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म.प्र. को दो श्रेणियों में मिले पुरस्कार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बधाई

"जल संचय-जन भागीदारी" में भी अग्रणी स्थान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 18 नवंबर को प्रदान करेंगी पुरस्कार भोपाल  मध्यप्रदेश ने जल संरक्षण में एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। नई दिल्ली में मंगलवार को जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की घोषणा की। मध्यप्रदेश को दो श्रेणियों में सम्मान प्राप्त हुआ। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले को पूर्वी क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ जिले का पुरस्कार मिला है, जबकि खंडवा जिले की ग्राम पंचायत कावेश्वर ने सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत श्रेणी में संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 18 नवंबर 2025 को पुरस्कार प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुरस्कृत जिलों को बधाई दी है। "जल संचय-जन भागीदारी" पहल में भी वेस्टर्न-जोन की श्रेणी एक में पहला पुरस्कार ईस्ट निमाड़ को मिला। श्रेष्ठ 50 शहरी निकायों में गुनाजिले को प्रथम रैंक मिला। ज़िलों में श्रेणी तीन में गुना, बैतूल, धार, देवास, सिवनी और खरगौन का चयन हुआ है। उल्लेखनीय है कि जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ने वर्ष 2024 के लिए 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के तहत कुल 46 विजेताओं (संयुक्त विजेताओं सहित) की घोषणा की । ये पुरस्कार 10 श्रेणियों में दिए जा रहे हैं — सर्वश्रेष्ठ राज्य, सर्वश्रेष्ठ जिला, सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत, सर्वश्रेष्ठ शहरी स्थानीय निकाय, सर्वश्रेष्ठ स्कूल या कॉलेज, सर्वश्रेष्ठ उद्योग, सर्वश्रेष्ठ जल उपयोक्ता संघ, सर्वश्रेष्ठ संस्था (स्कूल या कॉलेज के अतिरिक्त), सर्वश्रेष्ठ सिविल सोसायटी और जल क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जल शक्ति मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर जल प्रबंधन और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक व्यापक अभियान चला रहा है। इसी उद्देश्य से लोगों में जल के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने और उन्हें जल उपयोग के सर्वोत्तम तौर तरीकों को अपनाने में प्रेरित करने के लिए राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी। वर्ष 2024 के लिए 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार का शुभारंभ 23 अक्टूबर 2024 को गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर किया गया था। कुल 751 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनकी समीक्षा और मूल्यांकन विशेषज्ञ समिति द्वारा किया गया। चयनित आवेदनों का परीक्षण केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा किया गया। अंतिम रिपोर्टों के आधार पर वर्ष 2024 के 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के लिए कुल 46 विजेताओं का चयन किया गया। राष्ट्रीय जल पुरस्कार का उद्देश्य देश में व्यक्तियों और संगठनों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की पहचान करना और सरकार के ‘जल समृद्ध भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करना है। ये पुरस्कार जल के महत्व के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें जल के सर्वोत्तम उपयोग के प्रयासों को अपनाने के लिये प्रेरित करते हैं। यह पहल सभी लोगों और संगठनों के लिए जल संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन गतिविधियों में एक मजबूत साझेदारी और जन सहभागिता को और सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करता है। जल संचय जन भागीदारी पहल में भी अग्रणी मप्र जल संचय जन भागीदारी पुरस्कार : कैच द रेन के अंतर्गत साउथ जोन की श्रेणी एक में पहला पुरस्कार ईस्ट निमाड़ जिले को तथा श्रेष्ठ 50 शहरी निकायों में गुना को, ज़िलों में श्रेणी तीन में दूसरी रैंक में गुना, बैतूल, धार, देवास, सिवनी और खरगौन का चयन हुआ है। इस पहल के अंतर्गत राज्यों को पाँच ज़ोन में बाँटा गया है। जिलों को न्यूनतम 10,000 कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण एवं संचयन संरचनाएँ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों के जिलों के लिए यह लक्ष्य 3,000 संरचनाएँ है, जबकि देशभर के नगर निगमों के लिए यह संख्या 10,000 निर्धारित की गई है। इन संरचनाओं में वर्षा जल संचयन (रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग) के अलावा झीलों, तालाबों और बावड़ियों का पुनर्जीवन भी शामिल है। शहरी जल संरक्षण प्रयासों को सशक्त करने के लिए, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने जल शक्ति मंत्रालय के साथ साझेदारी की है। नगरीय निकायों को कम-से-कम 2,000 पुनर्भरण संरचनाएँ बनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस वर्ष कुल 100 पुरस्कारों की घोषणा की गई है, जिनमें तीन सर्वश्रेष्ठ राज्य, 67 जिले, छह नगर निगम, एक नगरीय स्थानीय निकाय, दो सहयोगी मंत्रालय/विभाग, दो उद्योग, तीन गैर-सरकारी संगठन, दो परोपकारी व्यक्ति और 14 नोडल अधिकारी शामिल हैं।  

