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वड़िंग को मिला नेताओं का खुला समर्थन, पंजाब कांग्रेस में चन्नी गुट से सुलह के संकेत

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से विधानसभा चुनाव समिति की सूची को लेकर शुरू हुआ अंदरूनी घमासान अब शांत कराने की कवायद तेज हो गई है। कांग्रेस हाईकमान पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसी बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के समर्थन में कई वरिष्ठ नेता सक्रिय नजर आए हैं। सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ कांग्रेस नेता राणा केपी. सिंह, शमशेर सिंह  धूलो सहित कई नेताओं ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से मुलाकात कर उन्हें दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर बधाई दी और संगठन को मजबूत करने पर चर्चा की। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी दोनों ही अपने-अपने समर्थकों के साथ लगातार आंतरिक बैठकें कर रहे हैं। दरअसल, विधानसभा चुनाव समिति की सूची जारी होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं ने खुलकर नाराजगी जताई थी। इसके बाद पार्टी में गुटबाजी की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। हालांकि, कांग्रेस हाईकमान ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ नेताओं को हालात पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। पंजाब प्रभारी जल्द करेंगे पंजाब दौरा सूत्रों का कहना है कि पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल अगले एक-दो दिनों में पंजाब पहुंच सकते हैं। इस दौरान वे संगठन के नेताओं के साथ बैठक कर मौजूदा स्थिति पर चर्चा करेंगे और विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। वहीं, 7 जुलाई के बाद राहुल गांधी के विदेश दौरे से लौटने पर पंजाब कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाकर भी चर्चा किए जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल विधानसभा चुनाव समिति की सूची में बड़े बदलाव की संभावना कम है और पार्टी नेतृत्व विवाद को बढ़ाने के बजाय उसे शांत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। वडिंग ने दिया संयम व एकजुटता का संदेश इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी नेताओं को संयम और एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि "छोटी-छोटी बातों पर नेताओं को रूठना नहीं चाहिए। सभी को कांग्रेस हाईकमान के फैसलों का सम्मान करना चाहिए। अगर हम सब एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे तो पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनेगी। इस मामले को ज्यादा तूल देने की जरूरत नहीं है।कांग्रेस के सभी नेता एक परिवार के सदस्य हैं और पार्टी की मजबूती ही सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए।" राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस हाईकमान किसी भी तरह के सार्वजनिक विवाद को समाप्त कर संगठन को एकजुट रखने की कोशिश में जुटा है। आने वाले दिनों में भूपेश बघेल की पंजाब यात्रा और राहुल गांधी की वापसी के बाद होने वाली बैठकों को इस पूरे घटनाक्रम के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

रायपुर के डूमरतराई फेस-2 थोक बाजार का आज उद्घाटन करेंगे CM विष्णु देव साय

रायपुर. छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा विकसित रायपुर के डूमरतराई थोक बाजार फेस-2 के नामकरण एवं लोकार्पण समारोह का आयोजन 5 जुलाई 2026 (रविवार) को शाम 5 बजे किया जाएगा. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. समारोह की अध्यक्षता आवास एवं पर्यावरण, वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री ओ.पी. चौधरी करेंगे. कार्यक्रम में मंत्री केदार कश्यप, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब तथा रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे. इसके अलावा विधायक राजेश मूणत, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव, रायपुर महापौर मीनल चौबे, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक समारोह में शामिल होंगे.

मध्यप्रदेश सरकार को मिलेगा नया VVIP विमान, 235 करोड़ का बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 अगले माह होगा शामिल

भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार आगामी अगस्त महीने में अपने राजकीय विमानन बेड़े का विस्तार करने जा रही है। सरकार करीब 235 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से कनाडा निर्मित 'बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500' बिजनेस जेट खरीदने जा रही है। यह अत्याधुनिक विमान तकनीक के मामले में गुजरात सरकार के पास मौजूद चैलेंजर 650 से भी कहीं अधिक उन्नत माना जा रहा है। इस नए जेट के संचालन के लिए जुलाई के अंतिम सप्ताह में दो पायलटों को विशेष ट्रेनिंग के लिए अमेरिका भेजा जाएगा। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से जुड़े तमाम कानूनी कागजी काम पूरे किए जा चुके हैं। विमान खरीदने की क्यों आई नौबत? दरअसल, मई 2021 में कोरोना काल के दौरान रेमडेसिविर इंजेक्शन की इमरजेंसी सप्लाई करते समय राज्य सरकार का 'बीचक्राफ्ट किंग एयर बी-200जीटी' विमान ग्वालियर में क्रैश हो गया था। तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा 62 करोड़ रुपए में खरीदे गए इस विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद से मध्य प्रदेश सरकार के पास अपना कोई चालू विमान नहीं था। वर्तमान में बेड़े में सिर्फ एक चालू हेलीकॉप्टर है। किराए के विमानों पर ही 290 करोड़ खर्च सरकारी विमान न होने के कारण मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य अतिविशिष्ट (VIP) दौरों के लिए निजी चार्टर विमान और हेलीकॉप्टर किराए पर लेने पड़ रहे थे। विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2021 से नवंबर 2025 के बीच केवल किराए के विमानों पर ही सरकार 290 करोड़ रुपए की मोटी रकम फूंक चुकी है। सीएम डेली खर्च कर रहे 21 लाख रुपये मौजूदा समय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरों के लिए औसतन 21 लाख रुपए रोजाना किराए पर खर्च हो रहे हैं। एक तरफ जहां मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 4.64 लाख करोड़ रुपए पहुंच चुका है और सालाना ब्याज ही 27 हजार करोड़ रुपए चुकाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ इसी किराए के दैनिक खर्च को रोकने के लिए सरकार ने स्थाई रूप से इस नए बिजनेस जेट को खरीदने का फैसला किया। डील को कैबिनेट से मिल चुकी है मंजूरी इस नए विमान को खरीदने की कवायद लगभग दो साल पहले शुरू हुई थी। शुरुआत में टेक्सट्रॉन कंपनी ने 145 करोड़ रुपए का कोटेशन दिया था, लेकिन बाद में दाम बढ़ाकर 208 करोड़ रुपए करने के कारण वह प्रक्रिया निरस्त कर दी गई। इसके बाद, 10 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस कनाडाई चैलेंजर 3500 जेट को हरी झंडी दी गई। सितंबर 2024 से शुरू हुई वित्तीय और तकनीकी प्रक्रियाओं के समापन के बाद अब अगस्त 2026 में यह जेट आधिकारिक तौर पर प्रदेश की सेवा में तैनात हो जाएगा।

