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दिल्ली में मस्जिद के पास हिंसा: 30 पत्थरबाजों को चिन्हित, 450 से अधिक वीडियो की जांच

 नई दिल्ली दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अतिक्रमण हटाने के काम के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है. इस मामले में अब तक करीब 30 पत्थरबाजों की पहचान हो चुकी है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापे मार रहे हैं. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, साढ़े चार सौ से अधिक वीडियो मिले हैं जिनमें हिंसा और पत्थरबाजी के विभिन्न विजुअल्स को कैप्चर किया गया है. ये वीडियो सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैम रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप्स समेत हैं.  हिंसा में बाहरी लोगों की भूमिका का शक इन सबका विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे पता चला है कि हिंसा में केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि बाहरी लोग भी शामिल थे. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि कई पत्थरबाज तुर्कमान गेट के निवासी नहीं हैं. पुलिस को संदेह है कि सोशल मीडिया के जरिये हिंसा के लिए बाहर से लोगों को बुलाकर उन्हें उकसाया गया. इसी वजह से सोशल मीडिया गतिविधियों की भी व्यापक जांच की जा रही है. अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार अब तक पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें काशिफ, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद अरीब, अदनान और समीर शामिल हैं. ये सभी चांदनी महल और दरियागंज के रहने वाले बताए जा रहे हैं. उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. फरार आरोपियों की तलाश में SIT गठित मामले की गंभीरता को देखते हुए, एक विशेष जांच टीम गठित की गई है जो ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी और तकनीकी निगरानी की मदद से फरार आरोपियों की तलाश में लगी है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, कई आरोपी डर के कारण अपने घर छोड़कर फरार हो चुके हैं. पुलिस ने साफ कर दिया है कि कानून व्यवस्था को खराब करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और सभी दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया जाएगा.  तुर्कमान गेट हिंसा के बाद इलाका छावनी में तब्दील अतिक्रमण हटाने के दौरान भड़की हिंसा के बाद पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती कर दी गई है. प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है. दिल्ली पुलिस ने बताया है कि मामले को लेकर पूरी स्थिति पर नियंत्रण है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं. अफवाह ने भड़काया तनाव, सोशल मीडिया की जांच तेज पुलिस सूत्रों के अनुसार, हिंसा की एक प्रमुख वजह सोशल मीडिया पर फैलाए गए एक झूठे अफवाह को माना जा रहा है. इस अफवाह में दावा किया गया था कि इलाके की मस्जिद को तोड़ा जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में गुस्सा और असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो गई.  अतिरिक्त बल तैनात, हालात पर कड़ी नजर इसके कारण कई लोग सड़क पर उतर आए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई. हालांकि, पुलिस ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए इलाके में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया.  शांति बनाए रखने की अपील पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी लगातार इलाके की निगरानी कर रहे हैं और उन्होंने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें. अराजकता और हिंसा को रोकने के लिए अर्धसैनिक बल भी तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी स्थिति को काबू में रखा जा सके. इस घटना ने सोशल मीडिया की भूमिका और अफवाहों के खतरों पर एक बार फिर ध्यान खींचा है. प्रशासन और पुलिस मिलकर स्थिति को सामान्य करने में लगे हुए हैं और जनता से शांति बनाए रखने का अपील कर रहे हैं.

यूपी में स्कूलों में AI का प्रयोग, तकनीकी प्रशिक्षण को किया अनिवार्य

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में अब 'चॉक और डस्टर' के साथ-साथ 'एआई और मशीन लर्निंग' का दौर शुरू होने वाला है। प्रदेश सरकार ने शिक्षकों और प्रशासनिक अमले को भविष्य की तकनीक से लैस करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग ने मिशन कर्मयोगी (iGOT) पोर्टल पर उपलब्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) पाठ्यक्रमों को सभी शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए अनिवार्य कर दिया है। योगी सरकार ने बताया अपना लक्ष्य इस पहल का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में नवाचार लाना और प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ाना है। वर्तमान में पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के मामले में उत्तर प्रदेश देश में टॉप पर है, लेकिन कोर्स पूरा करने की रैंकिंग में प्रदेश चौथे स्थान पर है। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च तक यूपी को इस श्रेणी में भी नंबर वन बनाना है। इसके लिए विभाग ने स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की है। प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मार्च तक इन कोर्सों में नामांकन कर उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करें। इसका मकसद शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों में नवाचार, दक्षता और तकनीकी समझ को बढ़ाना है। विभाग ने एआई आधारित प्रमुख कोर्सों की सूची भी सभी संबंधित कार्यालयों को भेज दी है, ताकि प्रशिक्षण में कोई दिक्कत न हो। पोर्टल पर पंजीकरण के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है, लेकिन कोर्स पूरा करने में प्रदेश चौथे स्थान पर है। अब सरकार का लक्ष्य इस श्रेणी में भी यूपी को नंबर वन बनाना है। इसके लिए सभी विभागों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे इसे प्राथमिकता में लें। साथ ही यह भी तय किया गया है कि पोर्टल पर उपलब्ध 57 सुझाए गए प्रशिक्षण कोर्सों में से हर कर्मचारी को हर महीने कम से कम एक कोर्स करना होगा। इस तरह 31 मार्च तक कुल 12 कोर्स पूरे करना अनिवार्य होगा।  

विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से, 2 बच्चों की बाध्यता हटाने वाला बिल होगा पास

जयपुर  राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होने जा रहा है और राज्यपाल की मंजूरी के बाद विधानसभा सचिवालय ने बजट सत्र बुलाने की अधिसूचना जारी कर दी है। सभी विधायकों को इसकी सूचना भेजीहै। बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को राज्यपाल के अभिभाषण से होगी और यह सत्र मार्च तक चलेगा।अभिभाषण में राज्यपाल सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के बारे में बताएंगे और फरवरी के पहले सप्ताह में बजट पेश होने की संभावना है। राज्यपाल का अभिभाषण और फिर दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यवाही स्थगित होगी। इसके बाद कार्य सलाहकार समिति की बैठक होगी और इसमें बजट सत्र का कामकाज तय होगा। बजट में सरकार नए कार्यक्रमों की घोषणा करने के साथ कई नई योजनाएं शुरू करने का ऐलान करेगी। इस सत्र में सबसे अहम पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता हटाने के लिए बिल लाने की तैयारी है। बजट सत्र में पंचायतीराज कानून और नगरपालिका कानून में संशोधन करने के लिए बिल लाए जाएंगे। इसके अलावा भी कई नए बिल और आ सकते हैं। विधानसभा का बजट सत्र हंगामेदार रहने की पूरी संभावना है और विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरेगा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपने विधायक दल से मिलकर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है।  

सतना का नया अंतरराज्यीय बस स्टैंड उद्घाटन के बावजूद खाली पड़ा, बसों का संचालन शुरू नहीं

सतना शहर के बाईपास पर न्यू बस स्टैंड बनकर तैयार है. इस नए अंतरराज्यीय बस स्टैंड का उद्घाटन सीएम डॉ. मोहन यादव ने 27 दिसंबर को फीता काटकर किया था. लेकिन उद्घाटन के बाद से अभी तक 10 दिन बीत जाने के बाद भी यहां से बसों का संचालन शुरू नहीं हो सका है. अभी भी सभी बसों का संचालन सेमरिया चौराहे स्थित पुराने बस स्टैंड से किया जा रहा है. 31 करोड़ की लागत से बना है बस स्टैंड सतना-मैहर बायपास में स्थित नवनिर्मित अंतरराज्यीय बस स्टैंड का उद्घाटन किया जा चुका है. यह अंतरराज्यीय बस स्टैंड 31 करोड़ से अधिक की लागत से बनकर तैयार हुआ है. जो नगर निगम के द्वारा तैयार कराया गया है. इसके उद्घाटन के बाद जिले भर के समस्त बसें यही से संचालित होनी है, लेकिन बस स्टैंड सुनसान पड़ा हुआ है. आरोप लगाया जा रहा है कि बसों के संचालन का नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है और परिवहन विभाग की संपूर्ण गाइडलाइन का पालन किए बिना ही इसका उद्घाटन हो गया. धूल फांक रहा है बस स्टैंड बस स्टैंड पर मौजूद चौकीदार विनोद सिंह बघेल ने बताया कि "जब से इस बस स्टैंड का निर्माण हो रहा है, तब से यहां पर चौकीदारी का काम कर रहे हैं. इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री ने किया, लेकिन बसों का संचालन शुरू नहीं हुआ है. हम भी यहां पर बसों के संचालन की राह देख रहे हैं. इतना खूबसूरत बस स्टैंड तो बना दिया गया, लेकिन यहां बसें नहीं चल पा रही हैं. जिससे यहां धूल और जाले लगते जा रहे हैं." परमिट शर्तों का पालन किए जाने की मांग इस बारे में बस यूनियन के अध्यक्ष कमलेश गौतम ने बताया कि "हमारी कोई नवीन मांगे नहीं है. नवनिर्मित बस स्टैंड से बसों के संचालन के लिए जो हम लोगों को परमिट शर्तों में अनुबंध हुआ है. इस अनुबंध के तहत इसका पालन किया जाए. जिससे कि हम सब बसों का संचालन नए बस स्टैंड से कर सकें." बैठक कर संचालन के बिंदु पर होगी चर्चा आरटीओ अधिकारी संजय श्रीवास्तव ने बताया कि "नियमानुसार बस स्टैंड बन गया और उसका उद्घाटन भी मुख्यमंत्री कर चुके हैं. अब धीरे-धीरे करके यहां से बसों का संचालन शुरू किया जाएगा. परमिट शर्तों के पालन के लिए एक पत्र संभाग आयुक्त को भेजा गया है, जिसमें संशोधन की बात हो चुकी है. जिला प्रशासन के द्वारा इस विषय में आगामी 8 जनवरी को एक बैठक भी रखी गई है. जिसमें बस यूनियन और जिला प्रशासन शामिल होंगे. इस बैठक में नियम शर्तों के तहत नए बस स्टैंड से बसों का संचालन शुरू करने की पूरे बिंदु सामने रखे जाएंगे." इस बारे में जिले के सांसद गणेश सिंह ने बताया कि "बहुत जल्दी हम बसों का संचालन नए बस स्टैंड से शुरू कराएंगे. बसों के परमिट एवं अन्य बिंदुओं को लेकर हम एक बड़ी बैठक बुलाने वाले हैं जिसमें सारी चीजें तय होंगी."

