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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महर्षि अरबिंदो घोष की पुण्यतिथि पर किया नमन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महान योगी एवं दार्शनिक, महर्षि अरबिंदो घोष की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कवि और राष्ट्रवादी, अरबिंदो जी ने नव्य वेदांत दर्शन को प्रतिपादित किया। उन्होंने क्रांतिकारी रणनीति पर केन्द्रित देश भक्ति पत्रिका ‘वन्दे मातरम’ की शुरुआत की। उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।  

निवेश को मिलेगी रफ्तार: FDI बढ़ाने के लिए सीएम योगी का अधिकारियों को कड़ा आदेश

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को प्रदेश में विदेशी निवेश को नई रफ्तार देने के लिए चल रहे प्रयासों की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए साफ कहा कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ निवेश की संभावना नहीं, बल्कि निवेश के भरोसे का राज्य बन गया है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर निवेशक के साथ संवाद लगातार बना रहना चाहिए और किसी भी स्तर पर देरी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि 'स्पीड, स्टेबिलिटी और सपोर्ट' यही नए उत्तर प्रदेश की पहचान होनी चाहिए। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के सितंबर 2025 तक की अवधि में उत्तर प्रदेश को 683 मिलियन अमेरिकी डॉलर का विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है और राज्य का कुल संचयी विदेशी निवेश अक्टूबर 2019 से अब 2,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि चालू अवधि में प्रदेश को 5,963 करोड़ रुपए का विदेशी निवेश प्रवाह मिला है, जो पिछले वर्षों की तुलना में तेज वृद्धि को दर्शाता है। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि एफडीआई-एफसीआई-फॉर्च्यून 500 नीति-2023 के तहत अब तक 11 निवेश आवेदकों ने 13,610 करोड़ रुपए के प्रस्ताव दिए हैं। इसके अलावा 22 आवेदनों के माध्यम से 17,810 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और 56 हजार करोड़ रुपए के निवेश से जुड़े 29 आवेदन पाइपलाइन में हैं। यह भी बताया गया कि जापान, अमेरिका, बेल्जियम, यूनाइटेड किंगडम, पोलैंड और सिंगापुर उत्तर प्रदेश के प्रमुख निवेश साझेदार बने हुए हैं। सीएम को अवगत कराया गया कि जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर और खाड़ी देशों के लिए बनाए गए विदेशी देश डेस्क लगातार सक्रिय हैं। दूतावासों, उच्चायोगों और व्यापार संघों से निरंतर संवाद चल रहा है। निवेशकों के साथ 100 से अधिक वन-टू-वन बैठकें हो चुकी हैं। जापान व्यापार संगठन और सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य मंडल के साथ होने वाले समझौते भी निवेश के ठोस अवसरों में बदले जा रहे हैं। खाड़ी सहयोग परिषद सेक्टर डेस्क की समीक्षा में बताया गया कि दिल्ली, नोएडा, मुंबई, लखनऊ और कानपुर में अब तक 6 गोलमेज बैठकें हो चुकी हैं, जिनसे 83 कंपनियों के साथ सीधा संवाद बना और करीब 5,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव सामने आए। सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और विनिर्माण क्षेत्र में सबसे अधिक रुचि दिखी, जबकि बैंकिंग, वित्त, बीमा, फार्मा, लाइफ साइंस, मीडिया और मनोरंजन क्षेत्रों