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23 अक्टूबर से पीएम मोदी का मेगा प्रचार अभियान, बिहार के 12 जिलों में भरेंगे चुनावी हुंकार

पटना   बिहार में चुनावी सरगर्मी तेज हो चुकी है और इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यभर में 12 जनसभाओं को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री की ये रैलियां अलग-अलग चरणों में आयोजित की जाएंगी. पीएम मोदी इस रैली से भाजपा और एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाएंगे. किस दिन कहां-कहां करेंगे रैली सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अपनी पहली तीन रैलियां 23 अक्टूबर को करेंगे. इस दिन वे सासाराम, भागलपुर और गया में जनसभाओं को संबोधित करेंगे. इन रैलियों में प्रधानमंत्री केंद्र सरकार की उपलब्धियों, बिहार में विकास योजनाओं और राज्य के लिए केंद्र सरकार क्या-क्या कर रही है उसको जनता के सामने रखेंगे. इसके बाद 28 अक्टूबर को प्रधानमंत्री की तीन और रैलियां निर्धारित हैं. वे इस दिन पटना, मुजफ्फरपुर और दरभंगा में जनता को संबोधित करेंगे. माना जा रहा है कि इन सभाओं में मोदी रोजगार, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी योजनाओं पर बात करेंगे. अगले चरण में 1 नवंबर को प्रधानमंत्री पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर और छपरा में रैलियां करेंगे. इन इलाकों में एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में बड़ी संख्या में जनता के जुटने की संभावना है. अंतिम चरण में 3 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी पश्चिमी चंपारण, सहरसा और अररिया में चुनावी सभाएं करेंगे. बिहर के नेताओं को पीएम मोदी की रैली से बड़ी उम्मीद भाजपा संगठन इन रैलियों की तैयारी में जुट गई है. बिहार बीजेपी के नेताओं का कहना है कि पीएम मोदी पर बिहार की जनता सबसे ज्यादा भरोसा करती है. केंद्र सरकार की योजनाओं का सबसे ज्यादा लाभ गरीब वर्ग के लोगों को मिलता है. ऐसे समय में पीएम मोदी की रैलियां बिहार में NDA उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनायेंगे.

साफ-सुथरे मोहल्ले की ओर बढ़ाएं कदम, जीतें 1 लाख रुपए का पुरस्कार!

