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यूपी में खेल संस्कृति को नई रफ्तार, सीएम योगी ने उपलब्धियों और योजनाओं को किया साझा

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के नाम पाती लिखी है, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश की बदलती खेल संस्कृति और खिलाड़ियों की उपलब्धियों को साझा किया है। मुख्यमंत्री ने अपनी पाती में लिखा है कि मैदान की मिट्टी जीत-हार नहीं, बल्कि उठना सिखाती है। उत्तर प्रदेश अब विकास के साथ-साथ खेलों में भी नंबर-1 बनने की ओर अग्रसर है। प्रदेश के युवा अपनी प्रतिभा और मेहनत से देश-विदेश में यूपी का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि चैंपियन एक दिन में नहीं बनते और खेल संस्कृति भी रातों-रात नहीं विकसित होती। खेल अनुशासन, समर्पण, सकारात्मक सोच और टीम भावना का सबसे बड़ा माध्यम है। यह खेल भावना जीवन में सफलता और विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण का आधार बनेगी। सीएम ने अपील की है कि बच्चों की खेल प्रतिभा को कभी न रोकें, क्योंकि खेल नशे जैसी बुराइयों से बचाने की सबसे बड़ी ताकत है। पाती के माध्यम से सीएम ने बताया कि प्रदेश में खिलाड़ियों के कौशल विकास और आधुनिक सुविधाओं पर विशेष फोकस है। हर ग्राम पंचायत में खेल मैदान और हर ब्लॉक में मिनी स्टेडियम विकसित किए जा रहे हैं। हर जनपद में आधुनिक स्टेडियम और मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय तैयार है। सीएम योगी ने एलान किया कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और सरकारी नौकरी मिलेगी।

दिल दहला देने वाली घटना! आवारा कुत्तों ने 4 साल की बच्ची को नोचा, दर्दनाक मौत

टांडा उड़मुड़. जिले में आवारा कुत्तों का आतंक फैला हुआ है। कल देर शाम गांव ओहड़पुर-बसी जलाल सम्पर्क रोड पर एक प्रवासी मजदूर की 4 साल की बच्ची को खेत में आवारा कुत्तों को नोच-नोच कर मार डाला। बच्ची की पहचान गुनगुन के तौर पर हुई है। यह दुखद हादसा शाम करीब 5.30 बजे हुआ जब ध्यानपुर (लखीमपुर खीरी) उत्तर प्रदेश के रहने वाले खेत मजदूर उक्त स्थान के पास एक किसान के खेत में धान लगा रहे थे और उनमें से राम जीवन और प्रीति को अपनी बेटी गुनगुन करीब 100 मीटर दूर एक मोटर और एक पेड़ की छांव में लेटाया हुआ था। इसी बीच, करीब 7 आवारा कुत्तों ने बच्ची पर हमला कर दिया और उसे घसीटकर ले गए। बच्ची की चीखें सुनकर उसके माता-पिता और परिवार के दूसरे लोग मौके पर पहुंचे तो देखा कि गुनगुन गंभीर रूप से घायल पड़ी थी। वे उसे टांडा के सरकारी अस्पताल ले गए, लेकिन उसकी गंभीर हालत के कारण उसे होशियारपुर रेफर कर दिया गया, जहां उसी रात उसकी मौत हो गई। लड़की का परिवार बस्सी जलाल गांव में रहता था और धान की खेती करता था। आवारा कुत्तों के आतंक के कारण 6 मई को आवारा कुत्तों ने पास के गांव खरल खुर्द में एक प्रवासी मजदूर की बच्ची को भी नोच-नोच कर मार डाला था।