दिल्ली धमाका केस में अहम सुराग: गुरुग्राम में बिकी कार आखिर जम्मू-कश्मीर कैसे पहुंची?

नई दिल्ली  दिल्ली में लाल किले के पास जिस i10 कार में धमाका हुआ था, उसके पहले मालिक गुरुग्राम के सलमान थे। फिर यह कार बिकते-बिकते जम्मू-कश्मीर के पुलवामा तक जा पहुंची और अंत में दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास इसमें धमाका हुआ। अब तक पुलिस ने इसे आतंकी हमला करार नहीं दिया है, लेकिन इसकी जांच कुछ ऐसे ही संकेत दे रही है। फिलहाल पुलिस ने गुरुग्राम से रजिस्टर्ड इस कार के पहले खरीददार के मकान मालिक से पूछताछ की है। इस कार के पहले मालिक सलमान थे, जो गुरुग्राम में रहते थे। वह जिन दिनेश में मकान में रहते थे, पुलिस ने उनसे आज पूछताछ की है।   दिनेश की मां वीरवती ने बताया कि पुलिस उनके बेटे को पूछताछ के लिए ले गई है। दिनेश के परिवार का दावा है कि सलमान उनके घर में 2016 से 2020 के दौरान रहा था। इस बीच जानकारी मिली है कि दिल्ली धमाके में मरने वालों की संख्या 12 पहुंच गई है। दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस की संयुक्त टीम ने सोमवार की शाम को ही कार के पहले मालिक मोहम्मद सलमान को हिरासत में ले लिया था। सलमान ने बताया कि उन्होंने अपनी कार दिल्ली के ओखला निवासी देवेंद्र को डेढ़ साल पहले बेची थी। फिर देवेंद्र ने इस कार को अंबाला में किसी को बेच दिया था। अंबाला के उस शख्स ने पुलवामा के तारिक को गाड़ी बेच दी थी। फिलहाल पुलिस कड़ियां जोड़ते हुए सभी तक पहुंचने में जुटी है। इस बीच दिनेश के परिवार ने बताया कि सलमान उनके शांति नगर स्थित आवास में 4 साल तक रहा था और फिर गुरुग्राम में ही फ्लैट ले लिया था। वीरवती ने कहा कि रात को कुछ पुलिस वाले आए थे और मेरे बेटे को ले गए। हमने अपना मकान 2015 में बनाया था और 2016 में सलमान रहने आया था। वह ऊपरी मंजिल पर रहता था और 4 साल बाद अपने ही फ्लैट में शिफ्ट हो गया, जिसे उसने खरीदा था। वीरवती ने कहा कि अब घर में दूसरे किरायेदार रहते हैं। दिनेश के भाई महेश ने कहा कि हम लोगों का सलमान से कोई संपर्क नहीं रहा है। महेश ने कहा कि पुलिस यह कहकर ले गई है कि इनसे पूछताछ करनी है। उसने कहा कि सलमान हमारे यहां अपनी पत्नी, दो बच्चों और मां के साथ रहता था। सलमान एक निजी कंपनी में नौकरी करता था। फिलहाल इस मामले में पुलिस कड़ियां तलाश रही है। यह हैरान करने वाली बात है कि एक कार इतने लोगों के पास बिकते हुए पहुंची और अंत में उसे आतंकी साजिश के लिए इस्तेमाल किया गया। माना यह भी जा रहा है कि जानबूझकर ऐसी कार को चुना गया, जो कई बार बिकी हो ताकि उसके मालिक की तलाश करना आसान ना रहे।  

राज्यपाल पटेल ने गुजरात के बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय राजपीपला का किया भ्रमण

