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मध्यप्रदेश की नदियाँ हैं भारत की संस्कृति की धारा, मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश की नदियाँ भारत की सनातन संस्कृति की संवाहक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश है नदियों का मायका भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत का हृदय मध्यप्रदेश, यहां के अप्रतिम प्राकृतिक सौंदर्य और अथाह, अविरल जल राशि के लिए समूचे विश्व में जाना जाता है। मध्यप्रदेश में बहने वाली नदियां भारत की सनातन संस्कृति की संवाहक हैं, जिनके किनारे सदियों से हमारी शाश्वत सभ्यता फल फूल रही है। यहाँ की पहचान केवल प्राचीन धरोहरों, मंदिरों, किलों और जनजातीय संस्कृति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ की छोटी-बड़ी 750-800 नदियों से भी है।प्रदेश की इस समृद्ध जल राशि के कारण ही मध्यप्रदेश को ‘नदियों का मायका’ कहा जाता है। मध्यप्रदेश से उद्गमित छोटी-बड़ी नदियाँ, गंगा, नर्मदा, ताप्ती, गोदावरी, माही और महानदी जैसे विशाल नदी प्रवाह तंत्रों में समाहित होकर पूरे भारत की जीवन-रेखा बनाती हैं। मध्यप्रदेश की नदियाँ केवल भौतिक जल स्रोत नहीं, बल्कि संस्कृति की वाहक भी हैं। नदियों के किनारे प्राचीन नगरों, धार्मिक स्थलों और व्यापारिक मार्गों का विकास हुआ। क्षिप्रा नदी के तट पर बसा उज्जैन प्राचीन समय से ही खगोल विज्ञान और श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लंग के कारण धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। प्राचीन उज्जयिनी सिंहस्थ ‘कुंभ’ समागम का तीर्थ क्षेत्र भी है। नर्मदा नदी के तट पर बसे महेश्वर और ओंकारेश्वर शहर शैव परंपरा के प्रमुख तीर्थ-स्थल हैं। ओंकारेश्वर 12 ज्योर्तिलिंगों में एक है। बेतवा नदी के तट औऱ प्रवाह क्षेत्र के ओरछा, सांची और विदिशा मध्यकालीन भारत की सांस्कृतिक यशोगाथा के प्रतीक होने के साथ ही बौद्ध संस्कृति के उदयावसान के साक्षी भी रहे हैं। मध्यप्रदेश का अधिकांश भूभाग विंध्य और सतपुड़ा की पहाड़ियों से आच्छादित है। यही कारण है कि यह अनेक महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम स्थल है। नर्मदा और ताप्ती पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ हैं, जबकि सोन, क्षिप्रा, चंबल, बेतवा उत्तर और पूर्व की ओर बहकर अपनी अथाह जलराशि के साथ गंगा-यमुना में समाहित हो जाती हैं। माही, वैंगंगा, तवा जैसी नदियाँ भी अलग-अलग बेसिन को जल-पोषित करती हैं। इस भौगोलिक विविधता ने ही प्रदेश को नदी समृद्ध राज्य के रूप में प्रतिष्ठा दी है। पुण्य सलिला मां नर्मदा का दूसरा नाम रेवा भी है।भगवान शिव की पुत्री मानी जाने वाली रेवा मध्यप्रदेश और गुजरात दोनों की जीवन रेखा है। मान्यता है कि मां नर्मदा के दर्शन मात्र से ‘गंगा स्नान’ का पुण्य मिलता है। श्रद्धालुओं के लिए 3000 किमी से अधिक लंबी नर्मदा परिक्रमा जीवन का सबसे बड़ा तप माना जाता है। मां नर्मदा अमरकंटक से जन्म लेकर लेकर जबलपुर में धुआंधार जलप्रपात बनाती हुई गुजरात को अभिसिंचित कर लगभग 1312 किलोमीटर की यात्रा तय कर अरब सागर की खंभात की खाड़ी में विराम पाती हैं। महाभारत काल में चंबल नदी का नाम चर्मणवती था। यह भगवान परशुराम के जन्म-स्थल जानापाव