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संघर्ष, उम्मीद और न्यायपालिका पर भरोसा—हर मुक़दमे की अपनी कहानी: CJI रमेश सिन्हा

रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा बस्तर संभाग के न्यायिक अधिकारियों के लिए एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन प्रेरणा हॉल, कलेक्टरेट भवन, जगदलपुर में किया गया। इस सेमिनार में बस्तर संभाग के चार जिलों जगदलपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव के 43 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा एवं मुख्य संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी ने वर्चुअल माध्यम से सत्र का उद्घाटन किया। सेमिनार में श्री अमितेंद्र किशोर प्रसाद, न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, पोर्टफोलियो न्यायाधीश, जिला कांकेर की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य न्यायाधीश ने बस्तर संभाग के न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में न्यायपालिका से अपेक्षाएँ बहुत अधिक हैं। लोग हमसे अत्यधिक आशा रखते हैं। यह सेमिनार केवल सीखने का मंच ही नहीं, बल्कि न्याय, निष्पक्षता और विधि के शासन के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि भी है। मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायिक शिक्षा एक बार की प्रक्रिया नहीं है; बल्कि यह सतत प्रक्रिया है। आज के दौर में जहाँ कानून तेजी से विकसित हो रहे हैं और समाज नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, वहाँ न्याय के संरक्षक होने के नाते हमें निरंतर अपने ज्ञान को समृद्ध करना और अपनी न्यायिक क्षमता को धार देना अनिवार्य है। सतत प्रशिक्षण सुनिश्चित करता है कि हम अपने संवैधानिक दायित्वों को दक्षता, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभा सकें। मुख्य न्यायाधीश ने आगे यह भी कहा कि बस्तर क्षेत्र अपने विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक परिदृश्य के साथ न्यायपालिका के लिए चुनौतियाँ और अवसर दोनों प्रस्तुत करता है। हमारा दायित्व है कि न्याय समाज के हर कोने तक पहुँचे, विशेष रूप से वंचित और कमजोर वर्गों तक। यहाँ के न्यायिक अधिकारियों की भूमिका जनता के विश्वास को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है कि न्याय न केवल किया जाए, बल्कि होता हुआ भी दिखाई दे। मुख्य न्यायाधीश ने सभी न्यायिक अधिकारियों से आग्रह किया कि वे सहानुभूति, धैर्य और निष्पक्षता के साथ न्यायिक कार्य करें। याद रखें, प्रत्येक मामले के पीछे एक मानवीय कहानी होती है संघर्ष, आशा और न्यायपालिका में विश्वास की। हमें सदैव यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि न्याय समय पर, पारदर्शी और तर्कपूर्ण तरीके से दिया जाए। अंत में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस प्रकार के सेमिनार समकालीन विधिक मुद्दों पर विचार-विमर्श, अनुभवों के आदान-प्रदान और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाने का मूल्यवान अवसर प्रदान करते हैं। इस सेमिनार में हुई चर्चाएँ न्यायिक अधिकारियों की दक्षता को बढ़ाएँगी और उन्हें न्यायिक कार्य की जटिलताओं को और अधिक कुशलता से संभालने योग्य बनाएँगी। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के प्रभारी रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे। कांकेर, कोंडागांव, जगदलपुर एवं दंतेवाड़ा के जिलों के न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे। स्वागत भाषण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जगदलपुर द्वारा दिया गया, परिचयात्मक उद्बोधन छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक ने तथा धन्यवाद ज्ञापन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जगदलपुर द्वारा किया गया। सेमिनार में बस्तर संभाग के कुल 43 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों द्वारा परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के मामलों की कार्यवाही का अवलोकन तथा इनके निपटारे हेतु नवीन उपकरण और तकनीकें, मध्यस्थता में रेफरल जज की भूमिका, डिक्री का क्रियान्वयन गिरफ्तारी एवं सिविल कारागृह में निरुद्धि तथा संपत्ति की कुर्की द्वारा समयबद्ध और प्रभावी प्रवर्तन हेतु रणनीतियाँ, सलाखों के पीछे या स्वतंत्र रिमांड और जमानत के प्रावधानों का गहन विश्लेषण, माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के नवीनतम निर्णयों के विशेष संदर्भ के संबंध में प्रस्तुतिकरण दिए गए।

संघर्ष से सफलता तक: मुस्कान सोनी ने पाई MPPSC में बड़ी कामयाबी, बनीं राज्य पुलिस सेवा की अधिकारी

