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राष्ट्रीय कला उत्सव में कहानी वाचन में मध्यप्रदेश को मिला तीसरा स्थान

मॉडल स्कूल मुरैना के छात्र ने स्थानीय लोक-कला शैली में दी प्रस्तुति भोपाल  केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 11वें राष्ट्रीय कला उत्सव में मध्यप्रदेश की टीम ने कहानी वाचन विधा में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। इस वर्ष राष्ट्रीय कला उत्सव महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित किया गया। राष्ट्रीय कला उत्सव में देश के सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के लगभग 1075 विद्यार्थियों ने सहभागिता कर कला के क्षेत्र में आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं। कला उत्सव की 12 श्रेणियों में आयोजित प्रतियोगिताओं में मध्यप्रदेश के विद्यालयों के 29 सदस्यीय दलों ने प्रतिभागिता की। दल के प्रबंधक एवं कला उत्सव समन्वयक डॉ. दिनेश कुमार शर्मा थे। कहानी वाचन विधा में शासकीय मॉडल स्कूल मुरैना की टीम ने महाभारत के कथानक 'द्रोपदी चीरहरण' को मध्यप्रदेश की स्थानीय लोककथा शैली में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। छात्र हरिओम सिंह सिकरवार एवं अनुराग राजावत ने लोक वाद्य यंत्रों के माध्यम से संवाद कला का उत्कृष्ट प्रयोग करते हुए प्रस्तुति को महिला सशक्तिकरण की भावना से जोड़ा। उनकी सशक्त प्रस्तुति को उत्सव में उपस्थित दर्शकों एवं निर्णायकों द्वारा सराहा गया। कला उत्सव में केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली के सचिव श्री संजय कुमार और निदेशक एनसीईआरटी प्रो. दिनेश कुमार सकलानी ने प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये। मध्यप्रदेश कला उत्सव की नोडल अधिकारी एवं अतिरिक्त संचालक समग्र शिक्षा श्रीमती मनीषा सेतिया ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम को शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के प्रतिभाशाली बच्चों को स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा उचित प्लेटफार्म देकर निरंतर प्रोत्साहित किया जाता रहेगा।  

औचक निरीक्षण से हड़कंप: मंत्री परमार पहुंचे सिवनी, आयुष कार्यालय से लेकर पॉलीटेक्निक कॉलेज तक जांच

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने, बुधवार को सिवनी जिले के प्रवास के दौरान, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय (अग्रणी) स्नातकोत्तर महाविद्यालय का औचक निरीक्षण कर, महाविद्यालयीन गतिविधियों एवं विद्यार्थियों को दी जा रही समस्त सुविधाओं का अवलोकन कर आवश्यक निर्देश दिए। मंत्री श्री परमार ने सर्वप्रथम महाविद्यालय परिसर में स्थित मां भारती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया एवं महात्मा गांधी जी की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय में संचालित कक्षाओं का अवलोकन करते हुए, विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया। संवाद के दौरान विद्यार्थियों से उनके ग्राम, कॉलेज तक आने-जाने के साधनों की जानकारी लेते हुए, महाविद्यालय के प्राचार्य को 15 किलोमीटर की परिधि तक विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय में विद्यार्थियों की अधिकतम एवं नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। साथ ही परिसर में पूर्णरूपेण स्वच्छता बनाए रखने को भी कहा। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय की लाइब्रेरी का निरीक्षण करते हुए व्यवस्थाओं का अवलोकन किया तथा उपलब्ध पुस्तकों के समुचित वितरण सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन में सुलभ एवं सुगम सुविधा मिल सके। इस दौरान सिवनी के विधायक श्री दिनेश राय मुनमुन, प्रभारी कलेक्टर श्री अनिल राठौर, एसडीएम श्रीमती पूर्वी तिवारी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री श्री परमार ने आयुष कार्यालय का औचक निरीक्षण कर दिए आवश्यक निर्देश मंत्री श्री परमार ने आयुष विभाग कार्यालय सिवनी का निरीक्षण कर, कार्यालय के विभिन्न कक्षों, अभिलेखों एवं कार्यप्रणाली का अवलोकन किया। उन्होंने कार्यालय परिसर में साफ-सफाई, साज-सज्जा, सुव्यवस्थित संधारण व्यवस्था तथा विकसित हर्बल गार्डन का भी अवलोकन किया। मंत्री श्री परमार ने निरीक्षण के दौरान, आयुष विधाओं को आमजन तक अधिक लोकप्रिय, लाभकारी एवं स्वास्थ्यवर्धक बनाने, औषधियों के समुचित संधारण तथा मांग के अनुरूप सेवाओं के विस्तार के लिये आवश्यक मार्गदर्शन एवं निर्देश दिए। मंत्री श्री परमार ने निरीक्षण के पूर्व, सिवनी विधानसभा के विधायक श्री दिनेश राय मुनमुन, प्रभारी कलेक्टर श्री अनिल कुमार राठौर एवं जिला आयुष अधिकारी डॉ. यशवंत माथुर के साथ संयुक्त चर्चा कर, जिले में 50 बिस्तरीय आयुर्वेदिक अस्पताल एवं हर्बल गार्डन की स्थापना के लिये प्रस्ताव तैयार कर विभाग को प्रेषित करने के निर्देश दिए। मंत्री श्री परमार ने पॉलीटेक्निक कॉलेज में शैक्षणिक एवं भौतिक व्यवस्थाओं का किया अवलोकन मंत्री श्री परमार ने शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय का भी औचक निरीक्षण कर, महाविद्यालयीन गतिविधियों एवं विद्यार्थियों को दी जा रही समस्त सुविधाओं की जानकारी प्राप्त कर, आवश्यक निर्देश दिए। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय की विभिन्न कक्षाओं एवं ट्रेडवार प्रयोगशालाओं का अवलोकन कर, शैक्षणिक एवं भौतिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय परिसर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने और समय-समय पर महाविद्यालय में आने वाले पेयजल की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए। साथ ही पानी की टंकियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिये। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय की लाइब्रेरी, कम्प्यूटर लैब, उपकरणों एवं अन्य सुविधाओं का अवलोकन करते हुए, इन व्यवस्थाओं के उन्नयन के लिये प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिये, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।  