लखनऊ में जनता दर्शन: सीएम ने समयबद्ध और निष्पक्ष समाधान के दिए निर्देश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ‘जनता दर्शन’ किया। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए प्रत्येक फरियादी से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने जरूरतमंद लोगों को आवास दिलाने और गंभीर बीमारियों से पीड़ितों के इलाज में भरपूर आर्थिक सहायता देने का आत्मीय भरोसा देते हुए कहा कि हमारी सरकार ‘नर सेवा को नारायण सेवा’ मानकर 25 करोड़ प्रदेशवासियों के हित के लिए कार्य कर रही है। ‘जनता दर्शन’ के दौरान मुख्यमंत्री खुद फरियादियों तक पहुंचे और एक-एक कर उनकी समस्याओं को सुना। उनके प्रार्थना पत्र लिए और निस्तारण के लिए संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और प्रभावी होना चाहिए। इस अवसर पर सीएम ने लोगों से कहा कि सरकार हर जरूरतमंद और पात्र व्यक्ति को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा हर समस्या के प्रभावी निस्तारण के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जन समस्याओं पर संवेदनशीलता दिखाएं। अवैध कब्जा संबंधी शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि यदि कोई दबंग किसी की जमीन कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। राजस्व व पुलिस से जुड़े मामले में समयसीमा के भीतर न्याय दिलाया जाए और मामले का निस्तारण कर पीड़ित की संतुष्टि पर ध्यान दिया जाए।

Panchkula Murder Case: आरोपियों के सिर मुंडवाने पर कोर्ट सख्त, पुलिस कमिश्नर से तलब किया जवाब

पंचकूला. पिंजौर में चर्चित हत्या मामले के चार आरोपितों को नंगे पैर और मुंडे सिर के साथ सार्वजनिक रूप से बाजार में घुमाने के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। घटना के करीब एक माह बाद कालका अदालत ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने इस प्रकरण को गंभीर मानते हुए इसे पंचकूला के सत्र न्यायाधीश के संज्ञान में लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पंचकूला के पुलिस आयुक्त (सीपी) को भी पूरे घटनाक्रम की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। मामला छह जून का है, जब पिंजौर में जितेश मनोचा हत्याकांड के चार आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद बाजार में पैदल घुमाया था। आरोपियों के सिर मुंडे हुए थे और उनके पैरों में चप्पल या जूते भी नहीं थे। यह परेड पिंजौर के व्यस्त बाजार से कराई गई थी, जिसके वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई थीं। घटना को लेकर मानवाधिकारों और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे थे। हिरासत में प्रताड़ना के आरोप भी जांच के दायरे में आठ जून को हुई सुनवाई के दौरान आरोपी रोहित मेहता की ओर से अधिवक्ता दीपांशु बंसल ने अदालत में पक्ष रखा कि आरोपितों को पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया। अदालत के समक्ष मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि आरोपियों के शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए हैं। रिपोर्ट में विभिन्न हिस्सों में चोटें दर्ज होने का भी उल्लेख किया गया। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि हिरासत में प्रताड़ना और सार्वजनिक परेड की घटनाएं आपस में जुड़ी हैं तो उनकी संयुक्त जांच की जाए, अन्यथा दोनों मामलों की अलग-अलग जांच कराई जाए। अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारी तय की जाए। हत्या के बाद हुई थी कार्रवाई पुलिस ने छह जून को जितेश मनोचा हत्याकांड में चार आरोपित मनप्रीत सिंह उर्फ मणि, रोहित मेहता उर्फ विक्की, मनीष कुमार और खुशदीप सिंह उर्फ दीपी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद इन्हें पिंजौर बाजार में पैदल ले जाया गया था। इसी कार्रवाई को लेकर अब न्यायिक स्तर पर सवाल उठे हैं। अदालत के ताजा आदेश के बाद अब सभी की नजरें पुलिस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच में यह स्पष्ट होगा कि सार्वजनिक परेड और हिरासत के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया कानून और मानवाधिकारों के अनुरूप थी या नहीं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में बड़ा कदम, दुर्ग में वारिसों ने खुद सौंपा मकान

