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राज्यपाल पटेल ने एन.जी.ओ. से की अपील — जनजातीय सशक्तिकरण में बढ़ाएँ भागीदारी

जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण प्रयासों में सहभागी बनें एन.जी.ओ. : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट को किया संबोधित भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट का आयोजन जनजातीय विकास और उत्थान प्रयासों की दिशा में सराहनीय पहल है। देशभर के सभी एन.जी.ओ. जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण प्रयासों में सहभागी बनें। राज्यपाल पटेल मंगलवार को भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती एवं जनजातीय गौरव वर्ष के उपलक्ष्य में कुशाभाऊ सभागार में आयोजित ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जनजातीय समुदाय के प्रति विशेष संवेदनशील है। उनके उत्थान के लिए संकल्पित और सक्रिय हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पीएम जनमन योजना अति पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास का अभूतपूर्व प्रयास है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान ग्रामीणों की मैदानी स्तर पर ही समस्याओं के समाधान का अभिनव कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि सभी एन.जी.ओ. जनजातीय कल्याण की योजनाओं को दूरस्थ अंचलो तक पहुँचाने में सक्रिय सहयोग करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आप जब ग्रामीण अंचलों में जांए जो जनजातीय समुदाय के साथ आत्मीय और विनम्र रहें। उनकी समस्याओं को धैर्य के साथ सुनें और त्वरित निवारण करने का प्रयास करें। चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान पर चिंतन करें राज्यपाल पटेल ने देशभर के एन.जी.ओ. का आह्वान किया कि ऑल इंडिया मीट के विचार-विमर्श और सुझावों पर गंभीर चिंतन करें। चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान खोजे। जनजातीय सशक्तिकरण के लिए आवश्यक शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, ट्राईबल गवर्नेंस आदि विभिन्न आयामों को जनजातीय क्षेत्रों की भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने के नवाचार करें। उन्होंने कहा कि सभी एन.जी.ओ. जनजातीय समुदाय को शिक्षा का महत्व जरूर बताएं। उन्हें सिकल सेल एनिमिया सहित अन्य स्वास्थ्य चुनौतियों के प्रति जागरूक करें। राज्यपाल पटेल ने जनजाति समाज के सर्वांगीण विकास के चिंतन पर आधारित ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट के आयोजन के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार का विशेष आभार व्यक्त किया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय समाज में भारत की संस्कृति, पर्यावरण और मानवीय मूल्यों की जड़ें गहराई तक बसी हैं। उनका जीवन दर्शन हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य, आत्मनिर्भरता और सहयोग ही समावेशी विकास का आधार हैं। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट का आयोजन अत्यंत प्रासंगिक और समयानुकूल है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में देश जब आगे बढ़ रहा है, ऐसे में जरूरी है कि जनजातीय समाज की भागीदारी इस यात्रा का अभिन्न हिस्सा बने। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि जनजातीय विकास के लिए शिक्षा का स्वरूप ऐसा हो जो केवल साक्षरता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उसमें जीवन कौशल, स्थानीय ज्ञान और संस्कृति संरक्षण का भी समावेश हो। उन्होंने कहा कि अशासकीय संस्थाएँ, स्थानीय भाषा में पाठ्य सामग्री तैयार करें। डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देकर बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बड़ा योगदान दिया जा सकता है। साथ ही स्वास्थ्य शिक्षा, मातृ-शिशु पोषण, टी.बी., सिकल सेल रोग जागरूकता और स्वास्थ्य शिक्षा को व्यापकता प्रदान करना भी जरूरी है। नीति निर्माण में समर्पित संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका, राज्य सरकार देगी पूरा सहयोग जनजाति कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा कि जनजाति बहुल क्षेत्रों में काम कर रहे समर्पित अशासकीय संस्थाओं को राज्य सरकार पूरा सहयोग देगी। उनकी विशेषज्ञता का लाभ लेते हुए जनजातीय कल्याण की कार्ययोजनाएं और रणनीतियां बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि जनजातीय विकास की योजनाएं बनाने में जमीनी स्तर के सुझावों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। समर्पित स्वैच्छिक संगठन गहन रूप से सामाजिक आर्थिक संदर्भों में समस्याओं का परीक्षण करते हैं। जनजातीय समुदाय के आचार-व्यवहार को भी करीब से जानते हैं। उन्होंने जनजातीय समुदाय के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे छोटी घटनाओं से सबक लेकर व्यापक जनहितैषी नीतियां बन जाती हैं। डॉ. शाह ने कहा कि सरकार, समुदाय और समर्पित सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर काम करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। उदघाटन सत्र के बाद विशेषज्ञ संस्थाओं के समूहों ने जनजातीय समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, वन अधिकार, शासन, प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर सुझाव दिए। ट्राइफेड की डीजीएम सु प्रीति मैथिल ने आजीविका पर अपने समूह का प्रस्तुतिकरण करते हुए बताया कि वित्तीय समावेश, आजीविका स्कूल, संसाधनों का एटलस, उद्यमिता विकास करने संबंधी सुझाव दिए और राज्य के लिए अपने विचार रखे। जनजातीय समुदाय की शिक्षा और सशक्तिकरण में अशासकीय संगठनों की भूमिका, चुनौतियां एवं मुद्दे, वर्तमान में शिक्षा का स्तर, समग्र शिक्षा में संगठनों की भूमिका पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। रामकृष्ण मिशन मेघालय के स्वामी अनुरागनंदा ने सत्र की अध्यक्षता की। स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट कर्नाटक के प्रवीन कुमार सैयापराजु ने विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया। उन्होंने कहा कि ड्रॉप आउट की चुनौती को नियमित संपर्कों से दूर किया जा सकता है। जनजातीय समुदाय की महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियां, टीकाकरण एवं अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की पहुंच बढ़ाने, टेली मेडिसिन, एमहेल्थ जैसे आधुनिक हस्तक्षेप से स्वास्थ्य सेवा बढ़ाने में अशासकीय संगठनों की भूमिका पर विचार हुआ। विवेकानंद मेडिकल मिशन वायनाड केरल के सुरेश ने सत्र की अध्यक्षता की। डॉ. सलोनी सिडाना एमडी नेशनल हेल्ड मिशन ने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय संबंधी कठिनाइयों की चर्चा करते हुए बताया कि भाषा और भौगोलिक दूरी बड़ी समस्या है। ट्राइफेड की डीजीएम सु मैथिल ने जनजाति अर्थव्यवस्था से जुड़ी समस्याओं, और आजीविका बढ़ाने, जनजातीय युवाओं में उद्यमिता बढ़ाने, आजीविका के नए अवसर, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक उद्यमिता को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर स्वैच्छिक संगठनों ने अपने विचार रखे। राजस्थान बाल कल्याण समिति उदयपुर के मुकेश गौर ने सत्र की अध्यक्षता की। मती मीनाक्षी सिंह ट्राइबल सेल राजभवन ने जनजातीय विकास एवं शासन प्रशासन से जुड़े विषयों, राज्य की भूमिका, पंचायत राज संस्थाओं, ग्राम सभा पारंपरिक जनजातीय संस्थाओं जनजाति विकास एजेंसियों की भूमिकाओं पर चर्चा की। शिव गंगा झाबुआ के पद्म महेश शर्मा ने सत्र की अध्यक्षता की। राज्यपाल पटेल ने भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्प अर्पित किया। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह स्वरूप गोंडी पेंटिंग भेंट कर अभिनंदन किया। मंत्री डॉं. कुंवर विजय शाह ने कहा कि राज्य सरकार, एन.जी.ओ. मीट में प्राप्त … Read more

