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जयपुर में शहरी सेवा शिविर: 327 प्रकरणों का हुआ निस्तारण

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा की सोच को धरातल पर लागू करने के उद्देश्य से चल रहे “शहरी सेवा शिविर–2026” का सोमवार को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जयपुर विकास प्राधिकरण परिसर स्थित नागरिक सेवा केंद्र में निरीक्षण किया। इस दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव (नगरीय विकास एवं आवासन विभाग) आलोक गुप्ता भी मौजूद रहे। मुख्य सचिव ने शिविर में पहुंचे नागरिकों से संवाद किया और विभिन्न प्रकरणों के निस्तारण की प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने टोकन व्यवस्था, आवेदन पंजीकरण, ई-मित्र काउंटर, प्रतीक्षालय और अभिलेख संधारण जैसी व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर नागरिक को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि ये शिविर केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम हैं। नागरिकों को इन शिविरों के जरिए संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन का अनुभव मिलना चाहिए। इस दौरान आलोक गुप्ता ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण और समय पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए ताकि अधिकतम लोगों को राहत मिल सके। जयपुर विकास आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने मुख्य सचिव को शिविरों की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिविरों में भू-प्रबंधन, लीज, नामांतरण, पट्टा, आवंटन और भवन निर्माण स्वीकृति सहित विभिन्न मामलों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जा रहा है। आयुक्त ने बताया कि पहले दिन आयोजित सुनवाई में कुल 327 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। साथ ही शिविर अवधि में लंबित प्रकरणों का तेजी से समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। शिविरों में नागरिकों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क, ई-मित्र काउंटर और जोनवार बैठने की व्यवस्था की गई है, जबकि आवेदकों को मोबाइल संदेश और कॉल के जरिए समय स्लॉट की जानकारी दी जा रही है। शिविर का आयोजन 12 जून से 15 जुलाई 2026 तक विभिन्न जोनों में चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।

नहाने के दौरान बड़ा हादसा: चंद्रावल और यमुना नदी में डूबे मासूम, गांवों में मचा कोहराम

लखनऊ उत्तर प्रदेश में नदियों में डूबने की दो अलग-अलग घटनाओं में पांच बच्चों की मौत हो गई। एक ओर जहां बांदा में मंदिर दर्शन के बाद चंद्रावल नदी में नहाने उतरे तीन भाई-बहन डूब गए। वहीं दूसरी ओर कानपुर देहात में यमुना नदी में डूब रही सहेली को बचाने की कोशिश में किशोरी और एक अन्य युवक की जान चली गई। दोनों घटनाओं के बाद परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। पहला मामला बांदा का है। जहां जसपुरा थाना के गौरीकलां गांव में दादी हीरामनी पत्नी के साथ मंदिर दर्शन करने गए तीन भाई-बहन नहाते समय चंद्रावल नदी में डूब गए। सूचना मिलने गोताखोर पानी में उतरे। वहीं, ग्रामीणों की मदद से 10 वर्षीय अंश, 13 वर्षीय माधुरी और 13 वर्षीय फुफेरे भाई प्रतीक को आनन-फानन में सीएचसी जसपुरा पहुंचाया गया। जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। वहीं, 15 वर्षीय ऋषभ नदी घाट पर खड़ा रहा,इससे उसकी जान बच गई। उधर, जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों बच्चों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। कानपुर देहात में भी डूबे किशोर-किशोरी दूसरा मामला कानपुर देहात से सामने आया है। जहां मूसानगर थाना क्षेत्र के नयापुरवा गांव के पास यमुना नदी में डूबे किशोर व किशोरी के शव सोमवार सुबह सात बजे घटनास्थल से एक किमी दूर मूसानगर के पक्का घाट के पास से बरामद हो गए। तलाश में जुटी एसडीआरएफ टीम ने पहले किशोर का व बाद में किशोरी का शव पानी से बाहर निकाला । दोनों के शव यमुना से बाहर निकलते ही उनके परिजनों के बिलखने से कोहराम मच गया। इसके बाद पुलिस ने पंचनामें की कार्रवाई शुरू की। दोस्त को बचाने के चक्कर में डूबे नयापुरवा मूसानगर के रहने वाले सुनील निषाद की बारह साल की बेटी जाह्नवी उर्फ भूरी पड़ोस में रहने वाली अपनी 15 वर्षीय सहेली ज्योति के साथ रविवार सुबह यमुना में नहाने गई थी। नहाते समय दोनों गहरे पानी में जाकर डूबने लगी। वहां मौजूद गांव के ही 16 साल के अनंतराम ने यमुना में डूब रही ज्योति को तो पानी से बाहर निकाल लिया था, लेकिन जाह्नवी को बचाने के प्रयास में वह गहरे पानी में जाकर खुद भी डूब गया था। मौके पर पहुंचे गोताखोरों की तलाश के बाद भी दोनों का पता नहीं चलने पर पुलिस ने एसडीआरएफ टीम को मौके पर बुलाया था। पक्के घाट के पास मिला दोनों का शव सोमवार को उनकी तलाश कर रही एसडीआरएफ टीम ने घटना स्थल से करीब एक किमी दूर मूसानगर के पक्के घाट के पास से सुबह सात बजे के करीब अनंतराम का व उसके 15 मिनट बाद जाह्नवी का शव नदी से बाहर निकाला। दोनों के शव मिलते ही उनके परिजनों के बिलखने से कोहराम मच गया। अनंतराम का शव देख उसकी मन गीता बदहवास हो गईं, जबकि भाई संतराम, बहनें मनीषा जानकी व रवीना बिलख उठी। जबकि जाह्नवी की मौत से उसकी मां विनीता व पिता सुनील बेहाल रहे। एसओ मूसानगर अमिता वर्मा ने बताया कि दोनों शवों के पंचनामे कि कार्रवाई हो रही है, पोस्टमार्टम कराने के बाद अग्रिम कार्रवाई होगी ।

