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गुरु घासीदास बाबा ने समाज को समानता, सद्भाव और मानवता का दिया संदेश: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर, गुरु घासीदास बाबा ने समाज को समानता, सद्भाव और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। बाबा के विचार आज भी सामाजिक एकता, भाईचारे और समरसता को सुदृढ़ करते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मुंगेली जिले के खैरा-सेतगंगा धाम में आयोजित बाबा गुरु घासीदास जयंती समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने जैतखंभ में विधिवत पूजा-अर्चना कर पालो चढ़ाया तथा गुरुगद्दी एवं राम जानकी मंदिर में दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने सेतगंगा धाम के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 50 लाख रुपये, राम जानकी मंदिर पर्यटन क्षेत्र विकास के लिए 50 लाख रुपये तथा गुरु घासीदास जयंती कार्यक्रम आयोजन के लिए 10 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु श्री खुशवंत साहेब, विधायक सर्वश्री पुन्नूलाल मोहले, धरमलाल कौशिक, सुशांत शुक्ला, डोमन लाल कोरसेवाड़ा तथा श्रीमती भावना बोहरा उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री साय ने राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने एवं छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, बिजली, सुरक्षा और विकास के कार्य तेज़ी से किए जा रहे हैं। गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ निरंतर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है और किसानों के धान का एक-एक दाना खरीदा जाएगा। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख से अधिक महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से राशि प्रदान की जा रही है। प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा नक्सलवाद उन्मूलन की दिशा में भी ठोस और प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने सेतगंगा धाम के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब एवं खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने भी गुरु घासीदास जयंती की शुभकामनाएं देते हुए समाज के हित में सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। विधायक पुन्नूलाल मोहले ने गुरु घासीदास बाबा के जीवन, विचारों और आदर्शों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में सतनाम पंथ के अनुयायी उपस्थित थे।