भगवान बिरसा मुंडा को किया नमन, छात्रावास पहुंचे भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल मंगलवार को गुजरात के नर्मदा जिले के राजपीपला के भगवान बिरसा मुंड़ा विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने परिसर स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक डॉ. दर्शना बेन वसावा भी मौजूद थी। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि बिरसा मुंडा विश्वविद्यालय की प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की संकल्पना है। उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रावास का निरीक्षण किया। विद्यार्थियों की आवास व्यवस्थाओं की समीक्षा की। विश्वविद्यालय के स्वरूप और विकास के विषय में विश्वविद्यालय प्रबंधन से चर्चा की। राज्यपाल श्री पटेल ने विश्वविद्यालय परिसर में “एक पेड़- मां के नाम” अभियान के तहत पौध-रोपण किया। राज्यपाल के आगमन पर उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। राज्यपाल श्री पटेल को विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मधुकर पाडवी ने बताया कि विश्वविद्यालय जनजातीय कला, विरासत, संस्कृति, औषधीय प्रणालियों, भाषा और साहित्य का संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए समर्पित है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा के माध्यम से जनजातीय समुदायों की परंपराएँ और ज्ञान प्रणाली, व्यापक सामाजिक पुनर्जागरण में योगदान दें सके। कुलपति डॉ. पाडवी ने बताया कि विश्वविद्यालय विभिन्न विषयों जैसे मानविकी, वाणिज्य, विज्ञान, कानून, शिक्षा, आदिवासी पारंपरिक कला, शिल्प और कौशल आधारित शिक्षा में स्नातक से लेकर स्नातकोत्तर, व्यावसायिक और पी.एच.डी. तक के शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है।  बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2017 मे हुई थी। इसका उद्देश्य विशेष रूप से गुजरात और विकासशील क्षेत्रों की जनजातीय आबादी के संदर्भ में परिवर्तनकारी और नवीन शैक्षणिक और अनुसंधान कार्यक्रम विकसित करना है। विश्वविद्यालय की स्थापना जनजातीय क्षेत्रों के तीव्र विकास को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी, कौशल-आधारित, व्यावसायिक, प्रबंधन, पर्यटन, जनजातीय कला, संस्कृति और पारंपरिक मूल्य प्रणालियों और अन्य संबंधित क्षेत्रों में शैक्षिक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है। विश्वविद्यालय में जनजातीय कला, संस्कृति, परंपरा, भाषा, औषधीय प्रथाओं, रीति-रिवाजों, वन-आधारित आर्थिक गतिविधियों, वनस्पतियों, जीवों, और जनजातीय क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित ज्ञान और प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए शिक्षण और अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध है।  

गिरफ्तारी वारंट पर स्टे की मांग: ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक ने दी हाईकोर्ट में चुनौती

जबलपुर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। मामला नवंबर 2020 में कोलकाता में आयोजित एक सभा में दिए गए बयान से जुड़ा है। अभिषेक बनर्जी ने उस दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय को गुंडा कहा था। इस बयान को लेकर आकाश विजयवर्गीय ने 2021 में मानहानि का मामला दर्ज कराया था। एक मई, 2021 से इस प्रकरण की सुनवाई भोपाल की एमपीएमएलए कोर्ट में चल रही है, लेकिन बताया गया है कि अभिषेक बनर्जी अब तक किसी भी पेशी में हाजिर नहीं हुए। इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत के न्यायिक मजिस्ट्रेट तथागत याग्निक ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ 11 अगस्त और 26 अगस्त 2025 की तारीखों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अभिषेक बनर्जी ने इस गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने अंतरिम राहत के मुद्दे पर सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित कर लिया।

पंचायत प्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए मिलेंगे 50-50 हजार रुपए

