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दूल्हे के साले ने कार से बारातियों को रौंदा; डीजे को लेकर हुए विवाद ने ली 3 जानें

 कासगंज यूपी के कासगंज में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई आई है, जहां एक शादी समारोह खुशियों की जगह मातम में बदल गया. डीजे बजाने को लेकर हुई मामूली कहासुनी इतनी बढ़ गई कि दूल्हे के साले ने कार से पांच लोगों को रौंद दिया जिसमें तीन लोगों की जान चली गई. जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. यह पूरी घटना बीती रात गंजडुंडवारा कोतवाली क्षेत्र के जेडएस पैलेस गेस्ट हाउस की है.  दरअसल, कासगंज में सपा नेता के बेटे की शादी समारोह चल रहा था. इसी दौरान डीजे बजाने को लेकर दूल्हा पक्ष और दुल्हन पक्ष के बीच कहासुनी हो गई. पहले तो दोनों पक्षों में मामूली बहस हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला खूनी संघर्ष में बदल गया.  आरोप है कि दुल्हन के चचेरे भाई के साथ दूल्हे पक्ष के लोगों ने मारपीट कर दी, जिससे वह युवक गुस्से से आग-बबूला हो उठा. इसी गुस्से में युवक ने अपनी कार उठाई और दूल्हे पक्ष के ताऊ, चाचा और मौसा को तेज रफ्तार कार से रौंद डाला. इस दर्दनाक हादसे में तीनों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.  घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई. शादी का माहौल चीख-पुकार और मातम में बदल गया. एक साथ तीन लोगों की मौत से पूरे परिवार में कोहराम मच गया. सूचना मिलते ही गंजडुंडवारा पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में किया.  पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. आरोपी युवक की तलाश की जा रही है. मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि कोई और अप्रिय घटना न हो. इस घटना ने परिवार को ही नहीं पूरे इलाके को झकझोर रख दिया है.  मृतक के एक रिश्तेदार बलवीर ने कहा- हमारे घर की शादी में खुशियां थीं, लेकिन एक झगड़े ने सब कुछ उजाड़ दिया. हमारे तीन लोग एक साथ चले गए. अब क्या करें समझ नहीं आ रहा. वहीं, संदीप वर्मा (क्षेत्राधिकारी पटियाली) ने बताया कि डीजे को लेकर विवाद के बाद कार से कुचलने की सूचना मिली है. तीन लोगों की मौत हुई है, दो घायल हैं. आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं.

शहपुरा में कार्रवाई: अवैध रूप से रखी गई 384 बोरी धान ज़ब्त

शहपुरा में अवैध रूप से भण्डारित 384 बोरी धान जब्त. शहपुरा में कार्रवाई: अवैध रूप से रखी गई 384 बोरी धान ज़ब्त अवैध भंडारण का खुलासा: शहपुरा में 384 बोरी धान जब्त की गई जबलपुर   धान उपार्जन में फर्जीवाड़ा रोकने की जा रही कार्यवाही के तहत आज गुरुवार को शहपुरा मंडी प्रांगण के पीछे स्थित सचिन जैन एवं जानी गुमास्ता की दुकान से अवैध रूप से भंडारित 384 बोरी धान जब्त की गई है। जब्त की गई धान को खरीदी केंद्र ले जाने मिनी ट्रक में लोड किया जा रहा था। धान के अवैध भंडारण को कृषि विभाग की टीम द्वारा पकड़ा गया। कृषि अधिकारियों द्वारा तुरंत इसकी सूचना एसडीएम शहपुरा को दी गई। एसडीएम शहपुरा मदनसिंह रघुवंशी ने कृषि उपज मंडी सचिव के साथ मौके पर पहुंचकर धान की जब्ती की कार्यवाही की।  एसडीएम शहपुरा ने बताया कि धान के अवैध भंडारण में लिप्त दोनों व्यापारियों को बिना लाइसेंस के अनाज की खरीदी करते और विक्रय करते भी पाया गया है। उन्होंने बताया कि कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार शहपुरा तहसील में किसानों के नाम पर समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन व्यवस्था का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश करने वाले व्यापारियों या बिचौलियों पर पैनी नजर रखी जा रही है और कार्यवाही के लिये अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। एसडीएम शहपुरा के अनुसार उपार्जन व्यवस्था का अनुचित लाभ उठाने के लिये धान का अवैध संग्रह करने वाले व्यापारियों और बिचौलियों के विरुद्ध कार्यवाही लगातार जारी और खरीदी केंद्रों पर गलत नाम उपज का विक्रय करने पर आपराधिक प्रकरण भी दर्ज कराए जाएंगे।