इंदौर  डॉ. आंबेडकर नगर (महू) में खुशियों वाली जगमग दिवाली पर शहर में एक बार फिर रंगारंग सजावट होगी। गली-नुक्कड़ से लेकर महू छावनी परिषद क्षेत्र के मोहल्लों-कॉलोनियों में रंग-बिरंगी रांगोली और जगमगाती रोशनी का अनूठा नजारा देखने को मिलेगा। दरअसल, शहर में इस साल 21 अक्टूबर को धोक पड़वा पर्व पर रंगोत्सव मनाया जाएगा। कोविड के दौर के बाद दीपावली के जगमग उजास को नई रंगत देने के लिए शहर में रंगोत्सव समिति द्वारा रंगोली प्रतियोगिता (Rangoli Competition) की शुरुआत की गई। इसमें शहर की गलियों में न्यूनतम 16 वर्गफीट से लेकर करीब 500 वर्गफीट तक की आकर्षक रांगोली सजाई जाती थी।  समिति के संयोजक ने दी जानकारी समिति के संयोजक सुचित बंसल ने बताया कि इस साल यह महोत्सव एक नया स्वरुप लेने जा रहा है। इसमें रंगोली के साथ ही गली-मोहल्लो और कॉलोनियों की सजावट (Diwali Decoration) भी शामिल की गई। प्रतिभागियों को न्यूनतम 70 से 80 फीट का दायरा चुनना होगा। इसमें रंगोली के साथ ही निर्धारित एरिया को अलग-अलग तरीके से सजाना होगा। इसमें रंग-बिरंगी लाइटिंग सहित आकर्षक सजावट आइटमों का उपयोग किया जा सकेगा।     अनेकता में एकता की दिखेगी झलक इस अनूठे महोत्सव में अलग-अलग राज्यों की संस्कृति के साथ ही पारंपरिक, धार्मिक और पौराणिक महत्वों की झलक दिखेगी। बंसल ने बताया कि प्रतिभागी पंजाबी, साउथ इंडियन, गुजराती सहित धार्मिक, सांस्कृतिक थीम पर सजावट कर सकते हैं।   पारदर्शिता : अन्य शहरों के निर्णायक करेंगे फैसला स्पर्धा के विजेता का फैसला निर्णायक दल करेगा। इसके लिए करीब 5 से 6 निर्णायकों की पैनल बनाई जाएगी। प्रतियोगिता में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निर्णायक अन्य शहरों से बुलाएंजाएंगे। जो धोक पड़वा पर सुबह 11 बजे से निरीक्षण शुरु करेगी।   2023 में बनाया हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड रंगोत्सव की अनूठी परंपरा ने वर्ष 2023 में शहर का नाम हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करवाया। बंसल ने बताया कि साल 2023 में करीब 325 प्रतिभागियों ‌द्वारा सबसे लंबी रंगोली बनाई गई। जिन्हें हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए। स्पर्ध में पहला स्थान राधिका तायल ने पाया था। जिन्हें 51 हजार रुपए का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया था।  तिथियों में असमंजस से बीते साल रही अड़चन बीते साल दीपावली पर अमावस्या की दो तिथियां होने के कारण धोक पड़वा को लेकर असमंजस बना था। बंसल ने बताया कि इसके कारण बीते साल रंगोत्सव का आयोजन नहीं हुआ था। इसके पहले गोपाल मंदिर से अग्रसेन चौराहा और ड्रीमलैंड से हरिफाटक तक रंगोली स्पर्धा होती थी। अब इसका दायरा संपूर्ण छावनी परिषद किया गया है।  सर्वश्रेष्ठ सजावट को मिलेगा एक लाख का इनाम स्पर्धा में एक व्यक्ति के साथ ही समूह बनाकर भी भाग लिया जा सकता है। बंसल ने बताया कि सर्वश्रेष्ठ सजावट करने वाले प्रतिभागी को एक लाख रुपए का इनाम प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा दूसरे विजेता को 51 हजार, तीसरे को 21 हजार और 11-11 हजार के पांच सांत्वना पुरस्कार भी देंगे।   25-75 के फार्मूले पर होगी सजावट स्पर्धा में इस साल 25-75 का फार्मूला अपनाया जा रहा है। बंसल के अनुसार इस साल प्रतिभागियों को 25 प्रतिशत अंक रांगोली बनाने 75 प्रतिशत अंक क्षेत्र को सजावट पर मिलेंगे। इसमें स्वागत द्वार, वंदन द्वार, कॉरपेट सहित विद्युत साज-सज्जा भी की जा सकती है।  

सीएम सैनी से मुलाकात में उठाए मानव अधिकारों के मुद्दे, हरियाणा आयोग ने साझा की राय

चंडीगढ़  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से शनिवार को हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा और सदस्य कुलदीप जैन तथा दीप भाटिया ने उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान आयोग ने मुख्यमंत्री को वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 की प्रति भेंट की और राज्य में मानवाधिकारों की सुरक्षा से जुड़े अपने कार्यों और उपलब्धियों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आयोग की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे निर्णयों को लागू होना ही चाहिए, जो आम जनता को न्याय और सम्मान दिला सकें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हमेशा मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और आयोग के सुझावों पर गंभीरता से अमल किया जाएगा। बैठक के दौरान आयोग ने बीते वर्ष की अपनी गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। बताया गया कि अब तक आयोग में 5,542 मामलों की सुनवाई की जा चुकी है, जिनमें से 4,638 मामलों का निपटारा हो चुका है। केवल 904 मामले अभी लंबित हैं। आयोग ने यह भी बताया कि वह हर महीने राज्य की एक जेल और सामाजिक संस्थान का निरीक्षण करता है ताकि कैदियों और समाज के वंचित वर्गों के मानवाधिकारों की स्थिति की निगरानी की जा सके। आयोग ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि हाल ही में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) के 32वें स्थापना दिवस समारोह में हरियाणा मॉडल की विशेष रूप से सराहना की गई। हरियाणा मानव अधिकार आयोग के कार्यों और पारदर्शिता को दूसरे राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर आयोग को बधाई देते हुए कहा कि हरियाणा सरकार और आयोग मिलकर राज्य में मानवाधिकारों की सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाएंगे। उन्होंने कहा कि आयोग के कार्य न केवल समाज में जागरूकता बढ़ा रहे हैं, बल्कि पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने में भी सहायक साबित हो रहे हैं। बैठक के अंत में मुख्यमंत्री और आयोग के सदस्यों ने एक दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह त्योहार समाज में समानता, सम्मान और सद्भाव का संदेश लेकर आता है।

