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झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष बने आदित्य साहू

रांची. भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड में संगठनात्मक नेतृत्व की कमान आदित्य साहू को सौंपकर स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी अब राज्य में अपेक्षाकृत युवा, ऊर्जावान और जमीनी नेतृत्व के सहारे अपनी राजनीतिक धार को तेज करना चाहती है। निचले स्तर से संगठन में काम करते हुए प्रदेश अध्यक्ष पद तक पहुंचे साहू का सफर भाजपा की कैडर आधारित राजनीति का उदाहरण है। उनका चयन केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि झारखंड में भाजपा की भविष्य की रणनीति का संकेत भी है। वहीं, इस चयन से ओबीसी समाज को भी साधने का प्रयास किया गया है। झारखंड भाजपा का नेतृत्व लंबे समय तक अपेक्षाकृत वरिष्ठ और अनुभव आधारित चेहरों के हाथ में रहा है। ऐसे नेतृत्व ने संगठन को स्थिरता तो दी, लेकिन बदले हुए सामाजिक–राजनीतिक समीकरणों के अनुरूप आक्रामक विस्तार की कमी भी महसूस की गई। इसके विपरीत आदित्य साहू का राजनीतिक विकास छात्र राजनीति, मंडल और जिला स्तर के संगठनात्मक कार्यों से होकर हुआ है। यह अनुभव उन्हें कार्यकर्ताओं की वास्तविक चुनौतियों और अपेक्षाओं को समझने में मदद करता है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो साहू का नेतृत्व माडल अधिक सहभागी और संवाद आधारित प्रतीत होता है। कैडर आधारित ताकत पर फोकस आदित्य साहू बार-बार यह दोहराते रहे हैं कि भाजपा की असली ताकत उसका समर्पित कैडर है। गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों में भाजपा की सफलता का प्रमुख कारण मजबूत बूथ संरचना और प्रशिक्षित कार्यकर्ता माने जाते हैं। झारखंड में भाजपा संगठनात्मक रूप से मौजूद तो है, लेकिन कई क्षेत्रों में बूथ स्तर की सक्रियता कमजोर रही है। साहू की रणनीति अन्य राज्यों के सफल मॉडल से सीख लेते हुए झारखंड में कैडर को पुनः सक्रिय करने की है। साहू के नेतृत्व की सबसे अहम विशेषता युवा नेतृत्व को आगे लाने की मंशा है। पार्टी के भीतर लंबे समय से यह चर्चा रही है कि झारखंड जैसे युवा आबादी वाले राज्य में संगठन का चेहरा अपेक्षाकृत उम्रदराज दिखता है। तुलनात्मक रूप से देखें तो भाजपा ने हाल के वर्षों में कई राज्यों में युवा प्रदेश अध्यक्षों और युवा मोर्चा से निकले नेताओं को आगे बढ़ाया है। आदित्य साहू भी इसी प्रयोग को झारखंड में लागू करना चाहते हैं, ताकि पार्टी नए कलेवर के साथ अधिकाधिक प्रभावी बन सके। सामाजिक समीकरणों की समझ झारखंड की राजनीति आदिवासी, पिछड़ा, अल्पसंख्यक और शहरी–ग्रामीण विभाजन के जटिल सामाजिक ताने-बाने पर आधारित है। भाजपा पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि वह आदिवासी और स्थानीय मुद्दों को पर्याप्त संवेदनशीलता के साथ नहीं उठाती। साहू के सामने चुनौती है कि संगठन को सामाजिक रूप से अधिक समावेशी बनाया जाए। अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड में क्षेत्रीय अस्मिता का सवाल अधिक प्रभावशाली है। यदि साहू इस पहलू को संगठनात्मक रणनीति में सही ढंग से शामिल कर पाते हैं तो भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ सकती है। तुलनात्मक विश्लेषण करें तो जिन राज्यों में भाजपा ने संगठन को सरकार से ऊपर रखा, वहां पार्टी का आधार मजबूत हुआ। झारखंड में फिलहाल भाजपा सत्ता में नहीं है, इसलिए संगठन की भूमिका और भी अहम हो जाती है। साहू के सामने अवसर है कि वह विपक्ष में रहते हुए जन आंदोलनों, मुद्दा आधारित राजनीति और निरंतर जनसंपर्क के जरिए संगठन को सक्रिय रखें। चुनौतियां और संभावनाएं आदित्य साहू की राह आसान नहीं है। गुटबाजी, संसाधनों की कमी और सत्तारूढ़ गठबंधन की मजबूत पकड़ जैसी चुनौतियां उनके सामने हैं। लेकिन युवा टीम, स्पष्ट संगठनात्मक दृष्टि और कैडर आधारित कामकाज के जरिए वे इन चुनौतियों को अवसर में बदल सकते हैं। यदि वे अन्य राज्यों के सफल संगठनात्मक प्रयोगों को झारखंड की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने में सफल होते हैं तो भाजपा फिर से राज्य में एक मजबूत और भरोसेमंद राजनीतिक विकल्प के रूप में उभर सकती है। आदित्य साहू के नेतृत्व की प्रमुख विशेषताएं     निचले स्तर से प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर, संगठन की जमीनी समझ     छात्र राजनीति और मंडल–जिला संगठन का व्यावहारिक अनुभव     कैडर आधारित राजनीति पर स्पष्ट फोकस     वरिष्ठता नहीं, सक्रियता और प्रदर्शन को प्राथमिकता पूर्व नेतृत्व बनाम नया नेतृत्व     पूर्व नेतृत्व में अनुभव आधारित, अपेक्षाकृत स्थिर संगठन     सीमित युवा भागीदारी     बूथ स्तर पर असमान सक्रियता आदित्य साहू का मॉडल     युवा और ऊर्जावान नेतृत्व     बूथ, मंडल और मीडिया प्रबंधन पर समान जोर     लगातार संवाद और फीडबैक आधारित संगठन संगठनात्मक रणनीति के प्रमुख बिंदु     बूथ स्तर पर कार्यकर्ता नेटवर्क को पुनर्जीवित करने की योजना     मंडल और जिला इकाइयों में युवाओं को नेतृत्व की जिम्मेदारी     प्रशिक्षण शिविरों और संगठनात्मक कार्यशालाओं पर जोर अन्य राज्यों से सीख     गुजरात, यूपी, एमपी में मजबूत कैडर माडल की सफलता     बंगाल में विपक्ष में रहते हुए संगठन विस्तार का उदाहरण     छत्तीसगढ़ में बूथ मैनेजमेंट और माइक्रो प्लानिंग का प्रभाव झारखंड की विशेष चुनौतियां     आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भरोसे की कमी     क्षेत्रीय अस्मिता और स्थानीय मुद्दों की अनदेखी का आरोप     सत्ता से बाहर होने के कारण सीमित संसाधन     संगठन के भीतर गुटीय संतुलन आदित्य साहू के सामने अवसर     युवा आबादी से सीधा जुड़ाव     संगठन को आंदोलनकारी स्वरूप देने की संभावना     सरकार बनाम संगठन की बहस में संगठन को केंद्र में लाने का मौका     भाजपा को मजबूत वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने का अवसर