श्रीगोरक्षपीठ के प्रति थी गहरी श्रद्धा, महंत अवेद्यनाथ से था आत्मीय नाता

भाई की शादी में सहबाला बनकर आये थे पहली बार गोरखपुर आये थे अटल जी महराजगंज में चुनाव प्रचार के लिए आये अटल अचानक पहुंचे गोरक्षपीठ लखनऊ, भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करना केवल एक प्रधानमंत्री को स्मरण करना नहीं है। यह उस व्यक्तित्व को याद करना है, जिसने सत्ता से पहले संवेदना और राजनीति से पहले संबंधों को महत्व दिया। श्रीगोरक्षपीठ से उनका जुड़ाव इसी भावभूमि पर खड़ा था। यह रिश्ता औपचारिक मुलाकातों का नहीं, बल्कि विश्वास, श्रद्धा और साझा वैचारिक चेतना का था। गोरखनाथ मंदिर और गोरक्षपीठ अटल जी के लिए केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक थे। प्रोटोकॉल पर भारी पडी श्रद्धा:- 22 मार्च 2004 का दिन इस रिश्ते की गहराई को सबसे स्पष्ट रूप में सामने लाता है। लोकसभा चुनाव के प्रचार के सिलसिले में अटल जी उस दिन महराजगंज में जनसभा को संबोधित कर चुके थे। कार्यक्रम के बाद उन्हें दिल्ली लौटना था और गोरखपुर का संबंध केवल एयरपोर्ट तक सीमित था। लेकिन गोरखपुर पहुंचते ही उन्होंने अचानक गोरखनाथ मंदिर जाने का निर्णय लिया। यह कोई तयशुदा कार्यक्रम नहीं था, बल्कि मन से निकला आग्रह था। प्रधानमंत्री के इस फैसले से प्रशासनिक तंत्र असहज हो उठा। सुरक्षा और प्रोटोकॉल का हवाला दिया गया, लेकिन अटल जी ने शांति और दृढ़ता के साथ कहा कि वे महंत अवेद्यनाथ से अवश्य मिलेंगे। उस समय अटल जी के घुटने में काफी दर्द था। वह वाहन से उतरकर व्हीलचेयर के सहारे मंदिर परिसर तक पहुंचे। मंदिर में प्रवेश करते ही उन्होंने पहले गुरु गोरक्षनाथ का दर्शन पूजन किया और फिर गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, उस दिन दोनों के बीच जो संवाद हुआ, वह केवल शिष्टाचार नहीं था। श्रीरामजन्मभूमि सहित राष्ट्रीय और सामाजिक विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने और जन्मभूमि यज्ञ समिति के अध्यक्ष के रूप में महंत अवेद्यनाथ के योगदान के प्रति अटल जी के मन में गहरा सम्मान था। यह सम्मान केवल राजनीतिक सहमति का परिणाम नहीं था, बल्कि संघर्ष और वैचारिक दृढ़ता की स्वीकृति था। इसी कारण दोनों के बीच का संबंध समय के साथ और प्रगाढ़ होता गया। 1989 का दौर इस रिश्ते की एक महत्वपूर्ण कसौटी बना। जनता दल और भाजपा के गठबंधन के कारण गोरखपुर संसदीय सीट जनता दल के खाते में चली गई। संत समाज के आग्रह पर महंत अवेद्यनाथ ने चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। उस समय भाजपा नेतृत्व ने यह स्पष्ट किया कि वह खुलकर सहयोग नहीं कर पाएंगे। इसके बावजूद महंत अवेद्यनाथ चुनाव मैदान में उतरे और भारी मतों से विजयी होकर संसद पहुंचे। इस राजनीतिक परिस्थिति का अटल जी और महंत अवेद्यनाथ के संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ा। मतभेदों के बीच भी सम्मान और संवाद बना रहा। गोरखपुर से था अटल का पारिवारिक लगाव: गोरखपुर से अटल जी का रिश्ता केवल आध्यात्मिक या वैचारिक नहीं था, वह गहरे पारिवारिक भाव से भी जुड़ा था। 1940 में वह पहली बार यहां अपने बड़े भाई की बारात में सहबाला बनकर आए थे। तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह बालक एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा। गोरखपुर में उनके भाई की ससुराल होने के कारण यह शहर उनके लिए हमेशा घर जैसा रहा। जीवन के हर पड़ाव पर, चाहे वह राजनीति का संघर्ष हो या प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी, गोरखपुर उनके जीवन में विशेष स्थान रखता रहा। प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रोटोकॉल ने उनकी निजी यात्राओं को सीमित जरूर किया, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव कभी कम नहीं हुआ। 1998 में गोरखपुर में एक जनसभा के दौरान उन्होंने स्वयं कहा था कि इस शहर से उनका विशेष नाता है, क्योंकि यहां उनकी ससुराल है और यहां के लोगों से उनका आत्मीय संबंध है। श्री गोरक्षपीठ और अटल बिहारी वाजपेयी का संबंध सत्ता और संत के बीच का औपचारिक संवाद नहीं था। यह विश्वास, विचार और श्रद्धा की साझी यात्रा थी। उनकी जयंती पर जब देश उन्हें स्मरण करता है, तो गोरखपुर और गोरक्षपीठ उन्हें उस नेता के रूप में याद करते हैं, जिसने प्रोटोकॉल से पहले श्रद्धा को और राजनीति से पहले रिश्तों को महत्व दिया।

छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का नया युग, महिला विकास की नई इबारत लिख रही है साय सरकार

आगामी वर्ष ‘महतारी गौरव वर्ष’ घोषित रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए आगामी वर्ष को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार नित-नये फैसले ले रही है। विकसित छत्तीसगढ़ के लिए छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 तैयार किया गया है। विकसित छत्तीसगढ़ में महिलाओं की सशक्त भागीदारी को देखते हुए राज्य में आगामी वर्ष को महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘महतारी गौरव वर्ष’ में महिलाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक गरिमा को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का सशक्त संकल्प सिद्ध होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह वर्ष छत्तीसगढ़ में मातृशक्ति के नेतृत्व, सहभागिता और सम्मान का एक नया अध्याय लिखेगा, जो विकसित, समरस और सशक्त छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव बनेगा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सरकार को सबसे बड़ा आशीर्वाद माताओं और बहनों से प्राप्त होता है। उनके विश्वास, समर्थन और आशीष से ही जनसेवा के कार्यों को नई ऊर्जा और दिशा मिलती है। इसी भावनात्मक और सामाजिक दायित्वबोध से प्रेरित होकर राज्य सरकार ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में सेवा का पहला वर्ष ‘विश्वास वर्ष’ के रूप में समर्पित रहा, जिसमें शासन और जनता के बीच भरोसे की पुनर्स्थापना हुई। दूसरा वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी को समर्पित ‘अटल निर्माण वर्ष’ के रूप में मनाया गया, जिसके दौरान आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण, सामाजिक विकास और जनकल्याण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्य पूरे हुए। अब सेवा का आगामी वर्ष मातृशक्ति को समर्पित ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें राज्य की सभी प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों का केंद्रबिंदु माताएँ और बहनें होंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर किए गए कार्यों ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पटल पर एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित किया है। सरकार ने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और निर्णय क्षमता को अपनी नीतियों का मूल आधार बनाते हुए सामाजिक-आर्थिक बदलाव की एक नई दिशा तय की है। महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूती देने वाली महतारी वंदन योजना के अंतर्गत राज्य की लगभग 70 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 22 किश्तों में 14,306 करोड़ 33 लाख रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। महिला कल्याण के लिए 5,500 करोड़ रुपये का प्रावधान इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य की विकास यात्रा के केंद्र में महिलाएँ हैं। महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिलाने के उद्देश्य से रजिस्ट्री शुल्क में 1 प्रतिशत की छूट, 368 महतारी सदनों का निर्माण, मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय का ऑनलाइन भुगतान जैसे निर्णयों ने सुशासन और पारदर्शिता को और सुदृढ़ किया है। स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 42,878 महिला समूहों को 12,946.65 लाख रुपये का रियायती ऋण प्रदान किया गया है। वहीं, बस्तर सहित छह जिलों में रेडी-टू-ईट का कार्य महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा गया है। महिला आजीविका के नए अवसर सृजित करने के लिए मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना, नवाबिहान योजना, डिजिटल सखी, दीदी ई-रिक्शा योजना, सिलाई मशीन सहायता, तथा मिनीमाता महतारी जतन योजना जैसी पहलें लागू की गई हैं। कन्याओं के विवाह में सहयोग हेतु मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत सहायता राशि का बड़ा हिस्सा सीधे कन्या के बैंक खाते में जमा किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता दोनों को बल मिला है। महिला सुरक्षा के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ ने ऐतिहासिक पहल की है। वन-स्टॉप सेंटर, 181 महिला हेल्पलाइन और डायल 112 के एकीकृत संचालन ने संकट की घड़ी में त्वरित और प्रभावी सहायता सुनिश्चित की है। सुखद सहारा योजना के अंतर्गत 2 लाख 18 हजार से अधिक विधवा एवं परित्यक्ता महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जा रही है। किशोरियों के स्वास्थ्य और शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए शुचिता योजना, साइकिल वितरण योजना, तथा नवा रायपुर में यूनिटी मॉल का निर्माण महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जशपुर जिले की आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित ‘जशप्योर’ ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयास भी महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के साथ-साथ उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त वातावरण तैयार करना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना, नवाबिहान, लखपति दीदी, शुचिता और महतारी सदन जैसी पहलें महिलाओं के समग्र विकास का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। वर्ष 2025-26 में महिला एवं बाल विकास विभाग को 8,245 करोड़ रुपये का बजट आवंटित कर राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि महिला कल्याण, सुरक्षा और सशक्तिकरण उसकी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नई दिशा, नई उम्मीद और नए परिवर्तन का प्रतीक बनकर उभर रहा है।