एम.पी. ट्रांसको में हुई सब स्टेशनों के संचालन एवं सुरक्षा से संबंधी प्रशिक्षण कार्यशाला

एम.पी. ट्रांसको में हुई सब स्टेशनों के संचालन एवं सुरक्षा से संबंधी प्रशिक्षण कार्यशाला भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी की जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर सब स्टेशन संचालन एवं सुरक्षा से संबंधित व्यापक प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में उज्जैन जिले के नागदा, धार जिले के बदनावर व राजगढ़ टेस्टिंग डिवीज़न मुख्यालयों मे प्रशिक्षण कार्यशाला अधीक्षण अभियंता शेखर फटाले के मार्गदर्शन में हुई। जिनमें सब स्टेशन मेंटेनेंस एवं ऑपरेशन कार्यों के दौरान अपनाई जाने वाली आवश्यक सुरक्षा प्रक्रियाओं को बिंदुवार समझाया गया एवं कार्यस्थल पर लापरवाही रोकने के महत्व पर विशेष जोर देते हुए दुर्घटनाओं से बचाव के लिये व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी, जिससे कार्मिकों एवं उपकरणों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सुरक्षित कार्यशैली से कराया गया अवगत प्रशिक्षण में फटाले ने एम.पी. ट्रांसको की जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी के अंतर्गत निर्धारित स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर(एसओपी) एवं सेफ्टी प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने पर बल दिया। प्रतिभागियों को सुरक्षित कार्य पद्धतियों, सुरक्षा उपकरणों के उपयोग तथा निर्बाध एवं सुरक्षित विद्युत पारेषण बनाए रखने के लिये समन्वित टीमवर्क के रूप में कार्य करने के प्रति जागरूक भी किया गया। कार्यशालाओं में क्षेत्र के अभियंताओं एवं तकनीकी स्टाफ ने सक्रिय सहभागिता की।  

वन विभाग का सफल ऑपरेशन, भरतपुर से ट्रेंकुलाइज कर KP-3 को कूनो में शिफ्ट किया गया

भरतपुर भरतपुर जिले के बांध बारेठा अभयारण्य में 2 सप्ताह से डेरा जमाए चीता KP-3 को कूनो वापस भेज दिया है. वन विभाग की टीम KP-3 को सुरक्षित रूप से कूनो नेशनल पार्क लेकर पहुंची. KP-3 के बांध बारेठा क्षेत्र में रुकने से स्थानीय लोगों में डर का माहौल था. वन विभाग की निगरानी भी लगातार जारी थी. अब उसके सुरक्षित कूनो वापसी से स्थिति सामान्य हो गई है. वन विभाग के साथ कूनो नेशनल पार्क के लिए भी यह राहतभरी खबर है. 15 दिन पहले भरतपुर पहुंचा था चीता 15 दिन पहले मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से चीता भरतपुर पहुंचा था. लगभग 200 किमी का सफर तय कर जिले के बंध बारेठा वन्यजीव अभयारण्य पहुंच गया था. इसके बाद से ही उसकी मॉनिटरिंग की जा रही थी. KP-3 को ट्रैक करते हुए ट्रेंकुलाइज करके कूनो नेशनल पार्क के निर्धारित क्षेत्र में छोड़ा गया है. दोनों टीमों के समन्वय से मिशन सफल रहा. कूनो के चीतों को भा रहा राजस्थान दरअसल, कूनो के चीतों को राजस्थान काफी भा रहा है. इससे पहले KP-2 का मूवमेंट भी राजस्थान में रहा. वन विभाग के अनुसार KP-3 नर चीता कूनो से भटककर बारां और झालावाड़ जिले तक पहुंच गया था. वहां से विशेषज्ञ टीम ने इसे ट्रेंकुलाइज कर करीब 800 KM दूर कूनो नेशनल पार्क के कोर एरिया में रिलीज किया था. दूसरी बार कूनो से पहुंचा KP-3 लेकिन KP-3 दोबारा कूनो से निकलकर भरतपुर जिले की सीमा में आ गया था. करीब 2 सप्ताह तक इसका मूवमेंट रहा. स्थानीय लोगों में दहशत को देखते हुए भरतपुर वन विभाग और कूनो नेशनल पार्क की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन चलाकर KP-3 को फिर से रेस्क्यू किया.