वन मेले में वनोपज एवं हर्बल उत्पाद से निर्मित औषधियों की बढ़ी मांग

दोपहर तक लगभग 10 लाख से अधिक की हुई बिक्री बांधवगढ़ के गोंडी व्यंजन, अलीराजपुर का दालपनिया, छिंदवाड़ा की वन भोज रसोई बने आकर्षण का केन्द्र भोपाल : अंतर्राष्ट्रीय वन मेला-2025 अंतर्राष्ट्रीय वन मेला की लोकप्रियता की वजह से राजधानी ही नहीं वरन् आसपास के कई जिलों से लोग यहाँ मेला देखने आ रहे है। शहर के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित मेले में दिनांक 18 दिसम्बर की दोपहर तक लगभग 10 लाख से अधिक के वनोपज एवं हर्बल उत्पाद से निर्मित औषधियों की बिक्री हो चुकी है। मेले में स्थापित ओ.पी.डी में बड़ी संख्या में लगभग 100 से अधिक आगंतुकों ने निशुल्क चिकित्सीय परामर्श प्राप्त किया। इस हेतु प्रातः 10.30 से अपराह्न 3.00 बजे एवं सांय 3.00 से रात्रि 8.00 बजे तक आयुर्वेद चिकित्सकों तथा अनुभवी वैद्य अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। ओ.पी.डी में निःशुल्क परामर्श आयुर्वेदिक चिकित्सकों तथा अनुभवी वैद्यों द्वारा मेले के अंतिम दिन तक जारी रहेगा। मेले के कान्फ्रेंस हॉल में गुरूवार को म.प्र. राज्य लघु वनोपज संघ की प्रबंध संचालक डॉ. समीता राजोरा द्वारा स्टार्टअप कान्क्लेव का शुभारंभ किया गया। आयोजन में रविन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी से श्री रोनॉल्ड फर्नान्डेंज, ए.आई.सी. एवं स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेंटर से सुश्री नेहा चतुर्वेदी, व्ही.एस.एस.पी.ए. मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।कार्यक्रम में 6 नये स्टार्ट अप बस्तर फड़, शाम्या प्रकाश, श्यामी, फार्म 93, पी.एस.एस.एस. इंडिया एवं त्रिष्टा टी के प्रतिनिधियों द्वारा चर्चा में भाग लिया जाकर अपने अनुभव साझा किये गये। मेले में लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र के विन्ध्य हर्बल्स ब्रांड के उत्पादों जैसे शहद, च्यवनप्राश के अलावा अन्य उत्पाद वेलनेस किट, केश तेल, महुआ बॉडी बटर, महुआ लोशन, हेयर शैम्पू, विंध्य बाडी मसाज तेल आदि को उनके प्रभावी असर एवं गुणवत्ता की वजह से आगंतुकों द्वारा काफी सराहा जा रहा। इस वर्ष नर्सरी के औषधीय पौधे भी आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। प्रधानमंत्री वन धन योजना अंतर्गत मध्यप्रदेश एवं अन्य राज्यों में संचालित वन धन केन्द्रों के द्वारा बनाए जा रहे सभी उत्पाद के प्रति लोगों का अत्यधिक रुझान रहा। इन उत्पादों में महुए एवं देशी मोटे अनाज (मिलेट्स) के प्रति बढ़ती लोकप्रियता ने महुए के लड्डू, महुए का अचार, महुआ कुकीज, कोदो-कुटकी कुकीज, अलसी लड्डू, तिल लड्डू, देशी मक्का कुकीज, वनीय शहद, आंवला कैंडी, आंवला पाचक ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। आगंतुकों ने बड़ी उत्सुकता के साथ इन उत्पादों को खरीदा। इसके साथ ही वनांचलों के एलोवेरा से निर्मित साबुन, शैम्पू, हैण्ड वॉश, जैल, आंवला अचार,शतावर अचार, जंगली शहद एवं अन्य उत्पादों को भी लोगों ने काफी पसंद किया। विभिन्न जिलों से शामिल प्राथमिक वनोपज समितियों के उत्पाद, जंगली जड़ी बूटियों एवं मध्यप्रदेश राज्य बम्बू मिशन के उत्पादों से लोगों की नजर नहीं हट रही है। इसके अतिरिक्त फ़ूड स्टॉल एवं फूड जोन में वन विभाग से बांधवगढ़ के गोंडी व्यंजन, अलीराजपुर का दालपनिया एवं पश्चिम छिन्दवाड़ा की वन भोज रसोई जो मुख्य आकर्षण का केंद्र है। मेला प्रांगण में सुबह 10.30 बजे से रात्रि 10 बजे तक रंगारंग कार्यक्रम चलते रहे, जिनमें छात्र-छात्राओं द्वारा सोलो गायन तथा समूह गायन की प्रतियोगिता में लगभग 10 विद्यालयों से 50 से भी अधिक छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। दोपहर में योगा शो में योग गुरू श्री महेश अग्रवाल द्वारा योगासन सीखाएं गए एवं जैवविविधता बोर्ड द्वारा कथक नृत्य एवं नुकक्ड़ नाटक प्रतियोगिता आयोजित की गई और सायं 07 बजे से सम्राट म्युज़िकल ग्रुप द्वारा आर्केस्ट्रा की रंगारंग प्रस्तुति में ऑगन्तुकों द्वारा आनंद लिया गया। प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्र – छात्राओं को पुरस्कृत किया गया एवं उनकी विलक्षण प्रतिभा को सराहा गया। अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में शुक्रवार 19 दिसम्बर को लघु वनोपज संघ द्वारा लघु वनोपज द्वारा NTFPs for Inclusive Growth : "Linking Forest Prosperity with Community Well-being" विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ होगा। कार्यशाला का शुभारंभ अपर मुख्य सचिव, वन विभाग श्री अशोक बर्णवाल की उपस्थिति में सम्पन्न होगा। कार्यशाला में लघु वनोपज क्षेत्र में कार्यरत देश के ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ताओं के साथ-साथ विषय विशेषज्ञ भी भाग लेंगे।  

मध्यप्रदेश पुलिस की मानवीय पहल, विगत एक सप्ताह में 19 बिछड़े बच्चों को सकुशल परिजनों से मिलाया

