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आमजन की भागीदारी से बनेगा बजट, CM सैनी ने शुरू किया 3 भाषाओं वाला सुझाव पोर्टल

चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने प्रदेश के बजट को लेकर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस कड़ी में उन्होंने मंगलवार को 2026-27 के बजट को लेकर गुरुग्राम में प्री-बजट मंथन में हिस्सा लिया। इस आशय के बारे में सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री ने लिखा कि 'हरियाणा का बजटः आपकी राय, हमारा संकल्प। हरियाणा के विजन 2047 को साकार करने की दिशा में आज गुरुग्राम में आयोजित 'प्री-बजट मंथन' में सहभागिता करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त किए गए। हरियाणा का आगामी बजट प्रदेश के हर नागरिक की खुशहाली और हर वर्ग के कल्याण को समर्पित होगा। इसी क्रम में इस वर्ष भी लगातार सैटरवार बैठकें आयोजित कर सभी हितधारकों से बजट संबंधी सुझाव लिए जाएंगे। हम प्रदेश के प्रत्येक परिवारजन से आह्वान करते हैं कि वे वित्त वर्ष 2026-27 के बजट निर्माण में सक्रिय सहभागिता कर सशक्त और समृद्ध हरियाणा के निर्माण में अपना योगदान दें। इसके साथ ही मुख्यमंत्री सैनी ने मंगलवार को गुरुग्राम में ए.आई. आधारित हरियाणा बजट जनभागीदारी पोर्टल का शुभारंभ किया जिस पर प्रदेशवासी हरियाणवी, हिंदी तथा अंग्रेजी तीनों भाषाओं में अपने सुझाव दे सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म हमारी पारदर्शिता, नागरिक सहभागिता तथा सहभागी शासन की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नायब सैनी इस साल फरवरी माह में बतौर वित्त मंत्री अपना दूसरा बजट प्रस्तुत करेंगे। पिछली बार प्रदेश का बजट 2 लाख 5 हजार करोड़ रुपए था। इसमें 20 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है और 2026-27 का बजट 2 लाख 25 हजार करोड़ रुपए रहने की उम्मीद है। पिछली बार की तरह से इस बार भी बजट में कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, ग्रामीण व शहरी विकास पर फोकस किया जा सकता है। पिछले वित्त वर्ष में कृषि का बजट 7600 करोड़ रुपए था। शिक्षा व खेल का बजट 22 हजार 312 करोड़ रुपए, स्वस्थ्य का बजट 10 हजार 539 करोड़ रुपए था। ऐसे ही ग्रामीण विकास का बजट 7313 करोड़ रुपए, सिंचाई का बजट 6 हजार करोड़ रुपए, स्थानीय निकाय का बजट 5911 करोड़ रुपए था। अब अगले वित्तीय वर्ष के बजट को लेकर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पूरी तैयारी कर ली है। अब वह विभिन्न वर्ग के लोगों से बजट को लेकर मंथन करेंगे और उनके सुझाव भी लिए जाएंगे। बजट सत्र के आयोजन से पहले विधानसभा में प्री-बजट डिस्कशन के लिए एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा जिसमें सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्ष के विधायकों से भी सुझाव लिए जाएंगे। साल-दर-साल ऐसे बढ़ता गया बजटः गौरतलब है कि 26 अक्तूबर, 2014 को मनोहर लाल खट्टर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे और बतौर वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने फरवरी 2015 में 2015-16 का बजट पेश किया था जो 86 हजार करोड़ रुपए था और पिछले साल बतौर वित्त मंत्री नायब सैनी ने 2 लाख 5 हजार करोड़ रुपए का बजट पेश किया था। ऐसे में 2015-16 से 2025-26 तक बजट में 1 लाख 19 हजार करोड़ रुपए की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। 2023-24 में बतौर वित्त मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 1 लाख 66 हजार करोड़ रुपए का जबकि 2024-25 में 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपए बजट पेश किया था। इससे पहले 2021-22 में 1 लाख 35 हजार करोड़ रुपए, 2022-23 में 1 लाख 64 हजार का बजट पेश किया गया था। 2019-20 में 1 लाख 19 हजार करोड़ रुपए, 2020-21 में 1 लाख 16 हजार करोड़ रुपए का बजट प्रस्तुत किया। मनोहर लाल खट्टर ने शुरू की थी नई परम्परा मनोहर लाल खट्टर 27 अक्तूबर 2019 को दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें और उन्होंने वित्त मंत्रालय अपने पास रखा। नए-नए प्रयोगों के लिए पहचान रखने वाले मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के बजट को आर्थिक विकास का आईना माना और इसके लिए जनसहभागिता को सुनिश्चित किया। उन्होंने जनता के अलग-अलग वर्गों से बजट को लेकर सुझाव मांगे। इस कड़ी में किसानों, उद्योगपतियों, व्यापारियों, दुकानदारों, जनप्रतिनिधियों से सुझाव भी लिए गए। विशेष बात यह है कि इसको लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की ओर से प्री-बजट डिस्कशन बैठकों का सिलसिला शुरू किया गया। यही नहीं, बजट पर डिस्कशन को लेकर प्री-बजट सत्र भी बुलाने की पहल भी की गई। बतौर वित्त मंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश के हित में आए सुझावों को बजट में शामिल किया। उन्होंने विपक्ष के विधायकों के सुझाव भी बजट में शामिल किए। ऐसा माना जा रहा है कि इस बार भी मुख्यमंत्री नायब सैनी फरवरी माह में अपना बजट प्रस्तुत करेंगे। इससे पहले 2016-17 में 90 हजार करोड़ रुपए एवं 2017-18 में 1 लाख 2 हजार करोड़ रुपए एवं 2018-19 में 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपए का बजट पेश किया गया था।

