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इतिहास में नया अध्याय: दरगाह में खादिमों के लिए शुरू हुई लाइसेंस प्रक्रिया

अजमेर अजमेर ख्वाजा गरीब नवाज की विश्वप्रसिद्ध दरगाह में जल्द ही केवल लाइसेंसधारी खादिम ही जायरीन को जियारत करा सकेंगे। केंद्र सरकार के निर्देश पर दरगाह कमेटी ने 75 वर्षों में पहली बार खादिमों के लाइसेंस की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। सोमवार को दरगाह नाजिम मोहम्मद बिलाल खान ने इसका आधिकारिक विज्ञापन जारी किया। इसके लिए 5 जनवरी 2026 तक आवेदन जमा करवाए जा सकेंगे। नाजिम ने बताया कि यह प्रक्रिया केवल दरगाह ख्वाजा साहब से संबद्ध खादिम समुदाय सैयद जादगान एवं शेख जादगान के लिए लागू की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेशों, केंद्र व राज्य सरकारों के निर्देशों, जिला प्रशासन की रिपोर्टों तथा दरगाह सुरक्षा अंकेक्षण की सिफारिशों के अनुपालन में लाइसेंस प्रणाली लागू की जा रही है। दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम 1955 की धारा 11(एफ) में खादिमों के कर्तव्यों, पहचान, मानक प्रक्रियाओं, सुविधाओं और जायरीन के हित सुनिश्चित करने के विशेष प्रावधान हैं, जिनके अनुसार इस पूरी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है। दरगाह कमेटी ने पात्र खादिमों से आवेदन आमंत्रित कर दिए हैं। आवेदन-पत्र, नियम और शर्तें कमेटी की वेबसाइट gharibnawaz.minorityaffairs.gov.in से डाउनलोड की जा सकती हैं। इच्छुक आवेदक नाजिम कार्यालय से भी आवेदन प्राप्त कर सकते हैं। पूर्ण रूप से भरे हुए प्रपत्र के साथ आवश्यक दस्तावेजों और स्वप्रमाणित प्रतियों को 5 जनवरी 2026 तक कार्यालय में जमा कराना अनिवार्य होगा। यह पहली बार है जब खादिमों को लाइसेंस देने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है। दरगाह कमेटी के गठन के बाद से अब तक तीन एडमिनिस्ट्रेटर और 37 नाजिम अपने-अपने कार्यकाल पूरे कर चुके हैं, लेकिन इस दौरान किसी ने भी लाइसेंस प्रक्रिया को लागू नहीं किया। कमेटी के पहले एडमिनिस्ट्रेटर अब्दुल रऊफ सिद्दीकी 9 जनवरी 1954 को नियुक्त हुए थे। उनके बाद अनीस मुज्तबा जुबैरी और आले मोहम्मद शाह यूपीएससी 1956 तक एडमिनिस्ट्रेटर रहे। बाद में एडमिनिस्ट्रेटर की जगह नाजिम का पद सृजित किया गया और 1 मार्च 1956 को आले मोहम्मद शाह को ही पहला नाजिम नियुक्त किया गया। मार्च 1956 से मार्च 2025 तक 37 नाजिम दरगाह कमेटी का कार्यभार संभाल चुके हैं, जबकि 28 अध्यक्ष भी अपनी सेवा दे चुके हैं। अंतिम सदर सैयद शाहिद हुसैन रिजवी 4 जून 2023 तक पद पर रहे। कई कार्यकालों में खादिमों को लाइसेंस देने की चर्चा और प्रस्ताव बने, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब वर्तमान नाजिम, बीएसएफ से रिटायर्ड मोहम्मद बिलाल खान के प्रयासों से यह ऐतिहासिक कदम संभव हो पाया है। लाइसेंस के मुद्दे पर दरगाह नाजिम ने दो बार खादिमों के साथ बैठक बुलाने की कोशिश की। 24 और 27 नवंबर को आयोजित बैठकों में एक भी खादिम उपस्थित नहीं हुआ। दूसरी ओर, खादिम मोहल्ले में अंजुमन सदर की अध्यक्षता में खादिम समुदाय ने अलग बैठक की और मुद्दे पर चर्चा की। नए बदलाव के बाद दरगाह में जियारत व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और सुरक्षित होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह कदम जायरीन की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देने की दिशा में दरगाह प्रशासन का बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहल: झारखंड स्वास्थ्य मंत्री खुद पहुँचे OPD में

रांची  झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारीइन दिनों एक्शन मोड में है और राज्य के अलग-अलग अस्पतालों का निरीक्षण कर रहे हैं और ओपीडी वार्ड में खुद ही बैठकर मरीजों का भी इलाज कर रहे हैं।        आज जमशेदपुर में OPD का लेंगे जायजा डॉक्टर अंसारी ने आज कहा कि आज मैं जमशेदपुर में रहूंगा। ओपीडी की सभी व्यवस्थाओं का निरीक्षण करूंगा और यह सुनिश्चित करूँगा कि किसी भी मरीज को इलाज में ज़रा भी परेशानी न हो। मैं स्वयं स्थल पर मौजूद रहकर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को पूरा सहयोग दूंगा। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ जनता तक पहुँचाना-इसी मिशन के लिए हम पूरी तरह संकल्पित हैं।' स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि नई उम्मीद, नया विश्वास – जनता से मिले संकल्प को जिला स्वास्थ्य व्यवस्था के ज़मीनी स्तर तक ले जाना हमारा प्रमुख लक्ष्य है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दूरद्दष्टि और निष्ठा का परिणाम है कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था आज नई दिशा में आगे बढ़ रही है।

