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योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में करीब 50% तक की कटौती

लखनऊ  राज्य सरकार ने महायोजना व क्षेत्रीय विकास योजना के तहत आने वाले क्षेत्र की भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ ही परिवर्तन शुल्क की दरों में भी तकरीबन 50 प्रतिशत तक की कमी कर दी है। अब 6000 वर्गमीटर तक की भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार संबंधित विकास प्राधिकरणों को ही होगा। इससे अधिक क्षेत्रफल के मामलों में ही शासन की अनुमति लेनी होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) नियमावली 2014 के तृतीय संशोधन संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई। विभागीय विशेष सचिव राजेश कुमार राय ने बताया कि अभी किसी तरह के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार राज्य सरकार को ही है। ईज आफ डूईंग बिजनेस और डी-रेगुलेशन कार्ययोजना के तहत प्रक्रियाओं में सुधार तथा डिजिटलीकरण तथा भूमि संबंधी सेवाओं के लिए आनलाइन प्रणाली को अपनाने पर भारत सरकार का जोर है। इसके मद्देनजर दूसरे राज्यों में भू-उपयोग परिवर्तन के संबंध में लागू व्यवस्था का अध्ययन करने के बाद राज्य में भी 6000 वर्गमीटर तक की भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार विकास प्राधिकरणों को देने का निर्णय़ किया गया है। राजस्थान में इस तरह की व्यवस्था पहले से लागू है। राय ने बताया कि भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में भी कमी की गई है। अब कृषि भूमि पर उद्योग लगाने के लिए सर्किल रेट का 20 प्रतिशत के बजाय 15 प्रतिशत ही देना होगा। इसी तरह आवासीय के मामले में 50 के बजाय 25, कार्यालय उपयोग के लिए 100 के बजाय 50, वाणिज्यिक उपयोग के लिए सर्किल रेट का 150 प्रतिशत के स्थान पर अब 75 प्रतिशत ही परिवर्तन शुल्क देना होगा। मिश्रित उपयोग के मामले में 125 प्रतिशत को घटाकर 65 प्रतिशत शुल्क किया गया है। विदित हो कि उत्तर प्रदेश टाउनशिप नीति-2023 के तहत परियोजना के लिए लाइसेंस हासिल करने वाले विकासकर्ताओं की भूमि तथा मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत जमीन के भू-उपयोग को कृषि से आवासीय में परिवर्तित करने का अधिकार सरकार पहले ही विकास प्राधिकरणों को दे चुकी है।

CM यादव बोले- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से दुनिया में बढ़ा भारत का कद

