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प्रभारी मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया, मंदसौर जिले में दो साल में हुए महत्वपूर्ण विकास कार्य

मंदसौर जिले ने दो वर्षों में किए विकास के नए आयाम स्थापित : प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया पशुपतिनाथ लोक, मेडिकल कॉलेज, चीता प्रोजेक्ट, नगर वन, उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों में हासिल की उल्लेखनीय उपलब्धियां भावांतर भुगतान योजना में 8,803 किसानों को 10.20 करोड़ रुपए का भुगतान दो वर्षो की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक का किया विमोचन प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक भोपाल महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मंदसौर जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि मंदसौर जिले ने विगत दो वर्षों में विकास के हर क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होने राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर मंदसौर जिले में अब तक किए गए विकास कार्यों, योजनाओं की प्रगति तथा उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी दी। प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित सुशासन भवन सभागार में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक एवं प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रभारी मंत्री ने 2 वर्ष की उपलब्धियां पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर, कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग, सुवासरा विधायक श्री हरदीप सिंह डंग, जिला योजना समिति सदस्य श्री राजेश दीक्षित, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा विजय पाटीदार, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री बसंत शर्मा सहित पुलिस अधीक्षक श्री विनोद कुमार मीना, अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल सहित सभी जिलाधिकारी, पत्रकार गण मौजूद थे। प्रभारी मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि विगत दो वर्षों में मंदसौर जिले में धार्मिक, पर्यटन, औद्योगिक, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, नगरीय एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की गई हैं। भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में लगभग 25 करोड़ रुपए की लागत से पशुपतिनाथ लोक का निर्माण पूर्णता की ओर है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत जिले में 61.62 करोड़ रुपए की लागत से 5 निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। जल जीवन मिशन के अंतर्गत जिले के सभी 922 ग्रामों में 2 लाख 40 हजार से अधिक ग्रामीण नल जल कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं तथा लगभग 1332 करोड़ रुपए की नल जल योजनाओं के कार्य प्रगतिरत हैं। इसके साथ ही गांधीसागर जल विद्युत गृह की 115 मेगावाट क्षमता की इकाइयों के नवीनीकरण एवं आधुनिकीकरण के लिए 418.91 करोड़ रुपए की स्वीकृति शासन द्वारा प्रदान की गई है। स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में भी जिले ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। मंदसौर जिला मुख्यालय पर श्री सुंदरलाल पटवा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अक्टूबर 2024 से 100 सीट्स के साथ प्रारंभ किया गया है, जहां वर्तमान में प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के कुल 200 छात्र अध्ययनरत हैं। इसके अलावा जिले में 13 सांदीपनि विद्यालयों की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से अधिकांश भवनों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। कृषि एवं किसान कल्याण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एवं मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत जिले के 2 लाख 19 हजार से अधिक किसानों को 43.96 करोड़ रुपए की राशि वितरित की गई है। सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत 8,803 किसानों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 10.20 करोड़ रुपए की राशि उनके बैंक खातों में जमा कराई गई है। अतिवृष्टि एवं फसल क्षति पर जिले को 267.29 करोड़ रुपए की राहत राशि आवंटित की गई है। औद्योगिक विकास को गति देने जिले में 331.47 हेक्टेयर भूमि पर नवीन औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार किया गया है। कृषि उद्योग समागम 2025 का आयोजन मंदसौर में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की उपस्थिति में किया गया, जिसमें 3,600 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश हुआ तथा लगभग 12,500 लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के अंतर्गत विगत दो वर्षों में 487 हितग्राहियों को 35.39 करोड़ रुपए का ऋण प्रदान कर स्वरोजगार से जोड़ा गया है। नगरीय एवं ग्रामीण विकास के अंतर्गत अमृत 2.0 योजना में 194.82 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 10,166 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, ग्राम सड़क, प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) सहित 50,512 विकास कार्यों के लिए 810.01 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। प्रभारी मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि मंदसौर जिला निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है तथा आने वाले समय में जिले को विकास के नए शिखर पर पहुंचाया जाएगा।  

रायपुर: जनता की आस्था सरकार की सबसे बड़ी शक्ति, दो वर्षों की सेवा यात्रा समर्पित – CM विष्णुदेव साय