अब एक ही योजना से लाभ — आयुष्मान वाले नहीं ले सकेंगे मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान सहायता

भोपाल आयुष्मान भारत योजना के लिए पात्र हितग्राहियों को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान का लाभ नहीं मिलेगा। आयुष्मान योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का उपचार होने के बाद ही आवेदन पर विचार होगा। इसका उद्देश्य स्वेच्छानुदान से अधिकाधिक लोगों को लाभ दिलाना है। इसके लिए आधार नंबर से आयुष्मान की पात्रता और अस्पताल की संबद्धता पता की जा रही है। विशेष परिस्थिति में बीमारी यदि आयुष्मान का पैकेज कवर नहीं है तभी स्वेच्छानुदान से राशि मिल सकेगी। दरअसल, मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के लिए बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन आते थे, जिसमें हितग्राही आयुष्मान योजना के तहत भी उपचार के लिए पात्र हैं।   उन्हें बीमारी की गंभीरता और आर्थिक स्थिति देखते हुए राशि स्वीकृत कर दी जाती थी। ऐसे में शासन पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था। शासन ने अब तय किया है आयुष्मान योजना से उपचार की सुविधा निजी और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है तो स्वेच्छानुदान से राशि देने का औचित्य नहीं है। मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी ने बताया कि आयुष्मान हितग्राहियों को विशेष परिस्थिति में ही स्वेच्छानुदान दिया जा रहा है, जैसे रोगी को ऐसी बीमारी हो जो आयुष्मान योजना के पैकेज में शामिल नहीं हो या फिर जिस अस्पताल में मरीज भर्ती है वह आयुष्मान योजना में है या नहीं। नहीं होने की स्थिति में स्वेच्छानुदान पर विचार किया जाता है।