दुर्ग. सरकारी भूमि पर वर्षों से बने कब्जों को हटाने के लिए अक्सर प्रशासन और संबंधित विभागों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे मामलों में स्वेच्छा से कब्जा छोड़ने की घटनाएं विरले ही देखने को मिलती हैं। ऐसे समय दल्लीराजहरा मूल निवासी एवं वर्तमान में चंदखुरी निवासी एक परिवार ने ईमानदारी, नैतिकता और कानून के प्रति सम्मान का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसकी क्षेत्र में सराहना हो रही है। दल्लीराजहरा के वार्ड क्रमांक 26 स्थित न्यू बस स्टैंड के समीप चंदैनी भाठा क्षेत्र में रेलवे बोर्ड की अधिग्रहित भूमि पर लगभग 50 वर्षों से निर्मित एक मकान को उसके वारिसों ने स्वेच्छा से रेलवे प्रशासन को वापस सौंपने का निर्णय लिया है। परिवार के मुखिया स्वर्गीय बलदेव प्रसाद यादव के निधन के बाद उनके पुत्र गोपाल कुमार यादव ने परिवार की सहमति से रेलवे प्रशासन को आवेदन प्रस्तुत कर उक्त संपत्ति को रेलवे की मूल संपत्ति के रूप में पुनः अपने अधिपत्य में लेने का अनुरोध किया है। वर्तमान में दुर्ग जनपद पंचायत के सभापति गोपाल कुमार यादव ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि संबंधित भूमि रेलवे बोर्ड की स्थायी संपत्ति है तथा उस पर निर्मित मकान का कोई शासकीय पट्टा, स्वामित्व दस्तावेज अथवा वसीयत उपलब्ध नहीं है। इसलिए परिवार ने नैतिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए मकान की चाबी रेलवे प्रशासन को सौंपने तथा भविष्य में किसी प्रकार का स्वामित्व दावा नहीं करने का निर्णय लिया है। गोपाल यादव ने बताया कि उनके पिता बलदेव प्रसाद यादव का 13 जनवरी 2026 को निधन हो गया था। उनके निधन के पश्चात वैधानिक वारिस के रूप में उनकी माता द्रौपती बाई यादव, स्वयं गोपाल यादव, छोटे भाई गोविन्दा यादव तथा बहन सती यदु ने आपसी सहमति से उक्त मकान को बंद कर दिया है, और वर्तमान में सभी परिवारजन दुर्ग जिले के चंदखुरी क्षेत्र में निवासरत हैं। उनका कहना है कि उन्होंने इस संबंध में उन्होंने सीनियर डीएम साहब, डीआरएम आफिस रायपुर को स्वेच्छा से कब्जा छोड़ने संबंधी आवेदन सौंपा तो उनका कहना था पहली बार कोई ऐसा कर रहा है।