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जंबूरी मैदान में सरपंच संयुक्त मोर्चा सम्मेलन को किया संबोधित दिल्ली विस्फोट के मृतकों की आत्मा की शांति के लिए सम्मेलन में रखा गया दो मिनिट का मौन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि त्रिस्तरीय पंचायतराज व्यवस्था में सरपंच के पास पर्याप्त शक्तियां हैं। सरपंच अपनी पंचायत को नई ऊंचाइयों पर लेकर जा सकते हैं। सरपंचों के माध्यम से ही प्रदेश में ग्राम विकास का कारवां चल रहा है। ग्राम स्तर पर सभी कल्याणकारी योजनाओं और विकास गतिविधियों का क्रियान्वयन पंचायतों के माध्यम से ही हो रहा है। पंचायत व्यवस्था को सशक्त करने के उद्देश्य से पंचायतों को 25 लाख रूपए तक के कार्य करने का अधिकार दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंचायत प्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए 50-50 हजार रुपए की राशि अंतरित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नगरीय‍निकायों के समान पंचायतों में भी विकास योजनाएं बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। पंचायतों को गांव के विकास की योजना बनाने के लिये सक्षम बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि भोपाल में पंचायत प्रतिनिधियों की कॉन्फ्रेंस आगामी 24 से 26 नंवबर को होने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को जंबूरी मैदान पर आयोजित सरपंच संयुक्त मोर्चा सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कार्यक्रम स्थल पर भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सरपंच संघों के प्रतिनिधियों द्वारा ज्ञापन सौंपा गया। देश को प्रधानमंत्री श्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह की क्षमता पर है भरोसा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिल्ली में हुए कार विस्फोट को अत्यंत दु:खद बताया। उन्होंने मृतकों की आत्मा की शांति के लिए 2 मिनट का मौन धारण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की क्षमता पर भरोसा है। भारत सरकार ने आतंकवाद और नक्सलवाद को समूल नष्ट करने के लिए अभियान छेड़ रखा है। पंचायतों को मिलेंगे कार्यालय और सामुदायिक भवन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने तीनों स्तर के पंचायत संस्थान के लिए कार्यालय और गांवों के लिए सामुदायिक भवन की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है। इस अनुक्रम में प्रदेश की पंचायतों के लिए 2472 अटल पंचायत भवन, 1037 सामुदायिक भवन, 106 जनपद पंचायत भवन तथा 5 जिला पंचायत भवन स्वीकृत किए हैं। गांव के शांति धाम भी व्यवस्थित रूप से विकसित हों, इस उद्देश्य से दिसम्बर 2026 तक सभी शांति धाम अतिक्रमण से मुक्त कर उनके पहुंच मार्ग बनाने और आवश्यक फेंसिंग और पौधरोपण कार्य के निर्देश दिए गए हैं। सुदृढ़ पंचायत राजव्यवस्था के माध्यम से आत्मनिर्भर पंचायत व समृद्ध मध्यप्रदेश के पथ पर राज्य सरकार पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग से अग्रसर है। युवाओं को उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं। वर्ष-2026 को कृषि आधारित उद्योग वर्ष के रूप में घोषित किया जाएगा।कृषि उत्पादों के निर्माण के लिए कृषि और खाद्यान्न आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पंचायतों के माध्यम से लघु उद्योग, कुटीर उद्योग और रोजगार उद्योग स्थापित करने के लिए भी गतिविधियां जारी हैं। किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सब्जी और अन्य फसलों के लिए खाद्य प्रसंस्करण इकाईयां खोली जा रही हैं। युवाओं को उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि किसानों को हर फसल का उचित दाम मिले। श्रीराम वन गमन पथ विकसित करने की प्रक्रिया में पंचायत प्रतिनिधियों को जोड़ा जाएगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे पंचायत प्रतिनिधि भगवान श्रीराम से संबंधित प्रत्येक स्थान की जानकारी उपलब्ध कराएं। इन्हें श्रीराम वन गमन पथ विकसित करने की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सभी स्थानों को भी राज्य सरकार तीर्थ के रूप में विकसित करेगी। पंचायतें अपने पारंपरिक कार्य करते हुए शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और उद्योग के कार्यों को भी प्रमुखता से करें। गांवों में किसानों को गोपालन और पशुपालन के लिए प्रेरित करें, जिससे मध्यप्रदेश को दूध उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सके। नदियों के उद्गम स्थलों का बेहतर रखरखाव करें पंचायत प्रतिनिधि – मंत्री श्री पटेल पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रह्लाद पटेल ने पंचायत प्रतिनिधियों की मांग पर 25 लाख रूपए तक के कार्यों का अधिकार सरपंचों को देने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पंचायतें देश का सबसे अच्छा और सबसे बड़ा रिकॉर्ड रूम बन सकती हैं। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि जिन पंचायतों में नदियां के उद्गम स्थल मौजूद हैं, वहां के सरपंच अपनी कार्य योजना में उद्गम स्थल के बेहतर रखरखाव संबंधी कार्यों को शामिल करें। ऐसी पंचायतें जहाँ की आबादी 5000 से अधिक होगी, वहां 2 सामुदायिक भवन स्वीकृत किए जाएंगे। सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधियों के विभिन्न संगठनों के अध्यक्ष और प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत: करनाल में कांग्रेस का ‘वोट चोर’ के खिलाफ बिगुल

