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सरकार ने बढ़ाया धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य, पहली नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में की जाएगी खरीद

धान (कॉमन)-2369 और (ग्रेड ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल एमएसपी तय पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 31 जनवरी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी 2026 तक चलेगी खरीद लखनऊ, खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत पहली अक्टूबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान खरीद शुरू होगी, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के संभागों में धान खरीद पहली नवंबर से होगी। इसके लिए पहली सितंबर से पंजीकरण प्रारंभ हो चुका है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 31 जनवरी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी 2026 तक धान खरीद होगी। सरकार ने इस वर्ष धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि भी की है। धान (कॉमन)-2369 और (ग्रेड ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है। fcs.up.gov.in या UP KISAN MITRA  पर कराना होगा पंजीकरण धान बिक्री के लिए किसानों का पंजीकृत होना अनिवार्य है। किसानों को खाद्य व रसद विभाग की वेबसाइट fcs.up.gov.in या मोबाइल ऐप UP KISAN MITRA  पर पंजीकरण कराना होगा। धान की खरीद पंजीकृत किसानों से ही होगी। खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक किसी भी सहायता या जानकारी के लिए किसान टोल फ्री नंबर 18001800150 नंबर पर कॉल कर सकते हैं। साथ ही अपने जनपद के जिला खाद्य विपणन अधिकारी, तहसील के क्षेत्रीय विपणन अधिकारी व ब्लॉक के विपणन निरीक्षक से भी संपर्क साध सकते हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश व लखनऊ के इन जनपदों में पहली अक्टूबर से होगी खरीद पश्चिम उत्तर प्रदेश के संभागों में पहली अक्टूबर से धान खरीद शुरू होगी, जो 31 जनवरी 2026 तक चलेगी। यह खरीद पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली,आगरा, अलीगढ़, झांसी संभाग में होगी। वहीं लखनऊ संभाग के हरदोई, लखीमपुर खीरी, सीतापुर जनपद में भी धान खरीद इसी अवधि में होगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश व लखनऊ संभाग के इन जनपदों में पहली नवंबर से शुरू होगी खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के संभागों में पहली नवम्बर से धान खरीद शुरू होगी। यह खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर व प्रयागराज संभाग में होगी। इसके साथ ही लखनऊ संभाग के लखनऊ, रायबरेली व उन्नाव में भी पहली नवंबर से खरीद होगी, जो 28 फरवरी 2026 तक चलेगी।   करीब 10 हजार किसानों ने करा लिया पंजीकरण धान खरीद के लिए पंजीकरण प्रारंभ हो गया है। 20 सितंबर (दोपहर एक बजे) तक करीब 10 हजार किसानों ने धान विक्रय के लिए खाद्य विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कर लिया है। विभाग के मुताबिक धान की बिक्री के लिए ओटीपी आधारित सिंगल पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। किसान मोबाइल पर एसएमएस से मिले ओटीपी को भरकर पंजीकरण करा सकते हैं। वहीं किसानों को भुगतान सीधे आधार लिंक्ड बैंक खाते में किया जाएगा। बिचौलियों को रोकने व पारदर्शिता बरतते हुए क्रय केंद्रों पर धान की खरीद ई-पॉप (इलेक्ट्रॉनिक प्वॉइंट ऑफ परचेज) डिवाइस के माध्यम से पहले की भांति किसानों के बायोमीट्रिक सत्यापन के जरिए ही होगी।

