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मुख्यमंत्री डॉ. यादव: प्रदेश ने चीतों को परिवार का हिस्सा बनाया, कूनो में 2 मादा चीते विमुक्त

श्योपुर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की धरती ने चीतों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराकर , उन्हें पुनर्स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर अपने परिवार का हिस्सा बनाया है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने लगभग साढ़े तीन वर्ष पहले कूनो में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। आज देश में चीता पुनर्स्थापना का यह प्रोजेक्ट सफलता के साथ में आयामों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।  इस महत्वपूर्ण कार्य में मध्यप्रदेश नित नए कीर्तिमान रच रहा है। यह बात उन्होंने श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में 2 मादा चीतों को खुले जंगल में विमुक्त करते हुए कही।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो नदी के किनारे स्थित चीता रिलीज साइट पर सीसीवी -2, सीसीवी -3 चीतों को खुले जंगल में छोड़ा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश धर्म, निवेश एवं जैव विविधता के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।  नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना से लाए गए चीतों के पुनर्स्थापन को निरंतर सफलता मिल रही हैं और आज प्रदेश ने देशभर में चीता स्टेट के रूप में पहचान बनाई है। वर्तमान में चीतों की संख्या 57 है, जिनमें से 54 कूनो नेशनल पार्क में और 03 गांधी सागर अभ्यारण्य में है। इस अवसर पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, मध्यप्रदेश वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामनिवास रावत, सहरिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष श्रीमती गुड्डी बाई आदिवासी,   श्री शशांक भूषण,  श्री राघवेन्द्र जाट,  श्री सुमित सिंघल, श्री शुभम मुदगल, श्री बाबू सिंह यादव, श्री कौशल गोयल आदि जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।  इसके साथ ही पीसीसीएफ श्रीमती समिता राजौरा , डीआईजी श्री संजय कुमार जैन,  कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक श्री सुधीर कुमार अग्रवाल, डीएफओ कुनो श्री आर थिरूकुराल, सामान्य श्री केएस रंधा, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती सौम्या आनंद, एडीएम श्री रूपेश उपाध्याय, एडिशनल एसपी श्री प्रवीण भूरिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  प्रदेश में 14 हजार से ज्यादा गिद्ध मौजूद  वहीं, गिद्ध संरक्षण में भी मध्यप्रदेश देश में अग्रणी बनकर उभरा है। राज्य में 14 हजार से ज्यादा गिद्ध मौजूद हैं। भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। हाल ही में मुक्त किया गया एक गिद्ध उज्बेकिस्तान तक पहुंचा, जिसे संरक्षण अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। कुनो नेशनल पार्क अब केवल चीता परियोजना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां चीतों की संख्या बढ़कर 57 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा गांधी सागर और नौरादेही को भी चीता लैंडस्केप के रूप में विकसित किया जा रहा है। हाथी संरक्षण के लिए 47 करोड़ की योजना मंजूर  सरकार ने नए अभ्यारण्यों और संरक्षण क्षेत्रों पर भी फोकस बढ़ाया है। सागर जिले में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर वाइल्डलाइफ सेंचुरी घोषित की गई, जबकि ओंकारेश्वर और जहानगढ़ में नए अभ्यारण्य बनाए जा रहे हैं। ताप्ती क्षेत्र को प्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया है। इसके साथ ही घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुए, हाथी और जंगली भैंसों के संरक्षण के लिए भी विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। सरकार ने हाथी संरक्षण के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की योजना मंजूर की है। वहीं, कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच को जोड़ने वाली मेगा टाइगर कॉरिडोर परियोजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। वन्यजीव संरक्षण के इन प्रयासों से पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश अब संरक्षण, विकास और स्थानीय भागीदारी को साथ लेकर आगे बढ़ने वाला देश का प्रमुख राज्य बनता जा रहा है।   

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बड़ा ऐलान: मुंगेली को मिले 353 करोड़ से अधिक के विकास कार्य

