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एमपी में ट्रैफिक सुविधा के लिए बड़ा कदम, 4-लेन बायपास 3000 करोड़ में बनेगा

भोपाल  राजधानी भोपाल में पश्चिमी बायपास प्रोजेक्ट के लिए नए सिरे से भू-अर्जन शुरू किया जा रहा है। कलेक्टर ने प्रोजेक्ट के लिए तय 155 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण करने के लिए हुजूर एसडीएम की अध्यक्षता में टीम बनाई है। इसमें तहसीलदार, वार्ड पार्षद, सरपंच- सदस्य समेत संबंधित ग्राम के पटवारी व राजस्व निरीक्षक को शामिल किया है। अगले छह माह में इन्हें भू- अर्जन की प्रक्रिया पूरी करना होगी। 35.60 किमी लंबा पश्चिमी बायपास रतनपुर सड़क स्थित 11 मील जोड़ से रोड का काम शुरू होगा जो फंदा कला तक चार लेन बनेगा। सरकार ने प्रोजेक्ट के लिए करीब 3000 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। यहां की इतनी जमीन लेंगे तब बनेगा बायपास     15.9929 हेक्टेयर जमीन भानपुर केकडिया     14.0685 हेक्टेयर जमीन समसगढ़     10.2719 हेक्टेयर जमीन समसपुरा     2.0694 हेक्टेयर जमीन सरवर     17.8365 हेक्टेयर जमीन झागरिया खुर्द     12.8594 हेक्टेयर जमीन मूंडला     13.5931 हेक्टेयर जमीन नरेला     4.5198 हेक्टेयर जमीन टीलाखेड़ी     8.2897 हेक्टेयर जमीन जाटखेड़ी     7.0626 हेक्टेयर जमीन खोकरिया     4.0910 हेक्टेयर जमीन हताईखेड़ी     7.5226 हेक्टेयर जमीन दूबड़ी     7.4606 हेक्टेयर जमीन पिपलिया धाकड़ 9163 हेक्टेयर जमीन फंदा खुर्द 14.1189 हेक्टेयर जमीन फंदा कलां 155.731 हेक्टेयर कुल अर्जित क्षेत्र है इसलिए जरूरी पूरा बायपास बायपास एक तरह से शहर की सीमा को तय करता है और जिन वाहनों को शहर में नहीं आना होता है वह बायपास से बाहर निकल जाते हैं। छह माह में प्रक्रिया पूरी नए सिरे से भू अर्जन करने हमने टीम तय कर दी है। आगामी छह माह में प्रक्रिया पूरी की जाएगी। बायपास जल्द बने इसके लिए जल्द से जल्द काम पूरा किया जाएगा।-कौशलेंद्र विक्रमसिंह, कलेक्टर

सीएम डॉ. यादव करेंगे गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट का शुभारंभ, लक्ज़री कैंपिंग और हवाई रोमांच का केंद्र बनेगा