भोपाल   भोपाल के संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) निवासी मुस्कान सोनी ने साबित कर दिया है कि संकल्प को परिवार का प्रोत्साहन मिले तो सफलता मिलकर रहती है। पिता मोटर मैकेनिक थे तो बेटी ने इंजीनियरिंग की राह चुनी। इंजीनियर बनी तो समझ में आया कि उसे कुछ ऐसा करना है जिसका असर समाज पर भी पड़े। उसने राज्य सेवा परीक्षा की राह चुनी। अब मुस्कान का चयन उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) पद पर हुआ है। मुस्कान ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा में 23 वां स्थान हासिल किया है। हासिल किया 10वां स्थान राज्य पुलिस सेवा की रैंकिंग में उसका स्थान 10वां है। कस्बे के एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार की मुस्कान शुरू से ही मेधावी रही है। मुस्कान के पिता मोहन सोनी मैकेनिक हैं। मां ज्योति सोनी गृहिणी है। मध्यम वर्गीय परिवार के बावजूद माता, पिता ने मुस्कान की प्रतिभा को हमेशा प्रोत्साहित किया। उसकी प्रारंभिक शिक्षा साधु वासवानी स्कूल में हुई। वहां उसने 12वीं की प्रावीण्य सूची में अपना नाम दर्ज कराया था। बाद में उसने एमएसीटी से इंजीनियरिंग की। कुछ समय गुजरात की एक कंपनी में टीसीजी इंजीनियर के रूप में काम किया लेकिन उसकी इच्छा लोक सेवा की थी। उसने राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा की राह चुनी। इस साल उसकी मेहनत सफल रही और उसे मुकाम मिल गया। मुस्कान के डीएसपी बनने की खबर से मां ज्योति, पिता मोहन सोनी, बहन महक, राधिका एवं भाई कमलेश सोनी बहुत खुश हैं। उनके परिवार का वह सपना पूरा हुआ है जो कभी मुस्कान की आंखों में उतरा था। 12 से 14 घंटे पढ़ाई, मोबाइल से दूरी मुस्कान सोनी ने कहा कि लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ा जाए तो सफलता निश्चित है। मैंने 12 से 14 घंटे पढ़ाई की। मोबाइल से सुरक्षित दूरी रखी। पहले मुझे इंजीनियर बनने की इच्छा थी वह पूरी हुई लेकिन मन में सिविल सेवा में बड़ा पद पाने की ठान ली थी। अब यह इच्छा पूरी हो गई।  

दिल्ली यूनिवर्सिटी चुनाव: ABVP ने हरियाणा के वोटरों पर कसा फोकस, धनखड़ को उतारकर बनाई बड़ी रणनीति

बहादुरगढ़  दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में बीजेपी की छात्र इकाई ABVP की जीत सुनिश्चित करने के लिए 35 हजार हरियाणवी वोटरों पर खास फोकस किया जा रहा है। इसी रणनीति के तहत हरियाणा बीजेपी के दिग्गज नेताओं को प्रचार की कमान सौंपी गई है। 14 सितंबर की रात रामजस कॉलेज में ‘कुणबा’ नाम से कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें ABVP प्रत्याशियों के समर्थन में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश धनखड़, हरियाणा के खेल राज्यमंत्री गौरव गौतम और कबड्डी प्लेयर व भाजपा नेता दीपक हुड्डा पहुंचे। प्रचार के दौरान ओपी धनखड़ ने कहा कि ABVP छात्रों में राष्ट्रभक्ति और व्यक्तित्व विकास पर जोर देती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कभी दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ की अध्यक्ष रह चुकीं हरियाणा की बेटी रेखा गुप्ता आज दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं, इससे बढ़कर व्यक्तित्व विकास का और क्या उदाहरण हो सकता है। कई राज्यों के मुख्यमंत्री ABVP से रहे ABVP देश का वह छात्र संगठन है, जिसने कई राज्यों को मुख्यमंत्री दिए हैं। केंद्र और राज्यों में कई मंत्री भी ABVP से निकले हैं। राष्ट्रप्रेम का उदाहरण देते हुए नेताओं ने कहा कि जब वे ABVP में थे तो जेपी नड्डा के साथ लाल चौक पर झंडा फहराने गए थे। उस समय पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। लेकिन आज नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने धारा 370 को खत्म कर दिया है और अब कश्मीर के लाल चौक पर शान से तिरंगा लहरा रहा है। हरियाणा से हैं अध्यक्ष व उपाध्यक्ष प्रत्याशी दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) में BJP की छात्र इकाई, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने प्रेजिडेंट के लिए हरियाणा के बहादुरगढ़ के आर्यन मान और उपाध्यक्ष पद के लिए सोहना से विधायक तेजपाल तंवर के पौत्र गोविंद तंवर को प्रत्याशी बनाया गया है। हरियाणा के छात्रों की संख्या को देखते हुए ही ABVP ने ऐसा फैसला किया है। प्रेजिडेंट पद के प्रत्याशी आर्यन मान के दादा स्व. श्रीचंद मान लोवा सत्रह खाप के कई साल तक प्रधान रहे। बॉर्डर जिलों से ज्यादा स्टूडेंट DUSU चुनाव में कुल वोटरों की बात करें तो इनकी संख्या सवा लाख से डेढ़ लाख के बीच रहती है। इनमें से 30 से 35 हजार वोटर अकेले हरियाणा के हैं। यहां पढ़ने वाले नौजवानों में सबसे ज्यादा स्टूडेंट बॉर्डर जिलों गुरुग्राम, फरीदाबाद, झज्जर, रोहतक, सोनीपत और महेंद्रगढ़ जिले के हैं। DUSU में 3 बार प्रेजिडेंट रह चुके हरियाणवी दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) में अब तक हरियाणा से जुड़े तीन नेता अध्यक्ष रह चुके हैं। 2011 में बहादुरगढ़ के अजय छिक्कारा NSUI के उम्मीदवार के रूप में प्रेजिडेंट बने। इसके बाद 2012 में रोहतक के आसन गांव के अरुण हुड्डा ने यह पद संभाला। अरुण, कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी माने जाते थे। 2019 में सोनीपत के अक्षित दहिया ABVP के प्रत्याशी के तौर पर DUSU अध्यक्ष बने। पिछले साल NSUI के रौनक खत्री ने जीत दर्ज की थी। इस बार ABVP ने मुकाबले के लिए हरियाणा से आने वाले आर्यन पर दांव लगाया है। 18 को वोटिंग, अगले दिन काउंटिंग आर्यन मान ने हंसराज कॉलेज से ग्रेजुएशन की है और फिलहाल दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) से लाइब्रेरी साइंस से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे हैं। डूसू चुनाव 18 सितंबर को होंगे और गिनती 19 सितंबर को होगी।

