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दीपावली से पहले हरियाणा में सक्रिय होंगे राजनीतिक दल, पीएम मोदी का संभावित दौरा

चंडीगढ़  हरियाणा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस बार दीपावली से पहले हरियाणा का दौरा कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार उनका कार्यक्रम अंबाला छावनी में तय हो सकता है, जहां वे 1857 की क्रांति के शहीदों की याद में बन रहे स्मारक का लोकार्पण करेंगे। अगर यह कार्यक्रम अंतिम रूप नहीं ले पाया, तो संभावना है कि प्रधानमंत्री पहली नवंबर को हरियाणा दिवस पर रोहतक पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री मोदी का हरियाणा से नाता सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा। अगस्त 2014 से लेकर अब तक वे 16 बार हरियाणा का दौरा कर चुके हैं। इस बार का दौरा उनकी 17वीं यात्रा होगी। हर दौरे में उन्होंने किसी न किसी योजना की सौगात हरियाणा को दी है- चाहे वह किसानों की आय बढ़ाने की पहल हो या गांवों में लंबे समय से बसे परिवारों को मालिकाना हक देने का फैसला। भाजपा सरकार के एक साल का रिपोर्ट कार्ड मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा की भाजपा सरकार ने 17 अक्टूबर को अपने कार्यकाल का पहला साल पूरा कर लिया है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। सरकार का दावा है कि पिछले एक साल में चार दर्जन से अधिक चुनावी वादे पूरे किए गए हैं और लक्ष्य 90 तक पहुंचने का है। महिलाओं के लिए बड़ी पहल हरियाणा सरकार ने हाल ही में ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना’ की शुरुआत की है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये सीधे खाते में दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री सैनी ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर इस योजना की जानकारी दी और बताया कि पहली नवंबर को हरियाणा दिवस पर महिलाओं के खाते में यह राशि आनी शुरू हो जाएगी। गौरतलब है कि हिमाचल, तेलंगाना और पंजाब में भी ऐसी घोषणाएं हुईं, लेकिन वहां अब तक कोई राशि महिलाओं तक नहीं पहुंची। हरियाणा इस दिशा में देश का पहला राज्य बनने जा रहा है। अंबाला या रोहतक में कार्यक्रम की तैयारी प्रधानमंत्री मोदी के हरियाणा दौरे के दो संभावित स्थल माने जा रहे हैं—अंबाला और रोहतक। अंबाला: यहां 1857 की क्रांति से जुड़े शहीदों की स्मृति में बन रहे स्मारक का उद्घाटन करवाने की योजना है।   रोहतक: अगर कार्यक्रम पहली नवंबर को हुआ तो संभावना है कि प्रधानमंत्री हरियाणा दिवस समारोह में रोहतक पहुंचें और वहां से जनता को संबोधित करें। सैनी सरकार के लिए नैतिक बल प्रधानमंत्री का दौरा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार के लिए भी नैतिक बल साबित होगा। यह लगातार तीसरी बार है जब हरियाणा में भाजपा सरकार बनी है। नायब सिंह सैनी ने पहली बार मार्च 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के स्थान पर जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद अक्टूबर 2024 में वे जनता के जनादेश से मुख्यमंत्री बने। एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर मोदी का दौरा पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नई ऊर्जा भरने का काम करेगा। जापान दौरे से लौटेंगे सैनी प्रधानमंत्री के संभावित आगमन से पहले मुख्यमंत्री सैनी पांच अक्टूबर को जापान रवाना हो रहे हैं। वहां वे एक सप्ताह तक निवेश और तकनीकी सहयोग को लेकर दौरे पर रहेंगे। उम्मीद है कि उनके लौटते ही प्रधानमंत्री के कार्यक्रम पर अंतिम मुहर लगेगी। राजनीतिक और सामाजिक संदेश प्रधानमंत्री मोदी के हरियाणा दौरे का असर सिर्फ कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा। यह प्रदेश की राजनीति, खासकर आने वाले चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित करेगा। महिलाएं, किसान और युवा—तीन ऐसे वर्ग हैं जिन पर भाजपा ने हमेशा फोकस किया है और यह दौरा भी इन्हीं मुद्दों को आगे बढ़ाने का मंच बन सकता है।

MLA बालेश्वर साहू पर गंभीर आरोप: 42 लाख की हेराफेरी में FIR, सियासी हलकों में हड़कंप

