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कोचिंग संस्थानों को शिक्षा मंत्री की चेतावनी, खान सर-रौशन आनंद विवाद के बीच दिया बड़ा संदेश

जमुई. पटना के चर्चित कोचिंग संचालक खान सर और रौशन आनंद के बीच उपजे हालिया विवाद पर बिहार सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। इस मामले पर सूबे के शिक्षा मंत्री मिथलेश कुमार तिवारी ने बड़ा बयान देते हुए दो टूक कहा है कि कोचिंग संस्थान सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई के लिए होते हैं, लड़ाई-झगड़े और व्यक्तिगत वर्चस्व की जंग के लिए नहीं। जमुई पहुंचे शिक्षा मंत्री ने कोचिंग संस्कृति में आ रहे इस भटकाव पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ कोचिंग संचालक अपने मुख्य उद्देश्य यानी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के रास्ते से पूरी तरह भटक चुके हैं। वे पढ़ाई छोड़ विवाद और गुटबाजी की राह पर चल पड़े हैं, जिसे सरकार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। कोचिंग संस्थानों को दी चेतावनी शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस पूरे मामले को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्पष्ट निर्देश पर ऐसे विवादों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि भविष्य में भी अगर कोई कोचिंग संचालक इस तरह की अमर्यादित हरकत में शामिल पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। "शिक्षा के मंदिरों को राजनीति, व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता और शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। सरकार छात्रों के भविष्य और उनके हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कोचिंग सेंटरों का काम छात्रों का भविष्य संवारना मंत्री ने स्पष्ट किया कि बिहार सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था को अनुशासित, पारदर्शी और बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। कोचिंग सेंटरों को यह समझना होगा कि उनका काम छात्रों का भविष्य संवारना है, न कि कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी करना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों के हित में सरकार आगे भी ऐसे सख्त और आवश्यक कदम उठाती रहेगी।

पटियाला में बीमारी फैलने की आशंका, 16 लोगों में लक्षण मिले, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

पटियाला. पटियाला में पीलिया (हैपेटाइटिस-ए) के फैलने का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 5 मामले पॉजीटिव पाए गए हैं, जबकि 16 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है। कार्यकारी सिविल सर्जन डॉ. कुशलदीप गिल ने बताया कि ये मामला सरहिंदी गेट के निकट स्थित डोगरा मोहल्ला क्षेत्र से सामने आए हैं। इस इलाके की आबादी 1,119 है, जो 243 घरों में निवास करती है। 10 जून को आई.डी.एस.पी. लैबोरेटरी, माता कौशल्या अस्पताल, पटियाला से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार डोगरा मोहल्ला के 2 मरीजों में हैपेटाइटिस-ए और एक मरीज में हैपेटाइटिस-ई की पुष्टि हुई है। इसके अलावा 2 और मरीजों की पुष्टि हुई है। डॉ. गिल ने बताया कि अब तक पीलिया के 16 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। प्रभावित लोगों की आयु 4 वर्ष से 48 वर्ष के बीच है। प्रारंभिक जांच में यह संक्रमण दूषित पानी के माध्यम से फैलने की आशंका जताई गई है। उन्होंने बताया कि फिलहाल 5 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। कल शाम पांच एच-2-एस पानी के नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए थे और आज पांच अन्य नमूने लेकर सरकारी प्रयोगशाला, खरड़ भेजे गए हैं। प्रभावित मरीजों से कल चार रक्त नमूने लिए गए थे, जिनमें से 3 हैपेटाइटिस-ए पॉजीटिव पाए गए। आज चार और रक्त नमूने एकत्र किए गए हैं, जिनकी जांच कल की जाएगी।

शिक्षा, संस्कार और सपनों की उड़ान ही बच्चों का अधिकार: अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर मंत्री राजवाड़े