ध्यान दें! अब बधाई मांगने आए किन्नरों को तय रकम ही देनी होगी, हरियाणा में नया नियम लागू

हरियाणा  पानीपत की ग्राम पंचायत पलडी ने विवाह और अन्य खुशी के अवसरों पर किन्नरों को दिए जाने वाली राशि निर्धारित की गई है। पंचायत ने किन्नरों को 1100 रुपये की राशि निर्धारित की है। साथ में पंचायत ने सख्त लहजे से कहा कि अगर किन्नरों ने ग्रामीणों से अधिक पैसे मांगने की कोशिश की, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पंचायत ने इस निर्णय की जानकारी एसडीएम इसराना नवदीप नैन को जनता समाधान शिविर में दी। एसडीएम ने तुरंत संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। ग्राम पंचायत पलड़ी के सरपंच अशोक कुमार, पंच अंजू, प्रवीन कुमारी, मोहिनी, जोगेंद्र और नंबरदार हवा सिंह ने एसडीएम को शिकायत में बताया कि उनके गांव में अधिकांश परिवार मजदूर वर्ग के हैं, जो मेहनत मजदूरी से अपना जीवन यापन करते हैं। शादी और अन्य खुशी के अवसरों पर किन्नर अधिक पैसे वसूल करते हैं। इसलिए पंचायत ने यह निर्णय लिया है कि किन्नरों के लिए 1100 रुपये की राशि तय की गई है।

पत्नी के नाम पर खुलवाएं ये डाकघर स्कीम, गारंटीड रिटर्न से होगी मोटी कमाई

पंजाब  अपने पैसे सुरक्षित तरीके से बढ़ाने और भविष्य के लिए योजना बनाने का सबसे आसान तरीका डाकघर की स्कीमें हैं। बेटी की शादी, माता-पिता की पेंशन या रिटायरमेंट के लिए बचत करना हो, PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) स्कीम लंबे समय के निवेश के लिए एक भरोसेमंद विकल्प है। शादीशुदा लोग अपने और अपनी पत्नी के नाम अलग-अलग खाते खोल सकते हैं और इसमें टैक्स में भी छूट मिलती है। क्या है PPF स्कीम: PPF एक लॉन्ग टर्म सेविंग स्कीम है जिसमें कोई भी भारतीय नागरिक सालाना ₹500 से लेकर ₹1.5 लाख तक निवेश कर सकता है। यह योजना उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो कम जोखिम के साथ टैक्स में छूट और गारंटीड ब्याज पाना चाहते हैं। ब्याज दर और फायदा PPF योजना पर वर्तमान में 7.1% वार्षिक ब्याज मिल रहा है, जो कंपाउंडिंग के साथ बढ़ता है। सरकारी समर्थित होने के कारण यह गारंटीड रिटर्न देती है और इस पर प्राप्त ब्याज टैक्स फ्री होता है। उदाहरण के लिए, 15 साल की अवधि के बाद ₹10.80 लाख का निवेश लगभग ₹19.52 लाख में बदल सकता है। 18 साल या अधिक उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक PPF खाता खोल सकता है। मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति का खाता उसके अभिभावक के नाम खोला जा सकता है। देशभर में किसी व्यक्ति के नाम केवल एक PPF खाता खोला जा सकता है। निवेश की राशि: एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1,50,000 रुपये जमा किए जा सकते हैं। यह राशि एकमुश्त या किश्तों में जमा की जा सकती है। निवेश की गई राशि आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट के लिए योग्य है। PPF खाता 15 साल में परिपक्व होता है। आप आवेदन देकर इस अवधि को हर बार 5 साल तक बढ़ा सकते हैं, अधिकतम 50 साल तक।   कैसे बनाएं बड़ा फंड: अगर आप और आपकी पत्नी हर महीने 5000 रुपये जमा करें, तो 20 साल बाद आपका फंड लगभग ₹26.63 लाख बन सकता है। इसमें आपकी निवेश राशि 12,00,000 रुपये और ब्याज 14,63,315 रुपये होगा। डाकघर की PPF स्कीम सुरक्षित निवेश, लंबी अवधि के फायदे और टैक्स में बचत का बेहतरीन विकल्प है। यह योजना सरकारी समर्थित होने के कारण पूंजी की सुरक्षा की गारंटी भी देती है, जो इसे लंबी अवधि के निवेश के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनाती है।  

