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IPS संवर्ग में होंगे शामिल 7 राज्य पुलिस सेवा अधिकारी, 5 को इसी साल पदोन्नति

भोपाल राज्य पुलिस सेवा के पांच अधिकारी इस वर्ष आईपीएस संवर्ग में पदोन्नत हो जाएंगे। अगले वर्ष एक जनवरी 2025 की स्थिति में सात को पदोन्नति मिलनी है। यह सभी 1998 बैच के होंगे। यानी, अभी 27 वर्ष की सेवा के बाद भी वह अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ही हैं। बड़े-बड़े बैच, हर पांच वर्ष में काडर रिव्यू नहीं होने सहित कई कारणों से मप्र के राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी आईपीएस संवर्ग में पदोन्नति में अन्य राज्यों से काफी पीछे हैं। वर्ष 2025 में सात पदों के लिए डीपीसी की तैयारी शासन अक्टूबर-नवंबर से प्रारंभ कर सकता है। इनकी डीपीसी लगभग एक वर्ष पीछे चल रही है।   बता दें कि कर्नाटक में 2012, तेलंगाना, गुजरात और आंध्र प्रदेश में 2010 बैच के राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी पदोन्नत होकर आइपीएस बन चुके हैं, पर प्रदेश में अभी वर्ष 1998 का ही पूरा बैच पदोन्नत नहीं हो पाया है। उधर, प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा के वर्ष 2006 के अधिकारी आईएएस में पदोन्नत हो चुके हैं। राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी लंबे समय से शासन से मांग कर रहे हैं कि छोटे जिलों में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी उन्हें दी जाए, पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है, जबकि यह व्यवस्था मध्य प्रदेश में पहले लागू रही है। शशिकांत शुक्ला, रमन सिंह सहित कई अधिकारी दो जिलों में एसपी रहने के बाद आइपीएस बने। अब कई वर्षों से इसे बंद कर दिया गया है।

ग्वालियरवासियों को राहत: कैपेसिटर बैंक से सुधरेगी बिजली आपूर्ति

ग्वालियर बिजली उपभोक्ताओं को अब पहले से ज्यादा स्थिर बिजली मिलेगी। उन्हें अब लो-वोल्टेज की समस्या से राहत मिल जाएगी, क्योंकि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश भर में 417 एक्स्ट्रा हाई टेंशन सब स्टेशनों में से 412 सब स्टेशनों पर विभिन्न क्षमताओं के कैपेसिटर बैंक लगा दिए हैं। इन कैपेसिटर बैंकों की मदद से वोल्टेज में स्थिरता लाई जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज और बार-बार उपकरण खराब होने की समस्या से निजात मिलेगी। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि ट्रांसमिशन सिस्टम और अधिक मजबूत हो रहा है।   यह होते हैं कैपेसिटर बैंक कैपेसिटर बैंक (संधारित्र बैंक) कई कैपेसिटर का एक समूह होता है, जो विद्युत ऊर्जा को संग्रहित और जारी करने के लिए एक साथ समानांतर या श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं। इन्हें विद्युत प्रणालियों की दक्षता में सुधार करने, पावर फैक्टर को सही करने और प्रतिक्रियाशील शक्ति को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है। ग्वालियर जिले में 11 हाई टेंशन सब स्टेशनों पर 222 एमवीएआर क्षमता के कैपेसिटर बैंक क्रियाशील किए गए हैं। एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों से विद्युत आपूर्ति के दौरान पावर ट्रांसफार्मर पर प्रायः इंडक्टिव लोड (सिंचाई मोटर एवं घरेलू उपकरण) होता है, जिससे वोल्टेज में कमी आती है और विद्युत गुणवत्ता प्रभावित होती है। इस समस्या के समाधान के लिए कैपेसिटर बैंक लगाए गए हैं, जो अपने कैपेसिटिव लोड के माध्यम से उस इंडक्टिव प्रभाव को संतुलित कर देते हैं। इसके परिणामस्वरूप पावर फैक्टर में सुधार होता है और उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति होती है।

