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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोले – ‘यूपी दिवस’ केवल उत्सव नहीं, प्रदेश की पहचान और सामर्थ्य का वैश्विक मंच बनेगा

  हर जिले में होंगे आयोजन, उत्कृष्ट नागरिक होंगे सम्मानित, जनपद की विकास यात्रा पर विशेष फिल्में प्रदर्शित होंगी गांव-कस्बों की प्रतिभा को मिलेगा राज्य मंच, जनपद से राजधानी तक सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं उद्यमी, किसान, खिलाड़ी, वैज्ञानिक और महिलाएं होंगे सम्मानित, यूपी गौरव' बनेगा प्रेरणा का प्रतीक लखनऊ, उत्तर प्रदेश की स्थापना की स्मृति में आयोजित होने वाला उत्तर प्रदेश दिवस-2026 इस वर्ष और अधिक व्यापक, भव्य एवं वैश्विक स्वरूप में मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि 24 से 26 जनवरी, 2026 तक प्रस्तावित तीन दिवसीय समारोह के अंतर्गत राजधानी लखनऊ में मुख्य आयोजन के साथ-साथ प्रदेश के सभी जनपद मुख्यालयों, देश के सभी राजभवनों तथा विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों में भी यूपी दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। गुरुवार को तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के नागरिक आज देश-दुनिया के अनेक हिस्सों में अपनी पहचान बना चुके हैं। यूपी दिवस ऐसा अवसर बने, जो प्रवासी उत्तर प्रदेशवासियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े। इसके लिए सभी राजभवनों में संवाद स्थापित कर आयोजन सुनिश्चित किए जाएं। इन आयोजनों में प्रदेश सरकार के माननीय मंत्रीगण उपस्थित रहकर प्रवासी यूपीवासियों से संवाद करेंगे। मुख्यमंत्री ने विदेशों में भारतीय दूतावासों के माध्यम से भी यूपी दिवस आयोजन के लिए संवाद बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'यूपी दिवस' केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक चेतना, आर्थिक शक्ति और विकास यात्रा को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का माध्यम है। आयोजन गरिमामय, सुव्यवस्थित, नवाचारयुक्त और व्यापक जनभागीदारी से युक्त हों। मुख्यमंत्री ने जनपद, मंडल और राज्य स्तर पर गायन, नृत्य, वादन और नाट्य प्रतियोगिताओं के आयोजन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनपद स्तरीय समारोहों में जिले की विकास यात्रा पर केंद्रित विशेष फ़िल्म भी प्रदर्शित की जाये।यूपी दिवस के अवसर पर 'उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान', 'विश्वकर्मा श्रम सम्मान' और 'माटी कला बोर्ड सम्मान' प्रदान किए जाएंगे। उद्यमियों, खिलाड़ियों, महिलाओं, चिकित्सकों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित कर प्रदेश की प्रतिभा और परिश्रम को सम्मान दिया जाएगा। इसके साथ ही, प्रदेश की ऐतिहासिक और वैचारिक विरासत को जनमानस से जोड़ने के लिए धरती आबा बिरसा मुंडा, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, सरदार वल्लभभाई पटेल, वंदे मातरम्-आनंद मठ और पुण्य श्लोका अहिल्याबाई होल्कर से जुड़े नाट्य मंचनों का आयोजन किया जाएगा। भारतेंदु नाट्य अकादमी द्वारा वंदे मातरम् रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने पर आनंद मठ आधारित विशेष प्रस्तुति होगी। युवाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के छात्र वंदे मातरम्' तथा विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' थीम पर नृत्य-नाटिकाएं प्रस्तुत करेंगे। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि इस वर्ष आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदेश की संस्कृति को प्रस्तुत करते हुए 3-डी और फाइबर मॉडल, वर्चुअल रियलिटी, 360 डिग्री टूर, लघु फिल्में, क्विज प्रतियोगिताएं और छायाचित्र प्रदर्शनी आयोजित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'यूपी दिवस' को जनउत्सव का स्वरूप देने के लिए ओपन माइक, नुक्कड़ नाटक, कठपुतली थियेटर, रंगोली, पारंपरिक परिधान प्रतियोगिता, पाक-कला प्रतियोगिता और कला ग्राम जैसे आयोजन होंगे। आगरा, किराना, बनारस, हरिहरपुर, लखनऊ और रामपुर, हरिहरपुर और बदायूं जैसे प्रतिष्ठित संगीत घरानों की विशेष प्रस्तुतियां भी होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी दिवस-2026 प्रदेश की पहचान, आत्मगौरव और विकास यात्रा का प्रभावशाली प्रतीक बने। सभी कार्यक्रम समयबद्ध, समन्वित और उच्च गुणवत्ता के हों, ताकि यह आयोजन स्मरणीय और प्रेरणादायी जनउत्सव के रूप में स्थापित हो सके।

