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ब्लू स्टार बरसी पर अमृतसर में बढ़ी हलचल, श्री अकाल तख्त से जत्थेदार का कौम के नाम संबोधन

अमृतसर  ऑपरेशन ब्लू स्टार की आज 42वीं बरसी है। श्री अकाल तख्त साहिब में सुबह से ही संगत पहुंचने लगी है।  सरबत खालसा के जत्थेदार ध्यान सिंह मंड अपने समर्थकों के साथ श्री अकाल तख्त पहुंचे। अकाली दल अमृतसर के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान अपने साथियों के साथ श्री अकाल तख्त पर पहुंचे। आज गुरुनगरी में बंद का आह्वान किया गया है। इसे देखते हुए पुलिस और अर्ध सैनिक बलों ने सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए हैं। सिविल ड्रेस में पुलिस और गुप्तचर विभाग के कर्मचारी भी तैनात हैं।   एसजीपीसी ने भी श्री अकाल तख्त साहिब के आसपास अपनी टास्क फोर्स तैनात की है। अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने सिख कौम को संदेश दिया। श्री अकाल तख्त साहिब के पास संगत ने खालिस्तान के नारे लगाए। कड़ी सुरक्षा और नाकाबंदी पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने बताया कि गुरु नगरी में 65 से ज्यादा जगहों पर नाकाबंदी है। संदिग्ध वाहनों और लोगों की तलाशी ली जा रही है। होटल मालिकों को संदिग्धों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख प्रवेश मार्गों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डा और एयरपोर्ट पर भी चेकिंग अभियान चल रहे हैं। जिले में पुलिस और अर्ध सैनिक बल की कुल ग्यारह कंपनियां तैनात की गई हैं।   ऑपरेशन ब्लू स्टार भारतीय इतिहास का वह अध्याय है, जिस पर आज भी बहस खत्म नहीं हुई. एक पक्ष इसे आतंकवाद के खिलाफ जरूरी कार्रवाई मानता है, तो दूसरा इसे सिख भावनाओं पर चोट के रूप में देखता है. यही वजह है कि हर साल 6 जून को अमृतसर में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और भिंडरावाले को याद करते हैं. इस बार भी कई संगठनों ने विशेष अरदास की. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि 1984 की कार्रवाई ने पूरे सिख समुदाय को गहरी पीड़ा दी थी. वहीं प्रशासन का फोकस किसी भी तरह की उग्र गतिविधि को रोकने पर रहा. सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई. कई वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिनमें नारेबाजी और पोस्टर दिखाई दिए. ऐसे में सवाल फिर उठने लगा है कि आखिर 6 जून को ही स्वर्ण मंदिर में इतना संवेदनशील माहौल क्यों बन जाता है।  42 साल बाद भी क्यों जिंदा है ब्लू स्टार का जख्म?     ऑपरेशन ब्लू स्टार 1 जून से 8 जून 1984 के बीच चलाया गया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर परिसर में कार्रवाई की थी. सेना का मकसद जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके हथियारबंद समर्थकों को बाहर निकालना था. इस ऑपरेशन के दौरान भारी गोलीबारी हुई और 6 जून 1984 को भिंडरावाले मारा गया. इसी वजह से हर साल 6 जून को उसकी बरसी के तौर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।      इस सैन्य अभियान के दौरान अकाल तख्त को भारी नुकसान पहुंचा था. यही कारण है कि सिख समुदाय का एक बड़ा वर्ग इसे धार्मिक स्थल की बेअदबी मानता है. ऑपरेशन के बाद पूरे देश में तनाव फैल गया था. बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी. इसके बाद देश में भयानक दंगे हुए थे।      स्वर्ण मंदिर परिसर में  सुरक्षा बेहद कड़ी रही. पंजाब पुलिस, अर्धसैनिक बल और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर रहीं. मंदिर परिसर में आने-जाने वालों पर नजर रखी गई. प्रशासन ने साफ किया कि किसी भी हालत में कानून व्यवस्था बिगड़ने नहीं दी जाएगी।  अपनों ने किया श्री हरिमंदिर साहिब पर हमला जून 1984 की घटनाओं की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम के दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कौम के नाम संदेश पढ़ते हुए कहा कि जून 1984 में भारतीय सेना ने श्री हरिमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब पर कार्रवाई की थी, जिसमें दमदमी टकसाल के प्रमुख ज्ञानी जरनैल सिंह भिंडरांवाले, भाई अमरीक सिंह, जनरल शबेग सिंह समेत अनेक लोगों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि इस घटना में टैंकों और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिसे सिख इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है। जत्थेदार ने बीबी सतनाम कौर और बीबी वाहेगुरु कौर सहित उन महिलाओं का भी उल्लेख किया, जिन्होंने अपने विश्वास के लिए बलिदान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि समय-समय पर सिख पहचान और परंपराओं को कमजोर करने के प्रयास हुए हैं। साथ ही कहा कि सिख समुदाय ने दुनिया भर में मेहनत, सेवा और “सरबत दा भला” की भावना से सम्मान हासिल किया है। उन्होंने संगत से गुरु साहिबान की शिक्षाओं पर चलते हुए एकजुट रहने और कौमी हितों की रक्षा के लिए सजग रहने का आह्वान किया। जत्थेदार ने अपने संदेश में कहा कि पहले विदेशी ताकतें हमला करती थी। लेकिन  इस घल्लूघारा में अपनों ने ही हमला किया।  सिखों के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश ज्ञानी गड़गज्ज ने कहा कि सिख इस देश के बराबरी के अधिकार रखने वाले नागरिक हैं और उन्होंने हमेशा अपनी आन, बान और शान के साथ जीवन व्यतीत किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि समय-समय पर सिख पहचान को कमजोर करने और पांच ककारों को समाप्त करने जैसी नीतियां बनाई गईं तथा सिखों की अलग पहचान मिटाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब की धरती पर दुनिया भर से लोग आकर रहते हैं, लेकिन जब सिख अन्य राज्यों में बसने जाते हैं तो कई बार उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सिख अपने गुरुओं और सिद्धांतों की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करने का जज्बा रखते हैं। जत्थेदार ने कहा कि आज सिख समुदाय पूरी दुनिया में अपनी मेहनत, सेवा और सरबत दा भला की भावना के कारण सम्मानित पहचान बना चुका है। हालांकि, उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से विभिन्न मुद्दों को आधार बनाकर विश्व स्तर पर सिखों के खिलाफ नफरत का माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने संगत से गुरु साहिबान की शिक्षाओं पर चलते हुए एकजुट रहने और कौमी हितों की रक्षा के लिए सजग रहने का आह्वान किया। पुलिस मुस्तैत, रिजर्व फोर्सेस तैनात हेरिटेज स्ट्रीट के चप्पे चप्पे की निगरानी पुलिस अफसर सीसी कैमरों के जरिए कर रही है। गुरुनगरी के मुख्य प्वाइंट्स पर … Read more

