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स्कूलों को चेतावनी: बच्चों को सांता क्लॉज बनाने के लिए मजबूर न करें

श्री गंगानगर श्रीगंगानगर जिले के निजी स्कूलों में क्रिसमस के अवसर पर बच्चों को सांता क्लॉज की ड्रेस पहनाने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाने की शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) अशोक वधवा ने सभी निजी स्कूलों के प्राचार्यों और प्रबंधकों को आदेश जारी कर चेतावनी दी है कि यदि ऐसी कोई शिकायत प्राप्त हुई तो संबंधित स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश भारत-तिब्बत सहयोग मंच की शिकायत पर आधारित है। मंच के जिलाध्यक्ष सुखजीत सिंह अटवाल के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर यह मांग की थी कि स्कूलों में बच्चों को जबरन सांता क्लॉज नहीं बनाया जाए। ज्ञापन में कहा गया कि श्रीगंगानगर मुख्य रूप से सनातन हिंदू-सिख बहुल क्षेत्र है और पिछले कुछ वर्षों से स्कूलों में क्रिसमस पर बच्चों को जबरन सांता क्लॉज बनाना एक प्रथा बन गई है। मंच ने स्कूलों में भारतीय संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की भी मांग की। अटवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर को वीर बाल दिवस घोषित किया है, जो गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है। इसलिए सभी स्कूलों को इस दिन भारतीय संस्कृति के गौरव और श्रेष्ठ बलिदान की परंपरा के अनुरूप कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। एडीईओ अशोक वधवा ने स्पष्ट किया कि यदि अभिभावकों और बच्चों की सहमति से सांता क्लॉज बनाया जा रहा है, तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जबरदस्ती करने पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, "एक तरफ बाल दिवस मनाया जा रहा है, दूसरी तरफ क्रिसमस। शिकायतें आई हैं कि निजी स्कूलों में दबाव डालकर बच्चों को सांता बनाया जा रहा है। सहमति से ठीक है, लेकिन जबरन नहीं।"

नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा कड़ी, झारखंड पुलिस को SRE योजना से 43.66 करोड़ की सहायता

रांची झारखंड में आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और सुद्दढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए झारखंड पुलिस मुख्यालय को केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से संचालित एसआरई (सिक्योरिटी रिलेटेड एक्सपेंडिचर) योजना के तहत कुल 43.66 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इस संबंध में गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने औपचारिक आदेश जारी कर दिया है।          केंद्र–राज्य की साझा हिस्सेदारी जारी आदेश के अनुसार, स्वीकृत राशि एसआरई योजना के दोनों घटकों के अंतर्गत दी गई है। इसमें एक हिस्सा 100 प्रतिशत केंद्र प्रायोजित मद के तहत है, जबकि दूसरा हिस्सा 60:40 के अनुपात (केंद्र : राज्य) में साझा किया गया है। कुल 43.66 करोड़ रुपये में से केंद्र सरकार का योगदान 35.99 करोड़ रुपये तथा राज्य सरकार का अंश 7.66 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। आईजी अभियान होंगे निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी फंड की निकासी और उपयोग को लेकर सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश में आईजी अभियान, झारखंड, रांची को इस राशि का निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। इसका अर्थ है कि फंड की निकासी और खर्च की पूरी जिम्मेदारी आईजी अभियान के अधीन होगी।          राशि लेप्स न होने के निर्देश, समयबद्ध खर्च पर जोर सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत राशि का उपयोग केवल उन्हीं मदों और कार्यों पर किया जाएगा, जिनके लिए इसे स्वीकृति प्रदान की गई है। किसी भी स्थिति में राशि का दुरुपयोग या निर्धारित मद से इतर खर्च स्वीकार्य नहीं होगा। इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि निकाली गई राशि लेप्स नहीं होनी चाहिए, यानी तय समय-सीमा के भीतर उसका पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा खर्च पर होगा उपयोग गौरतलब है कि एसआरई फंड का उपयोग मुख्य रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा से जुड़े खर्चों के लिए किया जाता है। इसमें सुरक्षाबलों की आवाजाही, हथियारों और आधुनिक उपकरणों की खरीद, खुफिया तंत्र को मजबूत करने, अभियान के दौरान होने वाले आकस्मिक खर्च तथा अन्य सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं शामिल हैं।   पुलिस की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने में मिलेगी मदद       सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस फंड से झारखंड पुलिस की ऑपरेशनल क्षमता में इजाफा होगा और नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार की यह स्वीकृति आने वाले समय में पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण संबल मानी जा रही है।  