लक्ज़री कैंपिंग से हवाई एडवेंचर का मिलेगा रोमांचक अनुभव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार 12 सितम्बर को मंदसौर में गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट के चौथे संस्करण का शुभारंभ करेंगे। यह रिट्रीट लल्लूजी एंड संस द्वारा मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के सहयोग से विकसित किया गया है, जो लक्ज़री कैंपिंग, एडवेंचर टूरिज्म और सांस्कृतिक गतिविधियों का अनूठा संगम है। गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट के दौरान पर्यटक टेंट सिटी में हॉट-एयर बलूनिंग, पैरामोटरिंग, जेट स्कीइंग, कायाकिंग और मोटर बोटिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे। हिंगलाजगढ़ किले की हेरिटेज ट्रेल, गांधीसागर अभयारण्य में वन्यजीव सफारी और ग्रामीण जीवन के अनुभव भी पर्यटकों के आकर्षण का हिस्सा रहेंगे। इस रिट्रीट में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता पर विशेष ध्यान दिया गया है। लगभग 2,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित बटरफ्लाई गार्डन में 4,000 से अधिक पोषक एवं पराग प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। यहां पहले से ही 40 से अधिक तितली प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं। यह केंद्र शिक्षा एवं इंटरप्रिटेशन स्थल के रूप में पर्यटकों को तितलियों के जीवन चक्र की जानकारी प्रदान करेगा। इसके अलावा इस सीज़न में रॉक आर्ट इंटरप्रिटेशन ज़ोन, जो चतुर्भुज नाला की प्राचीन शैलचित्र कला से प्रेरित है, तथा बायोडायवर्सिटी वॉक जैसी गतिविधियां भी शामिल की गई हैं। पर्यटक इस रिट्रीट में गाइडेड बटरफ्लाई गार्डन टूर, नेचर वॉक, बर्ड वॉचिंग, वाटर स्पोर्ट्स (स्पीड बोट, बनाना राइड, जेट स्की, कयाकिंग) और हवाई एडवेंचर (हॉट एयर बैलूनिंग व पैरामोटरिंग) जैसी शानदार गतिविधियों का अनुभव लेकर प्रकृति के और करीब आ सकेंगे।  

राजनीतिक सियासत: लालू ने तेजस्वी की ताकत बढ़ाने के लिए किया सक्रिय प्रयास, कांग्रेस देरी में

पटना राजद की चुनावी रणनीति का निर्धारण और तेजस्वी यादव को संवाद की सीख देकर एक समय निश्चिंत हो चुके लालू प्रसाद की सक्रियता दोबारा बढ़ गई है। स्वास्थ्य इसकी अनुमति नहीं देता, फिर भी वे दौड़-धूप कर रहे। एकमात्र उद्देश्य तेजस्वी को सत्तासीन करना है। लालू मान चुके हैं कि उनके हस्तक्षेप के बिना न सीटों पर समझौता संभव है और ना ही मुख्यमंत्री के चेहरे का निर्धारण। कांग्रेस आज आनाकानी कर रही, तो कल को कन्नी भी काट सकती है। चिंता महागठबंधन में पीछे धकियाने जाने की भी है। सामाजिक समीकरण का विस्तार किए बिना राजद को सत्ता मिलने से रही, जबकि परंपरागत जनाधार (मुसलमान-यादव) पर ही हिस्सेदार खड़े हो गए हैं, इसलिए लालू ने अपनी रणनीति का रुख दोतरफा कर दिया है। आक्रामक बयानों से वे कोर वोटरों को साधने का उपक्रम कर रहे, तो फील्ड में सक्रियता से विरोधियों के साथ महागठबंधन के घटक दलों को हर दांव-पेच से निपटने की चुनौती दे रहे। एनडीए, विशेषकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पर उनके बोल बेहद तीखे होते जा रहे। नीतीश सरकार के 20 वर्षों के शासन को वे "दो पीढ़ियों को बर्बाद करने वाला" करार चुके हैं। एक्स पर लिख चुके हैं, "ऐ मोदी जी, विक्ट्री चाहिए बिहार से और फैक्ट्री दीजिएगा गुजरात में! यह गुजराती फार्मूला बिहार में नहीं चलेगा!" क्षेत्रीय अस्मिता को उभारने वाला यह बयान वस्तुत: जनाधार के विस्तार की आकांक्षा है। लालू सपरिवार गयाजी पहुंच थे। अपने हाथों कोई षट्कर्म नहीं किया, क्योंकि गयाजी में वे पहले ही पिंडदान कर चुके हैं, फिर भी विष्णुपद मंदिर पहुंचे। उनकी यह पहल सीतामढ़ी में जानकी मंदिर पहुंचे राहुल गांधी से उत्प्रेरित मानी जा रही, जो धुव्रीकरण की आशंका को निर्मूल करने के उद्देश्य से रही। मुसलमानों के हिमायती राजद के लिए ध्रुवीकरण की स्थिति कभी लाभप्रद नहीं रहती, इसलिए लालू ने तेजस्वी को इससे बचते हुए ''खैनी में चूना रगड़ देने'' वाले बयान को बारंबार दोहराने की सीख दी। यह बयान वस्तुत: अगड़ों पर आक्षेप और कोर वोटरों को साधने का उपक्रम रहा। बहरहाल, लालू की रणनीति युवा-महिला वोटरों को लुभाने और एनडीए के वोट-बैंक में सेंधमारी के साथ तेजस्वी की छवि को एक प्रगतिशील नेता के रूप में स्थापित करने की है। माई-बहिन मान योजना और शत प्रतिशत डोमिसाइल के वादे के साथ महागठबंधन में नए सहयोगियों (झामुमो और रालोजपा) को जोड़ने से इसका आभास होता है। सारे निर्णय लालू के रहे। हालांकि, परिवार के भीतर मतभेद, महागठबंधन में अंतर्द्वंद्व और कानूनी चुनौतियां उनकी इच्छाओं पर तुषारापात कर रहीं। इसके बावजूद वे तेजस्वी को मुख्यमंत्री का चेहरा बता रहे, क्योंकि इसके लिए अभी कोई दूसरा दमदार आवाज नहीं। पांच फरवरी को नालंदा में लालू ने तेजस्वी को ही महागठबंधन में मुख्यमंत्री का चेहरा बताया था। उसके बाद मोतिहारी में कहा कि "तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनने से कोई माई का लाल नहीं रोक सकता।" इस उद्घाेष के बावजूद कांग्रेस पेच फंसाए है। ऐसे में लालू इत्मीनान से नहीं बैठ सकते। मोतिहारी में वे पूर्व विधायक यमुना यादव के निधन पर शोक जताने गए। पुराने नेताओं के स्वजनों का दु:ख साझा करने के लिए ऐसे ही वैशाली और आरा भी जा चुके हैं। इस स्तर पर लालू की सक्रियता पिछले वर्षों में नहीं रही। हालांकि, उनकी अति-सक्रियता राजद की संभावना के प्रतिकूल भी पड़ जाती है। तब जंगलराज की पुनर्वापसी की आशंका जताते विरोधी कुछ अधिक आक्रामक हो जाते हैं।  

