samacharsecretary.com

अगले 48 घंटे स्पर्श दर्शन पर रोक: काशी विश्वनाथ पहुंचे भक्तों के लिए अहम सूचना

काशी  काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में पत्थर (संगमरमर) बदलने का कार्य के चलते अगले दो दिनों तक स्पर्श दर्शन पर रोक जारी रहेगी। इसलिए मंदिर प्रशासन ने कार्य जारी रहने तक स्पर्श दर्शन पर रोक बढ़ा दिया है। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं से प्रशासन ने अनुरोध किया है कि वे असुविधा को देखते हुए सहयोग बनाए रखें।   जानकारी मुताबिक, मंदिर गर्भगृह के फर्श पर पुराने संगमरमर की जगह नया पत्थर लगाने का कार्य बुधवार को शुरू किया गया था। प्रारंभिक योजना के अनुसार, यह कार्य गुरुवार तक पूरा होना था, लेकिन श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या और पांचों पहर की आरती के दौरान अतिरिक्त भीड़ के कारण मजदूरों और तकनीकी कर्मचारियों का काम प्रभावित हुआ। इस वजह से काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने कार्य की अवधि बढ़ाकर शुक्रवार और शनिवार तक बढ़ाने का फैसला लिया। मंदिर के डिप्टी कलेक्टर शंभु शरण ने बताया कि संगमरमर परिवर्तन का यह कार्य मंदिर की समय-समय पर होने वाली नियमित रखरखाव प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि गर्भगृह में अत्यधिक भीड़ और संकुल वातावरण को देखते हुए सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक था। इसी कारण कार्य पूरा होने तक स्पर्श दर्शन को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। मंदिर में आम दर्शन जारी रहेंगे उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि काशी मंदिर में आम दर्शन जारी रहेंगे और भक्त दूर से विश्वनाथ बाबा के दर्शन कर सकेंगे। केवल मंदिर गर्भगृह में प्रवेश और स्पर्श दर्शन ही प्रतिबंधित रहेंगे। मंदिर प्रशासन ने बताया कि संगमरमर बदलने का काम बेहद सावधानी से किया जा रहा है ताकि गर्भगृह की पवित्रता और संरचना सुरक्षित रहे। विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे भीड़भाड़ के समय धैर्य रखें और सुरक्षा व व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही कार्य पूरा होगा, स्पर्श दर्शन सामान्य रूप से शुरू कर दिए जाएंगे।  

मजीठिया के नज़दीकी पर कानूनी शिकंजा कसता, गिरफ्तारी वारंट जारी

पंजाब  पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। विशेष अदालत ने मजीठिया के साले गजपत सिंह ग्रेवाल की गिरफ्तारी के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दी गई रिपोर्ट और अदालत में दायर आवेदन के आधार पर की गई। विजिलेंस के मुताबिक जांच के दौरान ग्रेवाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई और बाद में उनका नाम एफआईआर में जोड़ा गया। जांच अधिकारी इंस्पेक्टर इंदरपाल सिंह ने अदालत में बताया कि ग्रेवाल को कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन वे न तो जांच में पेश हुए और न ही किसी तरह का सहयोग किया। विजिलेंस का कहना है कि ग्रेवाल पर मजीठिया की कथित अवैध संपत्तियों को इकट्ठा करने और उन्हें छिपाने में मदद करने का आरोप है। रिकॉर्ड देखने और दलीलें सुनने के बाद विशेष जज नीतिका वर्मा ने गिरफ्तारी वारंट जारी करने की अनुमति दे दी। जारी किए गए वारंट 29 नवंबर 2025 को रिटर्नेबल होंगे। गौरतलब है कि बिक्रम मजीठिया पहले से आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस की जांच के दायरे में हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, मजीठिया ने लगभग 700 करोड़ रुपये की संपत्ति कथित तौर पर खड़ी की, जो कथित तौर पर 2013 के ड्रग नेटवर्क की कमाई को वैध दिखाकर बनाई गई थी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा हाई-टेक प्लानिंग से: हरियाणा सरकार ने लॉन्च किया ‘जिला मॉडल 2.0’