चिराग के दही-चूड़ा भोज में चेतन के पास पहुंचे CM नीतीश

पटना. मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा भोज सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि सियासी ताकत दिखाने का मंच बन गया। गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक के बाद एक कई दही-चूड़ा आयोजनों में शिरकत कर राजनीतिक संदेश दिए। कभी चिराग पासवान के ऑफिस पहुंचे, तो कभी बाहुबली आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद के घर जाकर उपस्थिति दर्ज कराई। चिराग पासवान के भोज में पहुंचे CM, किया अभिवादन केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के दही-चूड़ा भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी खास मानी जा रही है। यहां सीएम ने हाथ हिलाकर मौजूद लोगों और मीडिया का अभिवादन किया। इस मुलाकात को NDA के भीतर बढ़ती सहजता और तालमेल के रूप में देखा जा रहा है। भोज में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की अच्छी-खासी भीड़ रही। चेतन आनंद के घर पहुंचे नीतीश, पांच मिनट की मुलाकात भी मायनेदार इसके बाद मुख्यमंत्री जदयू विधायक चेतन आनंद के आवास पहुंचे, जहां वे करीब पांच मिनट रुके। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और PHED मंत्री संजय कुमार भी मौजूद थे। चेतन आनंद ने कहा कि व्यस्त शेड्यूल के बावजूद सीएम ने समय निकाला और आशीर्वाद दिया। उन्होंने बताया कि NDA के साथ-साथ विपक्षी नेताओं को भी आमंत्रण भेजा गया था। मंत्रिमंडल विस्तार पर चेतन आनंद की सधी हुई प्रतिक्रिया विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल पर चेतन आनंद ने सधा हुआ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे किसी तरह की अनर्गल इच्छा नहीं रखते और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय होगा। राजनीतिक गलियारों में इसे संतुलन साधने वाला बयान माना जा रहा है। आनंद मोहन की रिहाई से मजबूत हुई नजदीकी गौरतलब है कि चेतन आनंद के पिता आनंद मोहन की रिहाई में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अहम भूमिका रही थी। इसके बाद फ्लोर टेस्ट के दौरान चेतन आनंद ने RJD को झटका देते हुए नीतीश कुमार का साथ दिया था। तभी से आनंद मोहन परिवार और मुख्यमंत्री के रिश्ते और मजबूत माने जा रहे हैं। तेजप्रताप से रत्नेश सदा तक, 14 जनवरी का सियासी कैलेंडर 14 जनवरी को तेजप्रताप यादव के आवास पर हुए दही-चूड़ा भोज में लालू यादव, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, प्रभुनाथ यादव और चेतन आनंद की मौजूदगी ने अलग सियासी संकेत दिए। लालू यादव ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे तेजप्रताप से नाराज नहीं हैं। वहीं पूर्व मंत्री रत्नेश सदा के आवास पर भी दही-चूड़ा भोज हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री, राज्यपाल और NDA के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। दही-चूड़ा के बहाने दिखी गठबंधन की तस्वीर कुल मिलाकर, इस मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज सिर्फ खान-पान का आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए गठबंधन की मजबूती, रिश्तों की गर्माहट और भविष्य की राजनीति के संकेत भी साफ तौर पर नजर आए। बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा एक बार फिर सियासी भाषा बोलता दिखा।