सुशासन तिहार 2026 : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुंगेली को दी 353 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की ऐतिहासिक सौगात 414 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और जल सुविधाओं को मिलेगा नया विस्तार संवेदनशीलता और सुशासन ही विकास की मुख्य अवधारणा : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर  प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आज मुंगेली जिला विकास, जनकल्याण और सुशासन के एक ऐतिहासिक अध्याय का साक्षी बना। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जिला मुख्यालय स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में शामिल होकर जिले को 353 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की लागत वाले 414 विकास कार्यों की सौगात दी। इनमें 152 करोड़ 02 लाख रुपये से अधिक की लागत के 284 कार्यों का लोकार्पण तथा 201 करोड़ 56 लाख रुपये से अधिक की लागत के 130 कार्यों का शिलान्यास शामिल है। इन कार्यों से जिले में आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और जनसुविधाओं को नई मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम में केन्द्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, वाणिज्य एवं उद्योग, श्रम तथा जिले के प्रभारी मंत्री लखनलाल देवांगन, बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक, मुंगेली विधायक पुन्नूलाल मोहले, तखतपुर विधायक धरमजीत सिंह, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकांत पाण्डेय, नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम के दौरान पुष्प वाटिका एवं चौपाटी, नहर, एनीकट, लाइवलीहुड कॉलेज भवन पहुंच मार्ग, मुंगेली-भटगांव पहुंच मार्ग सहित अनेक सड़क निर्माण कार्यों, महतारी सदनों, छात्रावासों, जल जीवन मिशन के कार्यों, सामुदायिक भवनों, अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों, प्राथमिक शाला भवनों, सांस्कृतिक मंचों, सीसी सड़कों, अमृत सरोवरों तथा आंगनबाड़ी भवनों का लोकार्पण किया। इसके साथ ही विभिन्न ग्रामों में सीसी सड़क, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सड़क मार्ग, एसटीपी निर्माण, तालाब सौंदर्यीकरण, फुटपाथ और पुल निर्माण सहित अनेक विकास कार्यों का शिलान्यास भी किया गया। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान के अंतर्गत स्वामी आत्मानंद विद्यालय मोतिमपुर, लालपुरथाना, लोरमी, पथरिया और सरगांव का वर्चुअल लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुशासन सरकार विकास और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज मुंगेली जिले को मिली विकास कार्यों की यह बड़ी सौगात आने वाले समय में जिले के विकास को नई गति प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से आमजनों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी, समयबद्ध और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है तथा शिकायतों के समाधान में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कार्रवाई भी की जा रही है। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर भक्ति और श्रम की प्रतीक माता कर्मा, सामाजिक समरसता के प्रतीक बाबा गुरु घासीदास, संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा शौर्य और त्याग के प्रतीक महाराणा प्रताप की प्रतिमाओं का अनावरण करते हुए कहा कि ये महापुरुष समाज को प्रेरणा देने वाले आदर्श हैं। उन्होंने नवागढ़ रोड में वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा स्थापना के लिए 25 लाख रुपये, मुंगेली में पोस्ट मैट्रिक छात्रावास भवन निर्माण, मेला नवागांव में बाउंड्रीवाल एवं प्रवेश द्वार निर्माण के लिए 20 लाख रुपये तथा सीसी सड़क निर्माण के लिए 10 लाख रुपये की घोषणा की। साथ ही चिकित्सा महाविद्यालय की मांग को पूरा करने के लिए सकारात्मक आश्वासन दिया। केन्द्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने जिले को मिली 353 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात के लिए मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए कहा कि प्रदेश में विकास और सुशासन को नई दिशा मिल रही है।  उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सरकार जनता के दुख-दर्द को समझते हुए त्वरित निर्णय ले रही है और मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रभारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि मुंगेली जिला निरंतर विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और यह सब मुख्यमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है। विधायक पुन्नूलाल मोहले ने जिले में हो रहे विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को सामग्री एवं सहायता राशि वितरित कर लाभान्वित भी किया। उन्होंने बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिले के चार विद्यार्थियों अंशुल शर्मा, नंदिता देवांगन, हेमा साहू और चैतूराम साहू को लैपटॉप प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को आवास की चाबियां, मनियारी बैराज योजना से प्रभावित परिवारों को प्रतिकात्मक चेक, मछुआरों को मछली जाल एवं आइस बॉक्स, किसानों को मिनी किट तथा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सहायता सामग्री वितरित की। कुल 282 से अधिक हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया गया। कार्यक्रम के अंत में जिला प्रशासन द्वारा अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संभागायुक्त सुनील जैन, आईजी बिलासपुर रामगोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल, डीएफओ अभिनव कुमार, अतिरिक्त कलेक्टर श्रीमती निष्ठा पाण्डेय तिवारी, जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पाण्डेय सहित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