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की विश्व में बढ़ती साख का प्रतीक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ब्रिक्स सम्मेलन की अपार सफलता और नई दिल्ली घोषणा पत्र के लिए पूरी मंत्रिपरिषद् ने एक स्वर में प्रधानमंत्री मोदी को दी बधाई प्रदेश में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा से संकल्प अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रिपरिषद की बैठक से पहले मंत्रीगण को दी सरकार की उपलब्धियों एवं आगामी कार्यक्रमों की जानकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नई दिल्ली में हाल ही में हुआ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सच्चे अर्थो में भारत की विश्व भर में बढ़ती भूमिका का प्रतीक बन गया। मुख्यमंत्री ने ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता और इस अवसर पर पारित हुए नई दिल्ली घोषणा पत्र को केन्द्र सरकार की कूटनीतिक जीत का प्रमाण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपना वर्चस्व साबित कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहले जी-20 और अब ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता वैश्विक गवर्नेंस में भारत की बढ़ती लीडरशिप का जीवन्त उदाहरण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद् की बैठक में मंत्रिगण को संबोधित कर रहे थे। बैठक में ब्रिक्स सम्मेलन की अपार सफलता के लिए पूरी मंत्रिपरिषद् द्वारा मेजें थप-थपाकर प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्र सरकार को बधाई और शुभकामनाएं देकर अभिनंदन किया गया। मंत्रिमण्डल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को उनकी सफल दुबई यात्रा के लिए भी बधाई दी। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में पिछले ढाई वर्षों में दीर्घ अवधि से लंबित रहे बड़े कार्यों के पूरे होने, प्रदेश में परिवहन सेवाओं के विस्तार, ग्रामीण परिवारों को उनके पट्टे के पक्के अधिकार, निवेश के नए अवसरों तथा जनसेवा से जुड़े आगामी अभियानों की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण से अपने-अपने प्रभार के जिलों में भी सरकार की सभी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नेतृत्व करने का भी आह्वान किया।   नई दिल्ली घोषणा-पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि ब्रिक्स के 11 सदस्य देश विश्व की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी और 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान 25 शहरों में 350 से अधिक बैठकें और कार्यक्रम आयोजित किए गए तथा ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा-पत्र को सर्वसम्मति से अपनाया गया। शांति, आतंकवाद, व्यापार, वित्त, तकनीक और सतत् विकास पर साझा दृष्टिकोण सामने आया। प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक व्यवस्था को “पिरामिड ऑफ प्रिविलेज” से “प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप” में बदलने और “रूल टेकर से रूल शेपर” बनने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आतंकवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई गई और 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम (कश्मीर) में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई। तेज, सुरक्षित एवं कम लागत वाले क्रॉस-बॉर्डर भुगतान तंत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा साइबर सहयोग को समावेशी विकास के महत्वपूर्ण साधन के रूप में बढ़ाने पर जोर दिया गया। मध्यप्रदेश के लिए भी यह सम्मेलन गौरव का विषय रहा। इंदौर में ब्रिक्स युवा उद्यमिता कार्य समूह, कृषि कार्य समूह और 16वीं कृषि मंत्रियों की बैठक हुई, जिसमें ‘इंदौर घोषणा’ तथा भोपाल में संस्कृति कार्य समूह, ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव और 11वीं संस्कृति मंत्रियों की बैठक में ‘भोपाल घोषणा’अपनाई गई। 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 25 वर्षों में देश में विकास का जो दीपक जलाया है, उसका प्रकाश पूरे विश्व में भारत की छवि को उज्ज्वल बना रहा है। आगामी गुरुवार, 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री का जन्मदिन है और 7 अक्टूबर को लोक सेवाओं में उनके 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जनसेवा के लिए पूरा जीवन समर्पित करने वाले प्रधानमंत्री के प्रति आभार स्वरूप 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान-2026’ चलाया जाएगा और इसे मध्यप्रदेश की जनता की सेवा में समर्पित किया जाएगा। उन्होंने मंत्रीगण को अभियान के विभिन्न कार्यक्रमों की जिम्मेदारी सौंपे जाने की जानकारी देते हुए कहा कि सभी कार्यक्रमों के लिए संबंधित मंत्रीगण के साथ वरिष्ठ अधिकारियों को राज्य नोडल अधिकारी बनाया गया है। मंत्रीगण और राज्य नोडल अधिकारी मिलकर जिला स्तर पर बेहतर तालमेल एवं सुनियोजित ढंग से कार्यक्रमों का ऐतिहासिक आयोजन सुनिश्चित करें। 17 सितम्बर को मंत्रीगण की उपस्थिति के संबंध में पृथक निर्देश जारी होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग एवं अन्य विभागों द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रसारित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सेवा माह में सभी पूरी ताकत के साथ जुट जाएं। मुख्यमंत्री ने कामना करते हुए कहा कि इस अभियान के सभी 13 कार्यक्रमों में हम सब सफलता के नए रिकॉर्ड बनाएंगे। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में अनेक ऐसे बड़े कार्य हुए हैं, जो कई वर्षों से लंबित थे। चाहे यूनियन कार्बाइड के कचरे का निष्पादन हो, स्लिमनाबाद वाटर टनल हो या नक्सलवाद की समस्या का अंत—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में यह सब काम सफलतापूर्वक हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसी क्रम में परिवहन क्षेत्र में भी एक बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। लगभग 21 वर्ष से बंद सरकारी बस सेवा फिर प्रारंभ होने जा रही है। उन्होंने बताया कि आने वाली अनंत चर्तुदशी अर्थात्  25 सितम्बर 2026 से मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा का शुभारंभ किया जा रहा है। इसके अंतर्गत लगभग 150 सिटी रूट, 450 इंटरसिटी रूट और 436 इंटरस्टेट रूट विकसित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2030 तक हम प्रदेश के 75 प्रतिशत विकासखंडों को सुगम बस परिवहन सेवा से जोड़ने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। पट्टों की देंगे पक्की रजिस्ट्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर 17 सितम्बर को इंदौर में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मुख्यातिथ्य में “स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना" का शुभारंभ किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेखों के निःशुल्क पंजीयन का निर्णय लिया है। ग्रामीण हितग्राहियों को स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क से पूरी छूट दी गई है तथा इसका संपूर्ण व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत 68 … Read more