Z-Plus सुरक्षा विवाद: अभय चौटाला की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र को नोटिस जारी

चंडीगढ़  Z Plus Security पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इंडियन नेशनल लोकदल नेता अभय सिंह चौटाला की जेड-प्लस या जेड श्रेणी की केंद्रीय सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने मामले को गंभीर बताते हुए अगली सुनवाई 16 दिसंबर तय की। अदालत ने कहा कि चौटाला द्वारा जताए गए खतरे और राज्य की कथित ‘निष्क्रियता’ पर विस्तृत जवाब आवश्यक है। याचिका में कहा गया है कि आईएनएलडी के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक नफे सिंह राठी की हत्या के बाद चौटाला को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय गैंगस्टरों से विश्वसनीय धमकियां मिली हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन धमकियों की जानकारी बार-बार राज्य सरकार को दी गई, लेकिन ‘कोई कार्रवाई नहीं हुई’। चौटाला के अनुसार, न तो सुरक्षा आकलन किया गया, न कोई समिति गठित हुई और न ही उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी गई। उन्होंने अदालत को बताया कि स्थितियां लगातार बिगड़ रही हैं और खतरा ‘गंभीर और बढ़ता हुआ’ है। राठी हत्याकांड पर मुखर रुख के बाद खतरा बढ़ा याचिका के अनुसार, अभय चौटाला ने राठी हत्याकांड के बाद सबसे पहले खुलकर सीबीआई जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने यह मुद्दा 27 फरवरी 2024 को विधानसभा के बजट सत्र में उठाया और अगले ही दिन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि राठी की हत्या संगठित अपराध की ओर संकेत करती है।चौटाला का कहना है कि अपराध जगत के खिलाफ उनके लगातार रुख और सरकार पर दबाव की वजह से वे कई गैंगस्टर नेटवर्क के निशाने पर आ गए हैं। राजनीतिक प्रोफ़ाइल और सक्रिय भूमिका को बताया कारण एडवोकेट संदीप गोयत के माध्यम से दायर याचिका में बताया गया कि चौटाला वर्ष 2000 से लगातार राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। वे कई बार एलनाबाद से विधायक चुने गए और नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं। याचिका में कहा गया कि किसान आंदोलन से लेकर कानून-व्यवस्था और राठी हत्याकांड तक, चौटाला ने कई संवेदनशील मुद्दों पर मुखर भूमिका निभाई है। उनकी ‘निर्भीक और स्पष्ट’ राजनीतिक कार्यशैली उन्हें ‘अपराधी गिरोहों के निशाने पर’ रखती है। परिवार भी खतरे में, आर्टिकल 21 का हवाला अभय चौटाला ने दावा किया है कि न सिर्फ वे, बल्कि उनका परिवार भी बढ़ते खतरे का सामना कर रहा है। याचिका में कहा गया है कि जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के तहत राज्य का दायित्व है कि वह नागरिक को पर्याप्त सुरक्षा दे, खासकर तब जब खतरा ज्ञात हो और उसके प्रमाण मौजूद हों। चौटाला ने हाई कोर्ट से निवेदन किया है कि उन्हें केंद्रीय एजेंसी के माध्यम से जेड-प्लस या जेड श्रेणी की चौबीस घंटे सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। ‘राज्य ने अनुरोधों पर विचार तक नहीं किया’ याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई बार भेजे गए ‘स्पष्ट, तात्कालिक और विशिष्ट’ अनुरोधों के बावजूद राज्य सरकार ने सुरक्षा के आकलन पर विचार तक नहीं किया। उन्होंने कहा कि इस लगातार अनदेखी के बाद उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी, जहां अब केंद्र और राज्य दोनों को विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

MP में 76 हजार टीबी केस सामने आए, 2025 का लक्ष्य कमजोर; इंदौर में 1,833 मौतों ने बढ़ाई चिंता