अब दिल्ली के स्टेडियम में इवेंट आयोजित करना हुआ सस्ता और सुविधाजनक

नई दिल्ली  दिल्ली के बड़े स्टेडियमों को लेकर सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने बड़े स्टेडियमों की बुकिंग की राशि में भारी कटौती की है, जिससे अब स्टेडियमों में कार्यक्रम का आयोजन कराना बहुत आसान हो जाएगा. उन्होंने कहा कि इस निर्णय का उद्देश्य दिल्ली को लाइव इवेंट्स और कॉन्सर्ट इकोनॉमी का हब बनाना है. दरअसल, इससे पहले भी मंत्री कपिल मिश्रा स्टेडियम के अधिक किराए को लेकर आपत्ति जता चुके हैं. उन्होंने हाल ही में कहा था कि इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और JLN के किराए में 100% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. इस वजह से आयोजकों को कार्यक्रमों, म्यूजिक कॉन्सर्ट और लाइव शो के आयोजन के लिए अहमदाबाद और मुंबई जैसे दूसरे शहरों में जाना पड़ रहा है, जिसकी वजह से दिल्ली टूरिज्म रेवेन्यू भी खो रही है. उन्होंने स्टेडियमों के किराए को कम करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था. कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया के जरिए दी जानकारी दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर SAI के नोटिस को शेयर करते हुए लिखा कि दिल्ली के बड़े स्टेडियमों में अब कार्यक्रमों का आयोजन बहुत आसान हो गया है. स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने इन स्टेडियमों के बुकिंग की राशि में भारी कमी की घोषणा की है. इसके आगे उन्होंने लिखा कि यह निर्णय दिल्ली को लाइव इवेंट्स और कॉन्सर्ट इकोनॉमी का हब बनाने को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के विजन को साकार करेगा.   तीन कैटेगरी में डिवाइड किए आयोजक SAI द्वारा जारी नोटिस में स्टेडियम में किसी भी कार्यक्रम को आयोजित करने वाले आयोजकों को तीन कैटेगरी में डिवाइड किया गया है. हर एक कैटेगरी के लिए स्टेडियम का शुल्क अलग-अलग होगा. पहली कैटेगरी में सरकारी संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले आयोजन आएंगे, जिसमें सरकारी स्कूल या कॉलेज, भारत मंत्रालय, और MYAS द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाएं, जो लड़कियों या दिव्यांग लड़कों के लिए खेल का आयोजन करते हैं, के कार्यक्रम शामिल हैं. दूसरी कैटेगरी में वे खेल प्रतियोगिताएं या आयोजन आएंगे, जो किसी निजी स्कूल या कॉलेज, रजिस्टर्ड सोसाइटी जो पिछले 5 साल से खेलों के विकास में काम कर रही हों, लड़कियों और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रतियोगिताएं जो कैटेगरी 1 में शामिल न हों, ऐसे कार्यक्रम कैटेगरी 2 में आएंगे. इसके अलावा, बाकी सभी आयोजन जो कैटेगरी 1 या 2 में नहीं आते हैं, उन्हें कैटेगरी 3 में शामिल किया जाएगा. नोटिस में कहा गया कि सबसे पहले, जब भी कोई खेल आयोजन के लिए बुकिंग होगी, तो एडमिन स्टाफ को यह देखना होगा कि आयोजक किस कैटेगरी में आते हैं और उसी के आधार पर शुल्क लागू होगा. किस कैटेगिरी का कितना शुल्क है? अगर दिल्ली के प्रमुख स्टेडियम जवाहर लाल नेहरू (JLN) की बात करें तो कैटेगिरी 1 के लिए इसके मेन एरिया का किराया 40 हजार रुपये है. वहीं कैटेगिरी 2 के लिए इस स्टेडियम के मेन एरिया का किराया 1 लाख रुपये है और कैटेगिरी 3 के लिए इसका किराया 25 लाख रुपये है. हालांकि, लाइट का बिल इसमें नहीं जोड़ा गया है, जिसे अलग से देना पड़ेगा. वहीं पहले जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम के मेन एरिया का किराया 50 लाख रुपये होता था.इसके अलावा SAI ने कई और स्टेडियमों के किराए के बारे में विस्तार से बताया, जिसमें JLN, मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम, इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स आदि स्टेडियम शामिल हैं.  

दिल्ली को मिली नई सौगात: स्वच्छ हवा के साथ बढ़ेगा राजस्व भी

दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को शहरवासियों को एक बड़ी सौगात देते हुए नांगली डेयरी इलाके में राष्ट्रीय राजधानी के पहले बड़े बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे बेहद गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि शहर को मवेशियों के गोबर और नगरपालिका के कचरे से मुक्त बनाने के लिए ऐसे कई संयंत्रों की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने बताया कि यह संयंत्र ना केवल शहर को कचरे से मुक्ति दिलाएगा, बल्कि इससे सरकार को राजस्व की प्राप्ति भी होगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 2.72 एकड़ जमीन पर फैले इस संयंत्र की क्षमता 200 टन प्रतिदिन (TPD) है। यह संयंत्र मवेशियों के गोबर और बायो-डिग्रेडेबल कचरे को कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और खाद में बदलेगा और प्रतिदिन लगभग 14,000 घन मीटर कच्ची बायोगैस का उत्पादन करेगा। इसके बाद इससे 5.6 टन कंप्रेस्ड बायोगैस प्राप्त होगी, जिसकी आपूर्ति इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) को की जाएगी। सह-उत्पाद के रूप में संयंत्र से खाद भी तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस संयंत्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा बताया। इस मौके पर सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, 'यह संयंत्र न केवल नालों की सफाई और यमुना में प्रदूषण कम करने में मदद करेगा, बल्कि हरित ऊर्जा और राजस्व भी उत्पन्न करेगा। दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 1,500 मीट्रिक टन गोबर का उत्पादन होता है और एक संयंत्र पर्याप्त नहीं है। शहर को भविष्य में ऐसे कई और संयंत्रों की आवश्यकता होगी।' गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर चल रहे सेवा पखवाड़े के अंतर्गत दिल्ली को यह ऐतिहासिक सौगात मिली है। यह बायोगैस प्लांट न केवल गोबर और डेयरी अपशिष्ट के प्रबंधन का स्थायी समाधान देगा, बल्कि हजारों गौशालाओं और डेयरियों की समस्याओं का हल भी बनेगा। अब गोबर से हरित ऊर्जा बनेगी। पर्यावरण स्वच्छ होगा, यमुना का प्रदूषण घटेगा और किसानों और पशुपालकों को भी सहारा मिलेगा। आगे उन्होंने कहा, ‘यह परियोजना प्रधानमंत्री के हरित ऊर्जा अभियान को सशक्त बनाते हुए, दिल्ली को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और हरित राजधानी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम और मील का पत्थर साबित होगी।’ इस मौके पर दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद, सांसद कमलजीत सहरावत, महापौर राजा इकबाल सिंह, विधायक संदीप सेहरावत समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पिछली आम आदमी पार्टी सरकार पर हमला बोलते हुए गुप्ता ने आरोप लगाया कि इस संयंत्र के लिए साल 2018 में ही धनराशि स्वीकृत कर दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद परियोजना में सालों की देरी हुई। उन्होंने कहा, 'इस परियोजना को पूरा होने में आठ साल लग गए क्योंकि पिछली सरकार काम करने के बजाय मोदी जी को दोष देती रही। वे हर बात पर राजनीति करते रहे। जब केंद्र सरकार और ट्रिपल इंजन वाली सरकार ने मिलकर काम किया, तभी यह परियोजना आगे बढ़ पाई।'

