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डॉ. मोहन यादव बिहार चुनाव में सक्रिय, 52 सीटों पर करेंगे बिहारी मतदाताओं को साधने की कोशिश

भोपाल  बिहार चुनाव ने एमपी के सीएम डॉ. मोहन यादव की व्यस्तता बढ़ा दी है। वे शुक्रवार से अगले 15 दिनों तक बिहार आते-जाते रहेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा और एनडीए ने तय किया है कि उन्हें 52 से अधिक सीटों पर उतारा जाए। ये सीटें यादव और ओबीसी बाहुल्य हैं। हमेशा से माना जाता रहा है कि ये सीटें बिहार में किसी भी दल की सरकार बनाने और बिगाड़ने में अहम रोल अदा करती हैं। मध्यप्रदेश व बिहार भाजपा इकाई के कुछ प्रमुखों से मिली जानकारी के मुताबिक डॉ. यादव को इन सीटों पर न्यूनतम एक से चार बार तक उतारा जाएगा, जहां वे सभाओं से बिहारी मतदाताओं से संवाद करेंगे। रैलियां भी होंगी, जिनमें वाहन पर सवार होने के साथ-साथ प्रत्याशियों के साथ पैदल भी चलेंगे। नुक्कड़ सभाओं में हिस्सा लेंगे और सामाजिक समरसता सम्मेलनों के जरिए द्विपक्षीय संवाद भी करेंगे। शुक्रवार को चंपारण की बगाहा, सिगटा, सहरसा सीटों पर उतरेंगे। मुख्यमंत्री ने दिवाली से पहले भी दो दिन बिहार में चार सीटों पर सभाएं की थीं। मुख्यमंत्री को इसलिए ज्यादा सीटों पर उतारने की तैयारी बिहार में जातीय समीकरण हावी रहा है। यही वजह है कि एनडीए और इंडिया गठबंधन व अन्य ने सीट बंटवारे में जातीय समीकरण को ध्यान में रखा है। जातीय समीकरण में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग का बड़ा वोट बैंक है। बिहार में यादव मतदाता अहम स्थान रखते हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं यादव समाज से आते हैं। इसलिए भाजपा उन्हें यादव बाहुल सीटों पर बड़े चेहरे के रूप में उतारना चाहती है। चुनावी जानकारों की मानें तो भाजपा बताना चाहती है कि वे उनको तवज्जो देते हैं और उदाहरण मध्यप्रदेश में यादव मुख्यमंत्री का होना है। शिवराज और सिंधिया भी मैदान में, वीडी संभालेंगे बूथ मैनेजमेंट केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chauhan) और ज्योतिरादित्य सिंधिया (jyotiraditya scindia) को भी बिहार फतह की जिम्मेदारी मिली है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक चौहान भी शुक्रवार को बिहार जाएंगे। देश भर में उनकी पहचान मतदाताओं से घुलने-मिलने की रही है, वह मामा के रूप में बड़ी पहचान बना चुके हैं। उन्हें ऐसी सीटों व क्षेत्रों में उतारे जाने की तैयारी है, जहां जनता को जनता से घुलने-मिलने वाले जनप्रतिनिधि की जरुरत होगी। वहीं मप्र में विधानसभा और लोकसभा में सर्वाधिक जीत का रेकॉर्ड बना चुके प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं खजुराहो सांसद वीडी शर्मा को पटना जोन में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। वह एमपी की तर्ज पर बिहार में भी बूथ मैनेजमेंट करने में जुट चुके हैं। उन्हें पटना जोन की 8 लोकसभा और 42 विधानसभा का जिम्मा मिला है। वे बूथ मैनेजमेंट पर फोकस हैं। व्यापारियों के बीच रहेंगे खंडेलवाल चुनाव प्रबंधन में आगे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को पार्टी ने शहरी क्षेत्रों की विधानसभा सीटों में भेजने का निर्णय लिया है, जहां वे व्यापारियां, उद्योगपतियों के बीच जाकर संवाद करेंगे। उनकी बातों को सुनेंगे और भाजपा व एनडीए की रीति-नीति से उन्हें अवगत कराएंगे। एमपी के 1200 नेता-कार्यकर्ता बिहार में बिहार में इनके अलावा मध्यप्रदेश के 1200 से अधिक नेता व कार्यकर्ता बिहार में है। इनमें से कुछ की तैनाती एक महीने पहले हो चुकी है। कुछ 15 दिनों से है। ये जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, राजेंद्र शुक्ल, प्रदेश के मंत्री प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर को भी मैदान में उतारा जाना है।