हरियाणा  हरियाणा में मतदाता सूची में गड़बड़ी और कथित वोट चोरी के खिलाफ कांग्रेस ने राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। इस राज्यव्यापी आंदोलन की शुरूआत कल यानी 12 नवंबर से करनाल से शुरू होगा और 11 दिसंबर को गुरुग्राम में थम जाएगा। कांग्रेस का आंदोलन एक माह तक चलेगा।    वोट चोरी को लेकर हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में एआईसीसी मुख्यालय, नई दिल्ली में हुई बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है। उन्होंने निर्णय लिया कि प्रदेशभर में वोट चोर–गद्दी छोड़ अभियान के तहत जिला स्तरीय रोष प्रदर्शन किए जाएंगे। 12 नवंबर को करनाल से होगा राज्यव्यापी आंदोलन बता दें राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत 12 नवंबर को करनाल से होगा। पहला प्रदर्शन सुबह 10 बजे सेक्टर-12 पेट्रोल पंप (पाठक हॉस्पिटल के पास) स्थित पार्किंग स्थल में होगा। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य एवं सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी शामिल रहेंगे। कांग्रेस ने तय किया है कि हर जिले में वोट चोरी को लेकर रोष प्रदर्शन होंगे और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन स्थानीय उपायुक्त के माध्यम से सौंपा जाएगा। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने सभी जिलों के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे एकजुट होकर प्रदर्शन करें और उसकी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय भेजें, ताकि एक संकलित रिपोर्ट एआईसीसी को भेजी जा सके।  

सरदार पटेल ने देश की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

आधुनिक भारत के निर्माण में लौह पुरुष सरदार पटेल की भूमिका रही सबसे महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरदार पटेल ने देश की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर यूनिटी मार्च का किया शुभारंभ वल्लभ भवन के सरदार पटेल पार्क से आरंभ यूनिटी मार्च में बड़ी संख्या में युवा हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आधुनिक भारत के निर्माण में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही। सरदार पटेल ने अनेकों रियासतों  को एक करते हुए अखंड भारत की नींव रखी। उन्होंने देश की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोया। आजादी के समय सरदार पटेल ने पाकिस्तान की घटनाओं को दृष्टिगत रखते हुए देश को सुरक्षित रखा। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया के सामने जिस मजबूती के साथ खड़ा है, उसमें सबसे बड़ी भूमिका सरदार पटेल की रही है। सरदार पटेल की 150वीं जयंती से उनके गौरवशाली कार्यों का स्मरण करने के लिए प्रदेश में यूनिटी मार्च का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती पर "एक भारत-आत्मनिर्भर भारत" के लक्ष्य के साथ भोपाल- सीहोर लोकसभा क्षेत्र में निकाले जा रहे यूनिटी मार्च को वल्लभ भवन के सरदार पटेल पार्क में संबोधित कर रहे थे। देशभक्ति गीतों की धुनों के बीच आसमान में छोड़े गए तिरंगे बैलून मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करने के बाद 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान में कटहल और आम के पौधे रोपे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और पुलिस बैंड द्वारा बजाई जा रही देशभक्ति गीतों की धुनों के बीच आसमान में तिरंगे बैलून छोड़े। सामूहिक समवेत स्वर में वंदे मातरम का गान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झंडी दिखाकर यूनिटी मार्च को रवाना किया। यूनिटी मार्च में 2 हजार से अधिक युवाओं ने भाग लिया।  सरदार पटेल के प्रयासों से भोपाल सहित कई रियासतें अखंड भारत का बनीं हिस्सा: सांसद  आलोक शर्मा सांसद  आलोक शर्मा ने कहा कि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर देशभर के प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में 3 दिवसीय यूनिटी मार्च (पदयात्रा) का आयोजन किया जा रहा है। सरदार पटेल ने 562 रियासतों का विलय कर अखंड भारत की नींव रखी। भारत 1947 में अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हो गया था लेकिन भोपाल सहित जूनागढ़ और हैदराबाद जैसी कई रियासतों ने भारत में शामिल होने से इनकार किया। इसके बाद इन रियासतों को अखंड भारत का हिस्सा बनाने में सरदार पटेल की अहम भूमिका रहीं। उन्होंने बताया‍ कि यह रैली बैरसिया और सीहोर में भी आयोजित की जाएगी। अखंड भारत के लक्ष्य से युवा पीढ़ी को अवगत कराने के लिए गतिविधियां जारी वरिष्ठ विधायक  हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सरदार पटेल ऐसा व्यक्तित्व थे, जिन्होंने देश को एक करने का कार्य किया। वर्तमान समय में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत, दुनिया की चौथी सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बना है। हमारी सरकार द्वारा सरदार पटेल के अखंड भारत के लक्ष्य से युवा पीढ़ी को अवगत कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में भोपाल महापौर मती मालती राय, विधायक  भगवानदास सबनानी, पूर्व सांसद  आलोक संजर, पूर्व विधायक  ध्रुव नारायण सिंह, नगर निगम अध्यक्ष  किशन सूर्यवंशी सहित  रवींद्र यति, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे। 