रायपुर : जनता की आस्था ही सरकार की सबसे बड़ी शक्ति: दो वर्ष की सेवा यात्रा छत्तीसगढ़ की जनता को समर्पित – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ विश्वास, स्थिरता और सुशासन के नए अध्याय की ओर अग्रसर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेशवासियों को किया संबोधित रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी सेवायात्रा के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ की जनता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा है कि बीते दो वर्ष शासन के नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और जनसहभागिता के वर्ष रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समय उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण वर्षों में से एक रहा, क्योंकि इस दौरान उन्हें प्रदेशवासियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने और उनकी अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इन दो वर्षों में राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के हर कोने तक विकास की रोशनी पहुँचाने का निरंतर प्रयास किया है। किसानों की मेहनत को सम्मान दिलाने के लिए सुविधाओं का विस्तार किया गया, ताकि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य समय पर प्राप्त हो सके। कृषि को लाभकारी और सम्मानजनक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए नई भर्तियों, कौशल प्रशिक्षण और औद्योगिक अवसरों के द्वार खोले गए हैं। रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है, ताकि प्रदेश का युवा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आदिवासी अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। जिन क्षेत्रों में कभी उम्मीदें धुंधली थीं, वहाँ अब विकास की नई संभावनाएँ आकार ले रही हैं। बहनों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए भी सरकार ने कई प्रभावी कदम उठाए हैं, जिससे हर परिवार में आत्मविश्वास का वातावरण बना है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन प्रयासों के बीच सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि आज शासन जनता के और अधिक निकट आया है। प्रशासन और आमजन के बीच की दूरी घटकर सहभागिता में बदल रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि छत्तीसगढ़ आज विश्वास, स्थिरता और सुशासन के एक नए अध्याय की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस विकास यात्रा में अपने सुझावों, परिश्रम और विश्वास से सरकार का मार्गदर्शन करते रहें। उन्होंने कहा कि जनता की आस्था ही सरकार की सबसे बड़ी शक्ति है और छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य की सच्ची गारंटी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भविष्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता और भी सशक्त है। आने वाले वर्षों में शिक्षा, रोजगार, कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में और तेज़ गति से कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भर और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है, जहाँ प्रत्येक युवा को अवसर, किसान को गर्व और हर नागरिक को यह विश्वास हो कि शासन सदैव उसके साथ खड़ा है।

रायपुर: विशेष लेख – मुख्यमंत्री साय ने जताई समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के प्रति शासन की प्रतिबद्धता