ग्वालियर–मुरैना के लोग पासपोर्ट के लिए सबसे ज्यादा सक्रिय, भिंड पिछड़ा

भिंड भिंड शहर के हनुमान बजरिया स्थित बड़े डाकघर परिसर में 19 अप्रैल 2025 को शुरू किए गए पासपोर्ट सेवा कार्यालय ने सात महीनों में अपनी पहचान मजबूत कर ली है। हालांकि पासपोर्ट बनवाने में भिंड जिले के लोगों की संख्या उम्मीद से कम है, लेकिन ग्वालियर और मुरैना जिले के लोगों का रुझान अप्रत्याशित रूप से अधिक देखा जा रहा है। सात महीने में 10 हजार पासपोर्ट जारी कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि सात महीनों में करीब 15 हजार आवेदन आए, जिनमें से 10 हजार पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं। रोजाना औसतन 30 से 40 लोग कार्यालय पहुंचकर पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं।   ग्वालियर और मुरैना के लोग क्यों आ रहे अधिक? पासपोर्ट कार्यालय के इंचार्ज अभिषेक छत्रसाल के अनुसार ग्वालियर में पासपोर्ट सेवा केंद्र पहले से संचालित है, लेकिन भिंड कार्यालय के शुरू होने के बाद यहां दस्तावेजी जांच और अन्य प्रक्रिया आसान होने से ग्वालियर-मुरैना क्षेत्र के लोग भी यहां आने लगे हैं। उन्होंने बताया कि कई आवेदक ग्वालियर केंद्र पर लंबी वेटिंग से बचने के लिए भिंड कार्यालय को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके अलावा, मुरैना के लोगों के लिए भिंड की दूरी अपेक्षाकृत कम होने से वे यहां बड़ी संख्या में आ रहे हैं। भिंड जिले में उत्साह कम, फिर भी बदल रहा ट्रेंड शुरू में उम्मीद थी कि भिंड के हजारों युवा पासपोर्ट बनवाने के लिए भारी संख्या में पहुंचेंगे। लेकिन शुरुआती महीनों में आवेदन संख्या अपेक्षाकृत कम रही। इसका मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पासपोर्ट प्रक्रिया को लेकर जागरूकता की कमी बताई जा रही है। हालांकि पिछले दो महीनों में भिंड जिले के लोगों में भी पासपोर्ट बनवाने को लेकर रुझान बढ़ा है। स्थानीय युवाओं ने बताया कि विदेश में रोजगार और स्कॉलरशिप अवसरों की जानकारी मिलने से अब अधिक लोग पासपोर्ट बनवाने के लिए जागरूक हो रहे हैं। आवेदन प्रक्रिया में सुधार से बढ़ रही संख्या पासपोर्ट कार्यालय के इंचार्ज ने छत्रसाल के मुताबिक कार्यालय में स्टाफ की संख्या और काउंटर बढ़ाए जाने से आवेदन प्रक्रिया तेज हुई है। अब आवेदकों को वेरिफिकेशन में अधिक समय नहीं लग रहा। पुलिस वेरिफिकेशन को भी डिजिटल मोड से तेज किया गया है। इसी वजह से आवेदन स्वीकृति और पासपोर्ट डिलीवरी दोनों की गति बढ़ी है। पासपोर्ट बनवाने के मुख्य कारण ग्वालियर-मुरैना से आ रहे अधिकांश आवेदन विदेश रोजगार, स्टडी वीजा और परिवार पुनर्मिलन (एफआर) श्रेणी के हैं। वहीं भिंड जिले से आने वाले आवेदकों में ज्यादातर टूरिस्ट वीजा, स्टूडेंट, और जाब श्रेणी के लोग शामिल हैं। 

छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों की हाजिरी अब आधार से जुड़ेगी, 1 जनवरी 2026 से लागू होगा नया नियम