कमीशन मांगने का मामला गरमाया, तीनों विधायक 6 जनवरी को विधानसभा में होंगे पेश

जयपुर एमएलए फंड में कमीशन मांगने वाले तीनों विधायकों को विधानसभा की सदाचार कमेटी ने एक बार फिर पूछताछ के लिए बुलाया है। सदाचार कमेटी ने तीनों विधायकों को नोटिस जारी कर 6 जनवरी को फिर पूछताछ के लिए पेश होने को कहा है। खींवसर से बीजेपी विधायक रेवंतराम डांगा,हिंडौन से कांग्रेस विधायक अनिता जाटव और बयाना से निर्दलीय ऋतु बनावत को एक ही दिन पूछताछ के लिए बुलाया है।  मई में रिश्वत लेते एसीबी में पकड़े गए बीएपी विधायक जयकृष्ण पटेल को भी सदाचार कमेटी ने नोटिस जारी कर 7 जनवरी को पूछताछ के लिए तलब किया है। पटेल के केस की जांच करने वाले एसीबी के जांच अधिकारी को भी बुलाया है। 19 दिसंबर को भी की थी  पूछताछ   तीनों विधायकों को सदाचार कमेटी ने 19 दिसंबर को भी विधानसभा तलब करके वन टू वन पूछताछ की थी। तीनों विधायकों से कमेटी ने कमीशन मांगने से जुड़े सवाल किए थे। तीनों विधायक उस दिन बेगुनाही के सबूत नहीं दे पाए थे। उस वक्त तीनों ने बेगुनाही के सबूज पेश करने के लिए समय मांगा था। रेवंतराम डांगा ने 15 दिन, अनीता ने 7 दिन और ऋतु ने 10 दिन का समय मांगा था, जिसे कमेटी ने मंजूर कर लिया था।  अब तीनों विधायकों को अलग-अलग दिन पूछताछ के लिए बुलाने की जगह एक ही दिन 6 जनवरी को पूछताछ के लिए तलब किया है। कमेटी के सभापति बोले- स्टिंग का वीडियो एफएसएल जांच के लिए भी भेज सकते हैं सदाचार कमेटी के सभापति कैलाश वर्मा ने कहा कि कमेटी की बैठकें लगातार चल रही है।  इन मामलों में  जितने अच्छे तरीके से अनुसंधान हो सकता है, तथ्यात्मक रिपोर्ट आ सकती है उसके बारे में निरंतर कमेटी काम कर रही है। आज भी बैठक हुई है। कल भी बैठक की थी। कल हमने तीनों विधायकों को नोटिस जारी करने का फैसला किया और तीनों को 6 जनवरी को तलब किया है। वर्मा ने कहा कि  तीनों विधायकों ने अलग अलग समय मांगा था। उसके हिसाब से वक्त देते हुए कमेटी ने नोटिस जारी कर पूरे सबूतों, दस्तावेजों और आॅडियो वीडियो के साथ तैयारी से आने को कहा है। विधायकों के पास जो रिपोर्ट्स और लिखित में जो देना चाहते हों, जो वीडियो या अन्य चीज पेश करना चाहते हैं वे दे सकते हैं। जरूरत पड़ी तो स्टिंग का वीडियो एफएसएल जांच के लिए भी भेज सकते हैं वर्मा ने कहा कि स्टिंग करने वाले पत्रकार से हमें वीडियो मिला है। विधायक अगर यह दावा करते हैं कि वीडियो में उनकी आवाज नहीं है या काट छांट है तो हम जरूरत पड़ने पर स्टिंग के वीडियो को एफएसएल जांच के लिए भी भेज सकते हैं। अभी इस पर निर्णय नहीं हुआ।  तीनों विधायकों  की बची हुई रिपोर्ट आने के बाद समिति सभी तथ्यों का अध्ययन करेगी, इसके बाद ही आगे फैसला करेगी। बजट सत्र से पहले रिपोर्ट तैयार कर सकती है समिति विधानसभा का बजट सत्र जनवरी के आखिर में शुरू होगा। सदाचार कमेटी बजट सत्र तक  कमीशन मांगने वाले विधायकों और बीएपी विधायक रिश्वत मामले में  रिपोर्ट तैयार कर सकती है। 6 जनवरी को तीनों विधायकों से पूछताछ के बाद कमेटी अगर संतुष्ट नहीं होती है तो उन्हें फिर नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। उसके बाद फाइनल रिपोर्ट तैयार होगी।