शिक्षा मंत्री सख्त: 10 साल पुराने मुकदमों की 15 दिन में होगी पहचान और समीक्षा

पटना बिहार का शिक्षा विभाग वर्षों से मुकदमों के बोझ तले दबा जा रहा है। हाल यह है कि विभाग 10145 मुकदमों में उलझा हुआ है। हालांकि अब इसके निपटारे की कार्ययोजना बनायी जा रही है। विभाग लंबित मुकदमों में से 10 वर्ष या उससे अधिक पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर बिहार मुकदमा नीति के प्रावधानों के अंतर्गत उनका शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करेगा। लंबित मुकदमों के मामले को शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने इसे लेकर विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। उन्होंने कहा कि मुकदमे न केवल प्रशासनिक संसाधनों की बर्बादी हैं, बल्कि ये शिक्षकों, कर्मियों और आम नागरिकों के हितों से जुड़े निर्णयों में भी अनावश्यक विलंब का कारण बनते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की विशेष सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निस्तारण किया जाए। मंत्री ने 15 दिनों के भीतर दस वर्ष से अधिक पुराने मामलों की पहचान, वर्गीकरण और प्रारंभिक समीक्षा पूरी कर बिहार मुकदमा नीति के अनुरूप कार्रवाई प्रारंभ करने को कहा है। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में यह भी कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। विभागीय स्तर पर इसकी नियमित निगरानी की जाएगी। मुकदमों के बोझ से मुक्त होने पर विभाग का समय, ऊर्जा और संसाधन सीधे तौर पर जनहितकारी कार्यों में लगाए जा सकेंगे। विद्यालयों की गुणवत्ता और आधारभूत ढांचे के विकास में, शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की लंबित समस्याओं के समाधान में तथा सरकारी शिक्षा योजनाओं के प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन में इसका उपयोग हो सकेगा। इससे प्रशासनिक निर्णय-प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और सरल बनेगी। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार मुकदमा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से शिक्षा विभाग के मुकदमों के बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी। बिहार सरकार जवाबदेह और परिणामोन्मुख प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षा विभाग इस दिशा में सुशासन की एक नई नजीर पेश करेगा।

मौसम बदलेगा मिजाज: पूरे झारखंड में बारिश के आसार, पलामू-गढ़वा में 40°C तक पहुंचेगा पारा