जानलेवा हमला: बदमाशों ने पुलिस पर बोला धावा, दो सिपाही घायल

कोटा राजस्थान के कोटा जिले में बदमाशों को पकड़ने गई पुलिस टीम पर बदमाशों ने चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में दो कांस्टेबल घायल हो गए, जिनको निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। यह मामला शहर के आर के पुरम थाना क्षेत्र में सामने आया है। वहीं हमले के बाद बदमाशों की तलाशी के लिए टीमों का गठन कर दिया गया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। घायल पुष्पेंद्र ने बताया कि 21 अक्तूबर को आरके पुरम थाना क्षेत्र में चाकूबाजी की घटना हुई थी। हमले में राम चोपड़ा, कुणाल और अन्य बदमाश शामिल थे। मुखबिर से सूचना मिली थी कि यह बदमाश इलाके में ही छुपे हुए हैं। उसके बाद बदमाशों को पकड़ने के लिए टीम मौके पर पहुंची और तीनों बदमाशों को घेर भी लिया। इतने में ही तीनों बदमाशों ने चाकू निकालकर हमला शुरू कर दिया। इसमें पुष्पेंद्र हाडा और गोविंद चौधरी के चाकू के वार लगे हैं। एक कांस्टेबल के हाथ और पेट पर चाकू के घाव लगे हैं, जबकि दूसरे कांस्टेबल के कंधे पर चोट आई है। सामने आया है कि जब पुलिस बदमाशों को पकड़ने के लिए गई तो तीनों बदमाश मौके से फरार हो गए थे। उनका पीछा भी किया गया तो वह गलियों में जाकर छुपे रहे और मौका पाकर बदमाशों ने चाकू से हमला कर दिया। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल हो गया। स्थानीय लोग कहने लगे कि बदमाशों में अब पुलिस का डर नहीं रहा है। वहीं पुलिस से वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।  

रानी कमलापति-हजरत निजामुद्दीन छठ पूजा स्पेशल ट्रेन 25 अक्टूबर को चलेगी

भोपाल   रेलवे द्वारा छठ महापर्व पर अतिरिक्त यात्री यातायात को क्लियर करने एवं यात्रियों की सुविधा के लिए रानी कमलापति-हजरत निजामुद्दीन-रानी कमलापति के मध्य राउंड ट्रिप के लिए छठ पूजा स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। जानकारी के मुताबिक ट्रेन क्रमांक 01661 छठ पूजा स्पेशल शनिवार 25 अक्टूबर को रानी कमलापति स्टेशन से सुबह 7:30 बजे प्रस्थान कर विदिशा 8:28 बजे, बीना 9:50 बजे, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई झांसी 12:45 बजे, ग्वालियर 14:20 बजे, आगरा कैंट 16:45 बजे, मथुरा 18:00 बजे आगमन कर रात 20:15 बजे हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन क्रमांक 01662 उसी दिन शनिवार को हजरत निजामुद्दीन से 21:30 बजे प्रस्थान कर मथुरा 23:55 बजे, आगरा कैंट 00:50 बजे, ग्वालियर 2:55 बजे, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई झांसी 05:35 बजे, बीना 08:10 बजे, विदिशा 09:15 बजे आगमन कर रविवार को सुबह 10:50 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी। इस ट्रेन में दो सेकंड एसी, तीन थर्ड एसी, छह इकोनामी थर्ड एसी, पांच स्लीपर, चार सामान्य श्रेणी, एक एसएलआरडी, एक जनरेटर कार सहित कुल 22 एलएचबी कोच होंगे।  