शासकीय कार्यालयों में बगैर वैध दस्तावेज के वाहन नहीं चल सकेंगे, सरकार का बड़ा फैसला

शासकीय कार्यालयों में बगैर वैध दस्तावेज के वाहन नहीं चल सकेंगे दुर्घटना में क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करने सरकार का बड़ा फैसला बीमा, फिटनेस व परमिट अनिवार्य परिवहन विभाग ने जारी किए आदेश भोपाल  मध्यप्रदेश शासन के परिवहन विभाग ने शासकीय विभागों, निगमों एवं निकायों द्वारा विभिन्न प्रयोजनों के लिए अनुबंधित किए जाने वाले वाहनों के संबंध में नवीन निर्देश जारी किए हैं। जारी आदेशानुसार अब बगैर वैध दस्तावेजों के किसी भी वाहन को शासकीय कार्यालयों में उपयोग में नहीं लिया जाएगा। शासकीय विभागों द्वारा सीधे अथवा निजी एजेंसियों के माध्यम से उपयोग में लाए जाने वाले मालवाहक एवं यात्री वाहनों के सभी वैधानिक दस्तावेज अनुबंध से पूर्व और वाहन उपयोग की संपूर्ण अवधि के दौरान वैध होना अनिवार्य होगा। साथ ही, विभागों को भुगतान से पहले भी इन दस्तावेजों की नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। परिवहन विभाग ने यह भी निर्देश दिये है कि खनिज अथवा अन्य सामग्री के परिवहन के लिये जारी की जाने वाली अनुमति संबंधित वाहन की निर्धारित क्षमता से अधिक नहीं होनी चाहिए। अनुबंधित वाहनों द्वारा नियमानुसार मोटरयान कर का भुगतान किया गया होना चाहिए। ई-मेल से  भीप्राप्‍त कर स‍कते हैं मार्गदर्शन सभी विभागों, निगमों एवं निकायों को यह सुविधा प्रदान की गई है कि वे अपने यहां अनुबंधित अथवा एजेंसियों द्वारा उपयोग में लाए जा रहे वाहनों के संबंध में परिवहन आयुक्त कार्यालय, मध्यप्रदेश, ग्वालियर से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए ई-मेल आईडी commr.transpt@mp.gov.in पर पत्र प्रेषित किया जा सकता है।  

ग्वालियर: छात्रा का सोशल मीडिया पर वीडियो, योग मुद्रा से छेड़छाड़ पर सवाल उठाते हुए समाज की मानसिकता पर गंभीर टिप्पणी