रायपुर मंत्रालय में आधार-आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के सभी सरकारी दफ्तरों में इसे लागू करने जा रही है। इसी संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को आदेश जारी किया है, जिसमें आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम (AEBAS) को 1 जनवरी 2026 से अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्णय लिया गया है। जारी आदेश के अनुसार सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि 31 दिसंबर 2025 तक सभी शासकीय सेवकों की AEBAS में ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इसके बाद 1 जनवरी 2026 से उपस्थिति केवल AEBAS के माध्यम से ही दर्ज की जाएगी। साथ ही कार्यालय में उपस्थिति की नियमित निगरानी करने और कर्मचारियों को समय पर कार्यालय आने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

कलेक्टर की अभिनव पहल :-मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति में विद्यार्थी, परीक्षार्थी और कामकाजी युवाओं की काउंसलिंग करेंगे मानसिक विशेषज्ञ.

कलेक्टर की अभिनव पहल :-मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति में विद्यार्थी, परीक्षार्थी और कामकाजी युवाओं की काउंसलिंग करेंगे मानसिक विशेषज्ञ. जबलपुर   परीक्षाओं या कामकाज को लेकर विद्यार्थियों, किशोरों और युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव और अवसाद को देखते हुये कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की पहल पर जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा "मनसा" नाम से काउंसलिग का अनूठा कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों, परीक्षार्थियों, कामकाजी युवाओं एवं महिलायें मानसिक तनाव, चिंता, भावनात्मक असंतुलन और निर्णय लेने में कठिनाई जैसी स्थितियों में मनोचिकित्सकों या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से निः शुल्क परामर्श प्राप्त कर सकेंगे। कार्यक्रम के शुरुआती चरण में ऐसे योग्य काउंसलर्स का पैनल तैयार किया जाएगा जो समाज हित में स्वेच्छा से सेवाएं देने के तत्पर हैं। इसके लिये एक लिंक https://forms.gle/zPsaLdjzedenVxWy7 जेनरेट की गई है। इस लिंक पर इच्छुक मनोचिकित्सक या इस क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। उन्हें इस लिंक पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, पता और मोबाइल नम्बर दर्ज करने के साथ-साथ शैक्षणिक योग्यता से सबंधित सर्टिफिकेट एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज भी अपलोड करना होंगे। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जबलपुर जिले के सभी योग्य मनोचिकित्सकों एवं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से मंगलवार 9 दिसम्बर तक अपना रजिस्ट्रेशन कराकर इस महत्वपूर्ण सामाजिक पहल में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

एसआईआर :- 96.19 फीसदी मतदाताओं के गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन का कार्य पूर्ण.

एसआईआर :- 96.19 फीसदी मतदाताओं के गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन का कार्य पूर्ण.  सिहोरा विधानसभा में भी हुआ शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा. जबलपुर   मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) के अंतर्गत जिले में 96.19 प्रतिशत मतदाताओं के गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा किया जा चुका है। इनमें 12.07 फीसदी एएसडीआर श्रेणी के मतदाता तथा ऑनलाइन गणना प्रपत्र भरने वाले मतदाता भी शामिल हैं।  जिले की आठ विधानसभा क्षेत्र में से आज गुरूवार को विधानसभा क्षेत्र सिहोरा ने भी शत प्रतिशत मतदाताओं के गणना प्रत्रकों के डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया है। विधानसभा क्षेत्र पाटन और बरगी में दो दिन पहले शत-प्रतिशत मतदाताओं के गणना प्रपत्रों के डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा किया जा चुका है।  जिला निर्वाचन कार्यालय से प्राप्‍त गुरूवार की शाम 8 बजे तक की रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा क्षेत्र पनागर में 99.60, विधानसभा क्षेत्र जबलपुर उत्‍तर में 94.11, विधानसभा क्षेत्र जबलपुर पश्चिम में 92.68, विधानसभा क्षेत्र जबलपुर पूर्व में 91.87 तथा विधानसभा क्षेत्र जबलपुर केंट में 89.05 फीसदी मतदाताओं के गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन पूर्ण हो चुका है।  जिले में कुल मतदाताओं की संख्‍या 19 लाख 25 हजार 472 है। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार इनमें से एएसडीआर श्रेणी के मतदाताओं को मिलाकर अभी तक 18 लाख 52 हजार 018 मतदाताओं के गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। एएसडीआर की श्रेणी में अभी तक 2 लाख 32 हजार 391 मतदाताओं की संख्‍या दर्ज हुई है। इनमें मृत मतदाताओं की संख्‍या 49 हजार 969, अनुपस्थित मतदाताओं की संख्‍या 55 हजार 603, स्‍थायी रूप से स्‍थानांतरित मतदाताओं की संख्‍या 1 लाख 12 हजार 838 है तथा अन्‍य मतदाताओं की संख्‍या 1 हजार 322 है। मतदाताओं के गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन में 12 हजार 641 मतदाताओं द्वारा भरे गये ऑनलाइन गणना प्रपत्र भी शामिल है। कुल डिजिटाइजड गणना पत्रकों में नो मैपिंग वाले मतदाताओं की संख्‍या 1 लाख 36 हजार 807 है।