 रांची  झारखंड में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र, रांची (IMD Ranchi) ने राज्य के विभिन्न जिलों के लिए आज का मौसम पूर्वानुमान (Jharkhand Weather Forecast) जारी कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आज पूरे राज्य में कई स्थानों पर बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज ऐसा कोई जिला नहीं बचेगा, जहां एक-दो स्थानों पर बारिश न हो। यानि पूरे झारखंड में बारिश के आसार हैं। इसके अलावा, बिजली कड़कने और बादल गरजने का भी अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 40 से 50 की रफ्तार से हवा चलेगी। बारिश के बाद जहां कई स्थानों में चुभती गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं जिन स्थानों पर बारिश नहीं होगी, वहां तापमान बढ़ेगा इन स्थानों पर बढ़ेगा तापमान मौसम विभाग के मुताबिक, आज झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में पारे का मिलाजुला असर देखने को मिलेगा। पलामू और गढ़वा जैसे उत्तर-पश्चिमी जिले आज सबसे गर्म रहने वाले हैं, जहां अधिकतम तापमान रिकॉर्ड 40°C तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, राजधानी रांची सहित मध्य झारखंड के इलाकों जैसे खूंटी और गुमला में आज अधिकतम तापमान 36°C और न्यूनतम तापमान 24°C से 25°C के आसपास बने रहने की उम्मीद है, जिससे यहां थोड़ी राहत रहेगी। इसके विपरीत, संताल परगना और उत्तर-पूर्वी झारखंड के देवघर, धनबाद और दुमका जैसे जिलों में अधिकतम तापमान 36°C के आसपास रहेगा, जबकि गोड्‌डा और पाकुर में यह 37°C तक जा सकता है। दक्षिण झारखंड के जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) में भी पारा 38°C के करीब रहने से दोपहर में उमस भरी गर्मी का अहसास होगा। मौसम विभाग की आज के लिए जरूरी चेतावनी वज्रपात (बिजली गिरने) से सावधान: जिन 15 जिलों में बारिश का अनुमान है, वहाँ तेज हवाओं के साथ बिजली कड़कने की आशंका है। मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थानों या पक्के मकानों में शरण लें। पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। दोपहर में निकलने से बचें: पलामू, गढ़वा और चतरा के लोग दोपहर 12 से 3 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर ही घर से बाहर निकलें।

जंतर-मंतर पर गूंजेगी कॉकरोच जनता पार्टी की आवाज, प्रदर्शन के लिए मिली मंजूरी

  नई दिल्ली दिल्ली पुलिस ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति दे दी है. 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने अपने समर्थकों से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगने के लिए शनिवार सुबह 9 बजे संसद मार्ग थाने के बाहर एकत्र होने की अपील की थी. इससे पहले विरोध प्रदर्शन के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रस्तावित प्रदर्शन के रास्ते में कोई कानूनी बाधा नहीं बची है।  जस्टिस सौरभ बनर्जी और जस्टिस अमित शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि याचिका पर नियत समय के अनुसार सुनवाई की जाएगी. विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे 'कॉकरोच जनता पार्टी' के फाउंडर अभिजीत दिपके ने नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है. वह अमेरिका के बोस्टन से शनिवार सुबह नई दिल्ली पहुंचे. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके समर्थकों से किताब और तिरंगा साथ लेकर जंतर-मंतर आने की अपील की।  उन्होंने लिखा, 'लैंडिंग हो गई. जंतर-मंतर पर आप सभी से मिलने का बेसब्री से इंतजार है. किताब और हमारा तिरंगा लाना न भूलें! सहानुभूति और कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में पुलिसकर्मियों को फूल भेंट करें. हमें इस आंदोलन का नेतृत्व प्रेम और शांति के साथ करना है!' दिल्ली पुलिस ने इस विरोध प्रदर्शन को ध्यान में रखकर निगरानी बढ़ा दी है और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संसद मार्ग थाना क्षेत्र के अलावा राजधानी के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी पुलिस बलों की तैनाती की गई है।  कॉकरोच जनता पार्टी नीट पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज से विरोध प्रदर्शन शुरू कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान समेत अन्य मंत्रियों के सरकारी आवासों के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. इस सप्ताह की शुरुआत में अभिजीत दिपके ने घोषणा की थी कि वह 6 जून को बोस्टन से भारत लौटेंगे और नीट पेपर लीक को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए एक शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करेंगे।  शिक्षा सुधारक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा था कि यदि 5 जून तक धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वह भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे. विरोध प्रदर्शन की संभावना को देखते हुए नई दिल्ली क्षेत्र में 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. दिल्ली पुलिस ने अपने जवानों को प्रदर्शनकारियों के साथ टकराव से बचने और बातचीत के जरिए स्थिति को शांत बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. पुलिस ने सेंट्रल दिल्ली को 12 जोन में बांटा गया है और प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी डीसीपी रैंक के अधिकारी को सौंपी गई है. सभी जिला और यूनिट डीसीपी को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है. विरोध प्रदर्शन के कारण यातायात प्रभावित होने और कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियों की आशंका जताई गई है। 