कल्याणपुर-बदलापारा कोल ब्लॉक में सर्वेक्षण और बॉउंड्रेशन हुआ: ऊर्जा मंत्री

चंडीगढ़. झारखंड के कल्याणपुर-बदलापारा कोल ब्लॉक को लेकर केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल) को शोकॉज नोटिस जारी किया था। नोटिस के माध्यम से कोल ब्लॉक से संबंधित कुछ प्रक्रियात्मक पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया था जिसका एचपीजीसीएल ने निर्धारित समय के भीतर विस्तृत जवाब भेज दिया है, साथ ही कोल ब्लॉक का आवंटन रद्द न करने की सिफारिश भी की गई है। एचपीजीसीएल पिछले डेढ़ वर्ष से इस कोल ब्लॉक के विकास कार्य में जुटा हुआ है। इस पर अब तक करीब 2.5 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। हरियाणा सरकार के अनुसार, इस कोल ब्लॉक में लगभग 102.35 मिलियन टन कोयले का भंडार होने का अनुमान है। यहां खनन की अनुमानित लागत करीब 1,501 रुपये प्रति टन आंकी गई है। 33 वर्ष की अवधि के लिए कुल अनुमानित संविदा मूल्य लगभग 15,364 करोड़ रुपये बताया गया है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बताया कि कोल ब्लॉक के विकास के लिए एचपीजीसीएल पहले ही माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर (एमडीओ) की नियुक्ति कर चुका है। भूमि सर्वेक्षण एवं सीमा निर्धारण (बाउंड्री वर्क) का कार्य पूरा हो चुका है जबकि ड्रिलिंग का काम तेजी से प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त, अन्य विकासात्मक गतिविधियां भी स्वीकृत समय-सीमा के अनुसार शुरू कर दी गई हैं। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बताया कि हिसार के खेदड़ में स्थित राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट के विस्तार के तहत स्थापित की जा रही 800 मेगावाट की नई यूनिट के लिए केंद्र सरकार की शक्ति योजना के अंतर्गत कोल लिंकेज मंजूर कर दी गई है। इस यूनिट के चालू होने से प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि क्षेत्र और घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि वर्तमान परियोजना कार्यक्रम के अनुसार वर्ष 2030 तक इस कोल ब्लॉक से यमुनानगर स्थित थर्मल पावर प्लांट को कोयले की आपूर्ति शुरू होने की संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोल ब्लॉक का आवंटन पूरी तरह सुरक्षित है और सभी विकास कार्य योजनानुसार जारी हैं। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय कोयला मंत्रालय की एक विशेष सर्वे एजेंसी द्वारा कोल ब्लॉक के आवंटन में हुई देरी के कारण हरियाणा सरकार की प्रक्रिया भी विलंब से शुरू हो सकी। इसके अलावा, झारखंड में हरियाणा को आवंटित यह कोल ब्लॉक नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थित है, जिससे कुछ गतिविधियों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