से निकली। यह राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा बनाती है। जानापाव से निकलकर चंबल नदी मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित ‘पंचनदा’ संगम पर यमुना में परिमित जलराशि के साथ समाहित हो जाती है। बेतवा (वेत्रवती)  को मध्यप्रदेश की गंगा भी कहा जाता है। इसके तट पर राम राजा का ऐतिहासिक शहर ओरछा बसा है। विदिशा और सांची जैसे नगरों को भी इसने पोषित किया है। विंध्यांचल पर्वत से निकल कर लगभग 590 किलोमीटर दूरी तय कर यमुना नदी में जा मिलती है।  मोझदायिनी क्षिप्रा नदी के तट पर प्राचीन उज्जयिनी शहर बसा है। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर और सिंहस्थ कुम्भ समागम का यह तीर्थ क्षेत्र विश्वविख्यात है। क्षिप्रा को भी मालवा की गंगा कहा जाता है। क्षिप्रा नदी इंदौर जिले में उज्जैनी-मुंडला गांव के ककड़ी-बड़ली नामक स्थान से निकल कर लगभग 195 किलोमीटर की यात्रा के बाद चंबल नदी में मिल जाती है। रामायण और महाभारत में सोन नदी का उल्लेख मिलता है। इसे पुरुष वाचक ‘नद’ की संज्ञा भी दी गई है। महर्षि वाल्मीकि ने इसे सुभद्र कहा है। यह नदी प्रदेश में शहडोल और रीवा के क्षेत्रों को सींचती हुई बिहार में प्रवेश कर लगभग 784 किलोमीटर लंबी यात्रा के बाद पतितपावनी गंगा से संगम करती है। ताप्ती नदी सतपुड़ा की पहाड़ियों से निकलकर गुजरात तक जाती है और लगभग 724 किलोमीटर की दूरी तय कर खंभात की खाड़ी में मिल जाती है। माही नदी की विशेषता है कि यह कर्क रेखा को दो बार पार करती है। माही नदी भी मध्यप्रदेश से गुजरात तक 583 किलोमीटर की यात्रा कर खंभात की खाड़ी में मिल जाती है। मध्यप्रदेश से उद्गम पाने वाली अन्य प्रमुख नदियों में वैंनगंगा गोंडवाना क्षेत्र की जीवनरेखा है। तवा नर्मदा की सहायक नदी है, जिस पर मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा बाँध बना है। कालीसिंध, पार्वती, केन, शक्कर, जोहिला  स्थानीय कृषि और वन्य जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। मध्यप्रदेश की नदियों पर अनेक सिंचाई एवं जलविद्युत परियोजनाएँ बनी हैं, जिनसे लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती है। चंबल-पार्वती-कालीसिंध रिवर लिंक परियोजना मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों के साझा महत्व की परियोजना है। केन-बेतवा रिवर लिंक परियोजना मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए समृद्धि की गंगोत्री मानी जा रही है। ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्च परियोजना मध्यप्रदेश के बुरहानपुर एवं खंडवा और महाराष्ट्र के अकोला, अमरावती और बुलढाणा ज़िलों के भू-जल संकट और अनियमित वर्षा की समस्या का स्थायी समाधान मानी जा रही है। बाणसागर परियोजना सोन नदी पर बनी है। इससे शहडोल, रीवा और सीधी जिलों को लाभ पहुंच रहा है। तवा परियोजना नर्मदा की सहायक तवा पर निर्मित है। इससे होशंगाबाद क्षेत्र को सिंचाई और पेयजल की पूर्ति हो रही है। गांधीसागर परियोजना चंबल नदी पर बनाई गई है। इससे  जलविद्युत बनाई जा रही है, साथ ही बड़े क्षेत्र में सिंचाई हो रही है। ओंकारेश्वर एवं बरगी परियोजना नर्मदा नदी पर निर्मित है। यह प्रदेश की ऊर्जा और जल आपूर्ति के प्रमुख आधारों में से एक है।