रायपुर. अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल बचपन प्रदान करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का हनन है, जो उनके शिक्षा, स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास के अवसरों को छीन लेता है। मंत्री राजवाड़े ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। उनके हाथों में किताबें, खेल और रचनात्मक अवसर होने चाहिए, न कि श्रम का बोझ। किसी भी बच्चे से मजदूरी कराना उसके सपनों और संभावनाओं को सीमित करने के समान है। बाल श्रम केवल सामाजिक बुराई ही नहीं, बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध भी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और संरक्षण का अधिकार दिलाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बाल श्रम, बाल तस्करी और बच्चों के शोषण जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। लेकिन इस अभियान को सफल बनाने के लिए समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। राजवाड़े ने नागरिकों से आह्वान किया कि यदि किसी बच्चे से अवैध रूप से कार्य कराया जा रहा हो, उसे शिक्षा से वंचित रखा जा रहा हो अथवा उसके साथ किसी प्रकार का शोषण या दुर्व्यवहार हो रहा हो, तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला एवं बाल विकास विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें। उन्होंने कहा कि एक संवेदनशील और जागरूक समाज ही बच्चों को सुरक्षित बचपन और उज्ज्वल भविष्य दे सकता है। आइए, हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि किसी भी बच्चे का बचपन श्रम में नहीं, बल्कि शिक्षा, सुरक्षा और अवसरों के साथ विकसित हो, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर देश और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

सिनेमा बदल सकता है समाज की सोच, राज्यपाल डेका ने फिल्मों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल डेका रायपुर,  फिल्में और डॉक्युमेंट्री केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक संदेश देने का एक प्रभावी साधन हैं। राज्यपाल रमेन डेका ने आज राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के सम्मान समारोह में उक्त बातें कही। यह कार्यक्रम रायपुर के एक निजी होटल में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।           राज्यपाल ने कहा कि आदिम युग से ही मनुष्य विभिन्न माध्यमों से अपने विचार और संदेश व्यक्त करता रहा है। समय के साथ नाटक, रेडियो, टेलीविजन और अब डिजिटल माध्यमों ने इस भूमिका को और व्यापक बनाया है। उन्होंने कहा कि पहले सिनेमा का मूल उद्देश्य केवल धन अर्जित करना नहीं था, बल्कि समाज को संदेश देना और जागरूक करना था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी भारतीय सिनेमा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।           राज्यपाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध उल्लेखनीय सफलता मिली है। फिल्म निर्माताओं को चाहिए कि अब वे बस्तर की समृद्ध संस्कृति से  देश और दुनिया  को परिचित कराएं। इससे क्षेत्र की सकारात्मक छवि को मजबूती मिलेगी।           राज्यपाल ने सद्गति, चरणदास चोर और देवदास जैसी फिल्मों और नाटकों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और जागरूकता लाने वाली फिल्मों की आज भी उतनी ही आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और पर्व-त्योहारों जैसे हमारे धरोहर को स्थायी रूप से संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम डॉक्यूमेंट्री फिल्में हैं। उन्होंने कलाकारों से लोककला, लोकगीत, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।            राज्यपाल ने कहा कि मोबाइल की बढ़ती लत आज गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। बच्चे खेल के मैदानों से दूर हो रहे हैं और उनकी रचनात्मकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कलाकारों  से आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी को कला, संगीत, नाटक और नृत्य जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए आगे आएं। इस अवसर पर राज्यपाल ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त डॉक्युमेंट्री फिल्मों छत्तीसगढ़ के भीम दाऊ चिंताराम, हैप्पी बर्थडे और स्क्रीन के निर्माता-निर्देशकों को सम्मानित किया।           कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संस्कृति विभाग के संचालक संजय कन्नौजे ने दिया। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुमोना सेन ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक मनोज वर्मा ने किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न डॉक्युमेंट्री फिल्मों के निर्माता-निर्देशक कलाकार एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