मंत्री सारंग का बड़ा दावा, महिलाओं की सोसायटी बनाने वाला देश का अग्रणी राज्य बनेगा मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश बनेगा देश में महिलाओं की सोसायटी बनाने वाला अग्रणी राज्य : मंत्री सारंग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के 5 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित सहकारी सप्ताह समारोह भोपाल सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश में महिलाओं की सोसायटी बनाकर अग्रणी राज्य बनेगा। इस नवाचार की शुरूआत अगले माह से की जायेगी। मंत्री सारंग रविवार को अपेक्स बैंक में आयोजित "सहकारी सप्ताह'' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश जल्द ही बीज के मामले में भी लीड करेगा। इसके पहले कम्प्यूटराइजेशन के साथ पिछले साल ऑनलाइन ऑडिट में भी मध्यप्रदेश का सहकारिता विभाग आगे रहा। यही नहीं मध्यप्रदेश ऑनलाइन केसीसी देने वाला पहला राज्य भी बना है। समाज के निचले वर्गों को आत्म-निर्भर बनाने में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका सहकारिता मंत्रालय भारत सरकार की स्थापना के 5 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सहकारी सप्ताह समारोह में मंत्री सारंग ने कहा कि सहकारिता में अधिकारी-कर्मचारी समाज के उन्नयन के लिये योगदान दे रहे हैं। साथ ही अलग-अलग आयामों पर काम किया जा रहा है। युवा, महिला, किसान सहित हर वर्ग के कल्याण पर ध्यान दिया जा रहा है। रोजगार की दिशा में समाज के निचले वर्गों को आत्म-निर्भर बनाने में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राष्ट्र के उन्नयन में राज्य का समावेश होना जरूरी मंत्री सारंग ने कहा कि राष्ट्र के उन्नयन में राज्य का समावेश होना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश सहकारिता की दिशा में नित नये आयाम गढ़ रहा है। किसान, जवान, विज्ञान और अनुसंधान के जरिये सहकारिता आंदोलन को नई दिशा दी जा रही है। कॉर्पोरेट और को-ऑपरेटिव को जोड़कर नई अवधारणा बनाई जा रही है। पुरस्कृत होना अन्य लोगों के लिये करता है प्रेरणा-स्रोत का कार्य मंत्री सारंग ने कहा कि कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी का ठीक ढंग से निर्वहन किया। यह लोग दूसरों के लिये प्रेरणा-स्रोत बने हैं। इससे जिन्हें पुरस्कार नहीं मिले हैं वे लोग भी अच्छा कार्य कर सम्मानित हो सकेंगे और अपनी नई पहचान बना सकेंगे। सहकारिता सप्ताह के दौरान जिलों में भी हुए उत्साहवर्धक कार्य अपेक्स बैंक के प्रशासक महेन्द्र सिंह यादव ने कहा कि सहकारिता सप्ताह के दौरान जिलों में भी उत्साह के साथ कार्यक्रम हुए। इस दौरान अधिक से अधिक पौध-रोपण भी किया गया। अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक मनोज गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन दिया। अंत में सहकारी संघ के प्रबंध संचालक ऋतुराज रंजन ने आभार माना। उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति और संस्था हुईं पुरस्कृत अमानत संग्रहण लक्ष्य के विरुद्ध पूर्ति में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक विदिशा को 21 हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया। इसी में द्वितीय स्थान प्राप्त करने के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दतिया को 15 हजार रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दतिया को 11 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया। पैक्स सदस्यता महाभियान में सर्वप्रथम लक्ष्य प्राप्ति के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक झाबुआ को सम्मानित किया गया।  इसी प्रकार अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह में विभिन्न प्रतियोगिताएँ हुईं। जरी-जरदोजी क्रॉफ्ट प्रतियोगिता में प्रथम यासमीन खान, द्वितीय गुड़िया और तृतीय आशिया खान रहीं। जूट क्रॉफ्ट प्रतियोगिता में प्रथम धीरू पटेल, द्वितीय संगीता यदुवंशी और तृतीय पूजा श्रीवास्तव रहीं। कढ़ाई क्रॉफ्ट प्रतियोगिता में प्रथम दामिनी सोलंकी, द्वितीय सोनल महोबे और तृतीय रागिनी वर्मा नहीं। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में कृष कुमार साहू, दीपक कुमार सोनी और तृप्ति कुशवाहा अव्वल रहीं। निबंध प्रतियोगिता में सृष्टि जैन, वेदिका दीक्षित, टीना कारा क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहीं। राज्य स्तरीय सहकारी प्रदर्शनी में प्रथम स्थान पर सोलर पॉवर विस्तार सहकारी संस्था खरगोन, दूसरे स्थान पर प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति रेहटी, सीहोर और तृतीय स्थान पर सुविधा साख सहकारी संस्था मर्यादित भोपाल रहीं। राज्य स्तरीय सहकारी प्रदर्शनी में विशिष्ट प्रस्तुतिकरण के लिये मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ सहकारी मर्यादित भोपाल और मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बीज उत्पादक संघ भोपाल को पुरस्कृत किया गया।