जांजगीर चांपा  छत्तीसगढ़ की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। जैजैपुर से कांग्रेस विधायक के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि विधायक जब सहकारी समिति में प्रबंधक थे, तब उन्होंने किसान परिवार से करीब 42 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू और उनके सहयोगी पर थाना चांपा में धोखाधड़ी के इस प्रकरण से राजनीतिक गलियारो में हलचल है। साहू पर ये मामला उस समय का है जब वो सेवा सहकारी समिति बम्हनीडीह में प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे। मामले के मुताबिक फरसवानी के राजकुमार शर्मा ने शिकायत की थी कि साल 2015 से 2020 के बीच बम्हनीडीह सेवा सहकारी समिति के तत्कालीन प्रबंधक ने उसकी 50 एकड़ जमीन के नाम पर किसान क्रेडिट कार्ड लोन लेने की सलाह दी थी। जिसके चलते उन्होंने एचडीएफसी बैंक चांपा में खाता खुलवाया। उस समय शाखा प्रबंधक आरोपी बालेश्वर साहू और उसके साथी गौतम राठौर ने उनसे ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर करवा लिए थे। बैंक खाते से 24 लाख रुपए अपने और परिजनों के खातों में ट्रांसफर कर दी। पुलिस जांच में तथ्य सही पाए गए हैं  और बालेश्वर साहू और विक्रेता गौतम राठौर के खिलाफ धारा 420, 468, 467, 471 के तहत अपराध दर्ज किया है। हालांकि अभी आरोपी  गिरफ्त से बाहर हैं। वहीं इस कार्रवाई के बाद राजनीति गरमा गई है। 

सरकार की जांच रिपोर्ट पर सवाल: कफ सिरप विवाद नहीं थमा

जयपुर राजस्थान में कायसन फार्मा की कफ सिरप को लेकर सरकार की जांच रिपोर्ट ही सवालों में आ गई है। शुक्रवार को सरकार ने अपनी जांच रिपोर्ट में कंपनी के झुंझुनु, भरतपुर और जयपुर से उठाए सैंपल्स को क्लीन चिट दे दी। इसके बाद देर रात कंपनी की सभी 19 दवाओं के विरतण पर रोक लगा दी और दवाओं के मानक निर्धारण की प्रक्रिया को प्रभावित करने के मामले में औषधि नियंत्रक राजाराम शर्मा को निलंबित भी कर दिया। जांच रिपोर्ट में जो सैंपल चैक किए गए उनमें दवा के साल्ट तय मानकों से या तो कम थे या ज्यादा थे। जांच रिपोर्ट में क्या? जयपुर का सैंपल- बैच नंबर (KL-25/148), कंपनी कायसन फार्मा:  इस सैंपल में प्रोपलीन ग्लायकॉल , एथेलीन ग्लायकॉल, डायथेलीन ग्लायकॉल कंटेंट नहीं था(इनके होने से दवा एलकोहाल में बदल जाती है)। डेक्ट्रोमेथारफान हाईड्रोब्रोमाइड की 13.5 एमजी मात्रा होनी चाहिए थी लेकिन जांच में यह भी 13.11 एमजी ही पाई गई। भरतपुर का सैंपल- बैच नंबर (KL-25/147), कंपनी कायसन फार्मा: इस सैंपल में प्रोपलीन ग्लायकॉल , एथेलीन ग्लायकॉल, डायथेलीन ग्लायकॉल नहीं था। डेक्ट्रोमेथारफान हाईड्रोब्रोमाइड की 13.5 एमजी मात्रा होनी चाहिए थी लेकिन जांच में यह भी 12.98 एमजी ही पाई गई। झुंझुनू का सैंपल- बैच नंबर (KL-25/250), कंपनी कायसन फार्मा: इस सैंपल में प्रोपलीन ग्लायकॉल , एथेलीन ग्लायकॉल, डायथेलीन ग्लायकॉल नहीं था। इसके अलावा डेक्ट्रोमेथारफान हाईड्रोब्रोमाइड की 13.5 एमजी मात्रा होनी चाहिए थी लेकिन जांच में यह भी 13.22 एमजी ही पाई गई।  इसी तरह कई सैंपल्स में साॅल्ट की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई गई। हालांकि इसके लिए जांच कमेटी ने स्टैंडर्ड प्रोसिजर के तहत दवा में तय मानकों से 95 से 105 प्रतिशत के सॉल्ट विरियेशन को कंज्यूमेबल माना है। विवाद बढ़ने के बाद सरकार इस मामले में बैकफुट पर आई। शाम को मंत्री ने अपने बयान में कंपनी को क्लीन चिट दी और रात होते-होते कहा कि कंपनी के सैंपल्स की फिर से जांच करवा लेंगे। सिरप को पीने से अब तक करीब 35 बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो चुके हैं। वहीं 4 बच्चों की मौत भी हो चुकी है। जिनमें दो भरतपुर और दो बच्चे सीकर से हैं। हालांकि सरकार ने इस मामले में यह कहकर पल्ला झाड लिया कि इन बच्चों को दवा सरकारी अस्पताल से नहीं लिखी गई। बड़ी संख्या में प्रेसक्रिप्शन होती है कफ सिरप की खरीद पिछले दिनों राजस्थान में आईसीएमआर की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया है कि राजस्थान में बड़ी संख्या में लोग बिना चिकित्सकीय प्रेसक्रिप्शन के ही कफ सिरप खरीदते हैं। इसके लिए जयपुर में कफ सिरप खरीदने वालों का नाम पता दर्ज करने के आदेश भी औषधि नियंत्रक की तरफ से जारी किए गए थे। इसमें कफ सिरप की खरीद करने पर फोन नम्बर एड्रेस देना अनिवार्य करने की बात कही गई थी। हानिकारक दवाओं पर अंकित होगी चेतावनी ऐसी दवाएं जो बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक हो सकती हैं, उन दवाओं पर अब इस संबंध में आवश्यक जानकारी भी अंकित करवाने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। साथ ही, ऐसी दवाएं जो सीओपीडी जैसी बीमारी में उपचार के लिए काम आती हैं, उनकी खरीद एवं आपूर्ति को भी नियंत्रित किया जाएगा। सामान्य परिस्थितियों में खांसी के उपचार के लिए वैकल्पिक दवाओं का उपयोग किया जाएगा।