मध्य प्रदेश में बदला मौसम का मिजाज, भिंड-मुरैना सहित 6 जिलों में ओले गिरने का अलर्ट; मानसून 3-4 दिन लेट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून का इंतजार थोड़ा और लंबा हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रदेश में 3 से 4 दिन की देरी से पहुंच सकता है। फिलहाल प्री-मानसून सिस्टम सक्रिय हैं, जिसके चलते कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की स्थिति बन रही है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक शुक्रवार को भिंड, मुरैना, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में ओले गिरने की संभावना है। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश भी हो सकती है। भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल सहित 40 से अधिक जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चलने की संभावना जताई है।  इससे पहले प्री-मानसून की एक्टिविटी जारी रहेगी। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में ओलावृष्टि होने का भी अनुमान है। वहीं, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, बुरहानपुर, खंडवा, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना और दमोह में तेज हवा के साथ बारिश हो सकती है। आंधी की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक होने का अनुमान है। इन जिलों में गर्मी का असर मौसम विभाग ने शुक्रवार को इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन के लिए आंधी-बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है। यानी, यहां पर गर्मी का असर बना रहेगा। 17-18 जून तक पहुंच सकता है मानसून एक दिन के ब्रेक के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अनुकूल परिस्थितियां बनी रहीं तो मानसून 17 या 18 जून तक मध्य प्रदेश में प्रवेश कर सकता है और इसके बाद अगले 10 से 15 दिनों में पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा।  ग्वालियर में आधा इंच बारिश…मंडला, सिवनी-दतिया में गिरा पानी मध्य प्रदेश में गुरुवार को आंधी-बारिश के साथ गर्मी का असर भी रहा। ग्वालियर में आधा इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं, शाम तक मंडला, सिवनी, दतिया समेत कई जिलों में बारिश हुई। इधर, प्रदेश के कई शहरों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखी गई। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर में सबसे ज्यादा 42 डिग्री दर्ज किया गया। जबलपुर में 41.3 डिग्री, उज्जैन में 39.7 डिग्री, इंदौर में 38 डिग्री और भोपाल में 39.7 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश में सबसे गर्म खजुराहो और नौगांव रहे। यहां अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दमोह में 42.8 डिग्री, सतना में 42.7 डिग्री, रीवा में 42.5 डिग्री, दतिया में 42.2 डिग्री, टीकमगढ़-मंडला में 42 डिग्री, उमरिया में 41.6 डिग्री, छिंदवाड़ा में 41.4 डिग्री, मलाजखंड में 41.1 डिग्री, रायसेन-राजगढ़ में 41 डिग्री, गुना में 40.7 डिग्री, खंडवा में 40.5 डिग्री, सागर में 40.4 डिग्री और श्योपुर में पारा 40 डिग्री सेल्सियस रहा। ब्रेक के बाद आगे बढ़ा मानसून मौसम विभाग के अनुसार, एक दिन के ब्रेक के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून 11 जून को कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में पहुंच गया। यदि परिस्थितियां अनुकूल रही तो मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा। इसलिए यह एमपी में 17 या 18 जून को पहुंच सकता है।एमपी में इन सिस्टम की एक्टिविटी प्रदेश के पूर्वी हिस्से से टर्फ गुजर रही है। वहीं, ऊपर एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) एवं एक अन्य ट्रफ सक्रिय है। इसकी वजह से गुरुवार को प्रदेश में मौसम बदला रहा।

मनरेगा भुगतान में तेजी: जामताड़ा समेत संताल के जिलों को करोड़ों की राशि आवंटित

जामताड़ा  झारखंड सरकार के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) आयुक्त कार्यालय ने राज्य के सभी जिलों को बड़ी राहत देते हुए सामग्री मद के भुगतान के लिए 172.65 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। यह राशि एसएनए-स्पर्श माडल के माध्यम से जारी की गई है। इससे विभिन्न लंबित भुगतानों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। जामताड़ा जिले के 10.50 करोड़ रुपये की राशि मिली है। संताल में सबसे अधिक राशि गोड्डा को जिले 15 करोड़ रुपये मिली है। आयुक्त कार्यालय के पत्र में कहा गया है कि सामग्री मद में केंद्र एवं राज्य सरकार की हिस्सेदारी 75:25 के अनुपात में है। जिलों को निर्देश दिया है कि आवंटित राशि का उपयोग तय प्राथमिकताओं के अनुसार किया जाए, ताकि लंबित देनदारियों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित हो सके। बताया गया कि तकनीकी सहायकों, सहायक अभियंताओं, कनीय अभियंताओं व बीएफटी के जून 2026 तक के वेतन का भुगतान, मेट के लंबित मानदेय का भुगतान, दीदी बगिया योजना से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की बकाया राशि का भुगतान, विशेष हरित ग्राम योजना की लंबित देनदारियों का निपटारा और पूर्ण हो चुकी योजनाओं का भुगतान कर उन्हें मनरेगासॉफ्ट में बंद करना है। एक जुलाई से नए कानून के लागू होने से पहले खर्च करें पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार की अधिसूचना के अनुसार एक जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह वीबीरामजी एक्ट लागू किया जाना प्रस्तावित है। ऐसे में एसएनए-स्पर्श माडल के तहत आवंटित राशि के उपयोग में भविष्य में प्रशासनिक कठिनाइयां आ सकती हैं। इसी को देखते हुए जिलों को उपलब्ध राशि का समयबद्ध और प्राथमिकता आधारित व्यय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। सरकार के इस निर्णय से मनरेगा के तहत कार्यरत तकनीकी कर्मियों, मेट, स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न विकास योजनाओं से जुड़े लाभुकों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही लंबित भुगतानों के निपटारे से ग्रामीण विकास परियोजनाओं को भी नई गति मिलने की संभावना है। संताल परगना के छह जिलों को मिली राशि क्रम     जिला     आवंटित राशि 1     गोड्डा     15.00 2     जामताड़ा     10.50 3     पाकुड़     9.30 4     दुमका     8.80 5     देवघर     8.40 6     साहिबगंज     7.70