बिहार में सियासी धमाका! तेजस्वी यादव ने खेसारी लाल को बनाया उम्मीदवार

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में आरजेडी (RJD) ने अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी कर दी है। यह लिस्ट सिर्फ नामों की घोषणा नहीं, बल्कि बिहार की सियासत में एक नया राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पार्टी ने अपने पारंपरिक YM (Yadav-Muslim) समीकरण को बरकरार रखते हुए युवाओं, महिलाओं और स्टार चेहरों को शामिल किया है। राघोपुर से तेजस्वी यादव के फिर से मैदान में उतरने की घोषणा पार्टी के अंदर और बाहर एक प्रतीकात्मक संकेत है। यह सीट आरजेडी की राजनीतिक विरासत का केंद्र मानी जाती है। तेजस्वी का दोबारा राघोपुर से उतरना बताता है कि वे अभी भी पार्टी के मूल सामाजिक समीकरण और पारंपरिक वोट बैंक पर भरोसा रखते हैं। छपरा से खेसारी लाल यादव का टिकट – स्टार पावर का ‘गेम चेंजर’ मूव इस लिस्ट का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला नाम है — भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव, जिन्हें छपरा सीट से मैदान में उतारा गया है। RJD का यह कदम बताता है कि पार्टी अब जातीय राजनीति से आगे बढ़कर जन-भावनाओं और स्टार अपील पर भी भरोसा कर रही है। यह फैसला पार्टी को युवा मतदाताओं और मनोरंजन जगत से जुड़ी जनता के बीच नई पहचान दिला सकता है। पुराने चेहरों को बनाए रखा, संगठन में स्थिरता का संकेत   आरजेडी ने अपनी लिस्ट में कई पुराने और भरोसेमंद नामों को बनाए रखा है। भाई वीरेंद्र (मनेर), भोला यादव (बहादुरपुर), प्रो. चंद्रशेखर (मधेपुरा), अवध बिहारी चौधरी (सीवान) जैसे वरिष्ठ नेताओं को जगह देकर पार्टी ने संगठन में स्थिरता और अनुभव का सम्मान दिखाया है। सामाजिक संतुलन और न्याय की परंपरा को बरकरार लिस्ट में यादव, मुस्लिम, दलित, सवर्ण और कुशवाहा समुदायों के उम्मीदवार शामिल हैं। तेजस्वी यादव, मुन्ना यादव, प्रेम शंकर यादव जैसे नाम पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करते हैं, जबकि मोहम्मद शाहनवाज (जोकीहाट) और युसुफ सलाहउद्दीन (सिमरी बख्तियारपुर) जैसे चेहरे मुस्लिम वोटों को आकर्षित करेंगे। दलित वर्ग से रामवृक्ष सदा और चंद्रहास चौपाल को मौका देकर पार्टी ने सामाजिक न्याय की अपनी छवि को बरकरार रखा है। महागठबंधन की दो बड़ी चूकें – कांग्रेस से टकराव और विवादास्पद चेहरे सूत्रों के अनुसार, आरजेडी और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर मतभेद अब भी बने हुए हैं। कई सीटों पर कांग्रेस और आरजेडी के उम्मीदवार आमने-सामने हैं, जिससे गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठे हैं। दूसरी बड़ी चुनौती है कुछ विवादास्पद चेहरों का चयन, जैसे ओसामा शहाब। भाजपा इसपर ‘जंगलराज की वापसी’ का नैरेटिव बनाने की कोशिश कर सकती है। महिलाओं और EBC वर्ग को कम प्रतिनिधित्व – कमजोर कड़ी आरजेडी ने इस लिस्ट में महिलाओं और अति पिछड़े वर्गों को सीमित अवसर दिए हैं। हालांकि, अनीता (नोखा), माला पुष्पम (हसनपुर), रेखा पासवान (मसौढ़ी) जैसी महिलाएं शामिल हैं, लेकिन कुल अनुपात काफी कम है। यह पहलू विपक्षी दलों के लिए आलोचना का मुद्दा बन सकता है। नई पीढ़ी के नेताओं पर भरोसा – ‘नया बिहार’ की झलक तेजस्वी यादव ने कई युवा उम्मीदवारों को मौका दिया है। राहुल तिवारी (शाहपुर), रणविजय साहू (मोरवा), आलोक मेहता (उजियारपुर) जैसे नए चेहरे इस बात का संकेत हैं कि पार्टी संगठन में नई सोच और ऊर्जा को जगह दे रही है। संदेश साफ – ‘विरासत से विकास तक’ का सफर आरजेडी की यह लिस्ट बताती है कि पार्टी अब सिर्फ जातीय समीकरण नहीं, बल्कि लोकप्रियता, युवाशक्ति और प्रतिनिधित्व की राजनीति पर ध्यान दे रही है। तेजस्वी यादव ने इस सूची के जरिए साफ किया है कि RJD अब ‘विरासत की राजनीति’ से आगे बढ़कर ‘विकास और प्रतिनिधित्व की राजनीति’ की ओर बढ़ रही है।