एआई की जांच में सामने आई यूपी मतदाता सूची की त्रुटियां, डुप्लीकेट वोटर्स का सत्यापन तेज

ज्ञानपुर  चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआइआर) के विरोध चल ही रहा है कि यूपी में भी मतदाता सूची में तमाम गड़बड़ियां सामने आने लगी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचस्थानीय मतदाता सूची की आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) से जांच कराई तो प्रदेश के हर जिले में डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम सामने आए। भदोही जिले में 10.93 लाख मतदाताओं में से 2.34 लाख मतदाता ऐसे मिले हैं जिनका मतदाता सूची में एक ही नाम दो स्थानों पर है। इन मतदाताओं का 29 सितंबर तक सत्यापन होना है। इसके लिए 701 बूथ लेबल आफिसर (बीएलओ) गांव-गांव वहां की मतदाता सूची से मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं।   निर्वाचन आयोग ने इस कार्यक्रम को संशोधन, विलोपन और परिवर्धन का नाम दिया है। डुप्लीकेट मतदाता का नाम एक स्थान से कटेगा वहीं नाम में कोई गलती है तो वह संशोधन होगा। जबकि मृतक, शादी शुदा लड़कियों का नाम विलोपन यानि काटा जाएगा। जबकि एक जनवरी 2025 को 18 साल आयु पूर्ण करने वालों का नाम सूची में जोड़ा जाएगा। 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव को निष्पक्ष के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य शुरू कर दिया है। आयोग ने एआइ की जांच में भदोही जिले के दो लाख 34 हजार 333 ऐसे मतदाताओं को पकड़ा है जिनके नाम दो स्थानों पर है। वर्तमान में जिले की 546 ग्राम पंचायतों में 10.93 लाख मतदाता हैं।   सत्यापन के दौरान एआइ की सूची ठीक निकली तो यह नाम कट जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग की सूची के मुताबिक औराई में सबसे अधिक 58452 और अभोली में सबसे कम 18781 डुप्लीकेट मतदाता हैं। जिले की 546 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान का अगले वर्ष चुनाव होना है। इसमें जिला पंचायत के 26 जिला पंचायत सदस्य, छह ब्लाकों के 835 क्षेत्र पंचायत सदस्य और नौ हजार ग्राम पंचायत सदस्य हैं। बोले अध‍िकारी राज्य निर्वाचन आयोग से जिलों को भेजी गई सूची में दो लाख 34 हजार 333 डुप्लीकेट मतदाता मिले हैं। इनका बीएलओ के माध्यम से सत्यापन कराया कराया जा रहा है। सूची गलत मिली तो दो जगह से एक नाम हटाया जाएगा। – डीएस शुक्ल, उप निर्वाचन अधिकारी, पंचस्थानीय।   