नगर निगम की बड़ी पहल: पटना के 6 अंचलों में सहयोग शिविर, 10 दिन में होगा शिकायतों का निपटारा

पटना इस बात 16 जून को पटना के अलग-अलग अंचलों में ‘सहयोग शिविर’ का आयोजन किया जा रहा है। नगर निगम की ओर से बताया गया है कि इन शिविरों के माध्यम से नागरिक न केवल पटना नगर निगम से संबंधित शिकायतें एवं सुझाव दर्ज करा सकेंगे, बल्कि अन्य विभागों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए भी आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। सरकार की जन-अनुकूल पहल ‘सहयोग’ का उद्देश्य नागरिकों को एक ही मंच पर विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतों के पंजीकरण एवं उनके समयबद्ध निवारण की सुविधा उपलब्ध कराना है। पटना नगर निगम इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करते हुए नियमित रूप से ऑफलाइन सहयोग शिविरों का आयोजन महीने के पहले एवं तीसरे मंगलवार को कर रहा है, जिससे आमजन को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ें। आइये जानते हैं इस बार कहां-कहां लग रहे हैं शिविर     नूतन राजधानी अंचल: खाजपुरा सामुदायिक भवन, वार्ड संख्या-04     पाटलीपुत्र अंचल: आर.एस. दरबार कम्युनिटी हॉल, आशियाना नगर, फेज-2, वार्ड संख्या-02     कंकड़बाग अंचल: सामुदायिक भवन, दसरथा, वार्ड संख्या-30     बांकीपुर अंचल: सामुदायिक भवन, कदमकुआं, वार्ड संख्या-38     अजीमाबाद अंचल: गुलजारबाग स्टेडियम, वार्ड संख्या-53     पटना सिटी अंचल: टूरिस्ट फेसिलिटेशन सेंटर, वार्ड संख्या-66 सहयोग पोर्टल पर अपलोड किया जाता है सहयोग शिविरों में प्राप्त सभी आवेदनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सहयोग पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। प्रत्येक आवेदन के पंजीकरण के साथ एक यूनिक रेफरेंस नंबर जारी किया जाता है, जिससे शिकायतकर्ता अपने आवेदन की प्रगति एवं निष्पादन की स्थिति की जानकारी कभी भी प्राप्त कर सकते हैं। नागरिक घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से भी अपने आवेदन की स्थिति देख सकते हैं। इसके अतिरिक्त आगामी सहयोग शिविरों में पहुंचकर रेफरेंस नंबर के आधार पर पूर्व में दर्ज शिकायतों पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है। घर बैठे भी दर्ज करा सकते हैं शिकायत नगर निगम की ओर से बताया कि सहयोग पोर्टल नागरिकों को घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की सुविधा प्रदान करता है। किसी भी प्रकार की समस्या, शिकायत अथवा सुझाव को पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज किया जा सकता है। शिकायत दर्ज होते ही संबंधित आवेदन के लिए एक रेफरेंस नंबर स्वतः जनरेट हो जाता है, जिसके माध्यम से शिकायतकर्ता आवेदन की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। शिकायत पंजीकृत होने के साथ ही संबंधित विभाग को उसकी सूचना स्वतः उपलब्ध हो जाती है, जिसके आधार पर विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की जाती है। इस व्यवस्था से शिकायत निवारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं समयबद्ध बन रही है। सहयोग पोर्टल से प्राप्त 98 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निपटारा पटना नगर निगम द्वारा सहयोग पोर्टल एवं सहयोग शिविरों के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के समयबद्ध निष्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार प्राप्त आवेदनों का अधिकतम 10 दिनों के भीतर निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है। गुरुवार तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार सहयोग पोर्टल के माध्यम से कुल 463 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 452 आवेदनों का सफलतापूर्वक निपटान किया जा चुका है। इस प्रकार प्राप्त शिकायतों में से 98 प्रतिशत से अधिक मामलों का समाधान सुनिश्चित किया गया है। शेष लंबित मामलों पर भी संबंधित विभागों द्वारा त्वरित कार्रवाई की जा रही है। Bihar : विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला का हो रहा आगाज, पर्यटन विभाग तैयारी में जुटी; जानिए क्या है इस बार अलग ? नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग की जा रही है नगर निगम मुख्यालय स्तर से प्राप्त सभी प्राप्त आवेदनों की नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग की जा रही है। शिकायतों के निष्पादन की स्थिति पर सतत निगरानी रखी जाती है ताकि किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो तथा नागरिकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर समाधान उपलब्ध कराया जा सके। पटना नगर निगम ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे सहयोग शिविरों एवं सहयोग पोर्टल की सुविधाओं का अधिकाधिक उपयोग करें तथा अपनी समस्याओं एवं शिकायतों के समाधान के लिए इस जनहितकारी व्यवस्था का लाभ उठाएं। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से प्रशासन और जनता के बीच संवाद को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा तथा सुशासन के लक्ष्य को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सकेगा।  