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, 23 प्रस्तावों को मंजूरी; शिक्षा-रोजगार और एक्सप्रेसवे पर जोर

योगी कैबिनेट में 23 अहम प्रस्तावों पर लगी मुहर, एक्सप्रेसवे से लेकर शिक्षा और रोजगार तक लिए गए बड़े फैसले चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, स्मार्ट स्कूल और पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण को मंजूरी किसानों को छह प्रतिशत ब्याज पर छह लाख रुपये तक ऋण, पीआरडी जवानों को कैशलेस इलाज की सुविधा लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में विकास और जनकल्याण से जुड़े 23 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। फैसलों में चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, परिषदीय विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने, खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने, किसानों को सस्ती दर पर ऋण और पूर्व अग्निवीरों को सरकारी भर्ती में आरक्षण देने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं। बैठक में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास को लेकर भी निर्णय लिए गए। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने प्रेसवार्ता में स्वीकृत प्रस्तावों की जानकारी दी। चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 1,008.67 करोड़ मंजूर कैबिनेट में चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे को विकसित करने के लिए संशोधित परियोजना प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। 15.172 किलोमीटर लंबे प्रवेश नियंत्रित छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण ईपीसी मोड पर कराया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत 1,008.67 करोड़ रुपये है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। निर्माणकर्ता के चयन के लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। इससे बुंदेलखंड से चित्रकूट धाम तक आवागमन सुगम होने और पर्यटन को गति मिलने की उम्मीद है। परिषदीय विद्यालय बनेंगे स्मार्ट स्कूल बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रण वाले परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इससे सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम होगा। किसानों को छह प्रतिशत ब्याज पर छह लाख तक ऋण मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसानों को रियायती ब्याज दर पर दीर्घकालिक ऋण उपलब्ध कराने का फैसला किया गया। उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के माध्यम से किसानों को छह लाख रुपये तक का ऋण छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर लंबी अवधि के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसानों को कृषि और ग्रामीण जरूरतों के लिए सस्ती दर पर वित्तीय सहायता मिल सकेगी। पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी भर्ती में आरक्षण योगी कैबिनेट ने पूर्व अग्निवीरों को उत्तर प्रदेश जेल वार्डन की सीधी भर्ती में 20 प्रतिशत पद आरक्षित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके साथ ही पूर्व अग्निवीरों को प्रवर्तन सिपाही (परिवहन) कि सीधी भर्ती में 20 प्रतिशत पदों पर क्षैतिज एवं आयु सीमा में छूट देने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली। इन फैसलों से सैन्य सेवा पूरी कर चुके युवाओं को सरकारी रोजगार के अवसर मिलेंगे। पीआरडी जवानों और आश्रितों को कैशलेस इलाज प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के स्वयंसेवकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा देने का निर्णय हुआ। इससे पीआरडी जवानों और उनके परिवारों को उपचार के दौरान आर्थिक राहत मिलेगी। खिलौना उद्योग को मिलेगा प्रोत्साहन कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी दी गई। इस नीति से प्रदेश में खिलौना निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में मदद मिलेगी। अन्य महत्वपूर्ण फैसले औद्योगिक विकास एवं रोजगार – उत्तर प्रदेश के अभियांत्रिकी विभागों में कार्य के त्वरित एवं प्रभावी निष्पादन के लिए वित्तीय नियमों के तहत अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी – उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड की छाता शुगर कंपनी लिमिटेड, जनपद मथुरा में कंसेशन-कम-लीज के माध्यम से 120 केएलपीडी एथेनॉल उत्पादन संयंत्र की स्थापना को मंजूरी। – उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में वर्ल्डफिश परियोजना के संचालन के लिए राज्य सरकार, मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश और वर्ल्डफिश के बीच समझौता ज्ञापन पर अनुमोदन। सुरक्षा और प्रशासन – राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना के लिए अयोध्या के मिल्कीपुर तहसील स्थित ग्राम पूरे लाल खान में लगभग 65 एकड़ बंजर भूमि भारत सरकार को निशुल्क आवंटित करने की मंजूरी। – 10 वर्ष तक की अवधि के किरायेदारी/पट्टा विलेखों पर प्रभावी स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट देने का प्रस्ताव पास। ग्रामीण विकास और जनकल्याण – प्रदेश में वाहनों की तकनीकी स्वस्थता को सुनिश्चित करने के लिए वाहनों की जांच हेतु स्वचालित परीक्षण स्टेशन (एटीएस) की स्थापना संबंधी नीति में संशोधन को मंजूरी। – प्रांतीय रक्षक दल के स्वयंसेवकों की ड्यूटी भत्ता दर में बढ़ोतरी का प्रस्ताव स्वीकृत। – प्रदेश की उचित दर दुकानदारों को वितरित खाद्यान्न की मात्रा के सापेक्ष 25 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त मार्जिन मनी देने का फैसला। शहरी विकास – लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली को मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नये शहर प्रोत्साहन योजना के तहत विकसित करने के लिए धनराशि स्वीकृत करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी। – लखनऊ में स्वीकृत हाईटेक टाउनशिप परियोजना को पूर्ण किए जाने के संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी।