MP में बारिश का कहर: नदी के उफान से ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, युवकों का रेस्क्यू

बैतूल ग्रामीणों की मदद से सुरक्षा उपकरण और रस्सियों का इस्तेमाल कर नदी के बीच करीब 30 मीटर दूर चट्टान तक पहुंचकर तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।  ट्रैक्टर में सवार पांच लोगों में से दो युवक तैरकर बाहर निकल आए, जबकि तीन युवक ट्रैक्टर-ट्रॉली के सहारे नदी के बीच फंसे रह गए। सूचना मिलते ही थाना चोपना से पुलिस टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों की मदद से सुरक्षा उपकरणों और रस्सियों का उपयोग कर पुलिस टीम ने अपनी जान जोखिम में डालते हुए करीब 30 मीटर दूर चट्टान तक पहुंच बनाई। साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ग्राम गुवाड़ी निवासी सुरेश उइके, आदित्य उइके, आयुष उइके, पीयूष उइके एवं शर्मा भलावी ने पुलिस को बताया कि वे अपने पिता के सेवानिवृत्त होने पर उनका सामान सारणी से लेकर गांव लौट रहे थे। रात होने के कारण रपटे पर पानी के बहाव का अंदाजा नहीं लगा पाए और हादसे का शिकार हो गए। बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम की वजह से अगस्त महीने के आखिरी दिनों में पूरा मध्यप्रदेश भीगेगा। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के जिलों में ज्यादा असर देखने को मिलेगा। यहां 21 अगस्त से अति भारी बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे में आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में भारी बारिश हो सकती है। यहां साढ़े 4 इंच तक पानी गिरने का अनुमान है। इसके बाद सिस्टम और स्ट्रॉन्ग होगा। 21 और 22 अगस्त को दक्षिणी और पूर्वी हिस्सा तरबतर हो जाएगा। नदी में ट्रॉली पलटी, चट्टान में फंसे 3 युवक बैतूल के चोपना थाना क्षेत्र में भड़ंगा नदी में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे बटकीडोह-नारायणपुर के बीच भड़ंगा नदी के रपटे पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पानी के तेज बहाव में पलट गई। ट्रॉली पर सवार 5 युवकों में से 2 तैरकर बाहर निकल आए, जबकि 3 युवक नदी के बीच चट्टान पर फंस गए। सूचना मिलते ही चोपना टीआई नरेंद्र सिंह परिहार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान शुरू कराया। ग्रामीणों की मदद से सुरक्षा उपकरण और रस्सियों का इस्तेमाल कर नदी के बीच करीब 30 मीटर दूर चट्टान तक पहुंचकर तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। 

एमबी पावर प्लांट में स्वतंत्रता दिवस का भव्य आयोजन, ध्वजारोहण, परेड और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंजा परिसर

जैतहरी  79वें स्वतंत्रता दिवस पर एमबी पावर प्लांट परिसर देशभक्ति के रंग में रंग उठा। सीओओ एवं प्लांट प्रमुख श्री आनंद देशपांडे ने ध्वजारोहण कर शहीदों के अमर बलिदान को नमन किया और राष्ट्र निर्माण में संयंत्र की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। मानव संसाधन एवं प्रशासन प्रमुख आर. के. खटाना ने स्वतंत्रता संग्राम के वीरों की गाथा और उनके त्याग का स्मरण कराया। उन्होंने सीएसआर के तहत वर्षभर में हुए विकास कार्यों की जानकारी दी, जिनमें सड़कों का निर्माण, 13 हैंडपंप की स्थापना, राठौर चौराहा से ग्राम लहरपुर–मुर्रा तक स्ट्रीट लाइट और 26 ग्रामों में 40 हाईमास्ट लगाने जैसे कार्य शामिल हैं। सुरक्षा विभाग के प्रभारी अरविंद कुमार सिंह के नेतृत्व में सुरक्षा जवानों ने अनुशासित व भव्य परेड कर तिरंगे को सलामी दी। अपने संबोधन में श्री देशपांडे ने संयंत्र की शत-प्रतिशत क्षमता संचालन को सामूहिक समर्पण और टीम वर्क का श्रेष्ठ उदाहरण बताया। बाल भारती पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने वीरगाथाओं एवं अखंडता में एकता पर आधारित नाट्य एवं संगीत प्रस्तुतियां दीं, जिन्होंने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। सुरक्षा विभाग ने पूरे परिसर को तिरंगे के रंगों से सजाकर माहौल को और भी खास बना दिया। समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले इस वर्ष परिसर वासियों के बच्चो के लिए राष्ट्र प्रेम से प्रेरित पैटिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन रखा गया उसमें सभी प्रतिभागियों को पुरुस्कार से सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का संचालन मानव संसाधन विभाग के  अधिकारी गौरव पाठक और राघवेन्द्र सिंह ने जोश और उत्साह भरे भाषण के साथ किया। विभाग के प्रबंधक श्रीकृष्णा पांडेय ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन बच्चों और मेहमानों को मिष्ठान वितरण के साथ हुआ।