ब्रह्मोस की ताकत: CM योगी ने बताया क्यों यह भारत और मित्र देशों के लिए सबसे सक्षम रक्षा हथियार है

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को आत्मनिर्भर भारत का एक नया अध्याय लिखा गया, जब ब्रह्मोस एयरोस्पेस लिमिटेड की लखनऊ इकाई में उत्पादित सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलों के पहले बैच का फ्लैग ऑफ केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। भारत माता की जय’ के जयघोष के बीच जब मिसाइलों का पहला जत्था रवाना हुआ तो समारोह गर्व, गौरव और देशभक्ति से गूंज उठा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रह्मोस केवल भारत की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपने मित्र देशों की रक्षा करने का सबसे सक्षम हथियार है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयास से ब्रह्मोस लखनऊ में विकसित हुआ है, जो देश की खुशहाली का माध्यम बना है। जब व्यक्ति सुरक्षित रहता है, तभी चैन की नींद सोता है। लखनऊ में बनी मिसाइल पूरे देशवासियों की सुरक्षा और समृद्धि की गारंटी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लखनऊ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' संकल्प को साकार करने का यह क्षण प्रफुल्लित करने वाला है। उन्होंने कहा कि यह मिसाइल न केवल भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि दुनिया में अपने मित्र देशों की रक्षा करने का सबसे सक्षम हथियार भी है। ब्रह्मोस के माध्यम से भारत अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ मित्र राष्ट्रों की सुरक्षा जरूरतों को भी पूरा करने में सक्षम हो गया है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। सीएम योगी ने 2018 के पहले इन्वेस्टर्स समिट का जिक्र करते हुए कहा कि लखनऊ में ही प्रधानमंत्री ने दो डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर की घोषणा की थी, जिसमें से एक उत्तर प्रदेश को मिला। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी और चित्रकूट के 6 नोड्स में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के कार्य सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं। लखनऊ में ब्रह्मोस, झांसी में भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) और अमेठी में एके-203 जैसे प्रोजेक्ट चल रहे हैं। अब तक 2,500 एकड़ से अधिक लैंड इन 6 नोड्स में उपलब्ध कराई गई है, जिससे 15,000 से अधिक नौजवानों को नौकरियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस केंद्र में आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग डिग्रीधारक युवा काम कर रहे हैं, जो देश की सुरक्षा और रोजगार दोनों की पूर्ति कर रहे हैं। यह आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है। सीएम योगी ने बताया कि राज्य सरकार आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू के साथ मिलकर दो ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित कर रही है, जिससे डिफेंस टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह लखनऊ की भूमि अब राष्ट्र रक्षा, उद्योग, रोजगार और विकास के चारों आयामों को एक साथ साध रही है। यही उत्तर प्रदेश के बदलते चेहरे और आत्मनिर्भर भारत की पहचान है।” सीएम योगी ने कहा कि आज डीजी ब्रह्मोस ने 40 करोड़ का जीएसटी चेक सौंपा है। हर वर्ष 100 ब्रह्मोस मिसाइल बनेंगी, जो बढ़कर 150 तक पहुंचेंगी, तो 150-200 करोड़ जीएसटी मिलेगा। यह 'आम के आम और गुठली के दाम' जैसा है। लखनऊ की लैंड अब सोना उगल रही है। यह देश की सुरक्षा की पूर्ति कर रही है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही है। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर डीआरडीओ को और लैंड उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। सीएम योगी ने झांसी में 56,000 एकड़ के नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का जिक्र किया और कहा कि चित्रकूट में एक्सप्रेस-वे पर नोड विकसित हो रहा है। आईआईटी कानपुर और बीएचयू के साथ दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम चल रहा है। उन्होंने मेक इन इंडिया को मेक फॉर द वर्ल्ड बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयास से ब्रह्मोस लखनऊ में विकसित हुआ है, जो देश की खुशहाली को वितरित करने का माध्यम बना है। जब व्यक्ति सुरक्षित रहता है, तभी चैन की नींद सोता है। लखनऊ में बनी मिसाइल पूरे देशवासियों की सुरक्षा और समृद्धि की गारंटी है।

