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सूर्य घर योजना का बढ़ा लाभ, कैथल में 1,765 अंत्योदय परिवारों समेत 8,896 उपभोक्ता जुड़े

कैथल  प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आमजन के लिए आर्थिक राहत और ऊर्जा संरक्षण का प्रभावी माध्यम बन रही है। जिले में योजना को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। अब तक 8 हजार 896 उपभोक्ताओं ने अपने घरों की छतों पर सोलर सिस्टम स्थापित कर इस योजना का लाभ उठाया है। इनमें 1765 अंत्योदय परिवार शामिल हैं। इस योजना से लोगों को बिजली खर्च में राहत मिलने के साथ-साथ स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है। योजना के तहत यदि कोई उपभोक्ता सोलर सिस्टम लगाने के लिए शुरुआत में पैसे नहीं है तो सरकार बैंकों के माध्यम से बिना किसी गारंटी या प्रापर्टी के न्यूनतम ब्याज दरों पर ऋण की सुविधा उपलब्ध करवा रही है। निगम के अनुसार दो किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल प्रतिदिन लगभग 8 से 10 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है। इस प्रकार एक माह में करीब 300 यूनिट तक बिजली उत्पादन संभव है, जो एक मध्यमवर्गीय परिवार की सामान्य मासिक बिजली खपत के लिए काफी हद तक पर्याप्त हो सकता है। इससे परिवारों के बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आती है। काफी फायदा हुआ है गांव बालू निवासी सतीश कुमार ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अपने घर पर सौर ऊर्जा पैनल लगवाया है। उन्हें केंद्र सरकार के साथ-साथ हरियाणा सरकार की ओर से भी सब्सिडी मिली। सोलर सिस्टम लगने के बाद उनके बिजली बिल में काफी कमी आई है और अब उनका बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है। किसे कितनी मिलती है सब्सिडी बिजली निगम के अधीक्षक अभियंता भूपेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने पात्रता और आय वर्ग के अनुसार सब्सिडी दी जाती है। अंत्योदय परिवार यानी जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम है और वार्षिक बिजली खपत 2,400 यूनिट तक है, उन्हें दो किलोवाट तक का सोलर पैनल लगवाने पर केंद्र सरकार की ओर से 60 हजार रुपये तथा हरियाणा सरकार की ओर से 50 हजार रुपये, यानी कुल 1.10 लाख रुपये का अनुदान मिल सकता है। जिन परिवारों की वार्षिक आय तीन लाख रुपये तक है और बिजली खपत 2,400 यूनिट तक है, उन्हें दो किलोवाट तक के सोलर पैनल पर केंद्र सरकार से 60 हजार रुपये तथा हरियाणा सरकार से 20 हजार रुपये, यानी कुल 80 हजार रुपये का अनुदान मिल सकता है। तीन लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले घरेलू उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की ओर से एक किलोवाट पर 30 हजार रुपये, दो किलोवाट पर 60 हजार रुपये तथा तीन किलोवाट तक 78 हजार रुपये की सब्सिडी का प्रावधान है। पर्यावरण और जेब दोनों के लिए हितकारी प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ऊर्जा संरक्षण और आम जनमानस को बिजली बिलों के भारी-भरकम बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए बहुत ही बेहतरीन योजना है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिल रही है बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि सब्सिडी की प्रक्रिया पारदर्शी हो और पात्र लोगों को समय पर लाभ मिले।  

बच्चे को मिला सहभागिता का अधिकार बच्चे की इच्छा बनी आयोग की प्राथमिकता

रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने 16 सितंबर 2026 को कवर्धा प्रवास के दौरान शासकीय बालक गृह का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बाल गृह में निवासरत एक बालक का जन्मदिन होने की जानकारी मिली। इस अवसर पर अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बालक के साथ उसका जन्मदिन मनाया तथा उससे संवाद कर उसकी इच्छा और आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान बालक से जन्मदिन पर मिलने वाले उपहार के संबंध में पूछे जाने पर उसने संकोच एवं उत्साह के साथ साइकिल की इच्छा व्यक्त की। बालक की इच्छा को ध्यान में रखते हुए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने उसे आश्वस्त किया कि उसकी पसंद के अनुसार साइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। आयोग की अध्यक्ष द्वारा किए गए आश्वासन के अनुरूप दो दिन के भीतर बोड़ला कवर्धा के बाल विकास परियोजना अधिकारी  श्री नमन शर्मा द्वारा बालक को साथ लेकर उसकी पसंद की साइकिल का चयन कराया गया तथा साइकिल बालक को बालक गृह में उपलब्ध कराई गई।साइकिल प्राप्त होने के पश्चात आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बालक से दूरभाष के माध्यम से संवाद किया। बातचीत के दौरान बालक ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अध्यक्ष के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल अधिकारों में बच्चों की सहभागिता का महत्वपूर्ण स्थान है। बच्चों की बात सुनना, उनकी भावनाओं एवं इच्छाओं को महत्व देना तथा उनकी राय का सम्मान करना बाल अधिकार संरक्षण की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि बाल गृहों में निवासरत बच्चों को संरक्षण एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व, भावनात्मक आवश्यकताओं और सहभागिता के अधिकार को भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