दत्तक पुत्र की भांति वृद्धजनों को अडाप्ट करने पर फोकस किया जाए : मंत्री कुशवाह

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिए सुझाव भोपाल  सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह गुरूवार को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित सामाजिक कल्याण एवं सुरक्षा क्षेत्र पर मंत्री समूह की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल हुए। बैठक केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। मंत्री श्री कुशवाह ने ईज ऑफ डुइंग बिजनेस, ईज ऑफ लिविंग को बेहतर बनाने तथा नागरिकों और उद्यमों पर अनुपालन बोझ कम करने के लिए दत्तक पुत्र की भांति वृद्धजनों को अडॉप्ट करने, पैरेंटल केयर लीव लिए जाने तथा सशुल्क वृद्धाश्रमों को पीपीपी मोड पर विकसित करने के सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से समाज कल्याण के क्षेत्र में बेहतर कार्य हो सकेगा। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि वृद्धजनों को समाज की मुख्य धारा में बनाए रखने की जरूरत है, जो वृद्धजन शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हैं, उनको क्षमता के अनुसार रचनात्मक कार्यों से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सभी वृद्धाश्रमों, नशा मुक्ति केंद्र, डीआरसी भिक्षु गृह आदि के संचालन के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिव प्रोसीजर बनाया जाना चाहिए। सभी जरूरतमंदों के लिए एक हेल्पलाइन विकसित किए जाने, ट्रांसजेण्डर व्यक्तियों को 50 वर्ष की आयु के बाद वृद्धजनों का दर्जा दिए जाने तथा केन्द्र में ओबीसी एवं एससी विभाग पृथक पृथक बनाए जाने का सुझाव भी दिया। केंद्रीय मंत्री श्री वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के लिये सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय समाज के वंचित वर्गों के विकास के लिए एक रोड मैप पर कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में सभी प्रदेशों के सामाजिक न्याय विभागों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और न्यूनतम सरकार अधिकतम शासन के अनुरूप संस्थाओं को सुदृढ़ बनाना, केंद्र, राज्य, नगर निगम सुधारों की पहचान करना और मौजूदा कानून में आवश्यक संशोधन पर भी विचार किया जा रहा है। इसी कड़ी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुझाव आमंत्रित किए गये है।