गैस सिलेंडर में गड़बड़ी का खुलासा, संदिग्ध उपभोक्ताओं की सूची तैयार

लखनऊ घरेलू सिलेंडरों की हर रीफिल पर चेक लगाने के बाद तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल की दिशा में कदम बढ़ाया है। सभी कनेक्शन धारकों का बीती अवधि का उपयोग का विवरण तैयार किया जा रहा है। जिन कनेक्शन धारकों ने नाम मात्र को रीफिल ली है, उनको संदिग्ध की सूची में डाला जा रहा है। वहीं अत्यधिक उपयोग वाले उपभोक्ता भी चिन्हित किए जा रहे हैं। इनका ऑडिट कराकर उपयोग की वास्तविक स्थिति जानी जाएगी। बीती अवधि में प्रबंधन के पास गैस कटिंग की शिकायतें पहुंची हैं। इसमें सस्ती घरेलू गैस से कॉमर्शियल की रीफिलिंग की शिकायत प्रमुख है। गैस कटिंग से तैयार किए गए इस सिलेंडर को कॉमर्शियल के उपयोगकर्ता को सरकारी रेट से कम पर उपलब्ध कराए जाने का आरोप है। इसको संज्ञान में लेकर तेल कंपनियों ने संबंधित कनेक्शन धारक का ब्योरा तलब कर उसके अधिकतम एवं न्यूनतम उपयोग का विवरण तैयार किया है। इस विवरण में इस बात का उल्लेख है कि एक रीफिल से दूसरी रीफिल के बीच कितना अंतर है। बीती अवधि में कितने अंतर से रीफिल ली गईं। इस समय यह अंतर कितना है। बिगड़ सकती है आपूर्ति वितरण से जुड़े लोगों ने बताया कि एक बड़ा वर्ग किसी भी तरह घरेलू गैस को हासिल करने की जुगत में लग गया है। किल्लत के समय में गैस की बुकिंग का स्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे हालातों में वास्तविक जरूरतमंद घरों तक समय से गैस पहुंचाने की दिक्कत हो गई है। जो वितरक एक से दो दिन के अंदर अपने उपभोक्ताओं के यहां रीफिल पहुंचा देते थे, एक से अधिक का समय लेने लग गए हैं। वहीं तेल कंपनियां गैस की सीमित आपूर्ति दे रही हैं। जांच की वजह इस समय घरेलू उपयोग की एलपीजी खरीदार को 67.22 रुपये प्रति किलो पड़ रही है। जबकि कॉमर्शियल उपयोगकर्ता को एक किलो गैस के लिए 166.71 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। दोनों मदों में अंतर 99.69 रुपये किलो के स्तर तक पहुंच गया है। इस अंतर के चलते बड़े पैमाने पर कॉमर्शियल के 19 किलो के सिलेंडर में घरेलू गैस को भर कर बेचा जा रहा है। खरीदार को 300 रुपये की छूट देकर यह सिलेंडर 2800-2900 रुपये का दिया जा रहा है। आगरा संभाग, इंडेन वितरक संघ के अध्यक्ष, विपुल पुरोहित ने कहा कि कुछ ऐसे हलवाई चिन्हित किए गए हैं जिनका एलपीजी उपयोग सामान्य नहीं है। त्योहार के समय अधिक मांग की संभावना होने के बावजूद इनके द्वारा अपेक्षित रीफिल नहीं ली गई। कुछ रेस्टोरेंट भी चिन्हित किए गए हैं। इनका भी यही हाल है। पूरे एक महीने में नाममात्र की रीफिल ली गईं। जब कॉमर्शियल की किल्लत चल रही थी, उस समय इनकी तरफ से लगातार मांग थी। संदेह है कि इनके द्वारा अन्य स्रोतों से गैस हासिकल करने का प्रयास चल रहा है।