यूपी में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को रफ्तार, लखनऊ में अशोक लेलैंड की ईवी फैक्टरी का शुक्रवार को उद्घाटन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी व एच.डी. कुमारस्वामी की उपस्थिति में होगा नई फैक्टरी का शुभारंभ कानपुर रोड स्थित सरोजिनी नगर एक्सटेंशन में होगा कार्यक्रम, राज्य के उप मुख्य मंत्रियों समेत प्रमुख मंत्री भी रहेंगे उपस्थित इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर केंद्रित फैक्टरी बनेगी प्रदेश में निवेश, रोजगार व हरित परिवहन को बढ़ावा देने का माध्यम लखनऊ,  प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन इकोनामी के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए योगी सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की वजह से यूपी अब निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा होता जा रहा है। सहज और सुचारु नीतियों और राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों की वजह से यहां निवेशकों के आने का क्रम बढ़ता जा रहा है। इस क्रम में एक और बड़ा नाम जुड़ा है देश की अग्रणी वाणिज्यिक वाहन निर्माता कंपनी अशोक लेलैंड का जो लखनऊ में इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माण पर केंद्रित अपनी नई फैक्टरी का शुक्रवार 9 जनवरी को उद्घाटन करने जा रही है। इस फैक्टरी को राज्य की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तथा हरित औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। लखनऊ के कानपुर रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र सरोजिनी नगर एक्सटेंशन-1 में आयोजित उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक तथा राज्य सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह समेत सरोजनीनगर के विधायक राजेश्वर सिंह भी मौजूद रहेंगे। इसके साथ ही, अशोक लेलैंड प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन धीरज हिन्दुजा तथा प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शेनू अग्रवाल भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का होगा उत्पादन यह संयंत्र लखनऊ के औद्योगिक क्षेत्र सरोजिनी नगर एक्सटेंशन-1 में स्थापित किया गया है, जिसे पहले स्कूटर्स इंडिया साइट के नाम से जाना जाता था। यह इकाई विशेष रूप से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के उत्पादन पर केंद्रित होगी और राज्य में स्वच्छ एवं टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देगी। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, यह इकाई इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में अशोक लेलैंड की क्षमताओं को और मजबूत करेगी।   हरित भविष्य की ओर एक अहम कदम अशोक लेलैंड की यह नई फैक्टरी न केवल इलेक्ट्रिक व्हीकल उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन, तकनीकी विकास और निवेश के नए अवसर भी उत्पन्न करेगी। इसे राज्य के औद्योगिक और पर्यावरणीय भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, यह लखनऊ समेत प्रदेश की औद्योगिक उन्नति को परिलक्षित करने का माध्यम बनेगा।

ग्राम पंचायतों में भी बनेगा आधार, 1000 ग्राम पंचायतों में आधार सेवा केंद्रों की स्थापना का कार्य आरंभ