कई दिल्ली स्कूलों को मिली बम की धमकी, केजरीवाल बोले- सुरक्षा का सवाल, अभिभावक चिंतित

नई दिल्ली  दिल्ली के कई स्कूलों को शनिवार सुबह बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिसके बाद स्कूलों को तुरंत खाली करवाया गया और बड़े पैमाने पर सुरक्षा की जांच की जा रही है. स्कूलों को मिली धमकी को लेकर अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि चार इंजन वाली BJP सरकार दिल्ली की सुरक्षा नहीं संभाल पा रही है. बच्चों के मां-बाप हर रोज डर के जीते हैं. स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी एक फोन कॉल के जरिए मिली. जिन स्कूलों को धमकियां मिलीं उनमें द्वारका का दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), कृष्णा मॉडल पब्लिक स्कूल और सर्वोदय विद्यालय शामिल हैं. सूचना मिलने पर पुलिस और बम स्क्वाड घटनास्थल पर पहुंचे और सर्च अभियान शुरू किया. चार इंजन वाली सरकार नहीं संभाल पा रही दिल्ली: केजरीवाल दिल्ली के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर बीजेपी पर निशाना साधा. केजरीवाल ने लिखा, ‘दिल्ली के स्कूलों को बार-बार बम धमकी मिल रही है. हर तरफ अफरा-तफरी हो जाती है, स्कूलों की छुट्टी होती है, बच्चों और अभिभावकों में डर फैलता है. लेकिन एक साल से न कोई पकड़ा गया, न कोई कार्रवाई हुई.’ इसके आगे उन्होंने लिखा कि चार इंजन वाली BJP सरकार राजधानी की सुरक्षा तक नहीं संभाल पा रही. माता-पिता रोज डर में जी रहे हैं. स्कूल प्रबंधक ने अभिभावकों को दी सूचना द्वारका के डीपीएस स्कूल के प्रबंधक ने तत्काल ऐलान किया कि स्कूल आज बंद रहेगा. इसके अलावा, शनिवार को स्कूल में होने वाली परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई. स्कूल ने बच्चों के अभिभावकों को जारी एक नोटिस में लिखा कि कुछ कारणों की वजह से आज यानी 20 सितंबर को स्कूल बंद रहेगा. स्कूलों की सभी बसों और वैन को तुरंत वापस भेजा जा रहा है. सभी अभिभावक अपने बच्चों को लेने स्टॉप पर पहुंच जाएं. इसके आगे लिखा गया कि आज होने वाली परीक्षा स्थगित कर दी गई है. नई तारीखों की सूचना जल्द दी जाएगी. इस महीने में ऐसा दूसरी बार नहीं हुआ है जब किसी शिक्षण संस्थान को बम से उड़ाने की धमकी मिली हो. इससे पहले 9 सितंबर को नई दिल्ली के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली थी. धमकी मिलने के बाद कॉलेज कैंपस को खाली करा दिया गया था. इसके अलावा, मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज और मुख्यमंत्री सचिवालय को भी ऐसी धमकियां मिल चुकी हैं. हालांकि, ये सारी धमकियां झूठ साबित हुईं.  