कलेक्टर्स व्यवस्थित ढंग से करायें खाद का वितरण : कृषि मंत्री कंषाना

प्रदेश में गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष खाद की अधिक उपलब्धता भोपाल  किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि प्रदेश के सभी जिलों में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने सभी जिला कलेक्टर्स को अपने जिले में खाद का वितरण व्यवस्थित ढंग से कराने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक खाद उपलब्ध होगी। प्रदेश में गत वर्ष 01 अप्रैल से 9 सितम्बर 2024 तक 15.83 लाख मीट्रिक टन यूरिया का विक्रय हुआ था जिसके विरुद्ध इस वर्ष 9 सितंबर 2025 तक 18.34 लाख मीट्रिक टन की कुल उपलब्धता थी, जिसमें से 16.19 लाख मीट्रिक टन का विक्रय किया जा चुका है। प्रदेश में 2.15 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। प्रदेश में गत वर्ष 01 अप्रैल से 9 सितम्बर 2024 तक 9.39 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. का विक्रय हुआ था जिसके विरुद्ध इस वर्ष 9 सितंबर तक 13.96 लाख मीट्रिक टन की कुल उपलब्धता थी, जिसमें से 9.71 लाख मीट्रिक टन का विक्रय किया जा चुका है एवं 4.25 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी. + एन.पी.के. प्रदेश में उपलब्ध है। प्रदेश के लिए प्रतिदिन लगभग 7 से 8 रैक विभिन्न जिलों के लिए आ रही हैं।  

मुख्यमंत्री ने जिले में खराब हुई सोयाबीन की फसल का सर्वे कराने के दिये निर्देश

भोपाल  प्रदेश सरकार किसानों के साथ है और हम किसानों को किसी तरह का नुकसान नहीं होने देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को शाजापुर जिले की पोलायकलां तहसील के ग्राम खड़ी में विभिन्न कारणों से खराब हुई सोयाबीन की फसल के अवलोकन के बाद किसानों को यह भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शाजापुर कलेक्टर सहित प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को खराब हुई सोयाबीन की फसल का सर्वे कराने के निर्देश दिये। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, विधायक श्री घनश्याम चन्द्रवंशी, श्री अरूण भीमावद, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री हेमराज सिंह सिसोदिया एवं डॉ. रवि पाण्डेय भी इस अवसर पर मौजूद थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान चौपाल में कहा कि बारिश कम होने एवं कीट प्रकोप के कारण जहां-जहां भी सोयाबीन की फसल को नुकसान हुआ है, उसका पूरा सर्वे कराया जायेगा, किसानों को नुकसान नहीं होने देंगे। किसानों को अधिकतम लाभ दिया जायेगा। किसानों की जिंदगी बेहतर हो, इसके लिए केन्द्र एवं राज्य की सरकार लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने कलेक्टर शाजापुर को निर्देश दिये कि जिन किसानों को पिछले वर्षों की बीमा राशि प्राप्त नहीं हुई है, उनके प्रकरणों का निराकरण कराएं। आने वाले समय में शाजापुर जिले के किसानों को नर्मदा-पार्वती-चंबल-कालीसिंध लिंक परियोजना से पानी उपलब्ध कराया जायेगा। इससे गरीब किसानों के जीवन में बदलाव आएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देशी गाय पालन को प्रोत्साहन देने के लिए शुरू की गई कामधेनु योजना के बारे में बताते हुए कहा कि इस योजना में किसानों से गाय का दूध क्रय किया जायेगा। उन्होंने 25 गाय के पालन पर लगने वाली राशि 40 लाख पर सरकार द्वारा 10 लाख रूपये का अनुदान भी दिया जायेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में गायों के लिए गौशालाएं भी बनाई जायेगी। गौशालाओं को गायों के रखरखाव के लिए 40 रूपये प्रति गाय की दर से अनुदान दिया जायेगा। पांच हजार से अधिक पशु रखकर गौशाला संचालित करने पर भूमि भी उपलब्ध कराई जायेगी। इसी तरह क्षेत्र में विचरण कर रहे वन्यप्राणियों हिरण, नील गाय आदि के समुचित व्यवस्थापन के निर्देश भी वन विभाग को दिये। उन्होंने कहा कि किसान बिना किसी चिंता के अपनी फसलों का उत्पादन प्राप्त करें और खुशहाल बनें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “एक बगिया माँ के नाम” योजना के बारे में बताया और कहा कि किसानों को एक एकड़ जमीन में फलोद्यान लगाने पर प्रथम वर्ष 2 लाख रूपये तथा इसके अगले वर्ष 55 हजार रूपये इस प्रकार 3 वर्ष तक अनुदान दिया जायेगा। कपास उत्पादन को प्रदेश सरकार प्रोत्साहित करेगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कपास उत्पादन को प्रोत्साहित किया जायेगा। इसके लिए धार जिले के बदनावर में “पीएम मित्रा” औद्योगिक पार्क विकसित करने जा रहे हैं, जिसका 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शिलान्यास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि धार जिले सहित मालवा निमाड़ अंचल के कपास उत्पादक किसानों के जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन लाने का माध्यम बनेगा। किसान से नुकसान की जानकारी ली मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्राम खड़ी के किसान श्री परवत सिंह बगाना के निवास पर जाकर उनसे सोयाबीन की खराब हुई फसल से हुए नुकसान की जानकारी ली।