इंदौर   प्रधानमंत्री द्वारा साल 2025 तक टीबीमुक्त भारत बनाने की घोषणा के सात वर्ष बाद भी इंदौर में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। 2018 में अभियान शुरू होने से अब तक इंदौर में 76,549 नए टीबी मरीज सामने आ चुके हैं, जो यह संकेत देता है कि लक्ष्य काफी पीछे छूट गया है। हर साल औसतन 7–8 हजार नए रोगी मिल रहे हैं। इनमें से 1,833 मरीजों की मौत भी दर्ज की जा चुकी है, जो अभियान की सफलता पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपलब्ध इलाज और साधनों के बावजूद मौतों का यह आंकड़ा बेहद गंभीर है। देशभर में बढ़ता टीबी का बोझ, इंदौर का योगदान भी बड़ा इंदौर सहित पूरे देश में टीबीमुक्त भारत अभियान चलने के बावजूद राष्ट्रीय टीबी आंकड़ों में लगातार वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2021 में जहां 21 लाख मरीज थे, वहीं 2022 में 28 लाख, 2023 में 25 लाख, 2024 में 26 लाख और 2025 में अब तक 26 लाख मरीज दर्ज किए जा चुके हैं। डाक्टरों की मानें तो वर्ष के अंत तक यह संख्या 30 लाख तक पहुंच सकती है। इन बढ़ते आंकड़ों में इंदौर का योगदान भी बड़ा है, क्योंकि यहां हर वर्ष हजारों मरीज सामने आ रहे हैं। उपलब्ध दवाएं और सुविधा केंद्र होने के बावजूद 1,833 मौतें अभियान को लगभग असफल साबित कर रही हैं। टीबी जांच के 44 केंद्र सक्रिय, इलाज और आर्थिक सहायता भी उपलब्ध इंदौर में सामान्य टीबी की जांच 44 माइक्रोस्कोपी सेंटरों में की जाती है। अभियान शुरू होने से अब तक 76,549 सामान्य टीबी मरीज मिले हैं। जांच से लेकर इलाज तक का सारा खर्च सरकार वहन करती है। साथ ही उपचार अवधि के दौरान मरीजों को 6 महीने तक हर माह 1,000 रुपये की सहायता भी दी जाती है। चिकित्सकों के अनुसार यदि मरीज बिना नागा 6 महीने तक नियमित दवा लेते रहें तो वे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। इसके बावजूद लापरवाही के कारण कई मरीज इलाज अधूरा छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। एमडीआर टीबी के 1,745 मरीज, सबसे ज्यादा मौतें इसी श्रेणी में सामान्य टीबी के अतिरिक्त इंदौर में 1,745 एमडीआर (मल्टीड्रग रेजिस्टेंस) मरीज भी मिले हैं। यह टीबी का सबसे खतरनाक रूप माना जाता है, जो आमतौर पर उन्हीं मरीजों में विकसित होता है जो बीच में दवा छोड़ देते हैं या इलाज पूरा नहीं करते। विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी से होने वाली कुल मौतों में सबसे अधिक मौतें एमडीआर टीबी के कारण होती हैं। साल 2018 से 2025 तक मिलने वाले सामान्य और एमडीआर मरीजों के आधिकारिक आंकड़े भी यही दिखाते हैं कि बीमारी पर रोक नहीं लग सकी। सरकार का उद्देश्य यह है कि कोई भी मरीज बिना जांच और बिना इलाज के न रहे, न कि शहर में टीबी पूरी तरह खत्म हो। बड़ी संख्या में ठीक हो रहे मरीज जिला क्षय अधिकारी डाक्टर शैलेंद्र जैन ने बताया कि टीबीमुक्त भारत अभियान का मतलब यह नहीं है कि इंदौर में एक भी मरीज नहीं मिलेगा। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी मरीज बिना इलाज और बिना जांच के न रहे। इसके लिए हम हर तरह की सुविधा दे रहे हैं। बड़ी संख्या में मरीज ठीक हो रहे हैं और भविष्य में जल्द ही इस पर पूरी तरह से लगाम कसने में भी मदद मिलेगी।  

रतलाम मंडल के यात्रियों के लिए बुरी खबर, 60 दिनों के ट्रैक ब्लॉक से कई जरूरी ट्रेनें प्रभावित