पितृपक्ष में गयाजी पहुंची राष्ट्रपति, पुरखों की मोक्ष प्राप्ति के लिए किया पिंडदान

गयाजी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को देश और दुनिया में मोक्ष स्थली के रूप में चर्चित बिहार के गयाजी पहुंची। यहां उन्होंने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति की कामना के साथ पिंडदान किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गया अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर विशेष विमान से पहुंची। इसके बाद सड़क मार्ग से विष्णुपद मंदिर पहुंची। गया हवाई अड्डा पहुंचने पर बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति के पिंडदान के लिए जिला प्रशासन के जरिए विष्णुपद मंदिर परिसर में ही विशेष व्यवस्था की गई थी और सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। गयापाल पुरोहित राजेश लाल कटरियाल ने वैदिक क्रियाओं के साथ कर्मकांड कराया। उन्होंने पूरे विधि विधान के साथ पिंडदान किया। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर विष्णुपद मंदिर और आसपास के इलाकों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को प्रसिद्ध व्यवसायी मुकेश अंबानी भी अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ गयाजी पहुंचे थे और अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति को लेकर पिंडदान किया था। प्रत्येक वर्ष पितृपक्ष में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सनातन धर्म की परंपराओं के अनुसार अपने पितरों के मोक्ष तथा शांति के लिए पिंडदान करने के लिए गयाजी आते हैं। यहां विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी, अक्षय वट एवं अन्य कई पवित्र स्थानों पर स्थित वेदियों पर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि मृत्यु के पश्चात मनुष्य की आत्मा इस भौतिक जगत में ही विचरण करती रहती है। केवल शरीर नष्ट होता है, आत्मा अमर रहती है। यदि व्यक्ति का परिवार पिंडदान करता है, तो उस आत्मा को इस लोक से मुक्ति मिलती है और वह सदैव के लिए बंधनों से मुक्त हो जाती है। पितृपक्ष में देश-विदेश से हजारों पिंडदानी अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए गयाजी पहुंचते हैं। पिंडदानियों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की ओर से व्यापक तैयारी की गई है। पितृपक्ष मेला 21 सितंबर तक चलेगा।

नालों की सफाई और प्लास्टिक प्रतिबंध: मंदाकिनी में सरकारी कार्रवाई बढ़ी

चित्रकूट मंदाकिनी नदी के संरक्षण और स्वच्छता को लेकर जिला गंगा समिति, पर्यावरण समिति और वृक्षारोपण समिति की संयुक्त बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। मुख्य विकास अधिकारी अमृतपाल कौर ने कहा कि मंदाकिनी की स्वच्छता और अविरलता को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी विभागों को समयबद्ध कार्य सुनिश्चित करने होंगे। मंदाकिनी नदी में गिरने वाले नालों की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिशासी अधिकारी कर्वी ने बताया कि नालों की टैपिंग के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और कार्य जल्द प्रारंभ होगा। सीडीओ ने निर्देश दिए कि नदियों के किनारे बसे गांवों में बनाई गई स्थायी समितियां स्वच्छता अभियान को सक्रिय रूप से चलाएं। उन्होंने नदियों के किनारे स्थित आश्रमों में प्लास्टिक के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया और भंडारों में वृक्षों के पत्तों से बने पत्तलों के उपयोग को अनिवार्य करने को कहा। साथ ही सिंगल यूज़ प्लास्टिक और थर्माकोल के उत्पादों की बिक्री व उपयोग पर जुर्माना लगाने और दुकानों पर छापेमारी अभियान चलाने के आदेश दिए। सीडीओ ने सभी खंड विकास अधिकारियों से क्षेत्र में नियमित भ्रमण कर निरीक्षण करने को कहा। उन्होंने जनजागरूकता अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया, ताकि लोग नदियों में कचरा न डालें और स्वच्छता में भागीदार बनें। एसडीओ वन ने बताया कि पंचायती राज विभाग द्वारा ग्राम स्तरीय समितियों का गठन किया जा चुका है। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी प्रत्यूष कटिहार, प्रशिक्षु आईएफएस पृथ्वीराज, उप कृषि निदेशक राजकुमार, अधिशासी अभियंता अखिलेश सिंह, आशीष सिंह रघुवंशी व विवेक श्रीवास्तव रहे।

डोंगरगढ़ में ट्रेन सुविधाएं बढ़ीं: नवरात्रि के लिए 1 मेमू स्पेशल, 2 मेमू ट्रेनें अब गोंदिया तक