कानपुर में ईंधन को लेकर चिंता, ई-20 पेट्रोल से इंजन और टैंक डैमेज के दावे

कानपुर   ई-20 पेट्रोल सिर्फ वाहनों के माइलेज में गिरावट तक सीमित नहीं है। बीते कई दिनों से इथेनोल से फ्यूल टैंक में जंग लगने और रबर के पार्टस भी खराब होने के दावे लोगों की ओर से किए जा रहे हैं। ऐसे में लोगों को अपने वाहन के खराब होने और मरम्मत का खर्च बढ़ने की चिंता भी सता रही है। बीते वर्ष चार सितंबर को दैनिक जागरण ने ‘ई-20 पेट्रोल से माइलेज में आ रही गिरावट’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के पूर्व डायरेक्टर प्रो. नरेंद्र मोहन अग्रवाल के मुताबिक, पेट्रोल और इथेनोल घनत्व का अंतर और इथेनोल का हाइग्रोस्कोपिक यानी आर्द्रताग्राही गुण इसका सबसे बड़ा कारण है। अधिक घनत्व के कारण यह फ्यूल टैंक की सतह पर बैठ जाता है और नमी को खींचता रहता है। इसकी वजह से ईंधन जलने के पहले वाहन के जिस-जिस भाग (फ्यूल टैंक, पिस्टन आदि) से गुजरता है उन्होंने बताया कि वहां जंग लगने का खतरा बना रहता है। इस वजह से वाहन परफार्मेंस पर भी असर पड़ रहा है। इतना ही नहीं इथेनोल रबर और प्लास्टिक के पार्ट्स को भी नुकसान पहुंचा रहा है। प्रो. नरेंद्र मोहन के मुताबिक वाहनों की इथेनोल पर संचालित होने की क्षमता और पेट्रोल में इथेनोल का मिश्रण भी परेशानी का कारण बन रहा है। मसलन, अगर वाहन के इंजन पांच प्रतिशत इथेनोल मिश्रित पेट्रोल के लिए तैयार किया गया है और अब उसमें 20 प्रतिशत इथेनोल मिश्रित पेट्रोल डाला जाएगा तो कोरोजिन जैसी दिक्कतें पैदा होंगी। उन्होंने ब्राजील का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया वहां के पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को प्रतिशत के हिसाब के इथेनोल मिश्रित पेट्रोल चुनने का विकल्प मिलता है। ऐसा अपने देश में भी ऐसा होना चाहिए। बर्रा विश्व बैंक निवासी नितिन मिश्रा ने बताया कि 10 दिन पहले स्कूटी का सर्विस कराई थी। इंजन आयल से लेकर फिल्टर तक सभी जरूरी चीजों बदलवाईं थी। लेकिन बीते गुरुवार को अचानक स्कूटी बंद हो गई। मकैनिक को दिखाया तो उसने पहले फ्यूल टैंक में पानी जाने की बात कही। इसके बाद जब सफाई के लिए टैंक खुलवाया तो उसमें जंग लगी थी और कचरा जमा था। ऐसे में जब फ्यूल टैंक में पेट्रोल के अलावा और कुछ नहीं भरा जा रहा है तो इसकी वजह भी यही है। वहीं, साकेत नगर निवासी अनमोल भट्ट ने बताया कि बीते साल एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटीलिटी व्हीकल) खरीदा था। बीते कई दिनों से कार का माइलेज कम था। चेकअप कराने पर इंजन से लेकर कई पुर्जों में लगी जंग इसकी प्रमुख वजह बनकर सामने आई। प्रो. नरेंद्र मोहन बताते हैं कि पेट्रोल और इथेनोल दोनों का घनत्व अलग-अलग होता है। ऐसे में यह फ्यूल टैंक की तली में नीचे बैठ जाता है। जो धीरे-धीरे रस्ट यानी जंग और काई का रूप ले लेता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इथेनोल पिस्टन ब्लाक और रिंग के बीच में पहुंचकर आयल कोटिंग को नुकसान पहुंचा रहा है। इसकी वजह से आयल कोटिंग में रस्टिंग हो रही है। यह रस्टिंग पांच से 10 मिलीमीटर की है, लेकिन इससे इंजन के परफार्मेंस में प्रभाव पड़ रहा है। इनलेट व एक्जाइट वाल्व को भी इथेनोल मिश्रित पेट्रोल नुकसान पहुंचा रहा है और कोरोजिन पैदा कर रहा है। वाहन स्वामियों को इंश्योरेंस मिल रहा न वारंटी वाहन बीमा जानकार निर्मल त्रिपाठी के मुताबिक इस तरह की समस्याएं को वास्तव में मैकेनिकल फेल्योर माना जाता है। ऐसे में इंश्योरेंस कंपनियां इसे प्रमीमियम में कवर नहीं कर रही हैं, जबकि आटोमोबाइल कंपनियां इसे नमी की दिक्कत बताकर वारंटी देने से बच रही हैं। तेल कंपनियों ने भी पल्ला झाड़ लिया है। ऐसे में वाहन चालकों के सामने सिर्फ भ्रम की स्थिति है। गाड़ियों को मानक के मुताबिक मिले ईंधन आटोमोबाइल विशेषज्ञ अमित द्विवेदी के मुताबिक, पेट्रोल में इथेनोल मिलाने की नीति लंबे समय से चली आ रही है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। लेकिन समस्या है कि बीएस-4 मानक से नीचे के वाहन ई-20 पेट्रोल के लिए तैयार नहीं है। यह ई-5 या ई-10 यानी पांच से दस प्रतिशत इथेनोल मिश्रित पेट्रोल के लिए तैयार किए गए थे। ऐसे में सरकार को चाहिए की अगर किसी वाहन का रजिस्ट्रेशन 15 साल का है तो उसे तय मानक के अनरूप पेट्रोल मिले। पेट्रोल पंपों पर ई-5 से ई-20 पेट्रोल तक का विकल्प होना चाहिए। इन सुधारों की जरूरत ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के मुताबिक इथेनोल में हाइग्रोस्कोपिक यानी आर्द्रताग्राही गुण होते हैं। इस वजह से फ्यूल टैंक और पाइपलाइन में जंग लगने का खतरा रहता है। प्लास्टिक और रबर के पार्ट्स भी जल्दी खराब हो सकते हैं, जिससे फ्यूल लीक, गंदे इंजेक्टर और गैसकेट डैमेज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, ई-20 फ्यूल सिस्टम में एंटी-करोसिव कोटिंग, गैसकेट्स व सील्स की गुणवत्ता में सुधार और इंजन रीमैपिंग जैसी तकनीकी अपग्रेड की जरूरत होती है।