नवंबर में जमने लगी सर्दी! झारखंड में शाम के बाद सुनसान सड़कें

रांची झारखंड में इस नवंबर माह की शुरुआत में मौसम का अचानक बदलाव देखने को मिला है। रांची और आसपास के इलाकों में पहले दोपहर में गर्मी का अहसास था, लेकिन अब अचानक ठंडी हवाओं ने ठंड की मार बढ़ा दी है। सड़कों पर शाम के बाद छा जाता है सन्नाटा राज्य के कई जिलों में केवल कुछ ही दिनों में न्यूनतम तापमान में पांच से छह डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सर्दी काफी बढ़ गई है। रांची में पहले हफ्ते तक लोग बिना स्वेटर, हल्के कपड़े पहनकर सैर करते थे, लेकिन दूसरे हफ्ते आते- आते तापमान में इतनी गिरावट आई है कि लोगों को गर्म कपड़े पहनने पड़ रहे हैं। खासकर सुबह और शाम के समय ठंड का प्रभाव ज्यादा महसूस किया जा रहा है। गुमला जिले में हालात ज्यादा गंभीर हैं। यहां की सड़कों पर शाम के बाद सन्नाटा छा जाता है और लोग घरों के बाहर अलाव के पास जुटकर ठंड से बचने की कोशिश करते देखे जाते हैं। गुमला का न्यूनतम तापमान अब मात्र 8.5 डिग्री तक पहुंच गया है, जबकि कोडरमा, रामगढ़, और गढ़वा जैसे जिलों में भी तापमान 9 डिग्री के करीब पहुंच चुका है। शाम-सुबह की धूप के बावजूद ठंडी हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। ठंडी हवाओं ने लोगों की बढ़ाई परेशानी मौसम विभाग ने इस ठंड के लिए हिमालय क्षेत्र से आने वाली ठंडी हवाओं को जिम्मेदार बताया है, जो सबसे पहले राज्य के उत्तर-पश्चिमी जिलों को प्रभावित करती हैं। विभाग ने कोडरमा, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा, रांची, रामगढ़, पलामू और सिमडेगा के लिए अगले पांच दिनों तक सर्दी का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में न्यूनतम तापमान 9 से 10 डिग्री के बीच रहने की संभावना है। ठंड के बढ़ने के कारण लोगों में सर्दी-जुकाम, बुखार जैसी हल्की बीमारियों के लक्षण भी बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से सर्दी से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है।  

अयोध्या: रामलला मंदिर में ध्वजारोहण कल, दर्शन व्यवस्था में किए गए अहम बदलाव

अयोध्या अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम के समय और आम दर्शनार्थियों के प्रवेश को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। यह कार्यक्रम एक विशेष और भव्य आयोजन होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे, जिसके कारण आम भक्तों के लिए दर्शन के समय में बदलाव किया गया है। ध्वज का आकार त्रिकोणीय होगा और यह लगभग 205 फीट की ऊंचाई पर लहराएगा। ध्वज दंड की ऊंचाई 44 फीट है। ध्वज केसरिया रंग का होगा, जिस पर ओम लिखा होगा, और यह पैराशूट फैब्रिक से बना होगा। राम मंदिर में ध्वजारोहण का समय दिन 12 बजे होगा। 11 बजे देश के प्रधानमंत्री मंदिर में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ सभी अतिथियों को सुबह 9 बजे तक आने के लिए कहा गया है। जगद्गुरु रामानंदाचार्य द्वार से सभी अतिथियों का स्वागत किया जाएगा। वहीं अगर आम श्रद्धालुओं की बात की जाए तो उन्हें 25 नवंबर को राम मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा। यदि आप भी इन दिनों के दौरान आने की सोच रहे है तो अपने प्लान को स्थगित कर दें। समारोह के दौरान सभी मेहमानों को अंदर 18 मंदिरों के दर्शन करने का मौका मिलेगा। इस दौरान किसी भी तरह की अफरा-तफरा न मचे इसके लिए पूरी तरह व्यवस्था का इतंजाम किया हुआ है।