करमटोली में मिलेगा झारखंडी व्यंजनों का स्वाद, 51 डिसमिल जमीन पर फूड मार्केट की तैयारी

रांची करमटोली तालाब के समीप अतिक्रमण मुक्त कराई गई 51 डिसमिल सरकारी भूमि अब शहरवासियों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन सकती है। रांची नगर निगम इस जमीन पर सामान्य बाजार के बजाय झारखंडी व्यंजनों पर आधारित विशेष वेंडर्स फूड मार्केट विकसित करने की तैयारी में है। यहां लोगों को एक ही स्थान पर झारखंड के पारंपरिक और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद उपलब्ध कराने की योजना है। भविष्य में इसे नाइट मार्केट के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा। वार्ड संख्या 19 में स्थित इस भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद निगम की ओर से बाउंड्री वाल का निर्माण कराया गया है। शनिवार को नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं के साथ स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने जमीन और आसपास के क्षेत्र की उपयोगिता को देखते हुए अधिकारियों को विशेष वेंडिंग जोन की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। सामान्य बाजार नहीं, झारखंडी खान-पान की पहचान बनेगी नगर आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रस्तावित बाजार को सामान्य वेंडिंग जोन की तरह विकसित करने के बजाय झारखंडी फूड मार्केट के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर काम किया जाए। इसका उद्देश्य स्थानीय खान-पान और झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने के साथ वेंडरों को व्यवस्थित और स्थायी व्यवसायिक स्थान उपलब्ध कराना है। पाथवे और पार्किंग समेत होंगी सुविधाएं नगर आयुक्त ने अभियंताओं को बाजार का ऐसा डिजाइन तैयार करने को कहा है, जिसमें लोगों की सुविधा और स्थल की सुंदरता दोनों का ध्यान रखा जाए। प्रस्तावित योजना में सुव्यवस्थित पाथवे, पार्किंग स्थल, शेड, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा पूरे परिसर को आकर्षक बनाने के लिए झारखंड की कला और संस्कृति से जुड़ी चित्रकारी भी कराई जाएगी। अधिकारियों को स्थल का ऐसा स्वरूप विकसित करने को कहा गया है, जो स्थानीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करे और लोगों के लिए सुविधाजनक भी हो। नगर आयुक्त ने कहा कि योजना का उद्देश्य केवल वेंडरों को दुकान लगाने की जगह देना नहीं है, बल्कि उन्हें व्यवस्थित और सम्मानजनक व्यवसायिक स्थान उपलब्ध कराना भी है। वेंडिंग जोन विकसित होने से स्थानीय वेंडरों को रोजगार और आय का स्थायी माध्यम मिल सकेगा। नाइट मार्केट की भी संभावना नगर निगम भविष्य में करमटोली के इस प्रस्तावित फूड मार्केट को नाइट मार्केट के रूप में विकसित करने की संभावनाएं भी तलाश रहा है। यदि योजना मूर्त रूप लेती है तो शाम के बाद भी यहां लोग झारखंडी व्यंजनों का आनंद ले सकेंगे। इससे स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने के साथ क्षेत्र में गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं।  

52 सालों की रिसर्च में बड़ा खुलासा, पंजाब-हरियाणा में सामान्य से ज्यादा बढ़ रहा तापमान