फायरिंग केस में नाम आने के बाद खान सर का सरेंडर, जानें पूरा मामला

पटना खान सर पर प्राथमिकी दर्ज हुए 24 घंटे बीत गए लेकिन पटना पुलिस उनको गिरफ्तार नहीं कर पाई। अब फैजल खान पटना सिविल कोर्ट पहुंच चुके हैं। वह सरेंडर करेंगे। कोर्ट में पेश होने के बाद उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। इससे पहले शुक्रवार रात्रि से शनिवार सुबह तक पटना पुलिस की टीम खान सर के कोचिंग के पास तो छात्रों की भीड़ जुटने लगी। विधि व्यवस्था प्रभावित न हो, इसलिए पटना पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक गिरफ्तार नहीं किया। देर रात छात्रों की संख्या कम हुई लेकिन इसके बावजूद खान सर ने न तो सरेंडर किया और न ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। शनिवार दोपहर खान सर सरेंडर करने कोर्ट पहुंच गए।   छात्रों को मैसेज आया कि खान सर आज क्लास लेंगे इधर, शनिवार सुबह खान सर के कोचिंग से जुड़े छात्रों को मैसेज आया कि खान सर आज क्लास लेंगे। वह सुबह 10 से 11 बजे क्लास लेंगे। हालांकि, उन्होंने क्लास तो नहीं लिया लेकिन वह सरेंडर करने जरूर सामने आए। पटना पुलिस ने छात्रों से फिर से अपील की है कि वह किसी कोचिंग वालों के बहकावे में नहीं आएं। विधि व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की मदद करें। पटना पुलिस निष्पक्ष होकर कार्रवाई कर रही है। खान सर पर गोली चलाने के आदेश देने का आरोप थाने में दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि दोनों सुरक्षा गार्डों ने लोगों में भय और दहशत फैलाने तथा सार्वजनिक रूप से हथियार का प्रदर्शन करने के उद्देश्य से फायरिंग की। दोनों अंगरक्षकों ने कबूल किया है कि उन्होंने खान सर के कहने पर ही फायरिंग की। दोनों ने स्पष्ट कहा कि कुछ लोग उग्र होकर कोचिंग के बाहर सुरक्षा गार्ड को बेरहमी से पीट रहे थे। इतना ही नहीं कुछ अन्य असमाजिक तत्व बैनर और पोस्टर भी फाड़ने लगे। हंगामा के बाद हमलोग खान सर के साथ बाहर आए। हंगामा देखकर खान सर ने कहा कि देख क्या रहे हैं हो, अविलंब फायर करो जो होगा मैं समझ लूंगा। इस आदेश के बाद हमलोगों ने दो दो राउंड फायरिंग की। खान सर को कितने साल की सजा हो सकती है? पटना पुलिस ने फैसल खान उर्फ खान सर पर बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 109 और आर्म्स एक्ट की धारा 25 (9)/ 27/ 35 के तहत हत्या के प्रयास और लापरवाही से हथियार (जैसे बंदूक या पिस्टल) लहराने या इस्तेमाल करने का केस दर्ज होता है। पटना हाईकोर्ट के वकील आलोक आनंद ने कहा कि गोली चलाने का आरोप खान सर के दोनों अंगरक्षकों पर लगा है। अगर यह बात साबित हो जाती है कि खान सर के आदेश पर दोनों अंगरक्षकों ने गोली चलाई तो वह भी सामान्य रूप से बीएनएस की धारा 109 में दोषी पाए जाएंगे। अगर दोषी पाए गए तो 10 साल तक की सजा उन्हें हो सकती है। उनपर आर्म्स एक्ट की धारा 35 भी लगी है। इससे खान सर नहीं बच सकते हैं। जो धाराएं लगाई हैं वह खान को परेशान करेगी।    