पंजाब हुआ महंगाई वाले टॉप पांच राज्यों की सूची से बाहर

चंडीगढ़. कर्ज के बोझ में डूबे और महंगाई की मार झेल रहे पंजाब के लिए नया साल अच्छी खबर लाया है। सूबा उन टॉप पांच राज्यों की सूची से बाहर हो गया है जो महंगाई की सबसे अधिक मार झेल रहे हैं। राज्य की महंगाई दर कम होकर 1.82 प्रतिशत तक पहुंच गई है। केंद्र सरकार का जीएसटी दरों में कटौती करना प्रदेश के लिए राहत लेकर आया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में महंगाई दर में और गिरावट देखने को मिल सकती है क्योंकि जरूरी सामान की कीमतें में कमी आई है। लोगों की जेब पर बोझ भी कम हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2025 में सूबे की महंगाई दर 1.82 प्रतिशत तक दर्ज की गई है जबकि पिछले काफी महीनों से नवंबर 2025 तक पंजाब उन पांच राज्यों में शामिल था जहां महंगाई दर सबसे अधिक थी। राष्ट्रीय स्तर पर भी महंगाई दर 1.33 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं 9.49% महंगाई दर के साथ केरल टॉप पर है। दूसरे नंबर पर कर्नाटक की महंगाई दर 2.99%, आंध्र प्रदेश 2.71%, तमिलनाडु 2.67% और जम्मू एंड कश्मीर की 2.26% है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2026 में जीएसटी दरों में कटौती से पंजाब के जीएसटी राजस्व में 6.7 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है जिससे सरकार को 1786 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी का कुल राजस्व वर्ष में बढ़कर 28,507 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। प्रदेश पर कर्ज के बोझ के बीच यह अच्छे संकेत हैं। वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य पर अनुमानित कर्ज 3.82 लाख करोड़ था जो 2025-26 के बजट के अनुसार आगामी वित्तीय वर्ष के अंत तक 4.17 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में भी आई कमी इसी तरह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में भी कमी आई है। पंजाब में नवंबर 2025 के दौरान सीपीआई 190.8 दर्ज किया गया था, जो दिसंबर 2025 में कम होकर 190.4 हो गया है। अनुमान है और आगे सीपीआई में और कमी हो सकती है। सबसे अधिक सीपीआई केरल में 221.6 दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर भी सीपीआई में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। नवंबर में यह 197.9 था, जो दिसंबर में बढ़कर 198 हो गया है। सीपीआई एक तरह का पैमाना है, जिससे यह पता लगाया जाता है कि समय के साथ आम लोगों की तरफ से खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है। इसमें खाने-पीने का सामान, किराया, कपड़े, शिक्षा, इलाज, परिवहन, बिजली व पानी समेत अन्य सेवाएं शामिल होती हैं।

स्कॉर्पियो में आए बदमाशों ने शराब दुकान के कर्मचारी को किया किडनैप

रायपुर. तिल्दा के अंग्रेजी और देशी शराब की दुकान से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां अज्ञात बदमाशों ने अचानक दुकान में घुसकर पांच कर्मचारियों को अगवा कर लिया। इस घटना के दौरान एक कर्मचारी किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकला, जबकि चार कर्मचारियों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। जानकारी के मुताबिक, दुकान में काम कर रहे कर्मचारी अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। इसी दौरान कुछ अज्ञात व्यक्ति दुकान में घुस आए और कर्मचारियों के साथ बदसलूकी शुरू कर दी। इसके बाद बदमाशों ने उन्हें जबरदस्ती दुकान के अंदर से अगवा कर लिया। इस दौरान आसपास के अन्य लोग और दुकान में काम करने वाले कर्मचारी दहशत में आ गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और आसपास के क्षेत्र में छानबीन शुरू की। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले की प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और चार कर्मचारियों की तलाश के लिए टीमों को लगाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन अज्ञात बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया, उनकी पहचान और पकड़ने के लिए सीसीटीवी फुटेज और गवाहों से पूछताछ की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तिल्दा इलाके में पहले भी कभी-कभी ऐसी घटनाएं हुई हैं, लेकिन किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि शराब दुकान जैसी सार्वजनिक जगह पर कर्मचारियों का अगवा किया जाएगा। इसके चलते आसपास के व्यापारियों और कर्मचारियों में डर का माहौल बन गया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी कर्मचारियों को सुरक्षित बरामद कर लिया जाएगा। पुलिस अधिकारी ने कहा कि अपराधियों को पकड़ने के लिए सभी संभावित ठिकानों और मार्गों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की है कि अगर किसी को संदिग्ध गतिविधियों के बारे में जानकारी हो तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। इस मामले ने तिल्दा और आसपास के इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और भविष्य में इस तरह की वारदातों को रोकने के लिए विशेष निगरानी बढ़ाई जाएगी। वहीं, पुलिस जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बदमाशों ने कर्मचारियों को अगवा क्यों किया। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि यह घटना किसी पहले से योजना बद्ध अपराध का हिस्सा हो सकती है। पुलिस अभी तक इस मामले में किसी गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दे सकी है, लेकिन पूरे इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है। पुलिस और प्रशासन ने स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील की है और कहा है कि जल्द ही चारों कर्मचारियों को सुरक्षित बरामद कर लिया जाएगा।

पानी का प्रदूषण: हाईकोर्ट ने कहा- नालों में सीवेज मिलना बंद हो, पॉल्युशन बोर्ड की रिपोर्ट में 99 मिलियन लीटर सीवेज का खुलासा