      रायपुर, छत्तीसगढ़ में समाज के कमजोर, वंचित और विशेष जरूरतों वाले वर्गों को सशक्त बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में बीते दो वर्ष उल्लेखनीय सिद्ध हुए हैं। समाज कल्याण विभाग ने इस अवधि में पेंशन योजनाओं, दिव्यांगजन सहायता, वरिष्ठ नागरिक कल्याण, आश्रय सुविधाओं, उभयलिंगी पुनर्वास और नशा मुक्ति कार्यक्रमों के क्षेत्र में व्यापक सुधारों और नई पहल का नेतृत्व किया है। योजनाओं की पारदर्शिता पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाकर राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि अंतिम व्यक्ति तक सहायता और सुरक्षा पहुँचे। यह कार्यकाल संवेदनशील, जवाबदेह और जनकेंद्रित शासन का वास्तविक उदाहरण प्रस्तुत करता है। पेंशन योजनाओं में क्रांतिकारी सुधार 21.99 लाख हितग्राहियों तक सहायता राज्य सरकार ने सामाजिक सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए पेंशन योजनाओं के संचालन में तकनीकी सुधार किए। छह प्रमुख पेंशन योजनाओं इंदिरा गांधी वृद्धावस्था, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सुखद सहारा तथा मुख्यमंत्री पेंशन योजना के माध्यम से 21.99 लाख हितग्राही लाभान्वित हुए। पेंशन वितरण पारदर्शी और समयबद्ध डीबीटी भुगतान 98 प्रतिशत और आधार सीडिंग 96 प्रतिशत तक पहुँचने के साथ पेंशन वितरण प्रणाली अत्यंत पारदर्शी और समयबद्ध बनी। ई-केवायसी प्रक्रिया में मृत हितग्राहियों को हटाकर वास्तविक पात्रों को लाभ सुनिश्चित किया गया। मुख्यमंत्री पेंशन योजना के हितग्राही 7.10 लाख से बढ़कर 7.45 लाख होना राज्य की संवेदनशील नीतियों का महत्वपूर्ण परिणाम है। राष्ट्रीय परिवार सहायता-संकट की घड़ी में बड़ा सहारा गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना जीवन रक्षक सिद्ध हुई है। दो वर्षों में 5,110 पात्र परिवारों को 20 हजार रुपए की एकमुश्त सहायता प्रदान की गई, जिससे आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में उन्हें राहत मिल सके। दिव्यांगजन सहायता सुविधाओं, पहचान और पुनर्वास में कई गुना वृद्धि दिव्यांगजनों की सहायता और सशक्तिकरण के लिए विभाग द्वारा किए गए प्रयास अत्यंत प्रभावी रहे। यूडीआईडी कार्ड लाभार्थी 2.74 लाख तक पहुँचे। सहायक उपकरण वितरण 1,161 से बढ़कर 3,609 हो गया। सामर्थ्य विकास शिविरों में भी वृद्धि हुई और 4,983 दिव्यांगजनों को सीधा लाभ प्राप्त हुआ। ये सभी प्रयास दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी गरिमा सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाते हैं। विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए मजबूत आधार छत्तीसगढ़ ने विशेष शिक्षा और पुनर्वास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण विस्तार किया है। सरकारी विशेष विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 1,342 हुई, जबकि स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा संचालित विद्यालयों में 3,049 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। माना कैम्प स्थित फिजिकल रिफरल रीहैब सेंटर और सेरेब्रल पाल्सी गेट लैब की सेवाएँ लगभग दोगुनी हो गईं। ये उपलब्धियाँ विशेष जरूरत वाले बच्चों और युवाओं के लिए आत्मनिर्भर भविष्य का आधार मजबूत करती हैं। छात्रवृत्तियों से बढ़ा शैक्षणिक आत्मविश्वास राज्य और केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने में बड़ी मदद मिली। राज्य छात्रवृत्ति 7,807 से बढ़कर 8,726 और केंद्रीय छात्रवृत्ति 390 से बढ़कर 423 हुई। वरिष्ठ नागरिकों के लिए आस्था और सम्मान, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना पुनः शुरू वरिष्ठ नागरिकों में अत्यधिक लोकप्रिय मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना को आईआरसीटीसी के सहयोग से पुनः प्रारंभ किया गया। अब तक 6 यात्राओं में 4,697 वरिष्ठजन लाभान्वित हुए हैं। वर्ष 2025-26 के लिए 15 करोड़ रुपए और अतिरिक्त 10 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान इस योजना को और व्यापक बनाता है। स्वरोजगार एवं आर्थिक संबल दिव्यांगजनों को नया अवसर दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने हेतु रियायती ब्याज दर पर ऋण एवं उत्थान सब्सिडी योजनाएँ अत्यंत सफल रहीं। 2,435 दिव्यांगजनों को रियायती ऋण और 411 लाभार्थियों को उत्थान सब्सिडी प्रदान की गई। इसके अलावा 24.50 करोड़ रुपये के ऋण माफ किए जाकर दिव्यांगजनों को भारी आर्थिक राहत मिली। आश्रय सुविधाओं में सुधार सुरक्षित जिंदगी की गारंटी घरौंदा, हाफ-वे-होम, अपराजिता और प्रशामक देखभाल गृहों में रहने वाले हितग्राहियों की संख्या बढ़ी है, जो सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार को दर्शाता है। गंभीर और बहुदिव्यांगजन, मानसिक रोग से स्वस्थ हुए व्यक्ति तथा जरूरतमंद वृद्धजन इन सुविधाओं का लाभ उठाकर सम्मानजनक जीवन जी पा रहे हैं। उभयलिंगी व्यक्तियों के पुनर्वास में महत्वपूर्ण प्रगति उभयलिंगी समुदाय के लिए राज्य सरकार का दृष्टिकोण अत्यंत संवेदनशील रहा है। पहचान प्रमाण पत्र 506 से बढ़कर 915 हुए, वहीं एसआरएस ऑपरेशन के लाभार्थी 5 से बढ़कर 9 हुए। यह समुदाय को मुख्यधारा में लाने और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। नशा मुक्ति अभियान नई शुरुआत की राह नशा मुक्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार करते हुए नशामुक्ति केंद्रों की संख्या 11 से बढ़ाकर 25 कर दी गई। लाभार्थी बढ़कर 4,379 हुए। भारत माता वाहिनी दल गतिविधियों के विस्तार के साथ सक्रिय हुआ, जबकि सियान हेल्पलाइन ने 2.73 लाख कॉल प्राप्त कर राज्य में भरोसेमंद सहायता तंत्र स्थापित किया। नवीन पहल भविष्य के लिए मजबूत नीति ढांचा सुगम्य छत्तीसगढ़ अभियान के तहत सभी सार्वजनिक भवनों का एक्सेस ऑडिट किया गया। नए विशेष विद्यालयों और आवासीय परिसरों के निर्माण हेतु 205 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया गया। दिव्यांग विकास आयोग गठन एवं बढ़े हुए बजट (1504 करोड़ रुपए से 1575 करोड़ रुपए) ने विभागीय कार्यों को नई ऊर्जा प्रदान की है। इन दो वर्षों में समाज कल्याण विभाग की उपलब्धियाँ साबित करती हैं कि संवेदनशील और जनकेंद्रित शासन किस प्रकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचकर परिवर्तन ला सकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सामाजिक सुरक्षा, दिव्यांगजन, सशक्तिकरण, वरिष्ठ नागरिक कल्याण और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में देश के सामने एक सशक्त और परिणामदायी मॉडल बनकर उभरा है। यह दो वर्ष छत्तीसगढ़ के लिए मानवीय मूल्यों, विकास और संवेदना का मजबूत अध्याय साबित हुए हैं।   डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक (जनसंपर्क)