डॉ. चंदेल का किसानों को सुझाव: फसलों में बीमारियों से बचाव के लिए जैव नियंत्रक अपनाएं

रायपुर : फसलों में बीमारियों के नियंत्रण के लिए जैव नियंत्रकों का उपयोग करें : डॉ. चंदेल कृषि विश्वविद्यालय में जैव-एजेंटों के मास मल्टीप्लीकेशन पर एक दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण संपन्न रायपुर कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में “जैवनियंत्रण एजेंट्स के व्यापक प्रसार (Mass Multiplication of Biocontrol Agents)” पर हैंड्स-ऑनट्रेनिंग का आयोजन छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CGCOST) रायपुर के वित्तीय सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञों ने छात्रों को कृषि के बदलते स्वरूप और जैविक उपायों के महत्व से अवगत कराया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को जैविक कीट नियंत्रण के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना था। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। डॉ. चंदेल ने कहा कि हमें ब्राज़ील के उदाहरण से सीखना चाहिए, जहाँ मच्छरों के नियंत्रण के लिए जैव नियंत्रण एजेंट्स का सफल उपयोग किया गया है। उन्होंने रासायनिक पदार्थों के उपयोग को कम करने और सामुदायिक स्तर पर जैविक नियंत्रण के उपाय अपनाने का आह्वान किया।  कार्यशाला में डॉ. संजय शर्मा अधिष्ठाता छात्र कल्याण ने कहा कि आज की कृषि पूरी तरह बाजार-केन्द्रित हो चुकी है, और जैव नियंत्रण एजेंट्स उद्यमिता (entrepreneurship) के लिए एक  उत्कृष्ट मंच साबित हो सकते हैं। डॉ. आरती गुहे अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय, रायपुर ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे आज अर्जित किए गए ज्ञान को आगे साझा करने के माध्यम बनें, ताकि यह जानकारी समाज के अन्य सदस्यों तक पहुँच सके। छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CGCOST) के प्रतिनिधि डॉ. अखिलेश त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे शोध एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन बार-बार किया जाना चाहिए, जिससे छात्रों के साथ-साथ कृषक समुदाय को भी नई तकनीकों की जानकारी मिल सके। कार्यक्रम में डॉ. एस. एस. टुटेजा, निदेशक विस्तार सेवाएं भी मौजूद थे। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के 20 विभिन्न महाविद्यालयों से 150 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्रों के लिए न केवल एक शैक्षणिक अनुभव रहा, बल्कि टिकाऊ कृषि और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम भी साबित हुआ। प्रशिक्षण के तकनीकी सत्रों में देश के ख्याति प्राप्त वैज्ञानिकों ने ऑनलाइन माध्यम से अपने व्याख्यान दिए। डॉ. ऋचा वार्ष्णेय (वैज्ञानिक, एन बी ए आई आर, बेंगलुरु), डॉ. विशाल सिंह सोमवंशी (आई एआर आई), और डॉ. विनोद निर्मलकर, कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, बिलासपुर ने जैव-एजेंटों के मास मल्टीप्लीकेशन और कृषि में उनके महत्व पर विस्तृत जानकारी साझा की। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण व्यावहारिक सत्र रहा, जहाँ छात्रों को जैव नियंत्रण प्रयोगशाला (Biocontrol Laboratory) में ले जाया गया। वहां उन्हें जैव-एजेंटों के बड़े पैमाने पर गुणनकी विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन (hands on demonstration) दिया गया। कार्यक्रम का सफल आयोजन संयोजक डॉ. बी. पी. कतलम और आयोजन सचिव डॉ. योगेश मेश्राम के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन समिति के सदस्यों डॉ. गजेंद्र चंद्राकर, डॉ. सोनाली देवले, डॉ. विकास सिंह, और डॉ. राजेश कुमार एक्का ने कार्यक्रम के सुचारु संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अवसर पर कीट विज्ञान विभाग के शोध छात्र भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

