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एरोपोनिक तकनीक से सात गुना बढ़ा आलू बीज उत्पादन, दूसरे राज्यों की जरूरतें भी पूरी करेगा हरियाणा

करनाल धान, गेहूं को छोड़ प्रदेश का किसान सब्जी और बागवानी की ओर बढ़ रहा है। कुछ सालों से आलू की खेती में किसानों का रुझान बढ़ रहा है। किसान की आय बढ़ाने के लिए शामगढ़ स्थित आलू प्रौद्योगिकी केन्द्र (पीटीसी) ने ऐरोपोनिक तकनीक अपना सफल शोध किया है। इस तकनीक से एक पौधे से 60 मिनी ट्यूबर (बीज के आलू) मिलेंगे। आलू बीज उत्पादन में आई यह क्रांति कई बड़े राज्यों के लिए गेम चेंजर साबित होगी। हरियाणा अब उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार व पश्चिमी बंगाल जैसे राज्यों की बीज की जरूरत को पूरा करेगा। प्रदेश में करीब 34 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती होती है। इसमें पांच प्रमुख किस्में कुफरी उदय, पुखराज, कुफरी मोहन, कुफरी चिपसोना व कुफरी सूर्या, आनंद, पुष्कर शामिल हैं। शामगढ़ केंद्र में आलू की नई किस्म "कुफरी उदय" पर शोध किया गया। इस किस्म के पौधों में ट्यूबर बनने की रफ्तार भी सबसे अधिक पाई गई। साथ ही, मिट्टी में न होने के कारण यह बीज शत-प्रतिशत फंगस रहित, बैक्टेरिया और वायरस मुक्त है। यह है एरोपोनिक तकनीक एरोपोनिक तकनीक खेती की एक आधुनिक विधि है, जिसमें पौधों की जड़ें मिट्टी या पानी के बजाय हवा में रहती हैं। इससे कम पानी, कम जगह में तेज वृद्धि और अधिक उत्पादन मिलता है। क्या है एरोपोनिक तकनीक? इस तकनीक में पौधे को हवा में लटकाकर कंप्यूटर नियंत्रित मशीनों से जड़ों में पोषक तत्वों की बौछारें की जाती हैं। इस व्यवस्था से बीज उत्पादन में सात गुना यानी एक पौधे से बीज के 60 आलू मिले हैं। जबकि परंपरागत और नेट हाउस के अंदर प्रति पौधा केवल आठ मिनी ट्यूबर का उत्पादन ही हो पाता था। नए रिकॉर्ड से उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार व पश्चिमी बंगाल जैसे राज्यों की बीज की जरूरत को पूरा करेगा हरियाणा मिट्टी और कोकोपिट के बिना कुफरी उदय किस्म में एरोपोनिक तकनीक से शोध में आए सुखद परिणाम कृषि की इस तकनीक से हरियाणा में सात गुना बढ़ेगा आलू के बीज का उत्पादन     आठ आलू अब तक एक पौधे से मिलते हैं।     34 हजार हेक्टेयर में प्रदेश में होती है आलू की खेती। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक फैलेगा नेटवर्क शामगढ़ आलू प्रौद्योगिकी केंद्र करीब 4500 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाला आलू बीज दूसरे राज्यों को भेज रहा है। नए शोध में प्रति पौधा 60 मिनी ट्यूबर मिलने के बाद केंद्र की बीज उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ेगी। अब देश की सबसे बड़ी आलू उत्पादक बेल्ट वाले राज्यों को कवर करने की योजना तैयार की जा रही है। अब हरियाणा अपने किसानों की जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दूसरे बड़े राज्यों के किसानों को बड़े पैमाने पर आलू बीज देने में पूरी तरह सक्षम होगा। एरोपोनिक तकनीक में एक पौधे से 60 मिनी ट्यूबर प्राप्त होना हमारे लिए मील का पत्थर है। इससे पहले के शोध में हम केवल 40 मिनी ट्यूबर ही उगाने में कामयाब हो पा रहे थे, लेकिन हमारे विज्ञानियों के गहन अध्ययन, सटीक न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट और निरंतर प्रयास से यह बड़ी सफलता मिली है। क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी और हम दूसरे राज्यों के लिए बीज उपलब्धता के साथ-साथ निर्यात करने की स्थिति में आ सकते हैं। -डॉ. मनोज भानुकर, उप निदेशक, आलू प्रौद्योगिकी केंद्र शामगढ़ करनाल।  

