samacharsecretary.com

यात्रियों को बड़ी राहत: यूपी रोडवेज में मोबाइल ऐप से सीट बुकिंग शुरू, बस की लाइव लोकेशन भी मिलेगी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश रोडवेज बस अड्डों पर बस का इंतजार कर रहे यात्रियों को अब बार-बार जानकारी लेने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने मोबाइल ऐप के माध्यम से बसों की सीट बुकिंग और लाइव लोकेशन की सुविधा शुरू करने की पूरी तैयारी कर ली है। रेलवे की तर्ज पर अब यात्री यात्रा से पहले ही अपनी पसंद की सीट आरक्षित कर सकेंगे। इसके साथ ही बस की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी मोबाइल पर ही उपलब्ध होगी। मोबाइल ऐप्स से सीट बुकिंग, लाइव ट्रैकिंग यात्री यूपीएसआरटीसी, यूपी राही और मार्गदर्शी जैसे आधिकारिक मोबाइल ऐप्स के जरिए सीट बुकिंग के साथ-साथ बस की लाइव ट्रैकिंग कर सकेंगे। इसके लिए निगम की बसों में जीपीएस सिस्टम लगाया जा रहा है। जीपीएस के जरिए प्रत्येक बस की सटीक लोकेशन यात्रियों को उनके स्मार्टफोन पर दिखाई देगी।   मोबाइल ऐप के माध्यम से यह भी पता चल सकेगा मोबाइल ऐप के माध्यम से यह भी पता चल सकेगा कि कौन-सी बस किस समय नजदीकी बस स्टैंड पर पहुंचेगी या पहुंच चुकी है। इससे यात्रियों को लंबे समय तक बस अड्डे पर खड़े रहकर इंतजार करने की परेशानी से राहत मिलेगी। यह सुविधा खासतौर पर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। सभी प्रमुख मार्गों पर सुविधा शुरू की जाएगी नई व्यवस्था लागू होने के बाद रोडवेज की सेवाएं और अधिक आधुनिक व सुविधाजनक हो जाएंगी। जल्द ही जिले के सभी प्रमुख मार्गों पर चलने वाली बसों को इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा यात्री इसका लाभ उठा सकें। रायबरेली के क्षेत्रीय प्रबंधक आर.के. त्रिपाठी ने बताया कि डिजिटल व्यवस्था से बस संचालन में पारदर्शिता आएगी और समय पालन में भी सुधार होगा। यात्री घर बैठे मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सीट बुक कर सकेंगे और यात्रा से पहले ही बस की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर पाएंगे। उम्मीद है कि यह सुविधा फरवरी से शुरू हो जाएगी। 

‘महतारी गौरव वर्ष’ पर आधारित 2026 का शासकीय कैलेंडर जारी, CM साय ने किया लॉन्च

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में वर्ष 2026 के शासकीय कैलेंडर का विमोचन किया। वर्ष 2026 को राज्य सरकार द्वारा ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। इसी थीम पर आधारित यह कैलेंडर सशक्त एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ के संकल्प को अभिव्यक्त करता है। बता दें कि कैलेंडर के मुख्य पृष्ठ पर छत्तीसगढ़ के पांच प्रमुख शक्तिपीठ मां बमलेश्वरी डोंगरगढ़, मां महामाया रतनपुर, मां दंतेश्वरी दंतेवाड़ा, मां चंद्रहासिनी चंद्रपुर और मां कुदरगढ़ी सूरजपुर के पावन धाम को प्रमुखता से स्थान दिया गया है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के छायाचित्र भी अंकित हैं। पृष्ठभूमि में सिरपुर एवं राजिम के मंदिर, आदिवासी संस्कृति, मधेश्वर पहाड़ तथा चित्रकोट जलप्रपात के आकर्षक ग्राफिकल प्रतिरूप सम्मिलित किए गए हैं, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर का प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि “राज्य सरकार के लिए मातृशक्ति का सम्मान और सशक्तिकरण सर्वोच्च प्राथमिकता है। महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाया जा रहा यह वर्ष महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन को समर्पित है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया यह शासकीय कैलेंडर महिला सशक्तिकरण, राज्य की प्राथमिकताओं और हमारी उपलब्धियों का सशक्त प्रतीक है। इसमें जनकल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सरोकारों को समाहित किया गया है, जो सशक्त एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।” कैलेंडर के विभिन्न मासिक पृष्ठों में विषयानुसार योजनाओं एवं अभियानों को समाहित किया गया है। जनवरी माह के पृष्ठ पर राज्य के प्रमुख शक्तिपीठों का दर्शन कराया गया है। फरवरी माह में राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान को दर्शाया गया है, वहीं मार्च माह को महतारी वंदन योजना को समर्पित किया गया है। अप्रैल माह में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, मई माह में तेंदूपत्ता संग्रहण एवं चरण पादुका योजना, तथा जून माह में बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ अभियान को प्रमुखता दी गई है। जुलाई माह में महिला मुखिया के नाम से पीडीएस राशनकार्ड की व्यवस्था को दर्शाया गया है। अगस्त माह में रक्षाबंधन उत्सव, सितंबर में दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना और अक्टूबर माह में शौर्य का सम्मान विषय को स्थान दिया गया है। नवंबर माह को “सेवा ही संकल्प” की भावना के साथ प्रस्तुत किया गया है, जबकि दिसंबर माह को महिला सशक्तिकरण के प्रतीक रूप में दर्शाया गया है। शासकीय कैलेंडर 2026 के विमोचन के इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल, जनसंपर्क सचिव रोहित यादव, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत और आयुक्त जनसंपर्क रवि मित्तल उपस्थित थे।