पुलिस की सक्रियता से मासूमों के चेहरों पर लौटी मुस्कान भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस ने गुमशुदा व बिछड़े बच्चों की दस्तयाबी के विशेष अभियान में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। विगत एक सप्ताह में पुलिस ने प्रदेश के मंदसौर, भोपाल, छतरपुर, उज्जैन, झाबुआ और कटनी जिलों से कुल 19बच्चों को खोजकर उनके परिजनों से मिलाया है। पुलिस की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई ने कई परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लौटाई है। मंदसौर पुलिस की बड़ी सफलता जिले के जीवागंज क्षेत्र से 14 दिसंबर को एक वर्षीय बालक के अपहरण की घटना पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मात्र 48 घंटों में बालक को राजस्थान के नागौर जिले (मेड़ता शहर) से सकुशल बरामद किया। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से दबिश देकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। भोपाल में चार घंटे में मिली नाबालिग राजधानी भोपाल के टीटी नगर थाना क्षेत्र से लापता हुई नाबालिग बालिका को पुलिस ने विशेष टीम गठित कर मात्र चार घंटे में ढूंढ निकाला। सार्वजनिक स्थलों पर सघन तलाशी अभियान के बाद बालिका को हर्षवर्धन नगर पार्क से सकुशल बरामद कर परिजनों के सुपुर्द किया गया। छतरपुर मेले में बिछड़े 13 बच्चों को मिलाया जिले के जुझारनगर थाना क्षेत्र में वैदेही बाबा मंदिर परिसर में आयोजित विशालमेले के दौरान 13 बालक-बालिकाएं अपने परिजनों से बिछड़ गए थे। पुलिस सहायताकेंद्र की सक्रिय टीम ने लगातार गश्त और लाउडस्पीकर अनाउंसमेंट के माध्यम से सभी बच्चों को सुरक्षित उनके माता-पिता से मिलाया। अन्य जिलों में भी दिखाई सजगता उज्जैन के माधवनगर थाना पुलिस ने रात के समय लापता हुए सात वर्षीय बालक को डेढ़ घंटे की कार्रवाई में सुरक्षित बरामद किया। झाबुआ जिले के थांदला थाना क्षेत्र में पुलिस ने नवापाड़ा से लापता दो मासूम बच्चों को त्वरित समन्वय से मछली माता रोड से खोज निकाला। इसी प्रकार कटनी जिले में एन.के.जे. थाना पुलिस ने आधुनिक CCTV सर्विलांस के जरिए छह घंटे में गुमशुदा बालक का पता लगाकर उसे उसके माता-पिता के सुपुर्द किया। इन कार्यवाहियों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पुलिस बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मानवीय संवेदनशीलता, तकनीकी दक्षता और त्वरित समन्वय के साथ कार्य कर रही है। अपहरण जैसी संगीन घटनाओं पर सख्त कार्रवाई और बिछड़े बच्चों को घर तक पहुँचाना पुलिस की सजगता और प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।  

मुख्यमंत्री साय से साहू समाज के प्रतिनिधिमंडल की शिष्टाचार भेंट

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विगत दिवस छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन में साहू समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने साहू समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारी को बधाई और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विधायक ईश्वर साहू, विधायक इंद्र कुमार साहू सहित साहू समाज के नवनिर्वाचित प्रांतीय अध्यक्ष डॉ नीरेंद्र साहू,उपाध्यक्ष सत्यप्रकाश साहू, गिरजा साहू, नारद साहू, नन्द लाल साहू चंद्रभूषण साहू सहित साहू समाज के नवनिर्वाचित राज्य स्तरीय तथा जिला स्तरीय पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

वित्त विभाग उत्कृष्ट वित्तीय प्रबंधन की दिशा में अग्रसर : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