चंडीगढ़  प्रदेश की नायब सरकार ने जिला स्तर पर विकास को लेकर नया अध्याय खोल दिया है। अब तक विकास योजनाओं पर खर्च होने वाला बजट कई दिशाओं में बिखर जाता था, लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 से पूरी व्यवस्था बदलने वाली है। राज्य ने एक ‘जिला मॉडल 2.0’ तैयार किया है, जिसमें पहली बार अलग-अलग सेक्टरों के लिए तय प्रतिशत, स्पष्ट सीमाएं और कड़ी निगरानी की व्यवस्था लागू की जा रही है। यह बदलाव केवल पॉलिसी नहीं, बल्कि गांव और कस्बों की वास्तविक तस्वीर बदलने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने नई पॉलिसी में बजट का 60 प्रतिशत हिस्सा बुनियादी ढांचे पर खर्च करने का निर्णय लिया है। अब जिलों की योजना राशि का 60 प्रतिशत सिर्फ उन कार्यों में लगेगा जिनका जनता रोज उपयोग करती है। इनमें गलियां, नालियां, पेयजल लाइनों का विकास, सिंचाई ढांचा, सड़कें, पुल, स्वास्थ्य केंद्र, ऊर्जा से जुड़े प्रोजेक्ट और पशुधन व बागवानी योजनाएं शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि जब तक बुनियादी ढांचा मजबूत नहीं होगा, बाकी विकास अधूरा ही रहेगा। लंबे समय से शिकायत थी कि जिलों में विकास कार्यों का चयन बिना ठोस ढांचे के होता रहा। कई बार पंचायतें अपनी पसंद से काम चुन लेती थीं, तो कई परियोजनाएं डीडीएमसी स्तर पर मंजूर हो जाती थीं, भले वे योजना के मूल उद्देश्य से बाहर हों। इसी वजह से कई जरूरी कार्य अधर में लटके और बजट का बिखराव बढ़ता गया। नई व्यवस्था में यह स्थिति बदल दी गई है। पहली बार सरकार ने स्पष्ट सूची जारी की है कि कौन से कार्य स्वीकार्य हैं और कौन से नहीं। अब किसी भी स्तर पर मनमानी मंजूरियों का रास्ता बंद होगा। सिर्फ जरूरत के हिसाब से मिलेगी मंजूरी सरकार के अनुसार, अब जिला योजनाओं का फोकस जरूरत पर रहेगा, न कि दबाव पर। जनप्रतिनिधियों के दबाव में भी काम नहीं होंगे, बल्कि जनता की वास्तविक जरूरतों के आधार पर निर्णय लिए जाएंगे। फंड का आवंटन इस तरह तय किया गया है कि हर जिला अपनी प्राथमिकता के अनुसार योजना चुने। पिछड़े इलाकों को पहले लाभ मिले। तात्कालिक और महत्वपूर्ण कार्यों को तुरंत स्वीकृति मिले, जबकि कम जरूरी योजनाएं बाद में आएं। सरकार का कहना है कि एक समान फार्मूला सभी जिलों पर लागू नहीं हो सकता, इसलिए हर जिले की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुसार सेक्टर-वार सीमा तय की गई है। शिक्षा, महिला और बाल विकास को तय हिस्सा नई योजना में तीन ऐसे क्षेत्र शामिल किए गए हैं जिन्हें पहले अपेक्षाकृत कम फंड मिलता था। इनमें सामुदायिक भवन, स्कूल–कॉलेज और आंगनवाड़ी व बाल पोषण से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। नए नियम के अनुसार, इन्हें अब 10-10 प्रतिशत फंड तय रूप से मिलेगा। इससे उन इलाकों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से शिक्षा और सामुदायिक सुविधाओं की कमी झेल रहे थे। जिला योजना में निजी एजेंसियों की एंट्री बंद नीति का यह निर्णय सबसे प्रभावशाली माना जा रहा है। अब जिला योजना के तहत किसी भी प्रोजेक्ट में निजी एजेंसियां सीधे शामिल नहीं होंगी। सभी कार्य डीडीएमसी की निगरानी में सरकारी विभागों के माध्यम से ही होंगे। डीडीएमसी में मंत्री अध्यक्ष, उपायुक्त उपाध्यक्ष होते हैं, जबकि सांसद, विधायक, महापौर और जनप्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होते हैं। सरकार का मानना है कि इससे जवाबदेही बढ़ेगी और निजी हितों की संभावनाएं खत्म होंगी। फाइल से फील्ड तक ट्रैकिंग मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के अनुसार, निगरानी की कमजोर कड़ी अब समाप्त की जा रही है। नया ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि हर प्रोजेक्ट की शुरुआत, स्वीकृति, लागत और प्रगति ऑनलाइन ट्रैक होगी। डीडीएमसी को नियमित रिपोर्ट देनी होगी। गलत मंजूरियों या लापरवाही पर जिम्मेदारी तय होगी। सरकार इसे ‘स्मार्ट निगरानी तंत्र’ बता रही है। जिला दर जिला बदलेगी तस्वीर पहली बार प्राथमिकता आधारित विकास योजनाओं को लागू किया जा रहा है। अब यह नहीं देखा जाएगा कि कौन किसकी परियोजना आगे बढ़ा रहा है, बल्कि यह देखा जाएगा कि जनता के लिए कौन सा काम जरूरी है। फंड का बिखराव रुकेगा और प्रभाव बढ़ेगा। बजट तय ढांचे में चलेगा, जिससे अधूरे काम रुकेंगे नहीं। गांव और कस्बों की बुनियाद मजबूत होगी और सड़क, पानी, नालियों, पुलों तथा स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं पहले से तेज़ी से सुधरेंगी। अब विकास का केंद्र वे इलाके होंगे जिन्हें लंबे समय से नज़रअंदाज किया जाता रहा।