राशन पर संकट गहराया: 1.25 लाख हितग्राहियों का ई-केवाईसी अधूरा, खतरे में भोजन की गारंटी

जगदलपुर बस्तर में सरकारी राशन पाने वाले हजारों परिवारों के सामने अब बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अगले महीने से ऐसे हितग्राही, जिन्होंने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराया है, उन्हें राशन नहीं मिलेगा। आंकड़े बताते हैं कि यह संख्या बेहद बड़ी है और इसका सीधा असर आम गरीब परिवारों पर पड़ने वाला है। बस्तर जिले में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के तहत लाखों लोगों को हर महीने सरकारी अनाज मिलता है, लेकिन अब वही सुविधा हजारों परिवारों के हाथ से छिनने की कगार पर है। जिले में कुल 8 लाख 23 हजार 610 हितग्राही राशन कार्ड में दर्ज हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 6 लाख 72 हजार लोगों ने ही अब तक ई-केवाईसी पूरा किया है। बाकी के लगभग 1 लाख 25 हजार लोग अब भी प्रक्रिया से बाहर हैं और चेतावनी साफ है अगर जल्द ई-केवाईसी नहीं हुआ तो अगले महीने से इन्हें एक दाना भी सरकारी अनाज नहीं मिलेगा। खाद्य विभाग के मुताबिक ई-केवाईसी अनिवार्य इसलिए किया जा रहा है ताकि फर्जी लाभार्थियों को हटाया जा सके और वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी अनाज पहुंच सके। लेकिन सवाल ये भी है कि क्या अंदरूनी इलाकों में रहने वाली ग्रामीण आबादी को इस बदलाव की जानकारी समय पर मिल पाई है? विभाग का दावा है कि निर्धारित समयसीमा में शत-प्रतिशत ई-केवाईसी पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत बताती है कि अब भी बड़ी संख्या में ग्रामीण तकनीकी प्रक्रिया और डॉक्यूमेंटेशन के चलते असमंजस में हैं। जिला खाद्य अधिकारी घनश्याम राठौर ने बताया कि विभाग से राशन कार्डधारियों का ई-केवाईसी करने के निर्देश मिले हैं। पांच साल से कम उम्र के सदस्यों को छोड़कर लगभग 1,25,000 सदस्यों का केवाईसी होना बचा है। इन्हें अगले 10 दिनों के भीतर पूरा करने के आदेश दिए गए हैं और सभी को इसके संबंध में सूचित भी कर दिया गया है। उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से वहां सूची प्रदर्शित है। तो सभी कार्डधारियों से भी अपील है कि जिनके परिवार में किसी सदस्य का केवाईसी बचा हो, वे अपने नजदीकी राशन दुकान में उपस्थित होकर अपने आधार कार्ड के साथ पहुंच जाएं और वहां पर अपना केवाईसी करवा लें। अभी जो बचा हुआ है, वह हमारे कार्ड में लगभग 8 लाख सदस्य हैं, तो उसमें से साढ़े 6 लाख के करीब 6,65,000 का केवाईसी हो चुका है और लगभग 1,25,000 का बचा हुआ है। अंतिम तिथि अभी विभाग ने हमें 10 तारीख तक बताई है।