पाक सीमा पर अलर्ट! पठानकोट में बमनुमा वस्तु मिलने से हड़कंप, सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटीं

बमियाल. जिला पठानकोट के सीमावर्ती क्षेत्र में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब गांव कथलौर और रायपुर के खेतों में एक बमनुमा वस्तु मिलने की सूचना सामने आई। सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं और पूरे इलाके की घेराबंदी कर जांच अभियान शुरू कर दिया। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि यह कोई पुराना बम हो सकता है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी। जानकारी के अनुसार रविवार सुबह गांव जसवां के पूर्व सरपंच बलदेव सिंह खेतों की ओर गए थे। इसी दौरान उनकी नजर खेत में पड़ी एक संदिग्ध बमनुमा वस्तु पर पड़ी। वस्तु को देखकर उन्हें शक हुआ कि यह कोई विस्फोटक सामग्री हो सकती है। उन्होंने बिना किसी तरह की छेड़छाड़ किए तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और एहतियात के तौर पर पूरे क्षेत्र को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी सूचना दी गई। सुरक्षा एजेंसियों ने घटनास्थल का निरीक्षण शुरू किया और आसपास के क्षेत्र की भी गहन तलाशी ली, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां कोई अन्य संदिग्ध वस्तु मौजूद न हो। बम की अभी पुष्टि नहीं पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह किसी पुराने बम जैसी वस्तु प्रतीत हो रही है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह कब की है, किस परिस्थिति में यहां पहुंची और इसमें किसी प्रकार का खतरा मौजूद है या नहीं। इन सभी पहलुओं की विशेषज्ञों की मदद से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। लोगों को सतर्क रहने की सलाह सुरक्षा कारणों को देखते हुए आसपास के लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी स्थान पर कोई संदिग्ध या बमनुमा वस्तु दिखाई दे तो उसे हाथ लगाने या हटाने का प्रयास बिल्कुल न करें। इसकी सूचना तुरंत पुलिस या संबंधित सुरक्षा एजेंसी को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

महादेव सट्टा कनेक्शन! प्रमोटर के भांजे ने प्रॉपर्टी डीलर पर बेसबॉल और चाकुओं से किया हमला

भिलाई नगर. महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप से जुड़े सौरभ चंद्राकर के भांजे प्रखर चंद्राकर का नाम एक बार फिर सामने आया है। इस बार उस पर अपने दो साथियों के साथ मिलकर एक प्रॉपर्टी डीलर की हत्या की कोशिश करने का आरोप लगा है। आरोप है कि बाइक से जा रहे प्रॉपर्टी डीलर को पहले बेसबॉल के डंडे से हमला कर गिराया, फिर चाकू कटर और लाठी-डंडों से ताबड़तोड़ वार किए गए। पीड़ित के पैर और गर्दन पर 8 से 10 बार किए गए हैं। गंभीर रूप से घायल युवक का अस्पताल के आईसीयू में इलाज चल रहा है। भिलाई नगर थाना प्रभारी जितेन्द्र वर्मा ने बताया कि योगेश सुर्यवंशी (32 वर्ष) प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं। उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कराया कि 2 जुलाई की रात करीब 11.30 बजे वे सेक्टर-6 स्थित पेट्रोल पंप से बाइक में पेट्रोल भरवाकर रिसाली की ओर लौट रहे थे। जब वे डीपीएस चौक स्थित हनुमान मंदिर के पास पहुंचे, तभी पीछे से पल्सर बाइक पर आए युवकों ने उनके सिर पर बेसबॉल के डंडे से हमला कर दिया। प्रार्थी प्रॉपर्टी डीलर योगेश ने पुलिस को बताया कि किसी तरह बाइक वो संभालकर आगे बढ़ा, लेकिन आरोपियों ने फिर उनका पीछा किया और बाइक के पहिए में डंडा फंसा दिया। इससे वह सड़क पर गिर गया। इसके बाद हरीश यादव ने किसी धारदार हथियार से उनके गले के पास हमला किया। जब वे जान बचाकर भागने लगे तो प्रखर चंद्राकर और अमन मूर्ति ने उन्हें पकड़ लिया। एफआईआर के अनुसार अमन मूर्ति ने गर्दन के पास चाकू से वार किए, जबकि प्रखर चंद्राकर ने कटर और बटनदार चाकू से दोनों पैरों पर लगातार 8 से 10 वार किए। हमले में योगेश लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़े। इसी दौरान आसपास लोगों की भीड़ जुटने लगी तो तीनों आरोपी मौके से भाग निकले। घटना के बाद वहां मौजूद लोगों ने घायल योगेश को पहले नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। बाद में उन्हें शंकराचार्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका आईसीयू में इलाज चल रहा है। योगेश ने पुलिस को बताया कि पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने उनकी हत्या करने की नीयत से हमला किया। उनकी शिकायत के आधार पर पहले नेवई थाना में जीरो नंबर पर अपराध दर्ज किया गया। इसके बाद मामला भिलाई नगर थाना भेजा गया, जहां आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 109 और 3(5) के तहत केस दर्ज कर विवेचना की जा रही है। सट्टा ऐप से जुड़ा है प्रखर चंद्राकर का नाम लगातार कर रहा गुंडागर्दी यह पहला मामला नहीं है, जब प्रखर चंद्राकर का नाम हिंसक वारदात में सामने आया हो। करीब 9 महीने पहले रायपुर के तेलीबांधा स्थित जूक क्लब में भी उस पर दोस्तों के साथ मिलकर एक युवक की बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगा था। उस मामले में प्रखर चंद्राकर, पुलकित चंद्राकर और उनके साथियों ने मारपीट की थी। .वीडियो में मारपीट के बाद आरोपी डांस करते हुए भी दिखाई दिए थे। इससे पहले भी भिलाई सुपेला पुलिस प्रखर चंद्राकर को मारपीट के एक मामले में गिरफ्तार कर चुकी है। 18 मई को सुपेला थाना क्षेत्र में जन्मदिन की पार्टी से लौट रहे युवकों के साथ मारपीट हुई थी। शिकायतकर्ता सौरभ वर्मा ने पुलिस को बताया था कि उनके दोस्त आयुष पर डंडे से हमला किया था। जांच के बाद पुलिस ने प्रखर चंद्राकर को भिलाई नगर के घड़ी चौक से गिरफ्तार किया।