कर्तव्य और कृतज्ञता पर योगी का विचार, कहा- यह सनातन धर्म का पहला संस्कार है

गोरखपुर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव प्रकट करना सनातन धर्म का पहला संस्कार है। भारतीय मनीषा के ज्ञान दर्शन में इस बात को प्रतिष्ठित किया गया है कि जीवन में हमारे, समाज और राष्ट्र के प्रति जिस किसी ने योगदान दिया हो, उसके प्रति कृतज्ञता का भाव होना ही चाहिए। मुख्यमंत्री योगी युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतिम दिन गुरुवार को महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने रामायणकाल में हनुमानजी और मैनाक पर्वत के बीच हुए संवाद के मुख्य उद्धरण ‘कृते च कर्तव्यम एषः धर्म सनातनः’ को समझाते हुए कहा कि यह भाव सनातन से ही मिलता है। सनातन की परंपरा में पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करने के लिए आश्विन माह का पूरा कृष्ण पक्ष ही समर्पित किया गया है। गोरक्षपीठ में ब्रह्मलीन पूज्य महंतद्वय की पुण्य स्मृति में साप्ताहिक आयोजन भी कृतज्ञता ज्ञापन का ही आयाम है। मुख्यमंत्री योगी ने अपने दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ का स्मरण करते हुए कहा कि महंतद्वय समाज, राष्ट्र और लोक जीवन से जुड़े हर मुद्दे पर सनातन धर्म और भारत के हितों के प्रति प्रतिबद्ध रहे। महंत दिग्विजयनाथ जी ने सनातन धर्म, शिक्षा, सेवा और राष्ट्रीयता के जिन मूल्यों और आदर्शों को स्थापित किया, उन्हें महंत अवेद्यनाथ जी ने आत्मसात कर आगे बढ़ाया। इन मूल्यों और आदर्शों के लिए, देश और धर्म के लिए महंतद्वय आजीवन समर्पित रहे। दोनों ने सदैव देश और धर्म को प्राथमिकता दी। गोरक्षपीठ आज भी उनके बताए मार्ग का अनुसरण कर रहा है। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सभ्य समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला माना। महंत दिग्विजयनाथ जी ने इसी ध्येय से देश की गुलामी के कालखंड में ही 1932 में महाराणा प्रताप जैसे वीर योद्धा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की थी। 1932 में पहली संस्था खुली और फिर यह श्रृंखला बढ़ती गई। गोरखपुर में जब पहले विश्वविद्यालय की स्थापना की बात आई तो उन्होंने महाराणा प्रताप महाविद्यालय और महाराणा प्रताप महिला विद्यालय दान में देकर विश्वविद्यालय की स्थापना का शुभारंभ कराया। यह कार्य श्रेय के लिए नहीं था। उन्होंने महिला शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, आयुष शिक्षा सहित शिक्षा के हरेक क्षेत्र को आगे बढ़ाया। उनके बाद महंत अवेद्यनाथ जी ने भी इस सिलसिले को जारी रखा। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण में गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय के अविस्मरणीय योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर निर्माण के यज्ञ का शुभारंभ महंत दिग्विजयनाथ जी ने किया था। उनके बाद 1983 से लेकर जीवनपर्यंत महंत अवेद्यनाथ मंदिर निर्माण के लिए संघर्षरत रहे। ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ समाज को तोड़ने वाली ताकतों से चिंतित रहे। उन्होंने आजीवन सामाजिक समरसता को आगे बढ़ाया।  