अमृतसर. पंजाब और हरियाणा के मौसम में आ रहे अप्रत्याशित बदलावों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए 52 वर्षों (1971 से 2022) के व्यापक अध्ययन के अनुसार, पंजाब और हरियाणा अत्यधिक गर्मी, भीषण लू और उमस भरे वातावरण के सबसे बड़े हॉटस्पॉट के रूप में उभरे हैं। पीयर-रिव्यू जर्नल 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्लाइमेटोलॉजी' में प्रकाशित इस शोध में सात अलग-अलग मौसमी संकेतकों को मिलाकर तैयार किए गए 'क्लाइमेट एक्सट्रीम्स इंडेक्स' के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। यह अध्ययन 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्लाइमेटोलॉजी' में प्रकाशित हुआ है। इसे मुख्य लेखक थोटा मोहन हैं उनके साथ एम. राजीवन, स्मृतिश्री लेंका, के. निरंजन कुमार, पी. रोहिणी और ओ.पी. श्रीजीत ने इसे तैयार किया है। थोटा मोहन खुद राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF) नोएडा, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पुणे और एट्रिया यूनिवर्सिटी बेंगलुरु से संबद्धित हैं। इस शोध में 1971 से 2022 तक के IMD के ग्रिडेड वर्षा और तापमान आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है, जिसकी प्रवृत्तियों की पुष्टि मान-केंडल (Mann-Kendall) विधि से की गई है। 2000 के बाद बढ़ा अत्यधिक गर्मी का दायरा अध्ययन के तथ्य बताते हैं कि वर्ष 2000 के बाद से पंजाब और हरियाणा में अत्यधिक गर्मी से प्रभावित भू-भाग का दायरा बढ़कर 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत या उससे अधिक हो गया है। इससे पहले के दशकों में यह दायरा बेहद कम हुआ करता था। अध्ययन के अनुसार, दिन का तापमान, ह्यूमिड हीट (उमस भरी गर्मी) और एक्सेस हीट फैक्टर (लू की गंभीरता) जैसे संकेतकों में देश के किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में पंजाब और हरियाणा में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। सघन सिंचाई और भूजल का बदला समीकरण वैज्ञानिकों के अनुसार, पंजाब और हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों में सघन सिंचाई भी गर्मी के पैटर्न को प्रभावित कर रही है। मानसूनी या प्री-मानसून समय में जब सिंचाई का पानी कम पड़ता है, तो भूमि-सतह का अत्यधिक गर्म होना और हवा में मौजूद नमी मिलकर उमस भरी गर्मी को कई गुना बढ़ा देती है।इसके अलावा, घटती मृदा नमी और शुष्क हवाओं के प्रभाव से यह गर्मी लंबे समय तक बनी रहती है। रात के न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी से बढ़ा जोखिम आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि पंजाब और हरियाणा में केवल दिन का ही नहीं, बल्कि रात का न्यूनतम तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। रात के समय में पर्याप्त शीतलन न होने के कारण मानव शरीर को गर्मी से राहत नहीं मिल पाती, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो रही हैं। इसके साथ ही, लगातार शुष्क रहने वाले दिनों (CDD) की संख्या में बढ़ोतरी ने कृषि, फसल चक्र और भूजल स्तर पर भी बुरा असर डाला है। विशेषज्ञों की चेतावनी: तत्काल कदम उठाने जरूरी शोधकर्ताओं का मानना है कि पंजाब और हरियाणा में स्थानीय चरम मौसमी घटनाओं का दायरा जिस तेजी से व्यापक हो रहा है, उसे रोकने के लिए अब क्षेत्र-विशिष्ट अनुकूलन रणनीतियां अपनानी होंगी। इसमें स्वास्थ्य क्षेत्र, जल प्रबंधन, कृषि नीतियों और बुनियादी ढांचे में तुरंत सुधार की जरूरत है। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि क्लाइमेट एक्सट्रीम्स इंडेक्स का उपयोग हर साल परिचालन उपकरण के रूप में किया जाना चाहिए ताकि बढ़ते मौसमी जोखिमों की समय रहते निगरानी की जा सके। 1971–2022 के डेटा के अनुसार बदलावों के मुख्य कारण:- अधिकतम तापमान में वृद्धि: उत्तर-पश्चिम भारत में दिन के तापमान में सबसे तेज सकारात्मक वृद्धि दर दर्ज की गई है, जिससे अत्यधिक गर्मी के दिन बढ़ रहे हैं। लू और हीट स्ट्रेस की अधिकता: हीट इंडेक्स और एक्सेस हीट फैक्टर में मजबूत बढ़ोतरी के कारण क्षेत्र में लगातार और तीव्र हीटवेव आ रही हैं। सूखे और शुष्क दिनों में बढ़ोतरी: लगातार शुष्क दिनों की संख्या और मानकीकृत वर्षा-वाष्पोत्सर्जन सूचकांक में वृद्धि से क्षेत्र में सूखे जैसी स्थितियां और भू-जल तनाव बढ़ रहा है। रात के तापमान में बदलाव: न्यूनतम तापमान के रुख और आर्द्रता में बदलाव के कारण रात के समय की गर्मी और ठंड के पेटर्न प्रभावित हो रहे हैं। पश्चिमी विक्षोभ में अस्थिरता: पश्चिमी विक्षोभों के पैटर्न में बदलाव और मानसून ब्रेक स्पेल बढ़ने के कारण वर्षा का वितरण अनियमित हो रहा है। मिट्टी की नमी और भूमि-सतह का गर्म होना: शुष्क जलवायु स्थितियों के साथ मिट्टी की नमी में कमी और भूमि-सतह के अधिक गर्म होने से स्थानीय मौसम में चरम स्थिति बन रही है। सिंचाई और कृषि का प्रभाव: गहन सिंचाई के कारण वायुमंडलीय आर्द्रता और स्थानीय ऊर्जा संतुलन प्रभावित होता है, जिससे तापमान और हीट स्ट्रेस के स्तर में बदलाव आता है।