महिला प्रशिक्षुओं की सेहत पर असर, BSAP ने 16 किलोमीटर दौड़ अस्थायी रूप से बंद की

रोहतास. बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस 2 (BSAP 2) में प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षु सिपाहियों की दौड़ गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। वहीं 16 किलो मीटर दौड़ के दौरान रविवार को बीमार हुई महिला सिपाही निशा कुमारी को उपचार के बाद बीसैप के अधिकारियों के अनुरोध पर बीएचयू वाराणसी रेफर कर दिया गया है। फिलहाल उनका इलाज बीएचयू में चल रहा है। डीजी ने मौसम को देखते हुए द‍िया आदेश बीसैप दो के अधिकारियों के अनुसार इस घटना और पांच दिन पूर्व दौड़ के दौरान बेहोश हुए एक प्रशिक्षु सिपाही की इलाज के क्रम में मौत की घटना के बाद महानिदेशक प्रशिक्षण ने आदेश दिया है।  प्रशिक्षुओं की सत्रांत परीक्षा में शामिल 16 किलोमीटर की दौड़ परीक्षा पर रोक लगा दी है। यह रोक गर्मी और लू के बढ़ते प्रकोप से प्रशिक्षुओं को आए दिन बीमार होने के बाद ली गई है। प्रशिक्षण की अन्य सभी गतिविधियां पूर्ववत जारी रहेगी। जानकारी के अनुसार तबीयत खराब होने के बाद निशा कुमारी को नारायण मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें उपचार किया गया। एक सिपाही को क‍िया गया रेफर  इसके अलावा अस्पताल में मरीज का सीटी स्कैन समेत अन्य आवश्यक जांचें की गईं। डॉक्टरों के मुताबिक मरीज को बार-बार बेहोशी आ रही थी और उन्होंने पेट में तेज दर्द की शिकायत भी की थी। उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार उन्हें बेहतर इलाज के लिए बनारस रेफर कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार प्रशिक्षु महिला सिपाही निशा कुमारी को पहले से ही छाती में गांठ की शिकायत थी। पूर्व से स्पष्ट किया गया है कि प्रशिक्षण शुरू होने से पहले ही यह घोषणा कर दी गई थी कि जिन अभ्यर्थियों को इस प्रकार की कोई भी स्वास्थ्य संबंधी या गंभीर समस्याएं हैं, उन्हें प्रशिक्षण में शामिल नहीं किया जाएगा। मह‍िला स‍िपाही की तबीयत में सुधार  इस संबंध में डीएसपी रवि भूषण ने बताया कि मौसम की तल्‍खी को देखते हुए 16 किलोमीटर की दौड़ को तत्‍काल प्रभाव से स्‍थगित करने का आदेश आया है। मौसम अनुकूल होने के बाद इस पर पुनर्विचार कर दौड़ आयोजित की जाएगी। अन्य प्रशिक्षण एवं परीक्षाएं पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेंगी। जहां तक प्रशिक्षु महिला सिपाही निशा कुमारी का प्रश्न है, वह अभी बनारस में उपचाराधीन हैं। उनकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।

सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से बड़ा भंडाफोड़, बठिंडा में सोलर कैमरे के जरिए हो रही थी निगरानी