दिल्ली की 2.2 करोड़ आबादी जनगणना में कवर, 14 जून तक चलेगा हाउस लिस्टिंग अभियान

नई दिल्ली  दिल्ली में चल रही जनगणना 2026 के पहले चरण में हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन का अंतिम चरण में है। अब तक कुल 55 लाख से अधिक घरों को कवर किया जा चुका है, जिसमें 76.63 लाख परिवार रहते हैं। यानी 98% घर कवर हो चुके हैं। अधिकारियों का दावा है कि अगले दो दिनों में 100% जनगणना हो जाएगी। अभी तक जनगणना के हिसाब से दिल्ली की 2.2 करोड़ आबादी कवर की जा चुकी है। दिल्ली में 16 मई से जनगणना-2026 के पहले चरण में हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन का काम शुरू हुआ था। पहले 15 दिन ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का फिर 1 जून से घर-घर जाकर यह काम चल रहा है जो 14 जून तक चलेगा। अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में कुल 45 हजार से अधिक हाउस लिस्टिंग ब्लॉक तैयार किए गए थे। अनुमान के मुताबिक हर ब्लॉक में 150-200 घर रखे गए थे। कहां-कहां कितना हुआ काम? आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर-पूर्वी जिला सबसे अधिक आबादी वाला क्षेत्र बनकर उभरा है, जहां अब तक 8.23 लाख घर को कवर किया जा चुका है, जिसमें 6.30 लाख परिवार रहते हैं। वहीं, पुरानी दिल्ली जिला सबसे कम आबादी वाला क्षेत्र रहा, जहां 2.95 लाख घरों को कवर किया गया है। आउटर नॉर्थ में 99.14 फीसदी, नॉर्थ-वेस्ट में 98.48 फीसदी और सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में 98.13 फीसदी घरों को कवर किया जा चुका है। ईस्ट व नॉर्थ जिले में अभी 95 फीसदी काम ही पूरा हुआ है। जनगणना 2026 की प्रक्रिया दो चरणों में चलेगी जनगणना 2026 का आयोजन दो चरणों में हो रहा है। पहला चरण हाउस लिस्टिंग और आवास गणना का है, जो फिलहाल जारी है। इसके बाद दूसरा चरण जनसंख्या गणना (Population Enumeration) का होगा, जिसकी शुरुआत फरवरी 2027 में की जाएगी। इस चरण में नागरिकों की संख्या और सामाजिक-आर्थिक जानकारी जुटाई जाएगी।      क्यों जरूरी होती है जनगणना? अगर अभी तक आप जनगणना में शामिल नहीं हुए हैं तो 14 जून तक का समय है। 14 तक एन्यूमरेटर बचे हुए घरों में एक बार फिर से दस्तक देंगे। दरअसल, गर्मी की छुट्टी के कारण कई घरों में लोग नहीं मिले। जनगणना कर्मी ने इनके पड़ोसियों से अपना नंबर भी शेयर किया है। यह जनगणना इसलिए जरूरी है क्योंकि आंकड़ों के आधार पर ही सरकार अपनी नीतिगत फैसले लेती है।