जबलपुर  मप्र हाईकोर्ट में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रिपोर्ट पेश करके चौंकाने वाला खुलासा किया है। बोर्ड का कहना है कि जबलपुर के नालों का पानी जहरीला है। इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस जहरीले पानी से पैदा की जा रहीं सब्जियां कैसी होंगी? इस रिपोर्ट पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने  गहरी चिंता जताई है। बेंच ने अपना विस्तृत अंतरिम आदेश सुनाते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) की रिपोर्ट का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अगली सुनवाई 4 फरवरी को निर्धारित करके बेंच ने सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने कहा है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सरकार को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सुझावों पर तत्काल अमल किया जाए और इसकी रिपोर्ट पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को तय की गई है। लॉ स्टूडेंट के पत्र को माना याचिका जबलपुर के एक लॉ स्टूडेंट समर्थ सिंह बघेल ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र भेजकर जबलपुर में नाले के पानी से सब्जियां पैदा किए जाने को चुनौती दी है। हाईकोर्ट इस पत्र की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में कर रहा है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत मित्र के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ और राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा हाजिर हुए। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में गंभीर और चौंकाने वाले तथ्य पेश किए हैं। बोर्ड द्वारा 23 नवंबर 2025 को विभिन्न नालों, स्रोतों और खेतों से लिए गए पानी के नमूनों की जांच में साफ हुआ है कि यह पानी अत्यधिक दूषित है और इसमें बीओडी, टोटल कोलीफॉर्म व फीकल कोलीफॉर्म तय मानकों से कहीं अधिक पाए गए हैं। यह पानी न तो पीने योग्य है, न नहाने योग्य और न ही खेती के लिए सुरक्षित, इसके बावजूद इसका खुलेआम उपयोग हो रहा है। चेतावनी-गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि नालों का यह दूषित पानी किसी भी स्थिति में वॉटर पाइप लाइन में मिल गया, तो इससे गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है। हाईकोर्ट ने रिपोर्ट की गंभीरता को देखते हुए सरकार को निर्देश दिए हैं कि घरों से निकलने वाले सीवेज को सीधे नालों में जाने से तत्काल रोका जाए और नाले के पानी के किसी भी तरह के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए। जहरीले पानी से खेती पर प्रतिबंध की मांग अपनी रिपोर्ट में PCB ने कहा है कि यह पानी पूरी तरह अनट्रीटेड सीवेज है, जिसमें फीकल कोलीफॉर्म जैसे घातक तत्व मौजूद हैं। ये तत्व मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे पानी से की जा रही खेती को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, विशेषकर वे खेत जो शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे में हैं या नालों के गंदे पानी से सिंचाई कर रहे हैं। वापस घरों में पहुंच रहा जहरीला पानी PCB के अनुसार, जबलपुर शहर में प्रतिदिन लगभग 174 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है, जबकि उपलब्ध 12 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स केवल 75.14 एमएलडी ही ट्रीट कर पा रहे हैं। वह भी कई बार आंशिक रूप से या रखरखाव के कारण बंद रहते हैं। नतीजतन, करीब 98.86 एमएलडी गंदा पानी रोज नालों और नदियों में जाकर वापस घरों में पहुंच रहा है। नवंबर में नालों से लिए थे सैंपल प्रदूषण बोर्ड की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट सिद्धार्थ सेठ ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश पर कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की संयुक्त टीम ने 23 नवंबर 2025 को ओमती नाला, मोती नाला, खूनी नाला सहित अन्य प्रमुख नालों से पानी के सैंपल लेकर जांच की थी। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि पानी में बीओडी, टोटल कॉलीफॉर्म और फीकल कॉलीफॉर्म की मात्रा निर्धारित मानकों से कहीं अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार यह पानी पीने, नहाने, खेती या किसी भी अन्य उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। नगर निगम पर लगा था 17.80 करोड़ का दंड मामले में यह भी सामने आया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जबलपुर नगर निगम पर 17.80 करोड़ रुपए का पर्यावरणीय दंड लगाया था। यह जुलाई 2020 से 31 मार्च 2025 के बीच घरों से सीधे नदियों और नालियों में सीवेज व प्रदूषित जल मिलाने के कारण लगाया गया था, लेकिन अब तक नगर निगम ने यह राशि जमा नहीं की है। दंड की वसूली की जिम्मेदारी जबलपुर जिला कलेक्टर की है, जिस पर हाईकोर्ट ने जवाब तलब किया है। 98.86 मिलियन लीटर दूषित पानी नालों में पहुंच रहा रिपोर्ट के अनुसार जबलपुर शहर में प्रतिदिन लगभग 174 मिलियन लीटर सीवेज उत्पन्न होता है। शहर में वर्तमान में 12 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं, जिनमें से केवल 75.14 मिलियन लीटर सीवेज का ही उपचार हो पा रहा है। ये ट्रीटमेंट प्लांट भी पूरी क्षमता से कार्यरत नहीं हैं। परिणामस्वरूप करीब 98.86 मिलियन लीटर अनुपचारित और दूषित पानी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नालों में पहुंच रहा है। सरकार व नगर निगम को नोटिस जबलपुर शहर में नालियों से गुजर रहीं पाइपलाइनों पर सवाल उठाने वाली एक अन्य जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने राज्य सरकार व नगर निगम को नोटिस जारी किए हैं। डेमोक्रेटिक लॉयर्स फोरम के अध्यक्ष ओपी यादव की ओर से दाखिल याचिका में राहत चाही गई है कि इन्दौर के भगीरथपुरा जैसे हालात जबलपुर में न बनें, इसके लिए नगर निगम को जरूरी निर्देश दिए जाएं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रविन्द्र कुमार गुप्ता का पक्ष सुनने के बाद बेंच ने नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