रतलाम मुंबई सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 4 पर ट्रैक नवीनीकरण कार्य के चलते 23 नवंबर, 2025 से 60 दिनों का ब्लॉक लिया जा रहा है। इस ब्लॉक के कारण पश्चिम रेलवे की कई ट्रेनें प्रभावित होंगी। इस अवधि के दौरान, पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल से गुजरने वाली कुछ ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया जाएगा या आंशिक रूप से रद्द किया जाएगा। यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं की हैं। ये ट्रेन हो रहीं प्रभावित प्रभावित होने वाली ट्रेनों में निम्नलिखित शामिल हैं: ट्रेन संख्या 22210 हजरत निजामुद्दीन – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होगी और दादर तथा मुंबई सेंट्रल के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेगी। इसी प्रकार, ट्रेन संख्या 09086 इंदौर – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस भी दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होगी और दादर-मुंबई सेंट्रल के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेगी। ये ट्रेन भी रहेंगी रद्द अन्य प्रभावित ट्रेनों में ट्रेन संख्या 09076 काठगोदाम – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस और ट्रेन संख्या 09186 कानपुर अनवरगंज – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस शामिल हैं। ये दोनों ट्रेनें भी दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होंगी तथा दादर और मुंबई सेंट्रल स्टेशनों के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेंगी। मेंटिनेंस की वजह से ये रूट भी प्रभावित उत्तर पश्चिम रेलवे के चूरू-आसलू-दुधवाखारा स्टेशन के चूरू-सादुलपुर सेक्शन में पैच डबलिंग और ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के कारण पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल से होकर गुजरने वाली कुछ ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। ब्लॉक कार्य के चलते कई ट्रेनों के मार्ग में परिवर्तन किया गया है और कुछ स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव भी दिए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए प्रभावित ट्रेनों का विवरण जारी किया गया है। इन ट्रेनों का बदला गया रूट 20497 रामेश्वरम – फिरोजपुर एक्सप्रेस: 06, 13, 20 और 27 जनवरी, 2026 को रामेश्वरम से चलने वाली यह ट्रेन सीकर-लोहारू-सादुलपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। इसे झुंझुनू और लोहारू स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव दिया गया है। 20498 फिरोजपुर – रामेश्वरम एक्सप्रेस: 24 जनवरी, 2026 को फिरोजपुर से चलने वाली यह ट्रेन सादुलपुर-लोहारू-सीकर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। इसे लोहारू और झुंझुनू स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव दिया गया है। 04711 बीकानेर – बांद्रा टर्मिनस स्पेशल: 21 जनवरी, 2026 को बीकानेर से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन बीकानेर, मेरटा रोड बाईपास – जयपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। नोखा, नागौर, मेरटा रोड बाईपास, डेगाना, मकराना और फुलेरा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे। 04712 बांद्रा टर्मिनस – बीकानेर स्पेशल: 22 जनवरी, 2026 को बांद्रा टर्मिनस से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन जयपुर – मेरटा रोड बाईपास – बीकानेर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। फुलेरा, मकराना, डेगाना, मेरटा रोड बाईपास, नागौर और नोखा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे। 04715 बीकानेर – साईंनगर शिर्डी स्पेशल: 24 जनवरी, 2026 को बीकानेर से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन बीकानेर, मेरटा रोड बाईपास – जयपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। नोखा, नागौर, मेरटा रोड बाईपास, डेगाना, मकराना और फुलेरा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे।  

भाजपा प्रदेश कार्यालय में सोमवार से शुक्रवार, दोपहर 1 से 3 बजे तक दो मंत्री करेंगे कार्यकर्ताओं से मुलाकात

भोपाल  कार्यकर्ताओं को क्षेत्र के काम से अब मंत्रियों से मिलने के लिए बंगले या मंत्रालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। सोमवार से शुक्रवार तक प्रदेश भाजपा कार्यालय में दो मंत्री दोपहर एक से तीन बजे तक बैठेंगे। कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनकी समस्या का यथासंभव समाधान करेंगे। सत्ता और संगठन में समन्वय के लिए गठित समन्वय टोली की बैठक में हुए निर्णय के बाद इसकी शुरुआत भी सोमवार एक दिसंबर से हो गई। उप मुख्यमंत्री और राज्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से किया संवाद उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने कार्यालय में कार्यकर्ताओं से संवाद किया। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों की उपलब्धता से संगठन और शासन के बीच समन्वय और मजबूत होगा तथा समस्याओं का समाधान त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा। यह प्रयास संगठनात्मक गति, कार्यकर्ता संपर्क और समस्या-निराकरण को नई दिशा देगा। समाधान होने पर कार्यकर्ताओं को अवगत भी कराया जाएगा वहीं, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मंत्री-दिन प्रणाली का उद्देश्य कार्यकर्ताओं की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। सोमवार को हमने और गौतम टेटवाल ने कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुना और समाधान भी कराया। प्राप्त आवेदनों को सूचीबद्ध कर संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिन समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं हो सका, उनका फालोअप किया जाएगा। समाधान होने पर कार्यकर्ताओं को अवगत भी कराया जाएगा। यह व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी कार्यकर्ताओं से मिलने की यह व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी। केवल बड़े आयोजनों या विशेष कार्यक्रमों की स्थिति में ही इसे समायोजित किया जाएगा। इस निर्णय से भाजपा कार्यकर्ता भी बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र के कई कार्य ऐसे हैं जिनके लिए मंत्री से मिलना जरूरी होता है। इस व्यवस्था से अब सीधे मंत्री से मिलकर क्षेत्र की समस्या उठाई भी जा सकती है और उसका समाधान भी किया जा सकेगा। कब कौन मंत्री रहेगा कार्यालय में उपलब्ध     2 दिसंबर- राकेश सिंह, दिलीप अहिरवार     3 दिसंबर- विश्वास सारंग, लखन पटेल     4 दिसंबर- कैलाश विजयवर्गीय, प्रतिमा बागरी     5 दिसंबर- विजय शाह, नरेंद्र शिवाजी पटेल  

मध्यप्रदेश सरकार तीन किस्तों में लेगी 3 हजार करोड़ रुपये का कर्ज, कुल कर्ज बढ़कर 49,600 करोड़