यूपी सरकार को अदालत से झटका: अखलाक लिंचिंग मामले में केस वापस लेने से इनकार

नई दिल्ली  ग्रेटर नोएडा के बिसाहाड़ा के चर्चित अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में सूरजपुर कोर्ट ने सोमवार को आरोपियों के खिलाफ केस वापस लेने की राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। इस अपील के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार ने केस वापस लेने की इजाजत मांगी थी। सूरजपुर जिला अदालत के इस फैसले से उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ा झटका लगा है।   सुनवाई के दौरान अदालत ने यूपी सरकार की दलीलों को अपर्याप्त और आधारहीन करार दिया। अदालत ने कहा कि केस वापस लेने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। फैसले से आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है। फैसले ने मामले को बंद करने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। बता दें कि 10 साल पहले दिल्ली से 50 किलोमीटर दूर दादरी के बिसाड़ा गांव में एक अफवाह के तहत भीड़ ने 50 साल के मोहम्मद अखलाक को कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डाला था। भीड़ का आरोप था कि अखलाक के परिवार ने बछड़े का मांस खाया है। भीड़ का यह भी कहना था कि अखलाक ने घर में गोमांस रखा है। इसके बाद गांव के लोगों ने पीट-पीटकर अखलाक की हत्या कर दी थी। 28 सितंबर 2015 को हुई इस घटना की चर्चा देशभर में हुई थी। इस घटना की जमकर आलोचना हुई थी। पुलिस ने जांच के बाद कुल 19 लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया था। सभी पर हत्या, दंगा भड़काने और जान से मारने की धमकी देने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था। कानूनी लड़ाई के बीच अक्टूबर 2025 में उत्तर प्रदेश शासन ने अचानक एक बड़ा कदम उठाते हुए आरोपियों के खिलाफ चल रहे आरोपों को वापस लेने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया था। उत्तर प्रदेश शासन की ओर से अदालत से केस चार्जशीट में नामजद सभी 19 लोगों के खिलाफ आरोप वापस लेने की इजाजत मांगे जाने के कारण यह केस एकबार फिर सुर्खियों में आ गया था। इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष की दलीलें थी कि केस वापस लिया जाना चाहिए। हालांकि अदालत दलीलों से सहमत नहीं हुई। अदालत ने कहा कि अपील का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। कोर्ट ने अर्जी को महत्वहीन मानते हुए इसे खारिज कर दिया।  

तेंदुए की मौत या शिकार? जंगल में बिना पंजों के शव मिलने पर जांच में जुटी सफारी टीम

धमतरी जिले के मगरलोड क्षेत्र के कोरगांव के जंगल में सोमवार को एक मृत तेंदुआ मिलने से हड़कंप मच गया है. तेंदुआ के चारों पैर के पंजे भी गायब हैं. घटना की सूचना मिलते ही जंगल सफारी रायपुर से डॉग स्क्वायड की टीम धमतरी पहुंची. उन्होंने रात भर क्षेत्र में निगरानी की. मामले को लेकर स्थानीय चरवाहों और ग्रामीणों से पूछताछ की जा रही है. जानकारी के मुताबिक, मगरलोड के उत्तर सिंगपुर कक्ष क्रमांक 23 में 22 दिसंबर को शाम करीब 4:45 बजे एक तेंदुआ मृत मिला. पोस्टमार्टम हो चुका है. रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट  हो पाएगा कि तेंदुआ का शिकार किया गया है या नहीं. राजनांदगांव में तेंदुआ की मिली थी सड़ी गली लाश बता दें कि  इससे पहले 17 दिसंबर को कवर्धा जिले के जानकारी के अनुसार, मोतीनपुर और बोटेसूर गांव के बीच जंगल में तेंदुए का शव मिला था. जो करीब एक सप्ताह पुराना था.