को उच्च संभावनायुक्त बताया गया। मुख्यमंत्री ने ललितपुर फार्मा पार्क को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए कि इससे जुड़े अवसंरचना कार्यों में और तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि कई बड़ी दवा कंपनियों ने यहां निवेश में रुचि दिखाई है, ऐसे में उनसे लगातार संवाद बनाए रखा जाए और भूमि, बिजली, पानी जैसी सुविधाएं समय पर सुनिश्चित हों। जापान डेस्क की समीक्षा में बताया गया कि डेंसो के ब्राउनफील्ड विस्तार परियोजना पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और दस्तावेजी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। कांसाई फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री एसोसिएशन की 125 जापानी कंपनियों के साथ फॉलोअप चल रहा है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन उत्कृष्टता केंद्र की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। टोयोटा समूह, सुमितोमो और मारुबेनी से निवेश को लेकर लगातार बातचीत जारी है। जापान डेस्क के अंतर्गत कुल 20,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। ताइवान डेस्क को लेकर मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि यहां प्रयास और तेज किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि ताइवान के निवेशकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा जाए, केवल रोड शो तक सीमित न रहा जाए। बैठक में बताया गया कि 40 से अधिक कंपनियां चिन्हित की गई हैं और लगभग 100 करोड़ रुपए के निवेश की पाइपलाइन तैयार है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां एचसीएल-फॉक्सकॉन का 3,700 करोड़ रुपए का निवेश मजबूत आधार बनेगा। कानपुर को तकनीकी वस्त्र और स्पोर्ट्सवेयर केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी सामने रखी गई। दक्षिण कोरिया डेस्क की समीक्षा में बताया गया कि सैमसंग, एलजी, केएच वेटेक और ड्रीमटेक जैसी कंपनियों के साथ निवेश को लेकर बातचीत आगे बढ़ चुकी है। एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स का गौतमबुद्ध नगर में करीब 850 करोड़ रुपए का विस्तार प्रस्तावित है, जबकि लोट्टे समूह का लगभग 400 करोड़ रुपए का निवेश प्रक्रियाधीन है। मुख्यमंत्री ने कोरियाई कंपनियों के लिए भी संवाद और सुविधाकरण को और मजबूत करने के निर्देश दिए। सिंगापुर डेस्क के अंतर्गत टेमासेक, सरकारी निवेश कोष, पीएसए, डीबीएस, कैपिटललैंड-असेंडास, केपेल और सेम्बकॉर्प जैसे निवेशक यूपी में लगातार रुचि दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सभी विदेशी डेस्क द्वारा नियमित अंतराल पर राउंड टेबल बैठकें होती रहनी चाहिए। उन्होंने इन्वेस्ट यूपी की टीम से कहा कि हर निवेशक के साथ एकल संपर्क बिंदु तय हो, ताकि उसे प्रणाली में भटकना न पड़े। मुख्यमंत्री ने उद्योगों को गति देने के लिए ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि निवेशक को पहले दिन से तैयार अवसंरचना मिलेगी, तो वह तेजी से काम शुरू कर सकेगा और यही मॉडल उत्तर प्रदेश को अन्य राज्यों से आगे ले जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां कंपनियों के कॉरपोरेट और मुख्यालय खोलने के लिए उन्हें प्रेरित किया जाए। मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण को लेकर यह भी निर्देश दिए कि वहां आवश्यक मानव संसाधन की कमी न रहे।