निशांत समेत 8 नामों का ऐलान, सामाजिक समीकरण साधने में जुटा एनडीए

पटना बिहार विधान परिषद की एक सीट पर उपचुनाव और 9 सीटों पर चुनाव को लेकर एनडीए ने आठ उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। एनडीए के दोनों प्रमुख दलों जदयू और भाजपा ने अपने-अपने कोर वोटरों का पूरा ध्यान रखा है। इन आठ उम्मीदवारों में पांच अतिपिछड़ा समाज से जबकि तीन महिलाएं हैं। जदयू ने तीन जबकि भाजपा ने दो अतिपिछड़ों को मौका दिया है। भाजपा ने अपने हिस्से की चार सीटों में से दो सवर्णों के हवाले किया है। घोषित उम्मीदवारों में भाजपा के संजय मयूख को छोड़कर निशांत समेत शेष सात उम्मीदवार पहली बार विधान परिषद जाएंगे। एनडीए की ओर से 9वीं सीट पर मंत्री दीपक प्रकाश का भी विधान परिषद जाना तय है। जल्द ही रालोमो उनकी उम्मीदवारी की घोषणा करेगी। जदयू ने उम्मीदवारों के चयन में आधार वोट के साथ क्षेत्रीय संतुलन को भी साधा है। जदयू की सबसे बड़ी ताकत मानी जाने वाली आधी आबादी को आधी हिस्सेदारी दी गयी है। पार्टी के चार उम्मीदवारों में एक पिछड़ा तो तीन अति पिछड़ा हैं। इनमें एक कुर्मी, एक नोनिया, एक कुम्हार और एक धानुक जाति से हैं। भाजपा प्रत्याशियों में दो सवर्ण और दो अतिपिछड़ा हैं। सवर्ण में एक राजपूत तो एक कायस्थ हैं जबकि अतिपिछड़ा में एक नाई और दूसरी प्रजापति हैं। चार में एक महिला को भी है। इनमें तीन पहली बार तो एक तीसरी बार विधान परिषद के सदस्य बनेंगे। जदयू की सूची में पहला नाम निशांत का है। उन्हें जदयू का अगला चेहरा माना जा रहा है। डॉ. भारती मेहता बीते 25 वर्षों से जदयू के लिए काम कर रही हैं। इस समय जदयू महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष हैं। वह संस्कृत शिक्षा बोर्ड की अध्यक्ष रह चुकी हैं। वहीं, शिवरानी प्रजापति 20 वर्षों से पार्टी में सक्रिय हैं। वे बेतिया जिला परिषद अध्यक्ष रह चुकी हैं। अति पिछड़ी वर्ग में कुम्हार जाति से आती हैं। ललन प्रसाद समता पार्टी के समय से यानी लगभग 32 वर्षों से पार्टी के काम में जुटे हैं। अति पिछड़ा वर्ग के धानुक जाति से आते हैं। भोजपुरी सिने स्टार पवन सिंह काराकाट से निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़े थे। हाल के दिनों में पवन सिंह की मुलाकात भाजपा के शीर्ष नेताओं से हुई थी। उसी समय से कयास लगाया जा रहा था कि पवन सिंह को कुछ अहम जिम्मेवारी दी जाएगी। वहीं, डॉ. संजय मयूख को एक बार फिर उम्मीदवार बनाया गया है। वे लगातार तीसरी बार उच्च सदन के सदस्य होंगे। इसके पहले पार्टी ने गंगा प्रसाद और मंगल पांडेय को लगातार तीन बार विधान परिषद भेजा था। अनिल कुमार ठाकुर अतिपिछड़ा वर्ग में नाई जाति से आते हैं। वे अभी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। वहीं शीला पंडित (प्रजापति) अभी बाल संरक्षण आयोग की सदस्य हैं। वह डॉ. संजय जायसवाल के प्रदेश अध्यक्ष रहते प्रदेश मंत्री और सम्राट चौधरी के साथ प्रदेश उपाध्यक्ष के तौर पर काम कर चुकी हैं।