आप सरकार की SDRF मांग पर राज्यपाल का इनकार, पंजाब में टकराव जारी

चंडीगढ़  पंजाब में बाढ़ राहत और मुआवजे को लेकर केंद्र और आम आदमी पार्टी सरकार के बीच जारी तनातनी और तेज हो गई है। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने साफ कहा है कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के मानक पूरे देश के लिए समान हैं और इन्हें किसी एक राज्य की मांग पर बदला नहीं जा सकता। कटारिया ने स्पष्ट किया कि नियमों में बदलाव केवल सामूहिक स्तर पर लिए गए फैसले से ही संभव है। उन्होंने यह भी दोहराया कि पंजाब सरकार के पास राहत और मुआवजे के लिए एसडीआरएफ में 12,000 करोड़ रुपये पहले से उपलब्ध हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब सरकार ने बीते चार दशकों की सबसे विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों को अधिक मुआवजा देने के लिए एसडीआरएफ मानकों में संशोधन की मांग की थी। राज्य सरकार का दावा है कि उसके पास केवल 6,000 करोड़ रुपये ही उपलब्ध हैं, जबकि केंद्र लगातार 12,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पेश कर रहा है। इसी सप्ताह मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर 20,000 करोड़ रुपये के बाढ़ राहत पैकेज की मांग रखी थी। उन्होंने बताया था कि राज्य को 13,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। शाह ने भी उसी समय कहा था कि पंजाब के पास एसडीआरएफ में पर्याप्त राशि मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल आंकड़ों का नहीं बल्कि राजनीतिक खींचतान का भी हिस्सा है। केंद्र का कहना है कि राज्य के पास पर्याप्त फंड हैं, जबकि राज्य सरकार उच्च मुआवजे की दर और अतिरिक्त मदद के लिए दबाव बना रही है।

अब इंदौर में बिना हेलमेट भी मिलेगा पेट्रोल, कलेक्टर बोले – सख्ती नहीं, समझदारी जरूरी