भोपाल   मध्यप्रदेश की मोहन सरकार शीतकालीन सत्र के दौरान दूसरा अनुपूरक बजट पेश करने की तैयारी में है। इसके लिए सरकार एक बार फिर 3,000 करोड़ का कर्ज नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से लेने जा रही है, जिसका भुगतान बुधवार को किया जाएगा। ये सभी कर्ज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के जरिए लिए जा रहे हैं, और इनका ब्याज हर छह महीने में 3 जून और 3 दिसंबर को चुकाया जाएगा। इस नए कर्ज के साथ चालू वित्तीय वर्ष में राज्य का कुल कर्ज बढ़कर 49,600 करोड़ पहुंच जाएगा। पहला कर्ज 1 हजार करोड़ रुपए का होगा वित्त विभाग के द्वारा नोटिफिकेशन जारी किया गया। जिसके अनुसार, पहला कर्ज एक हजार करोड़ रुपए का होगा। जिसका भुगतान सरकार के द्वारा आठ साल में किया जाएगा। इसके बाद एक हजार करोड़ का दूसरा कर्ज भी लिया जाएगा। जिसको सरकार 13 साल में चुकाएगी। तीसरे कर्ज की राशि भी 1 हजार करोड़ रुपए होगी। जिसका भुगतान ब्याज के साथ 23 साल में किया जाएगा। इन कर्जों का ब्याज जून और दिसंबर महीने में अदा किया जाएगा। नवंबर में सरकार ने लिया था कर्ज इससे पहले सरकार ने 11 नवंबर को ऑक्शन के बाद सरकार ने 12 नवंबर को 1500-1500 सौ करोड़ के दो कर्ज और 1 हजार करोड़ का दूसरा कर्ज लिया था। जो कि 16 साल, 22 साल और 19 साल के लिए हैं। इनके ब्याज का भुगतान सरकार को 6-6 महीने की अवधि में करना होगा। ऐसे ही 28 अक्टूबर को 5200 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। उसमें पहली राशि 2700 करोड़ की थी, जो कि 21 साल के लिए ली गई थी। वहीं, दूसरी राशि 2500 करोड़ की, जो 22 साल के लिए ली गई थी। कर्ज लेने की लिमिट बरकरार सरकार ने अपनी रेवेन्यू को लेकर कहा है कि वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार 12487.78 करोड़ के रेवेन्यू सरप्लस में थी। इसमें आमदनी 234026.05 करोड़ और खर्च 221538.27 करोड़ रहा। इसके विपरीत वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश सरकार की रिवाइज्ड आमदनी 262009.01 करोड़ और खर्च 260983.10 करोड़ बताया है। इस तरह पिछले वित्त वर्ष में भी सरकार की आय 1025.91 करोड़ सरप्लस बताई गई है, जो भी कर्ज लिया जा रहा है वह लोन की लिमिट के भीतर है। ऐसे ही 30 सितंबर को 1500-1500 करोड़ के दो कर्ज लिए थे। जिसका भुगतान एक अक्टूबर को हुआ था। ये कर्ज 20 साल और 23 साल के अवधि के लिए हैं। इसका भुगतान एक अक्टूबर हो हुआ था। 

रायपुर: घर में पर्यटकों को ठहराकर कमाएं पैसा, होमस्टे नीति 2025-30 से ग्रामीणों को बड़ी मदद