बिहार की सियासत में भूचाल! राजद बोला— भाजपा और नीतीश के बीच टूट चुका है भरोसा

पटना  बिहार की सियासत में इन दिनों 'विधायकों की टूट' और 'कुर्सी के खेल' को लेकर घमासान मचा हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच दावों और प्रति-दावों का दौर जारी है। जहां एनडीए (NDA) खेमा राजद के 25 विधायकों के टूटने की बात कह रहा है, वहीं राजद ने हुंकार भरी है कि सत्ता पक्ष के 65 विधायक उनके संपर्क में हैं। नीतीश कुमार को हटाने का 'प्लान' राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कुर्सी से हटाने का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। राजद का आरोप है कि भाजपा बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए अपने ही सहयोगी दलों को कमजोर कर रही है। इसी कड़ी में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी 'राष्ट्रीय लोक मोर्चा' (RLM) में मचे घमासान को सीएम की कुर्सी हथियाने के खेल से जोड़कर देखा जा रहा है।   कुशवाहा की पार्टी में कलह की वजह आरएलएम में विवाद तब गहराया जब उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बना दिया गया। इससे पार्टी के विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। विधायकों की नाराजगी उस समय सार्वजनिक हो गई जब वे कुशवाहा द्वारा आयोजित 'लिट्टी भोज' से नदारद रहे और उनकी भाजपा नेता नितिन नवीन से मुलाकात की तस्वीरें वायरल हुईं। बीजेपी और आरएलएम का पलटवार इन आरोपों पर भाजपा ने इसे आरएलएम का आंतरिक मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया है। वहीं, आरएलएम प्रवक्ता ने दावा किया कि तीनों विधायक पार्टी के प्रति समर्पित हैं और व्यक्तिगत कारणों से भोज में शामिल नहीं हो सके थे। फिलहाल, बिहार की राजनीति में मचे इस उथल-पुथल ने आगामी चुनावों से पहले नए समीकरणों की आहट दे दी है।  

तमनार में बवाल के बाद सरकार एक्शन मोड में, पुलिस और ग्रामीणों की झड़प की जांच के आदेश