लुधियाना में जल्द शुरू होगी नई सुविधा, आम जनता को होगा सीधा फायदा

लुधियाना  लुधियाना जालंधर नेशनल हाईवे पर स्थित बस्ती जोधेवाल के नजदीक कैलाश नगर चौक और जालंधर बायपास नजदीक जसिया चौक में नेशनल हाईवे पर 23 करोड़ की लागत से दो अंडरपास बनाए जाएंगे जिस बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा लुधियाना वासियो की पिछले लंबे समय से मांग थी कि कैलाश नगर चौक और जसिया चौक पर लोगों की सुविधा के लिए अंडरपास बनाए जाएं जिसके चलते उन्होंने इस बारे में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से बातचीत की गई और उन्होंने कैलाश नगर चौक और जसिया चौक में अंडरपास बनाने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी को निर्देश जारी किए गए हैं।  केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने बताया कि यह अंडरपास 15/15 मीटर के बनाए जाएंगे और जो पहले 7 मीटर की सर्विस लाइन थी उसे भी चौड़ा करके 11 मीटर तक बनाया जाएगा जिससे लोगों को नेशनल हाईवे पार करने में अब बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि लुधियाना के लोगों ने उनका बड़ा मान सम्मान दिया गया है जिसके चलते वह हमेशा लुधियाना वासियो की समस्या को दूर करने का प्रयास करते रहते हैं और आगे भी हमेशा रात दिन लुधियाना के लोगों की सेवा करते रहेंगे। बिट्टू ने बताया कि ऐसे ही जसिया चौक में 15-15 फुट के अंडरपास बनाए जाएंगे और यह अंडरपास के काम 1 साल के अंदर अंदर पूरे हो जाएंगे जिससे जनता को आने वाले समय में भारी राहत मिलेगी। लाडोवाल चौक में भी अंडरपास बनाए जाने की लोगों ने की मांग विधानसभा हलका गिल के अधीन आते नेशनल हाईवे पर स्थित कस्बा लाडोवाल के इलाका निवासियों द्वारा भी केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से मांग की गई है कि इस चौक में भी लोगों की सुविधा के लिए अंडरपास बनाया जाए ताकि इस चौक में प्रतिदिन हो रहे हादसों से लोगों का बचाव हो सके इलाके के लोगों द्वारा पिछले कई सालों से जिला प्रशासन से इस समस्या को दूर करने की मांग की जा रही है परंतु आज तक किसी भी अधिकारी और राजनीतिक नेता ने इस समस्या को दूर करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है जिसके चलते इलाके के लोगों द्वारा केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू से इस समस्या को दूर करने की अपील की गई है। 

मुख्य सचिव जैन की अध्यक्षता में हुई पी.एम सेतु संचालन समिति की बैठक

हब चयन में सभी संभागीय मुख्यालयों को शामिल करने के निर्देश भोपाल  सभी संभागीय मुख्यालयों को शामिल करते हुए प्रदेश की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं को आधुनिक, उद्योग उन्मुख और परिणाम आधारित संस्थानों के रूप में परिवर्तित करने के लिए 10 हब चिंहित कर प्रस्ताव तैयार किया जाए। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने शुक्रवार को मंत्रालय में पी.एम सेतु के तहत गठित राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक में यह निर्देश दिए हैं। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग द्वारा औद्योगिक नीति एवं निवेश और वित्त विभाग से समन्वय कर हब चिंहित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आई.टी.आई (पी.एम सेतु) के तहत बैठक में प्रदेश की समस्त औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं के आधुनिकीकरण प्रस्ताव पर चर्चा हुई। तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनीष सिंह द्वारा केंद्र सरकार के मापदंड अनुसार प्रदेश के लिए हब क्लस्टर और आई.टी.आई स्पोक माडॅल पर प्रस्तुत किए गए प्रस्ताव पर समिति के सदस्यों के बीच विचार-विमर्श हुआ। मुख्य सचिव श्री जैन ने प्रदेश के आई.टी.आई संस्थानों के विशेषज्ञों को भी समिति में शामिल करने के लिए कहा है। मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि हब का प्रस्ताव तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखा जाए कि कोई भी आकांक्षी क्षेत्र नहीं छूटे। बैठक में संस्थान के ढांचे, प्रत्येक आई.टी.आई में निवेश तथा क्लस्टर, योजना-कार्यान्वयन एजेंसी के क्रियाकलापों और राज्य स्तरीय समिति के दायित्यों पर भी चर्चा हुई। बैठक में वित्त, उद्योग नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, जनजातीय कार्य, अनुसूचित जाति कल्याण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय विकास एवं आवास एवं श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही क्षेत्रीय निदेशक, क्षेत्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता निदेशालय, भोपाल शामिल हुए।  