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने होमस्टे पॉलिसी लागू कर दी है,  सरकार ने 2025-30 के लिए नई छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025‑30 बनाई है, जिसका सबसे ज्यादा फायदा ग्रामीणों को मिलने वाला है, खास तौर पर बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस दिशा में और काम किया जा रहा है. इस पॉलिसी का मकसद प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों, विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा संभागों में होने वाली होमस्टे में और इजाफा करने की तैयारी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक इस दिशा में आ सके.  होम-स्टे की सुविधा बढ़ेगी  छत्तीसगढ़ सरकार की इस पॉलिसी के तहत ग्रामीण परिवारों को प्रोत्साहन मिलेगा जो अपना घर पर्यटकों के ठहरने के लिए होम-स्टे के रूप में उपलब्ध कराएंगे. सरकार होम-स्टे सेट-अप की सुविधा देने के लिए वित्तीय मदद देगी, जिससे परिवारों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा. यानि अब जो इस दिशा में का करना चाहते हैं उन्हें इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा. नए होम‌स्टे पर 1 लाख रुपए तक की मदद भी सरकार की तरफ से मिलेगी, जिसके लिए रिनोवेशन पर 50 हजार और 100 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी भी ग्रामीणों को मिलेगी.  दरअसल, नीति के अनुसार होम-स्टे के लिए घर अपग्रेड करने के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता दी जाएगी. क्योंकि इससे स्थानीय लोग अपने घर को होम-स्टे में बदलकर स्थायी आय अर्जित कर सकेंगे, युवाओं, महिलाओं और स्थानीय कारीगरों के लिए स्वरोजगार व रोजगार के अवसर खुलेंगे. होम-स्टे की मदद से पर्यटक गांव की सादगी, प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, लोक-कला, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन आदि का अनुभव ले सकेंगे, जिससे स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा.   ग्रामीणों और पर्यटकों को फायदा कैसे रियल सरगुजिहा फीलिंग: सैलानियों को अब सरगुजा में रियल सरगुजिहा फीलिंग मिल सकेगी. जिस जंगल, पहाड़, गांव, घर खेत खलिहान, आदिवासी संकृति को देखने सैलानी यहां आते हैं. अब वो इन सबमें समाहित होकर उसका आनंद ले सकेंगे, क्योंकि सरकार की इस नीति के बाद सैलानियों को शहर के महंगे एसी वाले होटल में नहीं ठहरना पड़ेगा. पर्यटकों को मिलेगा होम स्टे का फायदा: होम स्टे के तहत पर्यटक गांव में ही ग्रामीणों के घर में रह सकेंगे. उनका खाना, उनकी चारपाई, खेत खलिहान, कुएं का पानी सहित तमाम लोकल कल्चर का आनंद उठा सकेंगे. सरकार होम स्टे को प्रमोट करने के लिए नीति बना चुकी है. इसे चरण बद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. सरकार होम स्टे के लिए प्रोत्साहन राशि और लोन लेने पर ब्याज में भी छूट की योजना बना चुकी है. पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा: सरगुजा के पर्यटक स्थलों और लोक संकृति पर शोध करने वाले अजय कुमार चतुर्वेदी कहते हैं कि होम स्टे से प्रदेश के दो संभाग बस्तर और सरगुजा के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. सरगुजा का पर्यटन, धार्मिक, साहित्यिक सभी दृष्टि से समृद्ध है. यहां रामगढ़ है, डीपाडीह है, मैनपाट, सोमरसोत, तमोर पिंगला अभयारण्य, ओडगी में कूदरगढ़, गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व के कई इलाके हैं. बस्तर में होम स्टे कल्चर:  प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी ने होम स्टे के सम्बन्ध में पूरी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बस्तर के कुछ गांव में होम स्टे कल्चर विकसित हो चुका है. इसे देखते हुए सरकार ने होम स्टे नीति बनाई है. पर्यटक हमारे घर के एक कमरे में हमारे साथ रहेगा, जो हम खायेंगे वही खायेगा. हमारे खेत बाड़ी घूमेगा. विदेशों में ये कल्चर कई जगह है. सरकार करेगी मदद: मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि पर्यटन विभाग ने चिन्हांकन का काम शुरू कर दिया है. हम एक कमरे पर एक लाख रुपये प्रोत्साहन देंगे. पहले वर्ष 50 हजार, फिर अगले वर्ष 30 हजार और तीसरे वर्ष 20 हजार दिया जाएगा. आप चाहें तो लोन भी ले सकते हैं. उसमें सरकार इंटरेस्ट सब्सिडी देगी. एक व्यक्ति 6 कमरे तक बना सकता है. पर्यटकों और ग्रामीणों को होगा फायदा: बहरहाल सरकार की नीति का फायदा सीधे तौर पर पर्यटकों और स्थनीय ग्रामीणों को होगा. गांव के कच्चे के मकान का कमरा किराये पर देकर ग्रामीण पैसा कमा सकेंगे. ना सिर्फ कमरा बल्कि खाना व अन्य सुविधाओं का भी चार्ज वो सैलानियों से कर सकेंगे. सैलानियों के लिए भी ये सुनहरा अवसर होगा, क्योंकि जिस संस्कृति को वो दूर से देखने और फोटो क्लिक करने आते थे, अब वो उसी संस्कृति में रह सकेंगे. सैलानियों का खर्च बचेगा: पर्यटक सरगुजा का लोकल जीराफूल, लाकरा की चटनी, पूटू, जंगली साग, कुएं का पानी, चारपाई में पैरावट का बिस्तर जैसे अनुभव को जी सकेंगे. इससे सैलानियों के बजट में भी कमी आयेगी क्योंकि सरगुजा घूमने के लिए वो पहले अंबिकापुर आकर किसी महंगे होटल में ठहरते हैं और फिर यहां से कैब बुक करके घूमने जाते हैं. शाम को वापस आते हैं और अगले दिन फिर निकलते हैं. इस तरह सैलानियों का ट्रेवलिंग और स्टे का खर्च काफी अधिक हो जाता है, लेकिन होम स्टे में वो उसी गांव में रुक सकेंगे, जहां उनको घूमना है. छत्तीसगढ़ में बढ़ा होम स्टे  बता दें कि बीते कुछ सालों में छत्तीसगढ़ में भी होम स्टे पर्यटन में तेजी से बढ़ावा आया है, क्योंकि राज्य के बस्तर और सरगुजा संभागों के जंगली इलाकों और ग्रामीण इलाकों में होम स्टे का कल्चर बढ़ा है, बाहर से आने वाले लोग शहर की थकान से दूर गांवों की शांति और सुकून में रहना पसंद करते हैं, ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है, ताकि पर्यटन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की संस्कृति को भी बढ़ावा दिया जा सके. 

बीजेपी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान जल्द, संघ नाराजगी जताने के बाद सक्रिय