मतगणना से पहले समस्तीपुर डीएम का स्ट्रांग रूम निरीक्षण, अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश

समस्तीपुर बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 की मतगणना नजदीक आते ही जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। इसी क्रम में बुधवार को जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-डीएम रोशन कुशवाहा और पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह ने समस्तीपुर कॉलेज स्थित वज्रगृह (स्ट्रांग रूम) का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दोनों अधिकारियों ने मतदान के बाद जमा की गई ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की सुरक्षा, व्यवस्था और निगरानी प्रणाली की बारीकी से समीक्षा की। डीएम ने दिए सख्त निर्देश डीएम रोशन कुशवाहा ने स्पष्ट निर्देश दिया कि वज्रगृह की सुरक्षा अभेद्य रहनी चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि मतगणना केंद्र में प्रवेश केवल उन्हीं व्यक्तियों को मिलेगा, जिनके पास निर्वाची पदाधिकारी द्वारा जारी आधिकारिक पहचान पत्र होगा। सुरक्षा जांच के उपरांत केवल निर्वाची पदाधिकारी, नियुक्त मतगणना अभिकर्ता तथा फॉर्म-18 पर अधिकृत व्यक्ति ही काउंटिंग हॉल में प्रवेश कर सकेंगे। उन्होंने यह भी सख्ती से निर्देश दिया कि एक बार अंदर प्रवेश करने वाले कर्मी या अभिकर्ता को बाहर जाने के बाद पुनः प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह व्यवस्था मतगणना प्रक्रिया की शुचिता, पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य की गई है। काउंटिंग हॉल की तैयारियों की समीक्षा निरीक्षण के दौरान डीएम ने काउंटिंग हॉल के अंदर की टेबल व्यवस्था, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा बलों की तैनाती और कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली की भी विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मतगणना प्रक्रिया शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न होनी चाहिए तथा सभी आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी की जाएं। त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मतगणना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था त्रिस्तरीय रहेगी। प्रत्येक संवेदनशील बिंदु पर पुलिस बल, अर्धसैनिक बल और दंडाधिकारी की तैनाती की जाएगी। प्रशासन का दावा है कि पूरी तैयारी के साथ मतगणना को निष्पक्षता और पूर्ण सुरक्षा के बीच सम्पन्न कराया जाएगा।  

पर्यटन में नया आकर्षण: महेश्वर और कुक्षी में बनेंगे हैंडलूम-क्राफ्ट टूरिज्म विलेज, पर्यटक जान सकेंगे पारंपरिक कला