ब्लैक फिल्म, हूटर और फैंसी नंबर प्लेट वालों पर पुलिस सख्त

 जयपुर सड़क सुरक्षा को लेकर राजस्थान पुलिस का विशेष अभियान अब सख्ती के चरण में पहुंच गया है।  पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में चलाए जा रहे प्रदेशव्यापी अभियान के तहत मात्र 6 दिनों में 50,174 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। अवैध ब्लैक फिल्म, नियम विरुद्ध नंबर प्लेट, अनधिकृत लेखन, मॉडिफिकेशन और हूटर-फ्लैशर लगाने वालों पर पुलिस ने कड़ा शिकंजा कसते हुए छठे दिन  रिकॉर्ड 10,825 चालान बनाए। राजस्थान पुलिस की ‘पहले समझाइश, फिर सख्ती’ नीति के तहत यह अभियान सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं में कमी लाने की दिशा में लगातार प्रभावी साबित हो रहा है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस यातायात डॉ. बी.एल. मीणा ने बताया कि डीजी ट्रैफिक श्री अनिल पालीवाल के पर्यवेक्षण में अभियान संचालित है। अभियान 4 जून से शुरू हुआ था, जिसमें अब तक वाहनों के शीशों पर अवैध काली फिल्म लगाने के मामलों में सर्वाधिक 19 हजार 694 वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई दर्ज की गई। इसके साथ ही, नियम विरुद्ध नंबर प्लेट एवं पंजीयन चिन्ह प्रदर्शित करने वाले 13 हजार 46 वाहनों पर भी कार्रवाई की गई है। वाहनों पर अनाधिकृत शब्द, पदनाम, प्रतीक एवं अन्य लेखन प्रदर्शित करने के 6 हजार 791 मामलों में पुलिस ने सख्त कार्रवाई की हैं। वहीं 4 हजार 757 वाहनों में अवैध बॉडी अथवा चेसिस मॉडिफिकेशन पाए जाने पर वाहन चालकों के विरुद्ध प्रवर्तन किया गया। अभियान के दौरान अवैध लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट एवं हूटर का उपयोग करने वाले 3 हजार 244 वाहनों पर भी कार्रवाई की गई। साथ ही, प्रेशर हॉर्न एवं एयर हॉर्न का उपयोग करने वाले 2 हजार 642 वाहन चालकों को भी नियमों के उल्लंघन पर दंडित किया गया है।  छठे दिन सर्वाधिक मामले दर्ज अभियान में छठे दिन सर्वाधिक 10 हजार 825 वाहनों पर सख्त कार्रवाई करते हुए चालान बनाए गए। इस दिन 4 हजार 220 वाहनों से ब्लैक फिल्म हटवाई गई। नियम विरुद्ध नंबर प्लेट वाले 2 हजार 449 वाहनों और 1 हजार 784 वाहनों पर अनाधिकृत लेखन पाए जाने पर नियमानुसार प्रवर्तन किया गया। प्रेशर व एयर हॉर्न पर 571,  अनाधिकृत लाल, नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट एवं हूटर के लिए 763 वाहनों पर कार्रवाईयां की गई हैं। अभियान के प्रथम दिन 4 जून को 4716, 5 जून को 7300, 6 जून को 9362, 7 जून को 9523, 8 जून को 8448 और छठे दिन 9 जून को 10825 कार्रवाई की गई। सड़क सुरक्षा में 'पहले समझाइश फिर सख्ती' उल्लेखनीय है कि राजस्थान पुलिस सड़क सुरक्षा की दिशा में 'पहले समझाइश, फिर सख्ती' की नीति के अनुरूप आगे बढ़ रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। डॉ. मीणा ने बताया कि सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने एवं दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रवर्तन एवं जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही है। उन्होंने वाहन चालकों से यातायात नियमों की पालना करने के लिए अपील की है।