नौकरी में आरक्षण को लेकर HC की अहम टिप्पणी, आरक्षित कोटे का फायदा लेने वालों पर स्पष्ट आदेश

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि जो अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया के किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ ले चुके हैं, वे बाद में अनारक्षित (जनरल) श्रेणी में माइग्रेशन का दावा नहीं कर सकते। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि जिन उम्मीदवारों ने आरक्षित वर्ग में आवेदन तो किया, लेकिन किसी प्रकार की आरक्षण संबंधी रियायत नहीं ली और उनके अंक सामान्य वर्ग की कटआफ से अधिक हैं, उन्हें उपलब्ध सामान्य वर्ग की सीटों पर विचार किए जाने का अधिकार होगा। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने हरियाणा में आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर (ग्रुप-बी) के 805 पदों पर भर्ती से जुड़े पुनर्विचार आवेदनों का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया। यह भर्ती 21 जून 2024 को जारी विज्ञापन के माध्यम से की गई थी। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान आरक्षण के आधार पर कोई भी लाभ प्राप्त करने वाले उम्मीदवार अनारक्षित वर्ग में समायोजन का दावा नहीं कर सकते। वहीं, ऐसे उम्मीदवार, जिन्होंने आरक्षित श्रेणी में आवेदन किया हो लेकिन आयु सीमा में छूट, शुल्क रियायत या अन्य किसी प्रकार का लाभ न लिया हो और जिन्होंने सामान्य वर्ग की निर्धारित कटऑफ से अधिक अंक हासिल किए हों, उन्हें उपलब्ध सामान्य वर्ग की सीटों पर विचार का अवसर दिया जाएगा। मामले में पुनर्विचार याचिकाएं 3 नवंबर 2025 को दिए गए खंडपीठ के एक पूर्व निर्णय के बाद दाखिल की गई थीं। अनुमति याचिका पहले ही हो चुकी खारिज: हाई कोर्ट याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि भले ही उन्हें आरक्षण का लाभ न मिले, लेकिन उनके अंक सामान्य वर्ग के अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक हैं, इसलिए उन्हें चयन का अधिकार मिलना चाहिए। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि इस मामले में दायर विशेष अनुमति याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। दावों की सच्चाई जानने के लिए हाई कोर्ट ने हरियाणा लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वे स्पष्ट करें कि पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं में से किन उम्मीदवारों ने आरक्षित वर्ग में आवेदन करने के कारण कोई लाभ प्राप्त किया था या नहीं। इसके बाद राज्य सरकार ने शपथ पत्र दाखिल कर बताया कि कुछ उम्मीदवारों ने आयु सीमा में छूट और अन्य रियायतों का लाभ लिया था। अदालत ने इस शपथपत्र को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि ऐसे उम्मीदवारों को सामान्य वर्ग में माइग्रेशन की अनुमति नहीं दी जा सकती। साथ ही हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि जो पुनर्विचार याचिका कर्ता अंतत अपनी मेरिट के आधार पर सामान्य वर्ग में चयनित पाए जाते हैं, उन्हें उनके जूनियर उम्मीदवारों की नियुक्ति तिथि से लाभ दिया जाए। हालांकि वास्तविक वित्तीय और सेवा संबंधी लाभ केवल उनकी वास्तविक नियुक्ति की तारीख से ही मिलेंगे। अदालत ने पूरी प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं।