नए भारत की नई खादी को मिल रही वैश्विक पहचान, विन्ध्या वैली-कबीरा बने गुणवत्ता के प्रतीक: राज्यमंत्री जायसवाल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खादी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि राष्ट्र की गौरवशाली पहचान और आत्मनिर्भर भारत का पथप्रदर्शक है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में खादी को "नए भारत की नई खादी" के रूप में नई पहचान मिली है, जिससे पूरे देश में खादी पुनर्जागरण का सूत्रपात हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश, युवाओं का सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। म.प्र. खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से खादी और ग्रामोद्योग राज्य की प्रगति का सशक्त स्तंभ बन रहे हैं। बुनकर मुद्रा योजना के तहत पिछले तीन वर्षों 2023-24 से 2025-26 में कुल 194 बुनकरों को 268.50 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया है। वर्ष 2023-24 में 44 बुनकरों को 21.40 लाख, 2024-25 में 147 बुनकरों को 231.80 लाख और 2025-26 में 3 बुनकरों को 15.30 लाख रुपये का ऋण दिया गया। उन्होंने कहा कि गांधीजी के ‘ग्राम स्वराज’ और ‘गाँव की ओर जाओ’ संदेश को साकार करते हुए बोर्ड ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, परंपरागत कारीगरी को आधुनिक नवाचार से जोड़ने और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ाने का कार्य कर रहा है। कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  दिलीप जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के "आत्मनिर्भर भारत, भारत में बनाओ, स्वदेशी के लिए मुखर, स्टार्टअप इंडिया" जैसे अभियानों और "सबका साथ, सबका विकास" मंत्र ने खादी एवं ग्रामोद्योग को वैश्विक पहचान दिलाई है। "स्थानीय से वैश्विक" का दृष्टिकोण कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ रहा है। राज्यमंत्री  जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा 50 हजार से 5 लाख तक की ऋण सुविधा व्यक्तिगत बुनकर, उद्यमी, स्व-सहायता समूह, हथकरघा संगठन और सहकारी समितियों को दी जा रही है। बुनकरों की सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना में तीन वर्षों में 616 बुनकर और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में 840 बुनकर बीमित किए गए। प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना में 436 रुपये वार्षिक शुल्क पर 2 लाख का जीवन बीमा और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में मात्र 20 रुपये वार्षिक शुल्क पर 2 लाख का दुर्घटना बीमा मिल रहा है। राज्यमंत्री  जायसवाल ने कहा कि म.प्र. खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड सूती, ऊनी, रेशमी एवं पॉलीवस्त्र खादी के साथ मसाले, साबुन, जड़ी-बूटी उत्पाद एवं हस्तनिर्मित वस्तुओं को बढ़ावा दे रहा है। विपणन के लिए "विन्ध्या वैली" और "कबीरा" जैसे नाम स्थापित किए गए हैं जो गुणवत्ता और परंपरा के प्रतीक हैं। "अपना हाथ – अपना साथ" के मार्गदर्शन में महिला स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और उद्यमियों को तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है। प्रबंध संचालक  माल सिंह भयड़िया ने बताया कि महात्मा गांधी जी के "गाँव की ओर चलो" आह्वान से प्रेरित होकर मंडल ने ग्रामोद्योग को आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन का सशक्त साधन बनाया है। सुव्यवस्थित योजनाओं से ग्रामीण कारीगरों के उत्पादों को उचित बाजार मिल रहा है। बोर्ड की नई अंतरजाल साइट कारीगरों, उद्यमियों एवं समाज के बीच मजबूत सेतु का कार्य करेगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्रदर्शनियाँ प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित कर रही हैं। तीन वर्षों की प्रगति एक नजर में     बुनकर मुद्रा योजना: 194 बुनकरों को 268.50 लाख रुपये का ऋण वितरित     प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना: 616 बुनकर बीमित     प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना: 840 बुनकर बीमित  

मुख्यमंत्री ने हाटकेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख समृद्धि की कामना की