लखनऊ  उत्तर प्रदेश को बीजेपी का नया अध्यक्ष मिलने जा रहा है. आरएसएस और बीजेपी के बीच सोमवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर समन्वय बैठक हुई. तीन घंटे तक चली इस विचार प्रवाह की बैठक में बीजेपी के प्रदेश के नाम पर मंथन किया गया और एसआईआर के मुद्दे पर चर्चा हुई. सूत्रों की मानें तो इसी सप्ताह बीजेपी यूपी के नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर सकती है.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कालिदास मार्ग स्थित सरकारी आवास पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बीजेपी और यूपी सरकार के बीच एक अहम बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में सरकार के कामकाज की रिपोर्ट ली गई. साथ ही सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने पर जोर दिया गया. बैठक में आरएसएस के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार, बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ-साथ संघ के क्षेत्रीय प्रचारक भी उपस्थित रहे.  यूपी के नए बीजेपी अध्यक्ष का ऐलान जल्द  संघ और बीजेपी की समन्वय बैठक के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने उत्तर प्रदेश बीजेपी के अगले संभावित अध्यक्ष का नाम भी साझा किया. सूत्रों के मानें तो इस सप्ताह ही यूपी बीजेपी को नया अध्यक्ष मिल सकता है. राज्य बीजेपी के अध्यक्ष का चुनाव करीब एक साल से लंबित है. उत्तर प्रदेश के 75 जिले को बीजेपी ने अपने संगठन स्तर पर 98 जिलों में बांट रखा है, जिसमें से 84 जिला अध्यक्ष नियुक्त कर दिए हैं. ऐसे में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो गई है. माना जा रहा है कि इसीलिए संगठन महामंत्री ने समन्वय बैठक में संभावित अध्यक्ष के नाम को साझा किया. इस तरह संगठन में बदलाव की प्रक्रिया तेज होती दिख रही है और अब इसी सफ्ताह उत्तर प्रदेश बीजेपी को नया अध्यक्ष मिल सकता है. SIR पर  संघ ने क्यों जताई नाराजगी लखनऊ में हुई संघ–बीजेपी की विचार प्रवाह बैठक में उत्तर प्रदेश में चल रही एसआईआर प्रक्रिया प्रमुख चर्चा का विषय रहा. बैठक में संघ के नेताओं ने यह मुद्दा उठाया कि बीजेपी सांसद और विधायक एसआईआर प्रक्रिया की गतिविधियों में पर्याप्त भागीदारी नहीं दिखा रहे. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनप्रतिनिधियों को इस पहल में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए. लोगों को जागरूक करना चाहिए और ज़मीन पर उनकी मदद सुनिश्चित करनी चाहिए. राम मंदिर के मुद्दे को धार देने का प्लान बैठक में यह भी तय किया गया कि इस साल अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब देशभर में इस व्यापक रूप से प्रचार प्रसार करने की योजना बनाई जाएगी, ताकि इसके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सके. संघ की ओर से सीएम योगी को कहा गया कि वह प्रभारी मंत्रियों को कहें कि वे प्रवास के दौरान वैचारिक संगठनों से भी संवाद करें. इस बैठक में इस बात पर फैसला हुआ कि आने वाले दिनों में संघ राम मंदिर के मुद्दे को और धार देगा. पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का वादा पूरा करने को भी संघ, सरकार और भाजपा बड़ी उपलब्धि के रूप में जनता के बीच रखा जाएगा. सरकार-संगठन में बेहतर तालमेल पर जोर समन्वय बैठक में संघ, बीजेपी संगठन और योगी सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया. संगठनात्मक स्तर पर बूथ सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता अभियान और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने की रणनीति पर भी विमर्श हुआ. इस बैठक में कहा गया कि जल्द ही बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा की जाएगी इसके साथ ही निगम और बोर्ड की नियुक्तियां जल्द होंगी. 

अनक्लेम्ड बैंक फंड्स का अलर्ट: भोपाल में 230 करोड़, देशभर में 67,000 करोड़, RBI कैंप मददगार