रांची में तेज बारिश और बिजली गिरने से हादसा, 2 की मौत

रांची झारखंड के रांची जिले के बुढ़मू प्रखंड क्षेत्र के हेसलपीरी गांव में रविवार शाम वज्रपात से दो लोगों की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे से गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मिली जानकारी के अनुसार, मृतकों की पहचान 52 वर्षीय बालगोविंद महतो, पिता समल महतो और 60 वर्षीय उदयनाथ महतो, पिता रामलाल महतो के रूप में हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, दोनों शाम लगभग 5 बजे मवेशी चराकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान मौसम अचानक बिगड़ा और तेज बारिश के बीच आसमान से गिरी बिजली की चपेट में आकर दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।         ग्रामीणों ने कहा कि वज्रपात की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल है। उन्होंने प्रशासन से मृतकों के परिजनों को त्वरित मुआवजा और सहयोग दिलाने की मांग की है। इधर, हादसे के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।

कलेक्टर का नंबर हैक! शहडोल में अफसरों को मिले फर्जी मैसेज, साइबर टीम एक्टिव

शहडोल  शहडोल जिले के कलेक्टर डॉ. केदार सिंह का आधिकारिक वॉट्सएप मोबाइल नंबर हैक हो गया है। सोमवार को इस नंबर से जिले के कई अधिकारियों व लोगों को संदिग्ध मै मैसेज भी भेजे गए हैं। जानकारी लगते ही कलेक्टर ने पुलिस अधिक्षक रामजी श्रीवास्वत को शिकायत की और जनसंपर्क विभाग के माध्यम से यह सूचना भी प्रसारित कराई गई कि कलेक्टर का नंबर हैक को गया है। सभी अधिकारी-कर्मचारी एवं नागरिक इस नंबर से आने वाले मैसेज का जबाव न दें। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि साइबर एक्सपर्ट को अलर्ट कर दिया है। टीम हैकिंग के तरीके और हैकर के लोकेशन की तकनीकी जांच कर रही है। पुलिस अधीक्षक ने भी सचेत किया है कि कलेक्टर के नंबर से कोई लिंक, मैसेज या कॉल आए तो उस पर भरोसा न करें। किसी को भी अपनी निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। प्रशासन का कहना है कि जब तक नंबर पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब कोई भी व्यक्ति उस पर जवाब न दें। शहडोल जिले में यह पहला ऐसा साइबर मामल है, जिसकी साइबर टीम गंभीरता से जांच कर रही है। कलेक्टर डॉ. केदार सिंह भी अधिकारी-कर्मचारियों एवं जिले के नागरिकों से कहा है कि जब तक पूरी जांच नहीं हो जाती है, किसी भी मैसेज का जबाव न दें।  

25 सितंबर से शुरू होंगे आवेदन, लाडो लक्ष्मी पोर्टल का ट्रायल आज से; CM की घोषणा के बाद बढ़ी हलचल