मंत्री राजपूत ने लॉन्च किए तीन हाई-टेक ऐप, पारदर्शिता की बड़ी पहल

पारदर्शिता की बड़ी पहल, गोदामों के निरीक्षण और स्टॉक की डिजिटल ट्रैकिंग भोपाल मध्यप्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने शुक्रवार को ग्वालियर से अनाज गोदामों की निगरानी को आधुनिक, सटीक और पूर्णतः पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए तीन महत्वपूर्ण मोबाइल ऐप- निरीक्षण ऐप, नमी मापक ऐप और फ्यूमिगेशन ऐप लॉन्च किये। इन ऐप्स के माध्यम से खाद्यान्न भंडारण प्रणाली में तकनीक आधारित मॉनिटरिंग लागू होगी। इससे गड़बड़ियों पर स्वतः अंकुश लगेगा और नागरिकों को बेहतर गुणवत्ता का अनाज उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। मंत्री श्री राजपूत ने कहा है कि पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य है, खाद्यान्न की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए गोदाम प्रबंधन में शत-प्रतिशत पारदर्शिता लाई जाए। अब निरीक्षण से नमी मापन और फ्यूमिगेशन तक की डिजिटल ट्रैकिंग होगी। इससे गड़बड़ी पर रोक लगेगी और जनता को बेहतर गुणवत्ता का खाद्यान्न उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित होगा। इन ऐप्स से होगी मॉनिटरिंग निरीक्षण ऐप: मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि इस ऐप से रियल-टाइम निगरानी होगी। यह ऐप गोदामों के भौतिक निरीक्षण को पूरी तरह रियल-टाइम और लोकेशन-बेस्ड बना देगा। निरीक्षण का रोस्टर भोपाल मुख्यालय से तैयार होगा। इसके अलावा एक ब्रांच के गोदाम का निरीक्षण दूसरी ब्रांच के प्रबंधक द्वारा किया जाएगा, जिससे क्रॉस वेरिफिकेशन सुनिश्चित होगा। अधिकारी को गोदाम पर फिजिकली मौजूद रहने पर ही निरीक्षण भरने और फोटो अपलोड करने की अनुमति होगी। यदि निरीक्षक 100 मीटर से अधिक दूरी पर है, तो ऐप निरीक्षण स्वीकार ही नहीं करेगा। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि सभी जानकारी रियल-टाइम पोर्टल पर दर्ज होगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। नमी मापक ऐप: खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि डिजिटल मॉइस्चर मीटर से हर माह सटीक रिपोर्टिंग होगी। अब तक नमी मापन की प्रक्रिया मैनुअल थी, लेकिन नए ऐप से यह पूर्णतः डिजिटल और सटीक हो जाएगी। डिजिटल मॉइस्चर मीटर से स्टैक की ऊपरी, मध्य और निचली परत की नमी मापी जाएगी। मापन के बाद ऐप से निकली डिजिटल पर्ची का फोटो अपलोड करना अनिवार्य होगा। हर गोदाम की नमी रिपोर्ट प्रतिमाह रियल-टाइम उपलब्ध होगी। मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि जिला प्रबंधक अब सीधे भारतीय खाद्य निगम को नमी के डेटा भेज सकेंगे। यह सुधार भंडारित अनाज की गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। फ्यूमिगेशन ऐप: मंत्रीश्री राजपूत ने बताया कि दवा छिड़काव की पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल रिकॉर्ड में रहेगी। फ्यूमिगेशन प्रक्रिया अब कागज रहित होकर डिजिटल रूप से रिकॉर्ड होगी। दवाओं का छिड़काव ब्रांच मैनेजर द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि की मौजूदगी में होगा। उन्होंने बताया कि खाद्यान्न को कवर करने और कवर हटाने तक की पूरी फोटो प्रक्रिया ऐप में अपलोड करनी होगी। दवाओं का छिड़काव सफल रहा या नहीं, यह जानकारी भी ऐप में दर्ज करनी होगी। जब तक फ्यूमिगेशन सफल न हो जाए, तब तक स्टॉक इश्यू नहीं हो सकेगा। यह कदम अनाज की सुरक्षा, गुणवत्ता और उपभोक्ता स्वास्थ्य के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने संबंधी ली बैठक