घातक ‘मेलिओइडोसिस’: पहचानना मुश्किल, मध्य प्रदेश में बढ़ रही चिंता

भोपाल प्रदेश में एक नए स्वास्थ्य संकट ने दस्तक दी है। यह जीवाणु (बैक्टीरिया) का संक्रमण है, जिसकी पहचान मेलिओइडोसिस बीमारी के रूप में हुई है। इसके लक्षण बिल्कुल टीबी जैसे होते हैं। अगर मरीज का गलत इलाज हो जाए तो जीवन पर खतरा हो जाता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल का दावा है कि इससे संक्रमित प्रत्येक 10 में से चार मरीजों की मौत हो जा रही है। प्रदेश के 20 जिलों में 130 मरीज इस बीमारी से संक्रमित पाए गए हैं। मध्य प्रदेश में दो लाख से अधिक लोग मिले जो सिकल सेल पीड़ित बच्चों को दे सकते थे जन्म पिछले दिनों राजधानी के पास रहने वाले एक 45 वर्षीय किसान को एम्स लाया गया था। वह कई महीनों से बार-बार आने वाले बुखार, खांसी और सीने में दर्द से परेशान थे। स्थानीय डाॅक्टरों ने इसे टीबी मानकर इलाज शुरू किया था। महीनों तक दवा खाने के बाद भी जब उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, तो थक-हारकर उन्हें एम्स भोपाल लाया गया। यहां जब माइक्रोबाॅयोलाजी विभाग ने गहराई से जांच की, तो पता चला कि उन्हें टीबी नहीं, बल्कि मेलिओइडोसिस है। सही बीमारी पकड़ में आने के बाद मरीज ठीक हो गया।     एम्स के विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले छह वर्षों से इस बीमारी पर वह नजर बनाए हुए हैं।     प्रदेश में अब तक 20 जिलों में 130 से ज्यादा मरीजों की पहचान हो चुकी है।     यह बीमारी अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे प्रदेश में फैल रही है।     सही समय पर इसकी पहचान न हो पाने के कारण यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।     क्योंकि इसके लक्षण टीबी जैसे होने के कारण अक्सर डाॅक्टर भी धोखा खा जाते हैं। यह होता है मेलिओइडोसिस     मेलिओइडोसिस एक संक्रामक बीमारी है जो 'बर्कहोल्डरिया स्यूडोमल्ली' नामक बैक्टीरिया से होती है। यह बैक्टीरिया आमतौर पर मिट्टी और पानी में पाया जाता है।     विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी अब प्रदेश में स्थानिक (एंडेमिक) हो चुकी है, यानी यहीं के वातावरण में स्थायी रूप से मौजूद है। किसान और मधुमेह रोगी होते हैं आसान शिकार     बताया गया कि इसका सबसे अधिक खतरा ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी से जुड़े लोगों को होता है, क्योंकि उनका सीधा संपर्क मिट्टी और पानी से होता है।     शहरी इलाकों में डायबिटीज(मधुमेह) के मरीजों और अधिक शराब का सेवन करने वालों को भी यह बीमारी आसानी से अपनी चपेट में ले सकती है। डाॅक्टरों को प्रशिक्षित कर रहा एम्स     एम्स का माइक्रोबायोलाजी विभाग प्रदेश भर के डाॅक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को इस बीमारी की सही और समय पर पहचान के लिए प्रशिक्षित कर रहा है।     पिछले ढाई सालों में 25 सरकारी और निजी अस्पतालों के 50 से ज्यादा विशेषज्ञों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।     इस प्रशिक्षण का ही नतीजा है कि अब प्रदेश के अन्य अस्पतालों से भी 14 नए मामले सामने आए हैं, जिनका सही इलाज संभव हो पाया है। 

अभियान की सफलता तभी, जब बेटियों में हो सुरक्षा का भाव और कानून के भय से आतंकित हों अपराधी: मुख्यमंत्री