हर ग्राम पंचायत के ग्राम सचिवालय में बन रहा आधार सेवा केंद्र नया आधार बनवाने से लेकर आधार अपडेट और प्रमाणीकरण की सुविधा होगी सरकारी योजनाओं से सीधे जुड़ेंगे ग्रामीण, ग्राम पंचायत सहायक करेंगे संचालन आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की ओर उत्तर प्रदेश का एक बड़ा कदम लखनऊ,  ग्रामीणों को आधार सेवाओं के लिए अब ब्लॉक और शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उत्तर प्रदेश में आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए योगी सरकार ने ग्राम पंचायत स्तर पर ही आधार सेवाएं उपलब्ध कराने की पहल शुरू कर दी है। इसके तहत प्रदेश की 1000 ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आधार सेवा केंद्र स्थापित करने का काम प्रारंभ कर दिया गया है। इसके लिए आवश्यक उपकरण लगाए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से नया आधार बनवाने से लेकर आधार अपडेट और प्रमाणीकरण तक की सुविधाएं सीधे गांव में ही मिल सकेंगी। अधिकृत और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा संचालन पंचायतीराज निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि हर ग्राम पंचायत के ग्राम सचिवालय में आधार सेवा केंद्र स्थापित किया जाएगा। इन केंद्रों का संचालन ग्राम पंचायत सहायक करेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और जिम्मेदारी दोनों को बढ़ावा मिलेगा। योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए यूआईडीएआई (UIDAI) ने पंचायती राज विभाग को रजिस्ट्रार आईडी और इंपैनलमेंट एजेंसी (ईए) आईडी भी निर्गत कर दी है, जिससे आधार सेवाओं का संचालन पूरी तरह अधिकृत और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा। आधार से जुड़ी सेवाओं में होने वाली परेशानियां समाप्त होंगी इस नई व्यवस्था से आधार नामांकन, अपडेट और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया सरल और सुगम होगी। इससे ग्रामीणों का सीधा जुड़ाव सरकारी योजनाओं से सुनिश्चित होगा। साथ ही आधार से जुड़ी सेवाओं में होने वाली परेशानियां समाप्त होंगी। पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में लागू करने की योजना है। गांव-गांव विकास की सोच होगी साकार पंचायती राज निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि यह पहल न केवल डिजिटल सशक्तिकरण को मजबूती देगी, बल्कि गांवों में ही आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराकर शासन की गांव-गांव विकास की सोच को भी साकार करेगी। अभी 1000 ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर आधार सेवा केंद्रों की स्थापना शुरू की जा रही है, जिसे हर ग्राम पंचायत स्तर पर स्थापित किया जाएगा। यह नई सुविधा शुरू हो जाने के बाद ग्राम सचिवालय में ही नया आधार बनवाने और अपडेट करवाने की हर सुविधा मिलने लगेगी।

एमएसएमई और बड़े उद्योगों में शिक्षुता को बढ़ावा, योगी सरकार दे रही है प्रतिपूर्ति का लाभ

लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में युवाओं के कौशल विकास और रोजगारपरक प्रशिक्षण को नई रफ्तार देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने अप्रेंटिसशिप के क्षेत्र में मजबूत पहल की है। राज्य में संचालित अप्रेंटिसशिप योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को उद्योगों व एमएसएमई इकाइयों से जोड़ा जा रहा है, ताकि उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ रोजगार के अवसर भी मिल सकें। वर्ष 2025-26 में अप्रेंटिसशिप योजना के तहत 83,277 युवाओं को उद्योगों और एमएसएमई इकाइयों में शिक्षुता प्रशिक्षण हेतु योजित किया गया है। इससे युवाओं को उत्पादन इकाइयों, सेवा क्षेत्र और लघु–मध्यम उद्योगों में काम सीखने का प्रत्यक्ष अवसर मिला है। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक युवा “सीखते हुए कमाएं” और उद्योगों के अनुरूप कौशल प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें। सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं, व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता  राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिलदेव अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन का हब बनाने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। अप्रेंटिसशिप योजना के माध्यम से युवाओं को सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि काम का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है। हमारे लिए लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं को उद्योगों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। नेशनल और मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजनाओं के तहत दी जा रही प्रतिपूर्ति से अधिष्ठानों की रुचि बढ़ी है और इससे रोजगारपरक अवसरों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। राज्य सरकार हर युवा को उसकी क्षमता के अनुरूप कौशल और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उपलब्ध कराई जा रही प्रतिपूर्ति की सुविधा उत्तर प्रदेश में नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना तथा मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत संबंधित अधिष्ठानों और अभ्यर्थियों को प्रतिपूर्ति की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे शिक्षुओं को प्रशिक्षण अवधि के दौरान आर्थिक सहयोग मिलता है, वहीं अधिष्ठानों को भी प्रशिक्षुओं को रखने के लिए प्रोत्साहन प्राप्त होता है। योगी सरकार का मानना है कि यह मॉडल युवाओं और उद्योग दोनों के लिए लाभकारी है। नियुक्ति की संभावनाएं कई गुना बढ़ीं अप्रेंटिसशिप के दायरे को बढ़ाने के लिए सशक्त संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है। इसी के परिणामस्वरूप पिछले चार वर्षों में 795 नवीन अधिष्ठानों को पोर्टल पर पंजीकृत कराया गया है। नए पंजीकरण से विभिन्न जिलों में प्रशिक्षण के अवसरों का दायरा बढ़ा है और स्थानीय स्तर पर युवाओं को उद्योगों तक पहुंच आसान हुई है। इसके साथ ही सीएमएपीएस योजनान्तर्गत 6,164 नए अभ्यर्थियों को लाभान्वित किया गया है। विभाग के अनुसार, इन योजनाओं के जरिए युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि रोजगारपरक कौशल और औद्योगिक अनुभव भी मिल रहा है, जिससे नियुक्ति की संभावनाएं बढ़ रही हैं। विभागीय स्तर पर प्रक्रियाओं को बनाया गया सरल राज्य में कौशल विकास की इस सतत प्रक्रिया का बड़ा परिणाम यह रहा कि बीते लगभग नौ वर्षों में 4 लाख से अधिक प्रशिक्षु युवाओं को विभिन्न औद्योगिक संस्थानों में सेवायोजित कराया गया है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि अप्रेंटिसशिप को बड़े पैमाने पर बढ़ाते हुए युवाओं को उद्योगों, स्टार्टअप्स और MSME सेक्टर से जोड़ा जाए। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, ऑनलाइन पोर्टल को सुदृढ़ किया गया है और उद्योगों के साथ समन्वय भी बढ़ाया गया है। सरकार का मानना है कि कौशलयुक्त युवा न केवल अपने लिए अवसर पैदा करेंगे, बल्कि प्रदेश के औद्योगिक विकास और निवेश माहौल को भी मजबूती देंगे।