बठिंडा. बठिंडा में पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक गंभीर मामले का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने एक ऐसे संदिग्ध जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिस पर सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों पर नजर रखने तथा संवेदनशील जानकारी विदेशों में बैठे देश विरोधी तत्वों तक पहुंचाने का आरोप है। मामले में अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार मामला थाना थर्मल क्षेत्र में दर्ज प्राथमिकी संख्या 66, दिनांक 9 जून 2026 से जुड़ा है। आरोपियों के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता कानून और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। सोलर ऊर्जा आधारित कैमरा किया इंस्टॉल जांच के दौरान सामने आया कि बठिंडा-मलोट मार्ग पर अंबुजा फैक्ट्री के सामने सरकारी बिजली के खंभे पर मार्च महीने में एक सोलर ऊर्जा आधारित कैमरा लगाया गया था। इस कैमरे में सक्रिय सिम कार्ड लगा हुआ था, जिसके माध्यम से दूर बैठकर लाइव निगरानी की जा रही थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि कैमरे को बेहद सुनियोजित तरीके से ऐसे स्थान पर स्थापित किया गया था, जहां से राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। राजस्थान तक रख रहा था आरोपित नजर प्रारंभिक जांच में पता चला है कि राजस्थान, फाजिल्का और फिरोजपुर सीमा क्षेत्रों की ओर जाने वाले सैन्य वाहनों, सुरक्षा बलों की आवाजाही और अन्य संवेदनशील गतिविधियों की निगरानी इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य था। एकत्र की गई वीडियो फुटेज कथित तौर पर पाकिस्तान और कनाडा में बैठे देश विरोधी तत्वों तथा उनके एजेंटों तक पहुंचाई जा रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. ज्योति यादव बैंस के निर्देश पर विशेष जांच टीमें गठित की गईं। पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस ने सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, तकनीकी साक्ष्यों और मानव खुफिया तंत्र की सहायता से पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का काम किया। अमृतसर से हुई गिरफ्तारियां जांच के दौरान 10 जून को अमृतसर जिले के अजनाला क्षेत्र के गांव सराए निवासी 40 वर्षीय अशोक सिंह को गिरफ्तार किया गया। उससे पूछताछ के आधार पर आगे कार्रवाई करते हुए 14 जून को उसी गांव के 22 वर्षीय अकासदीप सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूछताछ में दो अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता भी सामने आई है। मामले में कुल चार लोगों को नामजद किया है। इनमें से दो गिरफ्तार हैं, जबकि दो आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। तार इंटरनेशनल नेटवर्क से जुड़ने के संकेत मिले जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है और इसके तार अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है। साथ ही, जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस नेटवर्क के माध्यम से अब तक कितनी संवेदनशील जानकारी विदेशों तक पहुंचाई गई।

जनता की शिकायतों का अंबार, CM हेल्पलाइन 1076 पर 15 हजार से अधिक शिकायतें; बिजली-भूमि विवाद टॉप पर

रायपुर. छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री साय सरकार की नई सीएम हेल्पलाइन 1076 आम जनता के लिए शासन तक अपनी शिकायतें पहुंचने का सशक्त माध्यम बन रही है. हेल्पलाइन शुरू होने के महज पांच दिनों के भीतर शिकायतों की संख्या 15 हजार के आंकड़े को पार कर गई है. सबसे ज्यादा शिकायतें नगरीय सुविधाओं, बिजली और जमीन से जुड़ी हुई है. 13 जून तक 15,434 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं.  राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग से संबंधित 2,470 शिकायतें आई हैं. इनमें नामांतरण, सीमांकन और भू-अभिलेख संबंधी शिकायतें प्रमुख हैं. वहीं नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से जुड़ी 2,058 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें सड़क, नाली, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याएं शामिल हैं. सीएम हेल्पलाइन पर ऊर्जा विभाग से संबंधित 1,921 शिकायतें दर्ज की गई हैं. इनमें बिजली आपूर्ति, ट्रांसफॉर्मर और विद्युत कनेक्शन से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 1,509 मामलों के साथ-साथ खाद्य विभाग से जुड़ी 1,235 शिकायतें भी हेल्पलाइन पर दर्ज हुई हैं. खाद्य विभाग की शिकायतों में राशन कार्ड और पात्रता संबंधी समस्याएं सामने आई हैं.लगभग हर दूसरी शिकायत जमीन, नाली, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी है.