शारदीय नवरात्र से होगा मिशन शक्ति के 5वें चरण का शुभारंभ: मुख्यमंत्री अभियान की सफलता तभी, जब बेटियों में हो सुरक्षा का भाव और कानून के भय से आतंकित हों अपराधी: मुख्यमंत्री 01 माह के विशेष अभियान की तैयारियों पर मुख्यमंत्री ने दिए दिशा-निर्देश, कहा, सड़क पर उतरें एडीजी, आईजी/डीआईजी व अन्य अधिकारी पुलिस पेट्रोलिंग और पीआरवी-112 गाड़ियों की सक्रियता को और प्रभावी बनाने के निर्देश महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलम्बन के लिए 57 हजार ग्राम पंचायतों और 14 हजार वार्डों में भ्रमण करेंगी महिला बीट पुलिस अधिकारी बोले मुख्यमंत्री, महिला हो या पुरुष, कानून का दुरुपयोग करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई में भेदभाव न हो त्योहारों और धार्मिक स्थलों पर महिला पुलिस की विशेष तैनाती के निर्देश एंटी रोमियो स्क्वाड को और सक्रिय करने तथा शोहदों पर नजीर बनाने वाली कार्रवाई के आदेश सभी नगर निगमों में स्थापित होंगे पिंक बूथ, आपात स्थिति में महिलाओं और बेटियों के लिए होगा मददगार विद्यालयों, महाविद्यालयों और औद्योगिक संस्थानों में महिला सुरक्षा संवाद एवं लघु फिल्मों के प्रदर्शन के निर्देश मुख्यमंत्री का निर्देश, जेल में बंद असहाय महिलाओं को दिलाएं विधिक सहायता और महिला अपराधों के त्वरित निस्तारण की ठोस व्यवस्था के आदेश पिछले चरण की उपलब्धियों पर भी हुई चर्चा, 3.44 लाख कार्यक्रम, 2.03 करोड़ महिलाओं की सहभागिता, लाखों को रोजगार विशेष अभियानों (गरुड़, बचपन, मजनू, नशा मुक्ति, रक्षा और ईगल) की सफल कार्रवाई से बदला माहौल, आगे और प्रभावी संचालन के निर्देश सभी विभागों को निर्देश, परंपरा समन्वय से सुनिश्चित करें महिला सुरक्षा, सम्मान व स्वावलम्बन लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी शारदीय नवरात्र से महिला सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलम्बन को समर्पित ‘मिशन शक्ति’ के 05वें चरण के शुभारंभ की घोषणा की है। बुधवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2020 से प्रारम्भ हुआ इस अभियान से प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण की दिशा में आशातीत परिणाम मिले हैं। अब तक इसके चार चरण पूरे हो चुके हैं और आगामी 22 सितम्बर से प्रारम्भ होकर यह पांचवा चरण 30 दिनों तक सतत रूप से संचालित होगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस चरण में विभागीय समन्वय के साथ व्यापक कार्यक्रम चलाए जाएँ। उन्होंने कहा कि पुलिस बल की फुट पेट्रोलिंग को और प्रभावी बनाया जाए। पीआरवी-112 की सभी गाड़ियाँ लगातार सड़कों पर सक्रिय रहें। जोनल एडीजी, आईजी, डीआईजी जैसे वरिष्ठ अधिकारी स्वयं फील्ड में उतरकर आमजन से संवाद करें, पुलिस लाइनों का निरीक्षण करें और गश्त में शामिल हों, ताकि जनता को यह विश्वास हो सके कि सरकार और प्रशासन 24×7 उनकी सुरक्षा के लिए तत्पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन में सुरक्षा का भाव और अपराधी कानून के भय से आतंकित दिखाई देना चाहिए। कानून का दुरुपयोग करने वाला पुरुष हो अथवा महिला, किसी के साथ भी कार्रवाई में भेदभाव नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में 44,177 महिला कार्मिकों के साथ प्रदेश की कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने में महिला पुलिस बल की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने निर्देश दिया कि अभियान के 30 दिनों के भीतर सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों और 14 हजार नगरीय वार्डों में महिला बीट पुलिस अधिकारियों को चरणबद्ध ढंग से भेजा जाए। ग्राम प्रधान, सभासद, आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री आदि के साथ यह महिला पुलिस अधिकारी भ्रमण कर महिलाओं और बालिकाओं से संवाद करें, उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं को समझें तथा उन्हें उनके अधिकारों और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की पूरी जानकारी दें। आपात स्थिति में सहायता कहाँ और कैसे प्राप्त की जा सकती है, इसकी जानकारी भी उन्हें उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि नवरात्र व अन्य पर्व-त्योहारों की अवधि में मंदिरों, धार्मिक स्थलों, मेलों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर महिला पुलिस की विशेष तैनाती सुनिश्चित की जाए। एंटी रोमियो स्क्वाड को और अधिक सक्रिय करते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि शोहदों के विरुद्ध ऐसी कार्रवाई हो जो नजीर बने अपराध करने का साहस न कर सकें। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई में संवेदनशीलता आवश्यक है। यह सुनिश्चित करें कि कार्रवाई जिसके विरुद्ध हो रही वह शोहदा ही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि महिला अपराधों में संलग्न अपराधियों पर इस प्रकार की सख्त कार्यवाही की जाए कि वे दोबारा मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में महिला सुरक्षा से जुड़े संवाद और कॉन्फ्रेंस आयोजित किए जाएँ, जिनमें अस्पतालों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। विद्यालयों और महाविद्यालयों में लघु फिल्मों का प्रदर्शन कर छात्र-छात्राओं को महिला सुरक्षा और लैंगिक समानता के प्रति जागरूक किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जेल में बंद असहाय महिलाओं को विधिक सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों को और प्रभावी बनाया जाए। महिला संबंधी अपराधों के निस्तारण के लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। लक्ष्य तय कर अभियोजन की व्यवस्थित कार्यवाही की जाए, ताकि अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई हो और तेजी से सजा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि महिला हेल्पलाइन 1090 पर आने वाली प्रत्येक कॉल को पूरी गंभीरता से लिया जाए और हर स्थिति में उसका संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित हो। सभी नगर निगमों में पिंक बूथ की स्थापना के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मिशन शक्ति केन्द्रों पर कार्यरत पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिलाया जाए। इस प्रशिक्षण में जेंडर सेंसिटाइजेशन, डिजिटल एविडेंस कलेक्शन, केस मैनेजमेंट और वित्तीय सहायता योजनाओं की जानकारी अनिवार्य रूप से शामिल हो। पिंक बूथों पर 24×7 सहायता उपलब्ध रहे और मिशन शक्ति केन्द्रों को 360 डिग्री मॉडल पर विकसित किया जाए, जहाँ शिकायत पंजीकरण, काउंसलिंग, लीगल एड, फीडबैक और फॉलो-अप जैसी सभी सेवाएँ एक ही छत के नीचे उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान तभी सफल होगा जब हर गाँव, हर वार्ड और हर परिवार तक इसकी पहुँच सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन शक्ति केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने का एक व्यापक सामाजिक अभियान है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस चरण को मिशन मोड में सफल बनाया जाए और प्रदेश की हर बेटी को सुरक्षा एवं सम्मान का भरोसा दिलाया जाए। बैठक में मिशन शक्ति के पिछले चरण की उपलब्धियों पर भी एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। अवगत कराया गया … Read more