राजनांदगांव जिले में 23294 आवास पूर्ण एवं 14099 आवास निर्माणाधीन

रायपुर. प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत आवास विहिन एवं कच्चे मकानों में रह रहे परिवारों को बुनियादी सुविधायुक्त पक्का आवास बनाने के लिए पात्र हितग्राहियों को 1 लाख 20 हजार रूपए एवं मनरेगा योजना से 90 मानव दिवस मजदूरी की सहायता दी जाती है। शासन द्वारा जिले में विगत दो वर्ष में 40454 आवास निर्माण की स्वीकृति मिली। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 30766 आवास स्वीकृत किए गए है। जिनमें से 23294 (75.71 प्रतिशत) आवास पूर्ण कर लिया गया है तथा 7472 आवास प्रगतिरत है। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2025-26 में 9688 आवास स्वीकृत किये गये है। जिसमें से 7026 हितग्राहियों को प्रथम किश्त प्रदाय किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में स्वीकृत हितग्राहियों के आवासों का समय-समय पर भूमि पूजन तथा पूर्ण हुए आवासों का हितग्राहियों के उपस्थिति में गृह प्रवेश कार्यक्रमों का आयोजन कर गृह प्रवेश कराया जा रहा है। जिले में नवाचार द्वारा एक दिवसीय अभियान का आयोजन करते हुए स्वीकृत हितग्राहियों को अप्रारंभ आवासों को प्रारंभ कराने, निर्माणाधीन आवास को समय-सीमा में पूर्ण करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। हितग्राहियों के स्वीकृत आवासों में रेन हार्वेस्टिंग के तहत सोख्ता गड्ढा का निर्माण तथा उत्कृष्ट आवास के हितग्राही एवं कम समय में आवास पूर्ण करने वाले हितग्राहियों को जिला एवं विकासखंड स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है। हितग्राहियों के जीवन स्तर में वृद्धि हेतु कुशल श्रमिक के रूप में दक्ष करने हेतु ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण केन्द्र बरगा द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ग्लोबल आईटी हब बनने की ओर अग्रसर