मुख्यमंत्री ने हाटकेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख समृद्धि की कामना की रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के महादेव घाट स्थित हाटकेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने महादेव से राज्य की खुशहाली और समृद्धि की कामना की।               इस दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक पुरन्दर मिश्रा, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।              उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री साय आज हाटकेश्वर महादेव मंदिर परिसर महादेव घाट में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होने पहुंचे थे।

राशन से लेकर गैस सिलेंडर तक e-KYC अनिवार्य, आधार लिंक नहीं होने पर अटक सकती हैं सुविधाएं

भिंड सार्वजनिक वितरण प्रणाली और घरेलू गैस वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने राशन कार्ड और गैस सिलेंडर से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं। अब पुराने कागजी राशन कार्ड धीरे-धीरे समाप्त कर स्मार्ट कार्ड या क्यूआर कोड आधारित डिजिटल कार्ड जारी किए जाएंगे। वहीं राशन कार्ड को आधार से लिंक कराना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने वालों का राशन कार्ड निरस्त किया जा सकता है और उन्हें सरकारी खाद्यान्न का लाभ नहीं मिलेगा। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए डिजिटल फॉर्मेट और आधार लिंकिंग सरकार का उद्देश्य फर्जी राशन कार्ड, डुप्लीकेट लाभार्थियों और कालाबाजारी पर रोक लगाना है। नए सिस्टम के तहत राशन कार्ड की पूरी जानकारी डिजिटल फॉर्मेट में रहेगी। परिवार के सभी सदस्यों के आधार नंबर कार्ड से लिंक किए जाएंगे, जिससे पात्र हितग्राहियों की पहचान आसानी से हो सकेगी। राशन कार्ड की जानकारी मोबाइल और ऑनलाइन पोर्टल पर भी उपलब्ध रहेगी।  

वायरल वीडियो में हितग्राही के उड़ीसा में निवासरत होने के कारण आवास सर्वे में नहीं था नाम, जल्द दिलाया जाएगा आवास- जिला पंचायत सीईओ गरियाबंद

रायपुर राज्य शासन द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों के लिए केंद्र प्रवर्तित पीएम जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत अब तक  राज्य में सर्वे कर 33 हजार से अधिक आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से लगभग 21 हजार आवास पूर्ण भी हो चुके हैं। ऐसे हितग्राही जो पूर्व में छूट गए थे, उनके लिए भारत सरकार से विशेष आग्रह कर राज्य शासन द्वारा विशेष अनुमति प्राप्त कर उनका पुनः सर्वे कार्य जारी है, जो एक-दो दिनों में पूर्ण हो जाएगा। सर्वे पूर्ण होते ही पात्र हितग्राहियों को तत्काल आवास स्वीकृत किए जाएंगे।        सोशल मीडिया में एक वायरल वीडियो के संबंध में जिला पंचायत सीईओ श्री प्रखर चंद्राकर ने स्पष्ट किया कि समाधान शिविर के दौरान एक हितग्राही जो विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार से आते हैं अपना आवेदन लेकर शिविर में आये थे। उनका परिवार पूर्व में छत्तीसगढ़ में निवास नहीं कर रहा था, वे उड़ीसा में ही रह रहे थे। जिसके कारण वर्ष 2011 एवं वर्ष 2018 की आवास सर्वे सूची में उनके परिवार को शामिल नहीं किया जा सका था, हाल में वर्ष 2024 में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कराए गए नवीन सर्वेक्षण के दौरान भी उक्त परिवार ग्राम में निवासरत नहीं था, तब वे उड़ीसा में निवास कर रहे थे और पिछले कुछ दिनों पूर्व ही वे छत्तीसगढ़ आये थे। उसके वापस लौटने के बाद उनके परिवार का सर्वे पीएम जनमन योजना के तहत पूर्ण कर लिया गया है और उसे शीघ्र ही आवास स्वीकृत कर दिया जाएगा।        उन्होंने बताया कि जिले में पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है। पीएम जनमन के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति के जिले में अलग अलग बसाहटों में निवासरत होने के कारण बार बार सर्वे कराकर हितग्राहियों को जोड़ने का कार्य भी किया गया है। ऐसे परिवार जिनका पूर्व में सर्वे नहीं हुआ था, ऐसे शेष पात्र परिवारों हेतु सर्वेक्षण पूर्ण कर सूची तैयार कर ली गई है तथा भारत सरकार से स्वीकृति प्राप्त होने की प्रतीक्षा है।            जिला प्रशासन द्वारा सभी पात्र परिवारों को नियमानुसार योजना का लाभ उपलब्ध कराने हेतु सतत कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उड़ीसा में होने के कारण उक्त परिवार का राशन कार्ड एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज भी अपूर्ण थे, जिसे अधिकारियों द्वारा तत्परता दिखाते हुए समाधान शिविर में ही बनाने का कार्य किया गया। जहां उनका राशन कार्ड एवं मनरेगा जॉब कार्ड तत्काल बनाया गया तथा आयुष्मान कार्ड के लिए भी कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गयी है। इसके साथ ही उन्हें आश्वश्त किया गया कि शासन प्रशासन हर कदम पर आपके साथ है।