आबकारी विभाग लखनऊ द्वारा अवैध विदेशी शराब की बड़ी खेप बरामद की गई

लखनऊ आबकारी आयुक्त महोदय उत्तर प्रदेश व जिलाधिकारी लखनऊ द्वारा दिए गए आदेश के अंतर्गत एवं संयुक्त आबकारी आयुक्त लखनऊ जोन तथा उप आबकारी आयुक्त लखनऊ प्रभार के निर्देशन व जिला आबकारी अधिकारी लखनऊ के नेतृत्व में अवैध रूप से मदिरा की बिक्री के रोकथाम  के दृष्टिगत चलाए जा रहे दैनिक प्रवर्तन अभियान के अंतर्गत दिनांक 16.09.2025 को आबकारी विभाग लखनऊ द्वारा अवैध विदेशी शराब की बड़ी खेप बरामद की गई। आबकारी निरीक्षक विवेक सिंह , राहुल सिंह , शिखर मल्ल तथा अभिषेक सिंह मय स्टाफ द्वारा थाना गोसाईगंज क्षेत्र में चेकिंग के दौरान एक किआ सोनट (KIA SONET) वाहन संख्या PB27L1428 से 473 बोतल गैर प्रांत की अवैध शराब बरामद की गई।   उपरोक्त वाहन को नाका लगाकर किसान पथ पर रोक गया किंतु वाहन चालक मौके से भागने का प्रयास करते हुए गोसाईगंज के ग्रामीण क्षेत्र में घुस गया तब गोसाईगंज पुलिस व सर्विलांस टीम की मदद ली गई और अंदर कासिमपुर ग्राम के पास अभियुक्तों को कार में अवैध गैर प्रांत की मदिरा के साथ पकड़ा गया। पूछताछ में चालक मोहन ने स्वीकार किया कि शराब हरियाणा से बिहार तस्करी हेतु ले जाई जा रही थी। मौके से तीन मोबाइल फोन तथा 2030 रुपये नकद भी बरामद किए गए।   बरामद शराब में रॉयल स्टैग, ब्लेंडर्स प्राइड व अन्य ब्रांड्स शामिल हैं जिन पर “FOR SALE IN HARYANA ONLY" अंकित था। वाहन एवं शराब को कब्जे में लेकर संबंधित धाराओं के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है।   आबकारी विभाग द्वारा अवैध शराब के खिलाफ लगातार सघन चेकिंग व छापेमारी की कार्यवाही की जा रही है ताकि अवैध शराब की तस्करी एवं बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। अभी कुछ दिनों पूर्व ही राजधानी लखनऊ आबकारी टीम ने कृष्णा नगर व छितवापुर क्षेत्र में दो ठिकानों में छापेमारी कर निम्न ब्रांड की शराब हाई ब्रांड की बोतलों में भरकर बेचने वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया तथा डालीगंज क्षेत्र में एक लाइसेंसी कम्पोजिट शॉप में अवैध मिलावटी शराब बिक्री किये जाने पर दुकान के बिक्रेताओं को जेल भेजा गया साथ ही दुकान के लाइसेन्स को निरस्त करने की कार्यवाही की जा रही है एवं एक अन्य कार्यवाही में हजरतगंज क्षेत्र में संचालित टनाटन रेस्टोरेंट में बिना बार लाइसेन्स के अवैध रूप से शराब पिलाये जाने के कारण पांच व्यक्तियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