शून्य आधारित बजट, रोलिंग बजट और तकनीकी नवाचारों से मजबूत हुई प्रदेश की वित्तीय स्थिति श्रेष्ठ वित्तीय प्रबंधन से समृद्धि की ओर प्रदेश भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि वित्त विभाग श्रेष्ठ वित्तीय प्रबंधन की ओर जिसमें शून्य आधारित बजट प्रक्रिया के अनुसार बजट तैयार किया जा रहा है। तीन वर्षों के लिये रोलिंग बजट की प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसमें बजट प्रक्रिया से संबंधित नवाचार अपनाएं जा रहे है। उन्होंने कहा कि वित्तीय संस्थाओं द्वारा जारी प्रतिवेदनों में मध्यप्रदेश के वित्तीय प्रबंधन बजटीय विश्वसनीयता तथा बैंक की गुणवत्ता को सराहा गया है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि प्रदेश में पूंजीगत व्यय में लगातार वृद्धि हो रही है जिससे प्रदेश के ही सकल घरेलू उत्पाद में नियमित वृद्धि बनी हुई है। भारत सरकार के संकल्प विकसित भारत 2047 को पूरा करने में राज्य अपना योगदान देने के लिये प्रतिबद्ध है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि वित्तीय मानकों के आधार पर प्रदेश की स्थिति बहुत सुदृढ़ है। उन्होंने बताया कि संचालनालय कोष एवं लेखा द्वारा कई नवाचारी व्यवस्था लागू की है। उन्होंने यह भी बताया कि शासकीय सेवकों/ पेंशनरों के हित में कई निर्णय लिये गये है। वाणिज्यिक कर विभाग की 02 वर्ष की विभागीय उपलब्धियां उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 55 हजार 634 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। वर्ष 2025-26 में माह नवम्बर तक कुल 34 हजार 829 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। वर्ष 2025-26 में माह नवम्बर तक डाटा एनालिटिक्स आधारित चिन्हित प्रकरणों में प्रवर्तन कार्यवाहियों से रु. 967 करोड़ एवं ऑडिट की कार्यवाही से. 404 करोड़ रु का राजस्व प्राप्त हुआ है। बुरहानपुर, राजगढ़, खरगोन, झाबुआ, कटनी एवं नरसिंहपुर जिलों में नवीन कार्यालय भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। आबकारी विभाग की आगामी तीन वर्षों की कार्य योजना उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि राजस्व में वृद्धि के लिये राज्य तथा देश के बाहर मदिरा के निर्यात को बढ़ावा देने के लिये एकीकृत पॉलिसी बनाई जाएगी। मदिरा उपभोग/विक्रय के एक दिवस का लायसेंस मोबाईल एप्लीकेशन के माध्यम से जारी किया जाएगा। प्रदेश के समस्त शासकीय विभाग, निगम, मंडल द्वारा दिए जा रहे वर्क आर्डर तथा भुगतान की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सके इसके लिये डाटा रिपोजटरी बनाया जाएगा। डाटा एनालिटिक्स के उपयोग से प्रवर्तन की कार्यवाही की जावेगी तथा बोगस व्यवसायियों पर सतत् निगरानी रखी जाकर गलत ITC के उपयोग पर अंकुश लगाया जाएगा। कर अपवंचन की रोकथाम हेतु चलित वाहनों के माध्यम से किये जा रहे कर अपवंचन पर नियंत्रण एवं निगरानी हेतु यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विभाग में पृथक से डेटा एनालिटिक्स एवं टैक्स रिसर्च यूनिट का गठन किया जायेगा। पंजीयन विभाग की उपलब्धियां उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का प्रथम राज्य है जिसमें 75 प्रकार के दस्तावेज पट्टा, पॉवर ऑफ अटर्नी, बंधक इत्यादि का घर बैठे वीडियो केवायसी के माध्यम से पंजीयन हो रहा है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि संपदा 2.0 को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025 में स्वर्ण पदक मिला है। प्रदेश के लिये यह गौरव की बात है। साथ ही क्रेता एवं विक्रेता की पहचान आधार और पेन e-KYC से किये जाने के कारण जनता को सुविधा हुई है।   विभाग की राजस्व प्राप्ति :- वर्ष लक्ष्य राजस्व प्राप्ति 2023-24 10 हजार 700 करोड रूपये 10 हजार 325 करोड रूपये 2024-25 12 हजार 500 करोड रूपये 11 हजार 355 करोड रूपये 2025-26 13 हजार 920 करोड रूपये 7 हजार 580 करोड रूपये (माह नवम्बर, 2025 तक की स्थिति)   योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि वर्ष 2024-25 में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (15 लाख 03 हजार 395 करोड़) रूपये रहा एवं प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 52 हजार 615 रूपये रही। प्रदेश में CRS (सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम) पोर्टल द्वारा शत-प्रतिशत जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण का कार्य ऑनलाइन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि नर्मदा पथ सर्वेक्षण एवं जनजागरण यात्रा 12 दिवसीय यात्रा का आयोजन नर्मदा तटीय 16 जिलों के 51 विकासखण्डो के 502 ग्राम पंचायतों में किया गया। बावडी उत्सव प्रदेश में विकासखण्ड स्तर पर 26 हजार बावडियों की साफ-सफाई की गयी। बूंद सहेजे बावडी स्मारिका का प्रकाशन किया गया।  

