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घातक तलवार और चाकू लेकर घूम रहे दो आरोपी कुठला पुलिस के हत्थे चढ़े, आर्म्स एक्ट के तहत हुई कार्रवाई, न्यायालय ने दोनों को भेजा जेल

घातक तलवार और चाकू लेकर घूम रहे दो आरोपी कुठला पुलिस के हत्थे चढ़े, आर्म्स एक्ट के तहत हुई कार्रवाई, न्यायालय ने दोनों को भेजा जेल कटनी  आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत कुठला पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाई करते हुए धारदार तलवार और चाकू के साथ दो युवकों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, पुलिस अधीक्षक कटनी अभिनय विश्वकर्मा (भापुसे) के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य एवं उप पुलिस अधीक्षक शिवा पाठक के मार्गदर्शन में कुठला थाना प्रभारी निरीक्षक अखलेश दाहिया के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। पहली कार्रवाई 14 सितंबर की रात पेट्रोलिंग के दौरान पहलवान ढाबा के आगे नहर के पास की गई। पुलिस को यहां एक युवक संदिग्ध अवस्था में मिला। पूछताछ में उसने अपना नाम शिब्बू चौधरी (20), निवासी इंद्रानगर गली नंबर 9, थाना कुठला बताया। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से धारदार लोहे की तलवार बरामद हुई, जिसे पुलिस ने जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, 15 सितंबर को पुलिस को भ्रमण के दौरान इंद्रानगर बायपास यात्री प्रतीक्षालय के पास एक युवक के धारदार चाकू लेकर मौजूद होने की मुखबिर से सूचना मिली। सूचना की तस्दीक करने पहुंची पुलिस को देखकर युवक भागने का प्रयास करने लगा। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम मोहित पटेल (22), निवासी इंद्रानगर गली नंबर 4, थाना कुठला बताया। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से धारदार चाकू बरामद हुआ। पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध पृथक-पृथक धारा 25 आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया। कार्रवाई पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पूरी कार्रवाई कुठला थाना प्रभारी निरीक्षक अखलेश दाहिया के नेतृत्व में की गई। कार्रवाई में सहायक उप निरीक्षक रवि शुक्ला, प्रधान आरक्षक अजय यादव, राहुल मिश्रा, रामेश्वर सिंह, आलोक तिवारी, आरक्षक दुर्गेश सिंह, विवेक शुक्ला, विजय प्रजापति सहित अन्य पुलिस स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

एलडीए पूरा करेगा एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना

एलडीए पूरा करेगा एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना करीब 5,000 होमबायर्स की समस्या सुलझने की उम्मीद, 2,912 करोड़ तक की संभावित देनदारी शेष अवस्थापना सुविधाओं का होगा विकास, सरकारी जमीन की भी होगी सुरक्षा लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में लखनऊ स्थित मेसर्स एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना को पूरा किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत हाईटेक टाउनशिप नीति के अंतर्गत दिए गए लाइसेंस के तहत स्वीकृत परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) टेकओवर करेगा। इसके बाद परियोजना को पूर्ण करने का प्रस्ताव राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। 2,912 करोड़ तक की संभावित देनदारी प्रारंभिक अनुमान के अनुसार परियोजना की अधिकतम संभावित देनदारी करीब 2,912 करोड़ रुपये है। हालांकि, वास्तविक देनदारी आईआरपी (इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल) प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित होगी, जिसके भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि एलडीए को सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। 5,000 होमबायर्स की समस्या सुलझने की उम्मीद विशेष सचिव आवास राजेश कुमार राय ने बताया कि परियोजना को सरकारी अभिकरण के माध्यम से पूरा किए जाने से करीब 5,000 होमबायर्स की समस्या का समाधान संभव हो सकेगा। रुकी हुई परियोजना में दोबारा विकास कार्य शुरू कराए जा सकेंगे। हाईटेक टाउनशिप की शेष अवस्थापना सुविधाओं और उपयोगिताओं का विकास भी कराया जा सकेगा। इससे परियोजना को पूर्ण कर सुनियोजित विकास सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। सरकारी जमीन की होगी सुरक्षा प्रस्ताव के तहत बंधक भूमि और ग्राम समाज की भूमि को किसी तीसरे पक्ष के पक्ष में विनियमित किए जाने के स्थान पर लखनऊ विकास प्राधिकरण के पक्ष में विनियमित किया जाएगा। इससे शासकीय भूमि की रक्षा होगी। साथ ही, भविष्य में शासकीय विभागों की देनदारियों की प्राप्ति की संभावना भी बेहतर हो सकेगी। रियल एस्टेट और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा किसी शासकीय अभिकरण के माध्यम से परियोजना को विकसित किए जाने से होमबायर्स के बीच विश्वास पैदा होगा। परियोजना पूरी होने से रियल एस्टेट क्षेत्र और निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार सृजन में वृद्धि होने की भी उम्मीद है।