 रायपुर  रायगढ़ जिले के तमनार में शनिवार को पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई हिंसक झड़प की जांच होगी. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घटना की जांच में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है. बता दें कि रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में शनिवार को जिंदल के कोयला खदान के विरोध में आंदोलन कर रहे 14 गांव के ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों के साथ न केवल मारपीट की बल्कि बस समेत दो गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया था. हिंसक झड़प में महिला टीआई कमला पुसाम समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे. पुलिस ने घटनाक्रम के बाद 30 से 35 लोगों को गिरफ्तार किया है. दरअसल, पिछले दिनों जिंदल कंपनी के गारे पेलमा कोल ब्लाक की हुई जनसुनवाई को फर्जी बताकर तमनार क्षेत्र के 14 गांव के ग्रामीण लिबरा के सीएचपी चौक पर कंपनी के गेट के सामने शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे. इससे कंपनी में भारी वाहनों का परिचालन ठप हो गया था. शनिवार को दल-बल से साथ पुलिस पहुंची और आक्रोशित ग्रामीणों को समझाइश देते हुए धरना समाप्त करने कहा. इस दौरान विरोध कर रहे कुछ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया. इसलिए भड़के ग्रामीण बताया जा रहा है कि इसके बाद वाहनों का परिचालन शुरू हो गया था. इसी बीच खुरूषलेंगा गांव के पास भारी वाहन की टक्कर से एक साइकिल सवार ग्रामीण घायल हो गया, जिसके बाद माहौल गर्मा गया. घटना की जानकारी मिलते ही तमनार थाना प्रभारी कमला पुसाम एक टीम के साथ मौके पर पहुंची, जहां ग्रामीणों ने लाठी-डंडे और लातों से उसकी पिटाई कर दी. पुलिस पर पथराव भी किया, जिससे टीआई समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए.

सांसद खेल महोत्सव में अव्यवस्था, पुरस्कार वितरण के वक्त बढ़ा तनाव, पुलिस ने संभाली स्थिति

फिरोजाबाद  उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले स्थित दाऊदयाल स्टेडियम में आयोजित सांसद खेल प्रतियोगिता के दूसरे व अंतिम दिन शनिवार शाम करीब छह बजे पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान हंगामा हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कार्यक्रम को बीच में ही रोकना पड़ा, जिससे कई खिलाड़ियों को पुरस्कार नहीं मिल सके। नाराज खिलाड़ियों ने स्टेडियम का मुख्य गेट बंद कर नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने खिलाड़ियों को समझा-बुझाकर करीब दो घंटे बाद स्थिति को नियंत्रित किया। खिलाड़ियों ने नारेबाजी करते हुए विरोध किया शनिवार को कुश्ती, कबड्डी, फुटबॉल और जूडो प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। जूनियर, सीनियर और सब-जूनियर वर्ग में महिला एवं पुरुष वर्ग की स्पर्धाओं में कई स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता संपन्न होने के बाद जिला क्रीड़ा अधिकारी मुकेश कुमार की देखरेख में पुरस्कार वितरण शुरू हुआ, लेकिन कुछ ही खिलाड़ियों को पुरस्कार दिए जा सके थे कि तभी कुछ खिलाड़ियों ने नारेबाजी करते हुए विरोध शुरू कर दिया। क्या है खिलाड़ियों का आरोप? खिलाड़ियों का आरोप था कि विजेता टीम के सभी सदस्यों को पुरस्कार नहीं दिए जा रहे हैं। साथ ही पुरस्कार के रूप में दिए जा रहे ट्रैकसूट, लोअर और टी-शर्ट की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए। खिलाड़ियों ने भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी नाराजगी जताई। इन्हीं मुद्दों को लेकर हंगामा बढ़ गया और पुरस्कार वितरण समारोह रोकना पड़ा।  क्या कहना है अधिकारियों का? वहीं, इस मामले को लेकर जिला क्रीड़ा अधिकारी ने बताया कि प्रतियोगिता शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई है। कुछ खिलाड़ियों द्वारा बैनर पर सांसद की फोटो न होने और आगरा में सांसद की ओर से पुरस्कार दिए जाने, जबकि फिरोजाबाद में ऐसा न होने को लेकर भी आपत्ति जताई गई। इसी कारण कुछ खिलाड़ियों को पुरस्कार नहीं मिल पाए, जिन्हें बाद में उपलब्ध करा दिए जाएंगे। 

जमुई रेल दुर्घटना: मालगाड़ी डिरेल, कई रूटों पर ट्रेनों का आवागमन ठप

जमुई बिहार के जमुई जिले में एक मालगाड़ी के आठ डिब्बे पटरी से उतर जाने से हावड़ा–पटना–दिल्ली रेल मार्ग पर सेवाएं बाधित हो गईं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। यह घटना 27 दिसंबर की रात करीब 11:25 बजे हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस हादसे में अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना शनिवार रात 11 बजकर 20 मिनट पर पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल के अंतर्गत लाहाबन और सिमुलतला रेलवे स्टेशनों के बीच हुई। इसके कारण करीब 24 ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहा, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। रेलवे प्रशासन में मचा हड़कंप रेलवे अधिकारियों ने बताया कि आसनसोल, मधुपुर और झाझा से दुर्घटना राहत ट्रेनें मौके पर भेजी गई हैं। रेल यातायात बहाल करने का काम जारी है। हादसे के बाद रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। 