हाउसिंग बोर्ड अपनी संपत्तियों का मूल्यांकन-विकसित और बिक्री की योजना बनाए

नगरीय विकास मंत्री विजयवर्गीय की अध्यक्षता में हुई संचालक मण्डल की बैठक भोपाल नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड को अपनी आवासीय योजना में कमजोर और मध्यम वर्ग की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बोर्ड अपनी संपत्तियों का मूल्यांकन कर उनको विकसित करने और बिक्री की समयबद्ध योजना तैयार करें। मंत्री विजयवर्गीय गुरूवार को भोपाल स्थित हाउसिंग बोर्ड मुख्यालय में आयोजित संचालक मण्डल की बैठक को संबोधित कर रहे थे। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि बोर्ड प्रदेश में चल रहें प्रोजेक्ट की नियमित समीक्षा की जाएं। बोर्ड के निर्माण कार्य समय पर होने पर बोर्ड की आय बढ़ेगी और उद्देश्यों को पूरा कर सकेगा। बैठक में बोर्ड के चल रहे प्रोजेक्टस की बिन्दुवार समीक्षा की गई। मंत्री  विजयवर्गीय ने बोर्ड की साख बढ़ाने के लिये अच्छे कंसलटेंट और एडवाइजर की सेवाएं लेने पर जोर दिया। इंदौर की हुकुमचंद मिल प्रोजेक्ट मंत्री विजयवर्गीय ने इंदौर की हुकुमचंद मिल प्रोजेक्ट पर तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे जुड़ी सभी परमिशन तय समय-सीमा में प्राप्त की जाए। उन्होंने आस-पास अधोसंरचना, उन्नयन एवं ट्रैफिक सुधार के लिये तैयार की गई डीपीआर की भी जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की विशेष पहल से मजदूरों की दशकों से लंबित देनदारियों का भुगतान लगभग 464 करोड़ रूपये का किया गया है। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव  संजय दुबे, हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर राहुल हरिदास फटिंग एवं संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।  

किसानों पर ‘सेम’ की दोहरी मार, राजस्थान की 2 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित

जयपुर राजस्थान में सूखे से ज्यादा सेम की समस्या खेती को बर्बाद कर रही है।  मिट्टी की लवणता यानी ‘सेम’ की समस्या राजस्थान में तेजी से गंभीर रूप ले रही है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी कि राज्य में करीब 1 लाख 96 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सेम से प्रभावित हो चुकी है। सबसे ज्यादा असर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में देखने को मिल रहा है, जहां हजारों हेक्टेयर उपजाऊ जमीन दलदली होकर खेती के लायक नहीं रह गई है। इससे किसानों की आजीविका पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने सांसद कुलदीप इंदोरा के एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) द्वारा वैज्ञानिक अध्ययन कराया गया है। इस अध्ययन में सामने आया कि राजस्थान में 1,95,571 हेक्टेयर भूमि मिट्टी के लवणीकरण से प्रभावित है, जिसे आम भाषा में सेम कहा जाता है। क्यूं बढ़ रही है सेम की समस्या अध्ययन के अनुसार सेम की मुख्य वजहें प्राकृतिक जल निकास में रुकावट, अत्यधिक सिंचाई और भूजल स्तर का बढ़ना हैं। इन कारणों से मिट्टी में मौजूद लवण ऊपर की सतह पर आ जाते हैं, जिससे धीरे-धीरे खेत बंजर हो जाते हैं और फसल उत्पादन प्रभावित होता है। केंद्र सरकार ने माना कि उत्तर राजस्थान के नहर सिंचित क्षेत्रों में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। ICAR की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में करीब 5,397 हेक्टेयर भूमि सेम से प्रभावित है, जिससे जलभराव, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और कृषि उत्पादकता में कमी आ रही है। ICAR ने सुझाए उपाय समस्या से निपटने के लिए ICAR ने अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों उपाय सुझाए हैं। अल्पकालिक उपायों में प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, सतही जल निकासी में सुधार, सिंचाई का बेहतर प्रबंधन, मिश्रित गुणवत्ता के पानी का उपयोग और नमक सहनशील फसलों को बढ़ावा देना शामिल है। वहीं दीर्घकालिक समाधान के तौर पर भूमिगत जल निकासी प्रणाली, गहरी जड़ों वाले वृक्षों के जरिए बायो-ड्रेनेज और नमक सहनशील पेड़ों के साथ कृषि वानिकी मॉडल अपनाने की सिफारिश की गई है। सरकार ने बताया कि इन तकनीकों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन और जागरूकता अभियानों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना के तहत जारी किए जा रहे सॉयल हेल्थ कार्ड भी सेम प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को मिट्टी प्रबंधन में मदद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो राजस्थान में उपजाऊ कृषि भूमि का नुकसान और बढ़ सकता है।