उत्तर प्रदेश में आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू में स्थापित होंगे दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

योगी सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को दी मंजूरी उत्तर प्रदेश में आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू में स्थापित होंगे दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन अनुसंधान, तकनीकी विकास, मानव संसाधन सशक्तिकरण एवं औद्योगिक उपयोग को मिलेगा प्रोत्साहन लखनऊ  हरित परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन अनुसंधान, तकनीकी विकास, मानव संसाधन सशक्तिकरण एवं औद्योगिक उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE)  स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। पहला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आईआईटी कानपुर द्वारा हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय (HBTU), कानपुर के सहयोग से स्थापित किया जाएगा। वहीं दूसरा सेंटर आईआईटी-बीएचयू द्वारा मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT), गोरखपुर के साथ संयुक्त रूप से स्थापित किया जाएगा। दोनों सेंटर साझेदार संस्थानों के परिसरों से संचालित होंगे। हब-एंड-स्पोक मॉडल पर कार्य करेगा सेंटर   यूपी नेडा के एमडी एंड डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह ने बताया कि इन सेंटरों में चलने वाली परियोजनाओं में दोनों संस्थान बारी-बारी से नेतृत्व करेंगे। यह सेंटर हब-एंड-स्पोक मॉडल पर कार्य करेगा, जिसके तहत प्रदेश के अन्य इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों को इससे जोड़ा जाएगा। सेंटर में बायोमास आधारित एवं इलेक्ट्रोलाइज़र आधारित ग्रीन हाइड्रोजन पर अनुसंधान और तकनीकी विकास किया जाएगा। इन्क्यूबेशन सेंटर भी होगा स्थापित ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में एक इन्क्यूबेशन सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से हर वर्ष 10 स्टार्टअप्स को और 5 वर्षों में कम से कम 50 स्टार्टअप्स को सहयोग और मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसके लिए ₹25 लाख प्रतिवर्ष (5 वर्षों तक) की सहायता का प्रावधान किया गया है। सेंटर प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलीटेक्निक संस्थानों के लिए पाठ्यक्रम निर्माण, मेंटरिंग, तकनीकी प्रदर्शनियों और कॉन्फ्रेंसों के आयोजन में भी सहयोग करेगा। साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़े विषयों पर राज्य सरकार को नीतिगत सुझाव भी देगा। ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन तथा बसें चलाने के भी होंगे प्रयास सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कम से कम 50 प्रतिशत औद्योगिक भागीदारी उत्तर प्रदेश से होगी, जिससे राज्य को ग्रीन हाइड्रोजन के औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग में अधिक लाभ मिल सके। हरित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए रेल मंत्रालय के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों तथा उत्तर प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (UPSRTC) के माध्यम से कानपुर–लखनऊ, वाराणसी और गोरखपुर रूट पर ग्रीन हाइड्रोजन बसें चलाने के प्रयास भी किए जाएंगे। ग्रीन हाइड्रोजन के लिए इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में एक प्रमुख नवाचार और औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अनुसंधान, स्टार्टअप्स और उद्योगों के सहयोग से यह पहल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन कम करने, निवेश आकर्षित करने और राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित करने में सहायक होगी।

अरावली संकट पर सियासी घमासान: हरियाणा कांग्रेस ने विधानसभा में सरकार को घेरा

चंडीगढ़ हरियाणा विधानसभा विंटर सेशन के बाद नेता प्रतिपक्ष पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा आज पत्रकारों से रूबरू होंगे। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि पहाड़ काटे गए तो रेगिस्तान दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक बढ़ सकता है। अरावली बारिश के पानी को रोककर ग्राउंड वाटर रिचार्ज करता है, जो बंद हो जाएगा। दिल्ली–एनसीआर में पानी की समस्या अधिक गंभीर होगी।पहाड़ टूटने से बाढ़ की समस्या बढ़ेगी। वन्यजीवों का नुकसान होगा। तामपाल में बढ़ोतरी होगी। अवैध खनन और माफिया राज बढ़ेगा। अरावली को काटने का मतलब है, पानी, हवा, जंगल और जीवन को काटना।    हरियाणा विधानसभा में अरावली क्षेत्र में 100 मीटर तक खुदाई करने की अनुमति संबंधी केंद्र के फैसले पर विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि अरावली क्षेत्र में 100 मीटर तक खुदाई से पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। केंद्र सरकार द्वारा जो फैसला लिया गया है, हरियाणा सरकार को उस पर अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान सरकार द्वारा उन विषयों पर चर्चा की, जो विषयहीन थे, लेकिन अरावली लाखों-करोड़ों लोगों के जीवन की रेखा है, जिसे बचाने की जरूरत है। अरावली पर्वत श्रृंखला दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। यह केवल पहाड़ नहीं, बल्कि उत्तर भारत का प्राकृतिक सुरक्षा कवच है। इसे काटने या खनन करने से गंभीर पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। 

सांसद खेल महोत्सव का ग्रैंड फिनाले 24 दिसंबर को, 5 हजार खिलाड़ियों की भिड़ंत, पीएम मोदी करेंगे ऑनलाइन संबोधित

रायपुर रायपुर लोकसभा क्षेत्र में आयोजित सांसद खेल महोत्सव 2025 अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में है। इस महोत्सव का मेगा फाइनल एवं समापन समारोह 23 दिसंबर (मंगलवार) से 25 दिसंबर 2025 तक विभिन्न खेल स्थलों पर आयोजित किया जाएगा। मेगा फाइनल में लगभग पांच हजार खिलाड़ी भाग लेंगे। रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ बीजेपी नेता बृजमोहन अग्रवाल ने सोमवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि यह महोत्सव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फिट इंडिया खेलो इंडिया की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बन चुका है। रायपुर लोकसभा क्षेत्र की 9 विधानसभाओं- रायपुर दक्षिण, रायपुर पश्चिम, रायपुर उत्तर, रायपुर ग्रामीण, आरंग, अभनपुर, धरसीवा, भाटापारा एवं बलौदा बाजार से 85 हजार से अधिक खिलाड़ियों की सहभागिता ने इस आयोजन को अभूतपूर्व जनसमर्थन प्रदान किया और देशभर में पहचान दिलाई है। 24 दिसंबर को होगा मेगा फाइनल उन्होंने बताया कि 21 सितंबर 2025 से संकुल, जोन एवं ब्लॉक स्तर पर प्रारंभ हुई प्रतियोगिताओं के बाद अब 23 एवं 24 दिसंबर को मेगा फाइनल आयोजित किया जा रहा है। मेगा फाइनल एवं अंतिम चरण की प्रतियोगिताएं नेताजी सुभाष स्टेडियम, मोतीबाग रायपुर, सप्रे शाला वॉलीबॉल मैदान, जे.एन. पाण्डेय स्कूल और  तैराकी प्रतियोगिता अंतरराष्ट्रीय स्विमिंग पूल में आयोजित की जाएंगी। दिल्ली सांसद व गायक मनोज तिवारी देंगे सांस्कृतिक प्रस्त्तुति 23 दिसंबर 2025 को नेताजी सुभाष स्टेडियम में माननीय विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में मेगा फाइनल प्रतियोगिता का उद्घाटन होगा। 24 दिसंबर 2025 को नेताजी सुभाष स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली के सांसद एवं लोकप्रिय गायक मनोज तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे, जिससे युवाओं एवं आमजन में विशेष उत्साह का संचार होगा। वो सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्त्तुति भी देंगे। 25 दिसंबर  को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्चुअल संबोधन 25 दिसंबर  को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिवस "सुशासन दिवस" के अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम रायपुर में समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्चुअल संबोधन प्रस्तावित है और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाएगी। समापन समारोह में विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया जाएगा। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि प्रतियोगिता के तीनों दिन विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान राज्य का नाम देश-विदेश में रोशन करने वाले खिलाड़ियों एवं खेल अधिकारियों का सम्मान किया जाएगा। साथ ही प्रतिदिन छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने के लिये  रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसमें खेल संघों, नगर निगम, जिला प्रशासन, स्कूल शिक्षा विभाग, खेल विभाग, पुलिस सहित विभिन्न विभागों के लगभग 1500 कर्मचारी, अधिकारी, व्यायाम शिक्षक एवं खेल अधिकारी सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। केवल खेल नहीं, सामाजिक एकता का है जन आंदोलन: सांसद बृजमोहन अग्रवाल उन्होंने जनता से ज्यादा से ज्यादा संख्या में आयोजन में शामिल होकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने की अपील की है साथ अभी तक हुए आयोजन के सफल प्रचार प्रसार के लिए मीडिया का आभार जताया है। सांसद अग्रवाल ने कहा कि सांसद खेल महोत्सव केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, अनुशासन और सामाजिक एकता का जन आंदोलन है। 'पारंपरिक एवं आधुनिक खेलों का अद्भुत संगम' उन्होंने बताया कि सांसद खेल महोत्सव में पारंपरिक एवं आधुनिक खेलों का अद्भुत संगम देखने को मिला है। कुश्ती, खो-खो, गेड़ी-दौड़, भारोत्तोलन, फुगड़ी, रस्सी कूद, कबड्डी, बास्केटबॉल, शतरंज, वॉलीबॉल, रस्सा-कसी, शरीर शौष्ठव एवं तैराकी सहित 13 खेल विधाओं में 19 वर्ष से कम एवं अधिक आयु वर्ग, महिला एवं पुरुष वर्ग के हजारों खिलाड़ियों ने अनुशासन, समर्पण और खेल भावना के साथ भाग लेकर इस महोत्सव को ऐतिहासिक बनाया है।

हरियाणा के छात्रों को राहत: 15 दिन का विंटर वेकेशन, 1 जनवरी से स्कूल रहेंगे बंद

अम्बाला  हरियाणा में कड़ाके की ठंड के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। Directorate School Education Haryana ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में शीतकालीन अवकाश घोषित कर दिया है। जारी आदेश के अनुसार, एक जनवरी 2026 से पंद्रह जनवरी 2026 तक सभी विद्यालय बंद रहेंगे। विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि सोलह जनवरी 2026 (शुक्रवार) से स्कूल पूर्व की भांति दोबारा खुलेंगे और नियमित कक्षाएं शुरू होंगी। इस आदेश को जिला शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और सभी स्कूल मुखियाओं को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। क्या पूरी तरह बंद रहेंगे स्कूल निदेशालय ने यह भी साफ किया है कि शीतकालीन अवकाश के दौरान सीबीएसई, आईसीएसई सहित अन्य बोर्डों के नियमों के अनुसार दसवीं और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए विद्यालय बुलाया जा सकता है। क्यों लिया गया फैसला शिक्षा विभाग के अनुसार, यह निर्णय लगातार गिरते तापमान और विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि ठंड के मौसम में छात्रों के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

कुरुक्षेत्र के फेमस रिसॉर्ट में मातम: हरियाणा हादसे में UP के 5 युवकों की गई जान

कुरुक्षेत्र कुरुक्षेत्र में पिपली रोड स्थित होटल स्टर्लिंग रिसोर्ट में रात के समय कमरे में अंगीठी के कारण दम घुटने से पांच लोगों की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक स्टर्लिंग रिसोर्ट में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान रात के समय एक कमरे में रंग रोगन करने वाली लेबर क्लास के पांच लोग एक कमरे में सोए हुए थे। सुबह जब इस कमरे से कोई बाहर नहीं निकला तो होटल स्टाफ की ओर से कमरे की खिड़की से देखा गया। कोई हरकत न होने पर पुलिस को सूचित किया गया। मौके पर एसएचओ सिटी दिनेश राणा, सेक्टर 7 चौंकी इंचार्ज कमल मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया गया। फॉरेंसिक टीम द्वारा साक्ष्य जुटाने के बाद पोस्टमार्टम के लिए शवों को भेजा गया। होटल के सुपरवाइजर उपेंद्र ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का ठेकेदार नूर अपनी लेबर के साथ पेंट का काम करने आया था। रात को वे कमरे में सोए थे। सुबह जब सफाई कर्मी ने उन्हें बताया कि इस कमरे से कोई बाहर नहीं निकला है तो उन्होंने कमरे का दरवाजा खटखटाया फिर खिड़की से झांककर देखा तो कोई हरकत नहीं हुई। उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस को दी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।   

राष्ट्रगान के वक्त चुप्पी और दूरी पर सवाल, राजा भैया बोले— CCTV सबूत मौजूद

लखनऊ वंदे मातरम पर यूपी विधानसभा में चर्चा के दौरान जनसत्ता दल के नेता राजा भैया ने सवाल उठाया कि आखिर किसे राष्ट्रगीत से आपत्ति है। राजा भैया ने कहा कि किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि हमारा राष्ट्रगीत विवाद में आएगा। यह किसी धर्म के विरोध में नहीं है। देश का हर सदन वंदे मातरम से ही शुरू होता है, लेकिन क्या इस सदन में कुछ सदस्य ऐसे नहीं हैं जो वंदे मातरम पर चुप रह जाते हैं या फिर लॉबी में बैठे रहते हैं। सीसीटीवी में सब कुछ दर्ज है। यह प्रमाण है, जिसे कभी भी देखा जा सकता है।   उन्होंने कहा कि कुछ चीजें ऐसी हैं, जो खुलकर सामने आनी चाहिए। वंदे मातरम किसी एक व्यक्ति के कहने या लिखने पर राष्ट्रगीत नहीं बना था। पूरी संविधान सभा ने यह निर्णय लिया कि वंदे मातरम राष्ट्रगीत होगा और जन गण मन राष्ट्रगान होगा। उस सभा में कौन-कौन से महानुभाव थे, यह बताने की जरूरत नहीं है। लेकिन आज कष्ट हुआ। वंदे मातरम पर चर्चा कोई हास-परिहास का विषय नहीं है। हम मानकर चल रहे थे कि वंदे मातरम सभी के लिए पूज्य है। बंकिम चंद्र चटर्जी ने बंगाल में इसे लिखा, लेकिन पूरे भारत ने इसे स्वीकार किया। राजा भैया ने कहा, 'खुदीराम बोस का जन्म बंगाल के मिदनापुर में हुआ था। उन्हें फांसी मुजफ्फरपुर बिहार में मिली थी और उनके अंतिम शब्द वंदे मातरम थे। इसी तरह मदन लाल धींगरा का पंजाब में जन्म हुआ और लंदन में फांसी की सजा मिली थी। इसी तरह शाहजहांपुर में जन्मे रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर में फांसी मिली थी। उनके भी आखिरी शब्द वंदे मातरम ही थे। हमारा कहने का उद्देश्य यह है कि वंदे भारत की व्यापकता पर तब कोई प्रश्न नहीं उठा, जब देश बड़े संकट से गुजर रहा था। किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि आगे चलकर हमारा राष्ट्रगीत विवाद में आएगा। यह किसी धर्म के विरोध में नहीं है।' 'कभी ताइवान माता या जापान माता सुना है? सिर्फ भारत को मां का दर्जा' कुंडा के विधायक ने कहा कि वैदिक काल से हमने अपने राष्ट्र को मां माना है। सभी जगह देशभक्त हैं और वे अपने राष्ट्र के प्रति आस्था रखते हैं, लेकिन हमने कभी जापान माता, ताइवान माता या अमेरिका माता नहीं सुना। ऐसा इसलिए क्योंकि हम प्राचीन काल से भारत माता कहते आए हैं और उस धरती ने हमारा पालन-पोषण भी किया है। एक बात यह समझ नहीं आती कि वंदे मारतम पर आखिर किसे और क्यों आपत्ति है। यह कहा जाता है कि वंदे मातरम को दिल से गाना चाहिए, डंडे से नहीं। आखिर डंडा कौन चला रहा है? राष्ट्रगीत को दिल से गाना चाहिए, इसमें कोई दोराय नहीं है। 'जनता से अपील कि वोट देते समय ध्यान रखे, कौन वंदे मातरम नहीं गाता' हम जब चुनाव लड़ने जाएंगे तो मतदाताओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि कौन वंदे मातरम पर चुप रह जाता है और बैठा रह जाता है। संविधान की बात करने वाले लोग यह समझें कि वंदे मातरम को राष्ट्रगीत का दर्जा संविधान सभा ने ही दिया था। कल को कोई यह देगा कि हम भारत को अपना भाग्य विधाता नहीं मानते हैं और इसलिए राष्ट्रगान को भी हटा दिया जाए।