ओरछा में मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालुओं ने बेतवा नदी में डुबकी लगाई, रामराजा के दर्शन

निवाड़ी  देशभर में आज यानि 15 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जा रहा है. मध्य प्रदेश में लोग नर्मदा, शिप्रा, बेतवा नदी में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं. इसी क्रम में रामराजा नगरी ओरछा में भी आस्था का सैलाब उमड़ा. बड़ी संख्या में श्रद्धालु बेतवा नदी में डुबकी लगाने पहुंचे. साथ ही बेतवा नदी के किनारे लगे मेले का लोग आनंद ले रहे हैं. पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए. ओरछा में उमड़ा आस्था का जनसैलाब मकर संक्रांति के अवसर पर मध्य प्रदेश के धार्मिक व पर्यटन नगरी ओरछा में आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा. पर्व के शुभ मुहूर्त के साथ ही भक्तों ने बेतवा नदी में आस्था की पवित्र डुबकी लगाई. मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है. स्नान के बाद श्रद्धालु सीधे ओरछा के प्रसिद्ध रामराजा सरकार मंदिर पहुंचे. जहां दर्शन करने वालों की भीड़ देखने लायक थी. श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर में दान, तिल-गुड़ वितरण और ब्राह्मण सेवा जैसे पुण्य कार्य करते नजर आए. सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ टीम रही मौजूद कई परिवारों ने इस अवसर पर गरीबों को वस्त्र और अन्नदान कर मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व और बढ़ा दिया. दूसरी तरफ प्रशासन और पुलिस भी पूरी तरह सक्रिय दिखे. भीड़ नियंत्रण से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक हर कदम पर सतर्कता देखने को मिली. घाटों पर सुरक्षा ड्यूटी में तैनात पुलिस बल हर एक आवाजाही पर नजर रखे हुए हैं. संवेदनशील घाटों पर एसडीआरएफ की टीमें लगातार मौजूद रहीं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए साजो-सामान के साथ तैयार रही. स्थानीय प्रशासन ने भी चिकित्सा सहायता, लाइटिंग, बैरिकेडिंग और ट्रैफिक नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं को संभाल रखा था. जिससे भक्तों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. देवभूमि ओरछा में मकर संक्रांति का यह दृश्य भक्ति, अनुशासन और सांस्कृतिक गरिमा का सुंदर संगम बन गया.

डेरा सच्चा सौदा बधियाकरण केस में वीसी के जरिए होगी गवाही

पंचकूला. डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ चल रहे कथित बधियाकरण (नपुंसक बनाने) मामले में पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने आदेश पारित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के न्यूयॉर्क में रह रहे मुख्य गवाह की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से दर्ज की जाएगी, लेकिन गवाही के दौरान गवाह के निजी वकील को दूरस्थ वीसी कक्ष में मौजूद रहने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, अदालत ने मुख्य गवाह को उसकी स्वास्थ्य स्थिति से अवगत कराने के लिए एक माह का समय दिया है। गवाह की फिटनेस रिपोर्ट मिलने के बाद ही फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में उसकी गवाही की तिथि तय की जाएगी। बता दें कि मुख्य गवाह ने आंखों के इलाज का हवाला देते हुए पहले से तय गवाही की तिथियों को स्थगित करने का अनुरोध किया था। गवाह ने अदालत को बताया कि वह रेटिनल वेन ऑक्लूजन बीमारी से पीड़ित है और डाक्टरों ने उसे लंबे समय तक आंखों पर दबाव न डालने की सलाह दी है। मुख्य गवाह वर्तमान में न्यूयार्क में रह रहा है और उसकी गवाही भारतीय वाणिज्य दूतावास/महावाणिज्य दूतावास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज की जानी है। इससे पहले, अगस्त 2025 में सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उसे अमेरिका से वीसी के जरिए जिरह की अनुमति दी थी। इसके लिए सीबीआई द्वारा विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से आवश्यक अनुमति भी प्राप्त की जा चुकी है। गवाह ने यह भी दलील दी कि गुरमीत राम रहीम सिंह एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उनके कई राजनीतिक संपर्क बताए जाते हैं, जिससे उसे भय और दबाव की आशंका है। इसी आधार पर उसने गवाही के दौरान अपने वकील को वीसी कक्ष में साथ बैठने की अनुमति मांगी। हालांकि, आरोपियों के बचाव पक्ष ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का हवाला देते हुए इस मांग का कड़ा विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि वीसी के दौरान दूरस्थ स्थल पर केवल अधिकृत समन्वयक की मौजूदगी की अनुमति है। गवाह का वकील गवाही शुरू होने से पहले वीसी कक्ष के बाहर परामर्श कर सकता है, लेकिन रिकॉर्डिंग के दौरान उसकी मौजूदगी नहीं होगी। स्वास्थ्य संबंधी आवेदन पर निर्णय देते हुए अदालत ने कहा कि फिलहाल गवाह का इलाज जारी है, इसलिए उसे एक माह का समय दिया जाता है। गवाह को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपनी फिटनेस की जानकारी अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत को दे, जिसके बाद फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में गवाही की अगली तिथि तय की जाएगी। गौरतलब है कि यह मामला वर्ष 2014 का है, जिसमें राम रहीम पर अपने कथित निर्देश पर अनुयायियों के सामूहिक बधियाकरण के आरोप लगे हैं।