‘एल्गी ट्री’ मशीन भोपाल में, पर्यावरण के लिए 25 पेड़ों के बराबर फायदा

 भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है. देश में पहली बार वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड सोखने वाली आधुनिक ‘एल्गी ट्री’ तकनीक की शुरुआत भोपाल से हुई है. इस नई तकनीक को अशोका गार्डन स्थित विवेकानंद पार्क में स्थापित किया गया है. बढ़ते प्रदूषण, लगातार बढ़ रही गर्मी और हीटवेव जैसी समस्याओं के बीच इसे एक प्रभावी हरित समाधान के रूप में देखा जा रहा है।  25 पेड़ों के बराबर कार्बन सोखने की है क्षमता इस तकनीक को मशरूम वर्ल्ड ग्रुप ने विकसित किया है. कंपनी के अनुसार यह एक माइक्रोएल्गी आधारित सिस्टम है, जो वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन छोड़ता है. दावा किया गया है कि ‘एल्गी ट्री’ की एक यूनिट लगभग 25 पेड़ों के बराबर कार्बन अवशोषित करने की क्षमता रखती है. इसके जरिए सालाना करीब 1.5 टन तक कार्बन डाइऑक्साइड को कम किया जा सकता है, जिससे शहरों की वायु गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।  कंपनी का कहना है कि इस तकनीक को विकसित करने में करीब दो साल का समय लगा. इस दौरान 50 से अधिक विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और इंजीनियरों की टीम ने लगातार रिसर्च और परीक्षण किए. तकनीक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह कम जगह में अधिक प्रभावी तरीके से कार्बन को नियंत्रित कर सके. खास बात यह है कि इसे सार्वजनिक स्थानों, पार्कों, व्यस्त बाजारों, संस्थानों और ट्रैफिक वाले इलाकों में आसानी से लगाया जा सकता है।  अन्य शहरों के लिए भी उपयोगी होगी ये तकनीकी पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसी तकनीकें शहरों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती हैं. तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण शहरों में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में ‘एल्गी ट्री’ जैसी तकनीक स्थानीय स्तर पर कार्बन लोड कम करने, तापमान संतुलित रखने और लोगों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है।  भोपाल अब देश का पहला शहर बन गया है, जहां इस तकनीक को सार्वजनिक रूप से लागू किया गया है. इसे लेकर स्थानीय लोगों में भी उत्साह देखा जा रहा है. कंपनी ने भविष्य में देश के अन्य शहरों में भी इस तकनीक का विस्तार करने की योजना बनाई है. यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में भारत के कई बड़े शहरों में ‘एल्गी ट्री’ प्रदूषण नियंत्रण का नया माध्यम बन सकता है। 