त्रिपुरा पर्यटन विकास निगम का मध्यप्रदेश अध्ययन दौरा

ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे मॉडल और फिल्म टूरिज्म को विकसित करने प्राप्त किया मार्गदर्शन मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझा भोपाल मध्यप्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे पर्यटन ढांचे, बढ़ती पर्यटक संख्या और नवाचार आधारित पर्यटन विकास मॉडल देशभर में आकर्षण का केंद्र बन रहा है। इसी क्रम में त्रिपुरा अर्बन एंड टूरिज्म डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (TUTDP) के अंतर्गत त्रिपुरा टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TTDCL) का प्रतिनिधिमंडल आज मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड और पर्यटन भवन पहुंचा। निगम के प्रबंध संचालक डॉ. इलैया राजा टी. से त्रिपुरा टूरिज्म के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री प्रशांत बादल नेगी ने विस्तृत चर्चा की। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेड़ेकर ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और त्रिपुरा में पर्यटन के विकास हेतु हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि ज्ञान-साझाकरण आधारित ऐसे अध्ययन दौरों से राज्यों के बीच पर्यटन विकास की नई संभावनाएँ और साझेदारी मजबूत होती है। त्रिपुरा टूरिज्म के प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश के पर्यटन मॉडल का विस्तृत अध्ययन किया। प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश की ग्रामीण पर्यटन मॉडल, होमस्टे नीति, फिल्म टूरिज्म पॉलिसी, तथा सेफ एंड सस्टेनेबल टूरिज्म जैसे नवाचारों में विशेष रुचि दिखाई और त्रिपुरा में विकसित करने के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया। श्री नेगी ने बताया कि जिस प्रकार मध्य प्रदेश में महाकाल लोक के विकास के बाद धार्मिक पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, उसी प्रकार त्रिपुरा में भी 51 शक्तिपीठों में से एक ‘मालाबाड़ी शक्तिपीठ’ (त्रिपुरेश्वरी) के विकास का कार्य प्राथमिकता पर लिया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में एक्ज़ीक्यूटिव इंजीनियर उत्तम पाल, एक्ज़ीक्यूटिव इंजीनियर सुनील पोद्दार, जूनियर इंजीनियर सुनंदा पॉल, जूनियर इंजीनियर  झुतन दास, जूनियर इंजीनियर  देबब्रत दास, डिप्टी प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर तन्मय दाश, तथा ऑफिस मैनेजर-कम-अकाउंटेंट कुंतल भौमिक शामिल रहे। मध्यप्रदेश की ग्रामीण पर्यटन पहल, होमस्टे ईकोसिस्टम, सरल शूटिंग अनुमति व्यवस्था और सामुदायिक भागीदारी मॉडल से प्रभावित प्रतिनिधिमंडल ने इसे त्रिपुरा में लागू करने की इच्छा व्यक्त की। यह दौरा दोनों राज्यों के बीच पर्यटन क्षेत्र में सहयोग और सतत पर्यटन विकास के नए अवसरों को गति देगा। साझा की नवाचारों की जानकारी प्रतिनिधिमंडल ने ‘पर्यटन भवन’ पहुंचकर मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम की प्रशासनिक संरचना एवं निगम द्वारा किए जा रहे नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने पर्यटकों के लिए जंगल भ्रमण हेतु ट्रेक्स क्रूजर एवं कैंटर बसों के संचालन, भोपाल स्थित बोट क्लब में 20 शिकारा बोट, चप्पू बोट तथा 5 नई वॉटर साइकिल के संचालन के बारे में अवगत कराया। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को प्रदेश में निगम द्वारा संचालित होटल, रिसॉर्ट, बोट क्लब, नए होटल परियोजनाओं एवं हाल ही में निर्मित उज्जैन के हेरिटेज होटल ‘सम्राट विक्रमादित्य’, शहडोल स्थित ‘सरसी आइलैंड रिसॉर्ट’ तथा पचमढ़ी में पूर्णत: महिलाओं द्वारा संचालित प्रदेश के एकमात्र होटल अमलतास के संचालन, के साथ नव श्रृंगारित ‘होटल नीलांबर स्काई लाइन’ की जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, माइस (MICE) टूरिज्म के अंतर्गत भोपाल स्थित ‘कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर’ एवं खजुराहो स्थित ‘महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर’ के संचालन तथा इनमें आयोजित होने वाले वृहद आयोजनों के बारे में भी विस्तार से बताया।

हाथियों ने मचाया तांडव: धान खरीदी केंद्र से रात में 15 बोरी धान बरबाद

रायगढ़  जिले के बंगुरसिया धान खरीदी केंद्र में इन दिनों हाथियों का आतंक किसानों और कर्मचारियों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गया है। बीते दो दिनों के भीतर हाथियों के एक दल ने खरीदी केंद्र में रखी करीब 15 बोरी धान खा ली, जबकि कई अन्य बोरियों को फैलाकर पूरी तरह बर्बाद कर दिया। इस घटना से न सिर्फ किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि धान खरीदी व्यवस्था की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। रात के अंधेरे में केंद्र में घुसे हाथी जानकारी के अनुसार, देर रात हाथियों का एक झुंड धान खरीदी केंद्र परिसर में दाखिल हुआ। खुले में रखे धान को देखकर हाथी केंद्र के भीतर पहुंच गए और बोरियों को उठाकर धान खाने लगे। हाथियों की मौजूदगी से पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गनीमत रही कि इस दौरान कोई जनहानि नहीं हुई। सीसीटीवी वीडियो वायरल पूरी घटना धान खरीदी केंद्र में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई, वहीं कुछ ग्रामीणों ने मोबाइल से भी हाथियों के उत्पात का वीडियो रिकॉर्ड किया। ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें साफ देखा जा सकता है कि हाथी बेखौफ होकर धान की बोरियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। धान खरीदी शुरू होते ही बढ़ी हाथियों की आवाजाही ग्रामीणों का कहना है कि धान खरीदी शुरू होने के बाद से ही इलाके में हाथियों की आवाजाही बढ़ गई है। केंद्र के आसपास वन क्षेत्र होने के कारण हाथी आसानी से यहां तक पहुंच जाते हैं। रात के समय हाथियों के आने से किसानों और कर्मचारियों में दहशत का माहौल बना हुआ है, जिससे कई लोग रात में केंद्र की ओर जाने से भी कतरा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल धान खरीदी केंद्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से किसानों में नाराजगी देखी जा रही है। न तो केंद्र के चारों ओर पर्याप्त बाड़ है और न ही हाथियों को रोकने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था। खुले में रखे धान की वजह से हाथियों को आकर्षित होने का मौका मिल रहा है। किसानों ने की सुरक्षा उपायों की मांग ग्रामीणों और किसानों ने वन विभाग और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मांग है कि धान खरीदी केंद्र के चारों ओर बिजली की बाड़, रात के समय पहरेदारों की तैनाती, हाथियों की निगरानी के लिए वन अमले की नियमित गश्त और धान के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था जल्द की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में न केवल धान का नुकसान बढ़ेगा, बल्कि किसी बड़े हादसे की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में प्रशासन और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई ही किसानों को राहत दिला सकती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का रतलामवासियों ने अभूतपूर्व सौगात के लिए किया अभिनंदन