रायपुर: मार्शल आर्ट्स नेशनल प्रतियोगिता के लिए अंबिकापुर की टीम जम्मू-कश्मीर के लिए प्रस्थान

रायपुर : मार्शल आर्ट्स नेशनल प्रतियोगिता के लिए अंबिकापुर की बेटियाँ जम्मू-कश्मीर रवाना पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने दी दस-दस हजार की सहायता, कहा: बेटियाँ करेंगी प्रदेश का मान ऊँचा रायपुर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने अंबिकापुर की मार्शल आर्ट्स की उभरती हुई खिलाड़ियों कुमारी निशा वैद एवं कुमारी संगीता सिंह से अपने निवास कार्यालय में सौहार्दपूर्ण मुलाकात की। दोनों खिलाड़ी आगामी नेशनल मार्शल आर्ट्स प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु जम्मू-कश्मीर प्रस्थान कर रही हैं।     मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि निशा और संगीता जैसी होनहार बेटियाँ प्रदेश की खेल प्रतिभा का गौरव हैं। उन्होंने कहा कि दोनों ने पूर्व में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कई पदक हासिल किए हैं और अब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेकर छत्तीसगढ़ एवं अंबिकापुर का नाम रोशन करेंगी।     उन्होंने खिलाड़ी बेटियों को प्रोत्साहित करते हुए दस-दस हजार रू. की आर्थिक सहायता प्रदान की तथा भविष्य में भी हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। मंत्री अग्रवाल ने माँ महामाया से प्रार्थना करते हुए कहा कि वे दोनों खिलाड़ियों को सफलता का आशीर्वाद दें ताकि वे प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश को गौरवान्वित करें।

समधन से हुआ पिता को प्यार, बहू देखने गई मुलाकात बनी ड्रामा का कारण

कौशांबी       यूपी के कौशांबी से एक चौंकाने वाला प्रेम प्रसंग का मामला सामने आया है. एक व्यक्ति अपने बेटे के लिए बहू देखने गया था, लेकिन उसे होने वाली समधन से ही प्यार हो गया. जब इस प्रेम कहानी की जानकारी परिजनों को हुई तो हंगामा मच गया और मामला सुलझाने के लिए महिला थाने पहुंचा. घंटों चली बातचीत के बाद आखिरकार दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया.  बहू की जगह समधन से लड़ी आंखें यह अजीबो-गरीब प्रेम कहानी तब शुरू हुई जब फतेहपुर जिले के खागा कोतवाली क्षेत्र का एक व्यक्ति अपने बेटे की शादी तय करने के लिए कौशांबी के महेवाघाट कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में बहू देखने गया था. लगभग तीन महीने पहले बहू देखते समय व्यक्ति की आंखें होने वाली समधन से लड़ गईं. दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और वे एक-दूसरे को प्यार करने लगे. यह मामला आगे बढ़ा तो इस प्रेम प्रसंग की भनक व्यक्ति की पत्नी को लगी.  पत्नी ने थाने में की लिखित शिकायत पति के इस व्यवहार से नाराज पत्नी का पारा चढ़ गया. जब मामला हद से ज्यादा बढ़ गया तो पत्नी ने मंझनपुर महिला थाने में इसकी लिखित शिकायत दर्ज करा दी. शिकायत मिलने के बाद महिला थाना प्रभारी नीलम राघव और महिला आरक्षी विद्या यादव ने दोनों पक्षों को थाने बुलाया. दोनों पक्षों को समझाने-बुझाने का दौर कई घंटों तक चला, जिसके बाद आख़िरकार दोनों पक्ष समझौते के लिए राजी हो गए.  टूटा रिश्ता और खत्म हुआ प्रेम संबंध महिला थाने में हुए समझौते के तहत यह तय किया गया कि अब उस घर में बेटे की शादी नहीं होगी. इसके साथ ही, यह भी फैसला लिया गया कि दोनों लोग (व्यक्ति और समधन) आपस में किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं रखेंगे.  इस तरह, जहां बेटे की शादी का रिश्ता टूट गया, वहीं परवान चढ़ता यह अनोखा प्रेम प्रसंग भी पुलिस थाने में जाकर खत्म हो गया.