सड़कों व पुलों के निर्माण में गुणवत्ता और समय-सीमा सर्वोच्च प्राथमिकता, लेट-लतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी – अरुण साव

सड़कों और पुलों के निर्माण की धीमी गति पर बिफरे उप मुख्यमंत्री अरुण साव, 2 ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त  8 को कारण बताओ नोटिस, 2 ठेकेदारों पर कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया बस्तर में निरीक्षण और समीक्षा बैठकों में जताई थी गहरी नाराजगी, लापरवाह और काम में देरी करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई के दिए थे निर्देश सड़कों व पुलों के निर्माण में गुणवत्ता और समय-सीमा सर्वोच्च प्राथमिकता, लेट-लतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी – अरुण साव रायपुर.   उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव द्वारा सड़कों व पुलों के निर्माण की धीमी गति पर गहरी नाराजगी जाहिर करने और ठेकेदारों पर कार्रवाई के निर्देश के बाद विभाग ने दो ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त कर दिए हैं। लोक निर्माण विभाग ने कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले 8 ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए हैं। वहीं पूर्व में दो ठेकेदारों को जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब का परीक्षण कर ठेकेदार के विरूद्ध कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया गया है।  लोक निर्माण विभाग ने 10 जून को भी राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशलूर-जगदलपुर मार्ग में किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन के ऊपर केशलूर के पास बन रहे फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज में काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे होने और तय किए गए माइलस्टोन्स के अनुरूप नहीं होने पर ठेकेदार मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को नोटिस जारी कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।     उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पिछले सप्ताह चार दिनों के बस्तर प्रवास के दौरान अपने चारों विभागों के कार्यों का निरीक्षण कर गहन समीक्षा की थी। उन्होंने निरीक्षण और बैठकों के दौरान सड़कों व पुलों के निर्माण की धीमी प्रगति पर अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर गहरी नाराजगी जताई थी। उन्होंने काम में लापरवाही, देरी और अनुबंध के अनुसार अपेक्षित तेजी नहीं लाने वाले ठेकेदारों के विरूद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पुलों के काम पिछड़ने पर दो ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने चार पुलों के निर्माण की धीमी प्रगति पर ठेकेदार मेसर्स गुप्ता कन्सट्रक्शन कंपनी का पंजीयन दो वर्षों के लिए निरस्त कर दिया है। कंपनी द्वारा भवरडींग नदी पर अदनार-तोतर मार्ग, कोंडागांव के घोटिया-मुंडा-चांदाबेड़ा मार्ग और बड़े राजपुर विकासखंड के पलना-मरीगांव-कुंडई मार्ग पर उच्च स्तरीय पुल का निर्माण किया जा रहा है। कंपनी कबीरधाम जिले के बांटीपथरा से कुई (दमगढ़) मार्ग में हॉफ नदी पर भी उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण कर रही है। चारों कार्यस्थलों पर कंपनी का काम अपेक्षित गति से काफी पीछे है। विभाग ने कांकेर के आमाबेड़ा-सेमर गांव सड़क पर नेरूल नदी तथा बोड़ागांव-खासगांव-तरादुल मार्ग में डुमरीकेल नाला पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के कार्य में लेट-लतीफी पर ठेकेदार निर्भय राम साहू का पंजीयन आगामी दो वर्षों के लिए निरस्त कर दिया है। विभाग द्वारा प्रगति की लगातार समीक्षा कर कार्यों में तेजी लाने के लिए बार-बार निर्देशित और नोटिस जारी करने के बावजूद इन दोनों ठेकेदारों के काम की गति असंतोषजनक है।   लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने नारायणपुर-सोनपुर-मरोदा मार्ग के चौड़ीकरण व सुधार कार्य की धीमी गति पर ठेकेदार पंकज हालदार को पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस के उत्तर का परीक्षण कर कार्रवाई के लिए बस्तर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया है। प्रमुख अभियंता ने सुकमा में पैकपारा-धनीकोड़ता मार्ग तथा केरलापाल-पटेलपारा-सिरसट्टी सड़क के कार्य में भी अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर ठेकेदार आशीष भदौरिया को पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब का परीक्षण कर कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया है।    सड़कों के निर्माण में लेट-लतीफी पर इन ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी विभाग ने कांकेर-अमोड़ा-नरहरपुर मार्ग के ठेकेदार मेसर्स बी.एम.एस. प्रोजेक्ट, कोंडागांव में हडेली-कुदूर मार्ग के ठेकेदार मेसर्स सुराना एंड कंपनी और जगदलपुर-चित्रकोट मार्ग के ठेकेदार मेसर्स एस.के. अरोरा को कार्यों में धीमी प्रगति के कारण कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कार्यस्थलों पर काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे होने और तय किए गए माइलस्टोन्स (महत्वपूर्ण पड़ावों) के अनुरूप नहीं होने पर सुकमा के चिंतलनार-मरियागुड़म सड़क के ठेकेदार के. मोहन रेड्डी, ट्रांससॉफ्ट इन्फ्रा और मेसर्स राघव कन्सट्रक्शन, कोंटा-गोलापल्ली मार्ग के ठेकेदार मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेसर्स राघव कन्सट्रक्शन तथा भेज्जी-चिंतागुफा सड़क का निर्माण कर रहे ठेकेदार के. मोहन रेड्डी एवं गोविन्द्र सिंह देशमुख को लोक निर्माण विभाग के सुकमा संभाग के कार्यपालन अभियंता द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।     ”सड़कों व पुलों के निर्माण में गुणवत्ता और समय-सीमा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी प्रकार की लेट-लतीफी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्धारित समयावधि में निर्माण कार्यों के पूरे नहीं होने से लोगों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है। बस्तर में निर्माणाधीन सड़कों और पुलों को तेजी से पूरे कर बेहतर कनेक्टीविटी सुनिश्चित करने पर जोर है। वहां काम कर रहे ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों को अनुबंध के अनुसार निर्धारित प्रगति तथा माइलस्टोन्स पूरे करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। काम में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा रही है।“ – अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री