भोपाल में सरेराह मर्डर से सनसनी, बाइक पर जा रहे युवक को सिर में मारी गोली

भोपाल. निशातपुरा थाना क्षेत्र की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी रविवार सुबह दिनदहाडे चलती बाइक पर युवक को उसके ही दोस्त ने पिस्टल से सिर में गोली मार दी। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने इस मामले में आरोपित के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक 21 वर्षीय ताशी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहता है, और प्राइवेट काम करता है। वह सुबह अपने दोस्त अलीम उर्फ अल्लू व एक अन्य साथी के साथ मछली पकड़ने के लिए जा रहा था। अलीम पीछे वाली सीट पर बैठा हुआ था, जबकि मृतक ताशी बीच और उसका तीसरा साथी बाइक चल रहा था। तभी रास्ते में अलीम ने अपना पास रखी पिस्टल उसके सिर में लगाकर गोली चला दी। गोली चलते ही तीनों बाइक से नीचे गिर गए। हमले में ताशी की मौके पर ही मौत हो गई।

महानदी जल विवाद पर CM साय का बड़ा बयान, बोले- 43 साल पुराना विवाद अब सुलझेगा

रायपुर. छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच 1983 से चल रहा महानदी जल बंटवारा विवाद सुलझने की ओर अग्रसर है. इस मुद्दे पर कई बैठक हुई लेकिन सकारात्मक परिणाम नहीं निकल पाया था. हाल में दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, दोनों मुख्यमंत्री और अधिकारियों के बीच चर्चा हुई थी. मुख्यमंत्री साय रविवार को ओडिशा के दो दिवसीय दौरे पर रवाना हुए. इससे पहले उन्होंने महानदी जल विवाद को लेकर बयान दिया है. रायपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री साय ने बताया कि बीते दिनों दिल्ली में दोनों राज्यों मुख्यमंत्री और अधिकारी बैठकर चर्चा किए थे. यह विषय सीडब्ल्यूसी (Central Water Commission) को सौंप दिया गया है. उन्होंने कहा कि बहुत जल्द महानदी जल विवाद का समाधान होने वाला है. ओडिशा दौरे पर सीएम साय रवाना मुख्यमंत्री साय ने ओडिशा दौरे के लेकर जानकारी दी कि वह दो दिवसीय ओडिशा प्रवास पर रहेंगे. मुख्यमंत्री मांझी के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे. इसके अलावा पुरी में भगवान जगन्नाथ मंदिर में दर्शन करेंगे और छत्तीसगढ़ की खुशहाली की कामना करेंगे. कांग्रेस पर सीएम साय ने साधा निशाना मध्यप्रदेश के इंदौर में आयोजित कांग्रेस के छात्रों की गूंज कार्यक्रम पर सीएम साय ने निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जहां-जहां जाते हैं, कांग्रेस का बंटाधार होता है. यही हाल इंदौर और मध्यप्रदेश में कांग्रेस का होने वाला है.

‘वीर गार्जियन 2026’ में दिखी भारत-जापान की वायु शक्ति, पहली बार भारत में उड़े जापानी F-2A

 जोधपुर जोधपुर का आसमान इन दिनों भारत और जापान की वायु शक्ति के साझा अभ्यास का गवाह बन रहा है। ‘वीर गार्जियन 2026’ में भारतीय वायुसेना के तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल के साथ जापान के F-2A लड़ाकू विमान उड़ान भर रहे हैं। खास बात यह है कि जापानी लड़ाकू विमानों ने पहली बार भारत में इस द्विपक्षीय हवाई अभ्यास में हिस्सा लिया है। यही बदलाव इस साल के अभ्यास को पहले संस्करण से अलग और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। राजस्थान के जोधपुर में भारत और जापान की वायु सेनाओं के बीच चल रहा संयुक्त युद्धाभ्यास अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। 9 सितंबर से शुरू हुआ ‘वीर गार्जियन 2026’ 22 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान दोनों देशों के लड़ाकू विमान युद्ध जैसी परिस्थितियों में हवाई अभियानों, मिशन प्लानिंग और आपसी तालमेल से जुड़ी प्रक्रियाओं का अभ्यास कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह 14 दिवसीय अभ्यास दोनों वायुसेनाओं की परिचालन क्षमता और आपसी समझ को मजबूत करने पर केंद्रित है। दोनों देशों के उन्नत लड़ाकू विमान ले रहे हैं हिस्सा इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना ने अपनी अग्रिम पंक्ति की ताकत उतारी है। स्वदेशी एलसीए तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल संयुक्त प्रशिक्षण का हिस्सा हैं। दूसरी तरफ जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स (JASDF) अपने F-2A लड़ाकू विमानों के साथ भारत पहुंची है। जापानी F-2 की मौजूदगी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह पहली बार है जब JASDF के लड़ाकू विमान भारत में ‘वीर गार्जियन’ अभ्यास में शामिल हुए हैं। इससे पहले ‘वीर गार्जियन’ का पहला संस्करण 2023 में जापान में हुआ था। उस समय भारतीय लड़ाकू विमानों ने जापानी धरती पर अभ्यास किया था। इस बार अभ्यास का आयोजन भारत में होने से दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण का दायरा एक कदम आगे बढ़ा है। जापानी F-2 विमानों का भारतीय बेस से संचालन इस सहयोग का एक प्रमुख नया पहलू माना जा रहा है। तकनीकी आदान-प्रदान और रणनीतिक सहयोग अभ्यास केवल आसमान में होने वाली उड़ानों तक सीमित नहीं है। दोनों पक्ष मिशन प्लानिंग कॉन्फ्रेंस, विशेषज्ञों के बीच संवाद, इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं और एयरोस्पेस सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी अनुभव साझा कर रहे हैं। ऐसे आदान-प्रदान से दोनों वायु सेनाओं को एक-दूसरे की संचालन पद्धति और तकनीकी प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलता है। जापान के F-2A की भागीदारी का एक और पहलू इसका अलग परिचालन अनुभव है। F-2 जापान और अमेरिका के सहयोग से विकसित विमान है और इसे जापान की जरूरतों के अनुरूप व्यापक बदलावों के साथ तैयार किया गया। भारतीय विमानों के साथ इसके प्रशिक्षण से दोनों पक्षों को अलग-अलग प्लेटफॉर्म के साथ हवाई अभियानों में समन्वय का अनुभव मिल रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘वीर गार्जियन 2026’ भारत-जापान के गहराते रणनीतिक और रक्षा सहयोग को दर्शाता है। अभ्यास का उद्देश्य केवल युद्धक कौशल को धार देना नहीं, बल्कि दोनों वायु सेनाओं के बीच बेहतर परिचालन तालमेल और पारस्परिक समझ विकसित करना भी है।

बाढ़ राहत कोष में बढ़ा सहयोग, सम्राट चौधरी ने ₹2.70 लाख तो संतोष सुमन ने दिए ₹11 लाख