महिला एवं बाल विकास विभाग पंजाब: 6100 से अधिक आंगनवाड़ी पदों पर सुनहरा मौका

चंडीगढ़  पंजाब सरकार की तरफ से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर के पदों पर बंपर भर्ती निकली है. सामाजिक सुरक्षा एवं महिला बाल विकास विभाग ने कुल 6116 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इसमें 1316 पद आंगनवाड़ी वर्कर (AWW) और 4794 पद आंगनवाड़ी हेल्पर (AWH) के लिए रखे गए हैं. ये सभी पद सिर्फ महिलाओं के लिए हैं और पंजाब के अलग-अलग जिलों के आंगनवाड़ी सेंटर्स में भरे जाएंगे. इस भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया 19 नवंबर 2025 से ही शुरू हो चुकी है. इच्छुक महिला उम्मीदवार 10 दिसंबर 2025 तक ऑफिशियल वेबसाइट sswcd.punjab.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं. आवेदन करने के लिए नीचे दिए स्टेप्स को फॉलो करें. कौन कर सकता है अप्लाई? उम्मीदवार महिला होनी चाहिए. 10वीं तक पंजाबी भाषा पास होना जरूरी है. इसमें अलग-अलग पदों के लिए योग्यता अलग है. अगर आपकी शिक्षा ज्यादा है, जैसे 12वीं, ग्रेजुएशन, BEd या ETT है, तो ये मेरिट में फायदा देगा क्योंकि चयन पूरी तरह मेरिट से होगा. कैसे होगा सेलेक्शन? इस भर्ती की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी भी तरह की लिखित परीक्षा नहीं होगी और पूरा चयन सिर्फ मेरिट के आधार पर किया जाएगा. मेरिट तैयार करते समय 10+2 पास होने पर 30%, ग्रेजुएशन पर 30%, B.Ed या ETT पर 10% और इंटरव्यू में प्रदर्शन पर 30% वेटेज जोड़ा जाएगा. इन सब को जोड़कर फाइनल मेरिट तैयार की जाएगी. मेरिट में नाम आने के बाद कैंडिडेट्स को काउंसलिंग या इंटरव्यू के लिए ईमेल, कॉल या वेबसाइट के जरिए जानकारी दी जाएगी.