रांची में त्योहारों की तैयारी तेज़, DC ने दिए विशेष दिशा-निर्देश

रांची झारखंड की राजधानी रांची में आगामी दीपावली, काली पूजा और छठ पर्व के सफल एवं सुरक्षित आयोजन को लेकर उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में बैठक आयोजित की गई। बैठक में नगर निगम, पुलिस प्रशासन, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, परिवहन, अग्निशमन, आपदा प्रबंधन, स्वच्छता एवं अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। भजंत्री ने निर्देश दिया कि सभी छठ घाटों की सुरक्षा, स्वच्छता एवं प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने रांची नगर निगम को सभी प्रमुख घाटों की सफाई, चूना छिड़काव और अस्थायी शौचालयों की व्यवस्था समय पर पूर्ण करने का निर्देश दिया। दीपावली, काली पूजा एवं छठ पूजा को लेकर सभी घाटों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। महिला पुलिस की भी उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। नगर निगम द्वारा घाटों की सफाई, कचरा निस्तारण और रोशनी की व्यवस्था करने के निर्देश। प्रत्येक प्रमुख घाट पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। विद्युत विभाग को निर्बाध बिजली आपूर्ति और पेयजल विभाग को पर्याप्त जल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। ट्रैफिक पुलिस द्वारा घाटों की ओर जाने वाले मार्गों पर विशेष यातायात योजना लागू की जाएगी। एनडीआरएफ/एसडीआरएफ की टीम को सतकर् मोड में रखा जाएगा ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। सभी छठ तालाबों और घाटों में सुरक्षित गहराई में बैरिकेड करने के निर्देश दिए। छठ पूजा को सौहार्दपूर्ण एवं शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता भजंत्री ने दीपावली, काली पूजा एवं छठ पूजा को लेकर ट्रैफिक व्यवस्था, विधि व्यवस्था को लेकर कई निर्देश दिए। छठ घाटों में अस्थाई चेंजिंग रूम बनाने को लेकर निर्देश। इन पूजा के दौरान वालंटियर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। बिजली विभाग के सभी पदाधिकारी/कर्मी सभी फोन उठाएं ताकि किसी भी आपात स्थिति होने पर लोग उनसे संपर्क कर पाए। सभी प्रमुख स्थानों में सीसीटीवी लगाने के निर्देश दिए गए। पर्व के दौरान असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर बनाए रखने एवं लोकल थाना द्वारा लगातार पेट्रोलिंग करने का निर्देश दिया गया। सभी काली पूजा पंडालों एवं छठ घाटों की साफ सफाई करने के निर्देश दिए गए। छठ, काली पूजा समिति के सदस्यों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का निर्देश दिया गया। भजंत्री ने कहा कि छठ पूजा लोक आस्था का महापर्व है, इसे सौहार्दपूर्ण एवं शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने स्तर से लगातार निगरानी रखें और जनसहभागिता को बढ़ावा दें। साथ ही विशेष रूप से कहा की इन पर्व के दौरान ध्वनि प्रदूषण को लेकर उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सभी मानकों का पालन सुनिश्चित रूप से हो। टीम बना कर मानकों का पालन करने का निर्देश दिया गया। पर्व के दौरान बेहतर विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार एंटी क्राइम चेकिंग चलाने का निर्देश वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा दिया गया। इस दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक, राकेश रंजन, अपर जिला दंडाधिकारी विधि-व्यवस्था रांची, राजेश्वर नाथ आलोक, पुलिस अधीक्षक शहर, ग्रामीण एवं ट्रैफिक, अनुमंडल पदाधिकारी सदर रांची, उत्कर्ष कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी बुंडू, किस्टो बेसरा, जिला नजारत उप समाहर्ता रांची, डॉ. सुदेश कुमार, कार्यपालक अभियंता (पेयजल एवं स्वच्छता), सभी सम्बंधित डीएसपी, विद्युत विभाग के पदाधिकारी, अग्निशमन विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।  