नागौर में दर्दनाक सड़क हादसा, मुरड़ से भरे डंपर ने कार को मारी टक्कर; 4 की मौत

नागौर  राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में गुरुवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। हादसा नावां क्षेत्र के मिठड़ी बाइपास पर सुबह करीब 5 बजे हुआ। यहां मुरड़ से भरे डंपर और कार में आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। हादसा इतना जबरदस्त थी कि कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई और उसमें सवार चारों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में पति-पत्नी और उनकी बेटी समेत कार चालक शामिल है। हादसे की सूचना मिलते ही नावां पुलिस मौके पर पहुंची। कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण शव अंदर फंस गए थे। पुलिस और स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी शवों को डीडवाना-कुचामन जिले के नावां उपजिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। हादसे के बाद सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। पुलिस ने क्षतिग्रस्त कार और डंपर को हटवाकर यातायात सुचारू करवाया। पति-पत्नी और बेटी की मौत पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान लक्ष्मण सिंह (46), उनकी पत्नी तुलसी (45), बेटी शीतल (22) और कार चालक रामा किशन (35) के रूप में हुई है। तीनों मृतक एक ही परिवार के थे। परिवार डीडवाना-कुचामन जिले के मिठड़ी के पास पालड़ी गांव में किराए के मकान में रह रहा था। बताया गया कि कार सवार जयपुर की ओर से आए थे और नावां होते हुए मिठड़ी गांव की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान मिठड़ी बाइपास पर सामने से आ रहे मुरड़ से भरे डंपर से कार की भिड़ंत हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। फिर कुछ ही देर में चारों की मौत हो गई। एएनएम के पद पर कार्यरत थी महिला पुलिस ने सभी शवों को नावां के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। साथ ही परिजनों को सूचना भिजवा दी है। परिजनों के आने के बाद पोस्टमार्टम होगा। इसके बाद शवों परिजनों को सौंपे जाएंगे। मृतका तुलसी स्वास्थ्य विभाग में एएनएम के पद पर कार्यरत थी। वह कासेड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र में अपनी सेवाएं दे रही थी। हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। डंपर जब्त, हादसे की जांच शुरू नावां थानाधिकारी सुरेश चौधरी ने बताया कि हादसे के बाद डंपर को जब्त कर पुलिस थाने भिजवा दिया गया है। पुलिस ने क्षतिग्रस्त कार को भी सड़क से हटवाया और यातायात बहाल करवाया। हादसे में शामिल डंपर में मुरड़ भरी हुई थी। क्षेत्र में रात के समय मुरड़ और बजरी से भरे भारी वाहनों के संचालन को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। फिलहाल, पुलिस हादसे के कारणों की जांच में जुटी हुई है।  

यूपी के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को नया विस्तार, 14,429 स्कूल बनेंगे स्मार्ट स्कूल