योगी सरकार की सौर क्रांति, गांव-गांव पहुंची रोशनी, बदल गई ऊर्जा की तस्वीर

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश, योगी सरकार का रिकॉर्ड प्रदर्शन सौर क्रांति ऊर्जा के साथ-साथ रोजगार का उजाला लेकर भी आयी लखनऊ,  कभी उत्तर प्रदेश के गांवों में शाम ढलते ही अंधेरा तेजी से फैल जाता था। घरों में टिमटिमाती रोशनी, बढ़ते बिजली बिल और अनिश्चित सप्लाई लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे। लेकिन योगी सरकार ने राज्य की ऊर्जा कहानी को बदलने का दृढ़ निश्चय किया। लक्ष्य सिर्फ बिजली देना नहीं था बल्कि प्रदेश के हर घर तक एक नई रोशनी, नई उम्मीद और नई समृद्धि पहुंचाना था। यही सोच आगे चलकर एक ऐसी क्रांति बनी, जिसने उत्तर प्रदेश को सौर ऊर्जा उत्पादन में राष्ट्रीय पटल पर तीसरे स्थान पर ला खड़ा किया। आज गांवों की छतों पर चमकते सोलर पैनल न सिर्फ बिजली पैदा कर रहे हैं, बल्कि नए भारत की परिकल्पना को साकार भी कर रहे हैं। जब योजना शुरू हुई तो अंदाजा नहीं था कि जनता का इतना जबरदस्त समर्थन मिलेगा। लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में कुल 13,46,040 आवेदन प्राप्त हुए। यह स्वयं दिखाता है कि लोग बदलाव के लिए कितने तत्पर थे। मात्र 18 महीनों में 2,81,769 सोलर रूफटॉप संयंत्रों का इंस्टॉलेशन और पिछले 4.5 महीनों में रिकॉर्ड 1,30,000 संयंत्रों की स्थापना ने उत्तर प्रदेश को महाराष्ट्र और गुजरात के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक राज्य बना दिया। प्रदेश में 976.21 मेगावॉट रूफटॉप सोलर कैपेसिटी स्थापित हो चुकी है। यह उपलब्धि न सिर्फ तकनीकी है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी परिवर्तनकारी है। सौर ऊर्जा योजना अब तक 2,85,025 उपभोक्ताओं के लिए वरदान साबित हुई है। जहां पहले प्रति घर 1500 रुपये तक का बिजली बिल आता था, वहीं अब सोलर रूफटॉप की वजह से हर महीने काफी बचत हो रही है। ऐसे में इससे एक साधारण परिवार के लिए आर्थिक स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में यह बचत खेती-किसानी में सहारा बन रही है, जबकि शहरी इलाकों में बिजली पर निर्भर छोटे उद्यमों को नया जीवन मिल गया है। सौर ऊर्जा क्रांति ने सिर्फ रोशनी नहीं फैलाई बल्कि इसने रोजगार के विशाल द्वार भी खोले। अकेले उत्तर प्रदेश में 54,000 से अधिक युवाओं को सीधा रोजगार मिला है। देशभर में सोलर मॉड्यूल निर्माण, इन्वर्टर, वायरिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में लाखों नौकरियां सृजित हुईं। साफ है कि यह योजना ऊर्जा के साथ-साथ रोजगार का भी उजाला लेकर आई है। मुफ्त बिजली, घरेलू बचत और रोजगार, इन तीन स्तंभों पर आधारित यह योजना अगले 25 वर्षों में प्रदेश की GDP में हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त योगदान देगी। ऊर्जा लागत में कमी ने छोटे व्यापारों और स्टार्टअप्स को प्रतिस्पर्धा में और मजबूत बना दिया है। रोजाना 40 लाख यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। यह सालाना करोड़ों यूनिट ऊर्जा उत्पादन के बराबर है और कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी लाता है। जितनी कमी कई करोड़ पेड़ों के बराबर पर्यावरणीय लाभ देती है। वाराणासी के रहने वाले श्वसन रोग विशेषज्ञ और पीएम सूर्य घर के तहत सोलर संयंत्र का उपयोग कर रहें डॉ एस के श्रीवास्तव का कहना है कि बिजली और पैसों की बचत के साथ सोलर लगाने पर सरकार द्वारा मिल रही सब्सिडी सोने पर सुहागा है। राज्य सरकार की ये योजना ऐसे ही चलती रही तो आने वाले समय में पर्यावरण सुरक्षा के साथ ही श्वास के रोगियों की संख्या में भी कमी आएगी। वहीं दनियालपुर के रहने वाले इम्तियाज़ अहमद ने बताया कि योगी सरकार इस पर सब्सिडी नहीं देती तो सोलर संयंत्र लगवा पाना मुश्किल था।   सौर पार्क बनाने के लिए जहां 4000 एकड़ भूमि की आवश्यकता थी, उसे संरक्षित रख कर बड़ा कदम उठाया गया। यह भूमि कृषि, जल संरक्षण, उद्योग और अन्य सार्वजनिक हितों के लिए सुरक्षित रहेगी। जाहिर है कि ये  विकास और पर्यावरण का संतुलित मॉडल है।

नितीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए सीएम योगी

लखनऊ  बिहार में नई सरकार के गठन के अवसर पर आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। नितीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत एनडीए के तमाम मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया था। मुख्यमंत्री योगी जैसे ही पटना एयरपोर्ट पर पहुंचे तो समर्थकों के बीच अद्भुत उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देखते ही लोगों ने जय श्री राम के नारे लगाए। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने गुरुवार को 10वीं बार शपथ ली। मुख्यमंत्री योगी की यह उपस्थिति न सिर्फ दोनों राज्यों के बीच बढ़ते राजनीतिक और विकासात्मक संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और समन्वय को नई दिशा प्रदान करती है। हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने एनडीए के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभाई थी। चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने बिहार के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में अनेक जनसभाओं को संबोधित किया था। उनके प्रभावशाली वक्तव्यों, जनसंपर्क शैली और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता ने पार्टी के पक्ष में सकारात्मक माहौल तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चलाए गए चुनाव अभियान के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति ने पार्टी और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह और ऊर्जा भरी थी। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में विकसित भारत के लिए सुरक्षा, विकास, सुशासन और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों पर जनता के बीच स्पष्ट और सशक्त संदेश दिए। बिहार की जनता के प्रति उनकी आत्मीयता और भरोसेमंद नेतृत्व शैली ने न केवल मतदाताओं को प्रभावित किया बल्कि भाजपा संगठन को भी मजबूत आधार प्रदान किया। शपथ ग्रहण समारोह में उनकी उपस्थिति इस बात का भी प्रतीक है कि भारतीय जनता पार्टी केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि विकासात्मक और सामाजिक सहयोग के दृष्टिकोण से भी दोनों राज्यों के बीच संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उत्तर प्रदेश और बिहार, दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक रिश्ते सदियों से जुड़े रहे हैं। ऐसे में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों का एक साथ आना भविष्य में आपसी सहयोग की संभावनाओं को और व्यापक बनाता है।

मंत्री सारंग बोले – नया व्यापार सृजित करने वाले कर्मचारी को इंसेंटिव देने की योजना जल्द