मध्यप्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, DRP नीति में बदलाव के बाद डीन करेंगे PG डॉक्टरों की तैनाती

भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार ने जिला रेजिडेंट प्रोग्राम (डीआरपी) नीति में तीन साल बाद बड़ा बदलाव किया है। अब जिला अस्पतालों में तीन माह की सेवा देने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टिंग राज्य स्तर से नहीं होगी। इसके बजाय संबंधित मेडिकल कॉलेज के डीन की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय डीआरपी प्लेसमेंट एलोकेशन कमेटी पोस्टिंग का निर्णय करेगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय जरूरतों के अनुसार डॉक्टरों की तैनाती करना और जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। हालांकि, नई नीति में आवास भत्ता समाप्त किए जाने से रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच असंतोष भी देखा जा रहा है। डीन की अध्यक्षता वाली समिति करेगी पोस्टिंग नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में गठित पांच सदस्यीय समिति रेजिडेंट डॉक्टरों के जिला आवंटन का फैसला करेगी। पहले यह प्रक्रिया राज्य स्तर पर होती थी। अब जिस मेडिकल कॉलेज में जिस क्षेत्र के मरीज अधिक आते हैं, उसी क्षेत्र के जिला अस्पतालों में वहां के रेजिडेंट डॉक्टरों को भेजा जाएगा। क्षेत्र के अनुसार होगा जिला आवंटन नई नीति के अनुसार गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल के रेजिडेंट डॉक्टरों की तैनाती भोपाल, विदिशा, रायसेन और सीहोर जैसे जिलों में होगी। वहीं एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर के डॉक्टरों को इंदौर, धार, झाबुआ और आसपास के जिलों में सेवाएं देनी होंगी। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी। आवास भत्ता खत्म, खुद करनी होगी व्यवस्था नीति में सबसे बड़ा बदलाव आवास भत्ते को समाप्त करना है। अब रेजिडेंट डॉक्टरों को अपने रहने की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। जिला प्रशासन केवल सुरक्षित आवासों की सूची उपलब्ध कराएगा। वहीं महिला और दिव्यांग रेजिडेंट डॉक्टरों को सुविधा के अनुसार नजदीकी जिलों में पदस्थापना देने का प्रयास किया जाएगा। जिला अस्पतालों में मेंटर और रेजिडेंट डॉक्टरों का अनुपात 1:3 रखा गया है। रेजिडेंट डॉक्टरों ने रखीं मांगें रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि पहले की तरह आवास भत्ता जारी रखा जाना चाहिए। साथ ही अधिक मेडिकल कॉलेजों वाले क्षेत्रों से बाहर भी जिलों को डीआरपी में शामिल किया जाए। उन्होंने पूरे प्रदेश में डिवीजन से बाहर म्युचुअल ट्रांसफर की सुविधा लागू करने की भी मांग की है।