इंदौर क्लीन सिटी इंदौर में अब हेलमेट पहनकर गाड़ियों में पेट्रोल डलवाना जरूरी नहीं है, बल्कि हेलमेट को लेकर जागरूकता ज्यादा जरूरी है. इसी तरह के एक आदेश के बाद क्लीन सिटी इंदौर में अब हेलमेट लगाना स्वैच्छिक कर दिया गया है. बीते 1 अगस्त को इंदौर जिला प्रशासन ने दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट लगाना जरूरी किया था. इस आदेश को वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने जारी रखने से इनकार कर दिया है. पूर्व कलेक्टर ने अनिवार्य किया था हेलमेट इंदौर में आए दिन होने वाले टू व्हीलर गाड़ियों के एक्सीडेंट में लोगों की सर पर चोट लगने से मौत एक बड़ी वजह है. लिहाजा पूर्व कलेक्टर आशीष सिंह ने पिछले महीने एक आदेश निकालकर शहर में दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट लगाना अनिवार्य किया था. इतना ही नहीं बिना हेलमेट के पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं देने के भी आदेश दिए थे. नए कलेक्टर ने स्वैच्छिक किया हेलमेट लगाना उस दौरान इसी आदेश के उल्लंघन के कारण कई पेट्रोल पंप को सील भी किया गया था. 1 अक्टूबर को फिर इस आदेश को सुचारू रखने के लिए नया आदेश किया जाना था, लेकिन वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने उसे सुचारू नहीं रखते हुए शहर में हेलमेट लगाना एक बार फिर स्वैच्छिक कर दिया है. इतना ही नहीं अब बिना हेलमेट के भी वाहन चालक पेट्रोल पंपों पर अपने वाहनों में पेट्रोल डलवा पाएंगे. हालांकि नए कलेक्टर के इस फैसले से शहर के उन वाहन चालकों ने राहत की सांस ली है जिन्हें ट्रैफिक पुलिस द्वारा हेलमेट के नाम पर लगातार परेशान किया जा रहा था. पेट्रोल डलवाने के लिए भी पहनना पड़ता था हेलमेट वहीं, वाहनों में पेट्रोल डलवाने के लिए भी लोगों को हेलमेट लेकर पेट्रोल पंप पर पहुंचना पड़ता था. इधर इस आदेश को सुचारू नहीं रखने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि अधिकांश वाहन चालक पेट्रोल डलवाते समय ही हेलमेट लगा रहे थे. जबकि वाहन चलाते समय हेलमेट लगाने वाले लोगों की संख्या में कोई खास वृद्धि नहीं हुई थी. इधर इस आदेश का स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी विरोध किया था. मध्य प्रदेश में सड़क हादसों में इंदौर अव्वल लोगों को हेलमेट न लगाना पड़े इसको लेकर एक जनहित याचिका भी कोर्ट में प्रस्तुत की थी, लेकिन कोर्ट से भी हेलमेट लगाने संबंधी फैसले पर लोगों को राहत नहीं मिल पाई थी. अब जबकि खुद जिला प्रशासन ने ही अपने आदेश को सुचारू नहीं रखा तो पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट के पेट्रोल दिए जाने की पुरानी व्यवस्था फिर शुरू हो गई है. एक्सीडेंट के मामले में इंदौर पहले नंबर पर है, जहां पिछले साल ही करीब 6075 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं जो तुलनात्मक रूप से भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर से सर्वाधिक थी. इन दुर्घटनाओं में अधिकांश वाहन चालक टू व्हीलर थे, जो हेलमेट नहीं लगाए थे.  

5 करोड़ की फिरौती मामले में Sonipat मुठभेड़, तीन बदमाश पकड़े गए

सोनीपत  सोनीपत में अपराध की दुनिया का कुख्यात चेहरा बन चुके एक गैंग को शनिवार सुबह एसटीएफ ने मुठभेड़ में धर दबोचा। पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगने वाले इस गिरोह पर लंबे समय से पुलिस की निगाह थी। खेड़ी दमकन रोड पर हुई इस कार्रवाई में गोलीबारी के बीच दो बदमाश पैरों में गोली लगने से घायल हो गए। पुलिस ने दोनों घायल बदमाशों समेत उनके तीसरे साथी को भी गिरफ्तार कर लिया है। यह वही गैंग है जिसने 16 सितंबर 2025 को सोनीपत के पंखा फैक्टरी मालिक नीटू दांगी का अपहरण किया था। अपहरणकर्ताओं ने उनके पिता से पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। मामले के बाद से गांव निजामपुर के रहने वाले कपिल और दीपक फरार चल रहे थे। दोनों पर हत्या, हत्या प्रयास, लूट, रंगदारी और गैंगवार जैसे गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी पर पांच-पांच हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।   ताबड़तोड़ फायरिंग और पुलिस की जवाबी कार्रवाई शनिवार सुबह एसटीएफ यूनिट ने सूचना के आधार पर लोकेशन ट्रेस की और आरोपियों को पकड़ने के लिए घेराबंदी की। तभी बदमाशों ने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने दोनों को पैरों में गोली मारकर काबू कर लिया, जबकि तीसरा आरोपी मोहम्मद साहिल मौके से दबोच लिया गया। घायल बदमाशों को गोहाना सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। हथियार और एक्सयूवी गाड़ी बरामद मुठभेड़ के बाद पुलिस ने आरोपियों से दो देसी कट्टे और एक एक्सयूवी गाड़ी बरामद की। एसटीएफ सोनीपत के इंचार्ज योगेंद्र सिंह ने पूरी कार्रवाई का नेतृत्व किया। इस दौरान मौके पर एसटीएफ और जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