यूपी में सरकारी स्कूलों का होगा कायाकल्प, 14,429 स्कूलों में बढ़ेगी डिजिटल शिक्षा

यूपी के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को नया आयाम, 14,429 स्कूल बनेंगे स्मार्ट श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड करेगी स्मार्ट क्लासेज़ की स्थापना, 300 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत, चरणबद्ध तरीके से होगा विद्यालयों का विकास वर्तमान में 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की मिल रही सुविधा 2 लाख 61 हजार से अधिक शिक्षकों को दिए गए टैबलेट, बच्चों को आधुनिक और बेहतर डिजिटल शिक्षा उपलब्ध कराने पर योगी सरकार का जोर लखनऊ  उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को और मजबूत करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में विकसित करने के लिए श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड को कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किया गया है। कैबिनेट ने 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 14,429 प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज़ की स्थापना चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। प्रदेश सरकार पहले से ही बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर लगातार काम कर रही है। वर्तमान में 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज़, 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही 2 लाख 61 हजार से अधिक शिक्षकों को टैबलेट दिए जा चुके हैं। सरकार का प्रयास है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए सरकारी स्कूलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा के बेहतर अवसर मिलें। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत योगी सरकार ने वर्ष 2021 में की थी और इनका विधिवत संचालन शैक्षिक सत्र 2022-23 से शुरू किया गया। स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को विषयों को समझने में डिजिटल माध्यमों का लाभ मिल रहा है। अब प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के निर्णय से इस व्यवस्था का और विस्तार होगा। 300 करोड़ रुपये से होगा स्मार्ट स्कूलों का विकास कैबिनेट निर्णय के अनुसार बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 14,429 प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज़ की स्थापना की जाएगी। स्मार्ट क्लास की स्थापना का कार्य नियमानुसार प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के माध्यम से कराया जाएगा। इसके लिए प्रति विद्यालय 2,07,910 रुपये (सेनेटेज चार्जेज एवं जीएसटी सहित) की प्रस्तावित दर निर्धारित की गई है। यदि निविदा प्रक्रिया में प्रति विद्यालय इससे कम दर प्राप्त होती है, तो स्वीकृत कुल 300 करोड़ रुपये की धनराशि के भीतर अधिक संख्या में प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया जा सकेगा। उच्च नामांकन वाले विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ेंगी डिजिटल सुविधाएं प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या और उच्च नामांकन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब की स्थापना की जाएगी। भारत सरकार की समग्र शिक्षा योजनान्तर्गत परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में डिजिटल इनिशिएटिव प्रोग्राम के तहत उच्च नामांकन वाले विद्यालयों में भी चरणबद्ध रूप से स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब स्थापित की जानी हैं। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने से बच्चों को पारंपरिक शिक्षण व्यवस्था के साथ आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा। स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने में मदद मिलेगी। डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी बच्चों को सीखने के लिए अतिरिक्त डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराएगी। योगी सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के बच्चों को बेहतर, आधुनिक और तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। सरकारी स्कूलों में डिजिटल संसाधनों का लगातार विस्तार इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चे बदलती तकनीक के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ सकें।