महाकाल मंदिर में श्रद्धालु रफ्तार: होटल और यात्रीगृहों में जोरदार बुकिंग जारी

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में दीपावली के बाद दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ गई है। मंदिर प्रशासन के अनुसार गुरुवार को डेढ़ लाख से अधिक भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। दो दिनों में ढाई लाख श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए। आने वाले दिनों में शनिवार, रविवार व कार्तिक शुक्ल पक्ष का सोमवार होने से दर्शनार्थियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी का अनुमान है। महाकाल मंदिर में बीते एक माह से दर्शनार्थियों की संख्या कम हुई थी। प्रतिदिन 40 से 50 हजार भक्त मंदिर पहुंच रहे थे लेकिन बुधवार से एकाएक दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ने लगी है। बीते दो दिनों में ढाई लाख से अधिक भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन कर लिए हैं। होटल व यात्रीगृहों में कमरों की जोरदार बुकिंग चल रही है। महाकालेश्वर मंदिर के आसपास तथा इंदौर रोड क्षेत्र के रेस्टोरेंट भी फुल चल रहे हैं। कई रेस्टोरेंट संचालकों ने फोन पर बुकिंग लेना बंद कर दिया है। महाकालेश्वर यात्री गृह व हरसिद्धि धर्मशाला में भी कमरों की बुकिंग जारी है। बताया जाता है गुजरात में दीपावली पर लक्ष्मी पूजा के बाद लोग घरों पर ताला लगाकर तीन चार दिनों के लिए देव स्थान या हिल स्टेशनों पर घूमने निकल जाते हैं। बीते कुछ सालों से इन दिनों में भगवान महाकाल के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में गुजरात के भक्त आते हैं। उज्जैन में रहना, ठहरना व घूमना फिरना काफी सस्ता है, यहां का मौसम भी अनुकूल रहता है। श्रीमहाकाल महालोक बनने के बाद तो हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान महाकाल दर्शन करने आ रहे हैं।

टक्कर इतनी जबरदस्त कि वाहन बिखर गए, फगवाड़ा में सड़क हादसे का खौफनाक मंजर

फगवाड़ा फगवाड़ा होशियापुर रोड पर गांव रावलपिंडी के पास देर रात तेज रफ्तार में आ रही इनोवा कार की ट्रैक्टर ट्राली के साथ टक्कर होने की सूचना मिली है। घटे हादसे में ट्रैक्टर ट्राली चालक सहित इनोवा कार में सवार 3 लोग जख्मी हुए हैं। दुर्घटना में घायल हुए सभी चार घायलों को इलाज के लिए सिविल अस्पताल फगवाड़ा लाया गया हैं जहां सरकारी डॉक्टरों द्वारा इनका उपचार जारी है। हादसे में जख्मीं ट्रैक्टर चालक अमनदीप सिंह पुत्र महिन्द्र सिंह वशी गांव पलपोता जिला जालंधर ने बताया कि वह अपनी ट्रैक्टर ट्राली पर जब जा रहा था तब गांव रावलपिंडी के पास तेज रफ्तार में आ रही इनोवा कार ने उसके ट्रैक्टर को अपनी चपेट में ले लिया। अमनदीप सिंह के अनुसार इनोवा कार में शराब की बोतलें और गिलास आदि मौजूद थे। खबर लिखे जाने तक थाना रावलपिंडी की पुलिस घटे हादसे के कारणों की जांच कर रही है। 

हरियाणा SC आयोग का बड़ा कदम, IPS पूरन कुमार की आत्महत्या मामले में DGP से मांगी ATR