घर संभालना भी ‘काम’ है! सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से गृहिणियों के श्रम के मूल्यांकन पर चर्चा तेज

भोपाल सर्वोच्च न्यायालय ने 11 जून को फैसला सुनाया कि मोटर दुर्घटना में मृत्यु होने पर मुआवज़ा तय करते समय गृहिणियों द्वारा किए गए अवैतनिक घरेलू श्रम को एक स्वतंत्र आर्थिक मूल्य दिया जाना चाहिए। इसके लिए न्यायालय ने प्रति माह ₹30,000 की न्यूनतम काल्पनिक आय निर्धारित की। गृहिणियों को "राष्ट्र निर्माता" मानते हुए, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मोटर दुर्घटना दावों में "घरेलू देखभाल की हानि" नामक मुआवज़े का एक अलग मद बनाया और इस राशि में हर तीन साल में 10% की वृद्धि अनिवार्य की। टीसर्वोच्च न्यायालय ने 11 जून को फैसला सुनाया कि मोटर दुर्घटना में मृत्यु होने पर मुआवज़ा तय करते समय गृहिणियों द्वारा किए गए अवैतनिक घरेलू श्रम को एक स्वतंत्र आर्थिक मूल्य दिया जाना चाहिए। इसके लिए न्यायालय ने प्रति माह ₹30,000 की न्यूनतम काल्पनिक आय निर्धारित की। गृहिणियों को "राष्ट्र निर्माता" मानते हुए, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मोटर दुर्घटना दावों में "घरेलू देखभाल की हानि" नामक मुआवज़े का एक अलग मद बनाया और इस राशि में हर तीन साल में 10% की वृद्धि अनिवार्य की। विवाद क्या था? यह फैसला पंजाब में एक मोटर दुर्घटना के दावे से संबंधित अपील पर आया है। नवंबर 2001 में एक सड़क दुर्घटना में रेशमा नाम की महिला की मृत्यु के बाद, उनके पति और तीन बच्चों ने मुआवजे के लिए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) से संपर्क किया। दिसंबर 2003 में, न्यायाधिकरण ने ₹2.42 लाख का मुआवजा दिया। इससे असंतुष्ट होकर परिवार ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अपील की। ​​दिसंबर 2024 में, उच्च न्यायालय ने मुआवजे की राशि बढ़ाकर ₹8.43 लाख कर दी, साथ ही दावा याचिका दायर करने की तारीख से 7.5% की दर से ब्याज भी लगाया। न्यायालय ने कहा कि यदि राशि का भुगतान तीन महीने के भीतर नहीं किया जाता है, तो ब्याज दर बढ़कर 9% प्रति वर्ष हो जाएगी, और यदि भुगतान में छह महीने से अधिक की देरी होती है, तो यह 12% प्रति वर्ष हो जाएगी। मुआवजे की राशि से असंतुष्ट होकर परिवार ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।  सुबह की पहली चाय से लेकर रात के अंतिम काम तक, करोड़ों भारतीय गृहिणियां बिना वेतन, बिना छुट्टी और बिना किसी औपचारिक मान्यता के लगातार काम करती हैं। खाना बनाना, बच्चों की परवरिश, बुजुर्गों की देखभाल, घर का बजट संभालना, परिवार के स्वास्थ्य का ध्यान रखना और भावनात्मक सहारा बनना—ये ऐसे कार्य हैं जिन पर पूरे परिवार की नींव टिकी होती है। इसके बावजूद देश की आर्थिक व्यवस्था में इन कार्यों को लगभग अदृश्य माना जाता है। हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने गृहिणियों को राष्ट्रनिर्माता बताते हुए उनके श्रम को आर्थिक मूल्य देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसके बाद यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या गृहिणियों के अवैतनिक श्रम को देश की जीडीपी और आर्थिक गणनाओं में शामिल किया जाना चाहिए। जीडीपी में क्यों नहीं दिखता गृहिणियों का योगदान?     सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश में होने वाली आर्थिक गतिविधियों का मूल्यांकन करता है, लेकिन इसमें केवल वही कार्य शामिल होते हैं जिनमें पैसों का लेन-देन होता है। यही कारण है कि यदि कोई महिला अपने परिवार के लिए भोजन तैयार करती है तो उसका आर्थिक मूल्य नहीं गिना जाता, लेकिन वही भोजन किसी होटल या रेस्टोरेंट में तैयार हो तो वह जीडीपी का हिस्सा बन जाता है।     इसी तरह यदि कोई बेटी अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करती है तो उसका योगदान आर्थिक आंकड़ों में दर्ज नहीं होता, जबकि किसी अस्पताल या केयर सेंटर द्वारा दी गई वही सेवा जीडीपी में शामिल हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही वह बड़ी खामी है जिसके कारण महिलाओं के घरेलू श्रम का वास्तविक मूल्य सामने नहीं आ पाता। भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी अनदेखी सब्सिडी     विकास विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह के अनुसार भारत का विकास मॉडल करोड़ों महिलाओं द्वारा दिए जा रहे मुफ्त श्रम पर आधारित है। उनका कहना है कि देश की लाखों गृहिणियां ऐसी सेवाएं दे रही हैं जिनके लिए यदि पेशेवर कर्मचारी रखे जाएं तो भारी आर्थिक खर्च आएगा।     एसबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में गृहिणियों के अवैतनिक श्रम का आर्थिक मूल्य देश की जीडीपी का लगभग 15 से 17 प्रतिशत तक हो सकता है। यह योगदान कई बड़े आर्थिक क्षेत्रों के बराबर या उनसे अधिक माना जाता है। इसके बावजूद गृहिणियों को आधिकारिक रूप से "आर्थिक रूप से निष्क्रिय" श्रेणी में रखा जाता है। समय का सबसे बड़ा निवेश महिलाएं कर रही हैं     भारत सरकार के टाइम-यूज सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय महिलाएं प्रतिदिन औसतन सात घंटे घरेलू कार्यों में लगाती हैं। इसके विपरीत पुरुष औसतन केवल एक घंटा घरेलू कार्यों के लिए देते हैं।     यह अंतर केवल श्रम का नहीं बल्कि अवसरों का भी है। घरेलू जिम्मेदारियों के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं नौकरी, व्यवसाय, उच्च शिक्षा और व्यक्तिगत विकास के अवसरों से दूर रह जाती हैं। यही कारण है कि भारत में महिला श्रम भागीदारी दर अभी भी अपेक्षाकृत कम है। घरेलू श्रम के तीन बड़े स्तंभ     गृहिणियों का योगदान केवल खाना बनाने तक सीमित नहीं है।     भोजन और पोषण     परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक भोजन की व्यवस्था करना।     बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल     शिक्षा, स्वास्थ्य, भावनात्मक समर्थन और सुरक्षा सुनिश्चित करना।     घर का प्रबंधन     सफाई, बजट, खरीदारी, समय प्रबंधन और दैनिक आवश्यकताओं का संचालन करना। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सभी सेवाओं के लिए अलग-अलग पेशेवर कर्मचारी नियुक्त किए जाएं तो प्रति परिवार कम से कम 15 हजार रुपये प्रतिमाह या उससे अधिक का खर्च आ सकता है। दुनिया के कई देशों ने दी है मान्यता     घरेलू श्रम को औपचारिक मान्यता देने के प्रयास दुनिया के कई देशों में किए गए हैं।     स्वीडन में बच्चों और परिवार की देखभाल में बिताए गए वर्षों के आधार पर महिलाओं को पेंशन क्रेडिट दिया जाता है। इससे उनकी सामाजिक सुरक्षा मजबूत होती है।     कनाडा नियमित सर्वेक्षणों के माध्यम से घरेलू … Read more