भोपाल मध्यप्रदेश पर्यटन द्वारा चंदेरी के प्राणपुर की तर्ज पर महेश्वर के पास एक गांव को हैंडलूम टूरिज्म विलेज और कुक्षी को क्राफ्ट टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। खरगोन जिले में स्थित महेश्वर का गांव केरिया खेड़ी महेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि धार जिले में स्थित कुक्षी बाग प्रिंट के लिए जाना जाता है। चंदेरी साड़ी की बुनाई पर केंद्रित हैंडलूम टूरिज्म विलेज प्राणपुर की तरह ये दोनों नई परियोजनाएं पारंपरिक वस्त्र कला को बढ़ावा देंगी, पर्यटकों को आकर्षित करेंगी तथा बुनकरों और कारीगरों को खरीदारों से सीधे जुड़ने का एक मंच प्रदान करेंगी। निफ्ट, एनआईडी और अन्य संस्थानों के छात्र और शोधकर्ता बुनाई और रंगाई प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन देख सकेंगे। दोनों परियोजनाओं को लेकर कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है। महेश्वर में कार्य जल्द शुरू होने वाला है। इसके बाद कुक्षी में परियोजना की शुरुआत होगी। साड़ी बनते हुए देख सकेंगे पर्यटक महेश्वर से लगभग चार किमी दूर छोटे से गांव केरिया खेड़ी में लगभग सौ परिवार माहेश्वरी साड़ियां, सलवार-सूट और अन्य वस्त्र बुनते हैं। यह गांव महेश्वर से ओंकारेश्वर जाने वाली सड़क से लगभग तीन किमी दूर स्थित है। गांव में एक कैफेटेरिया और एक अनुभव और विक्रय केंद्र बनाया जाएगा। गांव के नागरिक बुनियादी ढांचे में भी सुधार किया जाएगा। परियोजना का क्रियान्वयन कर रहे अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय द्वारा स्वीकृत और 5.11 करोड़ रुपये की लागत वाली महेश्वर परियोजना पर काम जल्द ही शुरू होगा और अगले साल जून तक पूरा होने की उम्मीद है। केरिया खेड़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने से महेश्वर पर पर्यटकों का दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी। मंदिर में दर्शन और नर्मदा नदी में डुबकी लगाने के लिए महेश्वर जाने वाले पर्यटकों का एक वर्ग हथकरघा गांव की ओर जा सकता है, क्योंकि गांव से लगभग दो किमी दूर नर्मदा नदी पर एक घाट है।वस्त्रों की रंगाई का प्रदर्शन होगा धार जिले के तहसील मुख्यालय कुक्षी को क्राफ्ट टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा। कुक्षी में लगभग 1500 बाग कारीगर रहते हैं। यहां भी कस्बे का कायाकल्प किया जाएगा और इसे एक ऐसे स्थान के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां पर्यटक सीधे कारीगरों से बाग प्रिंट के वस्त्र खरीद सकेंगे। इस परियोजना का बजट 20.60 करोड़ रुपये है और इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा। गांव डाई हाउस के अतिरिक्त कैफेटेरिया, विक्रय और अनुभव केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। बोर्ड ने पहली बार चंदेरी के प्राणपुर में इस अवधारण को आकार दिया और प्राणपुर को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम का पुरस्कार केंद्र सरकार की ओर से मिला। इसी से प्रोत्साहन पाकर महेश्वर और कुक्षी में पर्यटन ग्राम विकसित किए जा रहा हैं। दोनों जगहों के लिए टेंडर हो गए हैं, जल्द ही कार्य शुरू होगा। – डॉ अभय अरविंद बेडेकर, अपर प्रबंध संचालक, मप्र पर्यटन बोर्ड

असम से कान्हा पहुंचेंगे जंगली भैंसे, टाइगर के गढ़ में नया वन्यजीव संतुलन बनाने की तैयारी

मंडला   टाइगर्स के लिए विश्वप्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क में नए मेहमान आने वाले हैं. लेकिन इन मेहमानों को हल्के में न लें, ये हैं भारी भरकम आसामी जंगली भैैंसे. जल्द ही असम से मध्य प्रदेश के इस टाइगर रिजर्व में जंगली भैसों की एंट्री होने वाली है, जिसके बाद जंगल का रोमांच और बढ़ने जा रहा है. दुनिया भर के पर्यटक यहां प्रकृति की सुंदरता और बाघ सहित अन्य वन्य प्राणियों के दीदार के लिए पहुचते हैं, वहीं अब भैसों की तादाद भी यहां बढ़ाई जा रही है. कान्हा में अचानक घटी जंगली भैसों की तादाद कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी के अनुसार, '' यहां पहले जंगली भैंसों की उपस्थिति थी, लेकिन समय के साथ उनकी संख्या बहुत कम हो गई. किसी भी प्रजाति की अचानक कमी जंगल पर प्रतिकूल असर डालती है. यही कारण है कि अब असम के राष्ट्रीय उद्यानों से जंगली भैंसों को कान्हा में बसाने की योजना बनाई जा रही है.'' असम से जंगली भैंसे लाने की रूपरेखा तैयार वन विभाग के मुताबिक सुपखार क्षेत्र को जंगली भैंसों के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है. असम से जंगली भैसों को 5 चरणों में कान्हा लाने की तैयारी चल रही है. उच्चाधिकारियों के साथ लगातार परामर्श जारी है और जल्द ही इस दिशा में कदम उठाए जाने की उम्मीद है. इस पहल से न सिर्फ वन्यजीवन को मजबूती मिलेगी बल्कि पर्यटकों के लिए भी कान्हा नेशनल पार्क का अनुभव और समृद्ध होगा. पांच चरणों में होगा ट्रांसलोकेशन योजना के अनुसार, जंगली भैंसों को असम से लाने का काम पांच चरणों में पूरा किया जाएगा. पार्क के सुपखार क्षेत्र को इनके लिए सबसे उपयुक्त चिन्हित किया गया हैृ. इस महत्वपूर्ण परियोजना पर उच्च स्तर पर चर्चा जारी है और जल्द ही इसे अमली जामा पहनाने की उम्मीद है. इस पहल से न सिर्फ पार्क के वन्यजीवन को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यटकों को भी एक नए और दुर्लभ वन्यजीव को देखने का अवसर मिल सकेगा. कान्हा में बसेंगे आसामी भैंसे कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया, '' कान्हा में कभी जंगली भैंसों की अपनी आबादी हुआ करती थी और कान्हा नेशनल पार्क से इन्हें बाहर भी भेजा गया था लेकिन समय के साथ ये प्रजाति लगभग विलुप्त हो गई. किसी भी प्रजाति की अनुपस्थिति पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालती है. इसी कमी को दूर करने और जैव विविधता को बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है.