एमपी में कड़ाके की सर्दी, तापमान 5 डिग्री से नीचे, ग्वालियर और भोपाल में ठिठुरन, मावठा गिरने की आशंका

भोपाल   मध्य प्रदेश में तापमान लगातार लुढ़कता जा रहा है, जिससे ठंड की रफ्तार और तेज होती जा रही है. सुबह के वक्त घना कोहरा होने से विजिविलिटी अभी भी कम बनी हुई है. वहीं मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने की वजह से मावठा गिरने की भी संभावना जताई है. ग्वालियर से भोपाल तक भीषण ठंड का दौर जारी है, जबकि जबलपुर संभाग में भी कड़ाके की ठंड की पड़ रही है. शहडोल जिले का कल्याणपुर एमपी में सबसे ज्यादा ठंडा बना हुआ है, जिसके चलते यहां लोग घरों में दुबके नजर आ रहे हैं. मध्य प्रदेश के कई जिलों में गुरुवार को भी पारा 5 डिग्री से नीचे चला गया है. मौसम विभाग की माने तो 16 जनवरी से हिमालयी क्षेत्र में एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव हो रहा है। इसके असर से 3-4 दिन बाद एमपी में मावठा यानी, बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, वर्तमान में पश्चिमी हिस्से के पास से एक ट्रफ गुजर रही है, लेकिन इसका असर प्रदेश में नहीं है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस को स्ट्रॉन्ग बताया जा रहा है इसलिए कई जिलों में बारिश या बादल की स्थिति बनने के आसार है। दूसरी ओर, पूर्व-उत्तर भारत के ऊपर समुद्र तल से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर जेट स्ट्रीम हवाएं 204 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से बह रही है। जिसका असर एमपी में भी देखने को मिल रहा है। बुधवार को भोपाल समेत कई जिलों में दिन में भी सर्द हवाएं चली। हालांकि, तेज धूप खिलने की वजह से ठंड से राहत भी मिलती रही।  सूबे के ग्वालियर से लेकर भोपाल संभाग के जिलों में इस सय तेज ठंड का दौर ठंड का दौर जारी है, जबकि जबलपुर संभाग में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। शहडोल के कल्याणपुर में प्रदेश में सबसे अधिक ठंड पड़ रही है। प्रदेश में गुरुवार तड़के के हालातों पर गौर करें तो पारा 5 डिग्री से नीचे चला गया है। मौसम विभाग ने आगामी कुछ दिनों के लिए कड़ाके की ठंड होने की संभावना जताई है। कई जगहों पर शीतलहर का दौर भी जारी है। मौसम विभाग की मानें तो सर्द हवाओं के चलते शीतलहर का प्रकोप आने वाले कुछ दिनों तक लगातार इसी तरह से जारी रहने की संभावना है, जिससे सर्दी का सितम और बढ़ेगा। उत्तरी हिस्से में कोहरे का असर प्रदेश के उत्तरी हिस्से यानी, ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग में कोहरे का असर बरकरार है। गुरुवार सुबह ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में मध्यम कोहरा छाया रहा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रायसेन, सीहोर, शाजापुर, सतना, गुना, राजगढ़, रतलाम, मंडला समेत कई जिलों में हल्का कोहरा रहा। कोहरे की वजह से दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली ट्रेनें निर्धारित समय से लेट हो रही है। इनमें सबसे ज्यादा असर मालवा, झेलम और सचखंड एक्सप्रेस में हो रहा है। इसके अलावा पंजाब मेल, जन शताब्दी समेत एक दर्जन ट्रेनें भी प्रभावित हो रही है। कल्याणपुर-करौंदी सबसे ठंडे, ग्वालियर में 7.1 डिग्री दर्ज प्रदेश के उत्तरी हिस्से में ठंड और कोहरे का असर है। मंगलवार-बुधवार की रात शहडोल के कल्याणपुर में 4.8 डिग्री और कटनी के करौंदी में 4.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रीवा में 5.8 डिग्री, मंदसौर-चित्रकूट में 6.1 डिग्री, खजुराहो में 6.2 डिग्री, उमरिया में 6.8 डिग्री, दतिया-मंडला में 7 डिग्री, राजगढ़-नौगांव में 7.2 डिग्री, पचमढ़ी में 7.8 डिग्री, शिवपुरी में 8 डिग्री, दमोह-सीधी में 9 डिग्री, रायसेन-श्योपुर में 9.4 डिग्री रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 7.1 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 9.8 डिग्री, इंदौर में 10.2 डिग्री, उज्जैन में 11.2 डिग्री और जबलपुर में तापमान 10 डिग्री दर्ज किया गया। कोल्ड वेव या कोल्ड डे का अलर्ट भी नहीं मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को प्रदेश में कहीं भी कोल्ड वेव यानी, शीतलहर का अलर्ट नहीं है। न ही कहीं कोल्ड डे रहेगा। इस बार कड़ाके की ठंड का दौर इस बार मध्यप्रदेश में नवंबर-दिसंबर की सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी तो दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। नवंबर-दिसंबर की तरह ही जनवरी में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे भोपाल में ठंड का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। एक्सपर्ट की माने तो जनवरी में प्रदेश में माइनस वाली ठंड गिर चुकी है। अबकी बार भी तेज सर्दी, घना कोहरा छाने के साथ शीतलहर भी चल रही है। मावठ (बारिश) गिरने की संभावना वहीं मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश में मावठ (बारिश) गिरने की पूरी संभावना है, क्योंकि हिमालयी क्षेत्र में वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव है, जिसके चलते एमपी में भी स्ट्रॉन्ग सिस्टम बन सकता है, ऐसे में उत्तर मध्य प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जो किसानों की फसलों के लिए अमृत के समान होगी। यहां तापमान में आई गिरावट भोपाल, ग्वालियर, पचमढ़ी, शहडोल, दतिया, मुरैना, रायसेन समेत कई जिलों में तापमान 5 डिग्री तक पहुंच गया है, जबकि मध्य प्रदेश में रातें भी सर्द हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, 3 से 4 दिनों में तापमान में और भी गिरावट हो सकती है, क्योंकि यहां सर्द हवाओं का रुख तेज बना हुआ है।