दिल्ली ब्रह्मपुत्र अपार्टमेंट में भीषण आग, राज्यसभा सांसदों के घरों में हड़कंप

नई दिल्ली  दिल्ली में बड़ा हादसा हो गया है। यहां ब्रह्मपुत्र अपार्टमेंट में भीषण आग लग गई है। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की 6 गाड़ियों को मौके पर भेज दिया गया है। जानकारी के मुताबिक जिस जगह ये आग लगी है वहा सांसदों के आवास बताए जा रहे हैं। हालांकि ये आग कैसे लगी, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक इस बिल्डिंग का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2020 में किया था। इसमें कई राज्यसभा सांसदों के घर होने की खबर भी सामने आ रही है। जानकारी के मुताबिक ब्रह्मपुत्र अपार्टमेंट्स राज्यसभा सांसदों के लिए एक आवासीय परिसर है, जो नई दिल्ली में डॉ. बिशम्भर दास मार्ग पर स्थित है। आग लगने के बाद वहां रह रहे लोगों में दहशत फैल गई है। आग बिल्डिंग की ऊपरी मंजिलों में से एक में लगी है, जिससे निवासियों में दहशत फैल गई। ये संसद से केवल 200 मीटर की दूरी पर बताई जा रही है। उधर तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने भी इस घटना को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स जानकारी दी और मौके पर दमकल की गाड़ियों की अनुपलब्धता पर चिंता जताते हुए दिल्ली की बीजेपी पर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, दिल्ली के बीडी मार्ग स्थित ब्रह्मपुत्र अपार्टमेंट में भीषण आग लग गई है। सभी निवासी राज्यसभा सांसद हैं। यह इमारत संसद भवन से 200 मीटर की दूरी पर है। 30 मिनट से कोई दमकल नहीं आई है। आग अभी भी जल रही है और बढ़ती जा रही है। बार-बार कॉल करने के बावजूद दमकल की गाड़ियां गायब हैं। दिल्ली सरकार, कुछ तो शर्म करो।  

झारखंड पुलिस की बड़ी जीत: TSPC संगठन के दो एरिया कमांडर ने किया आत्मसमर्पण

रांची  झारखंड में चतरा और पलामू जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय खतरनाक टीएसपीसी नक्सली संगठन के दो बड़े एरिया कमांडर कुलदीप गंझू उफर् पत्थर (कुणाल) और रोहनी गंझू उफर् रोहनी पाहन ने शुक्रवार को चतरा में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों नक्सलियों पर 1-1 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण समारोह चतरा समाहरणालय के सभाकक्ष में बोकारो प्रक्षेत्र के आईजी सुनील भास्कर और चतरा एसपी सुमित कुमार अग्रवाल की मौजूदगी में संपन्न हुआ। कुलदीप गंझू के खिलाफ चतरा जिले के कुंदा, सदर, मनातु, छतरपुर, प्रतापपुर और गिद्धौर थाना क्षेत्रों में कुल 16 गंभीर मामले दर्ज हैं। वहीं, रोहनी गंझू पर कुंदा और मनातु थाना क्षेत्रों में 10 आपराधिक मामले हैं। नक्सलियों ने पुलिस को हथियार भी सौंपे। रोहनी गंझू ने एसएलआर राइफल समेत 82 जिंदा राउंड और कुलदीप ने सेमी ऑटोमैटिक राइफल के साथ 103 राउंड जिंदा गोला-बारूद सौंपा। ये दोनों नक्सली क्षेत्र में कई कुख्यात वारदातों में शामिल रहे हैं, जिनमें 25 मई 2024 को पंकज बिरहोर और उनके पिता बिफा बिरहोर की निर्मम हत्या और 7 फरवरी 2024 को अफीम विनष्टिकरण से लौट रहे पुलिस जवानों पर हमले की घटना प्रमुख हैं। उस हमले में दो पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। चतरा एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि यह सफलता लगातार चलाए जा रहे पुलिस अभियान और झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति‘नई दिशा'के व्यापक प्रचार-प्रसार का नतीजा है। पुलिस ने नक्सली परिवारों को इस नीति के बारे में गांव-गांव जाकर जानकारी दी और मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया। टीएसपीसी संगठन के अंदर भी उत्पन्न तनाव और पुलिस की प्रभावी दबिश के कारण ये नक्सलियों ने आत्मसमर्पण का कदम उठाया।

पशुपति पारस ने किया ऐलान—महागठबंधन से नहीं गठजोड़, अब तक 33 सीटों पर उम्मीदवार

पटना राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख पशुपति कुमार पारस ने कहा कि हमने महागठबंधन के साथ गठबंधन करने की काफी कोशिश की, लेकिन गठबंधन साकार नहीं हो सका। इसीलिए हमने तय किया है कि हम चुनाव अकेले लड़ेंगे। हमलोगों ने पहले चरण की 33 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। मुझे उम्मीद है कि चुनाव के पहले चरण में हम अच्छी संख्या में सीटें जीतेंगे। पशुपति पारस ने कहा कि 2005 में हमारी पार्टी ने अकेले ही बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा था। 29 सीटों पर हमलोग जीते थे। इस बार भी हम लोगों ने महागठबंधन के साथ गठबंधन करने का प्रयास किया। लेकिन, कुछ कारण वश ऐसा नहीं हुआ। हमारा संगठन पूरे बिहार में है। हमारा दलित सेना पूरे बिहार में है। इस बार हमारी पार्टी ने फैसला किया कि हम लोग अकेले चुनाव लड़ेंगे। पहले चरण में हम लोगों ने 33 अपने कार्यकर्ताओं को प्रत्याशी बनाया। इसमें छह महिलाओं को टिकट दिया है। हम लोगों ने बिहार के जातीय समीकरण का पूरा ख्याल रखना है। मुझे उम्मीद है की प्रथम चरण के चुनाव परिणाम में हमारी संख्या काफी अच्छी रहेगी। महागठबंधन में सीट बंटवारे के सवाल पर उन्होंने कहा कि आज तक सीट बंटवारा फाइनल नहीं हुआ तो अब क्या होगा? मुकेश सहनी के साथ पिछले बार भी गलत हुआ और इस बार भी हो रहा है। हम लोगों के साथ भी ऐसा ही किया गया इसलिए हमलोग अलग हो गए। पारस ने कहा कि यह बिहार के लिए दुर्भाग्य की बात है जो सामाजिक न्याय की सरकार बननी थी, उसमें अवरोध पैदा हो गया है। यह चीज गठबंधन के लिए अच्छी बात नहीं है कुछ सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवार आमने-सामने हो गए हैं, इस सवाल पर पशुपति पारस ने कहा कि इसका मतलब स्पष्ट है कि उम्मीदवारों का चयन गलत किया गया है। एक तरफ आप गठबंधन की बात करते हो और दूसरी तरफ दोस्ताना संघर्ष की बात करते हो। लालगंज, वैशाली समेत कई जगहों पर दोस्ताना संघर्ष हो रहा है। यह गठबंधन के लिए अच्छी बात नहीं है। पशुपति पारस ने स्पष्ट कहा की कि हम लोगों को सभी जाति धर्म के लोग वोट करेंगे और हमारी जीत होगी।  

105 दिन जनरेटर से चला घर, हाईकोर्ट के आदेश पर बेनीवाल को मिला बिजली कनेक्शन

नागौर राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बेंच के आदेश के बाद सांसद हनुमान बेनीवाल के नागौर स्थित आवास का बिजली कनेक्शन शुक्रवार शाम को बहाल कर दिया गया। डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता (एसई) अशोक चौधरी ने बताया कि हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश में संशोधन करते हुए 4 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश दिया था। यह आदेश 10 अक्टूबर को जारी हुआ था लेकिन इसकी कॉपी डिस्कॉम को शुक्रवार को प्राप्त हुई, जिसके बाद सांसद के भाई प्रेमसुख बेनीवाल के नाम पर दर्ज बिजली कनेक्शन को तुरंत जोड़ दिया गया। एसई चौधरी ने बताया कि प्रेमसुख बेनीवाल ने पहले ही 2 लाख रुपये जमा करवाए थे और अब कोर्ट के आदेशानुसार शेष राशि के लिए बैंक गारंटी जमा करने की प्रक्रिया पूरी की गई। हाईकोर्ट ने इस मामले को सेटलमेंट के लिए भेजते हुए 15 दिनों के भीतर निस्तारण करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि डिस्कॉम ने सांसद के आवास का बिजली बिल करीब 11 लाख रुपये बकाया बताया था। मार्च 2025 में प्रेमसुख बेनीवाल ने 2 लाख रुपये जमा कर मामले को सेटलमेंट में लेने की अर्जी दी थी। इसके बावजूद लगभग तीन महीने बाद डिस्कॉम ने बिना पूर्व सूचना के सांसद के आवास का बिजली कनेक्शन काट दिया। सांसद हनुमान बेनीवाल ने इसे अनुचित ठहराते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। सिंगल बेंच ने प्रारंभिक सुनवाई में 6 लाख रुपये जमा कराने का आदेश दिया था। इसके विरोध में सांसद ने डबल बेंच में अपील की, जिसने 4 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश दिया। सांसद बेनीवाल ने बताया कि इस गलती के कारण उनके आवास को 105 दिनों तक जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ा, जिससे उन्हें काफी असुविधा हुई। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले को सेटलमेंट में भेजते हुए दोनों पक्षों को 15 दिनों के भीतर विवाद का समाधान करने का निर्देश दिया है। सांसद ने कहा कि डिस्कॉम की कार्रवाई अनुचित थी और इस प्रक्रिया में उन्हें कोई गलती नहीं थी, फिर भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक हस्तक्षेप का उदाहरण है और दर्शाता है कि बिजली विभाग की बिना सूचना की गई कार्रवाई आम जनता के लिए कितनी असुविधाजनक साबित हो सकती है। अब नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या 15 दिनों के भीतर इस विवाद का स्थायी समाधान हो पाएगा।   राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बेंच के आदेश के बाद सांसद हनुमान बेनीवाल के नागौर स्थित आवास का बिजली कनेक्शन शुक्रवार शाम को बहाल कर दिया गया। डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता (एसई) अशोक चौधरी ने बताया कि हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश में संशोधन करते हुए 4 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश दिया था। यह आदेश 10 अक्टूबर को जारी हुआ था लेकिन इसकी कॉपी डिस्कॉम को शुक्रवार को प्राप्त हुई, जिसके बाद सांसद के भाई प्रेमसुख बेनीवाल के नाम पर दर्ज बिजली कनेक्शन को तुरंत जोड़ दिया गया। एसई चौधरी ने बताया कि प्रेमसुख बेनीवाल ने पहले ही 2 लाख रुपये जमा करवाए थे और अब कोर्ट के आदेशानुसार शेष राशि के लिए बैंक गारंटी जमा करने की प्रक्रिया पूरी की गई। हाईकोर्ट ने इस मामले को सेटलमेंट के लिए भेजते हुए 15 दिनों के भीतर निस्तारण करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि डिस्कॉम ने सांसद के आवास का बिजली बिल करीब 11 लाख रुपये बकाया बताया था। मार्च 2025 में प्रेमसुख बेनीवाल ने 2 लाख रुपये जमा कर मामले को सेटलमेंट में लेने की अर्जी दी थी। इसके बावजूद लगभग तीन महीने बाद डिस्कॉम ने बिना पूर्व सूचना के सांसद के आवास का बिजली कनेक्शन काट दिया। सांसद हनुमान बेनीवाल ने इसे अनुचित ठहराते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। सिंगल बेंच ने प्रारंभिक सुनवाई में 6 लाख रुपये जमा कराने का आदेश दिया था। इसके विरोध में सांसद ने डबल बेंच में अपील की, जिसने 4 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश दिया। सांसद बेनीवाल ने बताया कि इस गलती के कारण उनके आवास को 105 दिनों तक जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ा, जिससे उन्हें काफी असुविधा हुई। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले को सेटलमेंट में भेजते हुए दोनों पक्षों को 15 दिनों के भीतर विवाद का समाधान करने का निर्देश दिया है। सांसद ने कहा कि डिस्कॉम की कार्रवाई अनुचित थी और इस प्रक्रिया में उन्हें कोई गलती नहीं थी, फिर भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक हस्तक्षेप का उदाहरण है और दर्शाता है कि बिजली विभाग की बिना सूचना की गई कार्रवाई आम जनता के लिए कितनी असुविधाजनक साबित हो सकती है। अब नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या 15 दिनों के भीतर इस विवाद का स्थायी समाधान हो पाएगा।