‘यूपी राइज 2026’: इनोवेटिव स्टार्टअप आइडियाज से जॉब क्रिएटर बनेंगे आगरा के युवा

'यूपी राइज 2026': इनोवेटिव स्टार्टअप आइडियाज से जॉब क्रिएटर बनेंगे आगरा के युवा – कार्यक्रम में 30 में से 11 बेहतरीन स्टार्टअप आइडियाज हुए शॉर्टलिस्ट, युवाओं ने दिखाई अपनी उद्यमशीलता – कुकिंग ऑयल के डिजिटल मार्केटप्लेस 'री-ऑयल' ने जीता प्रथम पुरस्कार, 'स्टडी एप' और 'सोलर स्वीप' रहे रनरअप – आंबेडकर विवि में छात्रों को दी गई उ.प्र. सरकार की रोजगारपरक और स्टार्टअप योजनाओं की विस्तृत जानकारी आगरा  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'आत्मनिर्भर यूपी' विजन को धरातल पर उतारने के लिए मंगलवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार में 'यूपी राइज 2026' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. आशु रानी और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक आत्रेय मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस आयोजन में शहर और आसपास के क्षेत्रों से आए 1000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं की मानसिकता में बदलाव लाकर उन्हें केवल नौकरी तलाशने वाला न बनाकर, स्वयं का उद्यम स्थापित कर दूसरों को रोजगार देने वाला 'जॉब क्रिएटर' (रोजगार सृजक) बनाना है। नवाचार और स्टार्टअप को उत्तर प्रदेश सरकार की उड़ान उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में नवाचार (इनोवेशन) और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए निरंतर और धरातलीय कार्य कर रही है। कार्यक्रम में युवाओं को राज्य सरकार की विभिन्न रोजगारपरक नीतियों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, यूपी स्टार्टअप फंड, मुख्यमंत्री अभ्युदय निशुल्क कोचिंग योजना और यूपी स्किल मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर प्रकाश डाला। इसके अलावा कन्या सुमंगला योजना, फ्री टैबलेट/स्मार्टफोन योजना और महिला सामर्थ्य योजना से जुड़ी नीतियों के माध्यम से मिलने वाली वित्तीय सहायता व आसान सब्सिडी के बारे में भी बताया गया, ताकि युवा बिना किसी आर्थिक बाधा के अपने स्टार्टअप को एक सफल बिजनेस मॉडल में बदल सकें। विद्यार्थियों के इनोवेटिव स्टार्टअप आइडियाज ने खींचा ध्यान यूपी राइज की थीम के अनुरूप, आगरा के युवाओं ने अपनी उद्यमशीलता का शानदार प्रदर्शन किया। आयोजन में कुल 30 स्टार्टअप आइडिया आए, जिनमें से 11 बेहतरीन आइडिया को शॉर्टलिस्ट किया गया। इनमें कलाकारों के लिए एआई आधारित मार्केटप्लेस 'Kalaverse', कंस्ट्रक्शन प्लानिंग को आसान बनाने वाला 'Build Easy AI', अनदेखे पर्यटन स्थलों को प्रमोट करने वाला 'Hidden India' और बेकरी के लिए 'Organic floral cream color' जैसे आइडियाज शामिल रहे। वहीं, ई-रिक्शा चालकों की बैटरी समस्या सुलझाने के लिए 'Saathi EV', हस्तशिल्प को बढ़ावा देने वाला 'The Craft Duo' और मंदिर के कचरे से उपयोगी उत्पाद बनाने वाले 'Temple 2 Green' जैसे अनूठे पर्यावरण-अनुकूल प्रोजेक्ट्स ने भी खूब वाहवाही लूटी। 'री-ऑयल' ने जीता प्रथम पुरस्कार, मेंटर्स ने किया मार्गदर्शन जूरी और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के सामने बेहतरीन प्रेजेंटेशन देकर 'Re-Oil' (इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल के लिए डिजिटल मार्केटप्लेस) ने प्रथम स्थान हासिल कर 25,000 रुपये का मुख्य पुरस्कार जीता। वहीं, छात्रों की पढ़ाई को व्यवस्थित करने वाले 'Study App' और सोलर पैनल की सफाई के लिए रोबोटिक ब्रश तकनीक वाले 'Solar Sweep' की टीम संयुक्त रूप से रनरअप रही। छात्रों का मार्गदर्शन करने के लिए जाने-माने कॉर्पोरेट विशेषज्ञ हर्षित देसाई, कपिल त्रिमाल और विवेक गोयल बतौर मेंटर मौजूद रहे। गौरतलब है कि यूपी राइज कार्यक्रम प्रदेश के 25 शहरों के 30 प्रमुख कॉलेजों में आयोजित किया जाएगा। इसका अगला पड़ाव 18 सितम्बर 2026 को मथुरा स्थित जीएलए विश्वविद्यालय में होगा। युवाओं के पास असीम क्षमता: कुलपति प्रो. आशु रानी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने विद्यार्थियों के उत्साह और उनके इनोवेटिव आइडियाज की जमकर सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हमारे छात्र- छात्राओं में नवाचार की असीम क्षमता और संभावनाएं हैं। 'यूपी राइज 2026' जैसे मंच युवाओं को अपनी रचनात्मकता और उद्यमशीलता को प्रदर्शित करने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान कर रहे हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। आज के युवा कल के सशक्त 'जॉब क्रिएटर' हैं, जो अपनी सोच से न सिर्फ अपना बल्कि पूरे समाज और प्रदेश का आर्थिक विकास सुनिश्चित करेंगे।