इंदौर: आबकारी विभाग ने 1.75 करोड़ रुपये की बीयर की 2.23 लाख लीटर नष्ट की, तीन दिन तक चला अभियान

इंदौर  इंदौर जिले के सिमरोल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मेमदीग्राम में आबकारी विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग द्वारा निर्धारित नियमों और मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करते हुए विभिन्न ब्रांडों की एक्सपायर हो चुकी बीयर को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य जन स्वास्थ्य की रक्षा करना और बाजार में असुरक्षित सामग्री की आपूर्ति को रोकना था। यहां स्थित माउण्ट एवरेस्ट ब्रेवरीज लिमिटेड में यह सभी विभिन्न ब्रांड्स की बीयर बनाई गई थी। लाखों लीटर बीयर और करोड़ों का नुकसान नष्ट की गई बीयर की मात्रा और उसकी कीमत काफी अधिक है। जानकारी के अनुसार कुल 23154 पेटियों में भरी हुई 2 लाख 23 हजार 316 लीटर बीयर को नष्ट किया गया है। यदि इसके डिस्टलरी मूल्य की बात करें तो इसकी कीमत लगभग पौने 2 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह पूरी प्रक्रिया उपायुक्त आबकारी संजय तिवारी की अध्यक्षता में गठित एक विशेष समिति की देखरेख में पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गई ताकि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन न हो। समय पर डिमांड न मिलने से खराब हुआ स्टॉक सहायक आयुक्त आबकारी अभिषेक तिवारी ने इस मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि माउण्ट एवरेस्ट ब्रेवरीज द्वारा यह बीयर मध्य प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली, असम और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सप्लाई करने के लिए तैयार की गई थी। हालांकि, संबंधित राज्यों से समय पर मांग प्राप्त नहीं होने के कारण इस स्टॉक को निश्चित समय सीमा के भीतर भेजा या निर्यात नहीं किया जा सका। निर्माण तिथि से 6 माह की अवधि बीत जाने के बाद इकाई प्रभारी ने स्वयं आबकारी विभाग को इसकी सूचना दी थी। तीन दिन तक चली नष्टीकरण की प्रक्रिया आबकारी विभाग ने इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत स्टॉक के सत्यापन और गणना की प्रक्रिया शुरू की। जन स्वास्थ्य और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए पिछले तीन दिनों से लगातार नष्टीकरण की कार्यवाही की जा रही थी। बीयर को नष्ट करने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया गया। बोतलों में भरी बीयर को बहाकर नष्ट किया गया, जबकि केन में भरी बीयर को बुलडोजर और जेसीबी मशीनों की मदद से कुचल दिया गया। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी की गई।