72वें अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह का समापन समारोह डिफॉल्टर किसानों के लिये भी योजना होगी शुरू अपेक्स बैंक में ई-ऑफिस और सहकार-सेतु पोर्टल का शुभारंभ भोपाल : सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि पैक्स में नया व्यापार सृजित करने वाले कर्मचारी को इंसेंटिव देने की योजना बनाई जा रही है। साथ ही डिफॉल्टर किसानों के लिये भी योजना लाई जा रही है। इस तरह की योजना बनाई जा रही है कि सोसायटी में कुछ गडबड़ी पर भी किसानों पर असर नहीं हो। यह बात मंत्री श्री सारंग ने अपेक्स बैंक के समन्वय भवन में आयोजित 72वें अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह के समापन समारोह में कही। समारोह में 'परिचालन दक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता के लिये डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने' विषयक पर चर्चा की गई। मंत्री श्री सारंग ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले सहकारी बैंकों और पैक्स को सम्मानित किया। उन्होंने अपेक्स बैंक में ई-ऑफिस तथा सहकार-सेतु पोर्टल का शुभारंभ किया। कम्प्यूटराईजेशन के माध्यम से पूरी प्रक्रिया होगी पारदर्शी मंत्री सारंग ने कहा कि राज्य सरकार सहकारी आंदोलन के हर आयाम को मजबूती के साथ स्थापित कर रही है। कम्प्यूटराईजेशन के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने का काम कर रही है। ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के माध्यम से सहकारी आंदोलन मजबूत होगा और सहकारिता के माध्यम से रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि सीपीपीपी के माध्यम से हर पैक्स को कॉरपोरेट के साथ जोड़कर नये आयाम स्थापित किये जा रहे है। इससे पैक्स के साथ ही किसानों को भी लाभ मिलेगा। पैक्स को फायदे के साथ कर्मचारी को भी लाभ दिलवाने का काम किया जायेगा। सहकारिता विभाग की प्रत्येक पहल प्रदेश के किसानों की खुशहाली के लिये मंत्री सारंग ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन तथा केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के सहकार से समृद्धि मिशन से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश का सहकारिता विभाग सतत प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है। पैक्स के कम्प्यूटरीकरण से लेकर सीपीपीपी तक सहकारिता विभाग की प्रत्येक पहल प्रदेश के किसानों की खुशहाली तथा ग्रामीण एवं शहरी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सहकारिता को जमीनी स्तर पर पहुँचना ही उद्देश्य सहकारिता आयुक्त मनोज पुष्प ने कहा कि यह वर्ष अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया गया था। अब यह अंतिम पडाव पर है। इसका उद्देश्य सहकारिता को जमीनी स्तर पर पहुँचना है। अपेक्स बैंक के प्रंबध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में वक्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल, उप सचिव नोज सिन्हा, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी अरूण माथुर, अपेक्स बैंक के वि.क.अ.अरुणा दुबे, अरुण मिश्रा, संजय मोहन भटनागर, अरविंद बौद्ध, उप महाप्रबंधक के.टी.सज्जन के साथ मध्यप्रदेश की सभी प्रादेशिक सहकारी संस्थाओं एवं सहकारी बैंकों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संचालन अपेक्स बैंक ट्रेनिंग कॉलेज के प्राचार्य  श्री पी.एस.तिवारी ने किया । समापन समारोह में मध्यप्रदेश में सहकारिता के विकास पर और अपेक्स बैंक बैकिंग नेटवर्क पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। शुरूआत में परिसर में सहकारी झंडा रोहण और सहकारी गान हुआ। सम्मान एवं पुरस्कार समारोह में प्रदेश के 3 उत्तम जिला बैंकों पुरस्कृत किया गया। इसमें प्रथम पुरस्कार जिला बैंक विदिशा को एक लाख 51 हजार का चैक मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय प्रकाश सिंह ने प्राप्त किया। इसी प्रकार द्वितीय पुरस्कार जिला बैंक खरगोन को एक लाख 25 हजार का चैक मुख्य कार्यपालन अधिकारी संध्या रोकडे तथा तृतीय पुरस्कार जिला बैंक रतलाम को एक लाख एक हजार रूपये का चैक मुख्य कार्यपालन अधिकारी आलोक कुमार जैन ने प्राप्त किया। पैक्स का शत प्रतिशत अंकेक्षण पूर्ण करने वाले प्रथम 3 जिलों में खरगोन, मंडला और सीहोर को एक-एक लाख रूपये की प्रोत्साहन राशि दी गई। ई-पैक्स को सफल क्रियान्वयन करने वाली पैक्स सिरलाय (खरगोन), मनेरी (बालाघाट) और गोविंदपुर (सतना) को भी सम्मानित किया गया। समारोह में बेंचमार्किंग के आधार प्रथम 3 नागरिक सहकारी बैंक मंदसौर, उज्जैन और इंदौर को भी पुरस्कृत किया गया।