ट्रैक पार करते समय हादसे पर रेलवे प्रशासन को जवाबदेह ठहराया, हाई कोर्ट ने रेलवे का दावा खारिज किया

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है "यदि रेलवे ने पटरियों तक अनधिकृत पहुंच को रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए तो क्रॉसिंग करते समय हुई मौत के लिए भी मुआवजा भी देना पड़ेगा." इस प्रकार जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने रेलवे दावा अधिकरण भोपाल के फैसले को निरस्त कर दिया. रेलवे दावा अधिकरण के फैसले को चुनौती एकलपीठ ने अपने आदेश कहा "बच्चे सहित दो महिलाओं की मौत एक अप्रिय घटना के कारण हुई थी और रेलवे प्रशासन पटरियों तक अनधिकृत पहुंच रोकने तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने वैधानिक कर्तव्य में विफल रहा. लापरवाही या अनधिकृत प्रवेश से रेलवे प्रशासन स्वतः ही दायित्व से मुक्त नहीं हो जाता है." मामले के अनुसार सिंगरौली निवासी राम अवतार सहित दो अन्य की तरफ से दायर अपील में रेलवे दावा अधिकरण के फैसले को चुनौती दी थी. रेलवे ट्रैक पर 3 लोगों की मौत का मामला याचिका में कहा गया "रेलवे ही हादसे के लिए जिम्मेदार है." रेलवे दावा अधिकरण ने माना था "रेलवे मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी नहीं है, क्योंकि मृतक ट्रेन में नहीं चढ़े थे. ट्रेन की पटरी में आने के कारण उनकी मौत हुई थी." राम अवतार अपने बेटे राजेश (उम्र 3 साल) का मुंडन कराने 16 अप्रैल 2011 में मैहर ले गए थे. इस दौरान 8-10 लोगों का समूह मैहर गया था. लौटते समय रेलवे स्टेशन में बालक राजेश रेलवे की पटरियों पर आ गया था और उसे बचाने के लिए दो महिलाएं भी पटरी पर आ गईं और तीनों ट्रेन की चपेट में आ गई थीं. रेलवे दावा प्राधिकरण को मुआवजा के निर्देश प्राधिकरण ने सुनवाई के दौरान पाया था "समूह के लोग ट्रेन संख्या 51672 सतना-इटारसी पैसेंजर में नहीं चढे़ थे. लोली बाई, इंद्रमती और राजेश (बालक) की दूसरी पटरी से गुजरती हुई गुजरती ट्रेन की चपेट में आने से हुई." रेलवे ने लिखित बयान के माध्यम से दुर्घटना से इनकार किया और कहा "मृतक रेलवे लाइन पार कर रहे थे, तभी गुजरती ट्रेन की चपेट में आ गये." एकलपीठ ने रेलवे दावा अधिकरण को निर्धारित मुआवआ देने के निर्देश जारी किये हैं. जबलपुर में घोड़ों की मौत के मामले में सुनवाई एक अन्य मामले में हैदराबाद से जबलपुर लाए गए घोड़ों की मौत के मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में हुई. याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया "पिछले माह में कुछ और घोड़ों की मौत हुई, जिसे छुपाया जा रहा है." हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने आरोप को गंभीरता से लेते हुए केयरटेकर सचिन तिवारी को शपथ पत्र पर यह बताने कहा है "वर्तमान में कितने घोड़े बचे हैं और उनका मानसिक व शारीरिक स्टेटस क्या है." युगलपीठ ने यह भी बताने कहा है "घोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं." युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को नियत की है. जबलपुर निवासी पशु प्रेमी सिमरन इस्सर की ओर से याचिका दायर की गई थी.