डीजीपी-11 बना चैलेंजर ट्रॉफी विजेता: 18 वींचैलेंजर ट्रॉफी क्रिकेट प्रतियोगिता का खिताब डीजीपी-11 के नाम

भोपाल  महेश्वर खेल-कूद शिक्षण एवं सामाजिक संस्था द्वारा आयोजित 18वींचैलेंजर ट्रॉफी क्रिकेट प्रतियोगिता का विभागीय फाइनल मुकाबला 23दिसंबर को नेहरू नगर पुलिस लाईन भोपाल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। फाइनल मैच डीजीपी-11 एवं जिला पुलिस बल भोपाल के मध्य खेला गया, जिसमें डीजीपी-11ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 121 रनों से शानदार विजय प्राप्त कर प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में डीजीपी-11ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 218 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से दिशांत खरे ने 89 रनों की प्रभावशाली पारी खेली। उनके साथ गौरव सिंह भदौरिया ने 58 रन तथा प्रज्ञा बालरे ने 39 रनों का उपयोगी योगदान देकर टीम को बड़े लक्ष्य तक पहुँचाया। जिला पुलिस बल भोपाल की ओर से गेंदबाजी में विशाल कहर ने 3 विकेट तथा सुशील ने 2 विकेट प्राप्त किए। 218 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिला पुलिस बल भोपाल की टीम डीजीपी-11की सटीक गेंदबाजी के सामने अधिक देर तक टिक नहीं सकी और पूरी टीम 97 रनों पर सिमट गई। टीम की ओर से ए. पठान ने 42 रनों का संघर्षपूर्ण योगदान दिया। डीजीपी-11की ओर से गेंदबाजी में राहुल रावत ने 4 विकेट, नरेंद्र रैकवार ने 3 विकेट तथा अरुण ने 1 विकेट प्राप्त कर टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फाइनल मुकाबले में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार दिशांत खरे को प्रदान किया गया। प्रतियोगिता के दौरान बेस्ट बॉलर का पुरस्कार डीजीपी-11 के विशाल सिंह भदौरिया, बेस्ट बैटर का पुरस्कार डीजीपी-11 के गौरव सिंह भदौरिया, बेस्ट फील्डर/विकेटकीपर का पुरस्कार डीजीपी-11 के संदीप सूर्यवंशी तथा प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार जिला पुलिस बल भोपाल के विशाल कहर को प्रदान किया गया। प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण 25वीं वाहिनी सेनानी श्री नागेंद्र सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर डीजीपी-11 के मैनेजर एवं बैटिंग कोच श्री श्याम मूर्ति, बॉलिंग कोच श्री मंजीत सिंह, फिटनेस कोच श्री मनोज बड़ोला सहित आयोजन समिति के पदाधिकारी, खिलाड़ी एवं बड़ी संख्या में खेलप्रेमी उपस्थित रहे। यह जीत केवल पदक नहीं, बल्कि पुलिस के अनुशासन, प्रशिक्षण, समर्पण और साहस का प्रतीक है। इनकी मेहनत और कौशल यह दर्शाता है कि पुलिस कर्मी सिर्फ कानून और व्यवस्था के संरक्षक नहीं, बल्कि खेल और फिटनेस के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट हैं।  

प्रदेश के विकास की समग्र तस्वीर पेश करेगा ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट’

उद्योग के साथ पर्यटन, नगरीय विकास और एमएसएमई के क्षेत्र में विकास सशक्त तस्वीर होगी प्रदर्शित भोपाल  ग्वालियर में आज आयोजित होने जा रहा ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट’ मध्यप्रदेश के विकास मॉडल को एक नए और व्यापक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने जा रहा है। यह आयोजन केवल निवेश प्रस्तावों और औद्योगिक घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस समग्र सोच को सामने लाता है, जिसमें उद्योग, नगरीय विकास, पर्यटन, एमएसएमई, स्टार्ट-अप और रोजगार एक साथ आगे बढ़ते हुए दिखाई देते हैं। यही वजह है कि यह समिट राज्य की विकास यात्रा में एक साधारण कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक समन्वित विकास मंच के रूप में उभर रहा है। समिट के दौरान एमपीआईडीसी द्वारा आयोजित प्रदर्शनी और प्रस्तुतियों में नगरीय विकास विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों को विशेष स्थान दिया गया है। प्रदर्शनी में लगाए गए सूचना पैनलों और ऑडियो-विजुअल फिल्म के माध्यम से यह बताया गया कि किस तरह शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। इन योजनाओं का सीधा प्रभाव आम नागरिक के जीवन पर पड़ रहा है। स्मार्ट सिटी पहलों के जरिए बेहतर सड़कों, सार्वजनिक सेवाओं, डिजिटल सुविधाओं और शहरी प्रबंधन को मजबूती मिल रही है, जिससे शहरी जीवन की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है। नगरीय क्षेत्रों में जलप्रदाय, सीवरेज और हरित क्षेत्र विकास से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं की जानकारी भी इस मंच पर प्रस्तुत की जा रही है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल आधारभूत ढांचा विकसित करना नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए शहरी विस्तार को सुव्यवस्थित करना है। स्वच्छ जल आपूर्ति, बेहतर सीवरेज व्यवस्था और हरित क्षेत्रों का विकास शहरों को निवेश और रोजगार के लिए अधिक अनुकूल बना रहा है। शहरी आजीविका और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने वाली योजनाओं को भी समिट में प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को दिए गए ब्याजमुक्त ऋण, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से परिवारों को आजीविका से जोड़ने और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने की पहल यह दर्शाती है कि शहरी विकास केवल इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं, बल्कि मानव संसाधन के सशक्तिकरण पर भी समान रूप से केंद्रित है। भोपाल और इंदौर में मेट्रो रेल परियोजनाओं की प्रगति आधुनिक शहरी परिवहन की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। इसी व्यापक दृष्टिकोण का विस्तार मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के ‘अभ्युदय 2025’ पवेलियन में भी दिखाई देता है। यह पवेलियन आधुनिक तकनीक और सुसंगठित कंटेंट के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक स्थलों, वन्यजीव पर्यटन और अनुभवात्मक पर्यटन को प्रस्तुत करता है। एलईडी वॉल पर चलने वाली फिल्मों, वर्चुअल रियलिटी अनुभव, महाकाल दर्शन के लिए होलोग्राम तकनीक और डिजिटल स्टैंडीज़ के जरिए यह बताया जा रहा है कि मध्यप्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में किस तरह नए अनुभव और अवसर विकसित कर रहा है। सेल्फी और फोटो बूथ जैसे इंटरएक्टिव एलिमेंट्स के जरिए दर्शकों की भागीदारी भी बढ़ाई जा रही है, जिससे राज्य की पर्यटन पहचान और मजबूत हो रही है। समिट में MSME, स्टार्ट-अप और निर्यात को लेकर आयोजित समानांतर सत्र इस आयोजन को और व्यावहारिक बनाते हैं। इन सत्रों में नीति समर्थन, पूंजी बाजार से जुड़ाव, नवाचार संरक्षण, निर्यात संवर्धन और वैश्विक बाजारों में अवसरों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। राष्ट्रीय संस्थानों, निर्यात संगठनों और वित्तीय संस्थाओं के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की भागीदारी यह स्पष्ट करती है कि मध्यप्रदेश उद्यमियों को केवल निवेश आमंत्रण तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और मंच भी उपलब्ध करा रहा है। इस समिट की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है देश के शीर्ष उद्योगपतियों और कॉरपोरेट लीडर्स की व्यापक उपस्थिति। ऊर्जा, रिन्यूएबल एनर्जी, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, सीमेंट, एफएमसीजी और लॉजिस्टिक्स जैसे विविध क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख उद्योगपति और निर्णय-कर्ता एक ही मंच पर उपस्थित रहेंगे। उनकी भागीदारी यह दर्शाती है कि मध्यप्रदेश को आज उद्योग जगत एक भरोसेमंद और भविष्य-उन्मुख राज्य के रूप में देख रहा है। समिट के दौरान बड़े निवेश प्रस्तावों से जुड़ी परियोजनाओं का भूमिपूजन और लोकार्पण, भूमि आवंटन और आशय पत्रों का वितरण तथा उच्च रोजगार सृजन करने वाले उद्योगों का सम्मान जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट’ केवल विचार और संवाद का मंच नहीं, बल्कि निवेश, रोजगार और क्रियान्वयन को एक साथ जोड़ने वाला ठोस प्रयास है। यह आयोजन यह संदेश देता है कि मध्यप्रदेश में विकास एकांगी नहीं है। यहाँ उद्योग के साथ-साथ नगरीय जीवन की गुणवत्ता, पर्यटन की संभावनाएँ और एमएसएमई की मजबूती भी समान रूप से प्राथमिकता में हैं। ग्वालियर में होने जा रहा यह समिट राज्य की उसी संतुलित और यथार्थवादी विकास सोच का सजीव उदाहरण बनकर सामने आएगी।

बेटी बचाओ अभियान को मिली सफलता: हरियाणा में गर्भपात घटा, लिंगानुपात 9 अंक बढ़ा

चंडीगढ़ हरियाणा पढ़ाओ अभियान को लेकर सरकार की सख्ती के चलते अवैध गर्भपात करवाने वाली महिलाओं में कमी आई है। इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में 23 प्रतिशत कम गर्भपात हुए हैं। इससे हजारों बेटियों की जान बची जिससे लड़कियों का लिंगानुपात गत वर्ष के 909 के मुकाबले इस वर्ष बढ़‌कर 918 तक जा पहुंचा है। अवैध लिंगानुपात की जांच एवं गर्भपात को रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल टास्क फोर्स की साप्ताहिक समीक्षा बैठक में मंगलवार को लिंगानुपात में सुधार पर संतोष जताते हुए नया लक्ष्य निर्धारित किया गया। आरएस ढिल्लो ने एमटीपी किट की अवैध बिक्री तथा पीएनडीटी के मामलों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि जिन जिलों में पिछले वर्ष के मुकाबले में कम लिंगानुपात सामने आया है, उन जिलों के नोडल आफिसर अपने क्षेत्र में अवैध लिंग जांच तथा उसके बाद होने वाले गर्भपात के मामलों पर नजर रखें।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- हम सुशासन और संवेदनशीलता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रहे हैं

प्रधानमंत्री श्री मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह के सहयोग से प्रदेश में नक्सलवाद समाप्त करना राज्य सरकार की बड़ी उपलब्धि वर्ष 2026 कृषि और कृषक कल्याण को और वर्ष 2027 युवाओं को होगा समर्पित अब प्रदेश में 30 प्रतिशत से अधिक निवेश प्रस्ताव उतर रहे धरातल पर विजन 2047 में मध्यप्रदेश को 225 लाख करोड़ रूपए की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डी.डी. कॉन्क्लेव 2025 में की सहभागिता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास और जनकल्याण के लिए निरंतर नवाचार कर रही है। जनसेवा के कार्यों और प्रदेश के अभ्युदय के लिए कई कार्यों को आरंभ किया गया है। हम सुशासन और संवेदनशीलता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रहे हैं। शासन के धन का सदुपयोग करते हुए अधिक से अधिक लोगों का कल्याण हो यह हमारा लक्ष्य है। वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया। वर्ष 2026 में कृषि और कृषक कल्याण को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी और वर्ष 2027 युवाओं को समर्पित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाल सलाम को आखिरी सलाम कहते हुए नक्सलवाद को प्रदेश से समाप्त करना हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि रही। प्रधानमंत्री श्री मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के सक्रिय सहयोग से राज्य सरकार निर्धारित समय-सीमा से पहले नक्सलवाद को समाप्त करने में सफल रही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दूरदर्शन के 'डी.डी. कॉन्क्लेव भोपाल-2025' में मध्यप्रदेश सरकार के 2 वर्ष के कार्यों पर आधारित विशेष सत्र में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य सरकार की दो वर्ष की उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में केन्द्रीय सूचना प्रसारण राज्य मंत्री श्री एल. मुरूगन, केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव श्री संजय जाजू, विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एंकर श्री सुधीर चौधरी ने साक्षात्कार लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से राज्य सरकार की दो साल की उपलब्धियों, सरकार की प्राथमिकताओं, चुनौतियों, भविष्य की कार्ययोजना तथा व्यक्तिगत जीवन से संबंधित बिंदुओं पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'दमदार दो साल-मोहन सरकार' लघु फिल्म का रिमोट कंट्रोल से विमोचन भी किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बजट को डबल करना हमारा लक्ष्य है। इसके साथ ही मितव्ययिता से बचत करना भी हमारी प्राथमिकता है। सौर ऊर्जा को प्राथमिकता देकर हम सरकार के खर्च में कमी के साथ-साथ किसानों को भी बचत के लिए प्रेरित कर रहे हैं। नवकरणीय ऊर्जा के प्रोत्साहन से देश में सबसे सस्ती बिजली मध्यप्रदेश उपलब्ध करा रहा है। दिल्ली की मेट्रो की बिजली से संचालित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब नीति और नीयत साफ हो तो ईश्वर भी मदद करते हैं। हमने सभी व्यवस्थाओं को प्रदेश में सुसंगत बनाने का प्रयास किया है। जन कल्याण की योजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश हमारे लिए केवल एमओयू की संख्या नहीं बल्कि धरातल पर दिखने वाला रोजगार और उत्पादन है। इसी सोच के साथ प्रदेश में निवेश नीति और प्रशासनिक कार्यशैली दोनों में मूलभूत बदलाव किए गए। पहले इन्वेस्टर्स समिट केवल इंदौर में होती थी, हमने इन गतिविधियों का विस्तार प्रदेश के सभी संभागों में किया। परिणाम यह रहा कि जहां सामान्यत: 5-7 प्रतिशत निवेश प्रस्ताव ही जमीन पर उतरते थे, वहीं मध्यप्रदेश में यह अनुपात 30 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भावांतर योजना की शुरुआत वर्ष 2017 में की। थी भावांतर योजना में किसानों को उपज का उचित मूल्य मिले और बाजार की स्थिरता से सुरक्षा का कार्य हो रहा है। राज्य सरकार आगामी वर्ष को कृषि कल्याण के रूप में मनाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहना योजना हमारे लिए सामाजिक न्याय और नारी सम्मान की स्थायी प्रतिबद्धता है। बहनों की जरूरत और आत्म सम्मान को समझते हुए राशि में डेढ़ गुना की वृद्धि की गई है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और एयर एम्बुलेंस चलाने जैसे नवाचार किए गए हैं। स्वस्थ मध्यप्रदेश बनाना हमारा लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाल के वर्षों में प्रदेश में धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मध्यप्रदेश पर्यटन की दृष्टि से असीम संभावनाओं का प्रदेश है। सिंहस्थ : 2028 को हम एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देख रहे हैं। सरकार की तैयारियां अभी से समग्र और चरणबद्ध रूप से आरंभ हो चुकी है। हमारा प्रयास यह है कि प्रदेश में पर्यटन की व्यवस्थाएं स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से विकसित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले से ही टाइगर स्टेट के रूप में पहचाना जाता था और अब चीता स्टेट के रूप में भी प्रदेश ने देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। हम मध्यप्रदेश को वन्य जीव संरक्षण का राष्ट्रीय और वैश्विक मॉडल बनाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विजन 2047 में मध्यप्रदेश को 225 लाख करोड़ रूपए की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही प्रति व्यक्ति आय को 22 लाख रूपए बनाने का लक्ष्य है। यह लक्ष्य कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण, उद्योग, निवेश और निर्यात को नई ऊंचाई देने, ग्रीन एनर्जी और समावेशी विकास के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा। 

लिंग चयन पर रोक को लेकर गंभीर पहल, PCPNDT एक्ट पर हुई विशेष कार्यशाला

जयपुर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव (आरसीएच) मीरा श्रीवास्तव की अध्यक्षता में बुधवार को आरएएस क्लब सभागार में पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जिला समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी एवं जिला समन्वयक उपस्थित रहे। संयुक्त सचिव ने राजस्थान में पीसीपीएनडीटी के प्रभावी की क्रियान्वयन हेतु किए जा रहे प्रयासों को सराहा और कहा की यहां के अनुभव अन्य राज्यों में भी शेयर किए जाने चाहिए। उन्होंने "लडका-लड़की बराबर है, तो पूछना क्यों" स्लोगन पर आधारित अभियान के साथ ही जागरूकता अभियान को और भी प्रभावी तरीके से किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा आजकल ऑनलाइन वेबसाइटस पर बेबी ब्वॉय पैदा करने हेतु उपलब्ध विभिन्न प्रकार के वीडियो या अन्य तरह के कंटेंट जैसे पूजा करवाना आदि वाली 1000 वेबसाइट्स को ब्लॉक किया गया है। लेकिन अभी भी यह एक बड़ी चुनौती है, जिसका सामना करने के लिए राज्यों को भी पहल करनी होगी। राज्य ऐसी वेबसाइट्स को आईडेंटिफाई कर सहयोग पोर्टल के माध्यम से ब्लॉक करवाने की कार्रवाई करें।  संयुक्त सचिव ने कहा की सोनोग्राफी मशीनों के रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल के लिए एक टाइम फ्रेम तैयार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समय के साथ आमजन में बेटी बेटा एक समान की धारणा को बदलने के लिए और भी अपडेट होकर प्रयास किया जाना चाहिए। अध्यक्ष राज्य समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी एवं मिशन निदेशक एचएचएम डॉ. अमित यादव ने प्रदेश में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत किया जा रहे प्रयासों पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही उन्होंने समुदाय में जागरूकता पैदा करने के लिए नवाचार किए जाने पर आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने नागौर में बालिका वाटिका नवाचार का उदाहरण देते हुए कहा कि अन्य जिलों में भी ऐसे नवाचार किए जाएं।  केंद्रीय उपयुक्त पीसीपीएनडीटी डॉक्टर पद्मिनी कश्यप ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के वर्तमान परिपेक्ष्य, मॉनिटरिंग हेतु प्रमुख इंडीकेटर और मुख्य चुनौतियां विषय पर विस्तार से जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि राजस्थान में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत किया जा रहे प्रयासों का परिणाम एसआरएस के आंकड़ों में देखने को मिल रहा है। एसआरएस वर्ष 2021-23 के आंकड़ों के अनुसार अभी राजस्थान में लिंगानुपात 921 है। पीसीपीएनडीटी एवं जेंडर स्पेशलिस्ट इफात हमीद ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों एवं इनसे  जुड़े प्रमुख न्यायिक  फैसलों और प्रोसीजर के बारे में विस्तार से अवगत कराया। परियोजना निदेशक पीसीपीएनडीटी राकेश कुमार मीणा ने सभी अतिथियों का धन्यवाद दिया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पीसीपीएनडीटी हेमंत कुमार ने प्रदेश में पीबीआई थाना और डिकाय ऑपरेशन के बारे में विस्तार से अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला में ओएसडी संतोष गोयल सहित संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।