गर्मी से मिली राहत, अब बारिश और वज्रपात का खतरा: 15 जून तक झारखंड में अलर्ट

 रांची  रांची समेत आसपास के जिलों में बुधवार को अचानक बदले मौसम के तेवर ने तापमान चार डिग्री सेल्सियस तक गिरा दिया है। दिनभर तेज धूप के बाद अचानक शाम छह बजे उमड़-घुमड़ आए काले बादल ने राहत की बरसात कर दी। करीब आधे घंटे तक हुई वर्षा से मौसम सुहाना हो गया और आमजनों को गर्मी से राहत मिली। मौसम विज्ञान केंद्र रांची द्वारा जारी Jharkhand Weather Forecast में बताया गया कि 11 और 12 जून को राज्य के उत्तर पूर्वी हिस्से यानी देवघर, दुमका, गोड्डा, पाकुड़, गिरिडीह, जामताड़ा और साहिबगंज के अलावा निकटवर्ती मध्य भाग यानी रांची, रामगढ़, हजारीबाग, गुमला, बोकारो, लोहरदगा, कोडरमा, धनबाद और खूंटी में मेघगर्जन के साथ 50 से 60 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवा के बहने और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है, इसे लेकर आरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पूरे राज्य में यह स्थिति 15 जून तक बनी रहेगी। बुधवार को ऐसा रहा मौसम पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो राज्य में कहीं कहीं हल्की व मध्यम दर्जे की वर्षा हुई। सबसे अधिक वर्षापात 37.2 मिमी दुमका में रिकॉर्ड किया गया। वहीं, सबसे अधिक अधिकतम तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस डाल्टनगंज का जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस लातेहार का रिकॉर्ड किया गया। वहीं, राजधानी रांची का अधिकतम 35.9 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 26.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विज्ञानी अभिषेक आनंद ने बताया कि अगले 24 घंटे के दौरान अधिकतम तापमान में कोई बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। इसके बाद अगले चार दिनों तक यानी 12, 13, 14 और 15 जून तक अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने की संभावना है। ऐसा रहेगा रांची में अगले चार दिनों का तापमान 11 जून : अधिकतम 39 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस 12 जून : अधिकतम 37 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस 13 जून : अधिकतम 34 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस 14 जून : अधिकतम 33 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस मेघगर्जन, आकाशीय बिजली व आंधी से इस तरह बचें – आंधी तूफान से पौधारोपण, बागवानी और खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है – खुले स्थानों पर आकाशीय बिजली लोगों और मवेशियों को घायल कर सकता है – घर के अंदर रहें, खिड़कियां और दरवाजे बंद करें और यदि संभव हो तो यात्रा से बचें – सुरक्षित आश्रय लें, पेड़ों के नीचे आश्रय न लें – कंक्रीट की फर्श पर न लेटें और कंक्रीट की दीवारों के सामने न रहें – विद्युत इलेक्ट्रानिक उपकरणों को अनप्लग करें – तुरंत जलस्रोतों से बाहर निकलें – बिजली का संचालन करने वाली सभी वस्तुओं से दूर रहें।  

खान सर विवाद के बाद सरकार सख्त, बिना मान्यता चल रहे स्कूलों को जारी हुआ नोटिस

पटना  बिहार की राजधानी पटना में शुरू हुए खान सर कोचिंग विवाद के बाद सरकार ने कोचिंग सेंटर और स्कूलों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस बीच सरकार को जानकारी मिली है कि राज्य में 37 हजार निजी (प्राइवेट) स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं। अब सरकार के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने इन प्राइवेट स्कूलों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बिना मान्यता वाले स्कूलों को मान्यता के लिए 15 दिन की मोहलत दी गई है। प्राइवेट स्कूलों को 15 दिन का दिया टाइम शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम की समीक्षा के दौरान विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीइओ) को निर्देश दिया है कि बिना अनुमति चल रहे निजी विद्यालयों को 15 दिनों के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर मान्यता प्राप्त करने के लिए नोटिस जारी करें। 15 दिन के बाद अगर कोई प्राइवेट स्कूल बिना मान्यता के चलते हुए पाया जाता है तो फिर उसके खिलाफ नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। बिहार में कितने प्राइवेट स्कूलों को मान्यता प्राप्त? बिहार में वर्तमान में 19186 प्राइवेट स्कूलों को मान्यता प्राप्त है। जबकि 1012 विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया जारी है। इसके बावजूद राज्य में लगभग 37 हजार से अधिक प्राइवेट स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं। ये आंकड़े शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान सामने आए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिला स्तर पर लंबित मान्यता आवेदनों का शीघ्र निपटारा किया जाये। साथ ही ऐसे विद्यालय जो अब तक मान्यता के लिए आवेदन नहीं कर पाये हैं, उन्हें अंतिम अवसर दिया जाए। 1 जुलाई से सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की होगी जांच बिहार में संचालित मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर शिक्षा विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। 1 से 31 जुलाई तक सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों की सघन जांच की जाएगी। शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल ने इस संबंध में सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को पत्र भेजकर अपने-अपने क्षेत्राधिकार के जिलों में अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित कराने का निर्देश दिया है।  

जालंधर डॉक्टर डेथ केस: करोड़ों का लोन, रिश्तों में दरार और कई अनसुलझे सवाल, सामने आई पूरी कहानी