फसल अवशेष जलाने के बढ़ते मामले: प्रशासन ने 17 किसानों को किया गिरफ्तार

जींद जिले में एक ही दिन में सात जगह धान के अवशेष जलाने के मामले सामने आए हैं। इस पर जिला पुलिस ने सात किसानों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की हैं। जिले में अब तक धान के अवशेष जलाने के आरोप में करीब 70 किसानों की गिरफ्तारी हो चुकी है। 16 नवंबर को दर्ज हुईं एफआईआर में आरोपी 17 किसानों को पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए किसानों में ललित खेड़ा से सुमेर, सिंधवीखेड़ा से उमेद सिंह, निडानी से पवन, रधाना से रमेश, दालमवाला से धर्मबीर, बराह कलां से राहुल, निडाना से महेंद्र, पौली से श्रीभगवान, मालवी से धर्मबीर और सुरेंद्र, खरैंटी से सुनील, जुलाना से नसीब सिंह, सिंघवाल से प्रवेश, फुलियां कलां से रामबीर, खरड़वाल से सुरेश, मुआना से सुखा और बड़ौदा से नरेंद्र शामिल हैं।   अब तक जींद में सबसे ज्यादा 167 किसानों पर एफआईआर अब तक पराली जलाने पर जींद में सबसे ज्यादा 167 किसानों पर एफआईआर हुई है। इसके अलावा रोहतक में 36, सोनीपत में 10, कैथल में 11, कुरुक्षेत्र और करनाल में 3-3. झज्जर और अंबाला में एक-एक किसान पर एफआईआर दर्ज हुई है। 

रेलवे ट्रैक जाम की चेतावनी: पंजाब के किसान आंदोलन ने बढ़ाई सरकार की चिंता

पंजाब  पंजाब में किसान जत्थेबंदियों ने बड़ा ऐलान किया है। संगठनों ने घोषणा की है कि 17 और 18 दिसंबर को वे  DC ऑफिस के बाहर धरना देंगे। वहीं किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई, तो वे 19 दिसंबर को पूरे इलाके में रेलवे ट्रैक जाम कर बड़ा रोष प्रदर्शन करेंगे। बता दें कि नाभा की सरकारी कोठी में ट्राली के पार्ट्स और अन्य चोरी का सामान बरामद होने के बाद विवाद गरमा गया है। किसान नेताओं का कहना है कि इस मामले ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है। किसान जत्थेबंदियों ने साफ किया है कि जब तक उचित कार्रवाई और जवाब नहीं दिया जाता, आंदोलन लगातार जारी रहेगा। 

हुड्डा बोले— रिपोर्ट ने खोली सरकार की पोल, न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल

चंडीगढ़  हरियाणा में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि इंडिया जस्टिस रिपोर्ट ने मौजूदा भाजपा सरकार की वास्तविक तस्वीर सामने रख दी है। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा पुलिस की रैंकिंग पिछले पांच साल में 8वें स्थान से गिरकर 14वें स्थान पर पहुंच गई है। हुड्डा के अनुसार 18 बड़े राज्यों में हरियाणा की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। तुलना में बिहार चार पायदान ऊपर है और पड़ोसी पंजाब 7वें स्थान पर है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होता है कि सामाजिक न्याय और समान अवसर देने में सरकार पूरी तरह असफल रही है। पुलिस में एससी अधिकारियों की नियुक्ति के मामले में हरियाणा 18 में से 17वें स्थान पर है। एससी सिपाही और ओबीसी कांस्टेबल भर्ती में भी राज्य पिछड़ता दिख रहा है। हुड्डा ने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि आरक्षित वर्गों की नियुक्तियां लगभग ठप पड़ी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में 80 से अधिक गैंग सक्रिय हैं, जो हत्या, लूट, फिरौती और डकैती जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। दूसरी तरफ पुलिस विभाग की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। कांस्टेबल स्तर के 38.9 प्रतिशत पद खाली हैं और महिला अधिकारियों के 17.8 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं। प्रति व्यक्ति पुलिस खर्च हरियाणा में मात्र 1,908 रुपये है, जबकि पंजाब में यह 2,604 रुपये है। रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में एक थाने पर औसतन 1,09,325 की आबादी का भार है, जबकि केरल में यह संख्या केवल 23,992 है। हुड्डा ने कहा कि हाल ही में एडीजीपी रैंक के एक अधिकारी और एक एएसआई द्वारा की गई आत्महत्या पुलिस विभाग के भीतर बढ़ते तनाव और अव्यवस्था को उजागर करती है। कांग्रेस ने इन घटनाओं की सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की है, लेकिन उनका आरोप है कि सरकार मामले को लगातार टाल रही है