यूपी के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को नया विस्तार, 14,429 स्कूल बनेंगे स्मार्ट स्कूल श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड करेगी स्मार्ट क्लास की स्थापना, 300 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत, चरणबद्ध तरीके से होगा विद्यालयों का विकास वर्तमान में 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की मिल रही सुविधा 2 लाख 61 हजार से अधिक शिक्षकों को दिए गए टैबलेट, बच्चों को आधुनिक और बेहतर डिजिटल शिक्षा उपलब्ध कराने पर योगी सरकार का जोर लखनऊ उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को और मजबूत करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए कैबिनेट बैठक में अहम निर्णय लिया है। प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में विकसित करने के लिए श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड को कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किया गया है। कैबिनेट ने 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 14,429 प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की स्थापना चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। प्रदेश सरकार पहले से ही बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर लगातार काम कर रही है। वर्तमान में 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही 2 लाख 61 हजार से अधिक शिक्षकों को टैबलेट दिए जा चुके हैं। सरकार का प्रयास है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए सरकारी स्कूलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा के बेहतर अवसर मिलें। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत योगी सरकार ने वर्ष 2021 में की थी और इनका विधिवत संचालन शैक्षिक सत्र 2022-23 से शुरू हुआ। स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को विषयों को समझने में डिजिटल माध्यमों का लाभ मिल रहा है। अब प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के निर्णय से इस व्यवस्था का और विस्तार होगा। 300 करोड़ रुपये से होगा स्मार्ट स्कूलों का विकास कैबिनेट निर्णय के अनुसार बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 14,429 प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की स्थापना की जाएगी। स्मार्ट क्लास की स्थापना का कार्य नियमानुसार प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के माध्यम से कराया जाएगा। इसके लिए प्रति विद्यालय 2,07,910 रुपये (सेनेटेज चार्जेज एवं जीएसटी सहित) की प्रस्तावित दर निर्धारित की गई है। यदि निविदा प्रक्रिया में प्रति विद्यालय इससे कम दर प्राप्त होती है, तो स्वीकृत कुल 300 करोड़ रुपये की धनराशि के भीतर अधिक संख्या में प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया जा सकेगा। उच्च नामांकन वाले विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ेंगी डिजिटल सुविधाएं प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या और उच्च नामांकन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब की स्थापना की जाएगी। भारत सरकार की समग्र शिक्षा योजनान्तर्गत परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों, कक्षा 6 से 8, में डिजिटल इनिशिएटिव प्रोग्राम के तहत उच्च नामांकन वाले विद्यालयों में भी चरणबद्ध रूप से स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब स्थापित किए जाने हैं। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने से बच्चों को पारंपरिक शिक्षण व्यवस्था के साथ आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा। स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने में मदद मिलेगी। डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी बच्चों को सीखने के लिए अतिरिक्त डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराएगी। योगी सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के बच्चों को बेहतर, आधुनिक और तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। सरकारी स्कूलों में डिजिटल संसाधनों का लगातार विस्तार इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चे बदलती तकनीक के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ सकें।

सिद्धार्थनगर और हरदोई जिले में बनेंगे तीन नए बस स्टेशन, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी

सिद्धार्थनगर और हरदोई जिले में बनेंगे तीन नए बस स्टेशन, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी शोहरतगढ़, बढ़नी और सवायजपुर में बनेंगे बस अड्डे, राजस्व विभाग से परिवहन विभाग को मिलेगी निशुल्क भूमि योगी सरकार ने बढ़ाई परिवहन सुविधाओं की राह, बढ़ेंगे रोजगार और व्यापार के भी अवसर लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के तीन स्थानों पर बस स्टेशनों के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। कैबिनेट ने सिद्धार्थनगर विधानसभा क्षेत्र के शोहरतगढ़, बढ़नी और हरदोई जिले की तहसील सवायजपुर में बस स्टेशन के निर्माण के लिए राजस्व विभाग की भूमि को परिवहन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरण और नामांतरण किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि प्रस्ताव के अनुसार सिद्धार्थनगर के विधानसभा क्षेत्र शोहरतगढ़ के कस्बा शोहरतगढ, कस्बा बढ़नी और हरदोई की तहसील सवायजपुर में बस स्टेशन का निर्माण कराया जाना है। इन बस स्टेशनों के निर्माण के लिए राजस्व विभाग की चिह्नित भूमि परिवहन विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी। पर्यटन को भी मिलेगा प्रोत्साहन दयाशंकर सिंह ने कहा कि बेहतर परिवहन सुविधा से सामाजिक विकास, जीवन स्तर में सुधार और पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इस बुनियादी ढांचे के तहत सड़क नेटवर्क बेहतर होगा और यातायात संबंधी समस्याओं में कमी आएगी।  स्थानीय लोगों को मिलेंगे रोजगार के अवसर इन बस स्टेशनों के बनने से शहर के आस-पास के लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही बस स्टेशन परिसर में यात्रियों को सुविधाओं के साथ सुगम परिवहन सेवा उपलब्ध होगी। परियोजना से क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने, व्यापार एवं रोजगार के अवसर बढ़ने व स्थानीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ होने की बात कही गई।