निर्यात आधारित आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से युवाओं के लिए लगातार बढ़ रहे हैं रोजगार के अवसर बेहतर होते इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश अनुकूल वातावरण से उत्तर प्रदेश आधुनिक प्रौद्योगिकी विकास की ओर लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ग्लोबल आईटी हब बनने की ओर अग्रसर है। लगातार बेहतर होते इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश अनुकूल वातावरण से प्रदेश आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के क्षेत्र में भी तेजी से उभरते हुए, देश के अग्रणी राज्यों में सम्मिलित हो चुका है। वर्ष 2017 के बाद से प्रदेश ने आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। यह क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक देश के कुल आईटी निर्यात में प्रदेश की मौजूदा हिस्सेदारी को 05 से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक के स्तर पर ले जाया जाए। आईटी सेवाओं और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के संयुक्त विकास ने उत्तर प्रदेश के निर्यात आधार को व्यापक बनाया है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र और लखनऊ जैसे शहर अब आईटी सेवाओं, मोबाइल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और डेटा आधारित उद्योगों के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। प्रदेश में स्थापित हो रही असेम्बली यूनिट्स, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और आईटी सर्विस कंपनियों ने निर्यात क्षमता को नई मजबूती दी है। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात लगभग 3,862 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 44,744 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी प्रकार से आईटी आधारित सेवाओं का निर्यात भी 55,711 करोड़ रुपये से बढ़कर 82,055 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह प्रदेश में विकसित हो रहे प्रौद्योगिकी आधारित औद्योगिक ढांचे और वैश्विक कंपनियों के बढ़ते भरोसे को भी दर्शाती है। इस विकास का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिल रहा है। आईटी और इलेक्ट्रॉनिक निर्यात आधारित उद्योगों से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। तकनीकी प्रशिक्षण कौशल, विकास कार्यक्रम और स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार से युवा अब केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि नवाचार और उद्यमिता के वाहक बन रहे हैं। योगी सरकार द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों ने निवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया है। सिंगल विंडो सिस्टम, बेहतर कानून व्यवस्था, मजबूत लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक इन्फ्रास्ट्रक्चर ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है।

आवास और बुनियादी ढांचा विकास के लिए एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर

रायपुर, छत्तीसगढ़ में बुनियादी ढांचे के विकास और आवास निर्माण को गति देने के उद्देश्य से, छत्तीसगढ़ शासन ने हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (आवास और शहरी विकास निगम हुडको) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह रणनीतिक साझेदारी राज्य के विकास लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रमुख आवास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण सुरक्षित करना है।      .. इस अवसर पर वित्त विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल, विशेष सचिव श्री चन्दन कुमार, विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा, उप सचिव श्री ऋषभ कुमार पाराशर व अवर सचिव श्री चंद्र प्रकाश पाण्डेय तथा हुडको से निदेशक वित्त श्री दलजीत सिंह खत्री व क्षेत्रीय प्रमुख हितेश बोराड मौजूदगी में सम्पन्न हुए। यह कार्यक्रम महानदी भवन, मंत्रालय, नवा रायपुर, अटल नगर में कल संपन्न हुआ। यह समझौता हुडको द्वारा राज्य शासन की विभिन्न विकास पहलों के लिए वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग प्रदान करने के लिए एक रूपरेखा स्थापित करता है।             समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) का मुख्य उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ में प्रमुख आवास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तपोषण की सुविधा प्रदान करना है। यह सहयोग मजबूत बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण और किफायती आवास की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर केंद्रित होगा। इससे सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ के नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने में योगदान मिलेगा।      यह साझेदारी आधुनिकीकरण और सतत् विकास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। जो हुडको की विशेषज्ञता और वित्तीय क्षमता का लाभ उठाकर परिवर्तनकारी परियोजनाओं को मूर्त रूप देने में मदद करेगी। हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हुडको) एक नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम है, जो देश में आवासीय उद्देश्यों के लिए घरों के निर्माण या आवास और शहरी विकास कार्यक्रमों के वित्तपोषण के लिए दीर्घकालिक वित्त प्रदान करता है।

झारखंड में हत्या के मामले में 4 दोषियों में से कोर्ट से 2 आरोपी हो गए फरार

रांची/पाकुड़. झारखंड के पाकुड़ में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां जिला न्यायालय परिसर से बुधवार को हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए चार अपराधियों में से दो अपराधी फरार हो गए। मामला अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र के अंबाडीहा में जमीन विवाद में वर्ष 2019 में हुई भोलानाथ महली की हत्या से जुड़ा है। इस केस की सुनवाई एडीजे प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद के न्यायालय में चल रही थी। बुधवार को अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर चार आरोपियों शिवधन मोहली, कादू मोहली उर्फ वकील मोहली, सुनीलाल मोहली और नरेन मोहली हत्या का दोषी करार दिया। दोषी करार दिए जाने के बाद पुलिस चारों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने की कागजी प्रक्रिया पूरी कर रही थी। चारों को कोर्ट हाजत के एएसआई हिरेंद्र नाथ मंडल के सुरक्षा में दे दिया गया। इसी बीच नरेन महली और शिवधन महली शौच के बहाने भाग निकले। अपराधियों के भागने की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस की टीम दोनों अपराधियों की तलाश में निकली पर दोनों हाथ नहीं लगे। समाचार भेजे जाने तक पुलिस की टीम संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी। पाकुड़ एसपी निधि द्विवेदी ने कहा कि फरार दोषियों की गिरफ्तारी के लिए घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। हाजत प्रभारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गयी है, रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फरार शिवधन, नरेन पर अलग से दर्ज होगा मुकदमा कोर्ट परिसर से फरार हुए अपराधी शिवधन महली व नरेन महली के विरुद्ध अलग से मुकदमा दर्ज करने की तैयारी चल रही है। नगर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर बबलू कुमार ने बताया कि हाजत प्रभारी या कर्मी की ओर से लिखित शिकायत मिलने के बाद दोनों के विरूद्ध केस दर्ज किया जाएगा। बताया कि फिलहाल पुलिस की टीम दोनों की तलाश कर रही है।

जेल वार्डर बनने का मौका: झारखंड में 1733 भर्तियों के लिए आवेदन शुरू, फिजिकल टेस्ट में 6 मिनट की दौड़ जरूरी

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से निकाली गई जेल वार्डर ( कक्षपाल ) के 1733 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया कल 9 जनवरी 2026 से शुरू होगी। पहले यह 7 नवंबर 2025 से शुरू होनी थी लेकिन इसे टाल दिया गया था। इच्छुक व योग्य अभ्यर्थी झारखण्ड कक्षपाल प्रतियोगिता परीक्षा 2025 के लिए jssc.jharkhand.gov.in पर जाकर 8 फरवरी 2026 तक एप्लाई कर सकेंगे। परीक्षा शुल्क भरने व फोटो और हस्ताक्षर अपलोड कर आवदेन पत्र का प्रिंट आउट लेने के लिए अंतिम तिथि 10 फरवरी 2026 है। 11 फरवरी से 13 फरवरी 2026 तक ऑनलाइन आवेदन में करेक्शन की जा सकेगी। ऑनलाइन आवेदन पत्र में अभ्यर्थी के नाम, जन्म तिथि, ईमेल आईडी एवं मोबाइल संख्या को छोड़कर किसी भी गलत एंट्री को संशोधित करने के लिए फिर से लिंक उपलब्ध करायी जायेगी। नियुक्ति की कार्रवाई झारखंड राज्य की पुलिस, कक्षपाल, सिपाही (गृह रक्षा वाहिनी), उत्पाद सिपाही संयुक्त भर्ती नियमावली-2025 के तहत की जाएगी। जेएसएससी ने संशोधित नोटिस में खेल कूद कोटा का प्रावधान स्पष्ट किया है- क्र.सं. , प्रतियोगिता का स्तर , उपलब्धि 1. भारतीय ओलंपिक संघ अथवा उससे सम्बद्ध फेडरेशनों द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता। उपलब्धि: द्वितीय / तृतीय स्थान 2. झारखंड ओलंपिक संघ अथवा उससे सम्बद्ध संघों द्वारा आयोजित अधिकाधिक राज्य चैंपियनशिप। , उपलब्धि: प्रथम स्थान 3. राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित करने वाले खिलाड़ी। उपलब्धि: राष्ट्रीय रिकॉर्ड फिजिकल टेस्ट के नियम हुए आसान शारीरिक परीक्षा के तहत अभ्यर्थियों के लिए दौड़ का आयोजन होगा। दौड़ प्रक्रिया को पहले से काफी सरल करते हुए दूरी को घटाया गया है। बता दें कि बीते मार्च माह में हुई कैबिनेट बैठक में पुलिस, कक्षपाल, सिपाही और उत्पाद सिपाही नियुक्ति के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा में बदलाव किया गया है। पुरुष अभ्यर्थियों को 06 मिनट में 1600 मीटर दौड़ पूरी करनी होगी। पहले यह दौड़ 10 किमी की होती थी। वहीं, महिला अभ्यर्थियों को 10 मिनट में 1600 मीटर की दौड़ पूरी करनी होगी। पहले महिलाओं को 06 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ती थी। कक्षपाल भर्ती की वैकेंसी डिटेल्स रिक्तियों में 1634 पद पुरुषों और 64 पद महिलाओं के लिए हैं। पुरुषों में 165 पद भूतपूर्व सैनिकों के लिए, 413 होमगार्ड के लिए और शेष 1056 अन्य अभ्यर्थियों के लिए हैं। कक्षपाल भर्ती योग्यता – 10वीं पास। आयु सीमा – 18 वर्ष से 25 वर्ष। अधिकतम आयु सीमा में अत्यंत पिछड़ा वर्ग के पुरुषों को दो वर्ष, अनारक्षित, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, ईडब्ल्यूएस वर्गों की महिलाओं को 3 वर्ष, एससी एसटी पुरुष व महिलाओं को 5 वर्ष की छूट मिलेगी। पुरुष अनारक्षित, ईडब्ल्यूएस, अत्यंत पिछड़ा वर्ग – लंबाई कम से कम 160 सेमी, सीना फुलाकर कम से कम 81 सेमी हो। एससी व एसटी – लंबाई कम से कम 155 सेमी, सीना फुलाकर कम से कम 79 सेमी हो। महिलाओं के लिए लंबाई कम से कम 148 सेमी हो। चयन – सबसे पहले शारीरिक मापदंड व शारीरिक दक्षता परीक्षा होगी। इसमें सफल अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद मेडिकल जांच होगी। वेतन – लेवल -2 (19900 – 63200 रुपये) आवेदन फीस – 100 रुपये राज्य के एससी व एसटी के लिए – 50 रुपये  

ग्रामीण भारत के लिए नए युग की शुरुआत: VB-G RAM G अधिनियम 2025, सुश्री निर्मला भूरिया का अहम बयान

ग्रामीण भारत के लिए नए युग की शुरुआत : VB-G RAM G अधिनियम, 2025 : सुश्री निर्मला भूरिया हर ग्रामीण परिवार को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी भोपाल  महिला एवं बाल विकास मंत्री एवं नीमच जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि विकसित भारत–ग्रामीण आजीविका मिशन गारंटी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 ग्रामीण भारत के लिए नए युग की शुरुआत है। यह अधिनियम प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि यह कानून महात्मा गांधी की भावना के अनुरूप गरीबों, जनजातीय और पिछड़े वर्गों को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाया गया है। वन क्षेत्रों में कार्य करने वाले परिवारों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार भी प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा अब तक मनरेगा पर 11.74 लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यय किया गया है, जो ग्रामीण रोजगार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। VB-G RAM G अधिनियम, 2025 पूर्ववर्ती MGNREGA का स्थान लेगा, जहां राहत आधारित व्यवस्था के स्थान पर अब रोजगार और आजीविका को राष्ट्रीय विकास लक्ष्य से जोड़ा गया है। मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए बुवाई और कटाई के मौसम में राज्य सरकारें 60 दिनों का 'कार्य विराम' घोषित कर सकेंगी, जिससे कृषि क्षेत्र में श्रम की कमी नहीं होगी और मजदूरों की आय पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। नए कानून में कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है— जल संरक्षण एवं जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा निर्माण, आजीविका संपत्तियों का सृजन तथा जलवायु संरक्षण। समयबद्ध भुगतान और पारदर्शिता मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अनिवार्य किया गया है। देरी की स्थिति में श्रमिकों को स्वतः मुआवजा दिया जाएगा। पारदर्शिता के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी तथा एआई आधारित निगरानी को कानून का हिस्सा बनाया गया है। प्रत्येक छह माह में डिजिटल साक्ष्यों के साथ सोशल ऑडिट भी अनिवार्य होगा। इस योजना में केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच 60:40 का व्यय अनुपात होगा, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए यह 90:10 रहेगा। बेहतर क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक व्यय की सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है। ग्रामीण योजनाओं को पीएम गति शक्ति और विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक से जोड़ा गया है। सुश्री भूरिया ने कहा कि VB-G RAM G अधिनियम, 2025 केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में जवाबदेही, गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे और आर्थिक सुरक्षा की नई प्रतिबद्धता है, जो ग्रामीण नागरिकों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाता है। इस अवसर पर विधायक श्री दिलीप सिंह परिहार, श्री ओमप्रकाश सकलेचा, श्री अनिरुद्ध माधव मारू उपस्थित रहे।