 रायपुर भारत में नवरात्र का पर्व एक विशेष धार्मिक अवसर है, जिसे भक्तों के लिए यात्रा करना अक्सर चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस समय हर साल रेलवे प्रशासन भक्तों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनों की व्यवस्था करता है।इस बार भी, 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक डोंगरगढ़ देवीधाम रेलवे स्टेशन पर 10 एक्सप्रेस ट्रेनों को 9 दिनों के लिए स्टापेज दिया गया है, जिससे यात्रियों को बहुत राहत मिल सकेगी। इसके साथ ही, 2 मेमू ट्रेनों का गोंदिया तक विस्तार भी किया गया है और 1 स्पेशल मेमू ट्रेन चलाई जाएगी। दो मेमू का किया विस्तार नवरात्र के दौरान ही गाड़ी संख्या 68741 दुर्ग-गोंदिया मेमू का रायपुर तक विस्तार किया गया है। यह शाम 5.15 बजे रायपुर से रवाना होगी। 68742 गोंदिया-दुर्ग मेमू रात रायपुर रात 10.40 बजे आएगी। इसी तरह रायपुर-डोंगरगढ़ मेमू का गोंदिया तक विस्तार किया गया है। मेमू 68729 रात 11.40 बजे डोंगरगढ़ से रवाना होकर 1.20 गोंदिया पहुंचेगी। 68730 डोंगरगढ़-गोंदिया मेमू 1.45 गोंदिया से रवाना होकर 3.20 बजे डोंगरगढ़ पहुंचेगी। डोंगरगढ़ रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव रेलवे प्रशासन ने नवरात्र पर्व के दौरान डोंगरगढ़ माता मंदिर पहुंचने वाले भक्तों की संख्या को ध्यान में रखते हुए पांच जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों को डोंगरगढ़ रेलवे स्टेशन पर ठहराव देने की घोषणा की है। इन ट्रेनों में शामिल हैं: दुर्ग-डोंगरगढ़ के बीच स्पेशल श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे डोंगरगढ़-दुर्ग के बीच मेमू स्पेशल चलाएगा। यह मेमू 06886 डोंगरगढ-दुर्ग 1 बजे डोंगरगढ़ से निकलेगी, जो कि 1.05 जतकनहार, 1.11 मुसरा, 1.19 बकल, 1.30 राजनांदगांव, 1.40 परमलकसा, 1.50 मुरहीपार, 1.57 रसमरा, 2.20 बजे दुर्ग पहुंचेगी। इसी प्रकार 06885 दुर्ग- डोंगरगढ़ मेमू दुर्ग से 2.40 बजे निकलेगी, जो कि 2.45 रसमरा, 2.53 मुरहीपार, 3.01 परमलकसा, 3.09 राजनांदगांव, 3.19 बकल, 3.28 मुसरा, 3.35 जतकनहार और 4 बजे      बिलासपुर-भगत की कोठी-बिलासपुर एक्सप्रेस     बिलासपुर-बीकानेर-बिलासपुर एक्सप्रेस     बिलासपुर-चेन्नई-बिलासपुर एक्सप्रेस     बिलासपुर-पुणे-बिलासपुर एक्सप्रेस     रायपुर-सिकंदराबाद-रायपुर एक्सप्रेस डोंगरगढ़ स्टेशन पर 10 एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव: 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक डोंगरगढ़ स्टेशन पर 10 एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव दो मिनट के लिए दिया गया है, जिससे यात्रियों को राहत मिलेगी। मेमू ट्रेनों का विस्तार: गोंदिया-दुर्ग मेमू ट्रेन का फेरा 9 दिनों के लिए रायपुर तक बढ़ाया गया है, जबकि रायपुर-डोंगरगढ़ मेमू ट्रेन को गोंदिया तक बढ़ाया गया है। स्पेशल मेमू ट्रेन: दुर्ग और डोंगरगढ़ के बीच 9 दिनों के लिए एक स्पेशल मेमू ट्रेन चलाई जाएगी, जो यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुविधा प्रदान करेगी। नवरात्र के दौरान रेलवे प्रशासन की तैयारी: रेलवे प्रशासन ने नवरात्र के पर्व के दौरान यात्रियों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए विशेष ट्रेन सेवाओं की व्यवस्था की है। विभिन्न एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव: बिलासपुर-भगत की कोठी, बिलासपुर-बीकानेर, बिलासपुर-चेन्नई, बिलासपुर-पुणे और रायपुर-सिकंदराबाद एक्सप्रेस ट्रेनों को डोंगरगढ़ स्टेशन पर 9 दिनों के लिए ठहराव दिया गया है। गोंदिया-दुर्ग मेमू का फेरा रायपुर तक बढ़ाया गया नवरात्र के दौरान गोंदिया से दुर्ग तक चलने वाली मेमू ट्रेन को रायपुर तक बढ़ाया गया है। यह ट्रेन गोंदिया से दुर्ग तक पहुंचने के बाद भिलाई नगर, भिलाई पावर हाउस, भिलाई, देव बलौदा चरौदा, डी-केबिन, कुम्हारी, सरोना होते हुए रायपुर पहुंचेगी। वापसी में यह वही मार्ग अपनाते हुए गोंदिया लौटेगी। यह ट्रेन नवरात्र के दौरान भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण कनेक्शन बनेगी, जिससे वे आसानी से यात्रा कर सकेंगे और अपनी धार्मिक यात्रा का आनंद ले सकेंगे।  