हिसार में स्वाइन फ्लू के 4 नए मरीज मिले, संक्रमितों की संख्या बढ़कर 70 हुई

हिसार  स्वाइन फ्लू के कारण एक और महिला मरीज की मौत हो गई। जिले में स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या तीन पर पहुंच गई है। मरने वाली तीनों महिलाएं हैं। मंगलवार को चार और स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आए। इससे जिले में स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों की संख्या 70 पर पहुंच गई है। हालांकि अभी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से मृतक महिला की रिपोर्ट का आडिट किया जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी और डिप्टी सीएमओ डॉ. सुभाष खतरेजा ने बताया कि इस साल अभी तक 70 मरीज स्वाइन फ्लू से ग्रस्त मिले हैं। अभी तक तीन महिला मरीजों की मौत हो चुकी है। दो महिला मरीजों की पुष्टि हो चुकी है, एक महिला मरीज की फाइल अभी आडिट हो रही है। स्वाइन फ्लू ग्रस्त मरीज और उनके स्वजन को टैमीफ्लू दवा दी जा रही है। खांसी, जुकाम और बुखार होने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए और नागरिक अस्पताल में सैंपल जांच के लिए देना चाहिए। अस्पताल परिसर में स्वाइन फ्लू की निशुल्क जांच की जाती है। लक्षण दिखाई देने पर मुंह पर मास्क लगाकर रखना चाहिए और भीड़भाड़ वाले एरिया में नहीं जाना चाहिए। स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य बुखार की तरह ही होते हैं।

चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए योगी कैबिनेट की मंजूरी, 1,008.67 करोड़ रुपये होंगे खर्च

चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए योगी कैबिनेट की मंजूरी, 1,008.67 करोड़ रुपये होंगे खर्च 15.172 किलोमीटर लंबे छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का होगा निर्माण बुंदेलखंड से चित्रकूट धाम तक आसान होगा सफर, पर्यटन को मिलेगी रफ्तार लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। प्रवेश नियंत्रित छह लेन के इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 1,008.67 करोड़ रुपये खर्च होंगे। परियोजना का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसमें केंद्र सरकार की किसी तरह की वित्तीय भागीदारी प्रस्तावित नहीं है। 15.172 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेसवे वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई 15.172 किलोमीटर होगी। इसका निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर कराया जाएगा। व्यय-वित्त समिति द्वारा पूंजीगत मदों के लिए संशोधित प्रस्ताव की लागत का मूल्यांकन किया गया था, जिसे अब कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद निर्माणकर्ता के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। चित्रकूट धाम तक पहुंच होगी आसान चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से बुंदेलखंड के प्रारंभिक बिंदु से चित्रकूट धाम तक आवागमन आसान और तेज होने की उम्मीद है। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी। प्रवेश नियंत्रित छह लेन एक्सप्रेसवे होने से यात्रियों को सुगम और व्यवस्थित सफर का लाभ मिल सकेगा। चित्रकूट धाम धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। एक्सप्रेसवे के निर्माण से यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे पर्यटन गतिविधियों को गति मिलने और क्षेत्र के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है। बुंदेलखंड के विकास में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल में खिलौना उद्योग लगाने पर मिलेगा प्रोत्साहन

पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल में खिलौना उद्योग लगाने पर मिलेगा प्रोत्साहन योगी कैबिनेट ने दी खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी, यूपी में खिलौना उद्योग को मिलेगी रफ्तार कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर योगी सरकार का फोकस लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी दे दी गई। इस नीति का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को खिलौना विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना, नए उद्योगों को प्रोत्साहित करना और ट्वॉय क्लस्टर्स में रोजगार के अवसर बढ़ाना है। नीति के माध्यम से प्रदेश में खिलौना निर्माण, विपणन और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा दिया जाएगा। खिलौना उद्योग में यूपी की मजबूत पहचान वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि उत्तर प्रदेश विशेष रूप से खिलौना विनिर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राज्य भारतीय पर्व-त्योहारों से संबंधित वस्तुओं (HS 9505) के निर्यात में लगभग 50 प्रतिशत योगदान करता है। वाराणसी, झांसी और चित्रकूट अपने जीआई टैग प्राप्त लैकवेयर तथा हस्तनिर्मित लकड़ी के खिलौनों के लिए प्रसिद्ध हैं। यह क्षेत्र कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम है। खिलौना विनिर्माण एवं विपणन को विकास के प्रमुख क्षेत्र के रूप में बढ़ावा देकर कुशल, अर्धकुशल और अकुशल मानव संसाधन का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। इससे ट्वॉय क्लस्टरों में रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ेंगे। नए उद्योगों और मौजूदा इकाइयों को मिलेगा समर्थन नीति के तहत खिलौना विनिर्माण इकाइयों को प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। मौजूदा उद्योगों के विस्तार, विविधीकरण और तकनीकी उन्नयन के लिए भूमि एवं अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। नए उद्यमों की स्थापना में सहायता देने के साथ एमएसएमई और बड़े उद्योगों को भी समर्थन दिया जाएगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल क्षेत्रों में खिलौना उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इससे इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने में मदद मिलेगी। एमएसएमई और बड़े उद्योगों के लिए अलग व्यवस्था उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 के अंतर्गत एमएसएमई वर्गीकरण के अनुसार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी की इकाइयों के साथ वृहद और उससे उच्च श्रेणी की खिलौना विनिर्माण इकाइयों तथा खिलौना क्लस्टर उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। एमएसएमई श्रेणी की पात्र इकाइयों को उत्तर प्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन नीति-2022 और उसके निष्प्रभावी होने की स्थिति में लागू उत्तरवर्ती नीति के तहत निर्धारित प्रोत्साहन मिलेंगे। वहीं, बड़े और उससे उच्च श्रेणी के तहत स्थापित नई इकाइयों तथा विस्तार एवं विविधीकरण करने वाली इकाइयों को प्रस्तावित नीति के प्रावधानों के अनुसार प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इनका क्रियान्वयन इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से किया जाएगा। निवेश और रोजगार को मिलेगा बल नीति के तहत पात्र खिलौना विनिर्माण इकाइयों को निर्धारित प्रोत्साहन वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद प्रदान किए जाएंगे। प्रस्ताव में फ्रंट एंड सब्सिडी के प्रावधान भी शामिल हैं। इससे प्रदेश में खिलौना उद्योग की स्थापना और विस्तार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। नीति का क्रियान्वयन उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग (एमएसएमई) द्वारा किया जाएगा। बड़े और उससे उच्च श्रेणी के उद्योगों से संबंधित प्रोत्साहनों का क्रियान्वयन इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से होगा। पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी नीति उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 प्रख्यापन की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक अथवा सरकार द्वारा नई नीति के प्रख्यापन तक लागू रहेगी। इस नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने वाली परियोजनाएं राज्य सरकार की किसी अन्य नीति के तहत प्रोत्साहनों की पात्र नहीं होंगी। हालांकि, भारत सरकार की योजनाओं एवं नीतियों के तहत उपलब्ध प्रोत्साहन इसके अतिरिक्त प्राप्त किए जा सकेंगे। नीति से होने वाले प्रमुख लाभ – प्रदेश को खिलौना विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद। – पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल में उद्योग स्थापना को प्रोत्साहन। – खिलौना क्लस्टरों में अतिरिक्त रोजगार के अवसर। – कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों को आर्थिक अवसर। – एमएसएमई एवं बड़े उद्योगों के विस्तार और तकनीकी उन्नयन को समर्थन। – खिलौना निर्माण एवं विपणन के क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा।