Punjab Bypoll Update: भगवंत मान की पार्टी ने नाम किया हरमीत संधू को मैदान में

तरनतारन  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तरनतारन विधानसभा उपचुनाव के लिए पूर्व विधायक हरमीत सिंह संधू को आम आदमी पार्टी का प्रत्याशी घोषित किया। यह सीट आप विधायक कश्मीर सिंह सोहल के जून में निधन के बाद खाली हुई थी। उपचुनाव की तारीख का ऐलान अभी चुनाव आयोग की ओर से किया जाना बाकी है। मुख्यमंत्री मान ने तरनतारण में ग्रामीण लिंक सड़कों के निर्माण प्रोजेक्ट का शुभारंभ करते हुए लोगों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने संधू के नाम की घोषणा करते हुए कहा, ‘हरमीत संधू जनता की पसंद हैं और आप सरकार उन्हें आपके बीच से ही उम्मीदवार बना रही है।’ हरमीत संधू का राजनीतिक सफर संधू तीन बार तरनतारन से विधायक रह चुके हैं। 2002 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की। 2007 और 2012 में शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर विधायक बने। 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में पराजय झेलनी पड़ी। जुलाई 2025 में उन्होंने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। संधू की उम्मीदवारी के साथ तरनतारन उपचुनाव की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। अब राजनीतिक दलों और मतदाताओं की निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हैं, जो उपचुनाव की तारीख का ऐलान करेगा।

सीएम हेल्पलाइन में फर्जीवाड़ा! दमोह में 29 फर्जी शिकायतकर्ता पकड़े गए, सूची प्रशासन को सौंप‍ी

दमोह दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाक अंतर्गत सीएम हेल्पलाइन पर फर्जी शिकायत करने वाले 29 शिकायतकर्ताओं को जनपद सीईओ ने चिह्नित किया है। जिसकी सूची बनाकर कलेक्टर के पास भेजी गई है। अब इन लोगों की शिकायत का सत्यापन कराया जाएगा और यदि शिकायत गलत पाई गई तो आगे कार्रवाई की जाएगी। बता दें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा यह योजन इसलिए शुरू की गई थी, ताकि आम लोगों को शासन की उस योजना का लाभ मिल सके, जिससे वह वंचित हैं। यदि अधिकारी उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं कर पा रहे हैं तो वह हितग्राही अपनी समस्याओं की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर कर सकता है। यह योजना सार्थक हुई लोगों को न्याय मिलना शुरू हो गया, लेकिन लोग इसका गलत इस्तेमाल करने लगे। जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीरता से लिया और झूठी शिकायत करने वाले लोगों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। कलेक्टर ने मांगी जानकारी दमोह कलेक्टर ने ब्लाक स्तर के अधिकारियों से जानकारी मांगनी शुरू कर दी है। तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने 29 लोगो की सूची बनाकर दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर को भेजी है। यह वे लोग हैं जो लगातार शिकायत करते हैं। जबकि उस योजना से उनका दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है। 26 सितम्बर को दमोह कलेक्टर ने जिले के सभी विभाग प्रमुखों को एक पत्र जारी किया था। जिसमें पूछा था आपके यहां सीएम हेल्पलाइन में यदि कोई ऐसे व्यक्ति हैं, जो बार बार शिकायत करते हैं या फिर शिकायत दर्ज करना उन्होंने अपनी आदत बना ली है तो उनका नाम, फोन नंबर शिकायत के विवरण की जानकारी सहित दर्ज करे और उनकी सूची भेजे। जिसके बाद तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने लोगों की एक सूची तैयार की है, जिनका काम ही सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करना है। उनके नाम ओर शिकायत की दर्ज संख्या सहित पूरी जानकारी भेजी गई है। ऐसी होती है ज्यादा शिकायत तेंदूखेड़ा ब्लाक में जो शिकायत दर्ज हैं उनमें अधिकाश लोग जिले या दूसरी जनपद से है। जिनकी शिकायतें जांच में गलत पाई गई है तो कुछ शिकायतो में लेनदेन करके मामलों का निराकरण हुआ है। शिकायत का जनहित या समाज हित से कोई वास्ता नहीं है। बल्कि निर्माण कार्य और पंचायत बंद या फिर सचिव, सरपंच की झूठी शिकायतों का हवाला दिया गया था। जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद उनकी जानकारी एकत्रित की गई और सूची दमोह कलेक्टर के पास भेजी जा चुकी है। तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने बताया कलेक्ट्रेट से पत्र प्राप्त हुआ था। उसके बाद अप्रैल माह से सितम्बर तक की जानकारी एकत्रित की गई थी और 29 ऐसे शिकायतकर्ताओं की सूची तैयार की है जो लगातार सी एम हेल्पलाइन पर शिकायत करते है। इनकी शिकायतों में फर्जी मजदूर और निर्माण कार्य में गुणवत्ता की कमी का हवाला दिया जाता है। पत्र के माध्यम से जानकारी भेजी गई है आगे जो कार्रवाई होगी दमोह कलेक्टर करेंगे। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग (लघु सिंचाई) के कार्यों की समीक्षा की