रिसर्च में खुलासा: भालू के पेट से गुजरकर बीज बन रहे ज्यादा मजबूत पौधे

अरावली जब हम भालू (Sloth Bear) के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में शहद चाटते या सुस्त पड़े जानवर की छवि आती है. लेकिन राजस्थान के सूखे और झीलों से घिरे अरावली के जंगलों (Aravalli Range) में ये भालू एक माली की तरह काम कर रहे हैं. हाल ही में आई एक साइंटिफिक रिसर्च से पता चला है कि भालू जो फल खाते हैं, उनके बीज जब भालू के पेट से होकर बाहर निकलते हैं, तो उनसे नए पौधे बहुत तेजी से उगते हैं. आसान शब्दों में कहें तो भालू अपनी इस आदत से अरावली के जंगलों को नया जीवन दे रहे हैं और पेड़-पौधों की आबादी बढ़ाने में मदद कर रहे हैं. यह रिसर्च किसने की है? इस दिलचस्प स्टडी का नाम Seasonal Diet And Seed Dispersal By Sloth Bears Melursus Ursinus in Western India है, जिसे जल्द ही इंटरनेशनल जर्नल Biotropica में पब्लिश किया जाना मंजूर कर लिया गया है. इस रिसर्च को तीन वैज्ञानिकों की टीम ने मिलकर पूरा किया है. इनमें रिसर्च स्कॉलर उत्कर्ष प्रजापति, इंडिपेंडेंट रिसर्चर डॉ. के.एस. गोपी सुंदर और उदयपुर की एक यूनिवर्सिटी के रिसर्चर विजय कुमार कोली शामिल हैं. उत्कर्ष ने अपनी पीएचडी की जरूरतों के तहत यह स्टडी की है. इन वैज्ञानिकों का कहना है कि अरावली जैसे सूखे और पतझड़ वाले जंगलों में बड़े सर्वाहारी (सब कुछ खाने वाले) जानवर पेड़-पौधों की पीढ़ियों को आगे बढ़ाने में कैसे मदद करते हैं, इस पर अतीत में बहुत कम जानकारी उपलब्ध थी. वैज्ञानिकों ने कैसे लगाया इस सच का पता? यह अहम स्टडी अरावली के अर्ध-शुष्क पतझड़ वाले जंगलों में की गई. वैज्ञानिकों ने भालू के खान-पान और बीजों को दूर-दूर तक फैलाने के तरीके को गहराई से समझने के लिए एक अनोखा रास्ता चुना. उन्होंने सर्दियों और गर्मियों के मौसम में भालू के मल (Scat) के सैंपल इकट्ठे किए और उनका एनालिसिस किया. इसके बाद उन्होंने भालू के मल से निकले बीजों और सीधे पौधों से तोड़े गए बीजों को अलग-अलग उगाकर उन पर एक्सपेरिमेंट किए. इस पूरी प्रक्रिया का मकसद यह जांचना था कि भालू के पेट से गुजरने के बाद कौन से बीज ज्यादा बेहतर अंकुरित होते हैं और किस पौधे के सीडलिंग्स ज्यादा समय तक जिंदा रहकर पेड़ बन पाते हैं. भालू के पेट से गुजरने के बाद बीजों में क्या बदलाव आया? इस रिसर्च में 6 अलग-अलग पौधों की प्रजातियों के बीज भालू के पेट से गुजरने के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित और उगने लायक पाए गए. कुछ पौधों पर तो इसका असर बेहद चौंकाने वाला था. रिसर्च में देखा गया कि लैंटाना कैमारा नाम की एक विदेशी आक्रामक झाड़ी के बीज सिर्फ और सिर्फ तभी अंकुरित हुए, जब वे भालू के मल से होकर निकले थे. इसके विपरीत डोंकी बेरी (Grewia flavescens) के मामले में सीधे पेड़ से तोड़े गए बीज ज्यादा बेहतर तरीके से जिंदा रहे. वहीं, कोरोमंडल एबनी या तेंदू (Diospyros melanoxylon) के बीज जब भालू के पेट से होकर बाहर आए, तो उनसे उगे पौधे सामान्य बीजों के मुकाबले बहुत ज्यादा दिनों तक जिंदा रहे और मजबूत निकले. बाकी चार प्रजातियों के पौधों में भालू के मल से निकले बीज और सामान्य बीजों के उगने और जिंदा रहने की रफ्तार लगभग एक जैसी ही देखी गई. मौसम के हिसाब से बदल जाता है भालुओं का 'मेन्यू' रिसर्च से एक और दिलचस्प बात सामने आई कि अरावली के भालू मौसम के हिसाब से अपने खाने की थाली पूरी तरह बदल लेते हैं. इसे साइंस की भाषा में डाइट्री प्लास्टिसिटी कहते हैं. सर्दियों के मौसम के दौरान भालू जमकर फल खाते हैं और खास बात यह है कि वे अंधाधुंध हर तरह के फल नहीं खाते, बल्कि अपनी पसंद के चुनिंदा फल ही चुनते हैं. वहीं, गर्मियों में जब जंगलों में फल कम हो जाते हैं, तो भालू अपना मेन्यू बदलकर कीड़े-मकोड़े और दीमक खाने लगते हैं. हालांकि भालुओं का शरीर मुख्य रूप से चींटियां और दीमक खाने के लिए ही कुदरत ने बनाया है, लेकिन वे अपनी इस आदत में बदलाव कर लेते हैं और मौका मिलते ही फल खाने से पीछे नहीं हटते. अरावली के पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी है भालू? इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने भालू (Sloth Bear) को Vulnerable यानी खतरे की कगार पर खड़ी प्रजातियों की लिस्ट में रखा है. यह प्रजाति मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में ही पाई जाती है. डॉ. के.एस. गोपी सुंदर ने आईएएनएस को बताया कि यह रिसर्च साबित करती है कि भालू चुनिंदा बीजों को फैलाने का बहुत बड़ा जरिया हैं. मौसम के हिसाब से बदलने वाली ऐसी जगहों पर, जहां पानी और संसाधनों की भारी कमी होती है, वहां भालुओं का यह लचीलापन पूरे जंगल की बनावट और हरियाली को तय करता है. इससे पहले भारत में हुए रिसर्च सिर्फ इस बात तक सीमित थे कि भालू क्या खाते हैं, लेकिन इस नई स्टडी ने पहली बार एक्सपेरिमेंट के जरिए यह साबित किया है कि भालू अरावली के इकोसिस्टम को जिंदा रखने और यहां की वनस्पति को संवारने में कितने बड़े और अहम मददगार हैं.