नए शहरों के विकास के लिए लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली को मिलेंगे 380 करोड़

नए शहरों के विकास के लिए लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली को मिलेंगे 380 करोड़ मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत तीन विकास प्राधिकरणों की परियोजनाओं को पहली किस्त जारी करने की मंजूरी भूमि अर्जन के लिए राज्य सरकार देगी 50 प्रतिशत तक सीड कैपिटल, अधिकतम 20 वर्ष की अवधि का प्रावधान वित्तीय वर्ष 2026-27 में नए शहरों के समग्र विकास के लिए 3,500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में सुनियोजित शहरी विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं के लिए कुल 380 करोड़ रुपये की पहली किस्त की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए धनराशि अवमुक्त किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस फैसले से नए शहरों के विकास, भूमि अर्जन और आवासीय सुविधाओं के विस्तार की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देने पर जोर विशेष सचिव आवास राजेश कुमार राय ने इस विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में बढ़ती शहरी आबादी और आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार नगरीय क्षेत्रों के सुनियोजित एवं सुव्यवस्थित विकास पर जोर दे रही है। इसी उद्देश्य से शासनादेश दिनांक 6 अप्रैल 2023 के जरिये मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना लागू की गई थी। योजना का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों का व्यवस्थित विस्तार करने के साथ आम जनसंख्या को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके तहत नए शहरों के विकास के लिए आवश्यक भूमि अर्जन और संबंधित अवस्थापना सुविधाओं के विकास को प्रोत्साहित किया जाता है। इस फैसले से लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली में प्रस्तावित नए शहरों की परियोजनाओं को वित्तीय सहयोग मिलेगा। इससे शहरी विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और भविष्य की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए आधार तैयार होगा। भूमि अर्जन के लिए 50 प्रतिशत तक सीड कैपिटल मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत भूमि अर्जन में आने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में दिए जाने का प्रावधान है। यह धनराशि अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य विकास प्राधिकरणों को नए शहरों के लिए आवश्यक भूमि अर्जित करने में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। भूमि अर्जन के बाद संबंधित परियोजनाओं के समग्र एवं समुचित विकास को आगे बढ़ाया जा सकेगा। राज्य सरकार की ओर से सीड कैपिटल उपलब्ध होने से विकास प्राधिकरणों पर भूमि अर्जन का तत्काल वित्तीय दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इससे नए शहरों की परियोजनाओं को गति देने का रास्ता सुगम होगा। लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली की परियोजनाओं को 655.76 करोड़ तक की सहायता योजना के अंतर्गत लखनऊ, उन्नाव एवं रायबरेली विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं के लिए सीड कैपिटल की अधिकतम धनराशि 655.76 करोड़ रुपये अनुमन्य की गई है। इसी के सापेक्ष पहली किस्त के रूप में कुल 380 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस धनराशि को अवमुक्त किए जाने से तीनों विकास प्राधिकरणों की परियोजनाओं के लिए भूमि अर्जन और नए शहरों के विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3,500 करोड़ का प्रावधान प्रदेश में नए शहरों के समग्र एवं समुचित विकास के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह बजटीय प्रावधान नए शहरों के विकास से संबंधित कार्यों को वित्तीय आधार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से प्रदेश में शहरी विस्तार, भूमि अर्जन और आवासीय सुविधाओं के विकास से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की क्षमता मजबूत होगी। नए शहरों के निर्माण के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है। आम जनता को मिलेंगी बेहतर आवासीय सुविधाएं मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना का प्रमुख उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास के साथ आम जनसंख्या को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत भूमि अर्जन और नए शहरों के समग्र विकास को प्रोत्साहन दिया जाता है। लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली की परियोजनाओं के लिए 380 करोड़ रुपये की पहली किस्त की मंजूरी से इन क्षेत्रों में नए शहरों के विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे भविष्य में आवासीय सुविधाओं और शहरी अवस्थापना के विस्तार के लिए आधार तैयार होगा।