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से बदलेगी अलीगढ़ की यातायात व्यवस्था, जाम से मिलेगी राहत

लखनऊ यूपी में अलीगढ़ की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में नगर निगम का कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बड़ी भूमिका निभाएगा। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कंट्रोल होगी। अलीगढ़ प्रदेश का पहला नगर निगम होगा, जिसको एनाउंसमेंट सिस्टम से लैस किया गया है। शनिवार को डीएम अविनाश कुमार, एसएसपी नीरज जादौन व नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने स्मार्ट टैफिक व्यवस्था को लेकर कल्याण सिंह हैबिटेट सेंटर के कंट्रोल रूम में मंथन किया। शहर के प्रमुख सिग्नलयुक्त चौराहों पर ट्रैफिक लाइट अब पूर्व निर्धारित समय के बजाय वास्तविक यातायात दबाव के अनुसार संचालित होगी। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जुड़े एआई आधारित कैमरे प्रत्येक दिशा में वाहनों एवं लोगों की संख्या का विश्लेषण करेंगे तथा उसी के अनुरूप ट्रैफिक सिग्नल का ग्रीन एवं रेड टाइम स्वतः कम या अधिक होगा। इससे अनावश्यक प्रतीक्षा समाप्त होगी तथा यातायात का प्रवाह लगातार बना रहेगा। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि इस स्मार्ट व्यवस्था को प्रथम चरण एएमयू सर्किल पर लागू कर दिया गया है। आगामी चरण में मैरिस रोड, रामघाट रोड, केला नगर, सासनी गेट सहित अन्य प्रमुख चौराहों पर भी इसे चरणबद्ध ढंग से लागू किया जाएगा। जहां पर ट्रैफिक लाइटें नहीं वहां 15 दिन में लगेंगी नगर आयुक्त ने बताया कि नगर निगम द्वारा ट्रैफिक सुधार अभियान के अंतर्गत प्रमुख बाजारों एवं मार्गों पर पीली पट्टी अंकित कराई है तथा हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरों को इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा गया है। जिन प्रमुख चौराहों पर अभी ट्रैफिक सिग्नल नहीं हैं, उनका नगर निगम एवं ट्रैफिक पुलिस द्वारा संयुक्त स्थलीय निरीक्षण कर आगामी 15 दिनों में नई ट्रैफिक सिग्नल प्रणाली स्थापित कराई जाएगी। वाहन अधिक देर तक खड़े हुए तो एनाउंसमेंट होगा कोई वाहन, ई-रिक्शा, ठेला अथवा अन्य वाहन निर्धारित समय से अधिक देर तक चौराहे पर खड़ा रहता है तो सिस्टम स्वतः सार्वजनिक उद्घोषणा कर वाहन चालक को तत्काल वाहन हटाने का निर्देश देगा। निर्धारित समय तक वाहन न हटाने पर सिस्टम ट्रैफिक पुलिस को स्वतः सूचना प्रेषित करेगा, जिसके आधार पर आवश्यक प्रवर्तन कार्रवाई करते हुए वाहन को हटाया जाएगा। सूतमिल चौराहे पर एनाउंसमेंट सिस्टम लागू नगर आयुक्त ने बताया कि इस व्यवस्था को प्रथम चरण सूतमिल चौराहे पर लागू किया जा चुका है। पिछले लगभग 15 दिनों के अनुभव में पाया गया है कि जहां पूर्व में इस चौराहे पर सामान्यतः 15 से 20 मिनट तक जाम की स्थिति बनी रहती थी, वहीं वर्तमान में यह समय घटकर लगभग 2 से 3 मिनट रह गया है। डीएम अविनाश कुमार ने कहा कि आधुनिक तकनीक का उद्देश्य केवल निगरानी करना नहीं बल्कि नागरिकों को बेहतर और सुगम यातायात उपलब्ध कराना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट प्रणाली से चौराहों पर अनावश्यक प्रतीक्षा कम होगी ईंधन की बचत होगी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीरज जादौन ने कहा कि स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन पुलिस और नगर निगम के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

