उत्पादों के निर्यात को आसान बनाने के लिए नियमों में ढील देने, लॉजिस्टिक्स को सुगम बनाने और अतिरिक्त प्रोत्साहन देने पर विचार चल रहा है। इससे प्रदेश के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनेंगे और विदेशी मुद्रा अर्जन में भी वृद्धि होगी। डिस्टिलरी प्लांट्स के विस्तार से आबकारी विभाग को राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसके साथ ही कृषि आधारित कच्चे माल की मांग बढ़ेगी, जिससे किसानों को भी लाभ मिलेगा। गन्ना, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों की खपत बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। डिस्टिलरी उद्योग के विस्तार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के हजारों अवसर सृजित होने की संभावना है।

योगी सरकार की नीतियों से रोजगार सृजन के साथ ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को मिल रही है दृढ़ता

लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब नवाचार और निवेश विश्वास का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) पॉलिसी के माध्यम से प्रदेश सरकार ने स्टार्टअप और इनोवेशन इकोसिस्टम को जो दिशा दी है, वह प्रदेश को भारत के सबसे मजबूत प्रौद्योगिकी और उद्यमिता हब के रूप में स्थापित करने की क्षमता और दक्षता रखती है। यह पहल योगी सरकार के उस विजन का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत रोजगार सृजन के साथ-साथ नॉलेज इनेबल्ड (ज्ञान आधारित) अर्थव्यवस्था को दृढ़ता प्रदान करना प्राथमिकता है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 90 जीसीसी हैं। इनकी संख्या आने वाले समय में एक हज़ार से अधिक करने का लक्ष्य है। जीसीसी के जरिए नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव योगी सरकार की नीतियों में जीसीसी को केवल बैक ऑफिस यूनिट के रूप में नहीं देखा गया है। इन्हें रिसर्च एंड डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और डिजिटल इंजीनियरिंग के गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे उत्तर प्रदेश में हाई वैल्यू वाले कार्यों को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था नवाचार आधारित मॉडल की ओर त्वरित गति से अग्रसर होगी। एआई,  ब्लॉकचेन और ड्रोन जैसे क्षेत्रों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रदेश सरकार द्वारा एआई, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, ड्रोन, 5जी, 6जी और हेल्थटेक जैसे क्षेत्रों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से जीसीसी और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सीधा सहयोग और समन्वय विकसित होगा। योगी सरकार का उद्देश्य है कि उत्तर प्रदेश वैश्विक कंपनियों के कार्यस्थल के साथ-साथ नई तकनीकों के निर्माण का केंद्र बने। यही कारण है कि आईआईटी कानपुर, आईआईएम लखनऊ सहित अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों को नीति के केंद्र में रखा गया है। स्टार्टअप्स और जीसीसी की साझेदारी से वैश्विक समाधान उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों का प्रमाण है। अब जीसीसी और स्टार्टअप्स के बीच प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (अंतिम उत्पाद/सेवा का प्रारंभिक मॉडल) और समस्या समाधान आधारित साझेदारी को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे स्थानीय स्टार्टअप्स को वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारतीय नवाचार का लाभ प्राप्त होगा। यह सहयोग मॉडल प्रदेश को आत्मनिर्भर भारत के विजन का ठोस स्तंभ बनाने की ओर बढ़ रहा है। युवाओं के लिए रोजगार के साथ उद्यमिता का नया रास्ता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट मत है कि सच्चा विकास वही है, जिसमें युवा नौकरी मांगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बने। जीसीसी-स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार से प्रदेश के युवाओं को उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के साथ-साथ उद्यमिता के भी उचित अवसर प्राप्त होंगे। महिलाओं, दिव्यांगों और युवाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन इस नीति को सामाजिक रूप से भी समावेशी बनाते हैं। उत्तर प्रदेश से तय होगा विकसित भारत का भविष्य वर्तमान में उत्तर प्रदेश नीतिगत स्थिरता, तेज निर्णय और पारदर्शी व्यवस्था का पर्याय बन चुका है। निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और तकनीकी जगत की दृष्टि प्रदेश पर टिकी है। योगी सरकार के नेतृत्व में स्टार्टअप और जीसीसी का यह संगम उत्तर प्रदेश को भारत का इनोवेशन पावरहाउस बनाने की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यही कदम विकसित भारत के विजन के अंतर्गत देश की आर्थिक दिशा और वैश्विक पहचान को नई बुलंदी देगा।