स्वचालित परीक्षण स्टेशन के लिए नवीन राज्य नीति-2026 को मंजूरी

स्वचालित परीक्षण स्टेशन के लिए नवीन राज्य नीति-2026 को मंजूरी हर जिले में खुल सकेंगे तीन स्वचालित परीक्षण केंद्र, मशीनें करेंगी वाहनों की फिटनेस जांच एटीएस के लिए जमीन और नेटवर्थ की शर्तों में बड़ी राहत, योगी सरकार ने निवेश का रास्ता किया आसान लखनऊ उत्तर प्रदेश की सड़कों पर चलने वाले वाहनों की सेहत (फिटनेस) को बेहतर करने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के भीतर 'स्वचालित परीक्षण स्टेशन' (ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन-एटीएस) स्थापित करने की मंजूरी दे दी गई है। अब गाड़ियों की जांच मशीनों से की जाएगी, जिससे सटीक रिपोर्ट मिलेगी। इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने के लिए सरकार ने 2 अगस्त 2023 के पुराने सरकारी आदेश को खत्म कर दिया गया है और उसकी जगह एक नई नीति 'राज्य नीति-2026' को पास किया है। परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में तीन एटीएस सेंटर खोले जा सकते हैं। हर सेंटर पर 24 हजार गाड़ियों तक जांच की जाएगी। वहीं पूर्व में सेंटर के लिए 2.5 एकड़ जमीन की शर्तों में भी छूट दी गई है, अब यह 1 एकड़ कर दिया गया है। वहीं एटीएस सेंटर खोलने के लिए पहले 6 करोड़ रुपये की नेटवर्थ की अनिवार्यता थी, जिसे अब हटा दिया गया है। इसके अलावा इन सेंटरों को सुचारु रूप से संचालित होने के लिए 6 महीने तक कार्रवाई में भी छूट मिलेगी। सरकार पर कोई अतिरिक्त भार नहीं दरअसल, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की 23 सितंबर 2021, 31 अक्टूबर 2022, 14 मार्च 2024 और 8 मई 2024 की अधिसूचनाओं के माध्यम से केंद्रीय मोटर यान नियमावली 1989 में अध्याय-11 के तहत स्वचालित परीक्षण स्टेशन (एटीएस) का विनियमन एवं नियंत्रण जोड़ा गया है। इन्हीं नवीनतम दिशा-निर्देशों और परिपत्रों को पूर्व में जारी राज्य नीति (2 अगस्त 2023) में समाहित करते हुए नई संशोधित राज्य नीति का ड्राफ्ट तैयार कर मंत्रिपरिषद के सामने रखा गया था। योगी कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्ताव स्वीकृत होने से उत्तर प्रदेश राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त व्यय भार यानी वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। प्रस्तावित राज्य नीति अधिसूचित होने की तिथि से ही तत्काल प्रभावी हो जाएगी। हर जनपद में एटीएस की स्थापना संभव नई नीति के प्रभावी होने के बाद प्रदेश के प्रत्येक जनपद में स्वचालित परीक्षण स्टेशन की जल्द स्थापना संभव होगी। इससे राज्य में निजी निवेश बढ़ेगा। यानी एटीएस की स्थापना के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा मिलने का रास्ता खुलेगा। रोजगार के नए अवसर मिलेंगे एटीएस के संचालन के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस तरह स्वचालित परीक्षण स्टेशन की स्थापना से रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। वहीं नई व्यवस्था में वाहनों का फिटनेस परीक्षण बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वचालित मशीनों के माध्यम से पूरी तरह पारदर्शी ढंग से होगा। इसके साथ ही सड़कों पर केवल पूरी तरह से फिट वाहनों का संचालन सुनिश्चित होने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

वर्ल्डफिश के साथ एमओयू को मंजूरी, मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा

वर्ल्डफिश के साथ एमओयू को मंजूरी, मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा लखनऊ,   प्रदेश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसकी संभावनाओं को विस्तार देने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में पूर्वी उत्तर प्रदेश में वर्ल्डफिश उत्तर प्रदेश फिशरीज प्रोजेक्ट सेंटर के संचालन के लिए राज्य सरकार, मत्स्य विभाग और वर्ल्डफिश के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) को मंजूरी दी गई। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 13.31 लाख टन मत्स्य उत्पादन हो रहा है। एमओयू के जरिए पूर्वी उत्तर प्रदेश में मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तौर-तरीकों से बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ मत्स्य पालकों की आय और रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना है।

17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा ‘सेवा संकल्प अभियान’, प्रदेशभर में होंगे कार्यक्रम

प्रदेश में आगामी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा 'सेवा संकल्प अभियान' सीएम योगी के निर्देश पर एक माह तक होंगे 12 प्रमुख कार्यक्रम सभी जनपदों में प्रत्येक कार्यक्रम के लिए नोडल अधिकारी नामित होगा जनकल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियां जनता तक पहुंचाने पर जोर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों को निर्देशित किया है कि आगामी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर, 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया जाएगा। अभियान के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा पिछले वर्षों में हुए विकास कार्यों से जनजीवन में आए सकारात्मक बदलावों को आमजन तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही प्रत्येक नागरिक को ‘विकसित भारत-2047’ के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित विभागों को अपनी महत्वपूर्ण परियोजनाओं, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं का विधानसभा क्षेत्रवार, विकासखंडवार तथा ग्राम पंचायतवार विस्तृत विवरण तैयार करने को कहा गया है। इस अभियान के दौरान लाभार्थियों की जानकारी भी विधानसभा, ब्लॉक और ग्राम पंचायतवार तैयार की जाएगी। विकास कार्यों के ‘पहले और बाद’ के फोटो, वीडियो, ड्रोन फुटेज तथा रील्स का डाटा बैंक तैयार किया जाएगा, ताकि विकास कार्यों के प्रभाव को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया जा सके। CMIS पोर्टल पर प्रतिदिन दर्ज होगी प्रगति अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रमों और विकास कार्यों की प्रगति का विवरण फोटो एवं वीडियो सहित राज्य स्तरीय CMIS पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसकी प्रगति प्रतिदिन दर्ज की जाएगी, जिससे अभियान की गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित हो सके। अभियान शुरू होने से पहले सभी विभागों एवं जनपदों को कार्यक्रमों की समय-सारणी निर्धारित करने, लाभार्थियों का डेटाबेस तैयार करने, कार्यक्रम स्थलों का चिन्हांकन, यात्रा रूट तय करने, व्यवस्थापन टीमों का गठन, नोडल अधिकारियों की तैनाती तथा आवश्यक बजट की समय से व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। 12 प्रमुख कार्यक्रमों का होगा आयोजन अभियान के अंतर्गत 12 प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनके लिए कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य, गतिविधियां, क्रियान्वयन एवं संबंधित विभागों की जिम्मेदारियों का विस्तृत विवरण तैयार किया गया है। संबंधित विभागों और जनपदों को निर्धारित समय-सारणी के अनुसार इन कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संपादित करने के निर्देश दिए गए हैं। साप्ताहिक समीक्षा से होगी निगरानी अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्था की गई है। विभागीय अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव स्तर पर संबंधित कार्यक्रमों की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी। मंडलायुक्त मंडल के समस्त जनपदों की तथा जिलाधिकारी अपने-अपने जनपद के सभी कार्यक्रमों की साप्ताहिक समीक्षा करेंगे। इसके अलावा मंडल प्रभारियों द्वारा भी अभियान की तैयारियों की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। सभी प्रशासनिक विभागों को विभागीय नोडल अधिकारी नामित कर विस्तृत कार्ययोजना एवं समय-सारणी तत्काल तैयार करने को कहा गया है। जिलों में प्रत्येक कार्यक्रम के लिए नोडल अधिकारी नामित कर जिला स्तरीय कैलेंडर तैयार किया जाएगा तथा मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से दैनिक अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाएगा।