सुकमा जिले के 1 लाख 54 हजार 157 लोगों की स्वास्थ्य जांच पूरी

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं कलेक्टर  अमित कुमार के मार्गदर्शन में सुकमा जिले में मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत स्वास्थ्य जांच और उपचार कार्य तेजी से संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ एवं अंदरूनी क्षेत्रों के जरूरतमंद नागरिकों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में कोंटा विकासखंड के दूरस्थ नियद नेल्लानार क्षेत्र के अरलमपल्ली, पोलमपल्ली, दोरनापाल, बगड़ेगुड़ा, रंगाईगुड़ा, कोलईगुड़ा एवं पेंटापाड़ जैसे गांवों से कुल 39 मरीजों को जिला चिकित्सालय सुकमा लाकर जांच एवं उपचार कराया गया। जिला चिकित्सालय में इन मरीजों का समुचित परीक्षण कर उपचार सुनिश्चित किया गया, जिसमें 16 लोगों को प्रेसबायोपिक चश्मा प्रदान किया गया तथा 8 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। वहीं नियद नेल्लानार के गोगुंडा पहाड़ी क्षेत्र से 5 उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित लाकर जांच कराई गई और आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श के साथ वापस भेजा गया। इसके अतिरिक्त कोसागुड़ा से 6 मरीजों को अल्ट्रासाउंड एवं रक्त चढ़ाने हेतु भेजा गया था, जबकि 4 मरीज हाथ-पैर सूजन की समस्या से पीड़ित थे, जिनका भी उपचार कर राहत प्रदान की गई। जिला चिकित्सालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत सुकमा जिले में कुल स्वास्थ्य जांच का लक्ष्य 2,93,386 निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक 1,54,157 लोगों की स्वास्थ्य जांच पूरी की जा चुकी है। जांच के दौरान कुल 4990 मरीजों को मोतियाबिंद, मलेरिया, कुष्ठ, टीबी, खून की कमी, उच्च जोखिम गर्भवती महिला, कुपोषित बच्चे, बीपी और शुगर जैसी बीमारियों से चिन्हांकित कर प्राथमिक, सामुदायिक एवं जिला अस्पतालों में उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।  कलेक्टर  अमित कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से जिले के दूरस्थ एवं अंदरूनी क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी जरूरतमंद नागरिक इलाज से वंचित न रहे। अभियान के अंतर्गत चिन्हांकित मरीजों को समय पर जिला चिकित्सालय लाकर जांच, उपचार, ऑपरेशन एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।   मानवीय संवेदनशीलता और प्रशासनिक तत्परता का परिचय देते हुए सभी मरीजों का इलाज पूर्ण कराने के बाद उन्हें सुरक्षित घर वापस भेजने की व्यवस्था भी की गई। सुबह 6 बजे जिला अस्पताल में 4 एम्बुलेंस लगाकर मरीजों को नाश्ता कराया गया और फिर उन्हें उनके गांवों तक पहुंचाया गया। यह व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि शासन-प्रशासन दूरस्थ अंचलों के लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें सम्मान और सुरक्षा के साथ इलाज उपलब्ध करा रहा है।

भोपाल से कानपुर का सफर होगा आसान, 4-लेन रोड से समय में बड़ी कटौती

भोपाल भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले फेस में भोपाल से विदिशा के बीच इस साल के आखिर तक लॉजिस्टिक और इंडस्ट्रियल अधोसंरचना का काम नजर आने लगेगा। नेशनल हाईवे के निर्माणाधीन इस 42 किमी. के हिस्से के पास एमपीआइडीसी ने इंटीग्रेटेड मैन्यूफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर के तौर पर विकसित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स होंगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण रोड पर काम कर रहा है, जबकि एमपीआइडीसी लॉजिस्टिक हब डेवलपमेंट से जुड़ी गतिविधियां तय करेगा। लॉजिस्टिक हब के तौर पर इसके विकसित होने से भोपाल व विदिशा के बीच छोटे उद्योगों और वेयरहाउसिंग का बड़ा जाल बिछने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश में रोजगार बढ़ेगा। राजधानी के विकास का रास्ता भी बदलेगा टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ के अनुसार अभी शहर का पूरा विकास दक्षिण दिशा यानी नर्मदापुरम रोड व इंदौर रोड की ओर है। इस कॉरिडोर के बनने से ये रायसेन रोड, विदिशा रोड की ओर होगा। विदिशा रोड खुद इकोनॉमिक कॉरिडोर में बदलेगा तो यहां नए प्रोजेक्ट्स नए विकास की स्थितियां बनेंगी। नर्मदापुरम रोड से इसे जोडऩे पहले से ही बायपास है। इंदौर रोड की ओर भी प्रस्तावित पश्चिमी बायपास से जुड़ेगा। ऐसे समझें अभी क्या है स्थिति भोपाल के पास दीवानगंज/सलामतपुर वाले क्षेत्र से विदिशा की ओर बढ़ता है। भोपाल से विदिशा तक की 42 किमी. की दूरी को कवर करता है। यह कॉरिडोर भोपाल को उत्तर प्रदेश के कानपुर नौबस्ता/रिंग रोड से जोड़ेगा। इस हिस्से पर काम सबसे तेज गति से चल रहा है। 4-लेन चौड़ीकरण का काम अब बाहर नजर आने लगा है। भोपाल, विदिशा, सागर, छतरपुर में भूमि अधिग्रहण का अधिकांश काम पूरा हो चुका है। इकोनॉमिक कॉरिडोर पर डालें एक नजर     इसकी कुल लंबाई 526 किमी.। इसमें से 360 किमी. मध्य प्रदेश में है।     यह एक 4-लेन हाईवे होगा। कुछ हिस्सों में 6-लेन की योजना भी है।     भोपाल से कानपुर जाने में अभी 12-13 घंटे लगते हैं। कॉरिडोर से यह सफर सात से आठ घंटे में पूरा होगा।     मध्य प्रदेश वाले हिस्से के लिए 3600 करोड़ रुपए मंजूर है।     भोपाल से विदिशा का भाग 42 किमी. का है। इसमें मौजूदा सड़क को ही हाइवे में बदला जा रहा है।     कॉरिडोर का काम जनवरी में शुरू हुआ है । नेशनल हाइवे व एमपीआइडीसी से प्रशासन इसपर लगातार चर्चा कर रहा है। इसके काम तेजी से पूरे कराने के साथ कॉरिडोर का आमजन को लाभ दिलाने नई योजना बनाई जा रही है। – प्रियंक मिश्रा, कलेक्टर