एक पेड़ मां के नाम’ की तर्ज पर चेकडैम, तालाब और ब्लास्टकूप निर्माण को बनाएं जनांदोलन: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग (लघु सिंचाई) के कार्यों की समीक्षा की  जल संकट से निपटने के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम, चेकडैम, तालाब, ब्लास्टकूप और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष जोर    जल संकट को लेकर मुख्यमंत्री ने जताई गहरी चिंता, कहा- चेकडैम, तालाब निर्माण और ब्लास्टकूप राष्ट्रीय आवश्यकता है    बोले मुख्यमंत्री- 6,448 चेकडैमों से 1.28 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता और भूजल रिचार्ज बढ़ा    मुख्यमंत्री ने कहा- 1 अप्रैल से 15 जून तक कुम्हारों को तालाब से मुफ्त मिट्टी निकालने की छूट दी जाए  – बोले मुख्यमंत्री- 100 वर्ग मीटर से बड़े सभी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य करें   मुख्यमंत्री ने कहा- वर्ष 2017 में 82 अतिदोहित क्षेत्र घटकर 2024 में 50, क्रिटिकल क्षेत्र 47 से घटकर 45   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग (लघु सिंचाई) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि जल संकट आज हमारी सामूहिक चिंता का विषय बन चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चेक डैम, तालाब और ब्लास्टकूप वर्षा जल को रोककर धीरे-धीरे उसे भूमि में समाहित होने देते हैं। यह केवल स्थानीय प्राथमिकता नहीं है बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता है। चेक डैम, तालाब और ब्लास्टकूप केवल पानी रोकने की व्यवस्था नहीं बल्कि समेकित जल प्रबन्धन है, जो बड़े बांधों की तुलना में यह काफी किफायती है। उन्होंने निर्देशित किया कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ की तर्ज पर जनांदोलन बनाते हुए चेक डैम, तालाब और ब्लास्टकूप का निर्माण एवं जीर्णोद्धार कराएं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश विभिन्न भागों स्थानीय/बरसाती नदी/ नालों में विभाग द्वारा अद्यतन 6,448 चेकडैमों का निर्माण किया जा चुका है। प्रत्येक चेकडैम से औसतन 20 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचन क्षमता विकसित होती है। इस प्रकार निर्मित चेकडैमों से कुल 1,28,960 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचन क्षमता सृजित हुई है और हर साल 10 हजार हेक्टेयर मीटर से अधिक भूजल रिचार्ज हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से अन्नदाता किसान वर्ष में दो से तीन फसल लेने में सक्षम हुए हैं।   मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षा जल संचयन और ग्राउंड वाटर रिचार्जिंग की दिशा में प्रदेश सरकार लगातार कदम उठा रही है। वित्तीय वर्ष 2022-23 से अब तक 1,002 चेकडैमों की डी-सिल्टिंग और मरम्मत कर उनकी क्षमता में वृद्धि की गई है। इसी तरह प्रदेश के 1 से 5 हेक्टेयर के 16,610 तालाबों में से 1,343 का पुनर्विकास और जीर्णोद्धार किया गया है, वहीं वर्ष 2017-2025 तक 6192 ब्लास्टकूप के माध्यम से 18576 हेक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित हुई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बरसात से पहले यानी 1 अप्रैल से 15 जून तक कुम्हारों को तालाब से मुफ्त मिट्टी निकालने की छूट दी जाए, ताकि तालाब रिचार्ज के लिए तैयार हो सकें। बरसात के बाद इन्हें मत्स्य पालन और सिंघाड़ा उत्पादन के लिए उपयोग में लाकर बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित किए जाएं।   रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 100 वर्ग मीटर से बड़े सभी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए यह कदम निर्णायक साबित होगा।   मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 तक प्रदेश में 82 अतिदोहित और 47 क्रिटिकल क्षेत्र थे। सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2024 में यह घटकर 50 अतिदोहित और 45 क्रिटिकल क्षेत्र रह गए हैं, जो संतोषजनक है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में और तेजी लाकर आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों को पूरी तरह सामान्य श्रेणी में लाने का प्रयास होना चाहिए।   उन्होंने कहा कि जैसे "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान ने वृक्षारोपण को जनांदोलन का रूप दिया है, वैसे ही चेकडैम और तालाब निर्माण भी सामूहिक प्रयासों से बड़े स्तर पर संचालित किया जाए। यह न केवल जल संकट से निपटने में सहायक होगा, बल्कि प्रदेश की कृषि, मत्स्य पालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगा।   मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जिले में तालाबों, ब्लास्टकूपों और चेकडैमों की फोटोग्राफिक डॉक्यूमेंटेशन कराएं। साथ ही जनता को जागरूक करने के लिए सोशल मीडिया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अभियान चलाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल संरक्षण और भूजल रिचार्जिंग को लेकर प्रदेश सरकार का संकल्प अटल है और इसे समाज की भागीदारी से एक सफल मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