 जालंधर  पंजाब के जालंधर में सरकारी लेडी डॉक्टर डॉ. मीनाक्षी सूद की मौत के बाद उनके पति और नेशनल आई केयर हॉस्पिटल से जुड़े डॉक्टर पीयूष सूद पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. लेडी डॉक्टर के परिजनों का दावा है कि डॉ. मीनाक्षी लंबे समय से मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना कर रही थीं. परिवार ने पति पर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर, मारपीट और उनकी जानकारी के बिना उनके नाम पर करोड़ों रुपये का लोन लेने के आरोप लगाए हैं. वहीं पुलिस ने परिजनों के बयानों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।  मृतका के पिता प्रमोद कुमार के मुताबिक उनकी बेटी की शादी अक्टूबर 2018 में डॉक्टर पीयूष सूद के साथ हुई थी. परिवार का आरोप है कि शादी के बाद खरीदी गई थार गाड़ी का लोन डॉ. मीनाक्षी के नाम पर लिया गया था और उसकी किश्तें भी वही भर रही थीं. परिजनों का दावा है कि बाद में अस्पताल और अन्य कामों से जुड़े लोन भी उनके नाम पर लिए गए।  पति से रह रही थीं अलग  पिता का कहना है कि जुलाई 2025 से उनकी बेटी पति से अलग रह रही थी. परिवार के अनुसार कुछ दिन पहले जब डॉ. मीनाक्षी बैंक में मकान खरीदने से संबंधित प्रक्रिया के लिए पहुंचीं तो उन्हें पता चला कि उनके नाम पर करीब 2.5 करोड़ रुपये का लोन चल रहा है. परिजनों का आरोप है कि संबंधित दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं थे. इसके बाद वह काफी परेशान रहने लगी थीं. मृतका की मां ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ कई बार मारपीट की गई. परिवार का दावा है कि डॉक्टर पीयूष सूद कई मौकों पर खुद फोन कर मारपीट की बात स्वीकार करते थे और बाद में माफी मांगते थे. पिता ने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी उनकी बेटी का गला घोंटकर जान लेने की कोशिश की गई थी. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।  नर्स के साथ अफेयर का भी आरोप  परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टर पीयूष सूद का अस्पताल में काम करने वाली एक महिला के साथ कथित संबंध था. पिता के अनुसार जब डॉ. मीनाक्षी को इस बात का संदेह हुआ तो उन्होंने अस्पताल के CCTV फुटेज की जांच की. परिवार का दावा है कि फुटेज में दोनों को साथ देखा गया. परिजनों का कहना है कि संबंधित फुटेज पुलिस को भी उपलब्ध कराए गए हैं. थाना नंबर 6 के प्रभारी सुशील कुमार ने बताया कि महिला डॉक्टर की मौत के मामले में परिजनों के बयानों के आधार पर BNS की धारा 106 के तहत मामला दर्ज किया गया है।  उन्होंने कहा कि आरोपी पति से अभी पूछताछ नहीं हो पाई है और कानूनी प्रक्रिया जारी है. एएसआई सतपाल के अनुसार सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी. घर के दरवाजे बंद थे. लोगों की मौजूदगी में घर का शीशा तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया, जहां डॉक्टर मीनाक्षी का शव जमीन पर पड़ा मिला. इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।  पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार  मृतका की मां का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि उनकी बेटी की मौत किन परिस्थितियों में हुई. परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. वहीं पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. मृतका के पिता के अनुसार बेटी मार पिटाई से तंग थी, इसलिए वह डॉक्टर पीयूष से अलग रहने लगी थी।  नया मकान बनाना चाह रही थी  पिता का कहना है कि जून 2026 में वह अपना मकान लेने का प्लान बना रही थी. मकान लेने के लिए कुछ दिन पहले जब बैंक में गई तो पता चला कि उसने नाम पर 2.5 करोड़ का लोन चल रहा है. जबकि कागजों पर उसके साइन भी नहीं थे. पिता प्रमोद ने बताया कि अब बेटी तलाक लेना चाहती थी. मैंने बेटी को कहा था कि तुम्हारा कोर्ट से तलाक करवा देते हैं. तुम कुछ देर रुक जाओ. इस बीच लोन की बात पता चल गई जिससे बेटी परेशान हो गई. उन्होंने बताया कि मीनाक्षी कपूरथला के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर थी. पिता ने कहा कि डॉक्टर पीयूष ने ही बेटी को मरने के लिए मजबूर किया है. परिवार की मांग है कि पुलिस डॉक्टर पीयूष को अरेस्ट करे और इंसाफ दिलाए। 