हिसार  हरियाणा सरकार 25 सितंबर से दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा है कि जल्द ही आवेदन के लिए पोर्टल खोला जाएगा। इसके लिए जिलों में आज से ट्रायल भी शुरू हो चुका है। हालांकि, योजना की पात्रता संबंधी सभी शर्तें अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई हैं। इस योजना के लिए समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों को फॉर्म भरने की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। ट्रायल के दौरान आने वाली किसी भी समस्या के समाधान के लिए वे तुरंत उच्च अधिकारियों से संपर्क करेंगे। हरियाणा में 15 साल की रिहाइश प्रमाण पत्र सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। इसी कारण डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनवाने के लिए भारी भीड़ लग रही है, खासकर उन परिवारों में जहां बहुएं दूसरे राज्यों से हैं और जिनकी शादी को 15 साल पूरे नहीं हुए हैं। ऐसे में पति डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनवा रहे हैं। कॉमन सर्विस सेंटरों (CSC) पर इसके लिए बड़े विज्ञापन लगाए गए हैं।   हरियाणा सरकार दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना को शुरू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री नायब सैनी की ओर से घोषित इस योजना के तहत 18 से 20 लाख महिलाओं को हर महीने ₹2100 दिए जाएंगे। योजना का आवेदन पोर्टल 25 सितंबर से खुलने की उम्मीद है और इसके लिए आज से जिलों में ट्रायल भी शुरू हो गया है। हालांकि, योजना की पात्रता से जुड़ी कुछ शर्तें लाभार्थियों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही हैं, जिससे कई परिवारों में असमंजस की स्थिति है। विशेषकर 'डोमिसाइल' की शर्त ने उन परिवारों को सबसे ज्यादा परेशान किया है, जिनकी बहुएं दूसरे राज्यों से हैं। आइए, इस योजना के हर पहलू को गहराई से समझते हैं। योजना की शर्तें मुख्यमंत्री ने भले ही 18 से 20 लाख महिलाओं को लाभ देने की बात कही हो, लेकिन इस योजना की कुछ शर्तें लाभार्थियों की संख्या को सीमित कर रही हैं। यहां उन तीन मुख्य शर्तों पर गौर करते हैं जिन्होंने इस योजना को जटिल बना दिया है। 1. उम्र की सीमा : हरियाणा में योजना का लाभ 23 से 60 वर्ष की महिलाओं को मिलेगा, जबकि देश के अन्य राज्यों जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में ऐसी योजनाओं के लिए न्यूनतम उम्र 18 से 21 वर्ष है। हरियाणा की यह शर्त कई युवा महिलाओं को दायरे से बाहर कर देती है। 2. आय की टफ शर्त : योजना का लाभ केवल उन महिलाओं को मिलेगा जिनकी पारिवारिक आय ₹1 लाख वार्षिक से कम है। यह शर्त महाराष्ट्र (₹2.5 लाख) और मध्य प्रदेश (₹2.5 लाख) जैसे राज्यों की तुलना में काफी सख्त है। अगर हरियाणा सरकार बीपीएल परिवारों को ही लाभ देती, तो लाभार्थियों की संख्या लगभग 42 लाख होती, लेकिन आय की सीमा ने इस संख्या को घटाकर 19-20 लाख तक सीमित कर दिया है। 3. डोमिसाइल की शर्त सबसे भारी : यह शर्त इस योजना की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। आवेदन करने वाली अविवाहित महिला को खुद हरियाणा का स्थायी निवासी होना चाहिए, जबकि विवाहित महिला के लिए उसके पति का पिछले 15 साल से हरियाणा का मूल निवासी होना अनिवार्य है। यह नियम उन लाखों परिवारों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है जिनकी बहुएं पड़ोसी राज्यों से आई हैं और जिनकी शादी को अभी 15 साल पूरे नहीं हुए हैं। यह शर्त उन सामाजिक संबंधों को भी प्रभावित कर रही है जो हरियाणा की सीमा से सटे राज्यों जैसे पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के साथ दशकों से चले आ रहे हैं। पति बनवा रहे हैं सर्टिफिकेट डोमिसाइल इस डोमिसाइल की शर्त को पूरा करने के लिए उन परिवारों में होड़ मची हुई है, जिनकी बहुएं दूसरे राज्यों की हैं। चूंकि बहुओं की शादी को अभी 15 साल नहीं हुए हैं, इसलिए उनके पति अपने 'डोमिसाइल सर्टिफिकेट' बनवा रहे हैं ताकि वे इस योजना के लिए आवेदन कर सकें। महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, भिवानी, यमुनानगर, अंबाला, सिरसा और नूंह जैसे जिलों में ऐसी संख्या बहुत ज्यादा है, क्योंकि इन जिलों की सीमाएं पड़ोसी राज्यों से सटी हुई हैं। राजस्थान के डूमोली गांव की रहने वाली अनीता, जिनकी शादी नारनौल के चिंडालिया गांव के अमित से हुई। उसने बताया कि वे भी इस डोमिसाइल की शर्त से परेशान हैं। उनकी तरह ही राजस्थान के मेघपुर की मंजू, जिनकी शादी 2014 में हुई थी, के पति भी सर्टिफिकेट बनवाने में लगे हैं। ये महिलाएं कहती हैं कि 'अब तो हम भी हरियाणवी बहुएं बन गई हैं, यह डोमिसाइल की शर्त सही नहीं है।' यह स्थिति दिखाती है कि सरकार की एक अच्छी मंशा वाली योजना भी कैसे कुछ नियमों के कारण जटिल बन सकती है। सरकारी तैयारी और पोर्टल की सुविधाएं योजना को लागू करने के लिए सरकार ने भी कमर कस ली है। समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों को फॉर्म भरने की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। आज से जिलों में फॉर्म भरने का ट्रायल वर्जन शुरू होगा, ताकि 25 सितंबर को पोर्टल खुलने पर कोई तकनीकी दिक्कत न आए। सरकार ने कुछ प्रावधानों को सरल भी किया है। • एक मोबाइल नंबर से 3 फॉर्म : एक परिवार आईडी में एक ही मोबाइल नंबर से तीन फॉर्म भरे जा सकते हैं, भले ही वह नंबर फैमिली आईडी में पंजीकृत न हो। यह उन परिवारों के लिए एक बड़ी सुविधा है जहां एक ही फोन का इस्तेमाल कई लोग करते हैं। • आधार और बैंक अकाउंट की अनिवार्यता : लाभार्थी का आधार कार्ड उसके मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट से जुड़ा होना अनिवार्य है। साथ ही, बैंक अकाउंट का फैमिली आईडी से लिंक होना भी जरूरी है ताकि राशि सीधे खाते में भेजी जा सके। दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना एक महत्वाकांक्षी पहल दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करना है। लेकिन इसकी पात्रता की शर्तें, विशेषकर आय और डोमिसाइल की, कई योग्य लाभार्थियों को दायरे से बाहर कर सकती हैं। जहां एक तरफ सरकार इस योजना को लागू करने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ उन लाखों परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है जिनकी बहुएं दूसरे राज्यों से आई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार भविष्य में इन शर्तों में कोई … Read more