गांव-गांव खिलेगा डेयरी बिज़नेस: हरियाणा सरकार शुरू करने जा रही बड़ी पहल

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार राज्य में पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने की दिशा में नया कदम उठाने जा रही है। इसके तहत प्रदेश के सभी गांवों में दुग्ध उत्पादक सहकारी सोसायटियों का गठन किया जाएगा। सरकार ने विशेष रूप से विधवा महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और अंत्योदय परिवारों को इन सोसायटियों में प्राथमिकता देने की घोषणा की है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सहकारिता विभाग की बजट घोषणाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि नई सोसायटियों को प्रोत्साहन राशि समय पर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग संयुक्त प्रयासों के साथ योजनाओं को लागू करें, ताकि पशुपालकों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। सरकार वीटा बूथों पर दूध आधारित उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए भी नए विकल्प तलाश रही है। बैठक में बताया गया कि कई जिलों में मिल्क कलेक्शन और चिलिंग सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही हैफेड द्वारा सरसों और सूरजमुखी तेल मिल लगाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। 

MP के बाद अब छत्तीसगढ़ में लगेगी राहुल गांधी की पाठशाला, जिलाध्यक्षों को मिलेगा प्रशिक्षण

रायपुर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मध्यप्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ में पाठशाल लगाएंगे। दरअसल, AICC ने छत्तीसगढ़ में 41 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है, जिला अध्यक्षों को ट्रेनिंग देने के लिए पार्टी नेतृत्व सक्रिय हो गया है। ऐसे में मध्य प्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ में भी राहुल गांधी सभी नव नियुक्त जिला अध्यक्षों को ट्रेनिंग देने के लिए आएंगे। छत्तीसगढ़ PCC चीफ दीपक बैज ने बताया कि 10 दिनों तक सभी नए जिला अध्यक्षों को ट्रेनिंग दी जाएगी।इस 10 दिवसीय कार्यक्रम में नए जिला अध्यक्षों को संगठन संचालन, संवाद कौशल, लीडरशिप, बूथ मैनेजमेंट, अनुशासन, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मुद्दों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया जाएगा। कांग्रेस ने जिला अध्यक्षों की ट्रेनिंग के लिए जगह चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, और संभावनाएं हैं कि यह कार्यक्रम बस्तर में आयोजित किया जाएगा। पार्टी चाहती है कि नवनियुक्त जिला अध्यक्ष आगामी महीनों में केंद्र की मोदी सरकार और राज्य सरकार की नीतियों को मजबूती से चुनौती दे सकें और संगठनात्मक ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाएं। सूत्रों के अनुसार ट्रेनिंग अलग- अलग सेशनों में होगी, जिसमें राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेता अपने अनुभव साझा करेंगे। 2028 विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हो, लेकिन कांग्रेस ने अभी से ही तैयारियां तेज कर दी हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि राहुल गांधी छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान मिलने वाली ट्रेनिंग जिला अध्यक्षों को कितना सक्षम बनाती है और इसका असर आने वाले महीनों में संगठन पर कैसे दिखता है। बता दें कि इसके पहले मध्यप्रदेश के पचमढ़ी में कांग्रेस संगठन सृजन प्रशिक्षण शिविर में राहुल गांधी शामिल हुए थे. इस दौरान उन्होंने जिला अध्यक्षों से वन टू वन चर्चा की थी और कांग्रेस कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए टिप्स भी दिए थे। इतना ही नहीं राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों के सुझाव भी सुने थे। पचमढ़ी दौरे पर आए राहुल गांधी ने सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बाघ देखने के लिए नीम घाम में जंगल सफारी का आनंद भी लिया था। दिल्ली में हुई बैठक के बाद अंतिम निर्णय कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान को लेकर 23 अक्टूबर को दिल्ली में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इसमें AICC महासचिव केसी. वेणुगोपाल, सचिन पायलट, भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पहले चरण में भूपेश बघेल और टीएस. सिंहदेव से वन-टू-वन चर्चा हुई थी। दूसरे चरण में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत से बातचीत हुई थी। इन बैठकों के बाद राहुल गांधी की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष नियुक्ति पर अंतिम निर्णय लिया गया है।  

एल्युमिनियम बर्तन से दूरी, सतना में मिडडे मील में लोहे की कड़ाही का इस्तेमाल अनिवार्य

सतना   सतना जिले के IAS अधिकारी व जिला पंचायत सीईओ ने मिड-डे मील लोहे के बर्तन में बनाने का फरमान जारी किया है. इसके पीछे तर्क दिया है कि लोहे की कड़ाही में साग-सब्जी या अन्य सामग्री पकाने से बच्चों में एनीमिया की आशंका कम हो जाएगी. जिले के स्व सहायता समूहों के बीच इस आदेश की चर्चा जोरों पर है. लोहे के बर्तन में खाना पकाने से क्या लाभ हैं आइए जानते हैं. सतना जिला पंचायत सीईओ ने दिया आदेश जिला पंचायत सीईओ मझगवा महिपाल सिंह गुर्जर ने स्व सहायता समूह को खाना पकाने के लिए बर्तन बदलने के निर्देश दिए हैं. वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले बर्तन एलुमिनियम को दरकिनार करने की सलाह दी गई है. मामले के अनुसार मझगवा ब्लॉक में में स्व सहायता समूह की महिलाओं को मिड-डे मील बनाने के बर्तन बदलने के लिए पत्र जारी हुआ है. पत्र में लिखा "ग्राम पंचायतो में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत महिला स्व सहायता समूह मिड-डे मील का संचालन स्कूलों में किया जा रहा है. देखने में आया है कि आपके द्वारा एल्मूनियम की कड़ाही में सब्जी एवं अन्य खाद्य पदार्थ पकाये जाते हैं." WHO ने भी माना- लोहे के बर्तन का लोहा पत्र में उल्लेख किया गया है "विश्व स्वास्थय संगठन (WHO) ने लोहे के बर्तनों के उपयोग को आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया को कम करने की सलाह दी है. अतः आप समस्त को निर्देर्शित किया जाता है कि एल्मूनियम या जर्मन एल्मूनियम की कड़ाही की जगह अनिवार्यतः लोहे की कड़ाही में साग, भाजी अन्य खाद्य पदार्थ बनाना सुनिश्चित करें, जिससे कि आयरन तत्व की आपूर्ति हो सके." शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित रखते हैं लोहे के बर्तन आपको ये समझना जरूरी है कि आयरन इंसान के शरीर के लिए बहुत आवश्यक मिनरल है. आयरन ही फेफड़ों से पूरे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई करता है. आयरन से हीमोग्लोबिन भी बनता है. इसलिए पहले के लोग शरीर में आयरन के स्तर बनाए रखने के लिए लोहे के बर्तनों में सब्जी वगैरह बनाते थे. क्योंकि ऐसा करने से शरीर में आयरन का स्तर बढ़ाता है, खून की कमी दूर होती है. एक तथ्य ये भी है कि थकान, कमजोरी और शरीर में दर्द आयरन की कमी से ही होता है. लोहे की कड़ाही का खाना देर तक रहता गर्म शरीर में आयरन की कमी होने के कारण ही लोग डॉक्टर की सलाह पर विभिन्न प्रकार के सप्लीमेंट्स लेते हैं. लेकिन अगर सप्लीमेंट्स की जगह लोहे की कड़ाही का इस्तेमाल किया जाए तो आयरन की कमी पूरी हो सकती है. इसके अलावा अगर आप लोहे की कड़ाही में खाना पकाएंगे, तो खाना लंबे समय तक गर्म रहेगा. भोपाल की 60 साल की गृहिणी जानकी बताती हैं "वह तो हमेशा से ही लोहे की कड़ाही में सब्जी पकाती हैं. उनकी सास की ये सीख आज भी वह अमल में ला रही हैं." क्या कहते हैं चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ भोपाल के नर्मदा अस्पताल की सीनियर डायटीशियन डॉ.अमिता सिंह ने बताया "आयरन के बर्तन में बना नियमित खाना खाने से शरीर में आयरन की कमी पूरी हो सकती है, लेकिन यह तभी कारगर होगा, जब इस खाने में खटाई यानि विटामिन सी भी मिलाया जाए. आयरन के बर्तन में पका हुआ खाना खाने से केवल उन लोगों में ही आयरन की मात्रा इंप्रूव होगी, जिन्हें मामूली आयरन की जरूरत है. लेकिन यदि किसी को सीवियर एनीमिया है, तो फिर उसे डॉक्टर से सलाह लेनी की जरूरत है."