गुरु रंधावा के जिम पर ताबड़तोड़ गोलियां, लॉरेंस बिश्नोई गैंग का दावा; दिल्ली में सनसनी

 नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हुए एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. मशहूर पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा के मालिकाना हक वाले एक जिम के बाहर अज्ञात हमलावरों द्वारा ताबड़तोड़ फायरिंग की गई है. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।  इस सनसनीखेज हमले की जिम्मेदारी कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित पोस्ट और ऑडियो क्लिप के जरिए गैंग ने इस फायरिंग का दावा किया है।  वायरल ऑडियो में कथित तौर पर गैंग के एक सदस्य को यह कहते सुना जा सकता है कि गुरु रंधावा के अभिनेता सलमान खान के साथ करीबी रिश्ते हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया है. ऑडियो में इस हमले को महज एक 'ट्रेलर' बताया गया है।  पुलिस कर रही है जांच घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं और जिम के बाहर के विजुअल्स और सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है. पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या यह वाकई गैंग की ही हरकत है या किसी ने दहशत फैलाने के लिए इस नाम का इस्तेमाल किया है।  दिल्ली पुलिस के मुताबिक, वायरल हो रहे ऑडियो और सोशल मीडिया पोस्ट की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है, जिसके बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।  दिल्ली पुलिस ने बयान जारी करते हुए कहा, 11 जून 2026 की सुबह तड़के थाना पश्चिम विहार ईस्ट में "24 आवर्स फिटनेस" जिम, पुष्कर एन्क्लेव, पश्चिम विहार, दिल्ली में फायरिंग की घटना संबंधी एक पीसीआर कॉल प्राप्त हुई. प्रारंभिक जांच में यह पुष्टि हुई है कि चेहरे को कपड़े से ढके हुए बाइक सवार दो अज्ञात व्यक्तियों ने जिम के शीशों पर कुछ राउंड फायरिंग की. इस घटना में किसी भी व्यक्ति को किसी प्रकार की चोट नहीं आई है. स्थानीय पुलिस और जिला पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की है तथा मामले में उचित कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है. आरोपियों की पहचान, उनकी तलाश और जल्द गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। 

प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्ष पूर्ण होने पर खेड़ापति हनुमान मंदिर में भव्य महाआरती

मंत्री सारंग ने प्रधानमंत्री मोदी के नाम से छोला मंदिर में हनुमान जी को गदा की अर्पित प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्ष पूर्ण होने पर खेड़ापति हनुमान मंदिर में भव्य महाआरती भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र सेवा, सुशासन एवं जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने पर सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को भोपाल के सबसे प्राचीन मंदिर छोला स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर में कार्यकर्ताओं के साथ भव्य महाआरती एवं सामूहिक संगीतमय हनुमान चालीसा पाठ किया। मंत्री सारंग ने खेड़ापति हनुमान जी के चरणों में प्रधानमंत्री मोदी के नाम की गदा अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुदृढ़ नेतृत्व तथा राष्ट्रसेवा के सफल एवं यशस्वी भविष्य के लिए मंगलकामनाएं कीं। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले 12 वर्षों में विकास, सुशासन, राष्ट्रीय सुरक्षा, आधारभूत संरचना, आत्मनिर्भरता, डिजिटल नवाचार, गरीब कल्याण एवं वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां प्राप्त की हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने विश्व पटल पर अपनी एक सशक्त, आत्मविश्वासी एवं निर्णायक राष्ट्र के रूप में विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा, समर्पण और सुशासन को राजनीति का आधार बनाकर करोड़ों देशवासियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। उनके नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं ने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने का कार्य किया है। आज भारत आत्मनिर्भरता, नवाचार, आर्थिक प्रगति तथा सांस्कृतिक गौरव के नए युग में प्रवेश कर चुका है। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक निरंतर निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सेवा देने का गौरवपूर्ण कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। यह उपलब्धि केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की जनता के अटूट विश्वास, उनके नेतृत्व की स्वीकार्यता तथा राष्ट्रहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने की दिशा में देश निरंतर आगे बढ़ रहा है। उनका दूरदर्शी नेतृत्व, कार्य संस्कृति एवं राष्ट्र प्रथम का भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। नरेला के सभी मंदिरों में आयोजित हुए कार्यक्रम मंत्री सारंग ने बताया कि नरेला विधानसभा के समस्त प्रमुख मंदिरों पर धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन किये गये। इस अवसर पर मंदिरों में पूजन, आरती एवं राष्ट्र की समृद्धि और प्रधानमंत्री मोदी के दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना के लिए विशेष प्रार्थनाएं की गई। उन्होंने बताया कि यह अवसर प्रत्येक भारतीय और कार्यकर्ताओं के लिए गौरव, प्रेरणा और उत्सव का विषय है।  