सफर होगा आसान: भोपाल-इंदौर हाईस्पीड एक्सप्रेसवे का रूट तय, दूरी घटेगी, रफ्तार बढ़ेगी

इंदौर   मध्य प्रदेश के इंदौर से राजधानी भोपाल की सड़क यात्रा की दूरी तय करने में फिलहाल साढ़े 3 से 4 घंटे का समय लगता है। इसे कम करने की कवायद शुरू हो चुकी है। दोनों शहरों के बीच हाईस्पीड एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर बनने जा रहा है। जिससे दोनों शहरों के बीच का सफर 50 किलोमीटर तक कम होगा और दो घंटे में भोपाल से इंदौर का सफर पूरा किया जा सकेगा। इसका मार्ग फाइनल हो चुका है। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) इसे भारत माला हाईवे की तर्ज पर विकसित करेगी। जिसके लिए मध्य प्रदेश सरकार की जरूरी सैद्धांतिक सहमति के बाद एनएचएआई ने इसकी अलाइनमेंट डीपीआर की मंजूरी के लिए सड़क परिवहन विभाग को भेज दी है। सिंहस्थ 2028 से पहले इस हाइस्पीड एक्सप्रेस-वे को शुरू करने की योजना है।  नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इसे भारत माला हाईवे की तर्ज पर डेवलप करेगी। राज्य सरकार की सैद्धांतिक सहमति के बाद NHAI ने इसकी अलाइनमेंट डीपीआर मंजूरी के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय को भेज दी है। मंजूरी मिलने के बाद एक्सप्रेस वे का मैदानी काम शुरू होगा। बता दे इस समय भोपाल इंदौर के बीच मौजूदा एक्सप्रेसवे में कई गाड़ियों की आवाजाही होती है। जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है। एनएचएआई ने ट्रैफिक डेटा का विश्लेषण किया तो पता चला कि यहां से रोज़ाना 30 हज़ार से ज्यादा गाड़ियां गुजरती हैं। जिसमें मेहतवाड़ा से लेकर डोडी तक जाम लगता है यहां कई वाहन खड़े होते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। हाई स्पीड कॉरिडोर बनाने की जरूरत क्यों, 4 कारण 1. मौजूदा हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव इंदौर-भोपाल के बीच जो मौजूदा सड़क है, उस पर ट्रैफिक का दबाव ज्यादा है। NHAI ने ट्रैफिक डेटा का विश्लेषण किया तो पाया कि यहां से रोजाना 30 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। आने वाले समय में जैसे- जैसे आबादी बढ़ेगी, ट्रैफिक का दबाव बढ़ता जाएगा। ऐसे में दोनों शहरों के बीच नया कॉरिडोर बनाने की जरूरत है। 2. कई हिस्सों में जाम के हालात मौजूद हाईवे पर कई स्पॉट पर जाम के हालात बनते हैं। मेहतवाड़ा से लेकर डोडी तक जाम लगता है। यहां कई वाहन खड़े रहते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती है। जावर जोड़ से होकर निकलने वाली बसें यहां रुकती है। यात्रियों को यहीं से बैठाया जाता है। सीहोर के पास कुबेरेश्वर धाम की वजह से भी आए दिन जाम के हालात बनते हैं। इसी साल सावन के महीने में कुबेरेश्वर धाम की कांवड़ यात्रा में 5 लाख श्रद्धालु जुटे थे। हाईवे पर 72 घंटे तक जाम लगा रहा। 3. हाईवे से सटे कस्बे ट्रैफिक में रुकावट भोपाल-इंदौर हाईवे सीहोर, आष्टा और सोनकच्छ कस्बों के लिए बायपास रोड है। इन कस्बों में रहने वाले लोग इंदौर या भोपाल जाने के लिए इसी सड़क का इस्तेमाल करते हैं। किसान भी अपने खेतों पर जाने के लिए इसी सड़क का इस्तेमाल करते हैं। इस वजह से यहां टू व्हीलर, ट्रैक्टर की आवाजाही भी रहती है। 