नोएडा को मिलेगी नई उड़ान: पीएम मोदी 30 अक्टूबर को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का करेंगे उद्घाटन

नई दिल्ली   ग्रेटर नोएडा के यमुना सिटी में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन 30 अक्टूबर को होगा। उद्घाटन के मद्देनजर जमीन पर तैयारियों का खाका खींचा जाना शुरू हो चुका है। कार्यक्रम स्थल से लेकर सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और जनसभा की व्यवस्था तक हर पहलू पर अधिकारियों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एयरपोर्ट उद्घाटन में बतौर चीफ गेस्ट शामिल होंगे। वह एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम स्थल का किया निरीक्षण यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह व एयरपोर्ट के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने संभावित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में उद्घाटन कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उड़ान के लिए तैयार एयरपोर्ट जेवर में बन रहा यह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा एनसीआर का दूसरा और उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। अधिकारियों के मुताबिक निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है और लगभग सभी प्रमुख हिस्से तैयार हो चुके है। अनुमान है कि अक्टूबर तक एयरपोर्ट उड़ानों के संचालन के लिए तैयार हो जाएगा। आमंत्रण भेजा गया प्रदेश सरकार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उद्घाटन समारोह के लिए आमंत्रण भेजा गया है। फुल-स्केल ग्राउंड प्लानिंग अमल में लाई जा रही है। सूत्रों की मानें तो उद्घाटन समारोह को भव्य बनाने के लिए न केवल जिला प्रशासन बल्कि राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न विभाग तालमेल के साथ काम कर रहे है। कार्यक्रम के दौरान आने वाले अतिथियों की सुरक्षा, आगंतुकों की आवाजाही और यातायात प्रबंधन के लिए विशेष प्लान तैयार किया जा रहा है।