6 महीने में 6.5 लाख गर्भवतियों की हुई जांच, 1.75 लाख महिलाओं में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान

भोपाल   मध्यप्रदेश में हाई-रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत बीते छह माह में 6.5 लाख गर्भवतियों की जांच में 1.75 लाख को हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में चिह्नित किया गया। भोपाल में 31.1 फीसदी गर्भवती हाई-रिस्क श्रेणी में पाई गईं। प्रदेश में गर्भवतियों में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की दर 26.9 प्रतिशत पाई गई। यानी हर 100 गर्भवती महिलाओं में लगभग 27 महिलाएं हाई-रिस्क श्रेणी में पाई गईं। वायु प्रदूषण से भी खतरा भोपाल एम्स के हालिया अध्ययन के अनुसार वायु प्रदूषण के सूक्ष्म कण (पीएम 2.5 और पीएम 10) सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर रहे हैं और ये कण प्लेसेंटा (अपरा) तक पहुंच सकते हैं। प्लेसेंटा में सूजन, ऑक्सीडेंटिव स्ट्रेस बढ़ता है। शिशु तक ऑक्सीजन, पोषक तत्वों की आपूर्ति प्रभावित होती है। गर्भवतियों को खतरे में डाल रहे ये रोग हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी वाली गर्भवतियों में एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर और गर्भकालीन मधुमेह पाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार 35 वर्ष से अधिक आयु में गर्भधारण, मोटापा, जुड़वा या बहुभ्रूण गर्भावस्था और पूर्व में गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं के कारण भी महिलाओं की स्थिति खतरनाक हो जा रही है। वायु प्रदूषण से प्लेसेंटा को क्या-क्या नुकसान     जहरीले कण प्लेसेंटा के ऊतकों (tissues) को बुरी तरह नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे बच्चे तक पहुंचने वाले रक्त, ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति बाधित होती है।     एम्स के इस शोध में पाया गया कि प्रदूषण के कारण IGFBP3 नामक एक आवश्यक जीन दब जाता है। यह जीन भ्रूण के स्वस्थ विकास के लिए बड़ी भूमिका निभाता है।     सांसों के माध्यम से जहरीले तत्वों में लेड, कैडमियम और एंटीमनी जैसी भारी और जहरीली धातुएं प्लेसेंटा में जमा होने लगती हैं, जो शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास को क्षति पहुंचाती हैं। हाई-रिस्क प्रेगनेंसी में खतरे एम्स और अन्य चिकित्सा अध्ययनों में हाईरिस्क प्रेग्नेंसी यानी गर्भावस्था में जटिलताओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है-     प्रीक्लेम्पसिया और हाइपरटेंशन का बड़ा खतरा, इसमें गर्भवती का बीपी असामान्य तरीके से बढ़ जाता है।     प्री-टर्म डिलीवरी के मामले बढ़ना। इसमें 37 सप्ताह से पहले ही गर्भवती को प्रसव पीड़ा शुरू हो जाती है।     इसका सीधा असर गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर पड़ता है। इसका असर यह होता है कि जन्म लेने वाले शिशुओं में न्यूरोलॉजिकल और व्यवहार संबंधी बदलाव का जोखिम बढ़ता है।     स्टिलबर्थ होना। यह एक अत्यंत गंभीर मामला है। इसमें गर्भ में ही बच्चे की मृत्यु का खतरा होता है। जानें क्या सावधानियां जरूरी     औद्योगिक इलाकों के साथ ही भारी ट्रैफिक और ज्यादा वायुप्रदूषण वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। अगर जाना पड़ रहा है तो मास्क लगाकर जाएं। मास्क का यूज तब-तब करें जब घर से बाहर निकलना हो। ध्यान दें कि मास्क अच्छी गुणवत्ता वाला जैसे N95 या उससे बेहतर हो।     घर के अंदर भी वायुप्रदूषण का रिस्क बढ़ा है। ऐसे में एयर प्यूरीफायर का यूज करें। घर की खिड़कियां, दरवाजे बंद रखें।     इस दौरान नियमित रूप से जांच करवाने को लेकर अवेयर रहें। समय पर जांच कराएं, पौष्टिक आहार लें। 20 प्रतिशत गर्भवती हाई-रिस्क श्रेणी में 20 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हाई-रिस्क श्रेणी में आ रही हैं। खून की कमी बीपी, थायराइड और अन्य बीमारियों के साथ ही 35 वर्ष अधिक आयु में शादी करने और प्रदूषण के कारण भी गर्भवतियों में हाई-रिस्क की स्थिति पैदा हो रही है। समय पर जांच कराने से मां और शिशु, दोनों की जान बच सकती हैं। -डॉ. नसीमा, स्त्री रोग विशेषज्ञ, एम्स भोपाल