 पटना  बिहार के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में जनप्रतिनिधियों की ओर से आर्थिक सहयोग का सिलसिला शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनि‍वार को अपना एक माह का वेतन 2.70 लाख रुपये राहत कोष में दिया। मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह को उन्‍होंने चेक सौंपा। इसके बाद हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन ने रविवार को मुख्यमंत्री राहत कोष में 11 लाख रुपये का चेक सौंपा। लोक सेवक आवास स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर संतोष सुमन ने चेक सौंपा। इस दौरान हम के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार और पार्टी के विधायक मौजूद रहे। सुमन ने पहले ही पार्टी के सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों का एक-एक महीने का वेतन राहत कोष में देने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने हम के प्रतिनिधिमंडल के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह राशि आपदा प्रभावित लोगों की सहायता में उपयोगी होगी। मुख्यमंत्री ने सक्षम लोगों से की सहयोग की अपील मुख्यमंत्री ने अपना एक माह का वेतन राहत कोष में देने के साथ राज्य के सक्षम और समृद्ध लोगों से भी अधिक से अधिक योगदान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष आपदा के समय जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। समाज के सक्षम लोगों की भागीदारी से राहत कार्यों को और प्रभावी बनाया जा सकता है। इससे पहले शनिवार को पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर राहत कोष में अपना एक माह का वेतन चेक के माध्यम से दिया था। इन दलों ने भी की वेतन देने की घोषणा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा ने अपना एक माह का वेतन राहत कोष में देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि पार्टी के चार विधायक और एक विधान परिषद सदस्य भी एक-एक महीने का वेतन देंगे। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने भी कहा है कि पार्टी के सभी विधायक और विधान परिषद सदस्य अपना एक माह का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देंगे। लोजपा (रा) और हम की ओर से पहले ही एक माह का वेतन देने की घोषणा की जा चुकी है।

लखनऊ में बड़ा फैसला, स्कूल जाने वाली और ड्रॉपआउट किशोरियों को भी मुफ्त सैनिटरी नैपकिन

 लखनऊ  सरकारी विद्यालयों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली सभी छात्राओं को निश्शुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रदेश में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं को एकीकृत कर राज्य स्तरीय नीति बनायी जाएगी, जिसमें स्कूल छोड़ चुकी और स्कूल नहीं जाने वाली किशोरियों तक भी निश्शुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में शुक्रवार को राज्य स्तरीय माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया। विद्यालयों में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन तथा किशोरावस्था संबंधी जागरूकता गतिविधियों को नियमित रूप से चलाया जाएगा। किशोरियों को माहवारी शुरू होने से पहले जरूरी जानकारी देने के साथ मिथकों, भ्रांतियों और सामाजिक झिझक को दूर करने के लिए डिजिटल, सामाजिक व अन्य संचार माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा। माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को एकीकृत कर राज्य नीति विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य सेवाओं को समग्र और संस्थागत स्वरूप देना तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है। स्कूल से बाहर रहने वाली और वंचित समूहों की किशोरियों तक सेवाएं पहुंचाने पर विशेष जोर रहेगा। अपर मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से जिम्मेदारियां पूरी करने और विद्यालयों में किशोरियों के लिए स्वच्छ व सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  

PU सीनेट चुनाव में मतदान जारी, 7 राज्यों के 271 बूथों पर डाले जा रहे वोट

चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव के तहत रविवार को ग्रेजुएट कांस्टीट्यूएंसी के साथ डिग्री कॉलेज प्रिंसिपल और टीचर्स कांस्टीट्यूएंसी के लिए मतदान शुरू हो गया। ग्रेजुएट कांस्टीट्यूएंसी की 15 सीटों के लिए 51 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। मतदान सात राज्यों में बनाए गए 271 पोलिंग बूथ पर हो रहा है। मतदान शाम पांच बजे तक जारी रहेगा। चंडीगढ़ में भी विभिन्न स्थानों पर मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान शुरू होने के शुरुआती समय में कई पोलिंग बूथ के बाहर सन्नाटा देखने को मिला। पोलिंग बूथ के बाहर लगाए गए प्रत्याशियों के स्टालों पर भी अभी तक बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और मतदाता नहीं पहुंचे थे। हालांकि, दिन चढ़ने के साथ मतदान में तेजी आने की उम्मीद है। ग्रेजुएट कांस्टीट्यूएंसी के चुनाव में 51 प्रत्याशी 15 सीटों के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं डिग्री कॉलेज प्रिंसिपल और टीचर्स कांस्टीट्यूएंसी के मतदाता भी अपने प्रतिनिधियों के चयन के लिए मतदान कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से प्रत्याशियों की ओर से जोर-शोर से प्रचार अभियान चलाया जा रहा था। अब मतदान शुरू होने के बाद प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की नजर अधिक से अधिक मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक पहुंचाने पर है। शाम पांच बजे मतदान समाप्त होने के बाद मतपेटियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुरक्षित किया जाएगा।