राज्य के सबसे बड़े अस्पताल को मिलेगा नया रूप, स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने दी जानकारी

रायपुर : राज्य के सबसे बड़े अस्पताल को मिलेगा नया स्वरूप : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल राज्य के सबसे बड़े अस्पताल को मिलेगा नया रूप, स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने दी जानकारी स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया: सबसे बड़ा अस्पताल होगा आधुनिक स्वरूप में रायपुर: राज्य के प्रमुख अस्पताल को मिलेगा नया अवतार, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का एलान रायपुर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज नया रायपुर स्थित मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और राज्य की निर्माण एजेंसियों के साथ बैठक कर डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति अस्पताल के जीर्णोद्धार, नए निर्माण कार्य और 700 बेड के एकीकृत अस्पताल के निर्माण पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में मंत्री जायसवाल ने क्षेत्रीय कैंसर संस्थान, चिकित्सा छात्रों के हॉस्टल और सिकल सेल संस्थान के निर्माण कार्य को शीघ्र प्रारंभ करने के संबंध में निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही, अस्पताल के फायर फाइटिंग सिस्टम के निर्माण और सुधार कार्यों पर भी विचार-विमर्श किया गया।  मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अधिकारियों को सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन के मद्देनजर आवश्यक कदम तुरंत उठाने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग राज्य के सबसे बड़े अस्पताल को जल्द ही एक नए और आधुनिक स्वरूप में सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्रीमती शिखा राजपूत, सीजीएमएससी प्रबंध संचालक रितेश अग्रवाल, मेडिकल कॉलेज रायपुर के डीन डॉ विवेक चौधरी, चिकित्सा अधीक्षक डॉ संतोष सोनकर, लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

साढ़े 82 किमी लंबे ग्वालियर-झांसी हाईवे की मरम्मत होगी, खर्च होगा 1.72 करोड़

ग्वालियर ग्वालियर से झांसी के बीच 101 किमी. लंबे फोरलेन हाइवे की मरम्मत का काम नेशनल हाइवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) द्वारा कराया जाएगा है। एनएचएआइ इस हाइवे पर टोल की वसूली तो कर ही रही है, लेकिन अब हाइवे पर जगह-जगह गड्ढों की समस्या पैदा हो गई है। ऐसे में अब 1.72 करोड़ रुपये की लागत से साढ़े 82 किमी की लंबाई में गड्ढों को भरने और जहां-जहां जरूरत है, वहां पेवर्स लगाने का काम भी किया जाएगा। इससे पूर्व में लगभग 1.75 करोड़ रुपये की लागत से वर्षा के दौरान ग्वालियर-आगरा हाइवे की मरम्मत का काम कराया गया था, लेकिन अब ग्वालियर-झांसी हाइवे पर भी मरम्मत की जरूरत पड़ रही है।   बारिश में भारी वाहन से सड़क हो जाती है खराब दरअसल, वर्षा के सीजन में हाइवे पर निकलने वाले भारी वाहनों के कारण सड़कों की हालत खराब होती है। गड्ढों के कारण ब्लैक स्पॉट के साथ ही एक्सीडेंट स्पॉट भी तैयार हो जाते हैं। इनके कारण हाइवे पर एक्सीडेंट होने की संभावना बनी रहती है। इसके अलावा इंटरचेंज के आसपास भी ब्रेक लगने के कारण सड़क खराब होती है। इसके चलते इन स्थानों पर काम कराया जाएगा। ग्वालियर-झांसी हाइवे पर हर दिन 30 हजार से अधिक वाहनों का आवागमन होता है। इसके कारण सड़क की स्थिति जल्द खराब हो जाती है। तीन माह में होगी मरम्मत, तीन साल का रखरखाव भी शामिल एनएचएआइ ने हाइवे के गड्ढों को भरने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की है, जिसकी शर्तों के अनुसार चयनित कंपनी को तीन माह में साढ़े 82 किमी. लंबाई में जगह-जगह खराब हुई सड़क को ठीक करना होगा। इसके अलावा तीन वर्षों तक इस कार्य का रखरखाव भी करना होगा। यदि किया गया कार्य खराब होता है, तो अगले तीन साल तक उसे दोबारा करना होगा। सांसद ने भी की थी मांग सांसद भारत सिंह कुशवाह ने गत जुलाई माह में भोपाल में एनएचएआइ के क्षेत्रीय अधिकारियों से मुलाकात कर नेशनल हाइवे 44 के ही ग्वालियर-झांसी खंड के अंतर्गत डबरा से ग्वालियर के बीच बिलौआ तिराहा और अरु तिराहा पर बने हुए ब्लैक स्पॉट खत्म करने के साथ ही हाइवे की मरम्मत की भी मांग की थी। सांसद ने मांग की थी कि इन दोनों स्थानों पर फ्लाइओवर का निर्माण कर दिया जाए, ताकि यहां हो रहे हादसों की संभावना काफी कम हो जाए। एनएचएआइ के अधिकारियों ने भी इस दिशा में काम करने का आश्वासन दिया था।

मुख्यमंत्री साय ने दी भिलाईवासियों को मिली 241.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात

रायपुर : स्टेट कैपिटल रीजन से तेजी से होगा विकास, नागरिक सुविधाओं में आएगा नया आयाम : मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय ने दी भिलाईवासियों को मिली 241.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात मुख्यमंत्री साय ने भिलाई नगर निगम कार्यालय भवन के लिए 20 करोड़ की घोषणा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि स्टेट कैपिटल रीजन से रायपुर, दुर्ग, भिलाई और राजनांदगांव सहित पूरे अंचल को   लाभ मिलेगा। इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी और नगरीय सुविधाओं का विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों के चुनाव में जारी अटल विश्वास पत्र के सभी वादों को एक-एक कर पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय आज भिलाई में नगर पालिक निगम क्षेत्र के लिए 241.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने भिलाई नगर पालिक निगम के नए कार्यालय भवन के लिए 20 करोड़ रुपये की घोषणा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नगरीय क्षेत्रों के विकास के लिए सरकार भरपूर सहयोग दे रही है। नगरीय सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए राज्य में सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है। पूरे राज्य में प्रशासन को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है, जिसका सीधा लाभ नागरिकों को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य की 1460 ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र शुरू हो चुके हैं। अगले छह महीनों में 5 हजार और पंचायतों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। 24 अप्रैल 2026, पंचायती राज दिवस पर छत्तीसगढ़ की सभी ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र प्रारंभ किए जाएंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार ने बीते 20 महीनों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अधिकांश गारंटियों को पूरा किया है। किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान सुनिश्चित किया गया है। महिलाओं को महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह एक-एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जा रही है, जिससे 70 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के अंतर्गत भूमिहीन कृषि मजदूरों को सालाना 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 22 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या यात्रा कर चुके हैं। उपमुख्यमंत्री अरूण साव ने कहा कि प्रदेश में सरकार गठन के बाद पिछले एक वर्ष में सभी नगरीय निकायों के विकास के लिए सात हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। नगरोत्थान योजना के तहत नगरीय निकायों में योजनाबद्ध और सुनियोजित विकास के लिए राशि दी जा रही है। विगत 18 माह में अकेले नगर पालिक निगम भिलाई को विकास कार्यों के लिए 470 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश के सात नगरीय निकायों को पहली बार राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कार प्राप्त हुआ है। वहीं 20 हजार से कम जनसंख्या वाले शहरों में छत्तीसगढ़ के 58 शहर पुरस्कृत हुए हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने पार्षद श्रीमती स्मृति दोड़के को स्वच्छता वार्ड के लिए शील्ड प्रदान की। प्रधानमंत्री आवास योजना के 9 हितग्राहियों को गृह प्रवेश प्रमाणपत्र, पीएम सूर्य घर योजना के तीन हितग्राहियों को प्रमाणपत्र, दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल और व्हीलचेयर प्रदान की गईं। महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों के लिए राशि के चेक तथा वूमेन फॉर ट्री योजना के तहत राधारानी महिला स्व-सहायता समूह को प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम को वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन और नगर निगम के महापौर नीरज पाल ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधायक ललित चन्द्राकर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय, पूर्व मंत्री श्रीमती रमशीला साहू और पूर्व विधायक लाभचंद बाफना सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।

राष्ट्रपति सम्मानित देवाशीष और मनतृप्त कौर ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की सौजन्य मुलाकात

रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित देवाशीष और मनतृप्त कौर ने की सौजन्य मुलाकात राष्ट्रपति सम्मानित देवाशीष और मनतृप्त कौर ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की सौजन्य मुलाकात मुख्यमंत्री ने दी बधाई एवं शुभकामनाएँ, उज्ज्वल भविष्य की कामना की रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से राष्ट्रपति रोवर रेंजर अवार्ड से सम्मानित रोवर देवाशीष मखीजा और रेंजर मनतृप्त कौर संधू ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री  साय ने दोनों प्रतिभाओं को प्रतीक चिन्ह भेंट कर उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की ।  उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने 22 जुलाई को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आयोजित विशिष्ट समारोह में छत्तीसगढ़ के रोवर देवाशीष माखीजा, रेंजर मनतृप्त कौर संधू और गाईड कुसुम सिन्हा को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया।  श्री देवाशीष ने बताया कि यह गौरवपूर्ण पुरस्कार चार वर्षों के अंतराल में देश भर से चयनित 16 प्रतिभागियों को प्रदान किया गया । गर्व की बात है कि इस बार छत्तीसगढ़ से तीन प्रतिभागियों ने यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में उन्हें तत्कालीन राज्यपाल श्रीमती अनुसुइया उइके द्वारा राज्यपाल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत सिंह छाबड़ा के साथ रेंजर मनतृप्त कौर के पिता श्री गुरजीत सिंह संधू भी उपस्थित थे।

श्रीमद्भागवत गीता को मिलेगा विश्वविद्यालयों में स्थान, छात्रों को तीन क्रेडिट अंक

भोपाल युवाओं के मन में नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना के लिए मध्य प्रदेश सरकार श्रीमदभागवत गीता की ओर मुड़ी है। तय हुआ है कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्नातक स्तर की कक्षाओं में नियमित तौर पर श्रीमदभागवत गीता पढ़ाई जाएगी। इसकी कक्षाएं ऑनलाइन चलेंगी और इसके लिए विद्यार्थियों को तीन क्रेडिट अंक दिए जाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा में ही इस पाठ्यक्रम को शामिल किया गया है। 18 अध्यायों को पांच भागों में विभाजित किया इसके तहत गीता के 18 अध्यायों को पांच भागों में विभाजित कर पाठ्यक्रम तय किया गया है। इन्हें 45 घंटों में पूरा किया जाना है। इन कक्षाओं को सप्ताह में पांच दिन चलाया जाएगा। कक्षाएं ऑनलाइन चलेंगी और विद्यार्थियों को यह सुविधा होगी कि अपने सुविधा के अनुसार कक्षा का समय और भाषा चुन लें। यह पाठ्यक्रम हिंदी, अंग्रेजी सहित 13 भाषाओं में उपलब्ध होगा। पाठ्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थी को क्रेडिट अंक दिए जाएंगे।   पाठ्यक्रम के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं और महाविद्यालयों के प्राचार्यों को इस पाठ्यक्रम के लिए विद्यार्थियों के पंजीयन का आदेश जारी कर दिया है। शिक्षा मंत्रालय के स्वयं पोर्टल पर यह पंजीयन 31 अगस्त तक होना है। सभी विश्वविद्यालयों औैर महाविद्यालयों से इस पाठ्यक्रम के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा गया है ताकि इसकी निगरानी भी उच्च स्तर से की जा सके। मुख्यमंत्री ने दिया था विचार श्रीकृष्ण पाथेय योजना के क्रियान्वयन को लेकर पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बैठक की थी। इसमें मुख्यमंत्री का ही विचार था कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान होने वाली प्रतियोगिताओं को विस्तार दिया जाए। अब केवल प्रतियोगिता की जगह विद्यार्थियों को आनलाइन ही गीता पढ़ाई भी जाए ताकि नई पीढ़ी में उस ज्ञान का विस्तार हो। स्वयं पोर्टल पर ऐसे पाठ्यक्रम भी – किशोर स्वास्थ्य – अपना आहार – प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और सुरक्षा प्रबंधन – परिचयात्मक नीतिशास्त्र – योग शिक्षक प्रशिक्षण (इन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के लिए भी क्रेडिट अंक निर्धारित हैं) अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा ने कहा नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा और मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर है। इसी में श्रीमदभागवत गीता का अध्ययन शामिल किया गया है। इससे विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्यों और भारतीय चिंतन परंपरा के प्रति समझ बढ़ेगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से जीआईएस में हुए एमओयू को मिला ठोस स्वरूप

जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने मध्यप्रदेश में एआई, नवाचार और अनुसंधान एवं विकास के अवसर तलाशे मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से जीआईएस में हुए एमओयू को मिला ठोस स्वरूप जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने मध्यप्रदेश में एआई और नवाचार के नए अवसर तलाशे मध्यप्रदेश में अनुसंधान और विकास के अवसरों पर जर्मनी की खास नजर एआई, नवाचार और R&D में साझेदारी की संभावनाओं को लेकर जर्मन टीम का दौरा मैं चाहूँ तो इसे शॉर्ट और सोशल मीडिया फ्रेंडली हेडलाइन में भी बदल सकता हूँ भोपाल  इंदौर स्थित इन्फोबीन्स कैंपस में सोमवार को “एमपी-ग्लोबल इनोवेशन एवं अनुसंधान और विकास एक्सचेंज प्रोग्राम-2025” की शुरुआत उत्साहपूर्ण माहौल में हुई। पाँच दिवसीय इस आयोजन के प्रथम दिवस पर जर्मन व्यवसायिक प्रतिनिधिमंडल ने कॉर्पोरेट इंटरैक्शन की श्रृंखला में भाग लिया और मध्यप्रदेश में नवाचार तथा अनुसंधान और विकास की संभावनाओं का गहन अवलोकन किया। यह कार्यक्रम एमपीआईडीसी और जर्मन-इंडिया इनोवेशन कोर (जीआईआईसी) के बीच हुए समझौते का ठोस स्वरूप है, जिसे इन्क्यूबेशन मार्क्स के सहयोग से आयोजित किया गया। नवंबर 2024 में मुख्यमंत्री की जर्मनी यात्रा तथा भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के दौरान हुए इस एमओयू ने द्विपक्षीय सहयोग को नए आयाम दिए हैं। इसके तहत जर्मन निवेशकों को मध्यप्रदेश में प्रमुख निवेश स्थान के रूप में आकर्षित करने, नवाचार और अनुसंधान को सशक्त बनाने तथा तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम में “भारत से वैश्विक स्तर के डिजिटल उत्पाद बनाना”, "भारतीय नवाचार परिदृश्य" और “एजिलिटी के साथ स्केलिंग- भारतीय और जर्मन दृष्टिकोण” विषयों पर फायरसाइड चैट आयोजित की गई। इस दौरान दोनों पक्षों के विशेषज्ञों ने नवाचार, अनुसंधान और विकास तथा सीमा-पार कारोबारी सहयोग पर अपने विचार साझा किए। प्रतिनिधियों ने टैलेंट एक्विज़िशन प्रैक्टिस, कल्चर-फोकस्ड एचआर मॉडल और शक्ति महिला सशक्तिकरण पहल का भी अवलोकन किया। भारतीय यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स जैसे जोहो, फ्रेशवर्क्स और ब्राउज़रस्टैक की सफलता का उल्लेख करते हुए जर्मन प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश में एआई विकास, तकनीकी साझेदारी, संभावित अनुसंधान एवं विकास केंद्र और युवाओं के लिए रोजगार अवसर तलाशने में गहरी रुचि दिखाई।  

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस MLA आरिफ मसूद पर फर्जीवाड़े की FIR 3 दिन में दर्ज करने का निर्देश दिया

भोपाल  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं. यह मामला इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता के लिए फर्जी सेल डीड जमा करने से जुड़ा है. अदालत ने शुरुआती रूप से इसे धोखाधड़ी (IPC की धारा 420, 467, 468) का मामला माना है. जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान भोपाल पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ तीन दिन के अंदर एफआईआर दर्ज की जाए. विधायक आरिफ मसूद का भोपाल में इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज संचालित हो रहा है जिसमें कई गड़बड़ी मिली थी। इस पर उच्च शिक्षा विभाग ने इसकी मान्यता रद्द कर दी थी। छात्रहित को देखते हुए कॉलेज को कंटिन्यू कर दिया गया पर यहां नए प्रवेश पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई। 3 दिन में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश विधायक आरिफ मसूद के इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज के मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने सख्त रूप दिखाया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इतने सालों तक कोई भी कॉलेज ऐसे हाल में बिना राजनीतिक संरक्षण के नहीं चल सकता है। मामले में हाईकोर्ट ने विधायक आरिफ मसूद पर केस दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने भोपाल कमिश्नर को 3 दिन में एफआईआर दर्ज कर इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही जांच की निगरानी के लिए पुलिस महानिदेशक को SIT (विशेष जांच दल) गठित करने का आदेश भी दिया गया है. यह टीम 90 दिनों में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी. इस मामले में लापरवाही बरतने वाले विभागीय अधिकारियों पर भी आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा. यह मामला शिक्षा विभाग द्वारा कॉलेज की मान्यता रद्द किए जाने के बाद सामने आया. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फर्जी सेल डीड के आधार पर पिछले 20 साल से चल रहे कॉलेज मामले में कड़ा रुख दिखाया है. कोर्ट ने कॉलेज में नए एडमिशन पर भी रोक लगा दी है. नए सत्र के एडमिशन पर रोक वहीं, इस पूरे मामले में हाई कोर्ट ने छात्रों के भविष्य को देखते हुए कहा कि फिलहाल आरिफ मसूद का कॉलेज जारी रखा जाएगा। हालांकि, हाई कोर्ट ने नए सत्र के लिए एडमिशन देने पर रोक लगा दी है। वहीं, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद हाई कोर्ट के स्पेशल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं। हो सकता है 20 साल से चल रहा हो ये फर्जीवाड़ा- कोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधर की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। जज ने हैरानी जताते हुए कहा कि संभव नहीं है कि बिना राजनीतिक संरक्षण के चलते इस तरह से 20 सालों से फर्जीवाड़ा चल रहा हो। कांग्रेस विधायक ने फर्जी सेल डीड दी हाई कोर्ट ने कहा कि आरिफ मसूद के राजनीतिक कनेक्शन ऐसे हैं कि साल 2004 में आरिफ मसूद ने फर्जी सेल डीड दी। उसके बाद भी सरकार ने आरिफ मसूद को दोबारा सेल डीड जमा करने के निर्देश दिए लेकिन दोबारा जमा की गई सेल डीड को 20 साल तक किसी ने भी जांचने की हिम्मत नहीं जुटाई। हाई कोर्ट ने कहा है कि मामले में न केवल आरिफ के खिलाफ कार्रवाई हो बल्कि उन अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई होना चाहिए, जिनकी इस पूरे मामले में भूमिका है। रद्द कर दी गई थी मान्यता दरअसल, भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की अमन एजुकेशन द्वारा संचालित कॉलेज की पिछले दिनों मान्यता रद्द कर दी गई थी। उच्च शिक्षा विभाग ने इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी थी। इसके पहले कॉलेज को अंतरिम मान्यता मिली थी, लेकिन कॉलेज की ओर से जरूरी कागजात और शर्तें पूरी नहीं करने पर विभाग ने मान्यता रद्द कर दी थी। कांग्रेस विधायक मसूद पर आरोप है कि उन्होंने संस्था के फर्जी दस्तावेज लगाकर कॉलेज की मान्यता ली थी जिसमें संबंधित अधिकारियों की भी नीली भगत के आरोप लगे थे। क्या था पूरा मामला? 9 जून को राज्य सरकार ने भोपाल के इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता को रद्द कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ विधायक आरिफ मसूद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. सुनवाई के दौरान अदालत ने कॉलेज की जमीन और मान्यता से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए थे. हाईकोर्ट में जो डाक्यूमेंट पेश किए गए उनकी जांच में खुलासा हुआ कि 2 अगस्त 1999 को अमन एजुकेशन सोसायटी की तरफ से समिट की गई पहली सेल डीड फर्जी थी. इसके बाद में पेश की गई दूसरी सेल डीड भी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं पाई गई. कोर्ट ने कहा कि इतने सालों तक जाली दस्तावेजों के सहारे कॉलेज का संचालन प्रशासनिक और राजनीतिक समर्थन के बिना संभव नहीं था.