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एमपी ट्रांसको ने मूंदी एक्स्ट्रा हाई टेंशन सब स्टेशन में ऊजीकृत किया 50 एमवीए क्षमता का अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर

भोपाल  मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने 132 केवी सबस्टेशन मूंदी (खंडवा) में 50 एमवीए क्षमता का अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊजीकृत किया है। इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से मूंदी सब स्टेशन की क्षमता बढ़कर 90 एमवीए की हो गई है जिससे जहाँ सबस्टेशन में बढ़ते लोड का उचित प्रबंधन किया जा सकेगा, वहीं मूंदी सबस्टेशन में दूसरा ट्रांसफार्मर लगने से निमाड़ अंचल के इस क्षेत्र के ट्रांसमिशन नेटवर्क को सुदृढ़ता, फ्लेक्सेविलिटी और विश्वसनीयता प्रदान हुई है। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने कहा कि 132 के वी सबस्टेशन मूंदी में वर्तमान और भविष्य में बढते लोड को देखते हुए 40 एमवीए क्षमता के अतिरिक्त 50 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत किया गया है। इस क्षमता वृद्धि से मूंदी सबस्टेशन से जुड़े हजारों घरेलू, कृषि विद्युत उपभोक्ताओं को सीधा लाभ होगा अब उन्हें और अधिक गुणवत्ता की विद्युत आपूर्ति उपलब्ध रहेगी। एमपी ट्रांसको खंडवा के अतिरिक्त मुख्य अभियंता  सुरेंद्र सोलंकी ने बताया कि 132 के वी मूंदी सबस्टेशन में इस अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर को स्थापित कर ऊर्जीकृत करने से खंडवा जिले की ट्रांसफार्मेसन कैपेसिटी में बढोत्तरी 2342 एम वी ए की हो गई है, वही मूंदी सब स्टेशन की ट्रांसफार्मेसन कैपेसिटी बढ़कर 90 एमवीए की हो गई है।  सोलंकी ने बताया कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी खंडवा जिले में अपने 7 सब स्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण करती है जिनमें 400 केवी सबस्टेशन छैगांव माखन, 220 केवी सबस्टेशन छनैरा, तथा 132 केवी के खंडवा, मूंदी, सिंगोट, छैगांव माखन एवं पंधाना सबस्टेशन शामिल है।400 केवी सबस्टेशन की क्षमता 630, 220 केवी की 1000 तथा 132 केवी सब स्टेशनों की क्षमता 712 एम वी ए की है जिससे खंडवा जिले की कुल क्षमता 2342 एम वी ए की हो गई है। एमपी ट्रांसको की ट्रांसपोर्टेशन कैपेसिटी बढ़कर हुई 85448 एमवीए एमपी ट्रांसको प्रदेश में अपने 417 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज सब स्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण करती है जिसमें 400 केवी के 14 सब स्टेशन, 220 केवी के 88 सबस्टेशन एवं 132 केवी के 315 सबस्टेशन शामिल हैं। एमपी ट्रांसको के प्रदेश में कुल 1056 पावर ट्रांसफार्मर क्रियाशील है जिसमें 400 केवी के 41, 220 के वी वोल्टेज लेवल के 220 और 132 के वी के 795 ट्रांसफार्मर शामिल हैं। इस 50 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से एमपी ट्रांसको की कुल ट्रांसफारमेशन कैपेसिटी (पारेषण क्षमता) बढ़कर 85488 एमवीए की हो गई है।  

20 रुपये का सिक्का 5-6 रुपये में तैयार, एजेंटों को 15 रुपये तक में बेचता था गिरोह

सहारनपुर यूपी के सहारनपुर में पीएनबी बैंक की करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ रुपए के नकली नोटों की जांच के बीच ही नकली सिक्कों की फैक्ट्री ने खलबली मचाई हुई है। इसके सिंडिकेट की नींव दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखी गई थी। नकली सिक्कों के इस कारोबार में मुनाफे का बड़ा खेल सामने आया है। पुलिस पूछताछ के मुताबिक 20 रुपये का एक नकली सिक्का तैयार करने में करीब पांच से छह रुपये खर्च होते थे। तैयार सिक्के एजेंटों को 12 से 15 रुपये तक में बेचे जाते थे। कम लागत और अधिक अंकित मूल्य के कारण गिरोह ने बड़े पैमाने पर उत्पादन को कारोबार का आधार बनाया। छह मशीनों से रोजाना 10 से 12 हजार सिक्के तैयार किए जाने की बात सामने आई है। गिरोह के मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह और सहारनपुर निवासी हिमांशु उर्फ गुल्लू की मुलाकात तिहाड़ जेल में ही हुई थी। पुलिस का दावा है कि इसी मुलाकात ने सहारनपुर में नकली सिक्कों की फैक्ट्री खड़ी कर दी। सहारनपुर पुलिस के मुताबिक उपकार वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा था। उस समय उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। जेल में उसकी मुलाकात हिमांशु से हुई। दोनों जेल से बाहर आए तो संपर्क बना रहा। इसके बाद सहारनपुर में नकली सिक्कों के कारोबार की योजना तैयार हुई और धीरे-धीरे अन्य लोग भी इससे जुड़ते गए। अलग-अलग हिस्सों में बंटा था काम गिरोह ने काम को अलग-अलग हिस्सों में बांट रखा था। कोई मशीन और उत्पादन की जिम्मेदारी संभालता था तो कोई तैयार सिक्कों को एजेंटों तक पहुंचाता था। तीतरों क्षेत्र में मशीनें लगाकर बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया गया। पुलिस के अनुसार गिरोह में करीब आठ लोग सक्रिय थे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तिहाड़ में बनी इस कड़ी ने बाहर निकलने के बाद कितने लोगों को अपने साथ जोड़ा और नेटवर्क किन-किन शहरों तक पहुंचा। पुलिस को मिले सात रजिस्टर और आठ मोबाइल इस सवाल का जवाब तलाशने में अहम साबित हो सकते हैं। जांच एजेंसियां पुराने संपर्कों, एजेंटों और संभावित सहयोगियों की पहचान में जुटी हैं। नेपाल में भी फैक्ट्री लगाने की कोशिश पुलिस से बचने के लिए नेपाल में छिपे उपकार ने वहां भी नकली सिक्कों के निर्माण का ठिकाना खड़ा करने की कोशिश की थी। अब वर्षों बाद उसी नेटवर्क का उत्पादन केंद्र यूपी के सहारनपुर में तैयार किया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक उपकार वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के धंधे में सक्रिय है। पहले सुनार का काम करने वाले उपकार ने सिक्के बनाने की तकनीकी जानकारी को बाद में नकली करेंसी के इस कारोबार में इस्तेमाल किया। वर्ष 2017 में उसे हरियाणा के कोंडली से गिरफ्तार किया गया था। सहारनपुर में तैयार सिक्कों को खपाने के लिए भी नेटवर्क तैयार था। एजेंटों के जरिए माल शराब ठेकों, टोल प्लाजा और किराना दुकानों तक पहुंचाया जाना था। जांच में पंजाब से बिहार और पश्चिमी यूपी तक संपर्क सामने आए हैं। मधुबनी, भदोही और बदायूं के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस अब मोबाइल और रजिस्टरों के जरिए एजेंटों, मशीनों की व्यवस्था और सप्लाई चैन से जुड़े लोगों की कड़ियां जोड़ रही है। पंजाब से बिहार तक फैला नेटवर्क नकली सिक्कों के इस नेटवर्क की पहुंच कई राज्यों तक सामने आई है। मुख्य आरोपी उपकार लूथरा पंजाब का रहने वाला है। पुलिस जांच में पंजाब के साथ बिहार और उत्तर प्रदेश के मधुबनी, भदोही व बदायूं के नाम सामने आए हैं। पुराने संपर्कों और जेल में हुई मुलाकातों के बाद सहारनपुर में नेटवर्क खड़ा किया गया था।

केयर इकोनॉमी से यूपी में खुलेंगे रोजगार के नए द्वार, 12 विभाग मिलकर बनाएंगे रोडमैप

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और जरूरतमंदों की देखभाल को अब संगठित सेवा क्षेत्र से जोड़कर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे। योगी सरकार ने ‘केयर इकोनॉमी’ को रोजगार सृजन, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा का नया आधार बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी क्रम में सोमवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में समाज कल्याण विभाग की नोडल भूमिका में ‘सतत केयर इकोनॉमी का निर्माण देखभाल कार्य को पहचान, महिलाओं को सशक्तीकरण और समावेशी आजीविका के अवसर’ विषय पर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित हुई। राज्य केयर अर्थव्यवस्था रोडमैप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से केयर इकोनॉमी उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन और बुजुर्गों व वंचित वर्गों की सुरक्षा के लिए परिवर्तनकारी कदम साबित होगी। कुशल केयरगिवर्स तैयार करने, उनके प्रशिक्षण और प्रमाणन तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से प्रदेश में मजबूत, समावेशी और टिकाऊ केयर इकोसिस्टम तैयार किया जा सकता है। कार्यशाला व्यापक ‘राज्य केयर अर्थव्यवस्था रोडमैप’ तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बनेगी। 12 विभाग मिलकर तय करेंगे आगे की रणनीति कार्यशाला में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, श्रम, कौशल विकास और दिव्यांगजन सशक्तीकरण समेत 12 प्रमुख सरकारी विभागों ने भागीदारी की। इसका उद्देश्य अलग-अलग विभागों की योजनाओं और संसाधनों को एक साझा रणनीति से जोड़कर केयर सेक्टर को व्यवस्थित रूप देना है। इससे देखभाल के पारंपरिक और अनौपचारिक कार्य को भी आर्थिक गतिविधि के रूप में पहचान देने की दिशा में काम होगा। 4 प्रमुख स्तंभों पर हुआ मंथन कार्यशाला में केयर इकोनॉमी के चार प्रमुख स्तंभों पर विशेष चर्चा हुई। पहला, घरेलू और अनौपचारिक देखभाल कार्य का आर्थिक मूल्यांकन कर उसे पहचान और उचित मूल्य देना। दूसरा, महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करना। तीसरा, केयर वर्कफोर्स के लिए मानक प्रशिक्षण, प्रमाणन और टिकाऊ रोजगार की व्यवस्था करना। चौथा, सेवाओं की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए पीपीपी मॉडल, बीमा योजनाओं और सीएसआर फंड के उपयोग की संभावनाएं तलाशना। केयरगिवर्स को प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ने पर जोर समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने केयर इकोनॉमी को सामाजिक जरूरत के साथ-साथ रोजगार का उभरता हुआ क्षेत्र बताते हुए कहा कि प्रदेश में देखभाल सेवाओं को व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए विभागीय समन्वय जरूरी है। प्रशिक्षित और प्रमाणित केयरगिवर्स तैयार होने से जरूरतमंद परिवारों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलेंगी और युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए सम्मानजनक आजीविका के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ प्रशिक्षण, प्रमाणन और रोजगार की पूरी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में यूपी सिडको के चेयरमैन वाई.पी. सिंह, महिला एवं बाल विकास सचिव मनीषा त्रिघाटिया, अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के उपाध्यक्ष विश्वनाथ, प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव, समाज कल्याण निदेशक संजीव सिंह समेत वित्त, कौशल विकास, स्वास्थ्य और दिव्यांग कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

सड़कों की खुदाई बिना पटना में रुकेगा गंगा का प्रदूषण, 3 नए STP से होगा सीवेज का ट्रीटमेंट

पटना बिहार की राजधानी पटना में गंगा में सीधे गिर रहे सीवेज पर रोक लगाने के लिए अब सड़कों और घनी गलियों में बड़े पैमाने पर खोदाई की जरूरत नहीं होगी। दानापुर कैंट से मित्तन घाट तक गंगा में मिलने वाले 31 प्रमुख नालों को इंटरसेप्शन एंड डायवर्जन (आइएंडडी) तकनीक से जोड़ा जाएगा। नालों के पानी को गंगा में पहुंचने से पहले ही रोककर एसटीपी ले जाया जाएगा। वहां उपचार के बाद ही पानी को नदी में छोड़ा जाएगा। इस परियोजना के तहत तीन नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने का प्रस्ताव है। इनकी उपचार क्षमता 34.8 करोड़ लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) होगी। प्रस्तावित एसटीपी दीघा नहर, मंदिरी और मित्तन घाट में बनाए जाएंगे। बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) के अनुसार, परियोजना का काम मानसून के बाद शुरू होगा। 2028 की शुरुआत तक काम पूरा करने का लक्ष्य है। आइएंडडी तकनीक में नालों के अंतिम छोर पर विशेष इंटरसेप्शन स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इससे गंदा पानी गंगा में सीधे गिरने के बजाय वहीं रोक लिया जाएगा। इसके बाद डाइवर्जन चैनल के माध्यम से सीवेज को एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। इस व्यवस्था में शहर की सड़कों को खोदकर हर जगह नई सीवेज लाइन बिछाने की जरूरत कम होगी। परियोजना के तहत दीघा नहर, मंदिरी और मित्तन घाट के पास एसटीपी प्रस्तावित है। तीनों प्लांट में सीवेज के उपचार के लिए एसबीआर (सीक्वेंसिंग बैच रिएक्टर) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे नालों से आने वाले सीवेज का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जा सकेगा। सीवेज को नालों से एसटीपी तक पहुंचाने के लिए परियोजना में सात स्थानों दानापुर कैंट, दीघा घाट नाला, कुर्जी नाला, राजापुर नाला, मंदिरी नाला, अंटा घाट तथा मित्तन घाट पर इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आइपीएस) बनाने का भी प्रस्ताव है, जिसकी कुल क्षमता प्रतिदिन 40.89 करोड़ लीटर होगी। अलग-अलग इलाकों से आने वाले सीवेज को इन पंपिंग स्टेशनों पर एकत्र किया जाएगा। इसके बाद पंपिंग सिस्टम के माध्यम से उसे संबंधित एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। कुर्जी और राजापुर नाले की सफल टैपिंग कुर्जी और राजापुर नाले की टैपिंग सफल होने के बाद नई व्यवस्था की जा रही है। क्योंकि, इन दोनों नाले का गंदा पानी सीधे दीघा एसटीपी तक पहुंच रहा है। यहां रोजाना 4.50 करोड़ लीटर गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जा रहा है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य गंगा में सीधे गिरने वाले अनुपचारित सीवेज को रोकना है। 34.8 करोड़ लीटर प्रतिदिन की अतिरिक्त उपचार क्षमता तैयार होने से राजधानी में सीवेज शोधन की व्यवस्था मजबूत होगी। इससे गंगा में प्रदूषण का दबाव कम होने के साथ पानी की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। साथ ही, तेजी से बढ़ते राजधानी के लिए भविष्य में सीवेज प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था तैयार करने में भी मदद मिलेगी। प्रस्तावित सात इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन का विवरण जगह                   क्षमता (प्रतिदिन करोड़ लीटर में) दानापुर कैंट                   1.05 दीघा घाट नाला               8.15 कुर्जी नाला                      6.25 राजापुर नाला                  8.67 मंदिरी नाला                   13.69 अंटा घाट                        2.21 मित्तन घाट                      0.85 प्रस्तावित तीन एसटीपी का विवरण जगह         क्षमता (प्रतिदिन लीटर में)     लागत (करोड़ में) दीघा नहर     8.5 करोड़                           187.17 मंदिरी           24.5 करोड़                        616.55 मित्तन घाट     1.8 करोड़                           39.95 फायदे     गंगा में गंदा पानी जाने से रुकेगा, जलीय जीवों को मिलेगा लाभ।     नई सड़क और गलियों की बार-बार खुदाई से बचेगा शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर।     नई पाइपलाइन का बड़ा नेटवर्क बिछाने के बजाय टैपिंग से लागत घटेगी।     सीवेज का वैज्ञानिक उपचार होने से संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा कम होगा। एसटीपी की कुल क्षमता का 60.65 प्रतिशत ही उपयोग राजधानी में निकलने वाले गंदे पानी के शोधन के लिए बनाए गए आठ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कुल क्षमता 36.75 करोड़ लीटर प्रतिदिन है। वर्तमान में प्रतिदिन 22.29 करोड़ लीटर लीटर गंदे पानी का शोधन किया जा रहा है। एसटीपी की कुल क्षमता का करीब 60.65 प्रतिशत उपयोग हो रहा है। एसटीपी के माध्यम से शहर के विभिन्न इलाकों से निकलने वाले सीवेज को ट्रीट किया जाता है, ताकि बिना शोधन के गंदा पानी सीधे नदियों और जलस्रोतों में नहीं पहुंचे।  

युवाओं को नशे से बचाने के लिए योगी सरकार का सख्त संदेश-‘वीडियो सामने आते ही एक्शन’

लखनऊ युवाओं और नाबालिगों को नशे की चपेट में आने से बचाने के लिए योगी सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। सरकार की नीति केवल अवैध और जहरीली शराब पर अंकुश लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कम उम्र के बच्चों तक शराब की पहुंच रोकने पर भी विशेष जोर है। लखनऊ में नाबालिग को शराब बेचने से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही आबकारी विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर यह संदेश साफ कर दिया कि नियमों से खिलवाड़ किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं होगा। सोशल मीडिया एक्स और अन्य प्लेटफॉर्म पर वीडियो प्रसारित होने के बाद सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया और संबंधित के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला आबकारी अधिकारी, लखनऊ ने 11 सितंबर को वीडियो की जांच कराई। जांच में वीडियो विकासनगर थाना क्षेत्र के शुभौली स्थित एक कम्पोजिट दुकान के सेल्समैन की एक व्यक्ति से कहासुनी का पाया गया। वीडियो में सेल्समैन पर नाबालिग बच्चे को शराब बेचने की बात कही जा रही थी। तुरंत हटाया गया सेल्समैन, 30 हजार जुर्माना जांच के दौरान सेल्समैन का व्यवहार उचित नहीं पाए जाने पर उसे तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। इसके साथ ही संबंधित कम्पोजिट दुकान के खिलाफ नियमानुसार प्रशमन की कार्रवाई करते हुए 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। वीडियो सामने आने के बाद इतनी तेजी से हुई कार्रवाई ने साफ किया कि सरकार नाबालिगों तक नशे की पहुंच रोकने के मामले में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। यूपी बना देश के अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार मॉनिटरिंग और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा मामला दोबारा आने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और पारदर्शी नीतियों के चलते पिछले साढ़े चार वर्षों से अधिक समय से प्रदेश में अवैध या जहरीली शराब की बिक्री का कोई मामला सामने नहीं आया है। आबकारी विभाग देश के अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल बन चुका है और इस छवि को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

तेजप्रताप यादव को लगातार मिल रही धमकियां, केंद्र और बिहार सरकार से तत्काल सुरक्षा की मांग

पटना  लगातार मिल रही कथित धमकियों के बीच जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव ने अपनी सुरक्षा को लेकर केंद्र और बिहार सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। तेजप्रताप का दावा है कि पिछले कुछ दिनों से उनके मोबाइल पर बार-बार धमकी भरे फोन आ रहे हैं, जिससे उनकी जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। तेजप्रताप ने इस मामले को लेकर 9 सितंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बिहार के DGP और बिहार के होम सेक्रेटरी को पत्र भेजकर पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने सचिवालय थाना, पटना में FIR दर्ज कराने की भी बात कही है। धमकी भरे कॉल का दावा, सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता तेजप्रताप यादव के मुताबिक उन्हें लगातार फोन कॉल के जरिए धमकियां मिल रही हैं। उनका कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। उन्होंने केंद्र और बिहार सरकार से मामले को गंभीरता से लेने की अपील करते हुए अविलंब पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही धमकी देने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई की मांग भी की है। अमित शाह समेत तीन स्तरों पर पहुंचाया मामला तेजप्रताप ने मामले को सिर्फ बिहार सरकार तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ-साथ बिहार के पुलिस महानिदेशक और गृह विभाग के सचिव को भी पत्र भेजकर सुरक्षा की मांग की है।इससे साफ है कि तेजप्रताप इस मामले को गंभीर सुरक्षा मुद्दे के तौर पर उठा रहे हैं और केंद्र तथा राज्य—दोनों स्तरों पर कार्रवाई चाहते हैं FIR के बाद अब कार्रवाई पर नजर तेजप्रताप यादव ने बताया कि धमकियों के संबंध में सचिवालय थाना, पटना में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। अब इस मामले में पुलिस जांच और धमकी देने वालों की पहचान पर नजर रहेगी। तेजप्रताप की मांग है कि आरोपित व्यक्तियों की पहचान जल्द की जाए और उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए। “अविलंब पर्याप्त सुरक्षा दी जाए” अपने पत्र में तेजप्रताप ने केंद्र और बिहार सरकार से सुरक्षा व्यवस्था तत्काल मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों को देखते हुए उनकी सुरक्षा को लेकर कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई है कि दोनों सरकारें मामले का संज्ञान लेकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेंगी। अब सवाल-तेजप्रताप की सुरक्षा पर सरकार का क्या फैसला? FIR दर्ज होने और केंद्र तथा राज्य के शीर्ष अधिकारियों को पत्र भेजे जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल सरकार के अगले कदम को लेकर है। क्या तेजप्रताप की सुरक्षा बढ़ाई जाएगी और धमकी देने वालों तक पुलिस कितनी जल्दी पहुंचती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। फिलहाल तेजप्रताप ने पूरे मामले को लेकर सरकार से तत्काल सुरक्षा और सख्त कार्रवाई की मांग कर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर दबाव बढ़ा दिया है।

खेल बना काल! अशोकनगर में कुएं में समाए चार मासूम, एक ही परिवार के बच्चों की दर्दनाक मौत

अशोकनगर चंदेरी-थाना चंदेरी अंतर्गत ग्राम विक्रमपुर में सोमवार को एक हृदयविदारक हादसे में एक ही परिवार के चार सगे भाइयों की कुएं में डूबने से मौत हो गई। मृतकों में देव (9 वर्ष), त्रिदेव (7 वर्ष), महादेव (6 वर्ष) और प्रयांश (4 वर्ष) शामिल हैं। चारों बच्चे बलवीर कुशवाहा के पुत्र बताए गए हैं। 4 मासूम सगे भाइयों की मौत जानकारी के अनुसार चारों बच्चे सोमवार सुबह करीब 10 बजे खेलने के लिए घर से निकले थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण पिता मजदूरी करने के लिए सुबह ही काम पर चले गए थे। वहीं बच्चों की मां पिछले करीब तीन महीने से अपने मायके में रह रही है। ऐसे में घर पर बच्चों की देखरेख की स्थिति भी घटना के बाद चर्चा का विषय बनी हुई है। दोपहर करीब 1:30 बजे चारों बच्चों के शव खेत पर बने कच्चे कुएं में तैरते हुए मिले। सूचना मिलते ही ग्रामीणों की मदद से शवों को बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चंदेरी भेजा गया। शवों पर मिले रक्त के निशान, पोस्टमार्टम से खुलेगा राज घटना के बाद बच्चों के शवों से रक्त निकलने की बात सामने आई है। प्रारंभिक तौर पर जलीय जीवों, जैसे मछली अथवा केंकड़ों द्वारा शवों को नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हालांकि बच्चों की मौत के वास्तविक कारण और शरीर पर मौजूद चोट अथवा अन्य निशानों की स्थिति पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस जांच में इन बिंदुओं पर भी रहेगा फोकस चारों बच्चों की एक साथ कुएं में डूबने की घटना को लेकर पुलिस द्वारा घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। इसमें यह पता लगाया जाना महत्वपूर्ण होगा कि बच्चे कुएं तक कैसे पहुंचे, कुएं में गिरने की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं तथा क्या चारों एक साथ कुएं में गिरे या किसी बच्चे को बचाने के प्रयास में अन्य बच्चे भी हादसे का शिकार हुए। इसके अलावा कुएं की गहराई, सुरक्षा व्यवस्था, मुंडेर अथवा जाली की स्थिति, घटनास्थल का निरीक्षण, शवों पर मिले निशान तथा आसपास मौजूद लोगों के बयान भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर भी पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी। यह भी पढ़ें- सागर में जहरीली शराब ने 10 लोगों की छीनी आंखों की रोशनी, 100 से ज्यादा पीड़ितों में दिखे धुंधलापन के लक्षण तहसीलदार ने राहत राशि का दिया भरोसा घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। दिलीप दरोगा तहसीलदार चंदेरी द्वारा आरबीसी 6(4) के तहत नियमानुसार राहत राशि प्रदान किए जाने की बात कही गई है। चार बच्चों की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक और भावनात्मक संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन से पीड़ित परिवार को शीघ्र राहत उपलब्ध कराने की उम्मीद है। चार मासूम भाइयों की एक साथ मौत की खबर से विक्रमपुर गांव में शोक की लहर है। परिवार की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता और हरसंभव मदद उपलब्ध कराने की मांग की है।  

समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये पंजीयन 10 अक्टूबर तक

भोपाल  खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये किसान पंजीयन प्रक्रिया का निर्धारण कर दिया गया है। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। पंजीयन 15 सितम्बर से शुरू हो रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केन्द्र बनाये गये हैं। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा। सिकमी/बटाईदार/कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था ‌द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा। उपार्जित फसल के भुगतान हेतु बैंक खाता किसान द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान करने में किसी कारण से समस्या उत्पन्न होने पर किसान ‌द्वारा पंजीयन में उपलब्ध कराये गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकेगा। किसान पंजीयन के समय किसान को बैंक खाता नंबर और IFSC कोड की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। अक्रियाशील बैंक खाते, संयुक्त बैंक खाते एवं फिनो, एयरटेल, पेटीएम, बैंक खाते पंजीयन में मान्य नहीं होंगे। पंजीयन व्यवस्था में बेहतर सेवा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी होगा कि किसान अपने आधार नंबर से बैंक खाता और मोबाईल नंबर को लिंक कराकर उसे अपडेट रखें। सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए जिससे किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सके। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिये पंजीयन के दौरान ही 1 रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/जेआईटी पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा। आधार नंबर का वेरिफिकेशन पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा। किसानों को करें एसएमएस विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं। किसान पंजीयन की सभी प्रक्रियाएँ समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।  

मॉडल स्कूलों में शत-प्रतिशत नामांकन और बेहतर परीक्षा परिणाम पर सरकार का फोकस

जयपुर स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने सोमवार को शासन सचिवालय में स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल योजना सहित विभिन्न आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को अध्यापकों एवं विद्यार्थियो की उपस्थिति, विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, विद्यार्थियों के नामांकन,मानव संसाधन,आधारभूत सुविधाओं तथा निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव यादव ने प्रदेश के मॉडल स्कूलों में रिक्त पदों की स्थिति की समीक्षा करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने मॉडल स्कूलों के परीक्षा परिणामों में और सुधार के लिए विषयवार विश्लेषण एवं आवश्यक शैक्षणिक गतिविधियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने निर्माणाधीन भवनों में भूमि, बिजली, पानी एवं अन्य लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करते हुए कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए भवन निर्माण के साथ आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। एसीएस ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी), नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय, स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल छात्रावास, पीएम-जनमन एवं डीएजेजीयूए के अंतर्गत संचालित एवं निर्माणाधीन छात्रावासों की प्रगति की भी समीक्षा की। केजीबीवी में कुल 51 हजार 950 विद्यार्थियों की क्षमता के विरुद्ध 46 हजार 668 बालिकाएं नामांकित हैं। वहीं नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों सहित अन्य आवासीय संस्थानों में भी नामांकन की स्थिति की समीक्षा की गई। उन्होंने अधिकारियों को शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रयास करने के निर्देश दिए गए। बैठक में वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के तहत स्वीकृत किए गए आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों की प्रगति पर भी चर्चा हुई। नए आवासीय विद्यालयों/छात्रावासों के लिए कार्य स्वीकृत है, जिनमें से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होकर विद्यार्थी रह रहे हैं। छात्रावासों में वॉशिंग मशीन एवं स्वचालित रोटी मेकर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा केजीबीवी में थ्री-फेज विद्युत कनेक्शन से संबंधित कार्यों की भी समीक्षा की गई। विद्यालयों में आधुनिक सुविधाएं मॉडल स्कूलों में स्मार्ट एवं वर्चुअल कक्षाएं, 20 कम्प्यूटर वाले कम्प्यूटर लैब, सीसीटीवी कैमरे, छात्राओं के लिए सेनेटरी नैपकिन, डिस्पेंसरी एवं इन्सीनेरेटर सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य परीक्षण, मासिक अभिभावक-शिक्षक बैठक, स्काउट-गाइड, कला एवं शिल्प, विज्ञान मेले, गणित ओलंपियाड, योग ओलंपियाड, स्कूल बैंड एवं अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। प्रदेश के 27 शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े जिलों के 134 ब्लॉकों में 134 स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल संचालित हैं। इन विद्यालयों में कुल 57 हजार 565 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 28 हजार 957 बालक एवं 28 हजार 608 बालिकाएं हैं। विद्यालयों में बालिकाओं के लिए 55 प्रतिशत तथा बालकों के लिए 45 प्रतिशत सीटों का प्रावधान है। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत कुल 514 छात्रावास/आवासीय इकाइयां स्वीकृत हैं, जिनमें 422 संचालित हैं तथा 92 निर्माणाधीन अथवा लंबित हैं। केजीबीवी के 389 में से 377 संचालित हैं, जबकि 12 पर कार्य प्रगति पर है। स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूलों के 25 छात्रावासों में 22 संचालित हैं और 3 निर्माणाधीन हैं।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने परिवारजनों के साथ विधि-विधान से की गणपति की स्थापना और पूजा-अर्चना

रायपुर  गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर आज मुख्यमंत्री निवास में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में भगवान  गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अपने परिवारजनों के साथ पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाज से विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान  गणेश बुद्धि, और विवेक के प्रतीक हैं। किसी भी शुभ कार्य का प्रारंभ भगवान गणेश की आराधना से करने की हमारी प्राचीन परंपरा रही है। गणेशोत्सव हमारी आस्था का पर्व होने के साथ ही समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और एकजुटता को सुदृढ़ करने वाला उत्सव भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में तीज-त्योहारों और उत्सवों का विशेष महत्व है। हमारे पर्व हमें अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ परिवार और समाज को भी एक सूत्र में पिरोते हैं। गणेशोत्सव का उल्लास भी हमें सामूहिकता, सद्भाव और लोकमंगल की भावना से जोड़ता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के परिवारजन, मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. धीरेंद्र तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी  आलोक सिंह तथा मुख्यमंत्री निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।