राजकीय नलकूपों के जीर्णोद्धार व आधुनिकीकरण को लेकर मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय बैठक में दिए दिशा-निर्देश

नलकूपों से पानी के दुरुपयोग को रोकने के लिए अपनाएं वैज्ञानिक पद्धति – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजकीय नलकूपों के जीर्णोद्धार व आधुनिकीकरण को लेकर मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय बैठक में दिए दिशा-निर्देश  मुख्यमंत्री योगी बोले वाटर कंजर्वेशन की हो समुचित व्यवस्था, इससे डार्क जोन वाले क्षेत्रों में होगा सुधार  भूगर्भीय जल स्तर को बनाए रखने में वाटर कंजर्वेशन महत्वपूर्ण- मुख्यमंत्री – रिजर्व वायर को डिसिल्ट कर उसे पुनर्जीवित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों को मिले सिंचाई की सुविधा  सिंचाई आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नलकूपों का प्राथमिकता के आधार पर जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण किया जाए- मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को राजकीय नलकूपों के जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण को लेकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नलकूपों से पानी के दुरुपयोग को रोकने के लिए वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जाए और वाटर कंजर्वेशन की समुचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि वर्षा का मौसम इसके लिए सबसे उपयुक्त है। इससे भूगर्भीय जल स्तर को बनाए रखने में मदद मिलेगी और डार्क जोन वाले क्षेत्रों में सुधार होगा। मुख्यमंत्री ने सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, बाण सागर, मध्य गंगा जैसी प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा कर उसमें कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के सशक्त क्रियान्वयन से ग्रामीण और शहरी इलाकों में पानी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ने तराई क्षेत्र के किसानों की समस्याओं पर विशेष ध्यान देते हुए कहा कि रिजर्व वायर को डिसिल्ट कर उसे पुनर्जीवित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल सके। साथ ही, कटान रोकने के लिए सिल्ट का उपयोग करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की सिंचाई आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नलकूपों का प्राथमिकता के आधार पर जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण किया जाए। इससे सिंचाई क्षमता बढ़ेगी, किसानों की लागत घटेगी और उन्हें आधुनिक तकनीक आधारित सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि नलकूपों के आधुनिकीकरण व जीर्णोद्धार के कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता से कोई समझौता न किया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। नलकूपों के आधुनिकीकरण और जल संरक्षण की इन पहलों से आने वाले समय में राज्य का कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिलेगी।