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राजस्थान मौसम अपडेट: तेज हवाओं और बारिश से तापमान में 4 डिग्री तक गिरावट की संभावना

 जयपुर राजस्थान में पिछले एक हफ़्ते से हो रही भारी बारिश और ओले गिरने से तापमान में कमी आई है, वहीं भारी बारिश और तूफ़ान ने आम ज़िंदगी पर असर डाला है. लेकिन मौसम सुहावना होने से लोगों को चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है. तापमान में आई गिरावट की वजह से मौसम विभाग ने जानकारी जारी की है कि आने वाले दिनों में यह राहत जारी रहेगी. मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य में एक और नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (Western Disturbance)   एक्टिव हुआ है. जिसके असर से 3-4 जून को बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, भरतपुर, अजमेर, उदयपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में तेज आंधी तूफान और बारिश की गतिविधियां बढ़ने की काफी उम्मीद है. मंगलवार को जैसलमेर में चली थी धूल भरी आंधी इस बीच, मौसम विभाग ने पिछले 24 घंटों में यानी बुधवार सुबह तक पूर्वी राजस्थान की कुछ जगहों पर हल्की बारिश दर्ज की गई है. वहीं, पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर सहित कई इलाकों में कल ( मंगलवार) शाम तक हल्की बारिश के साथ धूल भरी आंधी चली. इस दौरान राज्य में सर्वाधिक वर्षा रामगढ़ (जैसलमेर) में 15.0 मिलीमीटर हुई जबकि सर्वाधिक अधिकतम तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस फलोदी में दर्ज किया गया. राजस्थान मौसम अपडेट 3 जून एक और नए मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से आज 3 जून को एक बार पुनः जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर संभाग के कुछ भागों में तेज मेघगर्जन तेज अंधड़ (60-70 Kmph), जयपुर, भरतपुर व कोटा संभाग के कुछ भागों में भी कहीं-कही आंधी बारिश होने की संभावना है। अगले 48 घंटे में 4 डिग्री तक गिरेगा पारा मौसम केंद्र द्वारा बुधवार दोपहर बाद के लिए आधिकारिक चेतावनी जारी करते हुए राज्य के पश्चिमी और उत्तरी जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है. जिसके तहत जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर और अजमेर संभाग में ऑरेज और सीकर, चुरू, झुंझुनूं और राजसमंद में येलो अलर्ट जारी किया गया है. वही इन भागों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूलभरी आंधी और झोंकेदार हवाएं चलने की भी चेतावनी जारी की गई है. इसके असर से अगले 24 से 48 घंटों के दौरान राज्य के बड़े हिस्से में तापमान में 3 से 4 डिग्री तक की कमी देखने को मिल सकती है. आंधी बारिश के प्रभाव से आगामी एक सप्ताह ज्यादातर भागों में अधिकतम तापमान 43 डिग्री से नीचे दर्ज होने व 'हीटवेव' से राहत बने रहने का अनुमान है, 5 जून से मौसम लौटेगा अपने पुराने रंग में  मौसम केंद्र द्वारा जारी आने वाले पांच दिनों के पूर्वानुमान के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि यह मौसमी तंत्र सिलसिलेवार तरीके से आगे बढ़ रहा है. 3 और 4 जून को  इस पश्चिमी विक्षोभ का असर अपने चरम पर रहेगा, जिससे पश्चिमी, उत्तरी और  दक्षिण-पूर्वी हिस्सों के कुछ इलाकों में अलर्ट की स्थिति बनी रहेगी. हालांकि, 5 जून से राज्य को इस  को आंधी तूफान और झमाझम बारिश से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.  इसके बाद पश्चिमी राजस्थान पूरी तरह से सामान्य होकर 'ग्रीन जोन' में तब्दील हो जाएगा और केवल कुछ उत्तरी व मध्य जिलों में ही आंशिक रूप से 'येलो अलर्ट' प्रभावी रहेगा.

CGPSC घोटाले की जांच तेज, ED ने सोनवानी, ध्रुव और वासनिक के घरों पर मारी रेड

रायपुर/दुर्ग. छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के भर्ती घोटाले में सीबीआई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो चुकी है. ईडी की टीम ने आज एक के बाद एक पांच जगहों पर दबिश दी है. इनमें आयोग के मामले में पूर्व चेयरमैन टामन सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव, पूर्व परीक्षा नियंत्रण आरती वासनिक, राज्यपाल के पूर्व सचिव आईएएस अमृत खलको के अलावा एक और आरोपी ललित गणवीर के भाई भूपेंद्र गनवीर का निवास शामिल है. जानकारी के अनुसार, ईडी की पांच टीम भर्ती घोटाले में आरोपी पूर्व चेयरमैन टामन सोनवारी के ग्राम सरबदा में दबिश दी है. वहीं दो टीमों ने पूर्व सचिव जेके ध्रुव के भिलाई सेक्टर-10 स्थित निवास पर और अन्य टीम ने पूर्व परीक्षा नियंत्रण आरती वासनिक के रायपुर स्थित निवास पर दबिश दी है. इसके साथ एक अन्य आरोपी ललित गणवीर के भाई कृषि विस्तार अधिकारी भूपेंद्र गणवीर के राजनांदगांव के शिक्षक कॉलोनी स्थित निवास और राज्यपाल के पूर्व सचिव आईएएस अमृत खलको के तालपुरी, भिलाई स्थित आवास पर ईडी की टीम ने दबिश दी है. टीम परिवार के सदस्यों से पूछताछ करने के साथ दस्तावेजों को खंगालने में जुटी है. बता दें कि अमृत खलको की की बेटी नेहा और बेटा निखिल का डिप्टी कलेक्टर के रूप में चयन हुआ था. अमृत खलको बालोद जिले के कलेक्टर, बस्तर संभाग के कमिश्नर, आयुक्त समाज कल्याण, एमडी बीज निगम जैसे पदों पर पदस्थ रहे हैं. इसके अलावा राज्यपाल के सचिव थे, उनके रिटायरमेंट के बाद फिर से उन्हें संविदा नियुक्ति दी गई थी. सीजीपीएसपी भर्ती घोटाले में नाम सामने आने के बाद पद से उन्हें हटा दिया गया था. वर्ष 2020 से 2022 के बीच का है मामला यह घोटाला 2020 से 2022 के बीच सामने आया था, जब सीजीपीएससी की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और साक्षात्कार प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं. अधिकारियों ने कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों और परिचितों को फायदा पहुंचाने के लिए योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी की. परिणामस्वरूप, डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी जैसे प्रतिष्ठित पदों पर चयनित होने वाले कई नाम सवालों के घेरे में आ गए. इस प्रक्रिया ने न केवल भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, बल्कि राज्य की प्रशासनिक पारदर्शिता को भी चुनौती दी. इस दिशा में जुलाई 2023 में कार्रवाई शुरू हुईं, जब छत्तीसगढ़ सरकार ने 2020-22 की परीक्षाओं में पक्षपात के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंप दी. सीबीआई की जांच के अनुसार, पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने नियमों में हेरफेर कर अपने परिजनों को लाभ पहुंचाया. उदाहरण के तौर पर, भतीजे के चयन को सुनिश्चित करने हेतु ‘रिश्तेदार’ शब्द को ‘परिवार’ में बदल दिया गया. इसी तरह, प्रश्न पत्रों का लीकेज कर परीक्षा पास करवाने के आरोप भी लगे हैं. आयोग के तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव, आरती वासनिक और ललित गणवीर जैसे अधिकारियों पर भी पद के दुरुपयोग का इल्जाम है. सभी आरोपी फिलहाल रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं. गिरफ्तारियों की फेहरिस्त लंबी है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने टामन सिंह सोनवानी के अलावा बजरंग पावर इस्पात कंपनी के निदेशक श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल, बहू भूमिका कटियार, उप नियंत्रक ललित गणवीर, निशा कोसले, दीपा आदिल, सुमित ध्रुव समेत कई अन्य को हिरासत में लिया था, इनमें से कई लोग जमानत पर रिहा भी हो चुके हैं.

हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत : राज्यपाल पटेल

हिन्दी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा से युवा प्रेरणा लें : राज्यपाल पटेल सप्रे संग्रहालय में राज्यपाल पटेल की जीवनी का हुआ लोकार्पण राज्यपाल ने पोस्टर प्रदर्शनी : "पुरखों को प्रणाम" का किया अवलोकन भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता का प्रारंभिक काल अत्यंत चुनौती पूर्ण था। कर्मठ पत्रकारों ने ब्रिटिश हुकूमत की अनेक कठिनाईयों के बावजूद पत्रकारिता के आदर्शों और शुचिता को बनाए रखा। हिन्दी पत्रकारिता की इसी गौरवशाली परंपरा से युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए। राज्यपाल पटेल बुधवार को "हिन्दी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी महोत्सव, पुरखों को प्रणाम : पोस्टर प्रदर्शनी" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान द्वारा किया गया है। राज्यपाल ने महान पूर्वजों के स्मरण की अनुकरणीय पहल के लिए संस्थान को बधाई और साधुवाद दिया। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि ऐतिहासिक हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं और युग निर्माता संपादकों की पोस्टर प्रदर्शनी, पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक ले जाने का प्रेरक प्रयास है। प्रदर्शनी का आयोजन, राष्ट्र धर्म और जन सेवा के लिए जीवन समर्पित करने वाले युग निर्माता संपादकों के त्याग और समर्पण को सजीव कर दर्शक का मन उन सभी महान विभूतियों की साधना और समर्पण के प्रति आदर भाव से भर देता है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि पत्रकारिता कोई साधारण व्यवसाय नहीं, यह समाज के प्रति उत्तरदायित्व, सत्य के प्रति निष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। गौरव की बात है कि हिन्दी पत्रकारिता ने अपने आरंभ से ही समाचार प्रसार की सीमाओं से आगे बढ़कर कार्य किया। समाज के दिशा दर्शन, जनमत को सशक्त बनाने तथा राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का सशक्त प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के कठिन दौर में भी हिन्दी पत्रकारिता ने जन जागरण, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करने में कारगर भूमिका निभाई है। यही कारण है कि हिन्दी पत्रकारिता का योगदान केवल स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं रहा उसने विशाल पाठक वर्ग तैयार कर ज्ञान का प्रसार भी है। हिन्दी पत्रकारिता को डिजिटल माध्यमों और युवाओं से जोड़ना जरूरी राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता आज भी हमारे लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने, नागरिक चेतना जगाने और राष्ट्र निर्माण प्रयासों में प्रभावी भूमिका निभा रही है। विज्ञान और तकनीक के इस दौर में हिन्दी पत्रकारिता को वीडियो, पॉडकास्ट, वेबसाइट और मोबाइल मंचों के माध्यम से युवा पीढ़ी से जोड़ना आवश्यक है। पत्रकारों का आह्वान किया कि युवाओं को पत्रकारिता की विश्वसनीयता, सत्य निष्ठा, निष्पक्षता के मूल्यों की प्रेरणा दें। उनमें नवाचार, कौशल विकास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भाव और भावनाएं विकसित करें। अपनी लेखनी से सामाजिक सरोकारों और वंचितों के प्रति संवेदनशीलता को मजबूत बनाए। राज्यपाल ने जीवनी के लोकार्पण के लिए माना आभार कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल के जीवन पर आधारित पुस्तक "पीर पराई जाने रे" का लोकार्पण किया गया। पुस्तक का लेखन लोकभवन की कंट्रोलर श्रीमती शिल्पी दिवाकर और मुद्रण-प्रकाशन माधवराव सप्रे संग्रहालय द्वारा किया गया है। राज्यपाल पटेल ने जीवनी लेखन, प्रकाशन से संबंधित सभी लोगों का आभार माना।    पत्रकारिता का इतिहास अत्यंत प्राचीन : महापौर श्रीमती राय महापौर श्रीमती मालती राय ने कहा कि भारत में पत्रकारिता का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। हमारी ज्ञान परंपरा में भी देखा जा सकता है। उन्होंने राज्यपाल पटेल के जन कल्याण प्रयासों में सक्रियता, सहयोग और संवेदनशीलता की सराहना की। वरिष्ठ पत्रकार और संपादक महेश श्रीवास्तव ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, व्यावसायिकता आदि की चुनौतियों के संदर्भ में विचार व्यक्त किए। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने कहा कि देश में पत्रकारिता की समृद्ध संस्कृति है। इसकी झलक पौराणिक ग्रंथों के संदर्भ से लेकर आधुनिक विकास यात्रा मिलती है। महाभारत के पात्र संजय को आधुनिक लाइव प्रसारण का अग्रदूत माना जा सकता है, क्योंकि वे धृतराष्ट्र को युद्ध का प्रत्यक्ष वर्णन सुनाते थे। नारद ऋषि ने लोक-कल्याण के लिए सूचनाओं का आदान-प्रदान किया, उसी परंपरा को आज पत्रकार आगे बढ़ा रहे हैं। राज्यपाल पटेल का माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान के संस्थापक विजयदत्त श्रीधर ने पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल को हिन्दी भवन द्वारा पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित विशेषांक भेंट किया गया। स्वागत उद्बोधन विजयदत्त श्रीधर ने दिया। आभार प्रदर्शन डॉ. मंगला ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में लोकभवन के अधिकारी, जनसंपर्क विभाग के सेवा निवृत्त अपर संचालक सुरेश गुप्ता, हिन्दी पत्रकारिता से जुड़े विद्वान, पत्रकार और साहित्य प्रेमी मौजूद थे।  

मछुआरों के लिए नई पहल, मुख्यमंत्री साय ने वितरित की आधुनिक उपकरण सामग्री

कोंडागांव/रायपुर. सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सोमवार को कोंडागांव जिले के ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा में आयोजित समाधान शिविर में शामिल हुए। इस अवसर पर मत्स्य पालन विभाग द्वारा जिले के मत्स्य पालकों एवं मत्स्य व्यवसाय से जुड़े हितग्राहियों को आजीविका संवर्धन के लिए विभिन्न आधुनिक उपकरण एवं सामग्री प्रदान की गई।  मुख्यमंत्री साय ने ग्राम मालाकोट के कमल सिंह नेताम एवं ग्राम जोबा के नरेंद्र कश्यप को मोटर साइकिल और आइस बॉक्स प्रदान किए। इन संसाधनों के माध्यम से अब दोनों हितग्राही अपनी मछलियों को सुरक्षित तरीके से दूरस्थ बाजारों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उनके व्यवसाय को नई गति मिलेगी। हितग्राहियों ने बताया कि पहले मछलियों के परिवहन और संरक्षण में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। आइस बॉक्स उपलब्ध होने से अब मछलियों की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी और उन्हें बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। वहीं मोटर साइकिल मिलने से परिवहन आसान होने के साथ-साथ समय और लागत की भी बचत होगी। आधुनिक जाल से बढ़ेगा उत्पादन कार्यक्रम में ग्राम बड़ेकनेरा के ललित बघेल एवं रामलाल नेताम को मछली पकड़ने के लिए आधुनिक जाल वितरित किए गए। हितग्राहियों ने बताया कि नए जाल मिलने से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी तथा व्यवसाय को और अधिक व्यवस्थित एवं लाभकारी बनाया जा सकेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में पहल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक व्यवसायों को आधुनिक संसाधनों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। मत्स्य पालन आज ग्रामीण क्षेत्रों में आय का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रहा है और सरकार इस क्षेत्र से जुड़े हितग्राहियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आय और जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं मत्स्य पालन विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन से प्राप्त यह सहयोग उनके व्यवसाय के विस्तार और आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक संसाधनों की मदद से वे अपने मत्स्य व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकेंगे।

चुनाव से पहले यूपी में बदलाव: मंत्रियों को नए जिलों का प्रभार, संगठन मजबूत करने की तैयारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में महत्वपूर्ण फेरबदल किए हैं। हाल ही में कैबिनेट में शामिल किए गए नए मंत्रियों को भी अहम जिम्मेदारी दी गई है। कई वरिष्ठ मंत्रियों के जिलों के प्रभार भी बदले हैं। वहीं कुछ नए चेहरों को भी महत्वपूर्ण जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मिली जानकारी के अनुसार जयवीर सिंह, बेबी रानी मौर्य सहित कई मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में बदलाव किया गया है। इन बदलावों को 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रशासन और संगठन की कमान और मजबूत बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। योगी सरकार के वरिष्ठ मंत्री भूपेंद्र चौधरी को आगरा के साथ कासगंज की भी जिम्मेदारी दी गई है। हाल में योगी कैबिनेट में शामिल हुए मनोज पांडेय को सीतापुर का प्रभार मिला है। इसके साथ ही अजीत पाल को फतेहपुर, समेंद्र तोमर को मुजफ्फरनगर, हंसराज विश्वकर्मा को सोनभद्र और सुरेन्द्र दलेर को बुलंदशहर जिले का प्रभारी बनाया गया है। किसे मिला है कौन सा जिला योगी सरकार के कैबिनेट मंत्रियों में सूर्य प्रताप शाही को अयोध्या और बस्ती, सुरेश कुमार खन्ना को वाराणसी और लखनऊ, स्वतंत्र देव सिंह को प्रयागराज और गोरखपुर, बेबी रानी मौर्य को इटावा और हाथरस, लक्ष्मी नारायण चौधरी को अलीगढ़ और फिरोजाबाद, जयवीर सिंह को झांसी और फर्रुखाबाद, धर्मपाल सिंह को गाज़ियाबाद और रामपुर, नन्द गोपाल गुप्ता "नन्दी" को मिर्जापुर और चित्रकूट, अनिल राजभर को आजमगढ़ और सिद्धार्थनगर, राकेश सचान को रायबरेली और कन्नौज, अरविन्द कुमार शर्मा को जौनपुर और भदोही, योगेन्द्र उपाध्याय को कानपुर नगर, आशीष पटेल को गोंडा, संजय निषाद को कानपुर देहात, ओम प्रकाश राजभर को अम्बेडकरनगर, दारा सिंह चौहान को कुशीनगर और श्रावस्ती, सुनील कुमार शर्मा को सहारनपुर, अनिल कुमार को मुरादाबाद का प्रभारी बनाया गया है। वहीं राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) में से नितिन अग्रवाल को लखीमपुर खीरी, कपिल देव अग्रवाल को बिजनौर, रवीन्द्र जायसवाल को गाजीपुर, सन्दीप सिंह को मथुरा, गुलाब देवी को अमरोहा, गिरीश चन्द्र यादव को सुल्तानपुर, धर्मवीर प्रजापति को मैनपुरी, असीम अरूण को हरदोई और मेरठ, जे.पी.एस. राठौर को संभल और बरेली, दयाशंकर सिंह को देवरिया और मऊ, नरेन्द्र कुमार कश्यप को शाहजहांपुर, दिनेश प्रताप सिंह को बांदा और बहराइच, अरुण कुमार सक्सेना को बदायूं, दयाशंकर मिश्र "दयालु" को बलिया और महराजगंज का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। वहीं राज्य मंत्री में मयंकेश्वर शरण सिंह को प्रतापगढ़, दिनेश खटीक को शामली, संजीव गोंड को चंदौली, बलदेव सिंह ओलख को पीलीभीत, जसवन्त सिंह सैनी को बागपत, रामकेश निषाद को हमीरपुर, मनोहर लाल मन्नू कोरी को महोबा, संजय सिंह गंगवार को जालौन, बृजेश सिंह को गौतमबुद्धनगर, के.पी. मलिक को हापुड़, सुरेश राही को बाराबंकी, प्रतिभा शुक्ला को अमेठी, राकेश राठौर को औरैया, रजनी तिवारी को उन्नाव, सतीश चन्द्र शर्मा को बलरामपुर, दानिश आजाद अंसारी को ललितपुर, विजय लक्ष्मी गौतम को संतकबीरनगर, कृष्णा पासवान को कौशाम्बी और कैलाश सिंह राजपूत को एटा जिले का प्रभार सौंपा गया है।

दिल्ली में दर्दनाक हादसा: होटल में आग से मचा कोहराम, जांच के आदेश

नई दिल्ली  दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में मंगलवार सुबह एक होटल में भीषण आग लग गई। इस घटना में अब तक 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में कई विदेशी नागरिक भी हैं। घायलों का इलाज आसपास के अस्पतालों में चल रहा है। आग लगने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। स्थानीय लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। देखते ही देखते आग की लपटों ने कई दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया और पूरे इलाके में धुएं का गुबार छा गया। मौके पर पहुंची दमकल की कई गाड़ियां घंटों तक आग पर काबू पाने में जुटीं, जबकि पुलिस ने इलाके को घेरकर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस भयावह घटना ने इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। धुएं के गुबार और चीख-पुकार से दहला इलाका प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग लगते ही इमारत से काले धुएं के घने गुबार उठने लगे। रेस्टोरेंट और आसपास मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। मौके पर चीख-पुकार का माहौल बन गया, जबकि कई लोग इमारत के भीतर फंसे लोगों को बचाने की कोशिश करते दिखाई दिए। पूरे इलाके को सुरक्षा कारणों से घेर लिया गया और राहत-बचाव अभियान शुरू किया गया। सूचना मिलते ही हरकत में आया प्रशासन दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) को सुबह 9:45 बजे आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। मालवीय नगर के एसडीएम जितेंद्र कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही बचाव दल की टीम को एक्टिव कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि इमारत के निचले हिस्से में होटल/रेस्टोरेंट चल रहा था और प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग वहीं से शुरू हुई। आग के कारणों की जांच की जा रही है। बिजली सप्लाई बंद कर आग पर पाया गया काबू राहत कार्य के दौरान बिजली विभाग ने तत्काल इलाके की बिजली सप्लाई बंद कर दी, जिससे आग को फैलने से रोकने में मदद मिली। दमकल कर्मियों और अन्य एजेंसियों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। प्रशासन ने घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया है, जहां उनका उपचार जारी है। अधिकारियों के अनुसार कुछ लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की होगी जांच मालवीय नगर के विधायक सतीश उपाध्याय ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि प्रशासन और सरकार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी और यह भी देखा जाएगा कि रेस्टोरेंट या होटल निर्धारित नियमों और लाइसेंस शर्तों के तहत संचालित हो रहा था या नहीं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

रेप पीड़िता की 31 हफ्ते से अधिक की प्रेग्नेंसी पर हाईकोर्ट सख्त, भ्रूण की धड़कन रोकने की अनुमति नहीं

जबलपुर  हाईकोर्ट जस्टिस विवेक जैन ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था 31 सप्ताह से अधिक होने के कारण गर्भपात की अनुमति देने से इंकार कर दिया। बता दें कि नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात की अनुमति के लिए मंडला जिला न्यायालय द्वारा भेजे गए प्रकरण की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में हाईकोर्ट कर रहा था। पीड़िता की उम्र 15 साल 10 माह है और मेडिकल रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद एकलपीठ ने पाया कि 27 अप्रैल 2026 की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता की गर्भावस्था 26 हफ़्ते और 5 दिन थी। मेडिकल जांच को हुए 32 दिनों से अधिक का समय हो गया है। वर्तमान में उसकी गर्भावस्था 31 सप्ताह से अधिक है। उसका हीमोग्लोबिन 7.5 है। मेडिकल बोर्ड की राय के अनुसार भ्रूण जीवित है और यह एक व्यवहार्य गर्भावस्था है। इस चरण में गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करना संभव नहीं है। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता भी नहीं चाहती थी कि यह न्यायालय ऐसा कोई निर्देश जारी करे। सुनवाई के दौरान उसने न्यायालय को इस बारे में सूचित किया था। दिल की धड़कन रोकने का निर्देश न होने की स्थिति में जीवित भ्रूण को जीवन भर शारीरिक और मानसिक विकलांगता का गंभीर खतरा बना रहेगा। मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टें अपने आप में सब कुछ स्पष्ट कर देती हैं। बच्चे का जन्म जीवित अवस्था में होता है, तो राज्य उस बच्चे की पूरी देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। 

RIMS में 75 से अधिक कर्मियों की भर्ती पर उठे सवाल, एसीबी जांच की मांग से मचा हड़कंप

 रांची  राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत समानता एजेंसी द्वारा बहाल किए गए करीब 75 से अधिक कर्मियों से कथित अवैध वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में रिम्स निदेशक को एक लिखित शिकायत सौंपकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से विभिन्न पदों पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूली गई है और यह प्रक्रिया अब भी जारी है। यह शिकायत शासी परिषद के सदस्य संजय सेठ के प्रतिनिधि ने शिकायत कर खुलासा किया है। मालूम हो कि इससे पहले भी बुंडू ट्रामा सेंटर में आउटसोर्स के माध्यम से बहाली में पैसे लेने का मामला आया था जिस पर कानूनी कार्रवाई चल रही है और और एक कर्मचारी अजय सेठ को भी हटाया गया है शिकायत क बाद निदेशक डा. राजकुमार ने जांच कमेटी गठित किया है। उधर समानता एजेंसी की और से इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। प्राप्त शिकायत के अनुसार रिम्स में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत मानव बल उपलब्ध कराने के लिए एम-एस समंता सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी को नर्सिंग स्टाफ, कंप्यूटर आपरेटर, लिफ्ट अपरेटर, मल्टी टास्किंग स्टाफ (वार्ड बाय), लैब टेक्नीशियन, पैरामेडिकल स्टाफ समेत अन्य पदों पर मानव बल उपलब्ध कराने का कार्य सौंपा गया है। एजेंसी को करीब 1000 मानव बल नियुक्त करना है, लेकिन अभी भी कई पद खाली रखे गए हैं। नियुक्ति के बदले लाखों रुपये लेने का आरोप शिकायत पत्र में दावा किया गया है कि चयनित अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की राशि ली गई। आरोप है कि यह रकम संबंधित रिक्त पदों पर नियुक्ति सुनिश्चित कराने के एवज में वसूली गई। शिकायतकर्ता ने कहा है कि कई युवाओं ने रोजगार पाने की उम्मीद में जमीन, गहने तक बेच दिए या कर्ज लेकर राशि का भुगतान किया। पत्र में कहा गया है कि बेरोजगारी और सीमित रोजगार अवसरों का लाभ उठाकर युवाओं का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। आरोप है कि आउटसोर्स व्यवस्था में मानव बल रखने के नाम पर एक संगठित रैकेट काम कर रहा है, जिसके माध्यम से करोड़ों रुपये की अवैध उगाही की जा रही है। अधिकारियों को जानकारी होने का भी आरोप इस कथित वसूली की जानकारी आउटसोर्स व्यवस्था से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों को है। दावा किया गया है कि इस विषय की जानकारी मौखिक रूप से संस्थान स्तर पर पहले भी दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मामले की सूचना रिम्स के तत्कालीन और वर्तमान प्रशासनिक पदाधिकारियों तक पहुंचाई गई थी। इसके बावजूद कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो नियुक्तियों की पारदर्शिता और संस्थान की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होंगे। बताया जा रहा है कि अगर प्रबंधन सही से जांच करती है और सभी कर्मियों के रोजगार की सुरक्षा का वादा करती है तो सभी ऐसे पीड़ितों का नाम सामने लाया जाएगा। किन-किन पदों का किया गया उल्लेख शिकायत में जिन पदों पर कथित रूप से आउटसोर्सिंग व्यवस्था के माध्यम से मानव बल रखने और अवैध वसूली का आरोप लगाया गया है, उनमें प्रमुख रूप से :     नर्सिंग स्टाफ     कंप्यूटर अपरेटर     वार्ड बाय     मल्टी टास्किंग स्टाफ     लिफ्ट आपरेटर     लैब टेक्नीशियन     पैरामेडिकल स्टाफ     अन्य सहयोगी कर्मचारी शामिल हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन पदों के अलावा भी अन्य श्रेणियों में आउटसोर्स कर्मियों की तैनाती की गई है, जिसकी जांच आवश्यक है। एसीबी जांच की मांग शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), झारखंड से कराई जाए। नियुक्ति प्रक्रिया, चयन सूची, भुगतान विवरण, एजेंसी और अभ्यर्थियों के बीच हुए लेन-देन की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। यह भी मांग की है कि जिन अभ्यर्थियों से कथित रूप से राशि ली गई है, उन्हें राहत प्रदान की जाए तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र विकसित किया जाए। स्वास्थ्य संस्थानों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर फिर उठे सवाल यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सरकारी अस्पतालों में आउटसोर्स व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि नियुक्ति के बदले पैसे लेने जैसे आरोप सही साबित होते हैं तो इसका सीधा असर सेवा की गुणवत्ता पर पड़ता है। योग्यता के बजाय पैसे के आधार पर चयन होने की स्थिति में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आउटसोर्स एजेंसियों के चयन, नियुक्ति प्रक्रिया, अभ्यर्थियों की मेरिट सूची और कार्य आवंटन की नियमित आडिट व्यवस्था होनी चाहिए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और रोजगार के अवसरों में निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। अब निगाहें रिम्स प्रशासन पर शिकायत पत्र की प्रतिलिपि स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा शासी परिषद से जुड़े पदाधिकारियों को भी भेजी गई है। ऐसे में अब सबकी निगाहें रिम्स प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर कराई जाती है और मामले में क्या कार्रवाई होती है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह केवल एक संस्थान का मामला नहीं रहेगा, बल्कि

मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य समय-सीमा में पूरा करें : सचिव राज्य निर्चाचन आयोग

मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य समय-सीमा में पूरा करें : सचिव राज्य निर्चाचन आयोग फोटोयुक्त मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 18 जून को होगा भोपाल  मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य समय-सीमा में पूरा करें। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग दीपक सिंह ने यह बात पंचायत एवं नगरीय निकायों की फोटोयुक्त मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य की समीक्षा के दौरान कही। सिंह ने जिलेवार लंबित दावे-आपत्तियों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पुनरीक्षण कार्य में पूरी पारदर्शिता रहनी चाहिए। सिंह ने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के संबंध में जो भी कार्यवाही करें, उसकी जानकारी स्टेरिंग कमेटी की बैठक के माध्यम से जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में जरूर लायें। उन्होंने वर्किंग और नानवर्किंग ईव्हीएम की जानकारी देने के निर्देश भी दिये। उन्होंने कहा कि अंतिम मतदाता सूची को नियत समय पर जिले की वेबसाइट पर अपलोड करें। बैठक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग शहडोल से वीडियो कांफ्रेंसिंग में शामिल हुए। इस दौरान उप सचिव राज्य निर्वाचन आयोग मनोज मालवीय, श्रीमती संजू कुमारी सहित अन्य अ‍धिकारी उपस्थित थे।  

मेहकप्रीत कौर की सफलता से बढ़ा उत्साह, NDA 2026 में लड़कियों के लिए क्या हैं नियम और मौके

 रूपनगर पंजाब के रूपनगर (रोपड़) जिले के पपराली गांव की मेहकप्रीत कौर ने एयर फोर्स अकादमी (AFA) मेरिट लिस्ट में ऑल इंडिया रैंक (AIR)-1 हासिल कर न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि भारतीय रक्षा सेवाओं में महिलाओं के लिए सीटों की संख्या अब भी बेहद सीमित है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल करना एक असाधारण उपलब्धि माना जा रहा है। क्या है NDA और क्यों है इतना महत्वपूर्ण? नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA), पुणे के खड़कवासला में स्थित दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। यहां भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अधिकारी तैयार किए जाते हैं। एनडीए में 12वीं के बाद प्रवेश लिया जा सकता है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) साल में दो बार इसकी परीक्षा आयोजित करता है। परीक्षा में गणित और जनरल एबिलिटी टेस्ट (GAT) के दो पेपर होते हैं। कुल 1800 अंकों में से 900 अंक लिखित परीक्षा और 900 अंक एसएसबी (SSB) इंटरव्यू के लिए निर्धारित हैं। लिखित परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को पांच दिवसीय एसएसबी इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है, जिसमें नेतृत्व क्षमता, मानसिक कौशल, निर्णय लेने की क्षमता और शारीरिक फिटनेस का आकलन किया जाता है। वायुसेना में जाने के इच्छुक उम्मीदवारों को इसके अलावा कम्प्यूटरीकृत पायलट चयन प्रणाली (CPSS) परीक्षा भी पास करनी होती है, जिसे जीवन में केवल एक बार दिया जा सकता है। महिलाओं के लिए सीटें अब भी सीमित साल 2021 तक महिलाओं को एनडीए परीक्षा के माध्यम से प्रवेश की अनुमति नहीं थी। अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए महिलाओं को भी एनडीए परीक्षा में शामिल होने का अधिकार दिया। अदालत ने महिलाओं को बाहर रखने की नीति को लैंगिक भेदभावपूर्ण बताया था। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने महिलाओं के लिए सीमित सीटें निर्धारित कीं। शुरुआती चरण में सेना में 10, नौसेना में 3 और वायुसेना फ्लाइंग ब्रांच में केवल 2 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई थीं। हालांकि समय के साथ इनकी संख्या बढ़ी है, लेकिन कुल सीटों में महिलाओं की हिस्सेदारी अब भी बहुत कम है। यही वजह है कि एयर फोर्स अकादमी मेरिट लिस्ट में AIR-1 हासिल करना बेहद बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। क्या है माई भागो AFPI? माई भागो आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट (AFPI) पंजाब सरकार की एक अनूठी पहल है, जिसे विशेष रूप से लड़कियों को रक्षा सेवाओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। संस्थान का NDA प्रिपरेटरी विंग 2023 में शुरू किया गया था और यह देश का पहला ऐसा संस्थान है जो केवल लड़कियों को एनडीए प्रवेश के लिए प्रशिक्षण देता है। यहां प्रवेश के लिए उम्मीदवार का पंजाब का निवासी होना और कम से कम 10वीं पास होना जरूरी है। 11वीं में पढ़ रही छात्राएं भी आयु मानदंड पूरा करने पर आवेदन कर सकती हैं। प्रशिक्षण, हॉस्टल और भोजन का पूरा खर्च पंजाब सरकार वहन करती है। संस्थान में अत्याधुनिक साइबर लैब, इंडोर शूटिंग रेंज, फिटनेस सेंटर और फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के नाम पर समर्पित विशेष हॉस्टल भी बनाया गया है। चयन के बाद क्या होता है? एनडीए में चयनित उम्मीदवार तीन वर्ष तक खड़कवासला (पुणे) या भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला (केरल) में सैन्य और शैक्षणिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। इसके बाद उन्हें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से स्नातक की डिग्री प्रदान की जाती है। फिर सेना के उम्मीदवार देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), नौसेना के उम्मीदवार एझिमाला स्थित भारतीय नौसेना अकादमी और वायुसेना के उम्मीदवार हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को 56,100 रुपये प्रतिमाह का स्टाइपेंड भी मिलता है। मेहकप्रीत और कोमलप्रीत की सफलता बनी प्रेरणा एयर फोर्स अकादमी मेरिट लिस्ट में AIR-1 हासिल करने वाली मेहकप्रीत कौर अब हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी में प्रशिक्षण लेंगी। वहीं NDA मेरिट में AIR-18 हासिल करने वाली कोमलप्रीत कौर खड़कवासला में तीन वर्षों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी। इन दोनों छात्राओं की सफलता ने साबित कर दिया है कि यदि अवसर और सही प्रशिक्षण मिले तो पंजाब के गांवों की बेटियां भी राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च स्थान हासिल कर सकती हैं। यह उपलब्धि न केवल महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है, बल्कि रक्षा सेवाओं में लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।