रेकी पूरी, वारदात से पहले दबोचे गए आरोपी—लुधियाना में KCF के 2 सदस्यों की गिरफ्तारी

पंजाब पंजाब पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खालिस्तान कमांडो फोर्स के सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पंजाब पुलिस की स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC) मोहाली ने लुधियाना की काउंटर इंटेलिजेंस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो विदेशी हैंडलरों के निर्देश पर एक टारगेट किलिंग की योजना बना रहे थे। यह जानकारी पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने बुधवार को सोशल मीडिया पर साझा की है। गिरफ्तार किए गए लुधियाना निवासी आरोपियों के कब्जे से एक 9 MM पिस्टल और 5 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी यूके और जर्मनी में बैठे हैंडलरों के संपर्क में थे, जिनका संबंध प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान कमांडो फोर्स (KCF) और कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ा हुआ है। DGP गौरव यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘x’ पर बताया कि विदेशी हैंडलरों के निर्देश पर आरोपियों ने लुधियाना में सरकारी और प्रमुख संस्थानों की रेकी की थी। इसके अलावा, उन्हें कुछ अन्य चिन्हित व्यक्तियों के बारे में जानकारी जुटाने और ग्राउंडवर्क करने का भी जिम्मा सौंपा गया था। इस मामले में मोहाली में FIR दर्ज कर ली गई है और नेटवर्क की आगे-पीछे की कड़ियों को खंगालने के लिए जांच जारी है।   बता दें कि, लुधियाना में आतंकी हमले की धमकी मिलने के बाद जिला पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए थे। अगस्त महीने में सरकारी दफ्तरों को निशाना बनाए जाने से जुड़े इनपुट मिलने के बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई थीं। हालांकि उस समय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इसे नियमित सुरक्षा अभ्यास बता रहे थे। इसके बाद से अब तक लुधियाना के कई सरकारी दफ्तरों के बाहर इसी तरह के सुरक्षा प्रबंध लगातार बनाए रखे गए हैं।     गौरतलब है कि एक दिन पहले भी पंजाब पुलिस ने एक बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए अर्श डल्ला गैंग से जुड़े 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उनके पास से 4 अवैध पिस्टल, चार मैगजीन और 26 कारतूस बरामद किए थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुलदीप सिंह (निवासी गिल पट्टी, बठिंडा, वर्तमान में कनाडा), गुरविंदर सिंह (कोटशमीर, बठिंडा) और गगनदीप सिंह (गांव भोखरा, बठिंडा) के रूप में हुई है। जिनके पास से  एक ग्लॉक पिस्टल, एक जिगाना, एक .30 बोर और एक .32 बोर पिस्टल बरामद किए थे।

रेलवे अलर्ट: कोयल नदी पुल में आई दरार, दो माह तक ट्रेनों का संचालन प्रभावित

रांची लोहरदगा में कोयल नदी पर बने रेलवे पुल के स्पेन संख्या-5 में दरार पाई गई है। सुरक्षा कारणों से रेलवे प्रशासन ने लोहरदगा स्टेशन को मार्च महीने तक बंद रखने का फैसला लिया है। इसके चलते रांची राजधानी एक्सप्रेस और रांची-सासाराम एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनों का परिचालन इस रूट पर अगले दो महीने तक नहीं होगा। रांची से लोहरदगा के बीच ट्रेन का परिचालन पूरी तरह बंद रेलवे अधिकारियों के अनुसार रांची–सासाराम एक्सप्रेस 8 जनवरी से मेसरा–बरकाकाना के रास्ते चलाई जाएगी। वहीं रांची–नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस को भी परिवर्तित मार्ग रांची–टाटीसिलवे–मेसरा–बरकाकाना होकर चलाने का निर्णय लिया गया है। फिलहाल रांची से लोहरदगा के बीच किसी भी एक्सप्रेस ट्रेन का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा। यात्रियों को बस से पहुंचाया जाएगा इरगांव रेलवे प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत रांची–लोहरदगा और अन्य मेमू पैसेंजर ट्रेनों का परिचालन लोहरदगा स्टेशन के बजाय लगभग आठ किलोमीटर दूर इरगांव हॉल्ट तक करने का निर्णय लिया है। यात्रियों की सुविधा के लिए लोहरदगा से इरगांव के बीच बस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी, हालांकि बसों की संख्या को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा लोहरदगा से टोरी के लिए कनेक्टिंग ट्रेन भी शुरू की जा रही है, ताकि यात्रियों को आगे की यात्रा में परेशानी न हो।  

1.50 करोड़ का फ्रॉड: मोहाली के रियल एस्टेट कारोबारी के खिलाफ मामला दर्ज

पंजाब पंजाब में आए दिन ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। इसी बीच लुधियाना पुलिस ने सख्त एक्शन लिया है। मिली जानकारी के अनुसार मोहाली के रियल एस्टेट कारोबारी पर धोखाधड़ी का आरोप लगा है, जिसे लेकर लुधियाना पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा के आदेशों पर एफआईआर दर्ज की गई है। जानकारी मुताबिक, कारोबारी समीर जुनेजा निवासी मोहाली जोकि गोल्ड स्टार प्रॉपर्टीज के मालिक हैं। उसने करीब 1.50 करोड़ रुपए की ठगी की है। शिकायतकर्ता गुरजोत सिंह निवासी पटियाला की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। शिकायतकर्ता गुरजोत सिंह ने बताया कि आरोपी कारोबारी समीर जुनेजा ने उससे 1.50 करोड़ रुपए लेकर भी उसकी जमीन की रजिस्ट्री नहीं करवाई। गुरजोत ने आगे बताया कि लुधियाना में उसके जानकार सुमित सचदेवा, जिनका शराब और अहाते का कारोबार है, उसने ही मोहाली के प्रॉपर्टी कारोबारी समीर जुनेजा से मुलाकात करवाई थी। इस दौरान प्रॉपर्टी की डील 1.50 करोड़ रुपए में हुई। कारोबारी समीर जुनेजा ने 1.50 करोड़ रुपए लेकर भी रजिस्ट्री नहीं करवाई। जांच करने करने पर बाद में पता चला कि प्रॉप्रटी समीर जुनेजा की थी ही नहीं। पूरा मामला पुलिस के पास पहुंचा तो पता चला कि समीर जुनेजा ने करोड़ों रुपए की ठगी की है। इसके बाद लुधियाना पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा ने एक्शन लेते हुए कारोबारी समीर जुनेजा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

CTH और बफर क्षेत्र निर्धारण पर विवाद, सरिस्का में 9 जनवरी को होंगी विशेष ग्राम सभाएं

अलवर सरिस्का टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) और बफर क्षेत्र के निर्धारण को लेकर जिला प्रशासन ने अहम प्रक्रिया शुरू की है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की अनुशंसाओं के अनुपालन में 9 जनवरी को सरिस्का से जुड़े ग्राम पंचायत क्षेत्रों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि इन ग्राम सभाओं का उद्देश्य प्रस्तावित सीमा निर्धारण पर ग्रामीणों से सुझाव, परामर्श और आपत्तियां प्राप्त करना है। कलेक्टर ने बताया कि ग्राम सभाओं में वन विभाग के अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे, जो सरिस्का टाइगर रिजर्व के प्रस्तावित नक्शों, सीटीएच और बफर क्षेत्र की सीमाओं तथा उनके प्रभावों की विस्तृत जानकारी ग्रामीणों को देंगे। यदि किसी ग्रामीण को इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति है या कोई सुझाव देना है, तो वह उसी दिन ग्राम सभा में अपनी बात दर्ज करा सकता है। जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 9 जनवरी के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी सुझाव या आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें, ताकि वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय लोगों के हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके। वन विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार सरिस्का टाइगर रिजर्व के अंतर्गत 9,091.22 हेक्टेयर क्षेत्र को क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट और 4,753.63 हेक्टेयर क्षेत्र को बफर जोन के रूप में चिन्हित किया गया है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38 (V) के तहत इस तरह के किसी भी बदलाव से पहले संबंधित ग्राम सभाओं से परामर्श लेना अनिवार्य है। इसी कानूनी प्रावधान के तहत यह विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की जा रही हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुरूप रहे। इस बीच सरिस्का के प्रस्तावित क्षेत्र निर्धारण को लेकर राजनीतिक विवाद भी गहराता नजर आ रहा है। राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरिस्का टाइगर रिजर्व के 4,839.07 हेक्टेयर सीटीएच क्षेत्र को बफर एरिया में बदलने के प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इस संबंध में जिला कलेक्टर अलवर को एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपते हुए इस पूरी प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है। जूली ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि राज्य सरकार का यह कदम 17 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट वे संवेदनशील क्षेत्र होते हैं, जिन्हें बाघों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक आधार पर पूरी तरह सुरक्षित और अक्षुण्ण रखा जाना आवश्यक है। इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का भौगोलिक या प्रशासनिक बदलाव वन्यजीव संरक्षण के मूल उद्देश्य के विपरीत है। नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आशंका जताई कि सीटीएच को बफर क्षेत्र में बदलने के पीछे का वास्तविक उद्देश्य क्षेत्र की 50 से अधिक बंद पड़ी खदानों को पुनः शुरू करना है। उन्होंने मालाखेड़ा, उमरैण और थानागाजी उपखंडों के दर्जनों गांवों और क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बदलाव से पर्यावरण, वन्यजीव और स्थानीय ग्रामीणों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल 9 जनवरी को होने वाली ग्राम सभाओं पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इन्हीं सभाओं के जरिए सरिस्का टाइगर रिजर्व के भविष्य से जुड़े अहम निर्णयों की दिशा तय होगी।  

राशन कार्डों का 85 प्रतिशत सदस्यों का ई-केवायसी पूर्ण

रायपुर. छत्तीसगढ़ में वर्तमान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 82.18 लाख राशन कार्ड प्रचलित है। इन राशन कार्डों में पंजीकृत सदसस्यों की संख्या 2.73 करोड़ है। केन्द्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के वास्तविक हितग्राहियों को योजना का लाभ दिलाने के उददेश्य से ई-केवायसी का कार्य निरंतर जारी है। अब तक कुल पंजीकृत सदस्यों का 2.3 करोड़ याने 85 प्रतिशत सदस्यों का ई-केवायसी का काम पूर्ण हो चुका है। वास्तविक रूप से लगभग 30.32 लाख सदस्यों का ई-केवायसी हेतु शेष है। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि राज्य के सभी शासकीय उचित मूल्य के दुकानों में संचालित ई-पास मशीन में ई-केवायसी की सुविधा उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त भारत सरकार द्वारा जारी ‘‘मेरा ई-केवायसी’’ एप्प के माध्यम से भी ई-केवायसी किए जा सकते हैं। एप्प के माध्यम से ई-केवायसी करने हेतु एंड्रायड मोबाइल में गूगल प्ले स्टोर से एप्प डाउनलोड कर हितग्राही अपना आधार नंबर डालकर आधार ओटीपी के माध्यम से फेस ई-केवायसी कर सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में 14,040 शासकीय उचित मूल्य की दुकानें संचालित हो रही हैं और पंजीकृत राशन कार्डधारियों द्वारा अपनी पसंद के उचित मूल्य की दुकानों से राशन प्राप्त कर रहे हैं। वर्ष 2025 की अनुमानित जनसंख्या के अनुसार 89 प्रतिशत जनसंख्या का कव्हरेज हो रहा है। राशन वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए आधार सिडिंग का कार्य भी किया जा रहा है। जिसके तहत् 99.7 प्रतिशत सदस्यों का आधार सीडिंग हो चुका है और 85 प्रतिशत ई-केवाईसी भी पूर्ण कर लिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि लगभग 2.73 करोड़ खाद्यान्न सुरक्षा के दायरे में आ चुके हैं, इन्हें नियमित रूप से खाद्यान्न सामग्री उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से वितरित की जा रही है। इनमें प्राथमिकता में शामिल 73 लाख से अधिक परिवारों को निःशुल्क तथा साढ़े आठ लाख गरीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन करने वाले परिवारों को रियायती दर पर चावल उपलब्ध कराया जा रहा है। प्राथमिकता वाले परिवारों को आयरन फोलिक एसिड तथा विटामिन बी-12 युक्त फोर्टिफाइड चावल वितरित किए जा रहे हैं। राज्य सरकार की महत्वकांक्षी नियद नेल्लानार योजना के तहत् बस्तर संभाग के 5 जिले बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर एवं कांकेर के चयनित दूरस्त 402 ग्रामों के कुल 42,220 राशन कार्डधारियों को खाद्यान्न, चना, शक्कर, नमक व गुड़ का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में रायपुर जिला अस्पताल को मिला IPHL सर्टिफिकेट