भारत और मॉरीशस ने लिया बड़ा आर्थिक कदम, काशी में हुई समझौता से डॉलर की पकड़ कमजोर

वाराणसी मॉरीशस के साथ भारत की काशी में द्वि‍पक्षीय बैठक में एक अहम फैसला स्‍थानीय मुद्रा में कारोबार रहा है। इस फैसले के बाद अब वैश्‍व‍ि‍क कारोबार में आपसी मुद्रा में ही लेन देन शुरू होगा। इसकी वजह से अब दोनों देशों के कारोबार में डालर का वर्चस्‍व टूट गया है।  बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में भारत-मारीशस के बीच द्विपक्षीय वार्ता ने देश- दुनिया को कई बड़े संदेश दिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत-मारीशस के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि भारत और मारीशस सिर्फ भागीदार नहीं, बल्कि एक परिवार हैं। पिछले साल मारीशस में यूपीआइ और रुपे कार्ड लांच किए गए थे। अब हम लोकल करेंसी में व्यापार को सक्षम करने की दिशा में काम करेंगे।   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी होटल ताज में गुरुवार को भारत-मारीशस के बीच द्विपक्षीय वार्ता को संबोधित कर रहे थे। कहा कि ये मेरे लिए गर्व का विषय है कि मुझे अपने संसदीय क्षेत्र में आपका स्वागत करने का अवसर मिल रहा है। चिर काल से काशी भारत की सभ्यता और सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक रही है। इसके अलावा दोनों देशों में कारोबार के साथ ही रुपे कार्ड ही नहीं बल्‍क‍ि यूपीआई का भी प्रयोग शुरू हो चुका है। इसकी वजह से दोनों देशों के बीच डालर में कारोबार का वर्चस्‍व अब टूट चुका है।    हमारी संस्कृति और संस्कार, सदियों पहले भारत से मारीशस पहुंचे और वहां की जीवन-धारा में रच-बस गए। काशी में मां गंगा के अविरल प्रवाह की तरह भारतीय संस्कृति का सतत प्रवाह मारीशस को समृद्ध करता रहा है। यह केवल औपचारिक नहीं बल्कि एक आत्मिक मिलन है। मार्च में मुझे मारीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल होने का सौभाग्य मिला था।मारीशस भारत की पड़ोसी प्रथम नीति और विजन महासागर का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। मार्च में मुझे मारीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल होने का सौभाग्य मिला। उस समय हमने अपने संबंधों को उन्नत रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया।   वोस्ट्रो अकाउंट खोलने से म‍िलेगी सुव‍िधा दो देशों के बीच आपसी मुद्रा में लेन देन के ल‍िए भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये में वोस्ट्रो अकाउंट खोलने से जुड़े नियमों में भी इसी वर्ष बदलाव किया है। इस कड़ी में बैंकों को अब बिना क‍िसी पूर्व अनुमति के विदेशी बैंकों के लिए विशेष रुपये का वोस्ट्रो अकाउंट खोलने की अनुमति म‍िल चुकी है। वोस्ट्रो अकाउंट एक घरेलू बैंक द्वारा विदेशी बैंक के लिए खोला गया खाता होता है। यह खाता घरेलू बैंक की मुद्रा में ही शाम‍िल होता है। रिजर्व बैंक की पूर्वानुमति से विदेशी बैंकों के विशेष रुपया वोस्ट्रो अकाउंट खोलने की अनुमति देने के बाद दोनों देशों के स्‍थानीय मुद्रा में लेन देन सहज हो सकेगा। वोस्ट्रो अकाउंट खोलने के लिए आरबीआई की मंजूरी लेने की आवश्यकता को खत्म करने का फैसला लेने के साथ ही डालर का वर्चस्‍व टूटना शुरू हो चुका है। विदेशी बैंकों में विशेष रुपया वोस्ट्रो अकाउंट खोल सकने की प्रक्र‍िया में अब काफी तेजी आएगी। दरअसल वोस्ट्रो अकाउंट एक प्रकार का बैंक खाता है जो एक घरेलू बैंक किसी विदेशी बैंक की ओर से, लोकल करेंसी में कारोबार अथवा लेन देन की अनुमत‍ि रखता है। एक विदेशी बैंक फंड के लिए मध्यस्थ के रूप में काम करता है।  