4. ढाबा-रेस्टोरेंट और टोल नाके हाईवे के दोनों तरफ की जमीनों का व्यवसायिक इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है। इस समय इंदौर- भोपाल रोड पर 50 से ज्यादा ढाबे और रेस्टोरेंट हैं। कमर्शियल एक्टिविटी बढ़ने से वाहनों की आवाजाही बढ़ती जा रही है। एमपीआरडीसी के यहां 4 और एनएचएआई का एक टोल है। भोपाल वेस्टर्न बायपास से इंदौर के एमआर-10 तक बनेगा प्रस्तावित एक्सप्रेस वे भोपाल के वेस्टर्न रिंग रोड से शुरू होगा और इंदौर के एमआर 10 से जुड़ेगा। इसके बीच में तीन जिले भोपाल, सीहोर, देवास की 7 तहसीलें आएंगी। ये पूरी तरह से नया रोड बनेगा। भोपाल से सीहोर इछावर होते हुए आष्टा के इलाही और देवास जिले के हाटपिपल्या और बागली तहसील को जोड़ेगा। एनएचएआई की डीपीआर के मुताबिक, भोपाल वेस्टर्न बाइपास से इंदौर एमआर 10 तक की दूरी 148–150 किमी है। वर्तमान हाईवे से देवास होकर इंदौर तक की दूसरी 195 किमी है। भोपाल-इंदौर के बीच एक्सप्रेस-वे का सफर करीब 50 किमी कम हो जाएगा और यह 2 घंटे में पूरा हो जाएगा। प्रस्तावित कॉरिडोर देवास शहर से होकर नहीं गुजरेगा। 7 तहसील के 59 गांव जुड़ेंगे     भोपाल, हुजूर तहसील: अमरपुरा, समसपुरा, आमला।     सीहोर तहसील: डेहरिया खुर्द, गडिया, रत्नखेरी, पाटनी, गेरूखान, इमलीखेड़ा।     इछावर तहसील: मुबादा, सेमली जादीद, मोहनपुर नौबाद, बावड़िया, सेंधोखेड़ी, लसुड़िया कांगड़, पोंगराखाती, कस्बा इछावर, सेवनियां, निपानिया, नयापुरा, जुझारपुरा, दिवारिया, हिम्मतपुर, मुंडला, बिजोरी, चैनपुरा।     आष्टा तहसील: भऊनरा, भटोनी, अरनिया जोहरी, मगरखेड़ी, दल्लूपुरा, लाखापुरा, झारखेड़ी, कामखेड़ाजबा, कन्नौदमिर्जा, गंगलखोटरी, झानपुरा, पगरियाहट, इलाही।     जावर तहसील: देहमत, उमरदाद, जहांजनपुरा, धुराड़ाकलां।     हाटपिपल्या तहसील: साप्ती, भवरड़ा, कनेरिया, बारोली, दोकरखेड़ा, कंझार, कावड़ी, हमीरखेड़ी, बरहानपुर, पिटावली, रेहली।     बागली तहसील: बिलावली, देवपिपल्या, बावड़ीखेड़ा, गाराखेड़ी, बिजूखेड़ा। डिजाइन से तय होती है गाड़ियों की स्पीड इंडियन रोड कांग्रेस-2013 की गाइडलाइन के मुताबिक, एक्सप्रेस वे की डिजाइन स्पीड 120 किमी प्रतिघंटा तय की गई है। इस स्पीड से गाड़ी चलने पर 180 किलोमीटर की दूरी दो से ढाई घंटे में पूरी होती है। ऐसे ही सिक्स लेन की डिजाइन स्पीड 100 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है। इस स्पीड में 180 किमी की दूरी तीन घंटे में तय होती है। 1100 हेक्टेयर जमीन का होगा अधिग्रहण एनएचएआई अफसरों के मुताबिक, अलाइनमेंट को इस तरह से तैयार किया है कि हाईवे ज्यादातर सरकारी और वन भूमि से होकर गुजर रहा है। हालांकि, इसके दायरे में करीब 1100 हेक्टेयर निजी जमीन भी आ रही है। ये पूरे प्रोजेक्ट का करीब 30 से 40 फीसदी हिस्सा है। अफसरों के मुताबिक जैसे ही अलाइनमेंट डीपीआर को केंद्र सरकार से मंजूरी मिलेगी, उसके बाद जमीन के अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की जाएगी। एनएचएआई के अफसरों का कहना है कि निजी जमीन का एरिया ज्यादा नहीं है इसलिए भूमि अधिग्रहण में ज्यादा समय नहीं लगेगा। ये प्रक्रिया 6 से 8 महीने के बीच पूरी कर ली जाएगी। भूमि अधिग्रहण के लिए राज्य सरकार पूरी प्रक्रिया करेगी। इसके बाद जो भी नियम के अनुसार मुआवजा बनेगा, वो निजी भूमि मालिक को दिया जाएगा। मुआवजा की राशि केंद्र सरकार देगी।