जातिगत बयानबाजी पर सख्त रुख: IAS अफसरों पर सवाल, मंत्रालय कर्मचारी संघ की CM से हस्तक्षेप की मांग

भोपाल मध्य प्रदेश काडर के आइएएस अधिकारी आचरण नियमों के विपरीत जाकर बयानबाजी कर रहे हैं। इससे सामाजिक वातावरण भी बिगड़ रहा है। आइएएस अधिकारियों की असभ्य बयानबाजी पर रोक लगाकर समुचित कार्रवाई करने की मांग को लेकर मंत्रालय अधिकारी कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव से मांग की है। इस संबंध में संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा सचिव कार्मिक को अभ्यावेदन दिया गया। नायक ने कहा कि बीते कुछ माह से मध्य प्रदेश काडर के आइएएस अधिकारियों द्वारा आचरण नियमों के विपरीत जाकर लगातार असंवैधानिक बयानबाजी की जा रही है, जिससे प्रदेश की जनता में असुरक्षा, भय, भ्रम तथा अविश्वास का वातावरण बन रहा है। उदाहरण देकर की कार्रवाई की मांग नायक ने दिए अभ्यावेदन में कुछ घटनाएं उदाहरण देते हुए बताया कि पदोन्नति नियम 2025 के क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित एवं उच्च स्तरीय शासकीय बैठक में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया आरक्षण को बढ़ाने की मांग करने लगे। मीटिंग में मौजूद दो अन्य वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों ने उनका समर्थन कर दिया, जबकि कैबिनेट का फैसला हो जाने के बाद उस पर सरकारी मीटिंग में प्रश्न उठाना अनुशासनहीनता के दायरे में आता है। 23 नवंबर को अजाक्स कर्मचारी संगठन के सम्मेलन में बोलते हुए आइएएस अधिकारी संतोष वर्मा ने कहा कि जब तक कोई ब्राह्मण उनके बेटे को अपनी बेटी दान में नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनवाता, तब तक क्रीमी लेयर लागू नहीं हो सकती। इससे पूरे देश में ब्राह्मण समाज के आंदोलन शुरू हो गए। इसी सम्मेलन में ही आइएएस अधिकारी मीनाक्षी सिंह ने कहा कि जातिवादी होना और जातिवादी मानसिकता रखना आज के वक्त की मांग है और हमें जातिवादी होना चाहिए। उन्होंने आइएएस आचरण नियमों के तहत समुचित कार्रवाई की कार्रवाई की मांग की है।