मोहन सरकार के दो वर्षों में छह लाख को मिली नौकरी, तीन साल में 20 लाख को मिलेगी रोजगार की सुविधा

भोपाल   मोहन सरकार अपने दो वर्ष पूरे कर चुकी है और अब शेष तीन वर्षों के लिए सरकार ने विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया है। सरकार ने साफ किया है कि आने वाले वर्षों में उसका मुख्य फोकस रोजगार, शहरी विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर रहेगा। इन सेक्टरों को राज्य के विकास के लिए निर्णायक माना जा रहा है। रोजगार: सबसे बड़ा फोकस राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए रोजगार अवसरों का सृजन है- चाहे सरकारी क्षेत्र हो या निजी क्षेत्र। सरकार ने आगामी तीन वर्षों में 20 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य तय किया है। विभागों में खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जा रही है और कई विभागों में भर्ती संबंधी विज्ञप्तियां भी जारी हो चुकी हैं। सरकार का दावा है कि पिछले दो वर्षों में 6 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। स्वरोजगार योजनाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा और 30,000 नए उद्यमियों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित करने की योजना है। 38 शहरों का नया जीआईएस मास्टर प्लान टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा प्रदेश के 38 शहरों के जीआईएस आधारित मास्टर प्लान तैयार किए जाएंगे। साथ ही महानगर क्षेत्र कानून लागू किया जाएगा। टीडीआर पोर्टल का विस्तार, टीओडी नीति का क्रियान्वयन और सिंहस्थ 2028 के लिए एकीकृत मास्टर प्लान आधारित विकास किया जाएगा। डीपीडीपी कानून के अनुरूप विभागीय पोर्टल का आधुनिकीकरण किया जाएगा। नक्शाविहीन गांवों का डिजिटलीकरण, भू-अर्जन प्रक्रियाओं को एंड-टू-एंड ऑनलाइन करने और नई आबादी की भूमि का चिन्हांकन भी योजना का हिस्सा है। विश्वास-आधारित डायवर्ज़न प्रक्रिया भी लागू की जाएगी। जनजातीय विकासखंड में सांदीपनि स्कूल हर जनजातीय विकासखंड में सांदीपनि स्कूल, एकलव्य विद्यालय, माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर और बालक आदर्श आवासीय विद्यालय की स्थापना की योजना है, जिससे आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दायरा बढ़ेगा। जल जीवन मिशन- लक्ष्य से पहले पूरा करने का दावा प्रदेश सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समयसीमा दिसंबर 2028 तय की है, लेकिन मध्य प्रदेश इसे मार्च 2027 तक पूरा कर देश में मिसाल पेश करेगा। मिशन के संचालन और संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार की जाएगी, ताकि जल आपूर्ति किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो। 