बेगूसराय में उड़ान की तैयारी! एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी पर सरकार की खास योजना

बेगूसराय बिहार के बेगूसराय में जल्द ही लोगों को एयरपोर्ट की सौगात मिलने वाली है. इस एयरपोर्ट पर सेवाएं शुरू होने के बाद व्यावसायिक उड़ान सेवा का लाभ मिल सकेगा. इसके साथ ही जिले का जुड़ाव हल्दिया रक्सौल एक्सप्रेसवे से भी होगा. यह बातें बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कही. इससे लोगों को बड़ी सहूलियत मिलने वाली है. बिहार सरकार की तरफ से इसे लेकर खास प्लानिंग की गई है. डिप्टी सीएम ने रखी अपनी बात बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने इसे लेकर एक कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखी. सम्राट चौधरी ने कहा कि श्रेष्ठ भारत के लिए समृद्ध बिहार बनना जरूरी है. एनडीए की सरकार एक बार फिर से बिहार में बनानी पड़ेगी. मोदी जी ने अर्थव्यवस्था के विकास के लिए स्वदेशी अभियान पर जोर दिया है. एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा बेगूसराय सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी जमकर तारीफ की और कहा कि सीएम नीतीश कुमार और पीएम मोदी के नेतृत्व में लगातार विकास हो रहा. ऐसे में बदलते बिहार में अब हल्दिया रक्सौल एक्सप्रेसवे से बेगूसराय भी जुड़ेगा. हालांकि, इस दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर तंज भी कसा. बेगूसराय से कोलकाता की दूरी घटी दरअसल, हल्दिया रक्सौल एक्सप्रेसवे के बनने से सिर्फ 5 से 6 घंटे में ही बेगूसराय से कोलकाता की दूरी तय की जा सकेगी. इसके निर्माण के लिए 950 एकड़ में जमीन का अधिग्रहण किया जायेगा. इसके अलावा जिले में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाया जाएगा. इन योजनाओं के जरिये जिले में अर्थव्यवस्था के साथ-साथ रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा. उलाव हवाई पट्टी पर हुई थी लैंडिंग दूसरी तरफ बेगूसराय के उलाव हवाई पट्टी पर सालों बाद किसी विमान की सफलतापूर्वक लैंडिंग हुई थी. जिला प्रशासन ने 8 यात्रियों वाले एवर डेलिवर लॉजिस्टिक्स के एयरक्राफ्ट को लैंडिंग की अनुमति दी थी. हालांकि, जिले में अब ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण की बात कही गई है. ऐसे में देखना होगा कि जिले में एयरपोर्ट को लेकर सरकार अंतिम फैसला क्या कुछ लेती है.  

माया रानी का ऐलान: बिहार की इस सीट पर लड़ेंगी चुनाव, राजनीति में नया मोड़

पश्चिमी चंपारण पश्चिमी चंपारण जिले की एक चर्चित किन्नर प्रतिनिधि माया रानी ने रविवार को ऐलान किया कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में नरकटियागंज से मैदान में उतरेंगी। माया रानी ने कहा कि अब समय आ गया है कि केवल समाज सेवा ही नहीं, बल्कि समाज के वास्तविक प्रतिनिधित्व के लिए भी कदम उठाना जरूरी है।   आज भी किन्नर समाज में उपेक्षित हैं… माया ने कहा कि किन्नर समाज को हमेशा समाज दूसरा दर्जे का समझा जाता है, लेकिन वास्तव में यह समाज हर मुश्किल वक्त के समय देश और समाज की सेवा करता है। उन्होंने कहा कि हम घरो में जा कर खुशिया बांटते हैं और किसी का बुरा नही सोचते। चाहे कोरोना महामारी हो, बाढ़ हो, सुखाड़ हो, गरीब बहनों की शादी हो या बच्चों की पढ़ाई- हर संकट में हमारी सहभागिता रही, लेकिन आज भी किन्नर समाज में उपेक्षित हैं। किन्नर माया ने कहा कि समाज में उपेक्षित माने जाने वाले किन्नर समाज के एक व्यक्ति ने अब राजनीतिक क्षेत्र में अपनी भागीदारी को मजबूत करने की ठानी है। माया ने चुनाव लड़ने की घोषणा स्थानीय नागरिकों, किन्नर समाज के प्रतिनिधियों, और विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में की और कहा कि कोई सांसद, विधायक, सभापति, पार्षद कभी हमारे दुख-दर्द को समझने नहीं आया। इसलिए अब हम खुद चुनाव लड़ेंगे, ताकि समाज के अधिकारों के लिए आवाज उठाई जा सके।  

5 दिन बाद हरियाणा से विदा होगा मानसून, उससे पहले झमाझम बारिश; क्षतिपूर्ति पोर्टल आज होगा बंद

चंडीगढ़   हरियाणा में 22 सितंबर से मानसून के लौटने के आसार है. मौसम विभाग के अनुसार, 16 से 17 सितंबर के बीच राज्य में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. इसकी वजह पहाड़ों पर सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ व बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र को माना जा रहा है. 17 से 19 सितंबर के बीच हरियाणा के कई जिलों में छिटपुट बारिश हो सकती है. इसके बाद, मानसून की रवानगी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि हरियाणा से मानसून की विदाई 22 सितंबर के आसपास से होगी. प्रदेश में 22-23 जून को मानसून की एंट्री हुई थी। उसके बाद से अब तक सामान्य से 41% ज्यादा बारिश हो चुकी है। कल, 14 सितंबर तक प्रदेश में 401.1 एमएम बारिश होनी चाहिए थी लेकिन 564.8 एमएम बरसात हो चुकी है। वहीं बारिश न होने से दिन के समय फिर से गर्मी और उमस बढ़ने लगी है। दिन का तापमान 35 डिग्री तक पहुंचने लगा है। अब दिन का तापमान बढ़ रहा है और रात का तापमान गिरने लगा है। वहीं बारिश से फसलों के नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन करने का आज अंतिम दिन है। कल से इसको लेकर स्पेशल गिरदावरी शुरू की जाएगी। हुई इतनी बारिश पिछले साल हरियाणा से मानसून की वापसी 2 अक्टूबर को हुई थी, लेकिन इस साल यह सामान्य से पहले लौटेगा. इस सीजन में प्रदेश में अब तक 564.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 42 प्रतिशत ज्यादा है और 27 साल का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की विदाई के बाद भी यदि मौसमी सिस्टम सक्रिय होते हैं व बारिश होती है, तो सर्दी इस बार समय से पहले दस्तक दे सकती है. मानसून की विदाई नजदीक आते ही बढ़ना लगा तापमान हरियाणा में मानसून की समाप्ति नजदीक आने के साथ ही तापमान में बदलाव दिखने लगा है। रविवार को दिन के अधिकतम तापमान में औसतन 0.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी देखी गई। प्रदेश में अधिकतम तापमान नूंह में 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जींद में दिन के तापमान में सबसे ज्यादा 2 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हुई। वहीं, अगर रात के तापमान की बात करें तो प्रदेश में न्यूनतम तापमान में औसतन 0.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हुई है। गुरुग्राम में रात का सबसे कम तापमान 23.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान में सबसे ज्यादा गिरावट सिरसा में 4.5 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज की गई। यहां ओटू सेंटर पर रात का तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नूंह में रात का सबसे अधिक तापमान 28.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे रातें अब ठंडी होनी शुरू हो जाएंगी। क्षतिपूर्ति पोर्टल का आज अंतिम दिन मानसून में बारिश और जलभराव से फसलों के नुकसान का मुआवजा लेने के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन करने का आज, 15 सितंबर को अंतिम दिन है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 14 सितंबर तक 4 लाख 85 हजार 90 किसान क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन कर चुके हैं। किसानों का कहना है कि उनकी 28 लाख 46 हजार 98 एकड़ फसल का नुकसान हो चुका है। करीब 6,292 गांवों में यह नुकसान दर्ज किया गया है। सबसे ज्यादा नुकसान भिवानी, जींद, हिसार, चरखी दादरी और महेंद्रगढ़ में होने का अनुमान है। हिसार में 2 हफ्ते बाद खुले स्कूल, ट्रैक्टर पर पहुंचे बच्चे हिसार के बरवाला में जलभराव की वजह से स्कूल 2 हफ्ते बाद खुले। यहां के सुलखनी गांव में सड़कों पर जलभराव की वजह से बच्चे ट्रैक्टर पर बैठकर स्कूल पहुंचे। सुलखनी गांव के रमेश, संदीप, जगदीप ने बताया कि भारी बारिश के कारण राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और राजकीय प्राथमिक विद्यालय दोनों के मैदान और कक्षाओं में पानी भर गया था, जिसके चलते शिक्षा विभाग को स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी थी। नुकसान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने बताया कि मानसून सीजन में अधिक बारिश से इस बार धान की अगेती फसल को पहले ही 15- 20 फीसदी तक नुकसान पहुंच चुका है. यदि अब बारिश हुई तो पकी हुई फसल को भी 10- 15 फीसदी तक और नुकसान हो सकता है.