“अनशन का अनुभव वांगचुक को, बाकी लोग क्यों डालें जान जोखिम में” बोले अभिजीत दीपके

नई दिल्ली नीट पेपर लीक की वजह से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पर डटी हुई है। आंदोलन को समर्थन दे रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 9 दिनों से अनशन पर हैं। वांगचुक के साथ कुछ छात्र भी अनशन पर कर रहे हैं, जिन्हें लगातार इसे खत्म करने के लिए मनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर सीजेपी बनाकर सनसनी मचा देने वाले अभिजीत दीपके भी इन छात्रों से कह रहे हैं कि यह लड़ाई लंबी चलने वाली है और उन्हें अनशन करके जान जोखिम में नहीं डालनी चाहिए। दीपके का कहना है कि सोनम वांगचुक को अनशन का अनुभव है, इसलिए उन्हें ही करने देना चाहिए। सीजेपी के मंच पर सोनम वांगचुक लगातार 9 दिन से अनशन पर हैं। बताया जा रहा है कि उनका वजन तेजी से घट रहा है। हालांकि, चार दिन में ही फॉलोअर्स के मामले में भाजपा और कांग्रेस को भी पीछे छोड़ देने वाले अभिजीत दीपके जमीन पर अपेक्षा मुताबिक भीड़ नहीं उतार पाए हैं। कुछ समर्थकों और छात्रों के साथ जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन कर रहे दीपके का एक बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसमें वह यह कहते नजर आ रहे हैं कि लड़ाई लंबी चलने वाली है और इसलिए सोनम वांगचुक को छोड़कर बाकी सदस्यों को अनशन नहीं करना चाहिए, उन्हें फिट रहने की जरूरत है। लड़ाई लंबी चलेगी, सबको फिट रहना है: दीपेक एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में दीपके ने कहा, 'मैंने तो बहुत मनाया है। सारे लोगों से मैंने कहा है कि प्लीज आप लोग भूख हड़ताल मत कीजिए। क्योंकि अगर सारे लोग भूख हड़ताल करने लग गए… सरकार को तो परवाह नहीं है। अगर सरकार को परवाह होती तो 20 बच्चों की मौत नहीं होने देती। एक मौत के बाद ही या पेपर लीक के बाद ही इस्तीफा आ जाता। तो मैंने सबसे कहा है कि भूख हड़ताल मत करिए। सबको फिट रहना है तभी जाकर यह लड़ाई लंबे दौर पर चलती रहेगी। सोनम सर को भूख हड़ताल का अनुभव है तो वह अपने आपको संभाल सकते हैं। इन बच्चों की सेहत को लेकर मुझे थोड़ी टेंशन हो रही है। और मैं फिर से रिक्वेस्ट करता हूं कि ऐसा मत करिए। हमारा प्रोटेस्ट लंबा चलने वाला है तो हम अपनी जान रिस्क में क्यों डालें? सोनम सर बहुत बड़ा काम कर रहे हैं। लेकिन उसके लिए जो बाकी चीजें मैंनेज करनी पड़ती है, उसके लिए तो हमें रहना पड़ेगा। फिर से मैं वही कह रहा हूं कि सारे लोग भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे तो यह प्रोटेस्ट मैनेज कौन करेगा।' ठूंस-ठूंसकर खाते लोगों को देख वांगचुक दुखी, एक दिन के अनशन की अपील दीपके का यह बयान ऐसे समय पर वायरल हुआ है जब पिछले दिनों सोनम वांगचुक ने इस बात को लेकर दुख जाहिर किया कि जंतर-मंतर पर जुटने वाले लोग 'ठूंस-ठूंसकर खा रहे हैं।' वांगचुक ने सभी लोगों से एक-एक दिन के अनशन की अपील करते हुए कहा कि कम से कम दिनभर ना खाएं ताकि दिन में खाना बांटने की जरूरत ना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग ज्यादा खाते हैं वह मोटे होंगे, बीमार पड़ते हैं और अनशन करने वालों से पहले मर जाएंगे।

ढैंचा की खेती से बढ़ रही मिट्टी की उर्वरता, घट रही रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता

हरी खाद से संवर रही खेतों की सेहत, प्राकृतिक खेती की मिसाल बने किसान नरेंद्र सिंह ढैंचा की खेती से बढ़ रही मिट्टी की उर्वरता, घट रही रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कृषि विभाग किसानों को टिकाऊ एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए कर रहा प्रोत्साहित रायपुर,  छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए किसानों को हरी खाद के उपयोग हेतु लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी पहल का सकारात्मक परिणाम सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम केशगंवा में देखने को मिला है, जहां प्रगतिशील किसान श्री नरेंद्र सिंह ने लगभग चार एकड़ भूमि में ढैंचा की फसल उगाकर उसे खेत में पलट दिया है। अब वे इसी खेत में धान की खेती करेंगे। किसान श्री नरेंद्र सिंह ने बताया कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ाने के उद्देश्य से ढैंचा की खेती अपनाई। उन्होंने बताया कि फूल आने से पहले ढैंचा को खेत में पलट देने पर यह कुछ ही दिनों में सड़कर प्राकृतिक जैविक खाद में परिवर्तित हो जाती है। इससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है और फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्व स्वाभाविक रूप से उपलब्ध हो जाते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार ढैंचा जैसी दलहनी हरी खाद वाली फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मिट्टी को प्राकृतिक रूप से समृद्ध बनाती हैं। इसके साथ ही फास्फोरस, जिंक एवं आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता भी बढ़ती है, जिससे आगामी फसल का विकास बेहतर होता है। हरी खाद के उपयोग से मिट्टी की संरचना में उल्लेखनीय सुधार होता है। ढैंचा के अपघटन से बनने वाला ह्यूमस मिट्टी को भुरभुरा बनाता है, जिससे उसमें हवा और पानी का बेहतर संचार होता है। इससे जड़ों का विकास मजबूत होता है और फसल अधिक स्वस्थ एवं उत्पादक बनती है। साथ ही मिट्टी की जल धारण क्षमता भी बढ़ती है, जिससे नमी लंबे समय तक बनी रहती है और सिंचाई की आवश्यकता कम होती है। ढैंचा की सघन बढ़वार खरपतवारों की वृद्धि को भी प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में सहायक होती है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई से पहले ढैंचा, सनई अथवा अन्य हरी खाद वाली फसलों का उपयोग करें। इससे रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च कम होगा, मिट्टी की दीर्घकालीन उर्वरता बनी रहेगी और टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल तथा लाभकारी कृषि को बढ़ावा मिलेगा।

चलते ई-रिक्शा अचानक बंद होने की समस्या खत्म, 20 हजार चालकों ने ली राहत की सांस

 रांची  शहर के ई-रिक्शा चालकों को बड़ी राहत मिली है। कथित रूप से ई-रिक्शों को दूर से नियंत्रित कर बंद करने वाले बीएटी-बीएमएस मोबाइल एप के बंद होने के बाद अब चालकों ने राहत की सांस ली है। पिछले कुछ दिनों से शहर में कई ई-रिक्शा चालकों ने शिकायत की थी कि उनके वाहन चलते-चलते अचानक बंद हो जा रहे हैं, जिससे यात्रियों और चालकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। वहीं रांची के कई ई-रिक्शा चालकों ने बताया कि किसी का वाहन तीन बार तो किसी का छह से सात बार तक अचानक बंद हो गया। सड़क पर चलते वाहन के अचानक रुक जाने से न केवल आय प्रभावित हो रही थी, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई थी। कई बार व्यस्त सड़कों पर ई-रिक्शा रुकने से जाम और अफरा-तफरी की स्थिति भी बन रही थी। चालकों ने खुद निकाला समाधान चालकों के अनुसार जब उन्हें इस एप के बारे में जानकारी मिली, तो कई लोगों ने स्वयं एप डाउनलोड कर लिया। इसके बाद वाहन बंद होने पर वे उसी माध्यम से ई-रिक्शा को दोबारा चालू करने लगे। राजधानी के ज्याचालकों का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व इस तकनीक का दुरुपयोग कर रहे थे, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। सरकार की कार्रवाई से मिली राहत मामला तेजी से फैलने के बाद भारत सरकार ने संबंधित एप पर कार्रवाई की। एप के बंद होने के बाद अब ऐसी शिकायतें लगभग समाप्त हो गई हैं। ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि इससे काफी राहत मिली है और वे पहले की तरह सामान्य रूप से अपना काम कर पा रहे हैं। चालकों ने बताया कि यह एप मुख्य रूप से लिथियम बैटरी से संचालित ई-रिक्शों पर असर डालता था। हालांकि वर्तमान में समस्या खत्म हो गई है, लेकिन चालकों को आशंका है कि यदि भविष्य में इसी तरह का कोई दूसरा एप सामने आया तो परेशानी फिर बढ़ सकती है। रांची में करीब 20 हजार से अधिक ई-रिक्शा विभिन्न मार्गों पर संचालित होते हैं। ऐसे में समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो यह समस्या बड़े स्तर पर परिवहन व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती थी। बढ़ गई थी परेशानी     बीएटी-बीएमएस एप की वजह से मेरी ई-रिक्शा तीन बार चलते-चलते बंद हो गई थी। यात्री भी घबरा जाते थे। एप बंद होने के बाद अब राहत मिली है। सरकार ने समय रहते कार्रवाई की, नहीं तो चालकों की परेशानी और बढ़ जाती।     -दीपक कुमार, ई-रिक्शा चालक     मेरी गाड़ी छह-सात बार अचानक रुक गई थी। पहले समझ नहीं आया कि दिक्कत क्या है। बाद में एप के बारे में जानकारी मिली और खुद डाउनलोड कर गाड़ी चालू करनी पड़ी। अब एप बंद होने से निश्चिंत होकर काम कर रहे हैं।     -रणवीर कुमार, ई-रिक्शा चालक     चलते वाहन का अचानक बंद हो जाना बहुत खतरनाक था। इससे यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही थी। एप बंद होने के बाद स्थिति सामान्य हुई है। उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी किसी तकनीक का दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त व्यवस्था होगी।     -विकास सिंह, ई-रिक्शा चालक  

नगरीय प्रशासन विभाग ने बल्क वेस्ट जनरेटर्स के पंजीयन के लिए निकायों को जारी किया परिपत्र

नगरीय प्रशासन विभाग ने बल्क वेस्ट जनरेटर्स के पंजीयन के लिए निकायों को जारी किया परिपत्र सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स का पंजीयन सुनिश्चित कराने के निर्देश रायपुर.   नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी निकायों में बल्क वेस्ट जनरेटर्स का पंजीयन केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने संचालनालय से इस संबंध में सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को परिपत्र जारी किया है।   नगरीय प्रशासन विभाग ने परिपत्र जारी कर निकायों को जानकारी दी है कि केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड द्वारा वेस्ट जनरेटर के पंजीयन के लिए केन्द्रीकृत पोर्टल तैयार किया गया है। बल्क वेस्ट जनरेटर के पंजीयन के लिए केन्द्रीकृत पोर्टल https://swm.cpcb.gov.in 1 जून 2026 से प्रभावशील है। भारत सरकार द्वारा जारी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुसार चिन्हांकित सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स का पंजीयन केन्द्रीकृत पोर्टल पर किया जाना है। विभाग ने सभी निकायों को परिपत्र जारी कर केन्द्रीकृत पोर्टल पर चिन्हांकित सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स का पंजीयन कराना सुनिश्चित करने को कहा है।