किसानों की सेवा को सम्मान, सहकारी बैंकों पर कराधान पर आयोजित कार्यशाला

भोपाल :  अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने सहकारी बैंकों पर लागू कराधान पर एक दिवसीय कार्यशाला कहा कि किसानों की सेवा करने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है। सेवा के लिए ज्ञान अर्जित करें और विशेषज्ञता प्राप्त करें। वे आज अपेक्स बैंक ट्रेनिंग कालेज, भोपाल में प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। नाबार्ड के महाप्रबंधक श्री सुरेश कुमार साहू, उप महाप्रबंधक नन्दू नायक,अपेक्स बैंक के प्राचार्य श्री पी.एस.तिवारी, वि.क.अ श्री अरुण मिश्र, उप महाप्रबंधक श्री के.टी.सज्जन, सहायक महाप्रबंधक श्री अरविंद बौद्ध, विषय विशेषज्ञ श्री अमूल राहंणेकर, चार्टड अकाउंटंट उपस्थित थे। श्री गुप्ता ने कहा कि हमारा प्रयास इस प्रशिक्षण संस्थान को देश में सर्वश्रेष्ठ बनाने का है। हमारा प्रयास बेहतर माहौल व आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण वातावरण में सभी को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान करना है। इसी कड़ी में आज इस कांफ्रेंस हाल का उद्घाटन हुआ है। नाबार्ड के महाप्रबंधक श्री सुरेश कुमार साहू ने प्रदेश में अल्पकालीन सहकारी संरचना को सुदृढ़ीकरण बनाने के प्रयास करने पर जोर दिया। आरंभ में अपेक्स बैंक ट्रेनिंग कालेज के प्राचार्य श्री पी.एस.तिवारी अतिथियों का स्वागत एवं आयोजन की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए अवगत कराया कि प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक के दूरदर्शी व सकारात्मक दृष्टिकोण व नाबार्ड के सहयोग से प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर व संख्या दुगनी होने में सफलता प्राप्त हुई है। नाबार्ड के लखनऊ स्थित संस्थान "बर्ड" ने "ए" एक्रिडेशन प्रदान किया है । आभार प्रदर्शन संकाय सदस्य श्री आर.के.दुबे ने किया।  

पंजाब सरकार ने बाढ़ प्रभावित किसानों को दिया ऐतिहासिक राहत पैकेज, अब तक की सबसे बड़ी मदद

चंडीगढ़  इस वर्ष आई बाढ़ ने पंजाब के कई जिलों में व्यापक तबाही मचाई, जिससे किसानों, ग्रामीण परिवारों और खेतिहर मजदूरों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। लेकिन संकट की इस घड़ी में पंजाब सरकार ने रिकॉर्ड स्तर का राहत पैकेज जारी किया, जिसे राज्य का अब तक का सबसे बड़ा और सर्वाधिक प्रभावी मुआवजा प्रयास बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट किया कि “किसानों की मुश्किल में सरकार उनके साथ खड़ी है, सिर्फ कागजों पर नहीं, जमीन पर कार्रवाई के साथ।” “जिसका खेत, उसदी रेत” योजना के तहत बाढ़ के बाद खेतों में आई भारी मात्रा में रेत हटाने के लिए किसानों को 7,200 रुपये प्रति एकड़ की विशेष सहायता दी जा रही है। साथ ही फसल क्षति के मुआवजे को भी नई परिभाषा दी गई है—अब 26–33% नुकसान पर 10,000 रुपये, 33–75% नुकसान पर 10,000 रुपये और 75–100% नुकसान पर 20,000 रुपये प्रति एकड़ सहायता प्रदान की जा रही है। इनमें से 14,900 रुपये प्रति एकड़ राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे हैं, जो देश में सबसे अधिक माना गया है। घर टूटने की स्थिति में भी मुआवजे को कई गुना बढ़ा दिया गया है। पहले सिर्फ 6,500 रुपये मिलते थे, अब पूरी तरह क्षतिग्रस्त घरों के लिए 1.20 लाख रुपये और आंशिक नुकसान के लिए 35,100 रुपये स्वीकृत किए गए हैं। नदी कटाव से प्रभावित किसानों को 47,500 रुपये प्रति हेक्टेयर (18,800 रुपये प्रति एकड़) दिए जाएंगे। इसके अलावा सेम प्रभावित क्षेत्रों के लिए 4.50 करोड़ रुपये का पैकेज भी जारी हुआ है। राज्य सरकार ने केंद्र से सहायता राशि बढ़ाकर 50,000 रुपये प्रति एकड़ करने की मांग की है, जबकि केंद्र द्वारा घोषित 1,600 करोड़ रुपये को राज्य ने अपर्याप्त बताया है। यह राहत पैकेज न केवल तत्काल सहायता उपलब्ध कराता है, बल्कि यह पंजाब में मानवीय और जवाबदेह आपदा प्रबंधन की मिसाल स्थापित कर रहा है।