ग्वालियर  शहर में स्मार्ट सिटी पहल के तहत बनाई गई महिलाओं की योग करती हुई पेंटिंग को कुछ आसामाजिक तत्वों ने गंदी हरकतों से खराब कर दिया। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब 11वीं की छात्रा आशी कुशवाहा ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस वीडियो ने लोगों को गुस्सा दिलाया और नगर निगम को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी। छात्रा ने सोशल मीडिया पर डाली थी पोस्ट छात्रा आशी कुशवाहा ने जब इस गंदी हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर डाला तो उसने लिखा, 'मुझे यह बात उठानी पड़ी। मैं रोज़ इस सड़क से गुज़रती हूं, और रोज़ इसे देखकर मुझे गुस्सा और घिन आती है। ग्वालियर को गर्व से 'स्मार्ट सिटी' कहा जाता है, लेकिन इसके लोगों की स्मार्टनेस कहां है? यह कोई मामूली नुकसान नहीं है। यह घटिया सोच, गंदी मानसिकता और गहरा अनादर है। यह शर्मनाक और बेहद निराशाजनक है कि एक महिला की पेंटिंग भी ऐसी बीमार सोच से सुरक्षित नहीं है। अगर हमारी सोच ऐसी है, तो 'स्मार्ट सिटी' का मतलब कुछ भी नहीं है।' वीडियो पोस्ट से पहले डरी हुई थी आशी आशी ने बताया कि वह वीडियो पोस्ट करने से पहले थोड़ी डरी हुई थी क्योंकि वह अभी 11वीं में पढ़ती है। उन्होंने बताया कि 'मैं ऐसे सिटी-लेवल स्टेप लेने के लिए छोटी भी हूं। लेकिन मुझे लगा कि यह ज़रूरी है। यह समस्या सिर्फ ग्वालियर की नहीं है, बल्कि पूरे देश में सार्वजनिक जगहों और संपत्तियों का यही हाल है। दीवार ठीक हो जाएगी और फिर से पेंट हो जाएगी, लेकिन उन लोगों की मानसिकता का क्या जो एक महिला की काली पेंटिंग को भी वस्तु की तरह देख रहे हैं? महिलाएं पेंटिंग में भी सुरक्षित नहीं हैं। यह शर्मनाक है। यह निराशाजनक और दुखद है।' वीडियो वायरल होने के बाद एक्शन छात्रा के पोस्ट के बाद, कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मौके पर पहुंचे। लोकेंद्र सिंह उर्फ 'केतु' पेंट और ब्रश लेकर पहुंचे और पेंटिंग के खराब हुए हिस्सों को ठीक किया। उन्होंने कहा, 'जब मैंने अपने सोशल मीडिया फीड पर यह रील देखी, तो मुझे इतना बुरा लगा कि मैं मौके पर गया और दीवार पर आपत्तिजनक निशानों को फिर से पेंट कर दिया। लोगों को ऐसे काम करने से बचना चाहिए।' प्रशासन ने पूरी सफेद रंग दी दीवार इसके बाद, ग्वालियर नगर निगम ने पूरी दीवार को सफेद रंग से पोत दिया, जिससे सभी निशान और कलाकृति मिट गईं। जीएमसी कमिश्नर संघ प्रिय ने बताया कि फिलहाल दीवार को सफेद रंग से रंग दिया गया है। उन्होंने कहा कि वे उसी स्थान पर एक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, जहां वे Gen Z को फिर से दीवार को सकारात्मक संदेशों के साथ पेंट करने के लिए आमंत्रित करेंगे। निगम पेंट के साथ-साथ स्नैक्स भी मुहैया कराएगा। इस प्रस्तावित कार्यक्रम के बारे में और जानकारी अलग से दी जाएगी।