मॉरीशस दौरे में पीएम मोदी ने परोसा स्वादिष्ट बनारसी भोजन, विदेशियों ने की तारीफ

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा मॉरीशस के प्रधानमंत्री के सम्‍मान में ताज होटल में द‍िए गए मध्याह्न भोज में व‍िदेशी म‍ित्रों के स्‍वाद का जहां ध्‍यान रखा गया वहीं बनारसी जायके की सुवास भी टेबल पर ब‍िखरी और सुस्‍वादु बनारसी जायका भी विदेशी मेहमानों ने खूब पसंद क‍िया। दरअसल गुरुवार को भारत के प्रधानमंत्री और काशी के सांसद नरेन्‍द्र मोदी मेजबान की भूम‍िका में नजर आए। उनके द्वारा डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम और श्रीमती वीणा राम गुलाम के सम्मान में मध्याह्न भोज में जो मीनू परोसा गया वह खांटी भारतीय और बनारसी जायके से भरपूर था।    भुने भुट्टे और पुदीना का रस से बने पुदीना और भारतीय मसाले से युक्त भुने हुए मक्के का पतला सूप मीनू में पहले नंबर पर था। वहीं टिक्की टमाटर चाट में स्थानीय व्यंजन मसालेदार टमाटर मैश के ऊपर भुनी हुई कुरकुरी आलू पैटी, रागी दही बड़ा में मीठे मसाले वाली दही की चटनी में भिगोई हुई रागी थी। वहीं पनीर लौंग लता में स्थानीय व्यंजन के क्रम में मखमली टमाटर अखरोट से तैयार ग्रेवी में पका हुआ भरवा पनीर था। बनारसी कढ़ी पकौड़ी में छाछ से तैयार ग्रेवी में पक्के अजवाइन और बेसन के तले हुए पकौड़े थे। आलू कुटी मिर्च में दरदरे भरे कश्मीरी मिर्च से सजे जीरे के तड़के वाली मसालेदार सूखी आलू की सब्जी भी थी। तुवर दाल में तड़का में जीरा टमाटर और भारतीय मसाले से युक्त पीली दाल भी शाम‍िल थी। सब्जी दम बिरयानी में दम शैली में पकाई गई सुगंधित सब्जियों के साथ केसर उत्तर लंबे दाने वाले बासमती चावल भी थे। इसके अलावा मिश्रित भारतीय रोटियां भी मीनू में शाम‍िल थीं। इसके अलावा लाल पेड़ा भी था जो धीरे-धीरे पकाए गए दूध से बनी सूखी मिठाई है। स्थानीय व्यंजन में जलेबी- रबड़ी गाढ़े दूध के साथ परोसे गए केसर चीनी सिरप में भिगोए हुए खमीर युक्त आटे के कुरकुरे स्पाइरल भी थे। इसके अलावा आखि‍र में बनारसी पान के पत्‍ते में लपेटा हुआ गुलाब गुलकंद, सौंफ और कटे हुए खजूर के अलावा चाय- कॉफी के साथ कश्‍मीरी कहवा का भी जायका रखा गया था। व‍िदेशी मेहमान बनारसी जायके को जहां खूब पसंद क‍िए वहीं पीएम ने भी बनारसी जायके का आनंद ल‍िया।