रायपुर-डोंगरगढ़ मेमू को गोंदिया तक बढ़ाया गया दूसरी ओर, रायपुर से डोंगरगढ़ के बीच चलने वाली मेमू ट्रेन को भी 9 दिनों के लिए गोंदिया तक बढ़ा दिया गया है। यह ट्रेन डोंगरगढ़ से गुदमा, आमगांव, धानौली, सालेकसा, दरेकसा, बोरतलाव, पनिया-जोब होते हुए गोंदिया पहुंचेगी। वापसी में यह गोंदिया से डोंगरगढ़ होते हुए रायपुर तक पहुंचेगी। यह विस्तार न केवल धार्मिक यात्रियों के लिए एक सुविधा है, बल्कि इससे इस क्षेत्र के अन्य यात्रियों को भी यात्रा में आसानी होगी।  दुर्ग और डोंगरगढ़ के बीच मेमू स्पेशल इसके अतिरिक्त, दुर्ग और डोंगरगढ़ के बीच 9 दिनों के लिए एक विशेष मेमू ट्रेन भी चलायी जाएगी। यह ट्रेन दुर्ग से रसमरा, मुरहीपार, परमलकसा, राजनांदगांव, बकल, मुसरा, जटकन्हार होते हुए डोंगरगढ़ पहुंचेगी। यह स्पेशल ट्रेन नवरात्र पर्व के दौरान यात्रियों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए चलाई जाएगी। नवरात्र पर रेलवे की तैयारी: भक्तों के लिए विशेष ट्रेनों की व्यवस्था भारतीय रेलवे ने हर साल की तरह इस बार भी नवरात्र के दौरान यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा है। डोंगरगढ़ स्टेशन पर 9 दिनों के लिए 10 एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव, गोंदिया-दुर्ग और रायपुर-डोंगरगढ़ मेमू ट्रेनों का विस्तार, साथ ही विशेष मेमू ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इन सभी उपायों से यह सुनिश्चित किया गया है कि यात्रियों को न केवल धार्मिक यात्रा का आनंद मिले, बल्कि उन्हें यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।   छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ देवी धाम की विशेषताऐं छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव ज़िले में स्थित डोंगरगढ़ देवी धाम को मां बम्लेश्वरी मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह 1,600 फीट ऊँची पहाड़ी पर स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जहां लाखों भक्त हर साल दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर तक पहुँचने के लिए भक्तों को लगभग 1,100 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, और जो सीढ़ियां नहीं चढ़ सकते, उनके लिए रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है।  मां बम्लेश्वरी मंदिर की मुख्य बातें:     स्थान: यह मंदिर छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव ज़िले के डोंगरगढ़ शहर में स्थित है।      ऊंचाई: यह 1,600 फीट ऊँची पहाड़ी की चोटी पर बना है।     इतिहास: इस शक्तिपीठ का इतिहास करीब 2,000 वर्ष पुराना माना जाता है।     छोटी बम्लेश्वरी: पहाड़ी के समतल पर एक और मंदिर है जिसे छोटी बम्लेश्वरी के नाम से जाना जाता है।     पहुँच: भक्तों के लिए मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 1,100 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।     रोपवे: सीढ़ियाँ न चढ़ पाने वाले भक्तों के लिए रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है।     मेला: नवरात्रि के समय यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। इन ट्रेनों के डोंगरगढ़ में ठहरने का समय दो मिनट के लिए निर्धारित किया गया है। यह यात्रियों को मंदिरों के दर्शन करने के … Read more