इन्वेस्ट यूपी से बदली निवेश की तस्वीर, यूपी बना निवेशकों का भरोसेमंद ठिकाना

निवेशकों के लिए बना सिंगल-पॉइंट संपर्क केंद्र, निवेश सारथी और निवेश मित्र से पूरी तरह डिजिटल हुई निवेश प्रक्रिया लखनऊ वर्ष 2025 के समापन के साथ उत्तर प्रदेश में निवेश, उद्योग और विदेशी पूंजी आकर्षण के लिए लागू किए गए संस्थागत, डिजिटल और नीतिगत उपाय पूरे वर्ष चर्चा में रहे। योगी सरकार के नेतृत्व में इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से निवेश सुविधा और हैंडहोल्डिंग को जिस तरह सशक्त किया गया, जो इस वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2025 के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने निवेश प्रोत्साहन को प्रशासनिक प्राथमिकता में रखा। सरकार का फोकस निवेशकों को भरोसेमंद वातावरण, स्पष्ट नीति और समयबद्ध सुविधा उपलब्ध कराने पर रहा, जिससे राज्य उद्योग और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में उभरता गया। इन्वेस्ट यूपी : निवेश की शुरुआत से क्रियान्वयन तक राज्य की समर्पित निवेश प्रोत्साहन एजेंसी इन्वेस्ट यूपी ने पूरे वर्ष निवेशकों को परियोजना की अवधारणा से लेकर ग्राउंड इम्प्लीमेंटेशन तक सहायता प्रदान की। निवेशक सुविधा, हैंडहोल्डिंग और समस्या समाधान की एकीकृत व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए पसंदीदा गंतव्य बनाया। डिजिटल प्लेटफॉर्म से आसान हुआ निवेश निवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए निवेश सारथी पोर्टल को प्रभावी रूप से लागू किया गया। इस प्लेटफॉर्म के जरिए एमओयू साइनिंग, निवेश इंटेंट पंजीकरण, शिकायत निस्तारण और परियोजना अनुश्रण एक ही स्थान पर संभव हुआ। वहीं निवेश मित्र के अंतर्गत ऑनलाइन इंसेंटिव मैनेजमेंट सिस्टम से प्रोत्साहन आवेदन और ट्रैकिंग पूरी तरह डिजिटल हो गई। मुख्यमंत्री उद्यमी मित्र: व्यक्तिगत हैंडहोल्डिंग योगी सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी मित्र योजना वर्ष 2025 में निवेशकों के लिए मजबूत सहारा बनी। प्रत्येक निवेशक को एक समर्पित उद्यमी मित्र उपलब्ध कराया गया, जो विभागीय समन्वय, नीति मार्गदर्शन और स्थानीय स्तर पर समस्या समाधान में सहयोग करता रहा। सभी जनपदों और औद्योगिक प्राधिकरणों में इसकी मौजूदगी से निवेशकों को त्वरित सहायता मिली। सेक्टोरल डेस्क से उद्योग-विशेष फोकस वर्ष 2025 के दौरान इन्वेस्ट यूपी के अंतर्गत पांच सेक्टोरल डेस्क (वस्त्र एवं परिधान, ऑटोमोबाइल एवं ई-मोबिलिटी, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स और GCC) सक्रिय रहे। इन डेस्कों के माध्यम से रोड शो, राउंडटेबल और उद्योग संवाद को बढ़ावा मिला और सेक्टर-विशेष निवेश रणनीति को मजबूती मिली। कंट्री डेस्क से वैश्विक निवेश को बढ़ावा विदेशी निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से इन्वेस्ट यूपी के तहत छह कंट्री डेस्क (रूस, जर्मनी-फ्रांस, UAE-सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया-ताइवान और यूनाइटेड किंगडम) सक्रिय रहीं। इन डेस्कों ने वैश्विक कंपनियों और निवेशकों के साथ संपर्क को संस्थागत रूप दिया। निवेशकों के लिए ड्रीम डेस्टिनेशन बना यूपी वर्ष 2025 में योगी सरकार ने निवेश को नीति से आगे बढ़ाकर एक प्रभावी सिस्टम में बदला। इन्वेस्ट यूपी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, उद्यमी मित्र और वैश्विक आउटरीच के जरिए उत्तर प्रदेश निवेशकों के लिए भरोसेमंद, पारदर्शी और अवसरों से भरपूर राज्य के रूप में स्थापित हुआ।

गाड़ियों पर नकली HSRP लगाने वालों की अब खैर नहीं, परिवहन विभाग की कड़ी निगरानी शुरू