कृषि क्षेत्र में गरीब वर्ग और किसानों को लाभ पहुंचाने, युवाओं को रोजगार और स्वावलंबन के अवसर उपलब्ध कराने की पर्याप्त संभावना नई पीढ़ी के कृषि आधारित रोजगार जैसे ड्रोन सर्विस, एफपीओ प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण, हाइड्रोपोनिक्स आदि के अवसरों का सृजन किया जाए भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि का क्षेत्र गरीब वर्ग और किसानों को लाभ पहुंचाने वाला मुख्य क्षेत्र है। कृषि से संबद्ध गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को रोजगार और स्वावलंबन के भी कई अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इसी उद्देश्य से प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में नवाचार की पर्याप्त संभावना है। प्रदेश की विविधता से परिपूर्ण भौगोलिक स्थिति को देखते हुए खेती से किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों को गति दी जाए। धान की खेती को प्राथमिकता देने के साथ गेहूं, चना, दलहन, तिलहन, हॉर्टीकल्चर आदि के क्षेत्र में भी अन्य राज्यों के साथ ही अन्य देशों में हो रहे नवाचारों से अवगत कराने के लिए कृषकों को विविध देशों का भ्रमण कराया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश शुक्रवार को वर्ष 2026 के कृषि वर्ष मनाने के संबंध में विधानसभा के समिति के कक्ष में आयोजित बैठक में दिए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 को समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश की टैगलाइन के साथ कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास और रोजगार सृजन पर विशेष फोकस रहेगा। किसानों की आय दोगुनी करने से आगे बढ़कर कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक प्रेरित, रोजगार सृजन मॉडल में परिवर्तित करना कृषि वर्ष का मूल उद्देश्य है। अत: आत्मनिर्भर किसान, उन्नत कृषि और कृषकों के हित में बाजार से संबंधों के आधार पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के माध्यम से समृद्ध प्रदेश के निर्माण के विजन से गतिविधियां संचालित की जाएं। कृषि उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य एवं वानिकी सहित सभी संबद्ध क्षेत्रों को एकीकृत करते हुए जिला आधारित क्लस्टर विकास के लिए गतिविधियां संचालित की जाएं। उच्च उत्पादकता, प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाओं, प्रसंस्करण एवं निर्यात उन्मुख कृषि के माध्यम से किसान की शुद्ध आय में वृद्धि के लिए प्रयास हों और ग्रामीण युवाओं के लिए नई पीढ़ी के कृषि आधारित रोजगार जैसे ड्रोन सर्विस, एफपीओ प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण, हाइड्रोपोनिक्स आदि के अवसरों का सृजन किया जाए। किसानों की शुद्ध आय में तेजी और स्थायी वृद्धि करने, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध करने, किसानों के लिए उनके उत्पादों की बाजार में पहुंच सुनिश्चित करने और उनकी खाद्य प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से गतिविधियां संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में कृषि वर्ष का मासिक कैलेंडर तैयार किया गया, जिसमें किसानों को साथ लेकर राज्य से जिला स्तर तक महोत्सव, मेले आदि की रूपरेखा बनी। गैर सरकारी और उन्नत किसानों को भी इन प्रयासों से जोड़ा जाएगा।  बैठक में बताया गया कि कृषि वर्ष 2026 में प्राकृतिक खेती को हर गांव तक पहुंचाने, आर्गेनिक तथा अन्य कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार मूल्य उपलब्ध कराने, कृषि और कृषि मंडियों के आधुनिकीकरण, बेहतर मृदा संरक्षण, उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण पशुपालन और डेयरी तथा मछली पालन में नवाचार पर विशेष फोकस रहेगा। वर्ष 2026 में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में की जाने वाली गतिविधियों और वातावरण निर्माण और किसानों की जागरूकता के लिए चलाए जाने वाले अभियानों की माहवार जानकारी दी गई। कृषि वर्ष में होने वाली गतिविधियों के अंतर्गत राज्य स्तरीय एग्रो विजन कार्यक्रम और प्रत्येक जिला और विकासखंड स्तर पर मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, आधुनिक कृषि तकनीक, प्राकृतिक खेती और उर्वरकों के संतुलित उपयोग के संबंध में गतिविधियां संचालित की जाएंगी। कृषक हितैषी योजनाओं की जानकारी के लिए भी जिला मुख्यालय पर गतिविधियां होंगी। साथ ही मोटे अनाज, गोपालन और दुग्ध उत्पादन, मखाना, मशरूम, मधुमक्खी पालन, धान, आम, सोयाबीन, कृषि उपज निर्यात, कपास, मिर्च, मत्स्य पालन, कृषक उत्पादक संगठनों, फसल अवशेष (पराली) प्रबंधन, उद्यानिकी फसलों आदि पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रमुख बिंदु     समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश की टैगलाइन के साथ कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा।     कृषि से संबद्ध गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को रोजगार और स्वावलंबन के भी कई अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।     कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास और रोजगार सृजन पर विशेष फोकस रहेगा।     प्रदेश की विविधता से परिपूर्ण भौगोलिक स्थिति को देखते हुए खेती से किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों को गति दी जाए।      नवाचारों से अवगत कराने के लिए कृषकों को विविध देशों का भ्रमण कराया जाए।      किसानों की आय दोगुनी करने से आगे बढ़कर कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक      प्रेरित , रोजगार सृजन मॉडल में परिवर्तित करना कृषि वर्ष का मूल उद्देश्य है।     कृषि वर्ष का मासिक कैलेंडर तैयार किया गया, जिसमें किसानों को साथ लेकर राज्य से जिला     स्तर तक महोत्सव, मेले आदि की रूपरेखा बनी।      कृषि वर्ष 2026 में प्राकृतिक खेती को हर गांव तक पहुंचाने के होंगे प्रयास।  