नियमों की अनदेखी पड़ी भारी, अमृतसर में 5 अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन का एक्शन

अमृतसर. जिला अमृतसर में अवैध कालोनियों पर सख्त कार्रवाई की गई। पंजाब सरकार द्वारा जारी निर्देशों के तहत एडीए के मुख्य प्रशासक नितेश कुमार जैन, आईएएस तथा अतिरिक्त मुख्य प्रशासक इनायत, पीसीएस द्वारा जारी आदेशों का पालन करते हुए जिला टाउन प्लानर (रेगुलेटरी) विंग ने गांव बल्ल कलां, पंडोरी वड़ैच स्थित मजीठा रोड तथा बल्ल खुर्द स्थित अमृतसर-फतेहगढ़ चूड़ियां रोड पर विकसित की जा रही 5 अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उन्हें ध्वस्त कर दिया। जिला टाउन प्लानर ने जानकारी देते हुए बताया कि भविष्य के विकास को नियंत्रित करने के लिए सरकार के निर्देशों के अनुसार गांव बल्ल कलां, पंडोरी वड़ैच और बल्ल खुर्द में विकसित की जा रही नई अवैध कॉलोनियों को पापरा एक्ट-1995 के तहत नोटिस जारी कर निर्माण कार्य बंद करवाया गया था तथा इनके विरुद्ध 09.06.2026 को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि इन अवैध कॉलोनियों के मालिकों ने सरकारी नियमों की खुली अवहेलना की और नोटिस जारी होने के बावजूद स्पष्टीकरण देने के बजाय मौके पर विकास कार्य जारी रखे। इसके चलते थाना कंबो की ओर से पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध न होने के बावजूद उच्च अधिकारियों के आदेशों की पालना करते हुए यह कार्रवाई अमल में लाई गई। इसके अतिरिक्त गांव बल्ल खुर्द में बन रही एक अवैध कॉलोनी को विभाग द्वारा कई बार नोटिस जारी कर निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद कॉलोनाइजर द्वारा मौके पर निर्माण कार्य जारी रखा गया। इसी कारण उच्च अधिकारियों द्वारा उक्त अवैध कॉलोनी को ध्वस्त करने के आदेश जारी किए गए थे। हालांकि, सार्वजनिक जमावड़े और पुलिस बल की कमी के कारण उस समय ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जा सकी थी। इसके चलते आज पुनः ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पापरा एक्ट-1995 में वर्ष 2024 में किए गए संशोधन के अनुसार अवैध कॉलोनी विकसित करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध 5 से 10 वर्ष तक की कैद तथा 25 लाख रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसी के चलते उक्त कॉलोनियों के अंतर्गत आने वाली भूमि के मालिकों और कॉलोनी विकसित करने वालों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के लिए राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस विभाग को भी लिखा जा रहा है। एडीए के रेगुलेटरी विंग ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि वे ऐसी अवैध कॉलोनियों, जिन्हें पुड्डा विभाग से मंजूरी प्राप्त नहीं है, में प्लॉट खरीदने से पहले संबंधित कॉलोनी की स्वीकृति संबंधी दस्तावेज अवश्य देखें। साथ ही अमृतसर विकास प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध अवैध कॉलोनियों से संबंधित विवरण का भी अवलोकन करें, ताकि उनके धन और संपत्ति का नुकसान न हो तथा भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा उन्होंने यह भी अपील की कि जिले में किसी भी स्थान पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले पुड्डा विभाग से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करने के बाद ही निर्माण कार्य किया जाए।