रायपुर. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने जिला अस्पताल रायपुर स्थित इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी (IPHL) को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स (NQAS) का प्रमाणन प्राप्त होने पर छत्तीसगढ़ सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल करने के लिए बधाई दी है। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को लिखे पत्र में श्री नड्डा ने उल्लेख किया कि रायपुर IPHL देश में अपनी तरह की पहली प्रयोगशाला बन गई है, जिसे यह प्रतिष्ठित प्रमाणन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की विश्वसनीय एवं क्वालिटी-अश्योर्ड डायग्नोस्टिक सेवाएँ प्रदान करने की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस उपलब्धि को राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और रायपुर जिला अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में जनविश्वास को मजबूत किया है और सेवा-प्रदाय के नए मानक स्थापित किए हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने आगे कहा कि IPHL की स्थापना प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अधोसंरचना मिशन (PM-ABHIM) का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह मिशन पूरे देश में स्वास्थ्य निगरानी, प्रयोगशाला नेटवर्क और आपदा तैयारी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मिशन का मूल उद्देश्य गुणवत्ता-सुनिश्चित, अस्पताल-विशिष्ट एवं रोग-विशिष्ट प्रयोगशाला निदान उपलब्ध कराना है। रायपुर IPHL को प्रदान किया गया यह प्रमाणन इस बात की पुष्टि करता है कि प्रयोगशाला ने अपने मानव संसाधन, अत्याधुनिक उपकरणों और उन्नत अधो संरचना का सफलतापूर्वक एकीकरण करते हुए राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को प्राप्त किया है। केन्द्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए एक राष्ट्रीय मानक स्थापित करती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से आग्रह किया कि वह रायपुर मॉडल को श्रेष्ठ अभ्यास (बेस्ट प्रैक्टिस) के रूप में अपनाते हुए राज्य के अन्य जिलों और क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली डायग्नोस्टिक सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार जिलों में गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशाला एवं डायग्नोस्टिक सेवाओं का निरंतर विस्तार करती रहेगी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रौद्योगिकी-सक्षम और मानक-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को भी दर्शाती है। यह प्रमाणन संस्थागत परिपक्वता और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्ता आश्वासन की सुदृढ़ होती संस्कृति का परिचायक है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रायपुर IPHL को प्राप्त NQAS प्रमाणन छत्तीसगढ़ की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि राज्य में प्रयोगशाला सेवाओं के मानकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक उपकरणों और मजबूत अवसंरचना के क्षेत्र में सतत एवं परिणाममूलक सुधार किए गए हैं। श्री जायसवाल ने कहा कि यह प्रमाणन केवल एक संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के डॉक्टरों, लैब तकनीशियनों, पैरामेडिकल स्टाफ और जिला अस्पताल रायपुर की समर्पित टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य के अन्य जिलों में भी IPHL को इसी मॉडल पर विकसित किया जाएगा, ताकि प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध, सटीक और विश्वसनीय जांच सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने पुनः आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार और गुणवत्ता संवर्धन के लिए निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य परिवर्तन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान सुदृढ़ करेगा।

महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को मोदी जी जमीन पर उतार रहे हैं

– वीबी-जी रामजी योजना वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार कर गांवों को बनाएगी समृद्ध – वीबी-जी रामजी योजना में 125 दिन के रोजगार की गारंटी, मनरेगा में मिलता था सिर्फ 100 दिन का काम – ग्रामीण क्षेत्र के समुचित विकास में मील का पत्थर साबित होगी वीबी-जी रामजी योजना – प्रधानमंत्री जी ने 35 हजार करोड़ से 95 हजार करोड़ कर योजना का बजट करीब तीन गुना बढ़ाया – कृषि वर्ष 2026 में कृषि को उद्योग और रोजगार से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाएगी सरकार – कृषि वर्ष में वीबी-जी रामजी योजना से कृषि आधारित उद्योगों को मिलेगा नया विस्तार – 15 विभागों की संयुक्त कार्ययोजना से खेती बनेगी रोजगार और उद्योग का सशक्त माध्यम – ‘विकसित भारत‘ संकल्प को धरातल पर उतारने वाला मिशन बनेगी वीबी-जी रामजी योजना – वीबी-जी रामजी योजना से गांवों में अधोसंरचना का होगा विकास, आएगी विकास की क्रांति भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में वीबी-जी रामजी योजना को लेकर पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शी सोच का प्रतिफल है वीबी-जी रामजी जी योजना। प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी सोच से आज दुनिया भारत की ओर देख रही हैं। वीबी-जी रामजी योजना वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार कर गांवों को समृद्ध बनाएगी। इस योजना में 125 दिन के रोजगार की गारंटी है, जबकि मनरेगा में सिर्फ 100 दिन काम मिलता था। यह योजना ग्रामीण क्षेत्र के समुचित विकास में मील का पत्थर साबित होगी। कांग्रेस के शासनकाल में इस योजना में 35 हजार करोड़ मिलते थे, जिसे बढ़ाकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 74 हजार करोड़ किया और अब सुधारों के साथ लागू की जा रही इस योजना का बजट बढ़ाकर 95 हजार करोड़ कर दिया है। बजट में यह बढ़ोत्तरी कांग्रेस के शासनकाल के समय से लगभग तीन गुना अधिक है। प्रधानमंत्री जी महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को जमीन पर उतार रहे हैं। कृषि वर्ष 2026 में कृषि को उद्योग और रोजगार से जोड़कर सरकार किसानों की आय बढ़ाने का कार्य करेगी। कृषि वर्ष में वीबी-जी रामजी योजना से कृषि आधारित उद्योगों को नया विस्तार मिलेगा। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार 15 विभागों की संयुक्त कार्ययोजना बनाकर कृषि को रोजगार और उद्योग का सशक्त माध्यम बनाएगी। यह सुधार प्रक्रिया का एक हिस्सा है, कांग्रेस को इस योजना का विरोध की बजाय तथ्यात्मक बात करनी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि वीबी-जी रामजी अधिनियम से गांवों में अधोसंरचना का विकास होगा और विकास की नई क्रांति आएगी। वीबी-जी रामजी योजना में गरीबों, मजदूरों को अब 100 दिन के बजाय बजाय 125 दिन मजदूरी मिलेगी। कांग्रेस योजना को लेकर भ्रम फैलाकर ग्रामीणों को गुमराह कर रही है। इस योजना में पंचायतों को भी कार्य करने का अधिकार दिया गया है। यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “विकसित भारत” संकल्प को धरातल पर उतारने वाला राष्ट्रीय स्तर का मिशन है। अधोसंरचना के स्थाई निर्माण के साथ आजीविका का दायरा भी बढ़ाया गया है- डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का आभार मानता हूं कि उन्होंने महात्मा गांधी नरेगा योजना को आवश्यकता के अनुरूप सुधार करके देश भर में लागू किया है। इस योजना को लेकर छह माह में राज्य सरकारों को अधिसूचित करने की प्रक्रिया पूरी करनी है। अब मजदूरों को 125 दिन के रोजगार की गारंटी निश्चित रूप से रोजगार को बढ़ावा देने वाला है। कौशल और उद्यमिता के साथ इस योजना को जोड़कर रोजगार को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। सुधारों के साथ लागू की जा रही नई योजना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब वर्ष में कभी भी मजदूरी प्राप्त कर सकते हैं। केंद्र सरकार 60 और राज्य सरकार 40 प्रतिशत की राशि वहन करेगी। कई मामलों में पहले केंद्र सरकार ही निर्णय लेता था, लेकिन अब राज्य सरकारें भी गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों के समुचित विकास को ध्यान में रखकर कार्यों को शामिल कर सकते हैं। नरेगा में विद्यालय भवन, पुस्तकालय, कोल्ड स्टोरेज, ग्रामीण पार्किंग, सौर ऊर्जा, नवकरणीय ऊजा, जैविक खाद इकाई, बाढ़ आश्रय स्थल, आपदा में क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत, जल जीवन मिशन के कार्यों में सुधार एवं रखरखाव जैसे कार्य शामिल नहीं थे। नई योजना में यह सभी कार्य शामिल किए गए हैं। जैविक खाद निर्माण इकाइयां, पशुपालन, मुर्गी-पालन शेड, मत्स्य पालन संबंधी निर्माण कार्यां, नर्सरी निर्माण, भवन-निर्माण सामग्री उत्पादन इकाई निर्माण का प्रावधान भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आजीविका को बढ़ाने के लिए किया गया है। योजना में पारदर्शिता को और बढ़ाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वीबी-जी रामजी योजना में और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए होने वाले कार्यों की जियो-टैगिंग, डिजिटल रिकॉर्डिंग एवं सूचना प्रबंधन प्रणाली तथा नियोजित सभी श्रमिकों को त्वरित एवं उचित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल तथा बायोमेट्रिक भुगतान प्रणाली का प्रावधान किया गया है। पारदर्शिता के लिए ग्राम-सभा द्वारा सोशल ऑडिट भी कराने का प्रावधान है। नई योजना में पंचायतीराज संस्थाओं  जैसे ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत तथा राज्य परिषद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। श्रीमिकों का पंजीकरण करने, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी करने तथा कार्यों की प्राथमिकता के आधार पर कम से कम 50 प्रतिशत कार्यों के निष्पादन की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। भौगोलिक स्थिति, नगरीकरकण की दिशा में प्रगति जैसी बातों को योजना निर्माण के दौरान ध्यान में रखा जाएगा। नई योजना से जनकल्याणकारी कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार को कानूनी अधिकार बनाया गया है, काम नहीं तो बेरोजगारी भत्ता मिलेगा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वीबी-जी रामजी योजना में प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को न्यूनतम 125 दिन रोजगार या आजीविका का अवसर वैधानिक अधिकार है। महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों, खानाबदोस, महिला मुखिया परिवार, दिव्यांग मुखिया परिवार, छोटे व सीमांत किसानों के लिए भी रोजगार का प्रावधान किया गया है। अकुशल शारीरिक कार्यों की मजदूरी दरें केंद्र सरकार … Read more