कोर्ट में AI का इस्तेमाल अभी नीतिगत दायरे से बाहर, कानून मंत्री का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा में बताया कि न्यायपालिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को लेकर अभी तक कोई औपचारिक नीति या दिशानिर्देश तैयार नहीं किए गए हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने के लिए एक एआई कमेटी बनाई है, लेकिन सभी एआई-आधारित समाधान अभी नियंत्रित पायलट चरण में ही हैं। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि न्यायपालिका फिलहाल केवल उन्हीं क्षेत्रों में एआई का उपयोग कर रही है, जिन्हें ई-कोर्ट फेज-3 की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा, "न्यायपालिका एआई को अपनाने में कई बड़ी चुनौतियों को ध्यान में रख रही है, जैसे एल्गोरिद्म में पक्षपात का खतरा, भाषा और अनुवाद संबंधी समस्याएं, डेटा गोपनीयता और सुरक्षा और एआई द्वारा तैयार सामग्री की मैनुअल जांच की आवश्यकता।" मेघवाल ने बताया कि ई-कमेटी की अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में छह हाई कोर्ट जजों और तकनीकी विशेषज्ञों वाली एक सब-कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी सुरक्षित कनेक्टिविटी, डेटा संरक्षण, प्रमाणीकरण व्यवस्था और ई-कोर्ट परियोजना के तहत मौजूद डिजिटल ढांचे की मजबूती का आकलन कर रही है। कानून मंत्री ने बताया कि न्यायिक अनुसंधान में मदद के लिए कानूनी अनुसंधान विश्लेषण सहायक (एलईजीआरएए) नाम का एआई टूल विकसित किया गया है। यह जजों को कानूनी दस्तावेजों और निर्णयों के विश्लेषण में सहायता करता है। इसके अलावा डिजिटल कोर्ट 2.1 नाम का एक और एआई आधारित प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। यह जजों और न्यायिक अधिकारियों के लिए केस से जुड़ी सभी जानकारी एक ही विंडो में उपलब्ध कराता है। इस सिस्टम में एएसआर-श्रुति (वॉयस-टू-टेक्स्ट) और पाणिनी (अनुवाद) जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे आदेश और फैसलों की डिक्टेशन आसान होती है। उन्होंने बताया कि अब तक पायलट फेज में इन एआई समाधानों में किसी तरह की सिस्टमैटिक बायस या गलत सामग्री जैसी समस्या सामने नहीं आई है। मेघवाल ने बताया कि हाल के दिनों में अदालतों में मॉर्फ्ड या फर्जी डिजिटल सामग्री जमा कराए जाने के मामलों में वृद्धि हुई है। न्यायपालिका ने इसे गंभीर खतरे के रूप में पहचाना है, क्योंकि यह न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया बल्कि सार्वजनिक धारणा को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने जानकारी दी कि ऐसे मामलों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई होती है, जैसे पहचान की चोरी (66सी), कंप्यूटर संसाधन का उपयोग कर धोखाधड़ी (66डी), अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री (67, 67ए, 67बी) का प्रकाशन या प्रसारण। इसी तरह भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराएं भी इन अपराधों पर लागू होती हैं।