नवरात्रि पर मांस बेचने व काटने-पकाने पर रोक लगे, दिल्ली BJP विधायक ने उठाई मांग

नई दिल्ली  देशभर में त्योहारों की शुरुआत हो चुकी है। नवरात्रि भी जल्द ही शुरू होने वाले हैं। ऐसे में एक बार फिर खुले में मांस की बिक्री पर रोक लगने की मांग उठाई जा रही है। दिल्ली में ये मांग बीजेपी विधायक अजय महावर ने की है। उनका कहना है कि नवरात्रि के दौरान 9 दिनों का समय सनातन धर्म बहुत पवित्र समय होता है। ऐसे में खुले में मीट की बिक्री पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि इसके लिए सोमवार को एक पत्र भी लिखेंगे। उन्होंने आगे कहा, किसी को अपना रेस्टोरेंट चलाना होतो वह शीशे के अंदर पका सकता है, हमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन खुले में मांस काटने-पकाने और बेचने पर पाबंदी होनी चाहिए। इससे पहले सावन मास में कांवड़ यात्रा के दौरान भी इस तरह की मांग करते हुए पत्र लिखा गया था। इससे पहले दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिवाली के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर संतुलित रुख अपनाने का आह्वान कियाथा । सिरसा ने कहा था कि लोगों को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना त्योहार मनाने की अनुमति दी जानी चाहिए। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिवाली न केवल एक धार्मिक त्योहार है, बल्कि लाखों लोगों के लिए एक भावनात्मक अवसर भी है, जो अपनी परंपराओं और संस्कृति से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि दिवाली का त्योहार उत्सव और खुशी का समय है, जो लोगों की भावनाओं और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने कहा कि जब पूरा देश पटाखे फोड़कर इस अवसर का जश्न मनाता है, तो अकेले राष्ट्रीय राजधानी में पूर्ण प्रतिबंध का सामना करना कोई मायने नहीं रखता।