भोपाल  राजधानी के 5 लाख 63 हजार 659 खाताधारकों ने करीब 10 साल अपने बैंक खातों में कोई ट्रांजेक्शन नहीं किया है। लेनदेन नहीं होने की वजह से निष्क्रिय पड़े इन खातों में करीब 230 करोड़ रुपए पड़े हैं। यदि आपका या आपके परिवार का पैसा पिछले दस साल से बैंक में जमा है और उसमें कोई लेनदेन नहीं किया है तो ऐसे पैसे खाते से निकाले जा सकते हैं। इसके लिए अब वित्तीय संस्थान ही आगे आ रहे हैं। जगह-जगह कैंप लगाकर लाभार्थियों को पैसा निकालने की सलाह दी जा रही है। रिजर्व बैंक ने ऐसे पैसे वापस करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक का समय दिया है। इसमें बैंक, बीमा कंपनी सहित अन्य वित्तीय संस्थान शामिल है। कैसे मिलेगी राशि बैंकर्स का कहना है कि इस प्रकार की राशि को प्राप्त करने के लिए बैंक में आवेदन देना होगा साथ ही खाते का केवायसी (खाताधारक का आधार, पेन नंबर) आदि देना होगा। यदि खाताधारक नहीं है और नामिनी बनाया है तो राशि नामिनी को मिलेगी अन्यथा विधिक वारिस को मिलेगी। ये पैसा जमाकर्ता एवं उतराधिकारियों की वैद्य संपत्ति है। सरकारी बैंकों में 20 करोड़, 210 करोड़ रुपए प्राइवेट बैंकों में जमा 2518 करोड़ रुपए जमा हैं मप्र के निष्क्रिय खातों में लेनदेन बंद… डीईए फंड में जाती है राशि बैंक अधिकारियों के मुताबिक सेविंग, रैकरिंग, करंट या इंश्योरेंस समेत किसी भी खाते में 10 साल तक लेनदेन नहीं होने पर खाता निष्क्रिय हो जाता है। इसके बाद जमा राशि आरबीआई के डीईए (डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस) फंड में ट्रांसफर होती है। इसके ब्याज से आरबीआई जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम चलाता है। देश में 67,000 करोड़ अनक्लेम्ड पड़े देश के लाखों लोगों की करीब 67,000 करोड़ रुपये की रकम (जून 2025 तक) बैंकों में लावारिस पड़ी है. यह वही धन है जिसे लोग पुराने खातों में छोड़कर भूल गए, या फिर उनके परिवार के सदस्यों को इन खातों की जानकारी ही नहीं मिली. कई मामलों में नॉमिनी जानकारी के अभाव, दस्तावेजों के गुम होने या जागरूकता की कमी के कारण परिवार इस जमा रकम को वर्षों तक क्लेम नहीं कर पाते. अनक्लेम्ड राशि बढ़ने की असली वजह भारतीय परिवारों में वित्तीय संवाद की कमी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है. लोग निवेश करते तो हैं, लेकिन उसके बारे में परिवार को बताते नहीं. ऐसे में निवेशक की अनुपस्थिति या जानकारी के अभाव में धन वर्षों तक निष्क्रिय पड़ा रह जाता है. RBI की बड़ी पहल – पूरे देश में विशेष सहायता कैंप रिज़र्व बैंक ने 31 दिसंबर 2025 तक देशभर में विशेष सहायता कैंप शुरू किए हैं. इनका उद्देश्य है जनता तक भूला हुआ पैसा पहुंचाना, क्लेम प्रक्रिया आसान बनाना, वित्तीय जागरूकता बढ़ाना. कैंप में ग्राहकों को फ़ॉर्म भरने, दस्तावेज़ सत्यापन, नॉमिनी अपडेट और फॉलो-अप में सहायता दी जा रही है ताकि लोग आसानी से अपना पैसा वापस पा सकें. निष्क्रिय खाता क्या होता है? बचत या करंट अकाउंट में यदि दो साल तक कोई लेन-देन नहीं होता, तो वह निष्क्रिय (Inactive) मान लिया जाता है. पैसे सुरक्षित रहते हैं, लेकिन कई सेवाएं बंद हो जाती हैं. अगर 10 साल तक खाते में कोई गतिविधि न हो, तो उसमें मौजूद राशि ब्याज सहित RBI के DEA Fund में ट्रांसफर हो जाती है. अच्छी खबर यह है कि, ग्राहक या कानूनी वारिस कभी भी अपना पैसा क्लेम कर सकते हैं. कोई समयसीमा नहीं है. उद्गम पोर्टल से खातों की खोज उद्गम पोर्टल से कई बैंकों के खातों की खोज की सुविधा दी जा रही है। इससे प्रत्येक बैंक के दावे या निपटान प्रक्रिया की जानकारी मिलती है। हालांकि जमा राशि का दावा केवल संबंधित बैंक से ही किया जा सकता है। पैसे वापस कैसे पाएं?     अपने बैंक की किसी भी शाखा में जाएं     KYC दस्तावेज (आधार, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि) दें     क्लेम फॉर्म भरें     नॉमिनी/कानूनी वारिस से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत करें     राशि (ब्याज सहित, जहाँ लागू हो) प्राप्त करें अनक्लेम्ड जमा ढूंढने के लिए RBI का UDGAM पोर्टल     वेबसाइट पर जाएं: udgam.rbi.org.in     मोबाइल नंबर या आधार से रजिस्टर करें     नाम, जन्मतिथि, मोबाइल आदि विवरण भरें     पोर्टल आपके नाम से जुड़े निष्क्रिय खाते या FDs की जानकारी दिखाएगा     बैंक का नाम और UDRN नंबर भी दिखाई देगा अब तक 30 बैंक इस पोर्टल से जुड़े हैं, जो कुल अनक्लेम्ड जमाओं का लगभग 90% कवर करते हैं. बैंकों को मिलेगा इनाम — RBI की नई योजना 1 अक्टूबर 2025 से लागू नई योजना के तहत—     4 साल निष्क्रिय खाते वापस दिलाने पर बैंक को 5% या 5,000 रु (जो कम हो)     10 साल निष्क्रिय खाते के भुगतान पर 7.5% या 25,000 रु (जो कम हो)     RBI हर तिमाही दावों की जांच कर 30 दिनों में इनाम जारी करेगा. इसका उद्देश्य है—     बैंकों को पुराने निष्क्रिय खातों के निपटान के लिए प्रोत्साहित करना     भविष्य में अनक्लेम्ड जमा की संख्या कम करना भविष्य में ऐसी परेशानी से बचने के उपाय     अपने सभी बैंक खाते, PPF, बीमा, म्यूचुअल फंड आदि की सूची बनाकर रखें     परिवार के सदस्यों को इसके बारे में जानकारी दें     हर खाते में नॉमिनी अपडेट करें     दस्तावेज सुरक्षित रखें     समय-समय पर खातों में लेन-देन करते रहें