नेहा सिंह राठौर को बड़ी राहत: विवादित सोशल मीडिया पोस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

नई दिल्ली लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को पहलगाम आतंकी हमले पर कथित विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने नेहा की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह मामला अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ा है, जिसमें कई पर्यटकों की मौत हो गई थी। हमले के बाद नेहा सिंह राठौर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे, जिनमें सरकार और प्रधानमंत्री की आलोचना की गई थी। पोस्ट को आपत्तिजनक बताते हुए लखनऊ के हजरतगंज थाने में शिकायतकर्ता अभय प्रताप सिंह की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई। आरोप है कि इन पोस्ट से देश में नफरत फैलाने और राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। इस मामले में नेहा सिंह राठौर ने पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी, लेकिन दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता अभय प्रताप सिंह को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए नेहा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी, लेकिन स्पष्ट निर्देश दिया कि वह 19 जनवरी को पुलिस जांच में शामिल होंगी और पूछताछ में पूरा सहयोग करेंगी। अगर वह जांच में सहयोग नहीं करतीं, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच आगे बढ़ेगी और नेहा को निर्देशों का पालन करना होगा। नेहा सिंह राठौर सोशल मीडिया पर अपनी राजनीतिक और सामाजिक टिप्पणियों के लिए जानी जाती हैं। उनके गाने और पोस्ट अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस मामले में पहले भी वे जांच के दायरे में थीं, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक से उन्हें तत्काल राहत मिल गई है। हालांकि, मामला अभी लंबित है और आगे की सुनवाई में अंतिम फैसला आएगा।