भोपाल अगर आप अपने वाहन पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) लगवाने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाएं। सड़क किनारे की दुकानों या अनाधिकृत वेंडर्स से नंबर प्लेट लगवाना आपको कानूनी पचड़े में डाल सकता है। मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने प्रदेश में चल रहे नकली एचएसआरपी के फर्जीवाड़े को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ग्वालियर स्थित परिवहन आयुक्त कार्यालय ने प्रदेश के सभी क्षेत्रीय आरटीओ, अतिरिक्त क्षेत्रीय और जिला परिवहन अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि बाजार में नकली नंबर प्लेट बनाने व बेचने वालों पर तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जाए। नियम विरुद्ध काम करने वालों पर कसेगा शिकंजा परिवहन विभाग के संज्ञान में आया है कि कुछ असामाजिक तत्व और निजी दुकानदार अवैध रूप से हूबहू असली जैसी दिखने वाली 'नकली हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट' बनाकर वाहनों पर लगा रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 50 और 51 के तहत यह दंडनीय अपराध है। प्रदेश में एचएसआरपी लगाने का अधिकृत कार्य केवल वाहन विनिर्माताओं (ओईएमएस) के अधिकृत डीलरों द्वारा ही किया जा रहा है। अब यदि कोई अनाधिकृत व्यक्ति ऐसी प्लेट बनाते या बेचते पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।   पंजीयन पुस्तिका से मिलान अनिवार्य वाहन स्वामी को परिवहन विभाग की वेबसाइट (http://vahan.parivahan.gov.in) से अपनी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) का नया प्रिंट लेना होगा। आरसी पर अंकित 'लेजर कोड' का मिलान वाहन पर लगी नंबर प्लेट के लेजर कोड से करना अनिवार्य है। पुराने वाहनों की यह है प्रक्रिया विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, एक अप्रैल 2019 या उसके बाद खरीदे गए वाहनों पर डीलर द्वारा बिक्री के समय ही प्लेट लगाई जाती है। लेकिन एक अप्रैल 2019 से पूर्व निर्मित पुराने वाहनों के लिए वाहन मालिकों को खुद पहल करनी होगी। इसके लिए वाहन स्वामी को 'एसआईएएम' के आधिकारिक पोर्टल (https://www.siam.in) पर जाकर 'बुक एचएसआरपी' लिंक के जरिए आनलाइन स्पाट बुक करना होगा। डीलर का चयन : वाहन मालिक अपनी सुविधा अनुसार अपने नजदीकी डीलर का चयन कर सकते हैं। ऑनलाइन भुगतान : प्लेट लगवाने हेतु शुल्क का भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से ही किया जाएगा। नकद राशि का भुगतान किसी भी स्थिति में मान्य नहीं होगा।

सीएम ने पुलिस अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों से संवाद पर दिया जोर, बोले- हमने दी आपको कार्य करने की स्वतंत्रता