मुख्यमंत्री से अखिल विश्व गायत्री परिवार के सदस्यों ने सौजन्य मुलाकात की

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विगत दिवस राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रतिनिधिमण्डल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमण्डल ने मुख्यमंत्री साय को आगामी 10 दिसंबर से 13 दिसंबर तक जशपुर जिले के अंतर्गत नगर पंचायत बगीचा में आयोजित होने वाले 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में शामिल होने हेतु आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने आमंत्रण के लिए गायत्री परिवार के सदस्यों का धन्यवाद देते हुए आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर भानु यादव, मुक्ता देवी, रीना बरला, मिकलेश यादव एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।

हौसले की उड़ान: आर्थिक तंगी में पली बेटी ने बढ़ाया प्रदेश का मान, बास्केटबॉल में रजत पदक

अंबाला  अंबाला की एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा मुकाम हासिल किया है। जूनियर इंटरनेशनल बास्केटबॉल चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर अंजली ने अंबाला ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा और देश का नाम रोशन किया है। घर में जश्न का माहौल है। आज अंजली अपने परिवार के साथ कैबिनेट मंत्री अनिल विज से मिली, जहां मंत्री विज ने उसे आशीर्वाद देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। अंजली की कहानी संघर्ष और हौसले की मिसाल है। उनके पिता चाय की दुकान पर काम करते हैं, लेकिन आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अंजली ने खेल को कभी नहीं छोड़ा। जुनून और मेहनत के दम पर उन्होंने गलतियों से सीखते हुए आगे बढ़ना जारी रखा। उनकी प्रतिभा को पहचान मिली जब यूपी के अलीगढ़ में लगे कैंप के दौरान एक महीने की ट्रेनिंग के बाद उनका चयन अंतरराष्ट्रीय टीम में हुआ।   इसके बाद अंजली थाईलैंड गई, जहां 9 देशों की टीमों ने हिस्सा लिया। फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम का सामना उज़्बेकिस्तान से हुआ, जिसमें भारत को दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा और अंजली को रजत पदक मिला। अंजली का कहना है कि यह तो बस शुरुआत है और भविष्य में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना उनका लक्ष्य है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अघोर गुरुपीठ में की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए की प्रार्थना

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रायगढ़ जिले के ग्राम बनोरा स्थित अघोर गुरुपीठ पहुंचे, जहाँ उन्होंने अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम जी की प्रतिमा के समक्ष प्रदेश की सुख, समृद्धि और खुशहाली की मंगल कामना की। उन्होंने गुरुपीठ में विधिवत पूजा-अर्चना कर छत्तीसगढ़ की शांति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री साय ने अघोरेश्वर अवधूत जी के कृपापात्र शिष्य प्रियदर्शी भगवान राम जी से आशीर्वाद ग्रहण किया और कहा कि उनका स्नेह, मार्गदर्शन एवं आध्यात्मिक स्पर्श सदैव ऊर्जा, प्रेरणा और सकारात्मकता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक मार्गदर्शन ही समाज को सही दिशा देता है और जनसेवा के कार्यों को अधिक संवेदनशीलता और समर्पण के साथ आगे बढ़ाने में सहायक होता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक सौहार्द हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। इन्हीं मूल्यों के आधार पर राज्य सरकार जनकल्याण, विकास और सुशासन के संकल्प को निरंतर आगे बढ़ा रही है। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं क्षेत्रवासी उपस्थित थे।