SSP कार्तिकेय शर्मा का सख्त संदेश: ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत 12 SHO लाइन हाजिर, 46 थानों में नई तैनाती

पटना कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से पटना जिले में पुलिस प्रशासन ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है. शुक्रवार (12 दिसंबर) को जिले के 46 थानों में नए थानाध्यक्षों की तैनाती की गई है, जबकि 12 थानाध्यक्षों को लाइन हाजिर कर दिया गया. हवाई अड्डा, कोतवाली, कदमकुआं, सचिवालय और श्रीकृष्णापुरी जैसे अहम थानों में भी नए प्रभारी भेजे गए हैं. यह कार्रवाई एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा की सख्त पहल के रूप में देखी जा रही है. दरअसल, पुलिस विभाग का मानना है कि लंबे समय से जमे अधिकारियों और कमजोर कार्यप्रणाली के कारण पुलिसिंग प्रभावित हो रही थी जिसे सुधारने के लिए यह कदम जरूरी था. कानून-व्यवस्था सुधार के नाम पर एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने एक साथ दर्जनों थानों में बदलाव कर सख्त संदेश दिया है. एसएसपी की अनुशंसा पर लगी अंतिम मुहर बता दें कि एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने 12 दिसंबर को पुलिस महानिरीक्षक, केंद्रीय क्षेत्र पटना को पत्र भेजकर थानाध्यक्षों के तबादले और लाइन हाजिरी की अनुशंसा की थी. शुक्रवार शाम इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई. पटना पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिन अधिकारियों को लाइन हाजिर किया गया है, उनमें कई लंबे समय से एक ही थाने में पदस्थ थे, जबकि कुछ के खिलाफ कर्तव्य पालन में गंभीर खामियां और शिकायतें सामने आई थीं. इन 12 थानाध्यक्षों पर गिरी गाज लाइन हाजिर किए गए थानाध्यक्षों में खगौल के राजकुमार सिंह, मोकामा के संतोष कुमार शर्मा, सचिवालय के बलरामलाल देव, मेहदीगंज के किशोर कुणाल झा, महिला थाना की राजरंजनी कुमारी, एससी-एसटी थाना के राजकुमार, अगमकुआं के नीरज कुमार पांडेय, मसौढ़ी के अनिल कुमार, धनरुआ के आलोक कुमार, बेलछी के अनिल कुमार सिंह, बिक्रम के विनोद कुमार और आईआईटी अमहरा के शिवशंकर शामिल हैं। सभी अधिकारियों को पटना पुलिस केंद्र में योगदान देने का निर्देश दिया गया है.