"पुलिस मंथन" कॉपी -2 बोले- प्रधानमंत्री ने दिया था स्मार्ट पुलिस का विजन, यह सूत्र कानून परिवर्तन के लिए भविष्य की चुनौतियों का करता है मार्गदर्शन  बोले, जनता दर्शन से पता चलती है जमीनी हकीकत, अधिकांश हकीकत ह्यूमन इंटेलिजेंस से ही चलती है पता  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून के राज को सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि कानून का राज ही वह आधार है, जिसने यूपी में लोगों के मन से असुरक्षा का भाव दूर किया और विश्वास का वातावरण बनाया। यहां सुरक्षा और कानून का राज है, इसलिए प्रदेश निवेश का ड्रीम डेस्टिनेशन भी बना है। कानून का राज ही विश्वास पैदा करता है और लोकतंत्र को मजबूत बनाता है। सीएम योगी ने पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि देश भर में यूपी मॉडल की चर्चा है। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को पुलिस हेडक्वार्टर में आयोजित "पुलिस मंथन" वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन-2025 के समापन समारोह में कही। मुख्यमंत्री ने पुलिस मंथन के अभिनव प्रयास के लिए डीजीपी व उनकी टीम को बधाई दी। इस दौरान उन्होंने पदक अलंकरण समारोह में पुलिस अधिकारियों व कार्मिकों को सम्मानित किया और सभी 11 सत्र की चर्चा की।  लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि महत्वपूर्ण कड़ी, उनसे संवाद जरूरी  मुख्यमंत्री ने कहा कि ह्यूमन इंटेलिजेंस हम सबका सबसे बड़ा हथियार है, इसका बेहतर उपयोग कर सकते हैं। सीएम ने संवाद पर जोर देते हुए कहा कि थानाध्यक्ष, हल्का दरोगा, सर्किल इंचार्ज, जिले के कप्तान, रेंज व जोन के अधिकारियों को भी अलग-अलग तबके के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए। त्योहारों पर पीस कमेटी की बैठक बुलाते हैं, लेकिन अन्य अवसरों पर भूल जाते हैं। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि महत्वपूर्ण कड़ी हैं। महीने में उनके साथ बैठें। कोई भी जनप्रतिनिधि गलत कार्य के लिए नहीं बोलता है। उन्हें वास्तविक स्थिति से अवगत कराएं, उनका फोन रिसीव करें। साथ ही समाज के अलग-अलग पृष्ठभूमि (धर्माचार्यों, उद्यमियों, व्यापारियों) से भी संवाद करें। इससे धरातल की हकीकत पता चलेगी। केवल मुख्यालय पर बैठकर पुलिसिंग नहीं हो सकती।  थाना, सर्किल, पुलिस लाइन में भी बेहतर समन्वय पर सीएम का जोर  सीएम योगी ने थाना, सर्किल, पुलिस लाइन में भी बेहतर समन्वय पर जोर दिया। बोले-घटना घटित होती है तो थाना इंचार्ज को जवाबदेह बनाते हैं। सर्किल की भूमिका और समन्वय में कितना योगदान दे रहा है, हमने कभी उस पर ध्यान नहीं दिया। यदि तीनों में बेहतर समन्वय बना लें तो सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में यह बड़ा योगदान दे सकता है। पुलिस बल का दोस्ताना व्यवहार व संवेदना आमजन की समस्या का समाधान करती है और उनके मन में पुलिस के प्रति बेहतर धारणा भी बनाती है।  सीएम ने पुलिस अधिकारियों से कहा- आपको कार्य करने की दी गई स्वतंत्रता  सीएम बोले, हमने प्रयास किया कि राजनीतिक हस्तक्षेप न्यूनतम रहे। आपको कार्य करने की स्वतंत्रता दी गई है, ताकि आप परफॉर्म कर सकें। सीएम ने पुलिस कर्मियों के दायित्व पर भी चर्चा की। अब औसतन पुलिस अधिकारी न्यूनतम दो वर्ष तक जनपद-रेंज में सेवा देते हैं, पिछले आंकड़ों बताते हैं कि पहले एक महीने, तीन-चार महीने या कुछ ही दिन में स्थानांतरण हो जाता था। जब तक वह सामाजिक और भौगोलिक स्थिति को समझते, उससे पहले ही बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता था। इससे अव्यवस्था पैदा होती थी, लेकिन अब स्थिरता दी गई।  अपने आचरण व व्यवहार से बनाएं जगह  मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि मैं अलग-अलग तबके से बात करता हूं। अच्छे पुलिस अधिकारी का स्थानांतरण होता है तो आमजन सिफारिश करते हैं कि अच्छा अधिकारी था, लेकिन जब गलत व्यक्ति को हटाया जाता है तो पब्लिक हमें धन्यवाद देती है कि इस बला को टाल दिया। हम दोनों स्थितियों को फेस करते हैं और आमजन से कहते हैं कि अच्छे अधिकारी को दूसरी जगह भी काम करना चाहिए। अन्य जगहों पर भी अच्छाई का लाभ मिले। प्रयास करना चाहिए कि अपने आचरण और व्यवहार से उसे और सुदृढ़ करें।  विकसित व आत्मनिर्भर भारत के लिए राज्यों की भी भूमिका तय   सीएम योगी ने कहा कि 2047 तक भारत विकसित व आत्मनिर्भर हो, इसमें केवल भारत सरकार ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारों की भी भूमिका है। उन्होंने कहा कि साढ़े आठ वर्षों में हमारे प्रति धारणा बदली है। यदि यूपी में ऐसे ही दंगे, गुंडागर्दी, अराजकता, कर्फ्यू रहता तो हमारे बारे में भी धारणाएं नहीं बदलतीं। धारणा बदलने के लिए हमने प्रयास किया। हर व्यक्ति को कानून के दायरे का अहसास कराया, इसलिए अब हर व्यक्ति मानता है कि यूपी में परिवर्तन हुआ है। सुरक्षा नहीं होती तो इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं होता। देश का 55 फीसदी एक्सप्रेसवे यूपी में है, यह सभी पिछले साढ़े 8 वर्ष में तैयार किए गए हैं। यूपी में एयर क्नेक्टिविटी का सबसे बड़ा नेटवर्क है। अगले महीने देश के सबसे बड़ा एयरपोर्ट का शुभारंभ भी होगा। यूपी में 16 हजार किमी. का रेल नेटवर्क है। सर्वाधिक शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा यूपी के पास है। देश की पहली रैपिड रेल व वाटरवे यूपी में संचालित हो रहा है।