कोंडागांव में किसानों को मृदा स्वास्थ्य पत्रक अनुरूप उर्वरक उपयोग के बताए फायदे

कोण्डागांव. कृषि विज्ञान केंद्र, पूर्वी बोरगांव, कोंडागांव में मृदा स्वास्थ्य पत्रक अनुरूप उर्वरक उपयोग विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कृषकों को मृदा स्वास्थ्य पत्रक के महत्व, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना था, जिससे टिकाऊ कृषि को बढ़ावा दिया जा सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. सुरेश कुमार मरकाम ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य ही सतत एवं लाभकारी कृषि का मूल आधार है। यदि मृदा स्वस्थ रहेगी, तभी फसलें स्वस्थ होंगी और किसान की आय में वृद्धि संभव होगी। उन्होंने हरी खाद, फसल अवशेष प्रबंधन तथा जैविक उर्वरकों के प्रयोग पर विशेष जोर देते हुए बताया कि इन उपायों से मृदा में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। साथ ही मृदा स्वास्थ्य पत्रक की सिफारिशों के अनुसार उर्वरक एवं सूक्ष्म तत्वों का संतुलित उपयोग करने से न केवल उत्पादन लागत कम होती है, बल्कि फसल उत्पादकता एवं गुणवत्ता में भी सुधार होता है। डॉ. मरकाम ने मृदा को मानव जीवन का आधार बताते हुए भावी पीढ़ियों के हित में मृदा संरक्षण एवं वैज्ञानिक फसल चक्र अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, कांकेर से पधारे डॉ. कोमल सिंह केराम ने राज्य एवं जिले की मिट्टी की भौतिक एवं रासायनिक विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने उर्वरक उपयोग की वैज्ञानिक विधियाँ, प्राकृतिक स्रोतों से खाद निर्माण, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्टिंग तथा मृदा गुणवत्ता प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मृदा गुणवत्ता को बनाए रखते हुए उत्पादन बढ़ाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जिले के उपसंचालक कृषि श्री कैलाश मरकाम ने विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए कृषकों को उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप साग-सब्जी, मक्का, धान, दलहन एवं तिलहन आधारित फसल चक्र अपनाने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विविधीकृत खेती से जोखिम कम होता है और किसानों की आय के नए स्रोत विकसित होते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र, कांकेर के पादप रोग वैज्ञानिक डॉ. उपेंद्र कुमार नाग ने फसलों में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों की पहचान तथा उनके नियंत्रण हेतु समन्वित कीट-रोग प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने जिले में प्रमुख रूप से पाई जाने वाली फसलों में लगने वाले कीट एवं रोगों के जैविक एवं रासायनिक नियंत्रण की विस्तृत जानकारी प्रदान की। जिला कलेक्ट्रेट, कोंडागांव से आए श्री रागिब अली, जिला संसाधन प्रकोष्ठ ने बताया कि कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना के निर्देशानुसार जिले के 50 किसानों के खेतों की मृदा जांच की गई, जिसमें मृदा में कई पोषक तत्वों की कमी पाई गई है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग द्वारा दिए जा रहे प्रशिक्षण एवं आगामी सहयोग के माध्यम से जैव उर्वरकों के प्रयोग को अपनाने हेतु किसानों को प्रेरित किया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. हितेश मिश्रा ने गाय के गोबर से जैविक खाद तथा गोमूत्र से कीटनाशक एवं अन्य कृषि उपयोगी आदानों के निर्माण पर बल दिया। डॉ. भूपेंद्र ठाकुर, सस्य वैज्ञानिक ने रबी मौसम की फसलों के वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी दी, वहीं डॉ. प्रिया सिंह ने उन्नत कृषि यंत्रों की उपयोगिता बताते हुए कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त करने हेतु आधुनिक यंत्रों के प्रयोग पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में कोंडागांव, माकड़ी, फरसगांव एवं केशकाल विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी हेमलाल पद्माकर, तुलसी नेताम, आनंद नेताम, मीना नेताम, आत्मा योजना से टिकेश्वर नाग, संबंधित विकासखंडों के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी तथा लगभग 70 कृषकों ने सक्रिय सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाया।