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लोकभवन में 818 युवाओं को मिला नियुक्ति पत्र, मुख्यमंत्री योगी बोले- भर्ती का सिलसिला लगातार रहेगा

जो नहीं कर पाए वे गिनते जाएं, हम नौकरियां देते जाएंगे: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   लोकभवन में 818 युवाओं को मिला नियुक्ति पत्र, मुख्यमंत्री योगी बोले- भर्ती का सिलसिला लगातार रहेगा   मिशन रोजगार के तहत UPPSC और UPSSSC से विभिन्न विभागीय पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री ने सौंपे नियुक्ति पत्र   पुलिस में 36 हजार और होमगार्ड में 41 से 42 हजार नियुक्तियों की प्रक्रिया का किया जिक्र   बोले- अगले छह महीने में एक लाख से अधिक युवाओं को देंगे सरकारी नौकरी   पूर्ववर्ती सरकारों पर साधा निशाना, कहा- भर्ती बोर्ड और आयोगों में भाई-भतीजों को बैठाकर पूरी प्रक्रिया को किया था बदनाम   कहा- बीमार उत्तर प्रदेश नहीं था, सरकारों की मानसिकता बीमार थी, कार्यप्रणाली भ्रष्ट और भेदभावपूर्ण थी   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जो लोग रोजगार नहीं दे पाए, वे आज सवाल खड़े कर रहे हैं। वे गिनते जाएं, हम नौकरियां देते जाएंगे। अगले छह महीने में एक लाख से कम नहीं, बल्कि एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी। यह सिलसिला लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली युवा जब उत्तर प्रदेश की ताकत बनेंगे तो प्रदेश देश की नंबर वन अर्थव्यवस्था के रूप में खुद को स्थापित करेगा।   मुख्यमंत्री योगी शुक्रवार को लोकभवन सभागार में मिशन रोजगार के तहत आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के माध्यम से आयुष, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम समेत विभिन्न विभागीय पदों पर चयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री योगी ने नवचयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें उनके परिश्रम का प्रतिफल मिला है और अब वे उत्तर प्रदेश सरकार के अलग-अलग विभागों का हिस्सा बन रहे हैं।   साढ़े नौ लाख युवाओं को मिल चुकी सरकारी नौकरी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अब तक प्रदेश के साढ़े नौ लाख युवाओं को पारदर्शी तरीके से विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दी गई है। नियुक्तियों का क्रम आगे भी जारी रहेगा। शनिवार को भी करीब एक हजार लोगों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे।   उन्होंने कहा कि अगले छह महीने में एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य है। जो लोग यह काम नहीं कर पाए, वे आज प्रश्न खड़े कर रहे हैं। वे गिनते जाएं, हम देते जाएंगे। एक लाख से कम युवाओं को नौकरी देने पर नहीं, उससे ज्यादा पर ही चर्चा होगी।   पुलिस में 36 हजार, होमगार्ड में 41 से 42 हजार नियुक्तियां मुख्यमंत्री योगी ने आगामी नियुक्तियों का ब्योरा देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस में 36 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जाने हैं। उनकी परीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं और फिजिकल व मेडिकल की प्रक्रिया चल रही है। होमगार्ड में भी 41 से 42 हजार नियुक्तियां हो रही हैं।   उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से अगले छह महीने में आने वाले परिणामों के माध्यम से 25 से 30 हजार नए युवाओं को अवसर मिलेगा। उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग से करीब 20 से 25 हजार नौजवानों को अवसर मिलने वाला है। कुछ के परिणाम आने शुरू हो गए हैं और कुछ की परीक्षाएं चल रही हैं। अगले तीन से चार महीने में इनके परिणाम भी सामने आ जाएंगे। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से भी अलग-अलग विभागों में 15 से 16 हजार युवाओं को अवसर मिलेगा।   भर्ती बोर्ड राजनीति का शिकार न हों तो ऐसे मिलते हैं परिणाम मुख्यमंत्री योगी ने भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध, पारदर्शी और शुचितापूर्ण तरीके से पूरी करने के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्षों एवं सदस्यों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि भर्ती बोर्ड और आयोग शासन की राजनीति का शिकार नहीं होते और परीक्षाएं पारदर्शी व शुचितापूर्ण तरीके से संपन्न होती हैं तो उसके परिणाम ऐसे ही देखने को मिलते हैं।   भाई-भतीजों को बैठाकर भर्ती प्रक्रिया को किया बदनाम मुख्यमंत्री योगी ने पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा कि 2017 से पहले आयोग और भर्ती बोर्डों में तत्कालीन सरकारों ने अपने भाई-भतीजों को बैठाकर पूरी प्रक्रिया को बदनाम कर रखा था। एक भी भर्ती ईमानदारीपूर्वक नहीं होती थी। युवा पलायन करता था और प्रदेश के बाहर उसके सामने पहचान का संकट खड़ा था।   उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का चेयरमैन ऐसे व्यक्ति को बनाया गया था, जो स्वयं उस पद के लिए योग्य नहीं था। इसके बाद वहां जो स्थिति बनी, उसके खिलाफ न्यायालय को कहना पड़ा और प्रदेश के युवाओं को सड़कों पर उतरना पड़ा।   मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार में ऐसी भर्तियां भी हुईं, जिनमें आवेदन नहीं करने वालों को नियुक्ति पत्र मिल गया और आवेदन करने वाले देखते रह गए। विज्ञापन जारी होते ही वसूली के लिए अलग-अलग गिरोह और सिंडिकेट सक्रिय हो जाते थे। सरकार ने समूह ग और घ की भर्तियों से साक्षात्कार की व्यवस्था समाप्त कर दी।   बीमार यूपी नहीं, सरकारों की मानसिकता बीमार थी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के नौजवानों की प्रतिभा को सम्मान नहीं मिला। उस समय की सरकारों की बीमारू मानसिकता के कारण उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य बन गया था। उन्होंने कहा कि बीमार उत्तर प्रदेश नहीं था, सरकारों की मानसिकता बीमार थी। उनकी कार्यप्रणाली भ्रष्ट और भेदभावपूर्ण थी।   उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें प्रदेश की युवा शक्ति को समस्या मानती थीं, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे उत्तर प्रदेश की आर्थिक ताकत और अवसर के रूप में देखा। प्रदेश की संभावनाओं को प्रतिभाशाली युवाओं के माध्यम से आगे बढ़ाने का काम किया गया।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जो उत्तर प्रदेश 2017 से पहले सबसे गरीब राज्यों में माना जाता था और पहचान के संकट से गुजर रहा था, वही प्रदेश पिछले छह वर्षों से लगातार रेवेन्यू सरप्लस स्टेट है। आज उत्तर प्रदेश भारत के ग्रोथ इंजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और देश की टॉप तीन अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है।   उन्होंने कहा कि नौ वर्षों में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय और अर्थव्यवस्था तीन गुना हुई है। महिला कार्यबल … Read more

मध्यप्रदेश में मानसून का 89.3% कोटा पूरा, 21 सितंबर तक बारिश के आसार

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून अब अपने अंतिम पड़ाव में है। सीजन खत्म होने में महज 11 दिन बाकी हैं और प्रदेश में अब तक 33.2 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के कोटे का 89.3 प्रतिशत है। यानी करीब 4.1 इंच पानी की कमी अभी बनी हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले चार दिन प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद महीने के आखिरी सप्ताह में किसी मजबूत मौसम प्रणाली के सक्रिय होने पर कुछ जिलों में तेज बारिश हो सकती है। इससे प्रदेश बारिश के सामान्य आंकड़े के करीब पहुंच सकता है ।हालांकि, सभी जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य तक पहुंचना आसान नहीं होगा। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में बारिश की कमी बनी है। इंदौर, धार, आलीराजपुर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, सागर, उज्जैन, रतलाम और शाजापुर में अभी सामान्य बारिश का 80 प्रतिशत पानी भी नहीं गिरा है। इन जिलों में सामान्य आंकड़ा पूरा करने के लिए मानसून के बचे दिनों में लगातार बारिश की जरूरत होगी। वहीं, मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य से दोगुने से अधिक पानी गिर चुका है। 37 जिलों में अभी सामान्य से कम बारिश प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज हो चुकी है। इसके उलट बाकी 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है।प्रदेश की सामान्य मानसूनी बारिश 37.3 इंच है। इस लिहाज से सामान्य आंकड़ा पूरा करने के लिए अब करीब 4.1 इंच बारिश की जरूरत है। मऊगंज और निवाड़ी में दोगुने से ज्यादा पानी दूसरी ओर, प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश सामान्य आंकड़े से काफी आगे निकल चुकी है। मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य कोटे की तुलना में दोगुनी बारिश हो चुकी है। यानी जहां कुछ जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं इन जिलों में सामान्य से काफी ज्यादा पानी गिर चुका है। इन जिलों में सामान्य या ज्यादा बारिश प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है। इसके अलावा प्रदेश के 37 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। अब मानसून के अंतिम 11 दिन इन जिलों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो कई जिलों का बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच सकता है। 22 सितंबर तक होगी हल्की बारिश मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, अगले चार दिन यानी 22 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर बना रह सकता है। पश्चिमी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय होने से कुछ जिलों में बारिश हो रही है। वहीं, 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के संकेत हैं। इसके असर से प्रदेश में मौसम में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है। जून की कमी अब तक पूरी नहीं हुई इस मानसून में सबसे बड़ी कमी जून में रही। जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन बाद में मानसून में दो बार ब्रेक आया और कई दिन बारिश थमी रही। जुलाई और अगस्त में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो गया, लेकिन जून की कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी। सितंबर में बारिश होने के बावजूद पूरे मानसून में अब तक करीब 7 प्रतिशत की कमी बनी हुई है। 22 सितंबर तक हल्की बारिश का दौर मौसम विभाग ने अगले चार दिन यानी, 22 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, इस समय पश्चिमी हिस्से में एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन सिस्टम (चक्रवात) एक्टिव है। इस वजह से पश्चिमी हिस्से के जिलों में बारिश का दौर बना हुआ है। 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा–उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के संकेत हैं। इस सिस्टम से एमपी के मौसम में एक और बदलाव का आधार बन सकती है। जून में सूखा, जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई और फिर अगस्त का भी कोटा फुल हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह है कि अब तक भी प्रदेश में 7 प्रतिशत कम पानी गिरा है। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है। भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 5 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था। इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।  

पेंशन बंद करने के फैसले से प्राध्यापकों में नाराजगी, बोले- अपना फैसला वापस ले सरकार

हमारे पढ़ाए विद्यार्थी देश सेवा कर रहे हैं पर हमें रोटी के लिए तरसा दिए पेंशन बंद कर देने से प्राध्यापक परेशान, अपना फैसला वापस ले  रायपुर/ बिलासपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 सितम्बर 2026 को एक तुगलकी और दमनकारी आदेश जारी कर प्रदेश के अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों से सेवानिवृत हुए 400 से अधिक प्राध्यापकों और तृतीय व चतुर्थ कर्मचारियों की पेंशन अचानक बंद कर उनके समक्ष उनके जीवन-यापन, अपने इलाज और पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है l  छत्तीसगढ़ अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ ने प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि राज्य सरकार के 11 सितम्बर 2026 को जारी आदेश के अनुसार इन अनुदानित अशासकीय महाविधालयों में वर्तमान में कार्यरत प्राध्यापकों एवं तृतीय व चतुर्थ कर्मचारियों की पेंशन व ग्रेच्युटी की पात्रता व प्रावधान को अचानक सेवावधि के बीच में ही समाप्त कर दिया है l इससे वर्त्तमान में कार्यरत प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों को सेवानिवृत होने पर जीवन-यापन की समस्याओं से जूझना होगा l  राज्य सरकार अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों व कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति पर पेंशन व ग्रेच्युटी का निरंतर भुगतान गत 37 वर्षों से करती आ रही है। 26 अक्टूबर 2010 को तत्कालीन मुख्य मंत्री डॉ रमन सिंह ने इन प्राध्यापकों व कर्मचारियों की मांग पर पांचवें वेतनमान में पेंशन तथा चौथे वेतनमान में ग्रेच्युटी देना आरम्भ किया। तब से सेवानिवृत प्राध्यापक व कर्मी पांचवें वेतनमान में निरंतर पेंशन प्राप्त करते रहे हैं । हालांकि पेंशनर्स की यह मांग थी कि शासकीय महाविद्यालयों के पेंशनर्स के समकक्ष जो जिस वेतनमान में सेवानिवृत हो रहा है, उसे उसी वेतनमान में पेंशन व ग्रेच्युटी प्रदान की जाए ।  संघ के अध्यक्ष डी एन शर्मा व महासचिव।       ने बताया कि वेतनमान के अनुरूप पेंशन व ग्रेच्युटी के अधिकार को लेकर  उच्च न्यायालय में 80 से अधिक सेवानिवृत्त प्राध्यापकों द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर अलग अलग निर्णयों में राज्य सरकार को आदेश दिया कि जो प्राध्यापक जिस वेतनमान में सेवानिवृत हुआ है, उसे उसी वेतनमान में पेंशन तथा ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाए । इस निर्णय के विरुद्ध राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय (डबल बेंच) में दायर कई रिवीजन याचिकाओं को भी खारिज कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेना करने पर 50 से अधिक पेंशनभोगी प्राध्यापकों ने उच्च न्यायालय में राज्य सरकार के विरुद्ध ‘न्यायालय की अवमानना’ के कंटेंप्ट प्रकरण दायर किये हैं, जिन पर कार्यवाही लंबित है । हालाकि डॉ आर के उपाध्याय व डॉ सी के तिवारी के कंटेंप्ट प्रकरण पर उच्च न्यायालय के आदेश पर राज्य सरकार द्वारा उन्हें 6वें वेतनमान में ग्रेच्युटी का भुगतान कर, 6वें वेतनमान में पेंशन दी जा रही है, जो इस आदेश के बाद रोक दी गई है l स्थिति यह है कि गत दो माहों (जुलाई व अगस्त) की किसी भी पेंशनभोगी को पेंशन का भुगतान राज्य सरकार द्वारा अब तक नहीं किया गया है l    उच्च न्यायालय द्वारा पेंशनर्स के उपयुक्त वेतनमान में पेंशन देने के अधिकार को मान्य कर उनके हित में दिये गए आदेशों से क्षुब्ध होकर राज्य सरकार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी (विशेष पुनरीक्षण याचिका) दायर की थी; जो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गईं हैं l पेंशनर्स को उनका हक नहीं देने के लिए राज्य सरकार ने 27 पेंशनर्स के मामले फिर से सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर कर दी है।  जब सरकार को लगा कि मा न्यायालयों से पेंशनर्स प्राध्यापकों को उनका अधिकार मिल जाएगा तो दमनकारी रवैया अपनाते हुए पांचवें वेतनमान में पेंशन तथा चौथे वेतनमान में ग्रेच्युटी प्रदान करने के डॉ रमन सिंह सरकार द्वारा जारी आदेश को विष्णुदेव साय सरकार ने 22 अगस्त 26 की मंत्रिमंडल की बैठक में पलटकर निरस्त कर दिया। इस निर्णय के अनुसरण में 1 सितंबर 2026 और 11 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर राज्य में अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय के प्राध्यापकों और कर्मचारियों को मिल रही पेंशन 1 सितंबर 2026 से बंद कर दी है। यहाँ तक कि जुलाई व अगस्त माहों की पेंशन का भुगतान भी राज्य सरकार ने रोक दिया है ।  विष्णुदेव साय सरकार के इस दमनकारी निर्णय से सेवानिवृत वृद्द प्राध्यापक व कर्मचारी गंभीर आर्थिक कठिनाइयों में आ गए हैं । बीपी, डायबिटीज, हार्ट रोगों, घुटनों के दर्द सहित उम्र जनित बीमारियों के चलते बुढ़ापे के दौर में पारिवारिक जिम्मेदारियां के निर्वाह के लिए पेंशन ही उनके जीवन का सहारा थी l   उक्त जानकारी देते हुए संघ ने मांग की है कि  हमारे राज्य सरकार से यह मांग है कि राज्य सरकार 1 सितंबर 2026 तथा 11 सितंबर 2026 के पेंशन व ग्रेच्युटी बंद करने के आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले और सभी पेंशनर्स की पेंशन को यथावत लागू करें। जुलाई व अगस्त की पेंशन का भुगतान अति शीघ्र किया जाये ।वयोवृद्द व असहाय होते प्राध्यापकों और कर्मचारियों के प्रति सरकार की हठधर्मिता और भेदभाव व उत्पीडन वाले   उपेक्षापूर्ण रवैय्ये से हम सब प्राध्यापक हैरान व दुखी हैं। हम अत्यधिक वेदना और पीड़ा के साथ यह व्यक्त कर रहे हैं कि हम प्राध्यापकों ने प्रदेश की उच्च शिक्षा में उस समय से अपना महत्वपूर्ण योगदान देते आ रहे हैं जब अंचल/प्रदेश में गुणवत्तायुक्त उच्च शिक्षा के संस्थान बहुत ही कम थे; और फिर भी हम वर्तमान राज्य सरकार द्वारा पुरस्कारस्वरूप सताये जा रहे हैं। हमारे पढ़ाये हुए विद्यार्थी आईएएस, आईपीएस, वैज्ञानिक, न्यायाधीश,  मंत्री, विधायक, सांसद जैसे राजनेता व अन्य उच्च पदों आसीन हुए हैं। कई अंतर-राष्ट्रीय खिलाडी भी दिए हैं l

नशे के खिलाफ पंजाब की नई पहल, ‘एंटी-ड्रग कोर्स’ में बच्चों को दी जा रही ट्रेनिंग

चंडीगढ़. पंजाब के स्कूलों में विद्यार्थियों को अब नशे से दूर रहने की नसीहत सिर्फ भाषणों के जरिए नहीं दी जा रही। उन्हें उन लोगों की असली कहानी दिखाई जा रही है, जिन्होंने नशे की शुरुआत की, धीरे-धीरे उसकी लत में फंसे और फिर उससे बाहर निकलने के लिए संघर्ष किया। इन कहानियों से विद्यार्थियों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि नशा किसी एक दिन में जिंदगी नहीं बदलता, बल्कि छोटी शुरुआत से धीरे-धीरे व्यक्ति को अपनी गिरफ्त में ले सकता है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि लत लगने के बाद उससे बाहर निकलना केवल इच्छाशक्ति का मामला नहीं होता, बल्कि इसके लिए उपचार और विशेषज्ञ मदद की जरूरत पड़ सकती है। शिक्षा विभाग ने इसी सोच के साथ कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 14 सप्ताह का विशेष नशा विरोधी पाठ्यक्रम तैयार किया है। राज्य के करीब 3600 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के 7.5 लाख से अधिक विद्यार्थी इसके दायरे में आएंगे। जे-पाल से जुड़े सहयोगी संस्थानों के साथ तैयार किए गए इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को वास्तविक अनुभवों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।

दुर्ग में सस्ती सब्जियों की सौगात, नगर निगम ने शुरू की ‘सब्जी की टोकरी’

दुर्ग. नगर निगम दुर्ग द्वारा शहरवासियों को किफायती दरों पर ताजी, स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण फल-सब्जियां उपलब्ध कराने की दिशा में एक अभिनव पहल की गई है। सेवा संकल्प अभियान के तहत रायपुर नाका स्थित वार्ड 21 के पंचरत्न गार्डन में ‘सब्जी की टोकरी’ केंद्र का शुभारंभ मेयर अलका बाघमार ने किया। महापौर ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत निगम द्वारा जनहित में यह अभिनव पहल शुरू की गई है। सब्जी की टोकरी का उद्देश्य आमजन को उनके आसपास ही ताजी, स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती दरों पर फल-सब्जियां उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इस पहल से शहरवासियों को बेहतर गुणवत्ता की ताजी सब्जियां एवं फल आसानी से उपलब्ध होंगे। निकट भविष्य में कीटनाशक एवं रसायन मुक्त फल- सब्जियां उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे। निगम का उद्देश्य शहरवासियों को सुविधाजनक, स्वच्छ और व्यवस्थित बाजार की सुविधा उपलब्ध कराना है। पंचरत्न गार्डन, रायपुर नाका, वार्ड 21 में दोपहर 2 बजे से सुविधा उपलब्ध होगी। इस अवसर पर एमआईसी सदस्य लीना दिनेश देवांगन, वार्ड पार्षद विद्यावती सिंह, अरुण सिंह, चंद्रिका चन्द्राकर, कुमुद बघेल सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। मेयर ने कहा कि सब्जी की टोकरी केवल फल-सब्जी उपलब्ध कराने की पहल नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का माध्यम भी है। प्रत्येक केंद्र पर दो महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि दुर्ग नगर निगम द्वारा शहर को स्वच्छ, सुंदर एवं स्मार्ट बनाने के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। सब्जी की टोकरी भी इसी दिशा में एक जनहितकारी पहल है, जिसका लाभ शहरवासियों को सीधे मिलेगा। इससे नागरिकों को उचित एवं किफायती दरों पर ताजी सब्जियां और फल उपलब्ध होने के साथ ही स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। नाना-नानी पार्क सहित 10 अन्य स्थान चिन्हित मेयर ने कहा कि नगर निगम द्वारा शहर के लगभग 10 विभिन्न स्थानों पर किफायती सब्जी एवं फल की दुकानें शुरू की जाएंगी। इसके लिए वार्ड 51 स्थित नाना-नानी पार्क सहित अन्य स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है, जहां जल्द ही ऐसी दुकानें प्रारंभ की जाएंगी। निगम प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि यदि वे सस्ती, ताजी एवं गुणवत्तापूर्ण फल सब्जियां खरीदना चाहते हैं, तो सेवा संकल्प सब्जी टोकरी केंद्र का लाभ उठाएं।

लुधियाना में सियासी हलचल, CM मान के काफिले पर टमाटर फेंकने की कोशिश; BJP नेता हिरासत में

 लुधियाना पंजाब के लुधियाना में शनिवार दोपहर करीब दो बजे के करीब बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. वे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के काफिले पर टमाटर और अंडे फेंकने की कोशिश कर रहे थे. उन्हें पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी यानी पीएयू के गेट से हिरासत में लेकर वहां से ले जाया गया. बताया जा रहा है कि बिट्टू काफिले के ज्यादा करीब नहीं पहुंच पाए थे, लेकिन वे पीएयू गेट तक जरूर पहुंच गए थे।  आम आदमी पार्टी ने आज लुधियाना में एक बड़ा कार्यक्रम रखा था. इसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान, मनीष सिसोदिया और पार्टी के कई दूसरे नेताओं को शामिल होना था. सभी नेता कार्यक्रम के लिए लुधियाना पहुंच रहे थे. मुख्यमंत्री का काफिला पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी के बाहर से गुजरना था।  इसी रास्ते पर रवनीत बिट्टू हाथ में टमाटर लेकर पहुंच गए. पुलिस ने उन्हें पहले ही आगे बढ़ने से रोक दिया. इसके बाद जब मुख्यमंत्री का काफिला वहां से निकला, तो बिट्टू ने भगवंत मान की गाड़ी पर टमाटर फेंकने की कोशिश की. पुलिस मौके पर मौजूद थी और उसने बिट्टू को हिरासत में ले लिया।  इस पूरे मामले की जड़ कल की घटना बताई जा रही है. कल बटाला के पास रवनीत बिट्टू के काफिले पर आम आदमी पार्टी के वर्करों ने अंडे और टमाटर फेंके थे. उसी घटना के विरोध में बिट्टू आज लुधियाना पहुंचे थे. उनका मकसद था कि वे भी भगवंत मान के काफिले पर टमाटर फेंककर इसका जवाब दें।  सीएम भगवंत मान के आने से मीडिया से बात करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सीएम मान पर जमकर निशाना साधा। हाथों में अंडे-टमाटर और शराब की बॉटल लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भगवंत मान को अपनी शराब का मजा लेना चाहिए। उन्हें पंजाब की जिम्मेदारी आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को सौंप देनी चाहिए। बता दें, पश्चिम बंगाल के बाद पंजाब में भी अंडा वाली राजनीति जोर पकड़ रही है। शुक्रवार को भाजपा नेता के काफिले के ऊपर अंडे फेंके गए थे। भाजपा नेता बोले- हमला कर सकता था लेकिन नहीं किया पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पंजाब आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की तरह वह भी सीएम मान के काफिले पर हमला कर सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा, "मैं भी इसी तरह से हमला कर सकता था। लेकिन भाजपा की राजनीति कभी भी इतना नीचे नहीं गिर सकती।" बिट्टू ने इस मामले में एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आने पर कहा कि अगर उनके ऊपर इस प्रदर्शन के लिए एफआईआर दर्ज होती है, तो फिर उन आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं के ऊपर एफआईआर होनी चाहिए, जिन्होंने उनके काफिले पर हमला किया था। बता दें, भाजपा की तरफ से आरोप लगाया गया है कि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पूर्व केंद्रीय मंत्री बिट्टू के काफिले के ऊपर अंडे और टमाटर फेंके हैं। भाजपा की नशामुक्त पंजाब यात्रा का विरोध कर रही आप- पूर्व केंद्रीय मंत्री बिट्टू पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आम आदमी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी नशामुक्त पंजाब यात्रा की शुरुआत कर रही है लेकिन आप उसका विरोध कर रही है। पंजाब आप के नेता काले झंड़े दिखा रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे विरोध प्रदर्शनों को तुरंत रोका जाना चाहिए। अगर सत्ताधारी पार्टी भाजपा के कार्यक्रमों में रुकावट पैदा करती है,तो उसे भी ऐसे ही नतीजों का सामना करना पड़ेगा। वर्तमान में पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीति सिंह बिट्टू को लुधियाना पुलिस ने हिरासत में ले रखा है। यानी दो दिन में दो बार राजनीतिक टकराव सामने आया. पहले बटाला के पास बिट्टू के काफिले पर अंडे और टमाटर फेंके गए और अब लुधियाना में बिट्टू खुद टमाटर लेकर मुख्यमंत्री के काफिले के रास्ते पर पहुंच गए. घटना ने बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच की खींचतान को सामने ला दिया।  पूरे मामले में बिट्टू के हाथ में टमाटर होने और काफिले पर फेंकने की कोशिश की बात सामने आई है. हालांकि वे काफिले के करीब नहीं पहुंच सके, क्योंकि पुलिस ने उन्हें रोक लिया था. पुलिस उन्हें पीएयू से अपने साथ ले गई. फिलहाल यह जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है। 

हरियाणा में पशुपालकों को बड़ी राहत, 19.19 लाख पशुओं का बीमा, ₹23.68 करोड़ की मदद

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार अब पशुपालन को केवल ग्रामीण परिवारों की पारंपरिक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि नियमित और लाभकारी स्वरोजगार के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। सरकार का जोर पशुधन की उत्पादकता, स्वास्थ्य और नस्ल सुधार के साथ पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देने पर है। इसी कड़ी में पशुधन बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, आधुनिक पशु चिकित्सा सुविधाओं और बेहतर नस्ल के लिए तकनीक का विस्तार किया जा रहा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना के तहत 31 अगस्त 2026 तक 19.91 लाख पशुओं का बीमा किया गया है। वर्ष 2018-19 से 31 अगस्त 2026 तक 32,679 बीमा दावों का निपटारा कर पशुपालकों को 123.68 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। सामान्य श्रेणी के पशुपालकों को प्रीमियम में 85 प्रतिशत और अनुसूचित जाति परिवारों को 100 प्रतिशत सहायता देने का प्रविधान किया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार, हरियाणा सरकार ने पशुपालन को कारोबार के रूप में बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता का दायरा बढ़ाया है। मई 2026 तक 2.31 लाख पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत किए गए और 3,478 करोड़ रुपये वितरित किए गए। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत भेड़, बकरी, सूकर पालन और चारा इकाइयों के लिए 10 से 50 लाख रुपये तक सब्सिडी का प्रविधान है। अब तक 10 लाभार्थियों को 2.62 करोड़ रुपये की सहायता मिली है।

चंडीगढ़ में पार्किंग शुल्क बदलेगा, सेक्टर-17 की 20 पेड पार्किंग के नए रेट तय

चंडीगढ़. सेक्टर-17 की पार्किंग व्यवस्था अब निजी हाथों में जाने की तैयारी है। नगर निगम ने सेक्टर-17 की सभी 20 पेड पार्किंग को एक साथ निजी एजेंसी को ठेके पर देने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें सेक्टर-17 की मल्टीलेवल पार्किंग भी शामिल है। प्रस्ताव को मंजूरी के लिए 22 सितंबर को नगर निगम हाउस की बैठक में रखा जाएगा। ठेकेदार को पार्किंग के संचालन के साथ कर्मचारियों की तैनाती, रखरखाव और निर्धारित शुल्क की वसूली की जिम्मेदारी संभालनी होगी। निगम का मानना है कि एक एजेंसी के माध्यम से सभी पार्किंग संचालित होने से व्यवस्था की निगरानी आसान होगी और राजस्व में भी सुधार हो सकता है। ठेका मिलने के बाद 50 से अधिक चारपहिया वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग में 30 दिन के भीतर स्मार्ट पार्किंग व्यवस्था शुरू करनी होगी। इसके तहत बूम बैरियर, सीसीटीवी कैमरे, पीओएस मशीन, डिजिटल भुगतान, ई-टिकट और वेब आधारित डैशबोर्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। निगम अधिकारियों के निरीक्षण के बाद ही संशोधित पार्किंग शुल्क लागू किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था में टू व्हीलर के लिए आठ घंटे तक 10 रुपये और उसके बाद 15 रुपये, जबकि चारपहिया वाहन के लिए आठ घंटे तक 20 रुपये और उसके बाद 30 रुपये शुल्क रखा गया है। मिनी बस और टैक्सी के लिए 40 रुपये तथा टूरिस्ट बस के लिए 75 रुपये तक शुल्क प्रस्तावित है। ई-वाहनों को मार्च 2027 तक मुफ्त पार्किंग इलेक्ट्रिक वाहनों को 31 मार्च 2027 तक मुफ्त पार्किंग देने का प्रावधान प्रस्ताव में रखा गया है। टैक्सी, कैब और आटो समेत वैध पीली नंबर प्लेट वाले वाहनों को यात्रियों को उतारने या बैठाने के लिए 10 मिनट तक शुल्क नहीं देना होगा। दोपहिया डिलीवरी वाहनों को भी 10 मिनट तक शुल्क से राहत मिलेगी। पार्किंग का संचालन सुबह आठ से रात दस बजे तक प्रस्तावित है। पुराने विवादों के बीच निगम की नई कवायद शहर में पहले पार्किंग ठेकों को लेकर निगम और ठेकेदारों के बीच विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में 20 पार्किंग को एक एजेंसी को देने के प्रस्ताव पर निगम हाउस में राजस्व, ठेकेदार की जवाबदेही, शुल्क वसूली और निगरानी व्यवस्था को लेकर चर्चा होने की संभावना है। निगम यदि सेक्टर-17 में इस मॉडल को लागू करता है तो भविष्य में अन्य सेक्टरों की पेड पार्किंग को भी इसी तर्ज पर निजी एजेंसी को देने का रास्ता खुल सकता है।

GST फर्जीवाड़े का मामला? अगस्त्य इंटरप्राइजेस ने बोगस फर्मों से की ₹141 करोड़ की खरीद

रायपुर. राजधानी में अगस्त्य इंटरप्राइजेस के नाम पर जीएसटी फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। कंपनी ने बोगस कंपनियों से 141.74 करोड़ रुपए की खरीदी- बिक्री दिखाकर 23.43 करोड़ रुपए की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) ली। /बिलों की जांच और संबंधित कंपनियों के भौतिक सत्यापन में कई फमें फर्जी या अस्तित्वहीन मिली। जीएसटी अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने संचालक अमन अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, लाभांडी सिग्नेचर होम निवासी अमन अग्रवाल अगस्त्य इंटरप्राइजेस के संचालक हैं। विभाग की जांच में सामने आया कि कंपनी ने अलग-अलग फर्मों से खरीदी के बिल दिखाए और उनके आधार पर आईटीसी का दावा किया। सत्यापन के दौरान कई दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली। इनमें 16 साल पहले मृत व्यक्ति के नाम से किरायानामा बनाकर कारोबार दिखाने का मामला भी शामिल हैं। मृत व्यापारी के नाम किरायानामा, बैंक खाते से भी इनकार भिलाई की हुसैनी इंटरप्राइजेस से अगस्त्य इंटरप्राइजेस ने 16.61 करोड़ रुपए की बिक्री और 2.99 करोड़ रुपए की आईटीसी दिखाई। फर्म के पते के लिए फूल सिंह के नाम किरायानामा लगाया गया था। जीएसटी जांच में सामने आया कि फूल सिंह की वर्ष 2010 में ही मौत हो चुकी थी, जबकि किरायानामा 21 मार्च 2025 का बनाया गया था। भिलाई में चूड़ी की दुकान चलाने वाले मोहम्मद इस्लाम ने अगस्त्य इंटरप्राइजेस से कारोबार और बैंक खाते में लेन- देन से इनकार किया। इंटरप्राइजेस के नाम पर 11.61 करोड़ रुपए की विक्री और 2.08 करोड़ रुपए की आईटीसी दिखाई गई। इन फर्मों से दिखाया कारोबार अंसारी ट्रेडर्स: 30.71 करोड़ बिक्री, 5.52 करोड़, आईटीसी ललित ट्रेड लिंक: 29.72 करोड़ बिक्री, 5.17 करोड़, आईटीसी अगस्त इंटरप्राइजेस: 22.47 करोड़ बिक्री 4.04 करोड़, आईटीसी विनायक वेंचर्स: 17.95 करोड़ बिक्री, 1.36 करोड़, आईटीसी हुसैनी इंटरप्राइजेस: 16.61 करोड़ बिक्री, 2.99 करोड़ आईटीसी महावीर इंटरप्राइजेस: 12.67 करोड़ बिक्री, 2.27 करोड़ आईटीसी यूनिक इंटरप्राइजेस: 11.61 करोड़ बिक्री, 2.08 करोड़ आईटीसी (तीन अन्य कंपनियों के नाम पर भी आईटीसी का दावा किया गया।) फर्जी बिल से ऐसे होता है खेल सबसे पहले जाली दस्तावेजों, झूठे पते या फर्जी किरायानामे के जरिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। बिना कोई असली सामान खरीदे या बेचे, सिर्फ कागजों पर जीएसटी वाले बिल बना लिए जाते हैं। खरीदार इन्हीं फर्जी बिलों को दिखाकर सरकार से टैक्स में छूट या रिफंड (इनपुट टैक्स क्रेडिट) ले लेता है। जांच से बचने के लिए एक फर्जी कंपनी दूसरी और फिर तीसरी कंपनी को बिल काटती है, ताकि कागजों पर कारोबार असली लगे। जब जीएसटी विभाग पते पर जाकर भौतिक जांच करता है या बैंक खातों और ई-वे बिल का मिलान करता है, तो वहां कोई असली दुकान या माल नहीं मिलता और चोरी पकड़ी जाती है।

UPI चार्ज को लेकर इंदौर में व्यापारी नाराज, दुकानों पर पोस्टर; कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

इंदौर/ग्वालियर केंद्र सरकार द्वारा जब से यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर यानि मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने की घोषणा की गई है, तब से ही देश भर में व्यापारियों की नाराजगी जाहिर हो रही है. एक तरफ लोग इस नई व्यवस्था से परेशान हैं तो वहीं विपक्ष भी सरकार को निशाने पर लिए हुए है. ग्वालियर में कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. वहीं, इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों ने दुकानों पर इस संबंध में पोस्टर लगाए हैं।  इंदौर में व्यापारियों ने लगाए पोस्टर, 125 संगठनों की बैठक इंदौर में एमडीआर के खिलाफ मैदान में उतरे व्यापारियों का कहना है कि, ''यदि ऐसे भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो इससे डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों और व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत का असर पड़ सकता है. इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने बताया कि, ''अभियान के अगले चरण में सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की तैयारी है. संगठन की ओर से चार दिनों में करीब 10 लाख उपभोक्ताओं को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. इसके जरिए व्यापारियों की आपत्ति और उनकी मांग को व्यापक स्तर पर सामने रखने का प्रयास किया जाएगा।  इंदौर निकलने से पहले सरकार पर निशाना इंदौर में शनिवार को राहुल गांधी के आने से पहले ही प्रदेश भर से कांग्रेस विधायकों नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी द्वारा बुलाया गया है. ग्वालियर से कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार भी इंदौर पहुंच रहे हैं. लेकिन ग्वालियर से रवाना होने से पहले विधायक सतीश सिकरवार मीडिया से मुखातिब हुए. इस दौरान उन्होंने 15 अक्टूबर को लागू होने जा रहे यूपी ट्रांजेक्शन पर एमडीआर को लेकर सरकार पर हमला बोला।  अलग-अलग टैक्स लगाकर सरकार कर रही जनता को परेशान विधायक सतीश सिकरवार का कहना है कि, ''जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तब से ही कोई ना कोई टैक्स लगाकर जानता को परेशान किया जा रहा है. पहले के समय में जैसे जज़िया कर लगा करता था, अंग्रेजों के जमाने में भी टैक्स लगते थे. उसी तरह सरकार हिटलरशाही चला रही है और आम आदमी को परेशान करने का काम कर रही है। एक तरफ ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा दूसरी और टैक्स की मार कांग्रेस ने विधायक का कहना है कि, सरकार एक तरफ आम आदमी से ऑनलाइन पेमेंट करने की बात कह रही है. सारा काम नगद में बंद करने की बात कहती है. वहीं दूसरी तरफ इस टैक्स लगाकर जनता के साथ खिलवाड़ कर रही है. ये निंदनीय है आने वाले समय में जनता इसका जवाब जरूर देगी।  एमपी चेंबर ऑफ कॉमर्स ने की एमडीआर स्थगित करने की मांग मध्य प्रदेश चैम्बर ऑफ कॉमर्स ग्वालियर के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल का भी कहना है कि, ''डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के चक्कर में पहले ही कई व्यापारी वर्ग कई बार यूपीआई ट्रांजेक्शन से साइबर फ्रॉड्स, उनकी वजह से अकाउंट फ्रीज और फिर रिकवरी जैसी परेशानियों से गुजर रहे हैं. ऐसे में MDR भी व्यापारियों के लिए एक नए टैक्स की तरह होगा. कई बार छोटे व्यापारी को तो एक लाख तक का माल बेचने पर बमुश्किल 500-700 रुपये का ही मुनाफा होता है. ऐसे में एमडीआर की वजह से वह मुनाफा भी एमडीआर में चला जाएगा. इन हालातों को अगर देखा जाए तो व्यापारियों के हित में सरकार को यह नया शुल्क स्थगित करना चाहिए।