नक्सलगढ़ से राष्ट्रीय स्तर तक: सुकमा के स्वास्थ्य केंद्रों को NQAS प्रमाणन मिला

रायपुर  सुकमा जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के निरंतर प्रयासों ने आज एक नया इतिहास रच दिया है। सुकमा ज़िले के घोर नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बुड़दी, आयुष्मान आरोग्य मंदिर गगपल्ली और आयुष्मान आरोग्य मंदिर किस्टाराम को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स(NQAS) प्रमाण पत्र से नवाजा गया है। यह उपलब्धि केवल एक सर्टिफिकेट नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रशासन 'अंतिम व्यक्ति' तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने के अपने संकल्प को सिद्ध कर रहा है। कठिन चुनौतियों के बीच 'क्वालिटी' का कीर्तिमान सुकमा जैसे संवेदनशील ज़िले में, जहाँ भौगोलिक परिस्थितियाँ और सुरक्षा की चुनौतियाँ अक्सर बाधा बनती हैं, वहां के स्वास्थ्य केंद्रों का राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। इन केंद्रों ने सेवा प्रावधान, मरीज के अधिकार और संक्रमण नियंत्रण जैसे 8 कड़े मानकों पर 70% से अधिक अंक प्राप्त कर अपनी उत्कृष्टता साबित की है। प्रशासन की रणनीति और सफलता के सूत्र ज़िला प्रशासन ने इन केंद्रों में बुनियादी ढाँचे और नैदानिक देखभाल को बेहतर बनाने के लिए  नियद नेल्लानार के अंतर्गत विशेष कार्ययोजना तैयार की गई थी जिसमें सतत मॉनिटरिंग- दुर्गम क्षेत्रों में दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। संक्रमण नियंत्रण- अस्पतालों में स्वच्छता और बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट को प्राथमिकता दी गई। रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण- मरीजों को न केवल उपचार मिले, बल्कि उनके अधिकारों और सम्मान का भी पूरा ध्यान रखा गया। कलेक्टर ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि सुकमा जिले के 3 स्वास्थ्य केंद्रों को NQAS सर्टिफिकेट मिलना जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों का राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना यह दर्शाता है कि प्रशासन की प्राथमिकता शिक्षा और स्वास्थ्य के जरिए विकास को गति देना है।  क्या है NQAS और इससे क्या बदलेगा NQAS सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बनाया गया एक सख्त फ्रेमवर्क है। इस प्रमाणन के बाद अब इन केंद्रों को भारत सरकार की ओर से वित्तीय प्रोत्साहन भी मिलेगा। इस राशि का उपयोग स्वास्थ्य सुविधाओं के और अधिक विस्तार और रखरखाव के लिए किया जाएगा, जिससे भविष्य में स्थानीय ग्रामीणों को और भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट: 11-12 जनवरी को आयोजित होगा, स्टार्ट-अप्स को मिलेगा समर्थन

मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 11 और 12 जनवरी को समिट से सशक्त स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम में मिलेगी मदद भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘विकसित एम.पी. @2047’विज़न को सकारात्मक गति देने और अधिक सुदृढ़ करने के साथ ही स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को अगले स्तर तक ले जाने के उद्देश्य से 11 एवं 12 जनवरी 2026 को रवींद्र भवन, भोपाल में मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 2026 का आयोजन होने जा रहा है। सोमवार 12 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसमें सहभागिता करेंगे। समिट में राज्य एवं देश भर से स्टार्ट-अप्स, निवेशक, इनक्यूबेटर्स, उद्योग प्रतिनिधि, शैक्षणिक संस्थान एवं अन्य हितधारक सहभागिता करेंगे। यह समिट स्टार्ट-अप्स को निवेश, नेटवर्किंग, नीति संवाद एवं नवाचार प्रदर्शन का एक सशक्त मंच प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति–2025 का फ़रवरी 2025 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में विमोचन के साथ राज्य में नवाचार एवं उद्यमिता को एक नई दिशा प्राप्त हुई। नीति के सफल क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप प्रदेश के स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान एवं तीव्र गति प्राप्त हुई है। नवीन नीति से स्टार्ट-अप्स के प्रत्येक चरण के लिए वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन, निवेश, पेटेंट सहयोग एवं बाजार से जुड़ाव जैसे अनेक सशक्त प्रावधान सुनिश्चित किए गए, जिससे प्रदेश में नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को गति मिली है। आयुक्त एमएसएमई दिलीप कुमार ने स्टार्ट-अप्स, नव प्रवर्तकों, उद्यमियों, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स एवं स्टार्ट-अप इको-सिस्टम से जुड़े हितधारकों का आह्वान किया है कि वे इस स्टार्ट-अप समिट में सक्रिय रूप से सहभागिता करें। आयुक्त एमएसएमई ने कहा कि स्टार्ट-अप्स नवाचार-आधारित विकास एवं रोजगार सृजन की आधारशिला है। यह समिट स्टार्ट-अप्स के लिए अपने विचारों, उत्पादों एवं समाधानों को प्रदर्शित करने, निवेशकों एवं नीति-निर्माताओं से संवाद स्थापित करने तथा मध्यप्रदेश के सशक्त स्टार्ट-अप इको-सिस्टम का हिस्सा बनने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।  

मध्य प्रदेश के सरकारी शिक्षकों के लिए खुशखबरी, सैलरी में 3-5 हजार रुपए की बढ़ोतरी

भोपाल  मध्य प्रदेश के करीब सवा से डेढ़ लाख सरकारी शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर है. पिछले 3 वर्षों से जिस चतुर्थ समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान (Fourth time-scale-based promotional pay scale) का इंतजार किया जा रहा था, उस पर अब स्कूल शिक्षा विभाग ने अंतिम तैयारी पूरी कर ली है. 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को इसका लाभ देने के लिए 300 करोड़ से अधिक का प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में रखा जाएगा. मंजूरी मिलते ही शिक्षकों की सैलरी में हर माह 3 से 5 हजार रुपए की बढ़ोतरी शुरू हो जाएगी. प्रक्रिया पूरी, सवा लाख शिक्षकों को मिलेगा लाभ स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के बाद प्रदेश में सरकारी शिक्षकों के लिए चतुर्थ समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान का रास्ता साफ हो गया है. शिक्षा विभाग ने 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को यह लाभ देने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है. विभाग के अनुसार इस योजना से प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक शिक्षकों के साथ-साथ व्याख्याता, प्राचार्य, प्रधानाध्यापक और सहायक संचालक स्तर तक के करीब सवा लाख कर्मचारी लाभान्वित होंगे. वहीं इस पर सरकार को करीब 312 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा. सीएम ने किया था चतुर्थ समयमान का ऐलान चतुर्थ समयमान देने की घोषणा सबसे पहले वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी. घोषणा के तहत सभी विभागों में 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके लोक सेवकों को यह लाभ दिया जाना था. कई विभागों में प्रक्रिया आगे बढ़ी और स्कूल शिक्षा विभाग में भी सीधी भर्ती के व्याख्याता और प्राचार्यों को यह सुविधा मिल गई, लेकिन पदोन्नति से आए शिक्षकों, व्याख्याताओं, प्राचार्यों और अन्य अधिकारियों को इससे वंचित रखा गया. इसी वर्ग में करीब सवा लाख शिक्षक आते हैं, जो अब तक इस लाभ का इंतजार कर रहे थे. कैबिनेट में जल्द आएगा प्रस्ताव स्कूल शिक्षा विभाग में 35 साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारी लंबे समय से चतुर्थ समयमान देने की मांग कर रहे थे. इसको लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी शिक्षक संघों की कई बार मुलाकात हुई. आखिरकार 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर सीएम ने बचे हुए लोगों को चतुर्थ समयमान देने की घोषणा की थी, लेकिन 5 महीने बाद भी अब तक इस पर कोई अमल नहीं हुआ. हालांकि हाल में स्कूल शिक्षा मंत्री के साथ हुई शिक्षक संगठनों की बैठक में मंत्री ने बताया कि इसे कैबिनेट की बैठक में लेकर जाएंगे. कैबिनेट में प्रस्ताव पास होने के बाद शिक्षकों को इसका लाभ मिलने लगेगा. हर माह 3 से 5 हजार रुपए का नुकसान मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौर ने बताया कि "मुख्यमंत्री ने 5 महीने पहले चतुर्थ समयमान की घोषणा की थी, लेकिन विभाग के अधिकारी आज तक इस प्रक्रिया को पूरी नहीं कर सके. हमारी मांग है कि इसे विभाग द्वारा तुरंत लागू किया जाए. राठौर ने बताया कि चतुर्थ समयमान लागू होने से शिक्षकों को हर माह 3 से 5 हजार रुपए का सीधा लाभ मिलेगा. अब तक इस सुविधा के अभाव में उन्हें मासिक नुकसान उठाना पड़ रहा था." विभाग पर 312 करोड़ रुपए अतिरिक्त भार स्कूल शिक्षा विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी कमल सिंह सोलंकी ने बताया कि "शिक्षकों को चतुर्थ समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान देने की तैयारी पूरी कर ली गई है. इसका प्रस्ताव बनाकर कैबिनेट में चर्चा के लिए भेजा गया है. यहां से अनुमति मिलते ही चतुर्थ समयमान के आदेश जारी कर दिए जाएंगे और पात्र शिक्षकों को इसका लाभ मिलने लगेगा. सोलंकी ने बताया कि इस प्रक्रिया में स्कूल शिक्षा विभाग पर करीब 312 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा."

भोपाल प्रशासन की नई पहल: घर-घर पानी कनेक्शन और स्मार्ट मीटर, शादी पंजीकरण शुल्क अब सिर्फ 130 रुपए

भोपाल   नवविवाहित जोड़ों के लिए नए साल में भोपाल नगर निगम बड़ी राहत और खुशखबरी लेकर आया है। अब विवाह पंजीयन यानी मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना न सिर्फ आसान होगा, बल्कि बेहद सस्ता भी। नगर निगम ने मैरिज सर्टिफिकेट की फीस में भारी कटौती का प्रस्ताव तैयार कर मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) के समक्ष रखा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही नवदंपत्तियों को मैरिज सर्टिफिकेट के लिए अब 1100 रुपये की जगह मात्र 130 रुपये ही चुकाने होंगे। सबसे खास कुल 829 कॉलोनियों में पानी के बल्क कनेक्शन से व्यक्तिगत कनेक्शन मिलेंगे। इन दोनों बड़े फैसलों को 2 जनवरी को हुई मेयर इन कौंसिल (एमआईसी) की मीटिंग में मंजूरी मिल गई। अब 13 जनवरी को होने वाली निगम परिषद की बैठक में इन्हें रखा जाएगा। मैरिज रजिस्ट्रेशन फीस में 3900 रुपए की कटौती निगम के मुताबिक, अब तक निर्धारित शुल्क 1100 रुपए है। विलंब शुल्क 500 रुपए प्रति वर्ष और अधिकतम विलंब शुल्क 5 हजार रुपए लिया जाता था। प्रस्ताव पास होने के बाद रजिस्ट्रेशन फीस 130 रुपए लगेगी। ये राशि 30 दिन के अंदर आवेदन करने पर देना होगी। यदि 30 दिन के बाद आवेदन किया तो 1100 रुपए लगेंगे। यानी, पहले अधिकतम राशि 5 हजार रुपए थी, उसमें 3900 रुपए की कटौती की जा रही है। पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन नगर निगम में मैरिज सर्टिफिकेट के लिए 16 प्रकार की जानकारियों के साथ आवेदन करना होता है। अभी ऑनलाइन सुविधा होने के बावजूद अधिकांश लोग निगम कार्यालय जाकर आवेदन करते हैं। इसे देखते हुए निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने निर्देश दिए हैं कि अब सभी आवेदन अनिवार्य रूप से ऑनलाइन लिए जाएंगे और प्रमाण पत्र भी ऑनलाइन ही जारी किए जाएंगे। वार्ड कार्यालय से मिलेगा मैरिज सर्टिफिकेट विवाह पंजीयन प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए इसे विकेंद्रीकृत किया जा रहा है। अब सिर्फ एक केंद्र के बजाय नगर निगम के सभी 85 वार्ड कार्यालयों से मैरिज सर्टिफिकेट जारी किए जाएंगे। ऑनलाइन आवेदन करने पर संबंधित वार्ड कार्यालय की टीम घर जाकर सत्यापन करेगी। इससे नवदंपत्तियों को माता मंदिर स्थित विवाह पंजीयन शाखा के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नगर निगम की इस पहल को नए साल में आम नागरिकों के लिए बड़ी सुविधा और राहत के रूप में देखा जा रहा है। एमआईसी की मुहर के बाद लागू होगा नया नियम वर्तमान व्यवस्था में विवाह के एक साल बाद आवेदन करने पर 500 रुपये अतिरिक्त लेट फीस देनी पड़ती है। नए प्रस्ताव के अनुसार, यदि विवाह के एक महीने के भीतर आवेदन किया जाता है तो शुल्क सिर्फ 130 रुपये रहेगा। वहीं, एक महीने के बाद आवेदन करने पर अधिकतम 500 रुपये की पेनाल्टी लगेगी। इस तरह किसी भी स्थिति में कुल शुल्क 630 रुपये से अधिक नहीं होगा।  होने वाली एमआईसी बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। व्यक्तिगत कनेक्शन पर 'शहर सरकार' का बड़ा फैसला एमआईसी में मंजूरी के बाद यदि परिषद की बैठक में व्यक्तिगत कनेक्शन का प्रस्ताव पास होता है तो यह शहर सरकार का बड़ा फैसला होगा। निगम चुनाव के दौरान बीजेपी ने इसे लेकर वादा किया था। वहीं, समय-समय पर सांसद-विधायक भी ये मांग उठा चुके हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस लगातार मांग करती आ रही है। ताकि, आम लोगों को फायदा मिल सके। कई बैठकों में यह मुद्दा उठ चुका है। बता दें कि बल्क कनेक्शन का मुद्दा कई बार सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी उठ चुका है। खासकर होशंगाबाद रोड की कॉलोनियों में बल्क कनेक्शन की बाध्यता होने से लोग कनेक्शन नहीं ले पा रहे हैं। लोग मांग उठा रहे हैं कि उन्हें सिंगल यानी व्यक्तिगत कनेक्शन दिए जाए। इससे बेवजह का बोझ नहीं पड़ेगा। यही प्रस्ताव अब 13 जनवरी की बैठक में आने वाला है। इसे लेकर जल कार्य अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट भी महापौर मालती राय को सौंप दी है। व्यक्तिगत कनेक्शन व्यवस्था लागू करने पर इतना खर्च भोपाल शहर में कुल 1566 कॉलोनियों हैं। जिनमें से 829 कॉलोनियां ऐसी हैं, जिनमें नगर निगम बल्क कनेक्शन के माध्यम से जलप्रदाय करता है। इन कॉलोनियों में व्यक्तिगत कनेक्शन के माध्यम से जल उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है। यदि इन कॉलोनियों में नगर निगम संचालन करता है तो वाल्वमैन, ऑपरेटर, सुपरवाइजर, पाइपलाइन बिछाये जाने और इंटर कनेक्शन किए जाने पर कुल 801 करोड़ रुपए खर्च आएगा। इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी बन गई है। इन कॉलोनियों के 74 हजार 905 घरों में स्मार्ट मीटर के माध्यम से जल उपलब्ध कराने पर प्रति आवास 9709 रुपए का खर्च होगा। कुल राशि 72.73 करोड़ रुपए खर्च आएगा। स्मार्ट मीटर लगाने सहित कुल व्यय राशि 874.43 करोड़ रुपए होगी। इनमें जलप्रदाय के संधारण/संचालन के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से कॉलोनी वासियों द्वारा कार्य कराया जा सकता है। जिसके लिए बल्क कनेक्शन का निर्धारित शुल्क 17 रुपए प्रति हजार लीटर नगर निगम को एजेंसी द्वारा दिया जाएगा। अतिरिक्त राशि एजेंसी द्वारा संबंधित कॉलोनी से ली जाएगी। इन कॉलोनियों में व्यक्तिगत कनेक्शन लिए जाने के लिए लोगों की सहमति जरूरी है। 70 प्रतिशत से अधिक सहमति प्राप्त होने पर ही व्यक्तिगत कनेक्शन प्रदान करने की कार्रवाई होगी। इन कॉलोनियों में प्रथम आओ प्रथम पाओ पद्धति के आधार पर व्यक्तिगत कनेक्शन प्रदान करने की प्रक्रिया की जा सकेगी। भोपाल में 2.30 लाख से ज्यादा कनेक्शन भोपाल में दो लाख 30 हजार से ज्यादा नल कनेक्शन हैं। इसके जरिए नगर निगम घर-घर तक सुबह और शाम पानी पहुंचाता है। इनमें बल्क कनेक्शन भी शामिल हैं। बल्क कनेक्शन की वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए वे बल्क की जगह व्यक्तिगत यानी सिंगल कनेक्शन की मांग उठा रहे हैं। बहुत सारे उपभोक्ताओं को मिलाकर निगम बल्क कनेक्शन दे रहा है। इसमें कई व्यावहारिक दिक्कतें भी लोगों के सामने आ रही हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि व्यक्तिगत कनेक्शन मिलें। इससे लोग अपने हिसाब से कनेक्शन ले लेंगे और उन्हें ज्यादा कीमत भी नहीं चुकाना पड़ेगी। कांग्रेस भी चाहती है कि बाध्यता हटे बल्क के स्थान पर व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शन दिए जाने के लिए कांग्रेस भी मुद्दा उठा रही थी। पिछली दो मीटिंगों में कांग्रेस पार्षद हंगामा भी कर चुके हैं। अमृत 2.0 से जुड़ा तीसरा प्रस्ताव एजेंडे में जो तीसरा प्रस्ताव शामिल हैं, वह अमृत 2.0 से संबंधित … Read more