रतलाम का सौभाग्य, बगैर मांगे मिली मेट्रोपोलिटिन रीजन में शामिल होने की सौगात : मंत्री काश्यप भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सेंव, सोना और साड़ी के लिए रतलाम की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति है। इनसे रतलाम की अपनी विशिष्ट पहचान बनी है। रतलाम स्वाभिमानी और पुरूषार्थी लोगों की नगरी है। यहां के लोग काम के आधार पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाते हैं। इसका सबसे अच्छा उदाहरण सूक्ष्म,लघु, एवं मध्यम, उद्यम मंत्री श्री चैतन्य काश्यप हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रतलाम को इंदौर मेट्रोपोलिटिन रीजन में शामिल करने के लिए रतलाम वासियों के द्वारा संवाद भवन (मुख्यमंत्री निवास) में आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह को संबोधित करते हुए एमएसएमई मंत्री श्री काश्यप ने कहा कि बगैर मांग के रतलाम को मेट्रोपोलिटिन रीजन में शामिल किया जाना रतलाम वासियों के लिए सौगात की बात है। रतलाम के प्रभारी मंत्री डॉ. विजय शाह ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने वाले मुख्यमंत्री हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रतलाम में औद्योगिक विकास की सभी संभावनाएं पहले से ही असीमित हैं। इन संभावनाओं को साकार करने के लिए रतलाम को मेट्रोपोलिटिन क्षेत्र में शामिल किया गया है। नागदा और खाचरौद पहले ही शामिल कर लिए गए, ऐसी स्थिति में असीमित संभावनाओं से परिपूर्ण रतलाम को भी शामिल करना ही था। अब इंदौर, उज्जैन के साथ रतलाम के शामिल हो जाने से मेट्रोपोलिटिन रीजन का विकास ट्रिपल इंजन की समन्वित शक्ति से होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रतलाम वासियों का अभिनंदन के लिए आभार मानते हुए कहा कि मुख्यमंत्री निवास प्रदेश की जनता का ही घर है। एमएसएमई मंत्री श्री काश्यप ने कहा कि मध्यप्रदेश का विगत दो वर्षों में अभूतपूर्व विकास हुआ है। मेट्रोपॉलिटिन रीजन का विजन मुख्यमंत्री की विकास के प्रति अद्वितीय ललक की परिणीति है। वर्ष 2025 में भोपाल में आयोजत ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, विभिन्न संभागों में आयोजित रीजनल इन्डस्ट्रीयल कॉन्क्लेव और मेट्रोपोलिटिन रीजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मध्यप्रदेश के विकास के प्रति व्यापक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संवाद भवन में रतलाम के संयुक्त व्यापारी संघ, सराफा एसोसिएशन, खेल संगठन, ग्रेन मर्चेंट संघ, बार एसोसिएशन, मेडिकल एसोसिएशन सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अभिनंदन किया। समारोह में जिला अध्यक्ष श्री प्रदीप उपाध्याय, महापौर रतलाम नगर निगम श्री प्रह्लाद पटेल, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती मनीषा शर्मा सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रमुख बिंदु     रतलाम स्वाभिमानी और पुरूषार्थी लोगों की नगरी है।     यहां के लोग काम के आधार पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाते हैं।     बगैर मांग के रतलाम को मेट्रोपोलिटिन रीजन में शामिल किया जाना रतलाम वासियों के लिए सौगात की बात है।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने वाले मुख्यमंत्री हैं।     रतलाम में औद्योगिक विकास की संभावनाएं असीमित हैं।     इंदौर, उज्जैन के साथ रतलाम के शामिल हो जाने से मेट्रोपोलिटिन रीजन का विकास ट्रिपल इंजन की समन्वित शक्ति से होगा।     मुख्यमंत्री निवास प्रदेश की जनता का ही घर है।     मेट्रोपॉलिटिन रीजन का विजन मुख्यमंत्री की विकास के प्रति अद्वितीय ललक की परिणीति है।