चंडीगढ़ हरियाणा के वरिष्ठ IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले ने अब प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने इस पूरे प्रकरण पर स्वयं संज्ञान लेते हुए चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस विभाग को कठोर नोटिस जारी किया है। आयोग ने चंडीगढ़ के मुख्य सचिव और डीजीपी से सात दिन के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (एक्शन टेकन रिपोर्ट ATR) मांगी है। आयोग ने इस घटना को जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। आयोग ने स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ आत्महत्या नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सामाजिक-प्रशासनिक विफलता का संकेत है। आयोग द्वारा जारी नोटिस में दिवंगत अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या से पहले लिखे फाइनल नोट का हवाला देते हुए कहा गया कि वे अनुसूचित जाति समुदाय से थे और लंबे समय से वरिष्ठ अधिकारियों के जातिगत भेदभाव, मानसिक प्रताड़ना और सार्वजनिक अपमान का सामना कर रहे थे। नोट में यह भी उल्लेख है कि उन्हें यह सब वरिष्ठ अफसरों की मिलीभगत और दिशा-निर्देश में झेलना पड़ा। आयोग ने कहा कि यदि यह तथ्य जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह SC-एसटी एक्ट, 1989 का स्पष्ट उल्लंघन होगा। इस मामले ने और तूल तब पकड़ा जब दिवंगत अधिकारी की आईएएस पत्नी अमनीत पी. कुमार ने सनसनीखेज आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके पति को जानबूझकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और कुछ अधिकारियों ने उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाया। आयोग ने इसे ‘अत्याचार और षड्यंत्र’ का गंभीर मामला बताते हुए जांच की दिशा बदलने के संकेत दिए हैं। आयोग ने इस मामले में दर्ज एफआईआर और एसआईटी के गठन से लेकर हर पहलू के बारे में जानकारी मांगी है। एफआईआर किन धाराओं और किन लोगों के खिलाफ दर्ज की गई। क्या आरोपित अधिकारियों को नामजद या गिरफ्तार किया गया है। क्या जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित की है। जांच में देरी के कारण को लेकर भी सवाल किया है। SC-ST एक्ट की धाराओं में ढिलाई पर सख्त रोक हरियाणा SC आयोग ने कहा है कि इस मामले में SC-ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) सहित सभी प्रासंगिक धाराओं को पूरी कठोरता से लागू किया जाए। आयोग ने आदेश दिया है कि जांच रिपोर्ट हर 15 दिन में आयोग को भेजी जाए, ताकि कोई भी पहलू दबाया न जा सके। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट नहीं मिली या जवाब असंतोषजनक हुआ, तो एचएसएससी एक्ट, 2018 की धारा 9 के तहत संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाएगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को उदाहरण के तौर पर मिसाल बनाएगा, ताकि भविष्य में किसी अनुसूचित जाति अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार दोहराया न जा सके।

4 सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों पर एंटी रैगिंग सेल में शिकायत, पीजी स्टूडेंट का प्रताड़ना का दावा

 इंदौर इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रैगिंग मामले में पीजी फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट ने चार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं। स्टूडेंट ने एंटी रैगिंग सेल को की शिकायत में बताया कि इन डॉक्टर्स द्वारा प्रताड़ित करने से मेरा चार महीने में 22 किलो वजन कम हो गया। वे मुझे ऑपरेशन थिएटर (OT) की पोस्टिंग से बेदखल करने की धमकी देते हैं। इन्होंने मेरी मेडिकल लीव को लेकर झूठी अफवाहें फैलाईं। मैं लगातार परेशानी झेल रही हूं। इनकी वजह से ही मेरी तबीयत खराब हुई और एमवाय अस्पताल में एडमिट रही। यह गंभीर आरोप इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज की पीजी फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट ने लगाए हैं। प्रसूति एवं स्त्री रोग (Obstetrics and Gynaecology) विभाग में पढ़ रही इस जूनियर डॉक्टर ने यूजीसी की राष्ट्रीय एंटी रैगिंग सेल में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। उसने आरोप लगाया है कि सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों ने मुझे अत्यधिक और रात की ड्यूटी करने को मजबूर किया। मुझे ऑपरेशन थिएटर की पोस्टिंग से बेदखल करने की धमकी दी और मेरे अवकाश को लेकर झूठी अफवाहें फैलाईं जिससे वह गहरी मानसिक परेशानी में चली गई। छात्रा ने बताया कि दबाव सहन न कर पाने के कारण उसे लंबी मेडिकल लीव लेनी पड़ी। खास बात यह कि जूनियर स्टूडेंट के परिवार ने भी माना कि मानसिक रूप से टूट चुकी थी और वर्तमान में उसका इलाज चल रहा है। एंटी रैगिंग कमेटी को की गई शिकायत में यह भी बताया कि बात काम के बोझ की नहीं है, बल्कि मानसिक रूप से किए गए अत्याचार की है। उसे बुरी तरह अपमानित किया गया। जिससे उसकी मानसिक स्थिति खराब हो गई है। शिकायत में चार सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के नाम एंटी रैगिंग सेल में दर्ज शिकायत में सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के नाम हैं। इन पर उसे डराने और उसके खिलाफ अपमानजनक माहौल बनाने का आरोप है। पीड़िता स्टूडेंट कहना है कि उसके सीनियरों ने एक वाट्सएप ग्रुप पर उसके बारे में गलत मैसेज चलाए गए और उसे “झूठी” बताया और लिखा कि उसकी मेडिकल लीव फर्जी है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि वापसी के बाद उसे छह महीने तक ओटी ड्यूटी नहीं दी जाएगी और सजा के तौर पर अलग से नाइट शिफ्ट करनी होगी। स्टूडेंट का आरोप है कि लगातार प्रताड़ना के कारण मेरी तबीयत तेजी से बिगड़ी और चार महीनों में उसका वजन 22 किलो से अधिक घट गया। उसे चार दिनों तक एमवाय अस्पताल में एडमिट रहना पड़ा और हालत बिगड़ने पर वह घर लौट गई। एंटी रैगिंग कमेटी ने शुरू की जांच मेल के माध्यम से शिकायत मिलने के बाद एंटी रैगिंग कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। समिति की अध्यक्ष डॉ. पूनम देयसरकार ने पुष्टि की कि जूनियर स्टूडेंट ने शिकायत की है। कमेटी ने जांच प्रारंभ कर दी है। कमेटी पीड़िता और सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की पहचान कर उनके बयान दर्ज करेगी। इसके साथ जल्द ही अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय एंटी रैगिंग सेल और कॉलेज प्रशासन को सौंपेगी। उधर, डॉ. निलेश दलाल (HOD, प्रसूति व स्त्री रोग विभाग) का कहना है का मामला एंटी रैगिंग कमेटी के पास है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी आ चुकी हैं शिकायतें     जुलाई 2022 में जूनियर छात्रों ने दिल्ली के एंटी रैगिंग कमेटी को मेल भेजकर सीनियर छात्रों द्वारा रैंगिग की शिकायत की थी। मामले में एंटी रैगिंग कमेटी ने जांच करते हुए एक मेल एमजीएम मेडिकल कॉलेज को भेजा और पूरे मामले में पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए। कॉलेज ने दोषी छात्रों के खिलाफ संयोगितागंज थाने पर केस दर्ज किया। इसमें आरोप सीनियर छात्रों पर लगे थे। हैरानी की बात यह थी कि छात्रों ने अपने कॉलेज में शिकायत करने के बजाए रैगिंग कमेटी दिल्ली में शिकायत की और मेडिकल कॉलेज के डीन ने इस मामले में सख्त कदम उठाने की बात कही थी। मामले में रैगिंग कमेटी एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया।     जनवरी 2023 सीनियर्स द्वारा आधी रात जूनियरों को फोन कर अपने कमरे में बुलाकर प्रताड़ित करने का मामला सामने आया था। पहले कॉलेज प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की। दरअसल छात्रों द्वारा पुलिस के एक सीनियर अधिकारी से इसकी शिकायत भी की गई है। इसमें बताया गया है कि रात को सीनियरों द्वारा उनको फोन किया जाता है। अपने रूम में बुलाकर प्रताड़ित किया जाता है। इस तरह की शिकायत मिलने के बाद इसकी जानकारी पुलिस द्वारा एमजीएम के तत्कालीन डीन डॉ. संजय दीक्षित को दी गई। इस पर डीन ने चीफ वार्डन डॉ. वीएस पाल और वार्डन मनीष पुरोहित को जांच का जिम्मा सौंपा। जांच के दौरान इनके द्वारा अलग-अलग ब्लॉक में रह रहे तकरीबन 40 छात्रों से पूछताछ की गई किंतु छात्रों ने मामले में चुप्पी साध ली थी। इनके अलग-अलग बुलाकर पूछताछ करने के बाद भी छात्रों ने इस संबंध में कुछ कहने से इनकार कर दिया। कॉलेज प्रबंधन द्वारा मामले को लेकर बैठक भी हुई। जिसमें वास्तविकता का पता लगाने के लिए जोर दिया गया। डीन का कहना था कि जूनियर छात्रों से चर्चा की गई है किंतु उन्होंने चुप्पी साध ली। उनका कहना है कि जो भी सीनियर इसमें लिप्त पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मामले की लिखित शिकायत भी थाने में दर्ज नहीं कराई गई थी।     साल 2024 में जूनियर छात्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से शिकायत की थी। छात्रों ने लिखा कि रात 10.30 बजे उन्हें बुलाया व सिर झुकाकर खड़ा कर दिया जाता है। सुबह 5-6 बजे नशा उतरने तक सीनियर उन्हें पीटते हैं। 6-6 घंटे तक रूफटॉप पर सिर झुकाकर खड़ा रखा जाता है। वे उन्हें आते-जाते पीटते हैं। असहज कपड़ों में छत पर बुलाते हैं। इन्हीं कारणों से इस 30 छात्रों ने हॉस्टल छोड़ दिया था। मामले में तब मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और वार्डन से भी किसी तरह की शिकायत नहीं करने की बात कही थी। फिर रैगिंग के शिकायत के बाद कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम और तहसीलदार की टीम ने मेडिकल कॉलेज पहुंचकर मामले की जांच शुरू की। इसमें पीड़ित ने अपनी पहचान छुपाई थी। मौके पर कोई आइडेंटिफिकेशन नहीं दिया था। होस्टल में सब स्टूडेंट ठीक मिले। किसी … Read more

डीपफेक पर सख्त हुआ सरकार का रुख, भगवंत मान का फेक वीडियो हटाने का आदेश

मोहाली  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के खिलाफ सोशल मीडिया पर प्रसारित एक AI डीपफेक वीडियो मामले में मोहाली की अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए फेसबुक और गूगल को आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि संबंधित कंपनियां वीडियो से जुड़ा पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, ताकि साक्ष्य नष्ट न हो सकें। यह आदेश 22 अक्टूबर को जारी किया गया। आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “पंजाब के मुख्यमंत्री का एक डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर कुछ ‘राइट-विंग ट्रोल्स’ द्वारा शेयर किया जा रहा था। यह पूरी तरह फर्जी वीडियो है। अदालत ने इस सामग्री को इंटरनेट से हटाने के आदेश दिए हैं।” इस मामले ने सोशल मीडिया पर भारी विवाद और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी। इसके बाद पंजाब स्टेट क्राइम पुलिस स्टेशन ने कनाडा निवासी जगमन समरा के खिलाफ ‘अश्लील और भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने’ का मामला दर्ज किया। पुलिस के अनुसार, जगमन समरा नाम के फेसबुक अकाउंट (URL: [facebook.com/jagman.samra.369309](https://www.facebook.com/jagman.samra.369309)) से कई आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट की गईं, जिनका उद्देश्य विभिन्न समूहों में वैमनस्य फैलाना था। पुलिस की शिकायत में कहा गया है “यह सामग्री अश्लील, अवैध है और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच नफरत, दुश्मनी या दुर्भावना फैलाने की क्षमता रखती है।” यह पोस्ट सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल की नजर में आने के बाद सामने आई। इंस्पेक्टर गगनप्रीत सिंह की शिकायत पर, 21 अक्टूबर को पंजाब स्टेट क्राइम पुलिस स्टेशन में BNS की धाराओं 340(2), 352(1), 353(2), 351(2), 336(4) और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया। फिलहाल, पुलिस ने मामले की डिजिटल जांच शुरू कर दी है और आरोपित की साइबर गतिविधियों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। AAP का कहना है कि यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी है और इसका मकसद पंजाब सरकार व मुख्यमंत्री की छवि धूमिल करना है।

AICC बैठक आज: नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति से पहले कांग्रेस का बड़ा प्रयोग

जयपुर राजस्थान में नए जिलाध्यक्षों की तैनाती के साथ ही कांग्रेस इस बार नया प्रयोग भी करने जा रही है। इसमें नव नियुक्त जिलाध्यक्षों को तीन महीने की 'प्रोबेशन' अवधि पर तैनाती दी जाएगी। इस दौरान नए जिलाध्यक्षों की फरफारमेंस का रिव्यू ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा गठित एक विशेष समिति करेगी। यह पहल ‘संगठन सृजन अभियान’ का हिस्सा है। इसके तहत राजस्थान में पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया था, जिन्होंने संभावित जिला अध्यक्षों पर फीडबैक एकत्र किया। इसके बाद बारां और झालवाड़ को छोड़कर 48 संगठनात्मक जिलों में से हर जिले के लिए 6-6 नामों का पैनल तैयार कर AICC को भेज दिया गया। पैनल में  तीन प्राथमिक और तीन आरक्षित वर्गों (SC, ST, अल्पसंख्यक या महिला) से होंगे, ताकि अगर किसी सीट पर सोशल इंजीनियरिंग के तहत निर्णय लेना हो तो उसका विकल्प भी मौजूद रहे।  बारां और झालावाड़ को उपचुनावों के कारण फिलहाल इसमें शामिल नहीं किया गया है। आज पैनल पर दिल्ली में चर्चा पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट अंतिम रूप दे चुके हैं और आज शुक्रवार को उनकी बैठक AICC महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल, सांसद शशिकांत सेंथिल, और राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ होगी। ये नेता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, विपक्ष के नेता टीकाराम जूली, और वरिष्ठ नेताओं अशोक गहलोत व सचिन पायलट से भी परामर्श करेंगे। खरा नहीं उतरे तो 3 महीने में छुट्टी कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह प्रणाली सार्थक है; बस इसे समझने और धैर्य रखने की जरूरत है। नए फॉर्मेट के तहत जिला अध्यक्ष को तीन माह की प्रोबेशन पर रखा जाएगा और विशिष्ट जिम्मेदारियां दी जाएंगी। प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं हुआ तो उन्हें बदला जा सकता है।” पार्टी का यह कदम राजस्थान में संगठन को मज़बूत करने और आने वाली राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विवादों में रहा फीडबैक कार्यक्रम हालांकि, यह फीडबैक प्रक्रिया विवादों से अछूती नहीं रही। कई जिलों में गुटबाजी, नियम उल्लंघन, तीखी बहस और यहां तक कि मारपीट की घटनाएं सामने आईं। अजमेर में पोस्टर विवाद से लेकर जालोर, करौली, डूंगरपुर और कोटा में गहलोत-पायलट खेमों के बीच टकराव तक ने पार्टी में आंतरिक तनाव को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर अशोक गहलोत ने राहुल गांधी के नए फॉर्मूले के तहत पारदर्शिता की वकालत की, वहीं पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना जैसे नेताओं ने इस प्रक्रिया में पक्षपात के आरोप लगाते हुए असहमति जताई। यह सब दर्शाता है कि संगठन सृजन अभियान कांग्रेस में नई ऊर्जा के साथ-साथ पुराने अंतर्विरोधों को भी उजागर कर रहा है।  

कार्बाइड गन पर रोक: भोपाल-इंदौर-ग्वालियर में आदेश जारी, 300 से ज्यादा लोगों की आंखें झुलसीं

भोपाल/ इंदौर /ग्वालियर  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और ग्वालियर और इंदौर जिले में घातक कैल्शियम कार्बाइड गन के कारण बच्चों की आंखों को हुए नुकसान के बाद दोनों जिलों के कलेक्टरों ने कार्बाइड गन पर तत्काल प्रभाव से बैन लगा दिया है.  भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने आदेश में जारी किया है कि कोई भी प्रतिबंधनात्मक पटाखा, आतिशबाजी, लोहा स्टील या पीवीसी पाइपों में विस्फोटक पदार्थ भरकर तेज आवाज  करने वाले अवैध पटाखे (कार्बाइड गन) नहीं बनाएगा. इकट्ठा नहीं करेगा और खरीद बेच भी नहीं सकेगा.  कलेक्टर ने कहा है कि यह अवैध संशोधित पटाखा आम नागरिकों की सुरक्षा, शांति और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है, इसलिए इसके वितरण या प्रदर्शन पर भी पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. एसडीएम, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी इस आदेश का सख्ती से पालन करवाएंगे.  दिवाली 2025 में नए पटाखे की खोज में सोशल मीडिया ने बंदर भगाने के देसी जुगाड़ को वायरल कर दिया। इसी जुगाड़ सिस्टम “कार्बाइड गन” को लेकर दो साल पहले यानी 2023 में ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) भोपाल ने चेतावनी दी थी। संस्थान के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में बताया था कि कैल्शियम कार्बाइड और पानी के केमिकल रिएक्शन से बनने वाली गैस 'एसिटिलीन' सिर्फ धमाका नहीं करती, बल्कि आंखों की रोशनी तक छीन लेती है। यह स्टडी इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थेलमोलॉजी में प्रकाशित भी हुई थी। इसके बाद भी समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए। यही वजह है कि अब तक भोपाल के अलग-अलग अस्पतालों में लगभग 162 लोग इस कार्बाइड गन से घायल होकर आ चुके हैं। इन सभी मरीजों की आंखें जली हैं। उन्हें देखने में परेशानी हो रही है। देसी कार्बाइड गन से प्रदेशभर में अब तक 300 लोगों की आंखों में जलन के मामले सामने आ चुके हैं। ग्वालियर, इंदौर, विदिशा समेत कई जगहों पर ऐसी घटनाओं में 7 से 14 साल तक के बच्चे प्रभावित हुए हैं। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में कार्बाइड पाइप गन बेचने, खरीदने और स्टॉक पर रोक लगा दी गई है। भोपाल और ग्वालियर में गन बेचते मिले दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सिर्फ वार्म व्हाइट लाइट का गोला दिख रहा करीब 50 फीसदी मरीज ऐसे हैं, जिन्हें आंखों के सामने सिर्फ वार्म व्हाइट लाइट का गोला ही नजर आ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, इन मरीजों की आंखों की रोशनी फिलहाल जा चुकी है। अब एमनियोटिक मेम्ब्रेन इंप्लांट और टिशू ग्राफ्टिंग जैसी प्रक्रिया से आंखों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, अंतिम उपाय कॉर्निया ट्रांसप्लांट ही होगा, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी कॉर्निया मिलना मुश्किल है। डिप्टी सीएम घायल बच्चों से मिलने पहुंचे उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे हमीदिया अस्पताल पहुंचकर कार्बाइन गन से घायल युवाओं और बच्चों का हाल जाना। उन्होंने डॉक्टरों से घायलों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके उपचार की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। शुक्ला करीब एक घंटे तक अस्पताल में रहे। डॉक्टरों ने जानकारी दी कि दुर्घटना में घायल कुल 37 मरीजों में से 32 को जरूरी इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। 5 मरीजों का उपचार अभी जारी है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध रूप से पटाखा निर्माण या विस्फोटक सामग्री रखने वालों की सघन जांच की जा रही है। दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के पास बच्चों के आंकड़े नहीं अलग-अलग अस्पतालों से आई जानकारी के अनुसार भोपाल में अब तक कार्बाइड गन से प्रभावित लोगों के 162 केस सामने आए हैं। इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग अब तक अलर्ट नहीं हुआ है। हालत यह है कि विभाग ने आधिकारिक आंकड़ा तक जारी नहीं किया है। भोपाल के सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा को फोन किया गया तो उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में होने की बात कही। ग्वालियर में भी कलेक्टर ने लगाई रोक  ग्वालियर जिले में भी कलेक्टर रुचिका चौहान ने भी कार्बाइड गन के निर्माण, खरीदने, बेचने और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. उन्होंने अपने आदेश में जिक्र किया कि कार्बाइड गन में उपयोग होने वाला कार्बाइड और पानी का मिश्रण एसिटिलीन गैस पैदा करता है, जो आंखों के साथ-साथ दिमाग और नर्वस सिस्टम के लिए घातक होता है. आदेश के बाद जिला प्रशासन की टीमों ने भितरवार, लोहिया बाजार, नया बाजार बाड़ा, हीरा वेल्डिंग सेंटर एरिया में कार्बाइड गन की जांच शुरू कर दी है.  आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 और अन्य एक्ट के तहत एक्शन लिया जाएगा. ग्वालियर प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अवैध रूप से कार्बाइड गन के निर्माण, खरीदने, बेचने और इस्तेमाल की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम के फोन नं 0751-7049101029, 0751-2363636 व 0751-2445333 पर दें.