मथुरा में छाता चीनी मिल में 3.96 करोड़ लीटर क्षमता का लगेगा एथेनॉल प्लांट

मथुरा में छाता चीनी मिल में 3.96 करोड़ लीटर क्षमता का लगेगा एथेनॉल प्लांट 200 करोड़ से अधिक की लागत, गन्ने के बाद मक्का-धान से भी होगा उत्पादन, हजारों को मिलेगा रोजगार लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मथुरा की बंद छाता चीनी मिल में एथेनॉल प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने बताया कि 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाला यह एक्सटेंशन प्लांट साल में 11 महीने संचालित होगा। उन्होंने बताया कि यह मिल 19 साल पहले बंद हो गई थी। समाजवादी पार्टी के सरकार के दौरान इसको एक रुपए का भुगतान नहीं किया गया। प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 3.96 करोड़ लीटर होगी। गन्ना पेराई का सीजन समाप्त होने के बाद मक्का और धान से भी एथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा। छाता चीनी मिल की नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से करीब 40 मिनट की दूरी को भी परियोजना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां गोदाम और अन्य सुविधाएं विकसित करने की संभावनाएं हैं। परियोजना से क्षेत्र में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।

योगी कैबिनेट ने दी अभियंताओं के वित्तीय अधिकार बढ़ाने को मंजूरी

योगी कैबिनेट ने दी अभियंताओं के वित्तीय अधिकार बढ़ाने को मंजूरी निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए 31 साल पुराने वित्तीय अधिकारों में संशोधन छोटे-छोटे कामों के लिए उच्च स्तर की मंजूरी का इंतजार नहीं, विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आएगी तेजी लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश के अभियंत्रण विभागों में कार्यों के त्वरित एवं प्रभावी निष्पादन के लिए अभियंताओं के वित्तीय अधिकारों में वृद्धि किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस फैसले से निर्माण कार्यों को गति देने और छोटे-छोटे कार्यों के लिए उच्च स्तर से अनुमोदन लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिलेगी। 31 साल पुराने प्रावधानों में होगा संशोधन वित्तीय नियम संग्रह खंड-1 में अभियंत्रण विभागों के अभियंताओं को वित्तीय अधिकारों का प्रतिनिधायन किया गया है। इन अधिकारों में समय-समय पर शासनादेशों के माध्यम से संशोधन और वृद्धि होती रही है। वर्तमान में वित्त (लेखा) अनुभाग-2 के शासनादेश के अनुसार वित्तीय अधिकार निर्धारित हैं। यह व्यवस्था पिछले 31 वर्षों से अधिक समय से लागू है। निर्माण सामग्री, श्रम और सेवाओं की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण मौजूदा वित्तीय अधिकारों के तहत कार्यों के निष्पादन में कठिनाइयां आ रही थीं। छोटे-छोटे निर्माण कार्यों के लिए भी उच्च स्तर से अनुमोदन लेना पड़ता था, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती थी। लोक निर्माण से ग्रामीण अभियंत्रण तक मिलेगा लाभ प्रस्ताव के तहत लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग सहित अन्य अभियंत्रण विभागों के अभियंताओं को प्रदत्त वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन की सीमा में वृद्धि की जाएगी। इससे अभियंताओं को अपने स्तर पर निर्धारित वित्तीय सीमा के भीतर कार्यों को स्वीकृति देने और आगे बढ़ाने में अधिक सुविधा मिलेगी। निर्माण कार्यों के लिए बार-बार उच्च स्तर से अनुमोदन लेने की जरूरत कम होने से विकास परियोजनाओं की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी। लागत बढ़ने के बीच जरूरी था बदलाव निर्माण सामग्री, श्रम और सेवाओं की लागत में वृद्धि के कारण 1995 में निर्धारित वित्तीय अधिकारों के तहत कार्य कराना कठिन हो रहा था। ऐसे में वित्तीय अधिकारों में संशोधन की जरूरत महसूस की गई। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य निर्माण कार्यों के निष्पादन में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करना और परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने की दिशा में कदम बढ़ाना है। इस फैसले से प्रदेश में सड़क, सिंचाई, ग्रामीण विकास और अन्य निर्माण परियोजनाओं के क्रियान्वयन को गति मिलने की उम्मीद है। वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन की सीमा बढ़ने से विभागीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।