दरभंगा में दर्दनाक हादसा, तालाब में डूबकर 3 मासूमों की मौत; परिजनों को 4-4 लाख मुआवज़ा

दरभंगा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दरभंगा जिले के जाले प्रखण्ड के मुरेठा गांव में तालाब में डूबने से तीन बच्चियों की हुई मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री कुमार ने इस हादसे को अत्यंत दुखद बताया और मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने दुख की इस घड़ी में मृतकों के शोक संतप्त परिजनों को धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है। मुख्यमंत्री ने इस हादसे में मृत तीन बच्चियों के परिजनों को चार-चार लाख रूपये अविलंब अनुग्रह अनुदान देने का निर्देश दिया है।  

मुरैना में सोलर-स्टोरेज प्रोजेक्ट से ग्रीन एनर्जी को मिली नई रफ्तार: CM डॉ. यादव

देश की पहली ‘सोलर-प्लस-स्टोरेज’ परियोजना बनी मिसाल, मिला ऐतिहासिक न्यूनतम 2.70 रुपये प्रति यूनिट टैरिफ रेट पीक-ऑवर्स में 440 मेगावॉट की सप्लाई होगी सुनिश्चित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि “प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। मुरैना की यह परियोजना ‘सेवा पखवाड़ा’ के दौरान राष्ट्र को समर्पित है। उन्होंने कहा कि ”मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना से पूरे देश में ग्रीन ऊर्जा उत्पादन और स्टोरेज की नई राह खुलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुरैना परियोजना में प्राप्त की गई सफलता के आधार पर लंबे समय की ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परियोजना में प्राप्त किया गया कम टैरिफ प्रदर्शित करता है कि नवकरणीय ऊर्जा भी डिस्कॉम के लिए अधिक किफायती हो सकता है। मध्यप्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में गत् दिवस प्राप्त निविदा में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। मुरैना में विकसित हो रही प्रदेश की पहली ‘सोलर-प्लस-स्टोरेज’ परियोजना में 2.70 रुपये प्रति यूनिट, अब तक की सबसे कम टैरिफ दर प्राप्त हुई है। यह देश की पहली परियोजना है, जिसमें 3 रुपये प्रति यूनिट से कम पर फर्म और डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी उपलब्ध होगी। यह परियोजना 95 प्रतिशत वार्षिक उपलब्धता के साथ भारत की पहली ‘सोलर-प्लस-स्टोरेज’ परियोजना बन गई है। अब तक देशभर की परियोजनाओं में केवल 50% पीक ऑवर्स उपलब्धता और 85% वार्षिक उपलब्धता सुनिश्चित हो पाती थी। मुरैना परियोजना इस ट्रेंड को बदलते हुए पीएम ऑवर्स में 95% आपूर्ति के नए मानक स्थापित करेगी। परियोजना की संरचना और क्षमता मुरैना सोलर पार्क को रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड द्वारा क्रियान्वित किया गया है, जिसने पहले भी प्रतिष्ठित नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को विकसित किया है। मुरैना परियोजना से उत्पादित बिजली राज्य द्वारा खरीदी जाएगी। मुरैना सोलर पार्क में 2 यूनिट स्थापित की जा रही हैं, प्रत्येकइकाई से तीनों चरणों में 220 मेगावॉट क्षमता ऊर्जा का उत्पादन होगा।         पहला चरण: वास्तविक समय पर सौर ऊर्जा (220 मेगावॉट तक)         दूसरा चरण: शाम के पीक ऑवर्स में 2 घंटे (बैटरी में संचित सौर ऊर्जा से)         तीसरा चरण: सुबह के पीक ऑवर्स में 2 घंटे (रात्रि में ग्रिड से चार्ज बैटरी से) इस नवाचार से बैटरी का उपयोग दिन में दो बार संभव होगा, जिससे लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। कुल मिलाकर सुबह और शाम के पीक ऑवर्स में 440 मेगावॉट सप्लाई सुनिश्चित होगी। मुरैना परियोजना दो परियोजनाओं का मिश्रण है, जिसमें पहलाएक सामान्य सिंगल-चार्ज कम्पोजिट सोलर प्रोजेक्ट,जिसमें बैटरी को सोलर एनर्जी से चार्ज जाता है।दूसरा स्टोरेज एज ए सर्विस प्रोजेक्ट है, जिसमें अतिरिक्त ग्रिड पॉवर से रात के समय बैटरी दोबारा चार्ज की जाएगी। इससे सुबह के पीक ऑवर्स की आपूर्ति की जाएगी। इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि बैटरी, दिन में दो बार उपयोग की जाएगी। यह परियोजना सुनिश्चित करती है कि राज्य ग्रिड में उपलब्ध रात के समय अतिरिक्त बिजली का उपयोग सुबह की पीक ऑवर्समें विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा। मुरैना परियोजना पीक ऑवर्सऔर दिन के समय में समान स्तर की आपूर्ति (प्रत्येक इकाई से 220 मेगावाट) के लिए एक बेंचमार्क स्थापित करती है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह द्वारा नियोजित भविष्य की परियोजनाओं का मार्ग प्रशस्त करता है जो दिन और रात के समय एक फ्लेटप्रोफाईलकी बिजली की आपूर्ति करते हुए एक ऐसीपरियोजना की आधारशिला रखेगी जो पूरे 24 घंटों के लिए समान स्तर की बिजली की आपूर्ति करे। यह नवकरणीय ऊर्जा को पारंपरिक ऊर्जा के समान निश्चितता प्रदान करेगा और इसे तकनीकी और व्यावसायिक रूप से समतुल्य बना देगी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा ई-रिवर्स नीलामी 19 सितंबर, 2025 को 25 वर्षों के लिए निर्धारित2.70 रूपये प्रति यूनिटके ऐतिहासिक टैरिफ के साथ संपन्न हुई, नीलामी प्रक्रिया लगभग 12 घंटे चली। यह पूरे भारत में एफडीआरईनिविदाओं के लिए एक मील का पत्थर है,परियोजना के ई-रिवर्स ऑक्शन में 16 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भाग लिया। यह क्षमता की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक सब्सक्रिप्शन था। ऑक्शन में अडानी रिन्यूएबल्स, एनटीपीसी रिन्यूएबल्स, रिन्यू सोलर, एसीएमई, एंजी एनर्जी, दिलीप बिल्डकॉन, एमबी पॉवर जैसी कंपनियाँ शामिल थीं।     यूनिट-1 के लिए Ceigall India Ltd ने 2.70 रूपये प्रति यूनिट।     यूनिट-2 के लिए Acme Solar Holding Ltd ने 2.764 रूपये प्रति यूनिट की दर पर यह निविदा हासिल की।इस ऑक्शनमें प्राप्त टैरिफ से स्पष्ट है कि डिस्पेजेबल नवकरणीय ऊर्जा (बैटरी भंडारण के साथ सौर ऊर्जा के संयोजन से सक्षम) कोयला आधारित बिजली की तुलना में अधिक किफायती हो गई है। निवेशकों के लिए भरोसेमंद मॉडल परियोजना का विकास रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है, जिसने रीवा और आगर जैसी परियोजनाओं को सफलतापूर्वक विकसित किया है। RUMSL द्वारा  परियोजना को निविदा से पहले निवेश के लिए तैयार किया गया। International Finance Corporation द्वारा Transaction Advisor के रूप में मध्यप्रदेश में तैयार की गई जोखिम मुक्त परियोजनाओं ने समय-समय पर साबित किया है कि बैंकेएबल अनुबंध, पूरी तरह से भूमि एकत्रीकरण, सक्रिय पारेषण योजना, वित्तपोषण और अनुबंध सहित साइट तैयार करना, पर्यावरण और सामाजिक जोखिमों को पर्याप्त रूप से कम करना, साथ ही एक पारदर्शी और विकासक अनुकूल निविदा प्रक्रिया के परिणामस्वरूप बेहतर मूल्य निर्धारण से उल्लेखनीय बचत होती है। पार्क डेवलपर के रूप में RUMSL भूमि और आंतरिक बिजली निकासी का बुनियादी ढांचा प्रदान करेगा, जबकि MP Transco परियोजना के लिए आवश्यक बाहरी विद्युत निकासी हेतु बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है। इस परियोजना में एक मजबूत 3-स्तरीय payment security mechanism है, जिसमें बेहतर bankability के लिए राज्य गारंटी शामिल है तथा procurer default और assured procurement of excess energy के लिए उचित termination compensation और reduced offtake तथा ग्रिड अनुपलब्धता के लिए compensation दिया गया है। परियोजना, चंबल क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला ने चंबल क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए मुरैना परियोजना को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र के औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। एनर्जी ट्रांजिशन में मील का पत्थर मुरैना भारत की एनर्जी ट्रांजिशनमें एक नया मोड़ है; उम्मीद … Read more