शहर में बनेंगे 10 हजार नए फ्लैट, आवास परियोजना को हरी झंडी

इंदौर प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत नगर निगम ने विभिन्न स्थलों पर आवास निर्माण करने के लिए कुल 5 डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) राज्य शासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजी थी। सरकार के 5 में से 2 डीपीआर मंजूर करते ही निगम फ्लैट निर्माण के काम पर लग गया है, जो कि ताप्ती परिसर ट्रेजर फैंटेसी (सिंदौड़ा रंगवासा) और बढिय़ा कीमा में बनेंगे। सबके पास खुद का आवास हो और मकान की कीमत भी कम हो इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई है। योजना के पहले चरण में इंदौर शहर और आसपास 13 जगहों पर मिली सरकारी जमीन पर 18606 फ्लैट बनने के साथ लोगों को आबंटित होना शुरू हो गए हैं। अब प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 पर काम शुरू किया गया है। भेजी गई डीपीआर मंजूरी इसके चलते ताप्ती परिसर ट्रेजर फैंटेसी (सिंदौड़ा रंगवासा), सनावदिया, बढिय़ा कीमा और उमरीखेड़ा में 10 हजार फ्लैट बनाने की डीपीआर मंजूरी के लिए राज्य शासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजी गई। निगम अफसरों के अनुसार ताप्ती परिसर और बढिया कीमा की डीपीआर मंजूर हो गई है। अब जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। रायपुर में भाजपा की बड़ी बैठक इसके लिए पिछले दिनों निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और प्रधानमंत्री आवास योजना के अपर आयुक्त अर्थ जैन ने स्थल निरीक्षण किया था। साथ ही अफसरों को निर्देशित किया गया कि योजना के अंतर्गत प्रस्तावित सभी आवासीय परियोजनाओं से पात्र हितग्राहियों को शीघ्र लाभ मिल सके, इसके लिए फ्लैट का निर्माण जल्द से जल्द शुरू किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 पर एक नजर     6048 वन बीएचके के फ्लैट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए बनेंगे।     1368 टू बीएचके के फ्लैट बनेंगे। 720 थ्री बीएचके के फ्लैट बनेंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना क्या है… प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों, निम्न आय वर्ग (LIG), और मध्यम आय वर्ग (MIG) के परिवारों को 2022 (और अब 2.0 के तहत आगे) तक पक्का घर उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत सरकार घर बनाने या खरीदने के लिए सब्सिडी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। योजना के तहत, पात्र लाभार्थियों को नया घर बनाने या कच्चे घर को पक्का करने के लिए लगभग 1.20 लाख से 2.50 लाख तक की वित्तीय सहायता/सब्सिडी मिलती है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक के पास पहले से कोई पक्का घर नहीं होना चाहिए। यह योजना मुख्य रूप से EWS (आर्थिक रूप से कमजोर), LIG (निम्न आय वर्ग) और MIG (मध्यम आय वर्ग) के लिए है।