मौसम अपडेट: कई जिलों में झमाझम बारिश की संभावना, यलो अलर्ट जारी

जयपुर यूं तो प्रदेश में मानसून लगभग समाप्ति की ओर है लेकिन प्रदेश में कुछ जगहों पर मानसून अब भी एक्टिव है। इसी के चलते प्रदेश के कई जिलों में आज और कल बारिश होने की संभावना है।  20 सितंबर से प्रदेश के सभी इलाकों में मौसम ड्राई रहने के साथ ही साफ होगा। मौसम विभाग ने आज बारां, बूंदी, धौलपुर, झालावाड़, करौली, कोटा और सवाई माधोपुर में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इसके बाद 19 सितंबर को बांसवाड़ा, बारां, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़ और सलूंबर में बारिश का यलो अलर्ट है। यहां बादल छाए रहने के साथ सामान्य दर्जे की बारिश हो सकती है। इसके अतिरिक्त प्रदेश की राजधानी जयपुर, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर जैसे बड़े शहरों में आज और कल ज्यादातर समय धूप निकली रहेगी। हालांकि यहां बादलों की आवाजाही रह सकती है। मौसम एक्सपर्ट्स का मानना है कि दो से तीन दिन के दौरान राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और गुजरात के कई हिस्सों से मानसून की विदाई होने वाली है। बता दें कि प्रदेश में भी जैसलमेर, जोधपुर, नागौर के अलावा राजधानी जयपुर के नजदीकी जिले सीकर और आसपास के इलाकों से मानसून की विदाई हो चुकी है। अब जल्द ही तीन से चार दिन में मानसून पूरे प्रदेश से ही विदाई ले लेगा। अमूमन 17 और 18 सितंबर के आसपास ही प्रदेश से मानसून की विदाई होती है लेकिन इस बार 3 दिन पहले 14 सितंबर से ही मानसून लौटने लगा है। औसत बारिश का रिकॉर्ड भी इस साल टूटा है। यहां करीब 432 मिलीमीटर होती है लेकिन इस बार प्रदेश में करीब 750 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं इन दिनों मौसम में हुए बदलाव से दोपहर के समय तो धूप रहती है लेकिन रात के समय अब ठंडक का एहसास होने लगा है। हल्की गुलाबी सर्दी का असर प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में देखा जा सकता है। प्रदेश के ज्यादातर जिलों में न्यूनतम तापमान 18 से 25 डिग्री और अधिकतम तापमान 30 से 38 डिग्री के बीच रिकॉर्ड किया जा रहा है।

परीक्षण सफल तो जबलपुर में जल्द शुरू होगी सरकारी बस सेवा, होगा बड़ा विस्तार

भोपाल प्रदेश में लोक परिवहन सेवा अगले वर्ष मार्च-अप्रैल तक सबसे पहले इंदौर, इसके बाद उज्जैन और फिर जबलपुर से प्रारंभ होगी। छह माह के भीतर रीवा, सागर ग्वालियर, भोपाल आदि शहरों से सेवा प्रारंभ करने की तैयारी है। शुरू में 50 से 100 किमी दूर तक के लिए बसें चलाई जाएंगी। इसके बाद सुविधा का परीक्षण कर इसमें विस्तार किया जाएगा। कुछ जगह रूट सर्वे का काम पूरा हो गया है और कई जगह चल रहा है। नगरीय निकायों के नियंत्रण में पहले से चल रही बसों को भी संभागीय स्तर पर क्षेत्रीय सहायक कंपनियां बनाकर उसके नियंत्रण में लाया जाएगा। भोपाल शहर में भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) बसों का संचालन कर रही है। इसी तरह से इंदौर व अन्य शहरों में बसें निजी ऑपरेटरों की हैं, पर नियंत्रण स्थानीय प्रशासन का होता है। लोक परिवहन सेवा के प्रबंधन के लिए राज्य स्तर पर एक होल्डिंग कंपनी बनाई जा रही है। इसके नीचे सात संभागीय मुख्यालयों के स्तर पर सहायक कंपनियां बनाई जाएंगी। उज्जैन में रूट सर्व का काम पूरा बस संचालन के लिए उज्जैन में रूट सर्वे का काम लगभग पूरा हो गया है। इंदौर और जबलपुर में श्रेणीवार संचालित बसों की संख्या का अनुमान और रूट सर्वे भी लगभग अंतिम चरण में है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभी निजी बस ऑपरेटरों से अनुबंध कर बसें चलाई जाएंगी। आगे चलकर इलेक्ट्रिक बसें चलाने की प्राथमिकता रहेगी। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने भी इसके निर्देश दिए हैं। सीएम ने इसी महीने की मीटिंग बता दें कि मुख्यमंत्री ने इसी माह लोक परिवहन सेवा की तैयारियों को लेकर बैठक की थी। उन्होंने मार्च के पहले बसें चलाने के लिए कहा है, पर समय सीमा एक-दो माह और आगे जा सकती है। इसमें निगरानी, प्रबंधन और यात्रियों की सुविधा के लिए आईटी प्लेटफॉर्म का अधिकाधिक उपयोग किया जाएगा। बड़े शहरों के बाद सरकार की प्राथमिकता उन स्थानों के बीच बसें चलाने की हैं, जहां यात्रियों की संख्या ज्यादा है।

दिव्यांगता की जल्द पहचान के लिए कदम, स्क्रीनिंग शिविरों में जांचेंगे 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे

15 सितंबर से 14 नवंबर 2025 तक चलाया जा रहा है अभियान भोपाल  प्रदेश के बच्चों में दिव्यांगता की पहचान एवं त्वरित दिव्यांगता प्रमाण-पत्र उपलब्ध करने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जिला स्तरीय स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किये जा रहे हैं। यह शिविर 15 सितंबर से 14 नवंबर 2025 तक आयोजित किए जाएंगे। चिन्हित बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार सुविधाएं और परिचय-पत्र मुहैया कराए जाएंगे। प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने बताया कि मध्यप्रदेश में हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित जुनाईविल जस्टिस कमेटी की अनुशंसा पर 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों में दिव्यांगता की पहचान के लिए शिविर आयोजित किये जा रहे है। शिविरों में जिला मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सूक्ष्म परीक्षण कर प्रमाण-पत्र जारी किए जाएंगे। नव चिन्हित दिव्यांग बच्चों को 30 नवंबर तक यूडीआईडी (UDID) नंबर जारी करने तथा शासन की पेंशन व अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने का लक्ष्य रखा गया है श्रीमती वायंगणकर ने बताया कि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में सभी संबंधित विभाग सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा विभाग, जनजाति कल्याण, लोक स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा, आयुष, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग शिविरों के आयोजन में भूमिका निभाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में 7 से 8 पंचायत का तथा शहरी क्षेत्रों में 5 से 6 वार्डों का एक क्लस्टर बनाकर स्क्रीनिंग शिविर आयोजित होंगे। ग्रामीण क्षेत्र के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तथा शहरी क्षेत्र में आयुक्त नगर निगम को नोडल अधिकारी बनाया गया है।  

एमपी में शाकाहारी-मांसाहारी होटलों की होगी अलग पहचान, सरकार लाई नया प्लान

भोपाल  शाकाहारी व मांसाहारी भोजन परोसने वाले होटलों और उनके मालिकों की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करने मध्य प्रदेश सरकार ऐसी व्यवस्था करवाने की तैयारी कर रही है ताकि बाहर से ही पता चल जाए कि होटल में भोजन शाकाहारी है या मांसाहारी। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) के एक्ट में ऐसा प्रविधान करवाने का प्रयास है कि होटल-रेस्टोरेंट के बाहर लगने वाले बोर्ड में पूर्णतः शाकाहारी के लिए हरा गोल निशान और पूर्णतः मांसाहारी के लिए लाल गोल निशान लगाया जाए। क्या है प्रस्ताव? खाने के पैकेट पर भी इस तरह के निशान लगाए जाते हैं, जिससे कोई भी व्यक्ति आसानी से समझ लेता है। होटल-रेस्टोरेंट में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का भोजन मिलता है तो आधा हरा और आधा लाल निशान रखने का भी प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त होटल चलाने का लाइसेंस लेने वाले का नाम भी बोर्ड पर लिखना अनिवार्य करवाने का सुझाव दिया गया है। मालिक का नाम भी अनिवार्य अब एफएसएसएआइ इसका परीक्षण कर ड्राफ्ट जारी करेगा। इसके बाद एफएसएसएआइ के एक्ट में इसे लेकर संशोधन की उम्मीद है। संशोधन होने पर यह व्यवस्था मध्य प्रदेश ही नहीं, देशभर में लागू करना अनिवार्य हो जाएगी। इसके अतिरिक्त कई बार होटल के बोर्ड से उसके मालिक का पता नहीं चलता। इस तरह का मामला तब चर्चा में आया था जब कावड़ यात्रा के दौरान इसी वर्ष उत्तर प्रदेश में मेरठ के आसपास कुछ होटलों के बाहर लगे बोर्ड में होटलों के नाम हिंदू रीति-रिवाज वाले थे पर उनके मालिक अन्य समुदाय के थे। इसके बाद उप्र सरकार ने दुकान, रेस्टोरेंट पर मालिक का नाम लिखने का आदेश दिया था। सरकार का प्लान प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि सरकार यह प्रयास कर रही है कि खाने के पैकेट की तरह होटलों के बोर्ड में भी हरा और लाल निशान रहे। यह कोशिश भी है कि विभिन्न कंपनियों द्वारा घरों में खाने-पीने की चीजें पहुंचाने वाले भी उसी तरह का भोजन करने वाले हों यानी शाकाहारी खाद्य सामग्री पहुंचाने वाले भी शाकाहारी हों।