नेपाल सीमा पर स्वास्थ्य जांच चौकियों की मांग, इबोला खतरे के बीच बढ़ी सतर्कता

लखनऊ  इबोला से प्रभावित देशों से वापस भारत आए यात्रियों की यूपी में भी निगरानी की जा रही है। इबोला सर्विलांस एंड पैसेंजर मॉनिटरिंग की लाइन लिस्ट में बस्ती मंडल के दो यात्रियों का नाम शामिल है। पूरे प्रदेश में विदेश से आने वाले कुल 95 यात्रियों की सूची तैयार कराई गई है। यह वह यात्री हैं, जो किसी न किसी तरह से इबोला वॉयरस से प्रभावित देश से वापस भारत में आए हैं। मंडल के जो दो यात्री हैं, उसमें एक बस्ती और दूसरा संतकबीरनगर का है। स्वास्थ्य विभाग ने दोनों यात्रियों को होम क्वारंटाइन करा दिया है। उधर, पूर्वांचल में विशेषज्ञ उत्तर प्रदेश से लगी नेपाल सीमा पर स्थायी स्वास्थ्य जांच चौकियां बनाने का सुझाव दे रहे हैं ताकि इस ओर से आने वाले विभिन्न देशों के नागरिकों के स्वास्थ्य पर निगरानी रखी जा सके। बस्ती जिले के सल्टौआ ब्लॉक के एक गांव का 22 वर्षीय युवक बंग्लादेश की राजधानी ढाका से हवाई यात्रा कर दिल्ली पहुंचा है। यह किसी इलेक्ट्रानिक उपकरण का व्यापार करता है। दिल्ली उतरने के साथ ही इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दे दी गई थी। संतकबीरनगर जिले के बघौली ब्लॉक का रहने वाला दूसरा यात्री यूगांडा के इंटेबी शहर से मुम्बई पहुंचा था। वहां पर एक दशक से रहकर मजदूरी का काम करता है। दोनों का नाम बस्ती की लाइन लिस्ट में शामिल है। सीएमओ बस्ती ने संतकबीरनगर के यात्री की सूचना सीएमओ संतकबीरनगर को पत्र के माध्यम से दे दी है। अफ्रीका के कुछ देशों में इन दिनों इबोला बीमारी का प्रकोप फैला हुआ है, इसे देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से अलर्ट जारी कर दुनिया के सभी देशों के लिए हेल्थ गाइड लाइन जारी की गई है। इसके तहत इबोला प्रभावित क्षेत्र से आपके देश में कोई यात्री जाता है तो उसे आम लोगों से अलगक्वारंटाइन में रखकर उस पर नजर रखी जाएगी। सीमा पर स्थापित हों स्थायी स्वास्थ्य जांच चौकियां मिशन सेव इंडिया के संस्थापक और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.आरएन सिंह ने सरकार से भारत-नेपाल सीमा के सभी स्थलीय प्रवेश द्वारों (लैंड पोर्ट्स) पर स्थायी स्वास्थ्य जांच चौकियां स्थापित करने की मांग की है। डॉ.सिंह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर तेजी से फैलने वाली संक्रामक और घातक वायरल बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत की सीमाओं पर स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाना समय की आवश्यकता है। डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर यात्रियों की स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था तो कर दी है लेकिन लैंड पोर्ट्स पर भी सतर्कता बेहद जरूरी है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने की वजह से हर रोज हजारों लोग विभिन्न लैंड पोर्ट्स और सीमा चौकियों के जरिए आते और जाते हैं। ऐसे में यदि किसी संक्रामक बीमारी का संक्रमण सीमा पार फैलता है तो सीमा पर चौकसी के जरिए उसका अपने देश में प्रवेश रोका जा सकता है। डॉ.सिंह ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी संक्रामक रोग के प्रसार को रोकने के लिए प्रारंभिक स्तर पर निगरानी और जांच व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। दूसरों की आईडी से सिम लेने के मामले पूर्वी यूपी में सबसे ज्यादा दूसरों के पहचान पत्र से सिम कार्ड हासिल करने के मामले पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं यहां से मोबाइल नंबर से जुड़ीं 32 लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं इनमें से करीब 16 लाख लोगों की आईडी का गलत इस्तेमाल कर सिम कार्ड जारी किए गए दूसरों के पहचान पत्र से सिम कार्ड हासिल करने के मामले पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं। यहां से मोबाइल नंबर से जुड़ीं 32 लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से करीब 16 लाख लोगों की आईडी का गलत इस्तेमाल कर सिम कार्ड जारी किए गए। इसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में का नंबर आता है। दूरसंचार विभाग से जुड़े एक अधिकारी कहते हैं कि शुरुआत में मोबाइल नंबर सिर्फ आधार या दूसरी कोई आईडी लेकर जारी कर दिए जाते थे। ऐसे में काफी बड़ी संख्या में लोगों ने किसी दूसरे की आईडी लेकर मोबाइल नंबर को जारी कर लिया। ऐसे नंबर साइबर ठगी व अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए हासिल किए गए।

308 करोड़ के केशकाल घाट बायपास का उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने किया निरीक्षण, कार्यों की प्रगति परखी

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने 308 करोड़ की लागत से बन रहे केशकाल घाट बायपास रुट का किया निरीक्षण कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश रायपुर  उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने रायपुर-जगदलपुर मार्ग पर बहुप्रतीक्षित केशकाल घाट फोरलेन बायपास रुट का निरीक्षण किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के साथ बायपास के दोनों छोरों का निरीक्षण कर बायपास के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। साव ने अधिकारियों से कहा कि बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए यह बायपास अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका तेजी से निर्माण कर आवाजाही शुरू करना सरकार की प्राथमिकता में है। 11.38 किमी का है बायपास, 2 वृहद और 2 मध्यम पुल भी बनेंगे लोक निर्माण विभाग द्वारा 308 करोड़ रुपए की लागत से 11.38 किमी लंबे केशकाल घाट बायपास का निर्माण किया जा रहा है। इस बायपास में दो वृहद और दो मध्यम पुल भी बनाए जाएंगे। केशकाल-सलना सड़क मजबूतीकरण कार्य का भी किया निरीक्षण उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कोंडागांव जिले के केशकाल शहर में केशकाल से सलना तक सड़क मजबूतीकरण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण एजेंसी को समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ काम पूरा करने के निर्देश दिए। साव नजदीक के बेड़मा गांव में जल जीवन मिशन के अंतर्गत जल अर्पण कार्यक्रम में भी शामिल हुए। विधायक नीलकंठ टेकाम और कलेक्टर श्रीमती नुपुर राशि पन्ना भी कार्यक्रम में शामिल हुईं।

बदायूं, गोरखपुर और लखनऊ महिला पीएसी परिसर में क्रमशः वीरांगना अवंतीबाई, झलकारीबाई तथा उदा देवी की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित होगी: मुख्यमंत्री

आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित बल और मजबूत अवसंरचना से सशक्त होगी प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था: मुख्यमंत्री पीएसी में तैयार होगा आईसीसीसी, एक ही डिजिटल नेटवर्क में जुड़ेंगी सभी वाहिनियां पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के निर्देश बदायूं, गोरखपुर और लखनऊ महिला पीएसी परिसर में क्रमशः वीरांगना अवंतीबाई, झलकारीबाई तथा उदा देवी की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित होगी: मुख्यमंत्री पीएसी बैंड कार्मिकों के समयबद्ध पदोन्नति के लिए नियमावली तैयार करें: मुख्यमंत्री कानून-व्यवस्था से आपदा प्रबंधन तक, सुरक्षा तंत्र के व्यापक आधुनिकीकरण पर मुख्यमंत्री का जोर, कहा सिविल पुलिस से मिलता-जुलता नहीं, विशिष्ट हो पीएसी का गणवेश संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने की कार्ययोजना की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ के सुदृढ़ीकरण पर मुख्यमंत्री का फोकस लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी सुरक्षा बल की वास्तविक शक्ति उसके प्रशिक्षित, अनुशासित और तकनीकी रूप से दक्ष कार्मिक होते हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक व्यवहारिक और तकनीक आधारित बनाया जाए, ताकि सुरक्षा बलों के जवान हर परिस्थिति में प्रभावी और त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम हों। गुरुवार को उत्तर प्रदेश प्रांतीय आर्म्ड कांस्टेबुलरी (पीएसी), एसडीआरएफ तथा उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (यूपीएसएसएफ) के आधुनिकीकरण, क्षमता विस्तार, प्रशिक्षण, अवसंरचना विकास एवं भावी कार्ययोजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कहा कि पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ प्रदेश की सुरक्षा प्रणाली के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और इन्हें भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने पीएसी बल का गणवेश सिविल पुलिस से अलग करने की आवश्यकता भी जताई। मुख्यमंत्री ने पीएसी के डिजिटलीकरण एवं तकनीकी उन्नयन की समीक्षा करते हुए कहा कि आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। बैठक में बताया गया कि सभी पीएसी वाहनों में जीपीएस एवं डैशकैम स्थापित करने तथा त्वरित प्रतिक्रिया वाहनों की व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के समक्ष उत्तर प्रदेश पीएसी एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) परियोजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई। इसके माध्यम से प्रदेश की सभी पीएसी वाहिनियों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। जीपीएस आधारित वाहन ट्रैकिंग, ड्रोन एवं एआई आधारित निगरानी, लाइव कमांड एवं कंट्रोल सेंटर तथा सुरक्षित संचार प्रणाली विकसित किए जाएंगे। इससे कानून-व्यवस्था, चुनावी तैनाती, महिला सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन में बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से महिला बटालियनों के निर्माण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बदायूं, लखनऊ और गोरखपुर में महिला बटालियनों का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने तीनों बटालियन परिसर में क्रमशः वीरांगना अवंतीबाई, वीरांगना उदा देवी और वीरांगना झलकारी बाई की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित करने के निर्देश दिए। यह भी बताया गया कि बलरामपुर, मीरजापुर और जालौन में नई महिला वाहिनियों से संबंधित कार्यवाही भी आगे बढ़ाई जा रही है।  मुख्यमंत्री ने आगामी मानसून को देखते हुए बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन की तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 16 मई से 30 जून तक विभिन्न नदी तटों पर 17 पीएसी कंपनियों का विशेष बाढ़ राहत प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों के लिए मुख्यमंत्री ने सभी उपकरणों की नियमित जांच और उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में एसडीआरएफ की उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि इसकी टीमें वर्तमान में 12 जनपदों में तैनात हैं तथा संभावित बाढ़ परिस्थितियों को देखते हुए 15 जनपदों में अतिरिक्त तैनाती का प्रस्ताव तैयार किया गया है। एसडीआरएफ कर्मियों को एनडीआरएफ अकादमी नागपुर, नादिया, पश्चिम बंगाल तथा नंदा देवी इंस्टीट्यूट ऑफ एयरो रेस्क्यू सहित विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।  बैठक में मुख्यमंत्री ने पीएसी बैंड के कार्मिकों के समयबद्ध पदोन्नति की नियमावली तैयार करने के निर्देश दिए, साथ ही एसडीआरएफ को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से खोज एवं बचाव कार्यों के लिए ह्यूमन लिफ्टिंग ड्रोन की उपयोगिता पर विचार को भी कहा। उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एयरपोर्ट, मेट्रो नेटवर्क, आरआरटीएस, न्यायालय परिसरों, महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों तथा प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के क्षेत्र में इसकी जिम्मेदारी निरंतर बढ़ रही है। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में यूपीएसएसएफ 11 एयरपोर्ट, 4 मेट्रो नेटवर्क, मेरठ आरआरटीएस, लोकभवन, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तथा 5 जनपदीय न्यायालयों की सुरक्षा का दायित्व निभा रहा है।  मुख्यमंत्री ने एसएसएफ में तैनाती के लिए मानकीकरण के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि एयरपोर्ट सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के माध्यम से एयरपोर्ट सुरक्षा संबंधी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाते हुए प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता को और मजबूत किया जाए। मुख्यमंत्री ने यूपीएसएसएफ की विभिन्न वाहिनियों के निर्माण कार्यों की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि मुख्यालय एवं प्रथम वाहिनी, लखनऊ के निर्माण कार्य में लगभग 77 प्रतिशत प्रगति हो चुकी है। गोरखपुर स्थित द्वितीय वाहिनी का निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रयागराज, मथुरा, सहारनपुर एवं अयोध्या में प्रस्तावित वाहिनियों से संबंधित कार्यवाहियां भी प्रगति पर हैं।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ के आधुनिकीकरण, क्षमता विस्तार, तकनीकी उन्नयन, प्रशिक्षण, अवसंरचना विकास तथा मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण से जुड़े सभी प्रस्तावों एवं परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।