इको टूरिज्म से झारखंड की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने की तैयारी

 रांची प्राकृतिक सौंदर्य और संसाधनों से भरपूर झारखंड में इको टूरिज्म के जरिए अर्थव्यवस्था को गति देने की पहल की जा रही है। वन एवं पर्यावरण विभाग ने रांची जिले के जोन्हा में इको टूरिज्म की पहल की है। हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जोन्हा का दौरा किया था और यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर अपलोड किया था। अभी दुमका जिले में मयूराक्षी नदी के किनारे इको टूरिज्म चलाया जा रहा है। यहां इको फ्रेंडली कॉटेज में रहकर पर्यटक मयूराक्षी नदी पर बने बांध और वहां के वन क्षेत्र को देखते हैं। इसके अलावा दलमा में भी इको टूरिज्म कराया जा रहा है। लातेहार जिले के लोध और चतरा के तमाशीन जलप्रपात क्षेत्र में भी इको टूरिज्म चलाने की योजना बनाई जा रही है। इसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दी जाएगी। युवाओं को स्वरोजगार के जरिए आजीविका के नए रास्ते बताए जाएंगे। पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटकों को मिलेंगी सुविधाएं राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने जोन्हा में इको टूरिज्म की संभावना देखते हुए पर्यावरण की सुरक्षा के साथ कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश अधिकारियों को दिया है। स्थानीय वन प्रबंधन समिति को इस तरह के इको टूरिज्म स्थलों के प्रबंधन से जोड़ा जाएगा। उन्होंने पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधा देते हुए प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात भी कही है। क्या होता है इको टूरिज्म इको टूरिज्म में स्थानीय समुदाय की पारंपरिक मान्यताओं के प्रति प्रतिबद्धता रखते हुए बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाती है। संरक्षित क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय समुदाय के लिए पर्यावरण संरक्षण और स्थायी आजीविका का संतुलन बनाकर ही इको टूरिज्म किया जाता है।  

पारदर्शिता पर जोर: लेखा विभाग में 19 अधिकारियों को प्रमोशन, 52 का ट्रांसफर

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार ने वित्त एवं लेखा विभाग में बीते पांच साल से मौजूद 52 अधिकारियों का तबादला कर दिया है। सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता को मजबूत करने के उद्देश्य से यह फेरबदल किया है। इनमें 23 डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स और 29 वरिष्ठ लेखाधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा सरकार ने विभागीय कार्यकुशलता को बढ़ावा देते हुए 19 वरिष्ठ लेखा अधिकारियों (सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर) को पदोन्नत कर डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स बनाया है। सरकार का कहना है कि ये सभी निर्णय प्रशासनिक आवश्यकताओं, बेहतर वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शी कार्यप्रणाली को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं। सीएम रेखा गुप्ता ने क्या कहा?     मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो पारदर्शिता, जवाबदेही, दक्षता और सुशासन के उच्चतम मानकों पर आधारित हो।     उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था में शिथिलता, लापरवाही और भ्रष्टाचार के लिए कोई स्थान नहीं है। सरकार के अनुसार, वित्त एवं लेखा विभाग में किए गए इस व्यापक फेरबदल से वित्तीय प्रबंधन और समयबद्ध निर्णयों के माध्यम से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। द्वारका में 500 किलोवॉट का सोलर प्लांट शुरू पालम विधानसभा क्षेत्र के द्वारका सेक्टर 7 स्थित एयर फोर्स और नेवल ऑफिसर्स एनक्लेव में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 500 किलोवॉट क्षमता के सोलर पावर प्लाट का उद्‌घाटन किया। यह सोलर प्लाट सोसायटी के करीब 375 घरो की बिजली की जरूरतों को स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करेगा। मुख्यमंत्री ने उ‌द्घाटन के दौरान बताया कि प्लाट चालू होने से एनक्लेव का मासिक बिजली खर्च करीब 12 लाख रुपये से घटकर आधा, यानी लगभग 6 लाख रुपये रह जाएगा। इससे सोसायटी के निवासियों को हर साल करीब 72 लाख रुपये की बचत होगी। करीब दो करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से 90 लाख रुपये और दिल्ली सरकार की ओर से 10 लाख रूपये की सब्सिडी दी गई है।