नगर निगम की बड़ी पहल, ड्रेन और नालों की सफाई पर 1.5 करोड़ रुपये खर्च

पानीपत  आगामी दिनों में मानसून को देखते हुए नगर निगम पानीपत और जिला प्रशासन ने शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। नगर निगम ने वार्ड-1 से 26 तक बरसात के दौरान जमा होने वाले पानी की निकासी के लिए डीजल इंजन और माउंटेड पंप उपलब्ध कराने, उनके संचालन और रखरखाव के लिए 55.28 लाख रुपये का टेंडर जारी किया है। इसके तहत आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न क्षेत्रों में पंप लगाकर जलभराव वाले स्थानों से पानी निकाला जाएगा। नगर निगम ने ऐसे 20 से अधिक स्थान चिन्हित किए हैं। इसके अलावा निगम ने मानसून से पहले शहर की प्रमुख ड्रेनों, नालों और जल निकासी तंत्र की सफाई का विशेष अभियान चलाया है। ड्रेन नंबर-1, नोहरा ड्रेन तथा अन्य बड़े नालों से सिल्ट और कचरा निकालने के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये की लागत से सफाई कार्य कराया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बारिश शुरू होने से पहले सभी प्रमुख ड्रेनों की सफाई पूरी कर ली जाए ताकि पानी का प्रवाह बाधित न हो। इन 3 पाइंट पर ध्यान देने की बड़ी जरूरत है 1. ड्रेन-1 व नालों की सफाई : शहर की जीवन रेखा ड्रेन-1 को माना जाता है। इसकी सफाई अब तक शुरू नहीं हुई है। जगह-जगह कचरा भरा पड़ा है। हालांकि इसकी सफाई समेत अन्य के लिए नगर निगम ने टेंडर जारी किया है, लेकिन सफाई का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। 2. मुख्य सीवर लाइन की सफाई और मरम्मत आधे से ज्यादा शहर की सीवर निकासी संजय चौक से बबैल नाका और यहां से सेक्टर-29 पार्ट-2 से होते हुए मुख्य लाइन पर निर्भर है। इसकी सफाई और मरम्मत का काम अभी चल रहा है। बरसतों से पहले काम पूरा नहीं हुआ तो शहर में जलभराव होगा। 3. संवेदनशील इलाकों में निर्माणाधीन नालों के कार्य नगर निगम कमिश्नर डा. पंकज ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठकें भी आयोजित की हैं। जिनमें जलभराव संभावित क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। हाइवे और शहर के संवेदनशील इलाकों में निर्माणाधीन नालों के कार्य को भी जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया है। इन कामों में ढील रही तो बरसात के दौरान लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। – निगम और प्रशसान के बेहतर काम करने के दावे नगर निगम और जिला प्रशासन ने आगामी मानसून सीजन में शहर को जलभराव की गंभीर समस्या से बचाने के लिए इस बार व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू करने का दावा किया हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है मुख्य फोकस ड्रेनों की सफाई, नेशनल हाइवे के अधूरे नालों की कनेक्टिविटी और वैज्ञानिक तरीके से गाद के निस्तारण पर है।  प्रशासन द्वारा की गई मुख्य तैयारियां 1. प्रमुख ड्रेनों और नालों की सफाई : नगर निगम ने मानसून से पहले शहर की जीवन रेखा माने जाने वाले प्रमुख ड्रेनों की सफाई के लिए 1.5 करोड़ का बजट आवंटित कर टेंडर जारी किए हैं। इसके तहत ड्रेन नंबर-1, ड्रेन नंबर-2 और नोहरा ड्रेन की जेसीबी मशीनों और विशेष उपकरणों से युद्ध स्तर पर सफाई कराई जाएगी। 2. वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण : इस बार के टेंडर में प्रशासन ने एक विशेष और नया प्रावधान जोड़ा है। ड्रेनों से निकाले जाने वाले कचरे और सिल्ट को सड़कों के किनारे छोड़ने के बजाय स्वच्छ भारत मिशन के नियमों के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है। इसके लिए सरकार द्वारा निर्धारित 550 प्रति टन की दर से कचरा उठान की व्यवस्था की गई है। निकाले गए कचरे को तुरंत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए शहर से दूर भैंसवाल रोड की तरफ डंप किया जा रहा है ताकि बारिश में यह गाद दोबारा बहकर नालों में न चली जाए। 3. एनएचएआई के साथ समन्वय और हाइवे वाटरलॉगिंग पर फोकस शहर से गुजरने वाले नेशनल हाइवे जीटी रोड पर जलभराव एक बड़ी समस्या रहा है। इसे लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम कमिश्नर डा. पंकज यादव ने एनएचएआई को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि हाइवे के साथ बन रहे सभी निर्माणाधीन और अधूरे नालों का काम मानसून से पहले अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। – प्रशासनिक स्तर पर निगरानी व नोडल अधिकारी : मेयर नगर निगम और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार फील्ड में उतरकर ड्रेन सफाई कार्य का निरीक्षण करेंगे। संवेदनशील और निचले इलाकों की सूची तैयार कर वहां अतिरिक्त मोबाइल पंप और डीजल जनरेटर सेट तैनात करने की योजना बनाई गई है। – कोमल सैनी, मेयर नगर निगम।