बिहार पंचायत चुनाव में EBC आरक्षण पर जल्द फैसला, पंचायतवार आबादी का होगा आकलन

 पटना बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के लिए आरक्षण का मानक जल्द तय होगा। पंचायती राज विभाग की विशेषज्ञ टीम की ओर से तैयार मानक संबंधी गाइडलाइन एक माह अंदर अत्यंत पिछड़ा वर्ग आयोग को चला जायेगा। इसी मानक पर आयोग पंचायत चुनाव में ईबीसी को आरक्षण का प्रतिशत तय करने की अनुशंसा करेगा। पंचायत चुनाव में एससी-एसटी और ईबीसी (एनेक्सर-1) के लिए अधिकतम 50% ही आरक्षण देना है। पिछले दिनों अत्यंत पिछड़ा वर्ग आयोग ने पंचायती राज विभाग को पत्र लिख कर गाइडलाइन मांगी थी। इसी पत्र के आधार पर ड्राफ्ट तैयार किया गया है। एससी-एसटी से बचे हिस्से में ही ओबीसी को आरक्षण जनगणना के आधार पर कुल आबादी में जितनी आबादी एससी और एसटी की होगी, इन वर्ग को उतना प्रतिशत आरक्षण देना है। इसके बाद ही ईबीसी को आरक्षण दिया जा सकेगा। बीते पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग को 20% आरक्षण मिला था। शेष 30 फीसदी एससी-एसटी को मिला था। अगर एससी-एसटी की आबादी 40 फीसदी होगी, तो इन्हें 40 फीसदी आरक्षण के बाद शेष 10 फीसदी ही ओबीसी को मिलेगा। अंतिम रूप से 2011 की ही जनगणना है। आयोग यह भी देखेगा कि पिछले चुनावों में ईबीसी में भी दो-चार जातियों में ही तो प्रतिनिधित्व नहीं बंट जा रहा है। पंचायतों में कुल जनप्रतिनिधियों में सभी वर्गों के लिए 50 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण का प्रावधान है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा है कि पंचायत चुनाव में ईबीसी को आरक्षण के लिए सरकार ने अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए आयोग को समर्पित आयोग घोषित किया है। अब जल्द ही पंचायती राज विभाग से आयोग को ईबीसी के अध्ययन से संबंधित गाइडलाइन भेज दिया जायेगा। यह होगी गाइडलाइन ● आरक्षण का दायरा 50 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए ● पंचायतवार अत्यंत पिछड़ा वर्ग की आबादी का आकलन ● ईबीसी के परिवारों की आर्थिक स्थिति ● संसद, विधानसभा, नगर निकाय व पंचायतों में ईबीसी का वर्तमान प्रतिनिधित्व ● अत्यंत पिछड़ा वर्ग का सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति अत्यंत पिछड़ा वर्ग में 122 जातियां अत्यंत पिछड़ा वर्ग में लगभग 122 जातियां हैं। गाइडलान के आधार पर ईबीसी आयोग पंचायतों में ईबीसी की स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट सरकार को देगी। इसके बाद सरकार इस रिपोर्ट को निर्वाचन विभाग को भेज देगी। राज्य स्तर पर आरक्षण का दायरा तय नहीं होगा, बल्कि पंचायत ही मानक होगा। अत्यंत पिछड़ा वर्ग में प्रमुख जातियां कहार, कुम्हार, धानुक, लोहार, तेली, मल्लाह, कानू, नाई आदि यह होगी गाइडलाइन ● आरक्षण का दायरा 50 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए ● पंचायतवार अत्यंत पिछड़ा वर्ग की आबादी का आकलन ● ईबीसी के परिवारों की आर्थिक स्थिति ● संसद, विधानसभा, नगर निकाय व पंचायतों में ईबीसी का वर्तमान प्रतिनिधित्व ● अत्यंत पिछड़ा वर्ग का सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति मुख्य बातें-: ● सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पंचायत चुनावों में ईबीसी को आरक्षण देने के पहले त्रिस्तरीय जांच अनिवार्य। ● इसमें पहली शर्त है कि किसी भी स्थिति में आरक्षण का दायरा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। ● दूसरा, अत्यंत पिछड़ा वर्ग की किन-किन जातियों को आरक्षण की वास्तव में आवश्यकता है। ● तीसरा इसके लिए समर्पित आयोग हो, जो समयसीमा में अध्ययन कर रिपोर्ट दे।