सड़क सुरक्षा को लेकर सीएम भजनलाल शर्मा ने आम जनता से लिया शपथ

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को जयपुर के जनपथ स्थित अमर जवान ज्योति पर आयोजित सड़क सुरक्षा अभियान के राज्य स्तरीय समारोह में शिरकत की। उन्होंने इस दौरान सड़क सुरक्षा अभियान से संबंधित पोस्टर का विमोचन किया तथा उपस्थित लोगों को सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाते हुए यातायात नियमों का पालन करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने घायलों की जान बचाने वालों को किया सम्मानित मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की जान बचाने वाले नागरिकों को सम्मानित किया। शर्मा ने इन जीवन रक्षकों का हौसला बढ़ाते हुए उनके नेक कार्य की सराहना की। सम्मानित होने वालों में संदीप गुप्ता, नितेश यादव, सुनील सिरवी, संजय कुमार एवं सुरता देवी शामिल रहे। शर्मा ने कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा जन-जागृति रथों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने 500 ऑटोरिक्शा को भी फ्लैग ऑफ किया। ये सभी वाहन विभिन्न क्षेत्रों में जाकर आमजन को सड़क सुरक्षा के लिए जागरूक करेंगे। शर्मा ने इस अवसर पर दिव्यांगजनों को हेलमेट वितरण किया तथा व्यवसायिक वाहनों पर रिफ्लेक्टिव टेप लगाई। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा का संदेश देने वाले गुब्बारे हवा में छोड़कर आमजन को जागरूक किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा,मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारी, बड़ी संख्या में स्कूल, कॉलेज के छात्र-छात्राएं एवं आमजन उपस्थित रहे।

टैक्सी मालिकों के लिए खुशखबरी, हरियाणा सरकार के नए नियमों से 28 हजार को फायदा

फरीदाबाद  हरियाणा सरकार ने टैक्सी चलाने की अनुमति अवधि बढ़ाकर जिला फरीदाबाद के करीब 28 हजार टैक्सी मालिकों को बड़ी राहत दी है। अब पेट्रोल और सीएनजी टैक्सी 9 के बजाय 12 साल तक चल सकेंगी, जबकि डीजल टैक्सी 10 साल तक ही चलाई जाएंगी। कैबिनेट की 8 दिसंबर को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। आरटीओ अधिकारी ने कहा कि आदेश का इंतजार है, लिखित निर्देश मिलते ही लागू किया जाएगा। नॉन-एनसीआर क्षेत्र में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी पर चलने वाली ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली गाड़ियां 12 साल तक चलाई जा सकेंगी। इससे दूर-दराज जिलों में टैक्सी सेवाओं का विस्तार होगा। सरकार का मानना है कि टैक्सी संचालन की अवधि बढ़ने से परिवहन ढांचे में मजबूती आएगी। वाहन मालिकों का आर्थिक दबाव कम होगा और सवारियों को भी बेहतर सुविधा मिलेगी। स्कूल बसों के लिए 15 साल की अवधि : एनसीआर में स्टेज कैरिज, कांटेक्ट कैरिज, गुड्स कैरिज और स्कूल बसों की उम्र बढ़ाकर 15 साल कर दी गई है। यह नियम पेट्रोल, सीएनजी, इलेक्ट्रिक और अन्य इंजन वाली गाड़ियों पर लागू होगा, जबकि डीजल बसें 10 साल तक ही चल सकेंगी। यह निर्णय स्कूलों और परिवहन कंपनियों को बड़ी राहत देगा। बसों को बदलने में भारी खर्च आता है। एनसीआर में टूरिस्ट परमिट गाड़ियों को बड़ी राहत हरियाणा मोटर व्हीकल एक्ट 1993 के तहत ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट श्रेणी की वाहनों के लिए चलाने की अधिकतम अवधि तय की गई है। एनसीआर क्षेत्र में पेट्रोल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक टैक्सी 12 साल तक चल सकेंगी, जबकि डीजल टैक्सी को 10 साल की सीमा में रखा गया है। यह फैसला ड्राइवरों और पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए बड़ा लाभ साबित होगा। इससे टैक्सी मालिकों को नया वाहन खरीदने के बोझ से राहत मिलेगी और रोजगार भी सुरक्षित रहेगा। फरीदाबाद आरटीओ को आदेश का इंतजार फरीदाबाद आरटीओ मनीष सहगल ने बताया कि सरकार द्वारा समय सीमा बढ़ाने के निर्णय की जानकारी है, लेकिन अभी विभाग को लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। आदेश आते ही नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। वर्तमान में फरीदाबाद में 28000 टैक्सी रजिस्टर्ड हैं, जिनमें लगभग 20,950 पेट्रोल व सीएनजी, 6 केवल सीएनजी और 4,279 डीजल टैक्सियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों की टैक्सियां भी इस नियम से लाभ उठा सकेंगी, जिससे टैक्सी बाजार में सुगमता आएगी।  