वन्यजीव संरक्षण में चरवाहों की बढ़ेगी भूमिका, टाइगर फाउंडेशन ने 22.79 करोड़ रुपये की योजनाओं को दी हरी झंडी

भोपाल  मध्य प्रदेश के जंगलों में इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव (मानव-वन्यजीव संघर्ष) को रोकने के लिए वन विभाग अब एक बेहद जमीनी स्तर का प्लान तैयार कर रहा है। इसके तहत प्रदेश में पहली बार क्षेत्रीय स्तर पर 'चरवाहा सम्मेलन' आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों के जरिए उन ग्रामीणों और चरवाहों को सीधे जागरूक किया जाएगा, जो मवेशी चराने के लिए अक्सर जंगलों के भीतर या संरक्षित क्षेत्रों के आसपास जाते हैं। उन्हें वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन और खुद की सुरक्षा के गुर सिखाए जाएंगे। यह महत्वपूर्ण फैसला वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित 'मध्य प्रदेश टाइगर फाउंडेशन समिति' की 22वीं बैठक में लिया गया। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि फील्ड में पारदर्शिता और काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए अब हर तीन महीने में यह बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए। 22.79 करोड़ से सुधरेंगे जंगल के हालात बैठक में वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके रहन-सहन (आवास विकास) को बेहतर बनाने के लिए 22.79 करोड़ रुपये के बड़े बजट को मंजूरी दी गई। इस राशि का उपयोग इन मुख्य कामों में होगा: मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करना: इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव रोकने के लिए आधुनिक तकनीक और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान। ब्लैक बक कैप्चर ऑपरेशन: काले हिरणों के संरक्षण और उनके सुरक्षित रेस्क्यू/स्थानांतरण के लिए विशेष अभियान चलाना। रिसर्च और क्षमता संवर्धन: वन्यजीवों के व्यवहार पर अध्ययन करना और वन अमले को आधुनिक तकनीकों से लैस करना। वार्षिक कार्ययोजना मंजूर: इसके साथ ही समिति ने वर्ष 2026-27 के लिए अपनी एनुअल प्लानिंग को भी हरी झंडी दे दी है। बैठक के दौरान प्रदेश के तमाम टाइगर रिजर्वों (जैसे कान्हा, बांधवगढ़, पेंच आदि) के संचालकों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लिया और अपने-अपने क्षेत्रों की जमीनी रिपोर्ट पेश की। बैठक में वन बल प्रमुख सुभरंजन सेन, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक डॉ. समीता राजौरा, टाइगर सेल के अध्यक्ष एवं अपर पुलिस महानिदेशक सहित राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के सदस्य सचिव भी शामिल हुए। प्रदेश के विभिन्न टाइगर रिजर्वों के संचालकों ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में भागीदारी की।