यूपी बीजेपी का बड़ा दांव: नए अध्यक्ष के सहारे 2024 की भरपाई, अखिलेश यादव की रणनीति पर सीधा वार

लखनऊ   दो साल के इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश को जल्द ही नया बीजेपी अध्यक्ष मिलने वाला है। शनिवार यानी आज चुनाव का ऐलान और नामांकन की प्रक्रिया हो सकती है। वहीं रविवार को नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा की संभावना है। इस बीच बड़े नेताओं के लखनऊ पहुंचने का सिलसिला शूरू हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बड़े कार्यक्रम और धूमधाम के साथ नए अध्यक्ष का ऐलान हो सकता है। हालांकि यूपी बीजेपी की कमान किसे मिलने वाली है इसपर सस्पेंस अभी खत्म नहीं हुआ है। जमीनी रिपोर्ट्स की मानें तो बीजेपी इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए ऐसे नेता को पार्टी की कमान दे सकती है जो कि अखिलेश यादव के पीडीए फार्मुले का तोड़ बन जाए। ऐसे में संभावना किसी ओबीसी नेता को यह बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। सूत्रों की मानें तो ओबीसी और ब्राह्मण समुदाय के नेता इस रेस में हैं। बताया जा रहा है कि ओबीसी समाज से आने वाले केंद्यीर राज्य मंत्री पंकज चौधरी के नामांकन का पूरा प्लान है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री धर्मपाल लोधी और बीएल वर्मा के नाम पर भी चर्चा की गई है। कयास बहुत लगाए जाते हैं पर बीजेपी ऐसी पार्टी है जो कि हर फैसले में लोगों को चौंका देती है। ऐसे में यूपी में बीजेपी की दशा और दिशा तय करने की अहम जिम्मेदारी किसे दी जाएगी इसपर स्पष्टता से कुछ नहीं कहा जा सकता। बीजेपी निकालेगी एसपी के पीडीए की काट? 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कुर्मी चेहरों को ज्यादा तवज्जो दी थी। इस वजह से बीजेपी को कुर्मी वोटों को नुकसान उठाना पड़ा था। 2022 तक यह वोट बीजेपी के ही साथ था। बीजेपी चाहती है कि यह वोटबैंक फिर से पार्टी के साथ आ जाए। पूर्वांचल के करीब 20 जिलों में कुर्मी वोटों को खूब दबदबा है। इनकी आबादी करीब 9 फीसदी बताई जाती है। यादवों के बाद सबसे ज्यादा कुर्मियों की आबादी है। इसके अलावा बीजेपी अपना दल के दबाव को भी कम करना चाहती है। बीजेपी चाहती है कि वह संदेश दे कि वह सभी वर्गों का खयाल रखती है। इस रेस में धर्मपाल लोधी का नाम भी आगे है। कल्याण सिंह के बाद उत्तर प्रदेश में लोधी समाज से कोई बड़ा चेहरा आगे नहीं आया। जबकि यह समाज बीजेपी के साथ ही खड़ा है। पश्चिम और मध्य यूपी में लोधी समाज का अच्छा दखल है। ऐसे में इसमें भी अश्चर्य नहीं होगा कि बीजेपी को लोध समाज से नया अध्यक्ष मिल जाए। बात निषाद समाज की हो तो बीजेपी की पकड़ इस समाज पर कमजोर है। इस वजह से बीजेपी को गठबंधन का सहारा लेना पड़ता है। इसमें आश्चर्च नहीं होगा अगर बीजेपी इस समाज से अपना अध्यक्ष चुनती है। बिहार चुनाव में निरंजन ज्योति को बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं ब्राह्मण चेहरे की बात करें तो पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी और यूपी बीजेपी महामंत्री गोविंद शुक्ला को संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। हालांकि इसमें कोई शक नहीं है कि 2027 के चुनाव को ध्यान में रखकर ही यूपी बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा।